घर की प्यासी बुर – Update 21 | Family Sex Story

घर की प्यासी बुर - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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Update – 21

शिप्रा- तू अभी तक तैयार नहि है, कॉलेज नहि जाना क्य…

सतीश- नहि मैं कॉलेज नहि जा रहा हूँ आज….

शिप्रा भी किचन मे जाकर माँ का हाथ बटाने लगती है और यहाँ मे अपने लंड को शांत करने मे लगा था…

तोड़ि देर मे में उठ कर अपने कमरे मे चल देता हूँ और फिर नाहा कर निचे आ जाता हु, इतनी देर में लंड भी शांत हो गया था…

निचे माँ और शिप्रा मेरा ही वेट कर रही थि, मे जाकर माँ की राईट साइड पर पड़ी कुरसी पर बैठ जाता हु, शिप्रा माँ के सामने बैठि थी और माँ मेरे लेफ्ट में….

मेरे जाते ही सब नाश्ता करने लगते है, मे नाश्ता करते हुए अपना लेफ्ट हैंड माँ की चुत पर कपडे के ऊपर से ही रख कर मसल देता हु… माँ एक दम से चिहुँक उठती है…

सोनाली : आअह्ह्ह्हह….

शिप्रा – क्या हुआ मोम…

मै भी अन्जान बनते हुये- क्या हुआ मोम…?

सोनाली : कुछ नहि वो चाय गरम थी और मैंने जल्दवाजी मे पिली जिससे जीभ जल गई…

सतीश- क्या माँ थोड़ा आराम से पियो ऐसी भी क्या जल्दबाजी है…

मों मेरी तरफ ग़ुस्से से आँखे तरेर कर देखति है… और मे उन्हें एक कमिनि स्माइल देता हु… माँ अपने लेफ्ट हैंड मेरे हैंड पर रख कर उसे अपनी चुत से हटाने की कोशिश करती है… पर मे हाथ नहि हटता और उनकी चुत पास रगडने लगता हु…. अब माँ भी कोशिश बंद करके मजा लेने लगती है…

सब लोग नाश्ता ख़त्म करते है माँ बर्तन उठा कर किचन मे रखने चल देती है और शिप्रा कॉलेज के लिए निकल जाती है…

माँ किचन से बैडरूम की तरफ चलि जाती है और मैं डोर लॉक करके उनके बैडरूम मे चला जाता हु, माँ की साड़ी बेड पर पड़ी थी जोकि उन्होंने पहननेके लिए निकाली थी और वो अपनी मैक्सी उतार रही थि, अब वो मेरे सामने केवल ब्रा और पेन्टी मे थी…

अब कपड़ो के नाम पर पीछे कमर पर उनकी ब्रा की स्ट्राप थी और निचे उनकी पेन्टी जोकि बहोत छोटी थी और उनके विशाल चूतडों को छुपाने मे असमर्थ थी… मे पीछे से जाकर उन्हें अपनी बाँहों मे भर लेता हूँ और अपने हाथ उनके बॉब्स पर लेजाकर उन्हें अपने हाथो मे भर कर मसलने लगता हूँ और निचे से उनके चूतडो पर अपना लंड टीका कर धीरे धीरे घस्से मारने लगता हु 

मों एकदम हुए इस हमले से कसमसा जाती है पर शायद उन्हें इस हमले की उम्मीद थी इस्लिये बिना उसे अपने से डोर किये वो अपनी गांड को पीछे उसके लंड पर रगड़ने लगती है…..

सोनाली : आअह्ह्ह्ह क्या करता है सतीश, कपडे तो पेहन लेने दे……

मै उनकी गर्दन पर किस करते हुये- क्या माँ मे आपके कपडे उतारने की सोच रहा हूँ और आप कपडे पेहनने की बात कर रही हो….

ओर मे उनके दूध को और तेजी से अपने हाथो से मसल देता हु….

सोनाली- आआह्ह्ह्…तु बहोत शैतान हो गया है सतीश… आह ओह थोड़ा आराम से बेटा दर्द होता है….

मै- क्यों माँ आपको अच्छा नहि लग रहा क्या… अगर अच्छा नहि लग रहा तो मे रहने देता हु…..

ओर सतीश अपने हाथ उसके स्तनो से हटाने लगता है तभी सोनाली उसके हाथ अपने हाथो से पकड़ कर अपने स्तनो पर रख देती है और अपने हाथो से उसके हाथ को अपने स्तन को मसलवाने लगती है….

सोनाली- मारूंगी तुझे अब अगर तूने हाथ हटाया तो…. एक तो आग भडकाता है और फिर उसे बिना बुजाये ही जाने की बात कर रहा है…. आअह्ह्ह्ह जोर से दबा बेटा जितनी जोर से चाहे दबा उफ्फ्फफ्फ्फ्…. बहोत परेशान कर रखा इन निगोडीयों ने मुझे…. आज मसल मसल कर इनकी सारी अकड निकाल दे….

पहले मे उनकी पीछे से गर्दन को चुमते हुए उनकी पर किस करते हुए निचे बड़ना लगता हु…. और फिर उनकी गांड पर पहुच कर पेन्टी के ऊपर से ही उनके चूतडो पर किस करता हु…. और फिर उन्हें अपने हाथो मे भरकर मसलने लगता हु….

थोड़ि देर तक मसलने के बाद मे उनकी पेन्टी मे अपनी ऊँगली दाल कर उसे निचे खिंच देता हूँ माँ पैर उठा कर पेन्टी निकलवाने मे मेरी मदद करती है…

मै उनकी पेन्टी को उनके शरीर से अलग कर देता हूँ और फिर मे उनकी पेन्टी को.देखता हूँ वो चुत वाली जगह से काफी गीली थी… मे समझ जाता हूँ की माँ की चुत पानी बहा रही है और फिर मे उनकी पेन्टी को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघता हु… एक मादक सी मदहोश कर देणे वाली खुश्बु मेरे दिमाग मे चढ़ जाती है…. माँ अपना सर पीछे किये मुझे ये सब करते देख रही थी और उनके चेहरे पर एक सेक्सी सी स्माइल थी….

मै- आह्ह माँ क्या खुश्बु है तेरे रस की….

ओर फिर मे अपनी जीभ निकाल कर पेन्टी पर से उनका सारा रस चाटने लगता है… माँ क्या स्वाद है तेरे इस रस मे आह्ह्ह्ह…

मों मेरे हाथ से पेन्टी छिन कर एक तरफ फेक देती है और अपनी गांड मटकाते हुए बेड की तरफ बढ़ जाती है… मे तो बस उनके थिरकते हुए चूतडो को ही देखते रह जाता हु….

माँ बेड पर जाकर बैठ जाती है और फिर अपने पेर फ़ैलाते हुये- अगर तुझे इतना ही पसंद आया अपनी माँ का रस तो ले खोल दी तेरी माँ ने अपनी टाँगे आजा और पिजा अपनी माँ का सारा रस, सूँघ ले, चाट ले, खा जा ईसे… जो तेरा दिल करे वो कर अपनी माँ के साथ्…. आज से मे तेरी रंडी माँ बन गई हु…. तू जो कहेगा जैसे कहेगा मे करुँगी पर तू इसकी प्यास बुजा दे… बहोत आग लगी है बेटा इसमे…. आजा बुजा दे इसकी प्यास और बना ले अपनी माँ को अपनी रंडी…..

मै तो माँ की बाते सुन कर खुश हो जाता हूँ और तुरंत ही अपने कपडे उतार कर एकदम नंगा होकर माँ की तरफ बढा देता हु…. माँ की नजर मेरे उछलते हुए लौडे पर ही थी जोकि उनकी मुनिया को देख कर झटके मार रहा था…..

मै आगे बढ़ कर उनके पैरों मे बैठ जाता हूँ और उनकी बिना बालों वाली एकदम क्लीन सेव्ड छोटी सी चुत को अपने मुह मे भर लेता हूँ और उसे चुस्ने लगता हु…. थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद मे उनकी चुत के दाने को अपने होंठो मे लेकर चुस्ने लगता हु….

आआह्ह्ह्हह्ह्….. ह्म्ममम्मम्म्म्म…..ऐसे ही ऐसे ही चुस….आआह्ह्ह्हह्ह्…..हाआनंनं खाजा अपनी माँ की चुत को…. पीजाआ इसके सारे रस को…….उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्ग

मै अब अपनी जीभ से उनकी चुत चाटने लगता हूँ और फिर अपनी जीभ को उनकी चुत मे दाल देता हूँ और जीभ को अंदर बाहर करने लगता हूँ साथ मे अपने अँगूठे से उनकी क्लीट को रगड़ने लगता हु…..

सोनाली- आअह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्….. बहुत्तत्ततत्तत्त माजजजजजजजजायआ आआआ रहा हैईईई बेटाआआआ……. आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माईई गये……आंह्….यम

ओर वो भलभलाकर झड़ने लगती है और मैं अपना मुह उनके चुत पर लगाए उनका सारा रस गटकने लगता हु….. माँ पस्त होकर बेडपर गिर जाती है और गहरी गहरी साँसे लेने लगती है…. और मे उनकी चुत को अच्छे से चाट कर साफ़ कर देता हु… और फिर मे उठ कर उनके ऊपर लेट जाता हूँ और उनके ब्रा के ऊपर से उनके स्तन मसलने लगता हु…. और उनके होंठो पर अपनी जीभ फिराने लगता हु…. माँ अपनी आँखे खोल कर मुझे देखति है उनकी आँखों मे सटिस्फैक्शन साफ़ झलक रहा था…

मै उनके स्तनो को मसलते हुये- मोम मजा आया…

ओ कुछ कहती नहि बस मेरे गले मे अपनी बाँहें दाल कर मुझे अपने ऊपर खिंचति है उनके स्तन मेरे सीने मे धँसे हाते है और वो मेरे होंठो को अपने होंठो मे लेकर चुस्ने लगती है…. काफी देर तक हम एक दूसरे को किस करते रह्ते है फिर हम एक दूसरे से अलग होते है…

मों के चेहरे पर एक मुस्कराहट थी…. आज तूने मुझे इतना मजा दिया जितना आज तक नहि आया…. आज जब मे झड़ी तो ऐसा लगा जैसे बरसो से रुका हुआ बाँध तूट गया हों और एक दम से जैसे सैलाब सा आ गया हो…. और तू मेरा सारा पानी पि गया…. तो कैसा लगा अपनी माँ का रस….

क्या माँ क्या बताऊ आपके इस रस के आगे तो सोमरस भी बेकार है…. क्या स्वादिष्ट रस है आपकी चुत का…. आह्ह्ह्हह… मजा आ गया…. पर रस तो पीला दिया आपने अब मुझे दूध भी तो पीला दो अपना….

तो रोका किसने है पिले ना, सब कुछ तेरा ही तो है और इतना कहकर माँ थोड़ा सा ऊपर उठती है और अपनी ब्रा की स्ट्रिप खोल कर उसे अपने शरीर से अलग कर देती है….. उनके दोनों बड़े बड़े सुडोल मख़मली स्तन मेरी आँखों के सामने आ जाते है मे आगे बाद कर उनके दोनों स्तनो को अपने हाथो मे भर लेता हु…. और अपने हाथ मे भर उन्हें मसलने लगता हु….

सोनाली : अब मसलता ही रहेगा या पीयेगा भी इन्हें…..

ओर इतना कह कर माँ अपना हाथ मेरे मुसल पर रख उसे पकड़ लेती है और मुठियाने लगती है….

ओर मे इतना सुनकर और अपने लंड के मुठियाने से एकदम गरम होकर उनके लेफ्ट स्तन को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता हु… मे कभी निप्पल पर अपनी जीभ चलाता और कभी उसे ऐसे चुस्ने लगता जैसे उनमेंसे दूध निकल रहा हो और साथ ही साथ राईट चूचि के निप्पल को अपने ऊँगली और अँगूठे मे भर कर मसल देता…..

सोनाली :…. ऐसे ही पिजा इन्हे…. निचोड ले इनका सारा रस…. आह

अब मे लेफ्ट स्तन को छोड़ कर राईट स्तन को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता हूँ

मै अब उनके स्तन को चुसते चुसते उनके निप्पल को अपने दाँतो मे भर कर काट लेता हु…..

ऐ… क्या कर रहा है बेटा…..आह्…. मजा आ रहा है और काट खा जा इन्हे भी…..हमममम

थोड़ि देर तक मे ऐसे ही एक एक करके माँ के दोनों स्तनो को चूसता और काटने लगता…. उनके निप्पल पुरे तन चुके थे…. अब मे उनके स्तनो को छोड़ कर उठ कर बैठ जाता ह…. माँ के स्तन मेरे काटने की बजह से एकदम लाल हो गए थे….

मों भी उठ कर बैठ जाती है और मे अपना लंड उनके मुह के पास ले जाता हु.. वो समझ जाती है और लंड को अपने हाथ मे लेकर उसकी लम्बाई का जायजा लेने के बाद

सोनाली : हाय कितना बड़ा मुसल.है रे तेरा ये तो मेरी फाड़ कर ही रख देगा….

मै- क्यों आपको पसंद नहि आया…

सोनाली : पसंद अरे मेरा तो मन कर रहा है की मे इसे खा जाउ…. हाय कितना मोटा है मेरे हाथ मे भी नहि आ रहा सही से… और लम्बा तो इतना है की आज वहा तक जाकर मेरी चुदाई करेगा जहा तक तेरे डैड का कभी नहि गया, सही मायनो मे तो आज मेरी चुदाई होगी…. हाय कितना मजा आएगा इससे चुदने में….

ओर इतना कह कर वो लंड को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगती है….

ओह माँ ……… क्या चुस्ती चुस….आंह्…..हां…. ऐसे ही चुसो….अह

माँ अपने मुह मे जितना ले सकती थी उतना लंड लेकर उसे चुस्ने लगती है कभी वो मेरे टोपे पर अपनी जीभ फेरती और कभी उसे ऐसे चुस्ने लगती जैसे लॉलीपॉप को चुस रही हो….

मेरी तो हालत ही खराब थी उनके गरमा गरम चूसायी से मे अपने ऊपर से कंट्रोल खोने लगा था मुझे ऐसा लग रहा था की मे किसी भी समय झड जाउंगा…. और मे उसके बालो को अपने हाथो मे लेकर उसके मुह को अपने लंड पर और दबाने लगता हूँ और जोर जोर से धक्का मारने लगता हु…..

ओह मा…..ले चुस मेरा लंड….आह्….और जोर से चुस मेरी लंड…. आह क्या चुस्ती है तु….मे आ रहा ह…. मे झड़ने वाला ह…. ओह

ओर मे अपना लंड उसके गले तक घुसेड कर झड़ने लगता हु…. माँ की तो जैसे सांस ही अटक गई थी…. उनकी दोनों आँखे जैसे बाहर आने को थी….. मे अपना सारा पानी उनके मुहमे निकाल देता हूँ जो सीधा उनके पेट् मे जा रहा था… और फिर मे अपना लंड उनके मुह से निकाल कर बेड पर लेट जाता हूँ और वो अपनी साँसे सँभालने लगती है और मे अपनी, आज मे बहोत देर तक झडा था…. आज अपनी माँ से लंड चूसायी के बाद मे किसी और दुनिया मे था और मेरा लंड वो अभी भी तने हुए झटके मार रहा था, शायद आगे का सोच कर….

मै बेड पर लेटे अपनी साँसे कण्ट्रोल मे कर रहा था और माँ अपनी साँसे कण्ट्रोल मे कर रही थी…. मे माँ का हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खिंच लेता हूँ माँ मेरे ऊपर आकर गिर जाती है और उनके तने हुए निप्पल मेरी छाती मे चुभ जाते है…. और हम दोनों के मुह से ही एक सिसकि निकल जाती है

सोनाली : आज तो तूने मार ही ड़ाला था भला कोई ऐसे करता है क्या है मेरी तो सांस ही अटक गई थी…. और तू अपना मुसल मेरे मुह मे पेले पड़ा था…

मै- तुम्हे मजा आया की नही…

माँ कुछ नहि कहती और अपनी नजरे झुका लेती है….

मै- बताओ न माँ आपको मजा आया की नही…

सोनाली : मजा तो बहोत आया तभी तो निकाला नहि मुह से….

मै माँ को अपनी बाँहों मे कस कर भिंच लेता हु, तभी उन्हें मेरे खडे हुए लंड का एहसाश होता है…. वो एकदम से उसे अपने हाथ मे लेते हुये- हाय ये तो अभी भी खड़ा हुआ है,

मै- अब इसे आपकी चुत मे जाकर ही सुकून मिलेगा…

ओर मे उन्हें निचे करके उनके ऊपर आ जाता हूँ और उनके होंठो को चुस्ने लगता हूँ वो भी गरमजोशी के साथ मुझे किस करने लगती है…. फिर मे किस तोड़ता हूँ और उनके पैरों के बीच मे आकर बैठ जाता हूँ और उनके पैरों को फैला देता हूँ और पोजीशन ले लेता हूँ अब मे अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर उनके चुत के दाने पर रगड़ने लगता हु….

दोनो के ही शरीर मे एक थिरकन सी होती है, मे उनकी चुत के लबोँ पर अपने लंड को रगड़ने लगता हूँ पर उसे अंदर नहि करता…. थोड़ी देर तक जब मे लंड उनकी चुत मे नहि चोदता हूँ तो उनसे कण्ट्रोल नहि होता…

सोनाली : क्यों तडपा रहा है बेटा अब चोद भी दे अपने इस मुसल को मेरी चुत मे और बनजा मादरचोद…… आह अब कण्ट्रोल नहि होता….. आह दाल भी दे बेटा मे मर जाऊंगी….आह

कंट्रोल तो अब मुझसे भी नहि हो रहा था और अब तो माँ खुद अपने मुह से कह रही थी मुझे मादरचोद बनने को…..

अब मे अपने लंड को उनकी चुत के छेद यानी की स्वर्ग के द्वार पर टीका देता हूँ और एक धक्का मारता हूँ मेरा लंड उनकी चुत को फैलाता हुआ अंदर चला जाता है….

सोनाली :….. चोद बेटा चोद दे अपना पूरा लंड मेरी चुत मे फाड़ दे इसे…. आह

अब मे एक तेज शॉट मारता हूँ और मेरा आधा लंड उनकी चुत को फैलाता हुआ अंदर घुस जाता है…. मेरा लंड बहोत कसा हुआ जा रहा था… उनकी चुत वाकयी मे बहोत समय से नहि चूदी थी कल को छोड़ कर…..

मेरा आधा लंड जाते ही माँ के मुह से एक चीख निकल जाती ही..

आह….आराम से कर हरामी किसी रंडी की चुत नहि चोद रहा है तु… आह….

मै उसकी एक नहि सुनता और उनके कंधो को पकड़ कर एक तेज शॉट लगाता हूँ मेरा लंड माँ की चुत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर जड़ तक घुस जाता है…. और इस धक्के से मेरे मुह से भी एक चीख निकल जाती है और माँ का तो हाल ही बुरा हो जाता है… उसकी चुत फट गई थी और इस बात का पता मुझे मेरे लंड से चल रहा था जोकि अंदर एकदम फस गया था, शायद वो भी थोड़ा छिल गया था…

मै-ूउफ क्या टाइट चुत है तेरी मा…. आह

जबकी मोम- आई मार दिया रे हरामि….फाड़ दी मेरी चुत…… आई बहोत दर्द हो रहा है…. आराम से नहि कर सकता था मादरचोद….. आह चुत का भोसडा बना दिया तूने जालिम….

ओर माँ मेरी पीठ को कस कर पकड़ कर उसमे अपने नाख़ून घूसा देती है….. मेरे पीठ माँ ने छलनि कर दी थी पर मे दर्द को पि रहा था…. मुझे पता था की माँ को बहोत पैन हो रहा है इस्लिये अब मे लंड को बिना हिलाये डुलाये उनके मम्मो को अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगता हु… थोड़ी देर तक ऐसे ही चुस्ने के बाद अब माँ को थोड़ा आराम मिला था और अब वो मेरी पीठ को भी सेहला रही थी…. और अपनी कमर उछाल कर लंड लेने की कोशिश कर रही थी….

मै भी अब समझ गया की माँ अब तैयार है…. इससे पहले मे धक्के लगाता…

सोनाली : चोद न बेटा क्यों तडपा रहा है अपनी माँ को…. मार न धक्के अपनी माँ की चुत में, चोद न अपनी माँ को…..

ले मा….ये ले मेरा लंड… ले और ले….

ओर मे अब धीरे धीरे धक्के लगाने लगता हु…. और माँ भी मेरी ताल से ताल मिला रही थी…. यानी की मेरे हर धक्के पर अपनी कमर उछाल कर लंड को अपनी चुत मे ले रही थी….

सोनाली :…. चोद बेटा…. आह…. चोद ले अपनी माँ को…चोद ले अपनी माँ को…..आह्….. आह्ह्ह्ह…. बुजा दे अपनी माँ की प्यास…..हम ऐसे ही चुदाई कर रहे थे…

अब मे अपने धक्को की स्पीड और बड़ा देता हूँ और मेरे हर धक्के के साथ माँ के मुह से सिसकियाँ फुट रही थी…. अब मे हुमच हुमच कर अपनी माँ को चोद रहा था…. मे तो आज जैसे जन्नत मे था, जिस चुत को चोदने के खवाब मे दिन रात देखता रहता था , आज मे उसी चुत मे अपना लंड दाल कर चोद रहा था…. मुझे अपनी किस्मत पर रश्क हो रहा था की इतना मस्त माल वो भी मेरी माँ आज मेरे निचे है….

ओर इन्ही विचारो के साथ मे अपनी माँ के दूध को हाथ मे भर लेता हूँ और उन्हें हाथो मे भर कर रगडते हुए मे तेज धक्के माँ की चुत मे मार रहा था…. और माँ हर धक्के के साथ सिसकियाँ लेती जा रही थी..

मै ऐसे ही धक्के मारते हुए स्पीड बढ़ा देता हूं और मेरा लण्ङ बच्चेदानी पे ठोकर मार रहा था मोम की सिसकियां तेज हो गई थी उसका पानी निकलने वाला था मै भी तेजी से पेलने लगा और एक से हम दोनों झड़ गए मेरा पूरा रस उनकी बच्चेदानी को भर दिया में उनके ऊपर ही लेट गया वो अपनी सांसे तद्रुस्त कर रही थी और मेरा बालों में हाथ फेर रही थी 

सोनाली: तूने तो मुझे रण्डी बना दिया मेरे सोना अभी भी बुर में लग रहा है लन्ड घुसा है और मुझे किस करने लगी 

मैं: अब तो तू मेरी प्यारी रण्डी अम्मी है देख तेरे इन बातों से फिर खड़ा हो गया 

सोनाली: तो रोका किसने है तुझे डाल दे इसके असली जगह में और फाड़ दे मेरी बुर बना दे भोसड़ा अपनी रण्डी मॉम का 

तभी गेट की बेल बज गई हम दोनों एकदम से तिलमिला उठे 

मैं: इसकी बुर का भोसड़ा पता नहीं कौन अभी आया है

सोनाली: जा बाबू देख कौन आया है और मॉम उठी कि चीख के बैठ गई आह बाबू तूने तो मुझे चलने लायक भी नहीं छोड़ा बहुत दर्द हो रहा है मैने उन्हें वही लेता दिया और ऊपर से ब्लैंकेट डाल दिया 

और मै बाहर गेट खोलने आ गया 

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