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मासी का घर

अध्याय 5 – गपशप और बातचीत

अगले दिन, सुबह 6 बजे जब मैं सो रहा था, तब विशाखा मुझे उठाने आई। उसने मुझे छेड़ते हुए उठाया मेरे जग ते ही वह भागने लगी, तभी मैंने उसकी कलाई पकड़ ली। वह मेरी ओर मुड़ी और हंसने लगी।

मैंने उसे मेरी ओर खींचा, तो उसका मुंह मेरी मुंह के ऊपर आ कर रुका, उसके बाल सामने के और गिर गए, उसकी आँखें बंद होगे, वह पल काफी रोमांटिक था। मैंने उसके बालों को पीछे किया।

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कुछ देर बाद वो एकदम मेरे दूर होगी और उसने एकदम हल्की प्यारी आवाज में कहा,

विशाखा: “तुम्हें पापा बुला रहे है नीचे।”

ऐसा कहती ही वो भाग गई। मैं उठा चेहरा धोया और नीचे हॉल में चला गया। हॉल में सोफे पर मेरे मौसा जी बैठे हुए थे। उन्हें मुझे बैठने को कहा और बोले,

मौसा जी: “बेटा तुम्हें बाइक चलानी आती है?”

मैंने हां के जवाब में सिर हिलाया।

मौसा जी: “दरसल मैं कुछ काम से 3 दिनों के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं। तुम मुझे बाइक से रेलवे स्टेशन तक छोड़ देना फिर बाइक घर पर लेकर आ जाना।”

यह बात सुनकर मैं काफी खुश हो चुका था, क्योंकि अगर मौसा जी चले जाते है तो घर ओर मैं, विशाखा और मासी ही रहेंगे, जो मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

मैं: “जी, ठीक है।”

कुछ देर बाद मेरी मासी किचन से मौसा जी के लिए चाय लेकर आती है। उन्होंने एक लाल कलर की, साटिन की नाइटी पहनी थी। नाइटी पर गले का कट डीप था, मासी की दो बड़ी बड़ी दूध की फैक्ट्रीज इसमें काफी उभर के दिख रही थी। मेरा तो मन कर रहा था अभी उन्हें दबा आकर सारा दूध बाहर निकल दु। उनसे तो इतना दूध निकले गा कि 10 सालों तक उनके घर दूध की कमी नहीं होगी।

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मासी मौसा को चाय देने के बाद फिर से किचन में चली गई। अपनी चाय खत्म करने के बाद मौसा जी उनकी बैग लेने अपने कमरे में चले गए।

तभी किचन की और से विशाखा हॉल की तरफ चलती हुई आई। उसके मुंह पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही वो हॉल में आई, उसने अपने कदम रोक लिए। और मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैने भी मुस्कराते हुए उसे देख। अब वह मुझसे इतनी शर्मा थी कि जैसे हमारी अभी अभी शादी हुई हो।

अब वो चली गई, मौसा जी भी अपना बैग लेकर बाहर आए और फिर हम रेल्वे स्टेशन के ओर चले गए।

मौसा जी को छोड़ने के बाद, मैं लौट आया और बाइक को पार्क कर के घर के अंदर घुसने लगा। तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई आई। मेरी मासी और कोई और औरत अंदर बैठ के बातें कर रही थीं।

मैं उस औरत को नहीं जानता था। मगर मैं उनकी बातें बाहर ही छुप कर सुनने लगा।

औरत: “आपके घर वो लड़का कौन आया है?”

मासी: “वो मेरा भांजा आया हुआ है हमारे घर।”

औरत (मजाकिया अंदाज में): “अच्छा, मुझे लगा कि कोई लड़का रख लिया है आपने अपने लिए।”

मासी: “कैसी बातें करती हो तुम!”

औरत (चिढ़ाते हुए): “अरे, अच्छा खासा जवान लड़का है, क्यों मौका छोड़ रही हो!”

मासी हंसते हुए चुप रही।

औरत: “आपको भी तो संतुष्ट नहीं है ना, तो क्या दिक्कत है।”

मासी (हंसने हुए, मजाक में): “ऐसा लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें जरूरत है।”

वे दोनों जोर जोर से हंसने लगे। तभी मैं अंदर घुसता हूं और उन्हें वहां बैठा हुआ देखता हु।

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मासी के साथ जो बैठी थी वह बाजू वाली भाभी थी, उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें वह एकदम माल लग रही थी।

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मुझे देख उनकी बातें बंद हो गयी और मौसी ने मुझे देख कर बोला,

मासी: “आ गया बेटा!”

मैं अपने कमरे की ओर जा रहा था, चलते चलते मैंने कहा,

मैं: “जी।”

फिर में सीढ़ियों पर ही रुक गया, रुक कर उनकी बातें सुनने लगा।

भाभी जी: “लोंडा तो बड़ा तगड़ा है।”

मासी (हंसते हुए): “बस कर, मेरे भांजे को नजर ना लगा।”

भाभी जी: “अब आप से नजर नहीं लगती तो हमें लगाने दीजिए।”

दोनों फिर से हंसने लगे। उनकी बातें खत्म नहीं होने वाली थी, और मैं उधर उनकी बातें सुनता हुआ खड़ा नहीं हो सकता था। मुझे अपनी नींद पूरी करनी थी। मैं जा कर सो गया।

फिर, उठने के बाद में नहाया, खाना खाया और अपने कमरे टाइमपास करने लगा। दिन काफी बोर हो रहा था, तभी मैंने सोचा विशाखा के साथ टाइमपास कर लेता हूं।

जब मैं उसके कमरे में पहुंचा तो देख वह सो रही थी। सोते हुए वो काफी क्यूट दिख रही थी। मैं उसे निहारते ही रह गया।

फिर मैं वह से निकल कर नीचे गया। हॉल में भी कोई नहीं था। फिर मैं अपनी मासी के कमरे की ओर गया। मासी के कमरे का दरवाजा खुला था, घर में चारों तरफ सन्नाटा था। 

मैंने मासी को देख, वह एक पीले कलर का सूट पहन कर अपने बेड पर बैठी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी। मैंने यूं ही मजाक में कहा,

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मैं: “अरे वाह मासी, आप तो आपकी पौराणिक तस्वीरें देख रही हो। कही डायनासोर भी देखे क्या उसमें?”

मासी ने अपनी नज़रे एल्बम पर ही बनाए रखी, मुकरते हुए उन्होंने कहा,

मासी: “हां… एक तो अभी मेरे रोम में घुस आया है।”

मैं यह सुन कर हंसने लगा, मासी भी हंस रही थी और जाकर उसके पास बैठ गया।

फिर में उनकी एक पुरानी तस्वीर देखता हूं, मासी बिल्कुल विशाखा जैसी दिखती थी। मैंने यूं ही मजाक में पूछा,

मैं: “ये विशु है क्या? कितनी क्यूट दिख रही है।”

मासी ने मेरी ओर देखा, एक स्माइल के साथ कहा,

मासी: “अरे बुद्धू, ये मैं हूं।”

मासी को और मस्का लगाते हुए मैंने चौंकने की एक्टिंग की और कहा,

मैं: “क्या बात कर रहे हो! मतलब आप तो फुल हीरोइन थी। अगर आप आज के जमाने में होती तो सोशल मीडिया क्वीन होती।”

मासी (मुस्कराते हुए और चिढाते हुए): “और तुम जैसे दिन भर DMs रिफ्रेश करते रहते।”

मैं: “मैं तो आपका फॉलोवर नंबर 1 रहता।”

मासी और मैं हंस देते है और मासी मुझे चिढ़ाते हुए कहती है,

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मासी: “hmm… ये lines अपने age की लड़कियों पर मारना, मुझे एक बहु तो मिल जाएगी!”

मैं: “अरे मासी, बहुत lines मारी… पर कोई सुनता ही नहीं। सब ignore कर देते है।”

मासी: “सही है, तुम जैसों की बातें सुनकर सब भाग जाएंगी।”

मैं: “पर आप तो अभी तक बैठी है।”

मासी मुझे देखते रही, उनका चेहरा लाल पड़ रहा था। फिर से सन्नाटा हो गया, लेकिन अब मासी हल्की आवाज में बोली बोली,

मासी: “तुम्हे बस टाइमपास करना आता है।”

मैं वह से जाते जाते बोला।

मैं: “टाइमपास तो सब करते है, आपके साथ तो तुम रुक जाता है।”

मासी की धड़कने तेज होगी, वह शरमाने लगी। शायद उनके मन में मैंने प्यार का बीज बो दिया था।

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