मासी का घर
अध्याय 4 – स्वीकारोक्ति (confession)
पिछले अपडेट में मैंने आपको बताया कि क्यों विशाखा ने मुझे kiss किया था और अब हम तीनों खाना खाने लगे थे।
खाना खाते खाते मैंने सन्नाटे को थोड़ा, मासी को पूछा,
मैं: “मासी, मौसा जी आए नहीं अब तक?”
मासी: “आज वो देर से आने वाले थे।”
मैं: “हमेशा से वह एक busy आदमी रहे है।”
मासी: “बेटा busy तो आज कल तुम भी हो गए हो, हमारा कॉल भी नहीं उठाते।”
मैं: “अरे मासी, मैं कहा का busy, बस कॉलेज और साइड के काम manage कर रहा हूँ।”
मासी: “ज्यादा टेंशन मत लिया करो, देखो कितने पतले होते जा रहे हो।”
मैं: “अब आपके हाथ का खाना खा कर फिर से अच्छा हो जाऊंगा।”
मासी और मेरी काफी सारी बातें हुई, मजाक हुए मगर विशाखा ने कुछ नहीं कहा, बस हमें बातें करते हुए देखती रही और मुस्कराते रही, वो मेरे बाजू में बैठी बिल्कुल मेरी नई नवेली दुल्हन जैसी दिख रही थी जो काफी शर्माती है।

खाना खा कर मैं बाहर टहलने आ गया। कुछ देर बाद मैंने यू ही छत की ओर देखा, विशाखा वहां खड़ी हो कर मुझे देख रही थी। मुझे देख कर वो झट से छुप गई।
मैंने मुस्कराया, और भाग कर अंदर गया। मैं भी अब छत पर जा रहा था।
मैं छत पर पहुंचा, लेकिन विशाखा शायद मुझे नीचे ही ढूंढ रही थी। वो रेलिंग से झुक कर मुझे अभी भी नीचे खोज रही थी।
मैं उसके पीछे धीरे से गया, लेकिन पता नहीं कैसे उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़ गई। मुझे देख के वह शर्मा के लाल हो गई थी। उसकी नजरे मेरी नजरों से मिल ही नहीं रही थी और मैं उसे ही ताड़े जा रहा था।
अंधेरे में भी वह चांद सी चमक रही थी, हल्की गर्म हवा चल रही थी, उसके खुले बाल उड़ रहे थे, हम दोनों के बीच सिर्फ सन्नाटा था।

हर बार की तरह, मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा,
मैं: “I Love You Too.”
जिसे सुन कर विशाखा लाल टमाटर हो गई, वो मुझे देख मुस्कुराई और भाग के नीचे चली गई।

मैं छत पर ही था, शरीर मेरा भी ठंडा पड़ चुका था क्योंकि किसी लड़की ने मुझे आगे से प्रपोज किया और मैंने उसे हां कह दिया।
शर्मा तो मैं भी रहा था, लेकिन खुशी भी इतनी हो रही जो शब्दों बयान करना मुश्किल है। मैं अपनी खुशी में डूबा ही था तभी मुझे एक ख्याल आता है, जिससे मेरा मुंह उतर जाता है।
वो ख्याल था कि, विशाखा मेरी मौसेरी बहन है, और उसके साथ संबंध में होना समाज में वर्जित है और यह अनैतिक संबंध में गिना जायेगा।
एक ही छत के नीचे रह कर प्यार करते करते अगर हम पकड़ा गए तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। अभी तो ठीक है लेकिन अगर हमारा प्यार गहरा हो गया तो हम भविष्य में क्या करेगें? क्या यह समाज, हमारे घरवाले हमें साथ रहने देंगे?
फिर मैंने खुद को दिलासा देते हुए कहां कि जो होगा देखा जाएगा, जमाना बदल चुका आज कल कुछ भी हो सकता है।
फिर मैं अपने कमरे में चला गया। मुझे देर
तक नींद नहीं आई लेकिन आखिर में मैं सो ही गया।