मासी का घर
अध्याय 2 – मासी का सार
जैसे कि मैं आपको पिछले अध्याय में बता चुका हूं कि काफी लंबे अरसे बाद, मैं छुट्टियों में अपनी मासी के घर आया हुआ था, जहां मुझे उनके उभरे हुए बड़े बड़े स्तनों का और उनकी बीच वाली दरार की एक झलक दिखी थी जिससे मेरे अंदर मेरी मासी के प्रति यौन भाव जागृत हुआ।
अब, अगली सुबह, मैं थोड़ी देर से उठा। अपने कमरे के बाहर आकर देखा तो घर में कोई नहीं था। सिर्फ मेरी मासी थी, पर वो नहा रही थी।
लगता है सभी लोग अपने अपने कामों पर निकल गए थे और मेरी मासी भी अपना काम करके नहा रही थी। पानी की बूंदे जो शॉवर से बाथरूम की फर्श से टकरा रही थी, मैं उसकी आवाज साफ सुन सकता था।

सोचो, वह बूंदे कितनी भाग्यशाली है कि जो मेरी मासी के नंगे बदन को छू रही थी। उनके वह काले रेशमी सुगंधित बाल, गोरा, चिकना, मुलायम, गदराया शरीर।
ऐसा सोचते ही मेरा लंड खड़ा होकर चट्टान की तरह कड़क हो गया। फिर मैं जाकर सोफे पर बैठ गया जहां से बाथरूम के दरवाजे को साफ देखा जा सकता है।
कुछ ही देर में, मासी नहाकर बाहर आई, उन्होंने कुछ भी नहीं पहना था, सिर्फ एक टॉवेल था जो उसके धड़ को धक रहा था, और एक टॉवेल था जो उनके बालों पर लिपटा हुआ था। उसकी गोरी चिकनी टांगे पूरी तरह से नंगी थी, उसके पैरों पर एक बाल नहीं था।

उन्हें इस हालत में देख कर ही मैं उत्तेजित हो गया था। मुझे लगा था कि वह मुझे बाहर बैठा देख कर चौंक जाएगी मगर मुझे देख के उनके हाव भाव बिलकुल नहीं बदले। एक सेकेंड के लिए वह मुझे सिर्फ देखती रही फिर कह पड़ी।
मासी: “अरे, तुम उठ गए! बेटा तुम्हें नींद तो आई थी न?”
मैं: “हां, बहुत अच्छी नींद आई।”
वे मुस्कुराई और अपने कमरे में चली गई। उन्होंने सिर्फ मुझे जगा हुआ देखा था, उन्होंने यह नहीं देखा कि मेरा लंड में जाग रहा है।
मेरे खड़े हुए राक्षस को शांत करने के लिए मैंने मेरा हाथ मेरी शॉर्ट में दाखिल कर दिया। इतना गर्म और कड़क मेरा लिंग जो आज हुआ है वह पहले कभी नहीं हुआ था।
जैसे ही मासी अंदर गई, उन्होंने मुझे आवाज लगाई। जैसे ही मैंने उनकी आवाज सुनी, मैंने मेरे हाथों को झट से बाहर खींच लिया।
मासी ने अपना सिर दरवाजे से बाहर निकाल कर बोली,

मासी: “बेटा तुम भी नहा लो फिर साथ में बैठकर खाना खा लेते है।”
मैंने मुस्कुराहट के साथ हां में सिर हिलाया।
जितनी जल्दी हो सकता था उतने ही जल्दी में बाथरूम में घुस गया। वहां अब भी गर्म धुंध थी। मासी के शरीर की महक बाथरूम में हर तरफ थी, गर्माहट जो पूरी हवा में थी जिससे मासी के मौजूदगी का एहसास हो रहा था। वह एहसास काफी अलग और आनंददायी था।
मैंने झट से मेरे सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए ताकि मैं मेरी मासी की उस मौजूदगी के एहसास को, उस माहौल को मेरे रोम रोम में बसा पाऊं।
कपड़ों को हैंगर पर टांगते वक्त मुझे वहां मेरी मासी की कच्छी भी टंगी हुई नजर आई।

उनकी उस पैंटी को मैंने मेरे मुंह से लगा लिया, उसमें उसका सार था, उनकी महक भी थी। यह वही पैंटी है जो मेरी मौसी के चूतड़ों को छुती है, उसकी चुत से वाकिफ है। इससे मानो मैने स्वर्ग की सैर कर ली थी।
जिसके बाद मैंने आज तक की सबसे बेहतरीन मुठ मारी, उसकी चड्डी सूंघते हुए। फिर जल्दी से नहाने ने के बाद मैं बाहर निकल आया।
कपड़े बदल कर, मैं कमरे से निकल कर नीचे चला आया।
मैं जब नीचे उतरा, वैसे ही विशु घर में आई। वह अपनी योगा क्लासेस से वापिस आ रही थी। उसने योगा outfit पहनी हुई थी जिससे उसके निपल्स काफी साफ़ दिख रहे थे। क्रॉप टॉप होने के कारण उसकी पतली चिकनी लचीली कमर दिख रही थी, उसकी थाइज़ का शेप काफी बढ़िया था जो उसके टाइट लेगिंग्स से साफ नजर आता था।

आने के बाद उसने भी नहाया और हम सब खाना खाने लगे। मासी के हाथ का खाना बहुत बढ़िया था, मुझसे तारीफ किए बिना रहा नहीं गया।
मैं: “मासी, सीरियसली… आपके हाथ के खाने का कोई जवाब नहीं, अच्छे अच्छे रेस्टोरेंट फेल है आपके सामने।
मासी ने मुस्कुराते हुए कहा,
मासी: “अरे वाह, सच में!”
मैं और मस्का लगाने लगा,
मैं: “मैं तो कहता हूं आप एक रेस्टोरेंट खोल ही दो।”
मासी ने हंसते हुए कहा,
मासी: “फिर तो बढ़िया है, तुम मैनेजर बन जाना और मैं मास्टर शेफ”
मैं: “अरे वह, बिलकुल बिलकुल।”
हम तीनों ऐसी ही काफी सारी बातें की और लंच किया।
लंच के तुरंत बाद, मैं अपने कमरे में चला गया और reddit पर काफी सारे पोस्ट पढ़ने लगा, “how to seduce aunt” और “how to fuck aunt” के संदर्भ में।
तभी, विशाखा मेरे कमरे का दरवाजा खोलती है और दरवाजे पर अपनी पीठ टिका कर, हाथों को बांध कर बोली,

विशाखा: “हेय, क्या हाल है?”
मैं: “ठीक हूं, क्या हुआ?”
वह आगे बढ़ी और मेरे बिस्तर के पास आकर खड़े होकर उत्साह के साथ कहने लगी,
विशाखा: “घूमने चलें क्या?”
मैं: “इस वक्त!?”
मेरा बिल्कुल मूड नहीं था घूमने का, क्योंकि मुझे और भी ज्यादा रिसर्च करनी थी, और भी कहानियां और किस्से पढ़ने थे जिससे मुझे मासी को मेरी प्रति आकर्षित करने का तरीका पता चले। लेकिन विशाखा ने मेरे हाथों को अपने नरम हाथों से पकड़ा और मुझे खींचने लगी।
विशाखा: “अरे चलो ना…”
वो काफी जिद्दी है, मुझे उसके जिद्द के समाने हारना पड़ा।