घर की प्यासी बुर – Update 13 | Family Sex Story

घर की प्यासी बुर - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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Update – 13

सतीश के रूम के बाहर पहुच कर सोनाली बिना गेट पर नॉक करे रूम मे एंटर हो जाती है अंदर सतीश नंगा लेते हुए सोने की एक्टिंग कर रहा था और हलकी सी आँखें खोक कर गेट की ही तरफ देख रहा था….

अपनी माँ को आया देख कर ही उसका लंड और भी अकड जाता है. …

उधर सोनाली को ये लगता है की सतीश सो रहा है और वो बेखोफ टकटकी लगाये सतीश के लौडे को देखने लगती है…

अपनी माँ को ऐसे लंड घुरता हुआ देख कर उसका लंड और झटके मारने लगता है…

सोनाली की चुत उस मदमस्त लौडे को देख कर पानी बहाने लगती है, सोनाली जिसके एक हाथ मे ट्रे थी अपने दूसरे हाथ से अपनी चुत को अपने नाइटी के ऊपर से रगड देती है…..

सतीश उसकी इस हरकत से चौक जाता है उसे तो यकीन ही नहि होता की उसकी माँ अपने बेटे के लौडे को देख कर इतनी गरम हो गई है की उसे अपनी चुत को शांत करने के लिए मसलना पड़ रहा है….

तभी सोनाली को पता नहि क्या सूझता है की वो पलट कर सतीश का गेट लॉक करती है और फिर सतीश की तरफ बढ़ जाती है, सोनाली ट्रे को बेड के पास पड़े टेबल पर रखती है और फिर सतीश के पैरों के बीच मे आकर बैठ जाती है और उसके लौडे को देखने लगती है…. उसके चेहरे के एक्सप्रेशन पल प्रति पल बदल रहे थे जिन्हे सतीश अच्छे से देख सकता था…..

सोनाली को सतीश के इतने करीब उसकी सतीश के लंड को पास से देखने की प्रबल इच्छा ले आई थी….

सोनाली सतीश के लंड के इतने करीब थी की उसके लंड की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर चलि गई थी….

सोनाली अपने ऊपर से कण्ट्रोल खोती जा रही थी वो अपना हाथ आगे बड़ा कर सतीश के लंड को अपने हाथ मे ले लेती है, सोनाली की इस हरकत से सतीश की बॉडी काँप उठती है बड़ी मुस्किल से वो अपनी सिस्कियों पर रोक लगाता है…

सतीश की बॉडी मे हुए कम्पन से सोनाली डर के अलग हो जाती है और सतीश के चेहरे की तरफ देखति है और उसे सोता देख उस थोड़ी संतुस्टि होती है… और वो ट्रे उठाकर वापस किचन की और चल देती है…

उसे अपने आप पर यकीन नहि हो रहा था की कैसे वो अपने बेटे के साथ ये सब कर सकती है… उसे अपने पर घिन भी आ रही थी और कभी वो उसके बारे मे सोच सोच कर गरम हो रही थी….

ओ दोबारा चाय बना कर कप्स मे दाल कर सतीश के रूम की तरफ बाद जाती है…. सतीश के रूम के बाहर पहुच कर वो डोर नॉक करती है अंदर सतीश जोकि अभी तक अपनी माँ की.हारकत से रोमाँचित था उठ कर एक शार्ट ड़ालता है और थोड़ी देर वेट करता है जब तक सोनाली उसके गेट पर २-३ बार और नॉक नहि करति…. शार्ट मे उसका लंड टेंट बनाये हुए साफ़ पता चल रहा था वो गेट खोलता है और सोनाली को गुड मॉर्निंग बोलता है… सोनाली उसे कप देती है, सोनाली तिरछी नजरो से सतीश के शार्ट मे बने तम्बू को देख रही थी… और सतीश भी उसकी हरकतो को नोट कर रहा था…

सोनाली उसे चाय देकर तेजी से शिप्रा के रूम की तरफ बढ़ जाती है और सतीश के चेहरे पर विजई मुस्कान आ जाती है…

शिप्रा के रूम मे जाकर वो शिप्रा को जगाती है और उसे चाय देकर फ्रेश होकर नीचे आने को बोल देती है और नीचे किचन मे जाकर उनके लिए नाश्ता तैयार करने लगती है, पर अभी भी वो सतीश के लौडे के बारे मे ही सोच रहा थी,

सोनाली अपने मन मे- इतनी सी उम्र मे कितना बड़ा हो गया है इसका लन्ड मुझे तो यकीन ही नहि हो रहा की मैंने जो देखा वो रियलिटी थी या फिर कोई भ्रम्… इतनी सी उम्र मे ही ये तो बड़ी से बड़ी औरत को मजा देणे लायक हो गया है… ये तो खेली खाई रण्डियों को भी चिखा दे फिर मे तो इतने समय से चूदी नहि हूँ और चूदी भी हूँ तो ५ इंच के लौडे से ये तो मेरी चुत का भोसडा बना देगा….

ओर सोनाली की चुत रस बहाने लगती है… सोनाली अपने हाथ से अपनी चुत सहलाते हुये- हाय ये तो बेटे के लंड के बारे मे सोच कर ही पानी बहा रही है, तो जब वो मेरी चुत मे जायेगा तो इसका क्या हाल होगा….

सोनाली अपने मन मे ही- छि छितू ये ऐसा सोच भी कैसे सकती है वो भी अपने बेटे के बारे मे तुझे शर्म करनी चाहिए अपने आप पर सोनाली भला कभी कोई माँ कभी अपने बेटे के बारे मे ऐसा सोचती है कहि….

सोनाली नाश्ता तैयार करके बाहर आकर कुरसी पर बैठ जाती है… और अपने विचारो मे खो जाती है उसे समझ नहि आ रहा था की क्या गलत है और क्या सही है

सोनाली के अंदर अजीब सी कस्मकश चल रही थी… जबकि दूसरी तरफ सतीश बहुत खुश था उसे ऐसा लग रहा था जैसे अब उसकी माँ की चुत मे जलद ही उसका लंड होगा… और रात को लेट सोने के कारण वो वापस अपने बिस्तर पर आकर सो जाता है …

इधार शिप्रा तैयार होकर नीचे आती है तो अपनी माँ को गुमसुम बैठा देख कर उसकी तरफ बढ़ जाती है और पीछे से उसके गले मे बाँहें दाल कर उसके गाल पर किस करती है उसकी इस हरकत से सोनाली अपनी सोच से बाहर आ जाती है और शिप्रा को देख कर एक फिकी सी स्माइल देती है….

शिप्रा- क्या हुआ माँ क्या सोच रही थी???

सोनाली- कुछ नहि बेटा बस ऐसे ही.. सतीश नहि आया अभी तक्…

शिप्रा-क्या माँ आप जानती हो न की भाई कितना आलसी है, कभी कोई काम टाइम से नहि करता…

सोनाली- उसकी बुराई करना बंद कर और जा उसे बुला कर ले आ मे तुम लोगो का नाश्ता लगा देती हु….

शिप्रा सतीश के रूम की तरफ बढ़ जाती है और डोर खोलते ही वो जो देखति है उसे अपनी आँखों पर विश्वासश ही नहि होता…. वो ग़ुस्से मे सतीश की तरफ बढ़ती है और उसे झिझोड़ कर जगाते हुये-

हद है भाई तू अभी तक सो रहा है कॉलेज नहि जाना क्या….

सतीश- उह्ह्ह सोने दे ना…

शिप्रा-उठ भाई काफी लेट हो गए है ओलराडी… जल्दी उठ दुष्ट…

सतीश- मे कॉलेज नहि जाउँगा आज….

शिप्रा-तो मुझे तो छोड़कर आ….

सतीश- तू ऑटो करके चलि जा… और अब मुझे डिस्टर्ब मत करियो…

शिप्रा मन ही मन सतीश को गाली देते हुए निचे आ जाती है…

सोनाली- सतीश कहा है??

शिप्रा- वो सो रहा है…

सोनाली-तूने उठाया नहि उसे…

शिप्रा- उठाय था पर वो कह रहा है की वो आज कॉलेज नहि जायेगा…

सोनाली-ये लड़का भी ना… चल तू नाश्ता करले….

शिप्रा नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल जाती है…

ओर सोनाली अपने हस्बैंड को उठा कर उसके लिए ब्रेकफास्ट बनाने चलि जाती है…

अविनाश थोड़ी ही देर मे नहा धोकर बाहर आ जाता है सोनाली, अविनाश को नाश्ता लगा देती है और अपने लिए भी नास्ता लगा कर अविनाश के साथ बैठ कर ही नाश्ता करने लगते है….

अविनाश नाश्ता करके अपने हैंड वाश करके रूम मे चला जाता है… और सोनाली सब बर्तन समेट कर उसे ढ़ोने के लिए दाल कर रूम मे चलि जाती है, रूम मे अविनाश ऑफिस जाने की तय्यारी कर रहा था की सोनाली रूम मे पहुचती है….

सोनाली- अविनाश मुझे तुमसे कुछ बात करनी है…

अविनाश- देखो सोनाली मेरे पास इस समय तुम्हारी फालतू की बातो के लिए टाइम नहि है….

सोनाली- देखो अविनाश मे तुम्हारे रोज शराब पिने की आदत से तंग आ चुकी हु… तुम इसे छोड़ क्यों नहि देते मेरे लिए नहि तो बच्चों के लिए ही छोड़ दो…

अविनाश टाय की क्नॉट लगाते हुये- देखो सोनाली आज मेरी बहोत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और मे नहि चाहता की मे तुमसे बहस करके अपना मूड ऑफ करु….

सोनाली- पर….

अविनाश- हम इस टॉपिक पर कभी और बात करेंगे…

ओर अविनाश अपना बैग लेकर ऑफिस के लिए चल देता है…

ओर सोनाली का तो मूड ही ऑफ हो जाता है उसे समझ नहि आ रहा था की अविनाश को हो क्या गया है कहा वो दोनो.एक दूसरे को इतना प्यार करते थे की दोनों मे कोई किसी की बात को नहि टालते थे और जैसे जैसे अविनाश का बिज़नेस आसमान की उचाइयां छूने लगा वो धीरे धीरे अपनी फॅमिली से दूर होता गया और जब से उसे ड्रिंक की लत लगी तब से तो जैसे वो अपने फॅमिली से काफी दूर हो गया था…..

सोनाली अभी अपनी सोचो मे ही खोई हुई थी की डोरबेल बजती है, सोनाली डोर की तरफ चल देती है, सोनाली डोर खोलती है बाहर बसंती खड़ी हुई थि, वो अंदर आकर गेट बंद करती है सोनाली का सर दर्द करने लगा था अभी हुई घटना के कारण, वो बसंती को सारा काम बता कर अपने कमरे मे जाकर लेट जाती है… और थोड़ी ही देर मे वो सो जाती है…

बसन्ती पहले किचन का काम निपटाती है फिर निचे सभी रूम और बारामदे माँ झाड़ू पोचा करने के बाद, ऊपर के रूम की सफाई करने चल देती है…

बसन्ती सतीश के रूम मे सफाई करने के लिए एंटर होती पर हर रोज की तरह आज सतीश कॉलेज नहि गया था और न ही उसने अब तक बिस्तर छोडा था,बसन्ती अपने काम मे मसगुल हो जाती है जब वो बेड के पासा झाड़ू मार रही होती है तभी उसकी नजर सतीश के शार्ट मे बने तम्बू पर पड़ती है…. शार्ट मे बने विशाल तम्बू को देख कर बसंती को अपनी आँखों पर यकीन ही नहि होता, वो अपना एक हाथ अपने मुह पर रखती है

बसन्ती- अरे बाप रे इतना बडा.. भला इतना बड़ा भी किसी का हो सकता है.

ओर बसंती की चुड़क्कड़ चुत पनिया जाती है…. बसंती के अंदर सतीश के लंड को.देखने की प्रबल इच्छा होने लगती है इस्लिये वो सतीश को हिला कर चेक करती है की वो गहरी नींद मे सो रहा है की नही…. सतीश रात को लेट.सोने के कारन गहरी नींद मे था….

बसन्ती हिम्मत करके उसके पैरों की तरफ आती है और उसके लंड को शार्ट के ऊपर से पकड़ कर ही उसका नाप लेने लगती है… उसकी चुत पानी बहाये जा रही थी…. शार्ट के ऊपर से सहलाने के बाद वो अपने दोनों हाथो की उंगलियो को सतीश के शार्ट मे फसा कर निचे खिसका देती है और ये सब करते हुए उसके चेहरे पर जरा भी शिकन नहि थी… अब सतीश का लंड शार्ट से आजाद होकर खुली हवा मे आकर झटके मारने लगता है… बसन्ती का तो मुह खुला का खुला रह जाता है वो आगे बढ़ कर लंड को अपने हाथो मे ले लेती है…..

बसन्ती- आअह्ह्ह्ह कितना लम्बा और मोटा है ये….एक न एक दिन मे जरूर इस लौडे को अपनी चुत की सैर करवाउंगी…

ओर वो अपने हाथ को लंड पर आगे पीछे करके उसकी मुट्ठ मारने लगती है और अपनी साडी, पेटीकोट सहित ऊपर करके अपनी चुत की आग को ठण्डा करने की कोशिश करने लगती है….

लंड की मुट्ठ मारने से लंड के टोपे पर प्रिकम की.बूद छलक आती है…. उस बूँद को देख कर बसंती उसके लंड पर झुक कर उस बूँद को अपनी जीभ से उसके टोपे से चाट कर साफ़ देती है…. प्रिकम का टेस्ट चखने के बाद उसे पता नहि क्या होता है की वो सतीश के लंड को अपने मुह मे भर लेती है और उसे चुसना चालु कर देती है, बसंती ने सोच लिया था की जब इसे अपनी चुत मे लेना ही है तो आज ही क्यु.ना ट्राय किया जाए क्युकी आज सोनाली भी सो रही है तो उसे डिस्टर्ब करने वाला घर मे कोई नहि है…. और ऐसा मौका उसे दोबारा नहि मिलेंगा…. और इतना तो भरोसा था ही उसे अपने जिस्म पर की कोई भी लड़का और आदमी या बुड्ढा जिसका खड़ा होता है वो उस जैसे माल को चोदने से कभी मना नहि करेंगा….

बसन्ती सतीश का लंड चुसना स्टार्ट कर देती है…. सतीश को अपने लंड पर एक कसाव और गिला गिला सा अनुभव होता है और उसकी आँख खुल जाती है वो तेजी से बेड पर उठ कर बैठ जाता है उसकी इस हरकत से उसका लंड बसंती के मुह से बाहर निकल आता है पर उसपर बसंती के दाँतो की रगड लग जाती है, एकदम हुई इस घटना से बसंती चौक जाती है और सतीश की तरफ देखति है सतीश उसे हैरत की नजरो से देख रहा था और अपने लंड जिस पर दाँतो की रगड के कारन दर्द होने लगा था को सहला रहा था….

बसन्ती आगे बढ़ कर बेड पर बैठ जाती है और उसके लंड को सतीश के हाथो से अपने हाथ मे लेकर उसे सहलाने लगती है सतीश उसे ये सब करते देख रहा था…. बसंती उसको अपनी तरफ देखता पाकर एक कामुक स्माइल देती है और उसके स्माइल देख कर सतीश भी मुस्कुरा देता है और उस पल को एन्जॉय करने लगता है थोड़ी देर तक हाथ से मुट्ठ मारने के बाद बसंती उसके लंड को अपने मुह्ह मे भर लेती है और इसी के साथ सतीश के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है…. अब बसंती उसके लंड पर अपना मुह आगे पीछे करने लगती है और बीच मे अपनी जीभ लंड के टोपे पर फिराती और टोपे के छेद को कुरेदने की कोशिश करती सतीश वापस पीठ के बल लेट जाता है और इस आनंद मय पल को एन्जॉय करने लगता है…. बसंती अपनी पूरी कोशिश के बावजूद सतीश का पुरा लंड मुह मे नहि ले पा रही थी पर जैसे सतीश का लंड चुस रही थी वैसा अब तक किसी ने भी चूसा था… सतीश के मुह से एक के बाद एक सिसकारी फुट रही थी…

उसे तो यकीन ही नहि हो रहा था की कभी उसकी मॉर्निंग इतनी हसीं भी हो सकती है और कभी कोई उसे इस तरह से नींद से जगायेगा….

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