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chapter 3

रात हो चुकी थी जंगल से अजीब गरीब आवाजे और तेज हो चुके थे आयुस सभी आग के दोनों तरफ बैठे हुवे बाते कर रहे थे आयुस के साथ आयुसी bathi हुई थी दूसरी तरफ अमृता बिनीता बैठे थे

अमृता – जंगल से अब और तेज भयानक आवाजे आने लगी है

बिनीता – हा भाभी मुझे तो ये सोच कर ही डर लग रहा है अगर हमे जंगल के अंदर सोना होगा तो उफ सोच मेरा शरीर काप् रहा है ये तो अच्छा है हम जंगल के किनारे इस समुंदर के किनारे है

आयुसी – बुआ आपने सही कहा यहा उतना डर नही लग रहा खुला आसमान खूबसूरत जगह है बस पीछे जंगल आगे समुंदर के बीच हम फसे है

आयुस आयुसी को बाहों मे लेके – चिंता मत करो हम अपने घर सही सलामत जायेंगे

आयुसी अयुस को देख – आप है तो चिंता कैसी

अमृता – अरे मे भूल ही गई अब याद आया घर पे कोई नही है गाय बकरी का किया होगा

बिनीता – अरे हा वो तो भूखे मर जायेंगे

आयुस – चिंता मत कीजिये जब गाय बकरी को जायदा भूख लगेगी तो वो आवाजे करेगे चिल्लायेगे तब हमारे परोसी जरूर देखने आयेगे

अमृता राहत सास लेते हुवे – हा ये तो तुमने सही कहा

बिनीता – तो किया किसी को पता चलेगा हमारे साथ किया हुआ है

आयुस – मुश्किल है लोगो को लगेगा हम कही गये हुवे है लेकिन अगर किसी को लगता है की हमारे साथ कुछ हुआ है फिर भी कोई फायदा हमे नही होगा मान लो बात पुलिस तक जाती भी है तो पुलिस गाव आस पास सहर हर जगह तलास करेगी लेकिन इस जंगल मे कोई नही आयेगा यानी हमे खुद अपने आप को बचाना है यहा से निकलना है

अमृता बिनीता – बात तुमने सही कही

आयुस बैग लेके आता है अंदर सब के लिये एक एक खाने का बॉक्स था जिसमे बिरयानी थी आयुस सभी को देते हुवे – ये लास्ट है इसके बाद हमे शिकार करना होगा खाने के लिये

सभी खाना लेके खाने लगते है

अमृता – शिकार लेकिन कैसे करोगे

आयुस – करना ही होगा आप चिंता मत करो मा जंगल मे बहोत कुछ मिल जायेगा

आयुसी – तो हमे जंगली जानवर खाने होगे

आयुस अयुसी को देख – गुरिया जिंदा रहने के लिये कम परेगा जो मिल जाये खाना परेगा

अयुसी – हु समझ गई भाई

सभी खाना खाते है

अमृता – उफ बहोत ठंडी लग रही है

बिनीता – हा रात होते ही ठंडी बढ़ गई है

आयुस – हा जंगल मे रात को ठंडी बढ़ जाती है

अयुसी – भाई सोने चले

आयुस – हा चलो

फिर सब कैप के अंदर जाते है आयुस सभी बिस्तर पे लेत जाते है आयुसी आयुस को पकर चिपक कर लेत जाती है और बिनीता भी आयुस के बगल मे थी

अमृता – वाह तुम दोनों तो चिपक गये मे किससे चिपकु

आयुसी हस्ते हुवे – मे तो भाई के साथ ही सोउंगी

बिनीता – भाभी आज मे कल आप

अमृता – कोई बात नही ननद जी आप सोये

एक बरी चादर थी उसे ही सब ओर लेते है फिर सो जाते है

सूरज की रोसानी के साथ सुबह होती है सभी उठ कर बाहर आके फिर खूबसूरत नजारे देखने लगते है समुंदर के ऊपर सूरज की लालिमा फैली बहोत खूबसूरत दिख रही थी

आयुस – एक रात जंगल मे गुजार लिये

अमृता – हु

उसके बाद सब अपना हल्का होते है फरेस् होने के बाद आयुस बैग खोलता है उसमे मछली पकरने का काटा डोरी के साथ एक रबर भी था जिसे देख आयुस मन मे – कमीने इतना सब देने का सुक्रिया लेकिन तुने जो किया उसका बदला तो मे लेके रहुंगा

आयुस – गुरिया मेरे साथ चलो मुझे शिकार करने के लिये कुछ हथियार बनाने के लिये अच्छी डाली काट के लानी है बुआ मा आप यही रुको

अमृता बिनीता – ठीक है

आयुस आयुसी जंगल के थोरा अंदर जाते है सब चारों तरफ देख चल रहे थे साथ मे आयुस हर छोटे पेर की डाली को देख रहा था

20 मिनट बाद आयुस को जो चाहिये था मिल जाता है आयुस डाली काट के ले लेता है

अयुसी – भाई अब हम चले

आयुस – हा

तभी आयुस को कुछ आवाजे सुनाई देती है

आयुस – ये आवाजे

आयुसी डरते हुवे – किया हमारे आस पास कुछ है

आयुस – नही रे ये आवाजे तो कही सुनी सुनी है अरे हा ये तो झरने की आवाजे है गुरिया चलो मेरे साथ

आयुसी – जी भाई

आयुस आयुसी 12 मिनट चलने के बाद सामने का सीन देखते रह जाते है सामने वाटरफाल था यानी झरना खूबसूरत नजारा था आयुस ये देख बहोत खुश हो जाता है

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आयुस पास आके बहता साफ पानी देख – गुरिया पानी का इंतज़ाम हो गया ये झरने का पानी साफ है हम पी सकते है दूसरी इस जगह पे नहा सकते है बिना खतरे के समुंदर मे नहाना बहोत खतरनाक है

आयुसी – हा भाई आपने सही कहा यहा नहाना अच्छा रहेगा खूबसूरत जगह भी है

आयुस – चलो चलते है बाद मे आके नहायेगे पानी पीने का लेके भी जायेंगे

आयुसी – हा

आयुस फिर कैप के पास आके बैठ चाकू से डाली को काट हथियार शिकार करने के लिये बनाने लगता है बाकी सब बैठे देखते रहते है

1 घंटे बाद अभय ने हथियार बना लिया था शिकार करने के लिये

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एक था धनुष तीर दूसरा गुलेल ये दोनों शिकार करने के लिये बहोत काम आने वाला था

अमृता – तुने ये कैसे बनाया बेटा

बिनीता – हा तुने बरे आराम से बना दिया

आयुस मुस्कुराते हुवे – मेने वीडियो मे देखा था याद था बना लिया

आयुस – भाई आप कमाल है

आयुस – अरे हा मा बुआ हमे एक झरना मिला है जहा हम नहा भी सकते है पानी पी भी सकते है बस अब शिकार करना होगा जो मे कर लुगा

अमृता – ये तो बहोत अच्छी बात है इस जंगल मे पानी मिल गया

बिनीता – शिकार तु कर ही लेगा

आयुस – हु

10 बज रहे थे आयुस सभी को लेके झरने के पास आता है

अमृता बिनीता – बहोत खूबसूरत जगह है

आयुस किनारे जाके छोटे गोल पथर् ढुंढ कर पॉकेट मे रखने लगता है 40 पथर् लेने के बाद

आयुस सभी को देख – मा बुआ गुरिया मे जा रहा हु आगे शिकार करने आप सब नहा लो और हा एक ही कमरे है याद रखना

आयुस चला जाता है जंगल के अंदर

अमृता – एक कपड़े है तो हमे बिना कपड़े नंगे नहाना होगा

बिनीता – भाभी हालात ही ऐसे है

आयुस – हु भाई गये है आने से पहले हम नहा लेते है

सर्म रो तो सब को आ रही थी लेकिन हालात ऐसे थे जहा सर्म नही हालात के हिसाब से चलना था

आयुस जंगल के अंदर आता है हाथ मे गुलेल लिये पीठ पे धनुष रखे आयुस धीरे धीरे चल पेर पे चिरिया को देख रहा था कई चिरिया थे साफ है जंगल है जहा कोई इंसान नही लेकिन चिरिया जानवर भरे परे है

अभय एक चिरिया को देख गुगेल मे पथर् रख निसाना लगा के चला देता है लेकिन चिरिया के पास से चला जाता है चिरिया भी आवाज सुन भाग जाती है

आयुस – धत आधे घंटे निसाना लगाने की परेस्टिक् की फिर भी

आयुस आगे एक और चिरिया को देख निसाना लगाता है इस बार लग जाती है चिरिया नीचे गिर जाती अभय उठा के खुश होके अपने कमर के लगे लकरी से बनाया मास्केत मे रख लेता है अभी आयुस पुरा जंगली शिकारी लग रहा था

आयुस ऐसे ही 10 चिरिया का शिकार कर लेता है 25 मिनट मे

आयुस – हु इतना काफी है आज के लिये जंगल है तो शिकार की कमी नही है

आयुस फिर अपने लोगो की तरफ चल देता है तभी आयुस को सामने खरगोस् दिखाई देता है आयुस खरगोस् को देख रुक जाता है और अपना तीर कमान निकाल धनुष पे तीर लगा के घुटने पे बैठ सांत होके खरगोस पे अच्छे से निसाना लगा के छोर देता है

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खरगोस् आराम का ध्यान नही था उसे पता नही था एक तीर उसकी तरफ आ रहा है तीर आके सीधा खरगोस् के पेट मे जाके लगती है खरगोस् खतम आयुस पास जाके उठा के रख लेता है

आयुस – माफ करना जिंदा रहने के लिये मुझे शिकार करना होगा

आयुस अपनी मा सब के पास आता है सभी आयुस को देखते फिर शिकार को देखते है

अमृता – तो तुने शिकार कर ही लिया चिरिया खरगोस् को देख मुझे दया आ रही है

बिनीता – भाभी लेकिन हमारी मजबूरी है

आयुस – हु मजबूरी नही होती तो भाई उन्हे मारते हु कियु

अमृता – हु समझ सकती हु तुम सब सही को

आयुस – अच्छा तो आप लोगो ने नहा लिया तो अब मे जा रहा हु आप लोग जाये

बिनीता हस्ते हुवे – ठीक है जल्दी आ जाना

अमृता मुस्कुराते हुवे – चलो गुरिया

आयुसी – हु

आयुस पहले सभी चिरिया के पंख निकाल साफ करता फिर नँगा होके नहाने लगता है आयुस अपना लंड पकर – उफ रीमा ऑन्टी आपकी बहोत याद आ रही है उफ लेकिन आयुस लंड हिलाना छोर नहा के बाहर आता है कपड़े पहन अपना शिकार लेके कैप के पास आता है

आयुस आग जला के चिरिया को एक लम्बे लकरि मे लगा के आग के ऊपर रख पकाने लगता है बाकी सब बैठे देखते रखते है भूख तो सब को लगी हुई थी एक एक कर आयुस सब चिरिया को पका देता है एक एक अमृता बिनीता आयुसी को देता है एक खुद रख बाकी चिरिया खरगोस् को अच्छे से रख देता है बाकी चिरिया रात के लिये खरगोस् सुबह के लिये

सभी के हाथ मे पका चिरिया था आयुस तीनों को देख – अरे मसाला भूल गया आयुस मसाला निकाल सब पे डाल देता है हा अब खाओ

लेकिन अमृता बिनीता आयुसी खाने से कटरा रहे थे

आयुस सभी को देखता है फिर खुद पहले एक बाइट लेता हुवे खाता है आयुस – वाह बहोत अच्छा स्वाद है मजा आ गया

आयुस को मजे से खाते देख सभी को भी रहा नही जाता सभी भी खाने लगते है

अमृता – हु सच मे बहोत अच्छा स्वाद है मजा आ गया

बिनीता – हु सही कहा भाभी मुर्गी से अच्छा स्वाद है

आयुसी – हु सच मे मजा आ रहा है

आयुस मुस्कुराते हुवे – मजा आये ना आये खाना तो परेगा ही वैसे चिरिया कोई भी हो खाने मे अच्छा ही लगता है

20 मिनट बाद

खाना पीना हो चुका था

अमृता – उफ खाना पीना तो हो चुका अब क्या

आयुस – हु अब कर ही किया सकते है घुमेगे बाते करेगे ऐसे ही टाइम पास कम होगा

बिनीता – हु उसके अलावा कोई रास्ता भी तो हमारे पास नही है

आयुसी – बुआ अपने सही कहा पता नही और कितने दिन यहा रहना परेगा

         पास्ट

आयुस राज के घर 1 दिन बाद दोपहर को जाता है आयुस अंदर जाता है और राज को आवाज लगाता है

रीमा कमरे से बाहर आती है और आयुस को घूर के देखती है

आयुस नजरे नीचे कर – वो ऑन्टी माफ करना मुझे पता नही था आप

रीमा – कोई बात नही मुझे पता है तेरी गलती नही थी

आयुस – हु वैसे राज कहा है

रीमा – कहा होगा अपने बेकार दोस्त के घर

आयुस – अरे आप मुझे बेकार केह रही है

रीमा मुस्कुराते हुवे – तु नही रे उसके बाकी दोस्त को बोला

आयुस – अच्छा मे चलता हु वैसे ऑन्टी आप खूबसूरत तो बहोत है लेकिन उस दिन जो देखा तो सच मे आप कयामत लग रही थी इस उमर मे भी आपकी बॉडी फिट है सब कुछ बहोत खूबसूरत कमाल का था

रीमा डंडा लेके आयुस की तरफ आते हुवे – कमीने रुक तुझे मे बताती हु

पर आयुस तो तेजी से भाग जाता है

रीमा – कमीना वैसे किया मे इतनी खूबसूरत छी किया सोचने लगी फिर आ तू कसम से बहोत मरुगी

परजेंट

करने को कुछ था नही जंगल मे जो फसे थे आस पास घूम बाते कर बाते करते साम हो जाती है

आयुस बैठा एक पथर् पे बैग से मछली वाला काटा धागा निकाल अच्छे से बाँध कर लेता है

आयुसी – भाई आप मछली पकरने वाले है

आयुस – हु कियुंकी हम जंगल मे तो जो मिल जाये सामने समुंदर है पीछे जंगल मछली चिरिया जानवर की कोई कमी नही है बस हमे पका के खाना होगा ना रोटी चावल कुछ नही

आयुसी – हु रोटी चावल बिना उफ कैसे कटेगी दिन रात

आयुस मुस्कुराते हुवे – जिंदा बाहर निकल गये यही बहोत है फिर घर जाके जी भर खायेंगे

अमृता – हु हमे हालात के हिसाब से ढलना होगा

बिनीता – ह आपने सही कहा भाभी अब हमे पका मास मछली ही खाके जिंदा रहना है

आयुस – बिल्कुल सही

आयुस – मेने एक घेरा बनाया था पथर् से झरने के पास ताकि कोई छोटी मछली फस सके जाके देखना होगा

आयुसी – छोटी मछली का किया करेगे हम

आयुस – पागल इस काटे मे लगा के बरी मछली पकरने के लिये

आयुसी – अच्छा

आयुस – मे जाके देखता हु

बिनीता – मे भी चलती हु

आयुस – हु

आयुस को समुंदर के किनारे से एक पुरानी पानी का बोतल मिला था उसे ले लेता है फिर बिनीता के साथ झरने की तरफ निकल परता है

कैप से झरने तक जाने मे 30 मिनट के पास लग ही जाते थे

आयुसी अमृता बैठे बाते करते हुवे समुंदर को देख रहे थे

अयुसी – मा भाई हमारे साथ नही होता तो हमारा क्या होता

अमृता – तो हम एक हफ्ते भी जी नही पाते

आयुसी – हु

अमृता – लेकिन लाला है तो हमे डरने की जरूरत नही है

आयुसी- आपने सही कहा कहा मा भाई को अच्छे से पता है जंगल मे कैसे जिंदा रहना है

अमृता मुस्कुराते हुवे – सही कहा

आयुस बिनीता पहुँच जाते है आयुस पथर से गोल घेरा बनाया हुआ था बस एक जगह ठोरी सी जगह छोर दी थी ताकि मछली अंदर आ सके

आयुस देखता है 3 मछली जो 2 या 3 इंच के थे फसे थे आयुस देख खुश हो जाता है

आयुस मछली को पकर पानी के बोतल मे रख देता है

बिनीता – तीन मछली छोटी मछली से से बरी मछली पकर पाओगे

आयुस – ये तो किस्मत के ऊपर है काटे मे कई बार मछली चारा खा के भाग जाती है नही फस्टि लेकिन कई बार फस भी जाती है ये तो सुबह पता चलेगा चले

बिनीता मुस्कुराते हुवे – हा चलो

आयुस – जब आप घर नही जायेगी तब फूफा जी बेचैन होके फोन करेगे लेकिन फोन नही लगेगा फिर घर आयेगा वहा हम नही होगे फिर फूफा पुलिस के पास जायेंगे उसका भी कोई फायदा नही होगा तो फूफा लास्ट मे परेसान हो जायेंगे आपके बिना

बिनीता – हु तुमने सही कहा लेकिन हम कर भी किया सकते है

आयुस बिनीता कैप के पास आ जाते है

अयुसी – भाई कितने मिले

आयुस दिखाते हुवे – तीन मिले इतना ही मुझे चाहिये था

रात हो चुकी थी आयुस एक मछली निकाल काटे मे लगा के पानी मे थोरा दूर फेक देता है आयुस दूसरे काटे को भी मछली लगा के फेक देता है दोनों काटे के मछली जिंदा थे तैर रहे थे

आयुस फिर एक लकरि जमीन के अंदर तक धसा के उसमे डोरी बांध देता है

आयुस – चलो ये काम तो हो गया उमीद है एक मे भी कोई बरी मछली फस जाये

आयुस फिर सब के पास आके आग के सामने बैठ जाता है

अमृता – हो गया

आयुस – हा

बिनीता – देखते है सुबह तक कोई मछली फसती है या नही

आयुसी – भाई ने लगाया है जरूर फसेगी

अमृता – तुझे तो भाई का सब काम मे हा ही रहता है

आयुसी आयुस के कंधे पे सर रख – कियुंकी भाई बेस्ट है

आयुस मुस्कुरा देता है

पास्ट

आयुस रीमा से जो कहा उसके बाद 4 दिन तक आयुस राज से मिलने जाता था लेकिन घर के अंदर रीमा के सामने नही जाता था बेचारा डरा जो था

आज भी आयुस साम को राज के घर के बाहर खरा होके आवाज लगा रहा था तभी रीमा बाहर आके आयुस को देख – अंदर आ नही तो तेरी मा को बता दुगी

आयुस डर के – जी

. आयुस अंदर जाता है रीमा आयुस को पकर – बचु आज हाथ लगा है अब तेरा क्या होगा क्या बोला था उस दिन है फिर से बोल

आयुस डरते हुवे – जो मेने कहा सही ही कहा ऑन्टी

रीमा – अच्छा क्या

आयुस रीमा को एकदम से बाहों मे भर – हा आप को नँगा सब देखा आपकी बॉडी सब कमाल की खूबसूरत है फर्क नही परता आप मुझे मारे गुस्सा करे पर मा को मत केहना

रीमा हैरान होके आयुस को देखती है फिर सर्म से – अच्छा ठीक है माफ किया अब छोर मुझे

आयुस मन मे – हु मुझे तो आपकी चुत मारनी है डरने से नही मिलेगी

आयुस रीमा को छोर – वैसे ऑन्टी खूबसूरत तो आप बहोत है बॉडी भी कमाल की है देख कर लगता है आप अभी 26 की है

रीमा हस्ते हुवे – पागल 26 की नही हु तेरी माँ से छोटी हु बस

आयुस मुस्कुराते हुवे – लोग सही केहते है औरते अपनी उमर नही बताते

रीमा मुस्कुराते हुवे – बिल्कुल सही केहते है

आयुस मुस्कुराते हुवे – उस दिन मेरी किस्मत अच्छी थी उफ आपका हुस्न देखने को मिल

रीमा सर्म से – ओये हद मे रह मार खानी है

आयुस रीमा के होठो पे जल्दी से किस कर भागते हुवे – मार नही किस चाहिये था जो मेने ले लिया

रीमा हैरान शोक अपने होठ पे उंगली रखते हुवे – कमीना अब तो पक्का तुझे मरुगी

रीमा का शरीर काप् गया था

पर्जेंट

खाने का समय हो गया था

आयुस – मेने एक अच्छी जगह पे बरी सी डंडे पे कपड़े का टुकरा बांध दिया है ताकि कोई पास से गुजरेगा तो समझ जायेगा यहा कोई फसा है आज मे देखता रहा लेकिन कोई नही आया हु लेकिन कोई ना कोई आयेगा तो जरूर चलो खाते है फिर सोते है

सभी – हु

खाना पीना होने के बाद सब बिस्तर पे लेत जाते है अंधेरे मे कोई साफ एक दूसरे को देख नही सकता था आयुस के पास फोन था लेकिन बंद कर के रख दिया था

अमृता – किसने सोचा था एक दिन हम ऐसे हालात मे फसेगे और हमे इस जंगल समुंदर के बीच सोना परेगा उपर से चारों तरफ खतरा है जंगल से आने वाली भयानक आवाजे डरा देती है

बिनीता – हा मुझे भी आवाजे सुन बहोत डर लग रहा है लेकिन अब हमे रोज सुनना परेगा

आयुसी को अपने भाई से चिपक कर सोई थी

आयुसी – भाई है तो मुझे डर नही

आयुस – बिल्कुल गुरिया

फिर ठोरी बात के बाद सब सो जाते है

रात के 12 बजे सब गहरी नींद मे थे लेकिन बिनीता को ऐसा मेहसूस होता है जैसे उसके चुके कोई दबा रहा है जिसकी वजह से बिनीता की नींद खुल जाती है बिनीता फिल करती h ये सच मे हो रहा है कोई उसके चूचे पकर दबा रहा है

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बिनीता हैरान शोक दर्द मे मुह बंद कर – उफ आयुस बेटा तु कैसे मेरे साथ ये कर सकता है आह दर्द हो रहा है बेटा तुने ये कर मेरा दिल तोर मुझे दुख दिया है तू पाप कर रहा है रुक जा

तभी बिनीता को कुछ सुनाई देता है जिसे सुन बिनीता को झटका लगता है

आयुस नींद मे बिनीता के दोनों चूचे दबा रहा था

आयुस नींद मे चूचे दबाते हुवे – उफ रीमा ऑन्टी आपके चूचे तो आज बहोत टाइट बरे लग रहे है मुलायम भी उफ मजा आ रहा है आह

बिनीता हैरान शोक मन मे – क्या रीमा आयुस बेटे के बीच वो सब कैसे रीमा तुम अपने बेटे के ऊपर के लरके के साथ छी

आयुस – उफ आपकी चुत चुदाई करने मे मजा बहोत आता है आह कितनी गर्म चुत है आपकी चलो खोलो ना मेरा लंड आपकी चुत मे जाने के लिये बेचैन है आह

बिनीता हैरान शोक – छी कैसी कैसी बाते कर रहा है ये आह मा मेरे चूचे बहोत जोर से दबा रहा है उफ आह अब समझ मे आया आयुस बेटा नींद मे सब कर रहा है उफ मुझे लगा आह मा मुझे रोकना होगा

बिनीता आयुस के हाथ हटा के चूचे से दूसरी तरफ लेत जाती है आयुस भी अब आराम से सो जाता है

बिनीता अपने चूचे छुटे हुवे – उफ कितना जोर से दबा दिया दर्द हो रहा है यकीन नही हो रहा रीमा आयुस के बीच हाय मुझे तो यकीन करना मुश्किल हो रहा है रीमा कैसे आयुस से छी

आयुस जवान लरका था जब से रीमा की चुत मिलने लगी थी जब दिल करता मोक्का देख रोज एक ना एक बार चुदाई करता ही करता था रीमा भी आयुस के लंड लिये बगैर नही रह पाती थी लेकिन जंगल मे आने के बाद पहली बार आयुस को बिना चुदाई के रहना परा एसी लिये सपने आये

         … आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏😲

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