वसु हाँ में सर हिला देती है और फिर डीपू को फ़ोन कर के २ दिन बाद आने को कहती है… और उससे कहती है की वो किसी को कुछ नहीं बताये ख़ास कर के दिनेश को और चुप चाप वहां आ जाए…
अब आगे ..
12th Update: शादी
अगले दिन वसु बाकी सब को फ़ोन कर के घर बुलाती है. वो लोग वजह पूछते है तो कहती है की जब वो यहाँ आएंगे तो उन्हें वजह बताएगी.
सबसे पहले दीपू आ जाता है और आने के बाद सबसे पहले वो अपने नाना नानी के पास जाता है.
दीपू अपने नाना के घर आने से पहले दिनेश से कहता है की वो अपने नाना के घर जा रहा है क्यूंकि उनकी तबियत ठीक नहीं है और उसकी माँ ने उसे बुलाया है. दिनेश भी थोड़ा चिंता जताते हुए ठीक है यार जा.. सब ठीक हो जाएगा. कोई फ़िक्र मत कर .. अगर तुझे किसी चीज़ की ज़रुरत पड़ेगी तो फ़ोन कर देना. मैं आ जाऊँगा. ठीक है?
दीपू: ज़रूर यार.. अगर ज़रुरत पड़ी तो तुझे फ़ोन कर दूंगा. चल अब चलता हूँ मैं
दिनेश: और कब तक आएगा?
दीपू: पता नहीं यार वहां की हालत देख कर मैं तुझे फ़ोन करता हूँ और फिर ऐसे ही थोड़ी बात कर के दीपू अपने नाना के घर निकल जाता है.
दीपू अपने नाना नानी को देख कर उनके पाँव छु कर आशीर्वाद लेता है. वो देखता है की उन दोनों की हालत बहुत ख़राब हो चुकी है. दीपू को देख कर उसकी नानी उसे आशीर्वाद देते हुए पूछती है..
नानी: क्या मैं अपने पोते को आशीर्वाद दूँ या अपने होने वाले दामाद को.. और थोड़ा मुस्कुरा देती है.
दीपू: नानी आप भी ना.. मैं हमेशा आपका पोता ही हूँ और रहूंगा. और रही बात दामाद की तो उन दोनों को देख कर कहता है की आप चिंता मत कीजिये. मैं आपकी दोनों बेटियों को बहुत प्यार दूंगा और दोनों को बहुत खुश रखूंगा. नानी ये बात सुन कर उसकी आँखों में १- २ बूँद आंसूं आ जाते है तो दीपू आंसूं पॉच कर अपने नानी को गले लगा लेता है और वैसे ही अपने नाना को भी गले लगा लेता है.
फिर वो बाहर आकर अपनी माँ को देखता है तो वो भी खुश हो जाती है और उसे गाला लगा लेती है.
वसु: आ गया मेरा बेटा.. और उसका माथा चूम लेती है. दीपू उसको गले लगा कर धीरे से उसके कान में: आपका बेटा नहीं बल्कि होने वाला पति और उसको देख कर आँख मार देता है. वसु भी समझ जाती है और थोड़ा शरमाते हुए अपने आँखें झुका लेती है. दीपू को दिव्या दिखाई नहीं देती तो वसु से मजाक में पूछता है की अपनी सौतन नहीं दिख रही है.. कहाँ चली गयी. वसु भी देखती है तो उसे दिखती नहीं तो कहती है यहीं कहीं होगी.
फिर बाद में उसके चाचा रामु, चाची , राखी, बुआ लता और फिर मीना की माँ कविता.. सब वहां आ जाते है.
सब लोग ख़ास कर के महिलायें दीपू को देख कर एकदम खुश हो जाते है और सब उसे अपने गले लगा लेते है क्यूंकि अभी तक उन्हें पता नहीं था की सब लोग एक साथ वहां कैसे आ गए है. .
लता दीपू को गले लगा कर तू तो बहुत बड़ा हो गया है रे और कितना आकर्षक दिख रहा है. जब वो दीपू को अपने गले लगा लेती है तो उसकी बड़ी चूचियां दीपू के सीने में डाब जाती है जिनका अहसास दोनों को होता है. दीपू कुच्च नहीं कहता और चुप हो जाता है.
वैसे ही हाल उसका कविता के साथ भी होता है. दीपू जब कविता को देखता है तो मन में सोचता है माँ जी तो एकदम मस्त माल की तरह दिख रही है. उसकी गांड तो कहर धा रही है.

कविता उसको देख कर पूछती है की वो क्या सोच रहा है तो दीपू अपने होश में आकर कुछ नहीं कहता. कविता भी उसको गले लगा लेती है और उसकी ठोस चूचियां भी उसके सीने से टकराती है. दीपू भी गले लगते वक़्त धीरे से अपने हाथ पीछे ले जाका उसकी गांड को दबा देता है जिसका अहसास कविता को भी होता है. वो बिना किसी के देखे दीपू को बड़ी कामुकता से देखती है लेकिन कुछ नहीं करती.
दीपू: माँ जी आप तो बहुत जवान दिख रही हो. लगता नहीं की आप मेरी मामी की माँ हो.. आप दोनों तो एकदम बेहन लगती हो. कविता ये बात सुन कर शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती.
रात को सब लोग खाना खा कर इकट्ठा होते है तो लता पूछती है की क्या बात है की सब को उन्होंने बुलाया है. वसु सब पे नज़र डालती है और कहती है की दिव्या की शादी दीपू से होने वाली है. ये बात सुनकर सब के होश उड़जाते है और सवालिया नज़र से वसु दिव्या और दीपू को देखते है. तो वसु फिर सब को पिछले दिनों हुए बातों के बारे में सब बताती है और कहती है की उनके माँ पिताजी की हालत और बिगड़ने से पहले ही वो उनकी शादी कराना चाहती है. बात वहां तक ठीक था लेकिन जब उनको पता चलता है की वसु भी शादी करेगी तो उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहता लेकिन फिर आखिर में सब मान जाते है क्यूंकि सब पहले से ही तय हो गया था और वैसे भी इन बातों में दीपू के नाना नानी की सहमति भी थी. और ख़ास कर के जब सब लोग उन दोनों की हालत देखते है तो सब मान जाते है और अब बहुत देर भी हो गयी थी और शादी की तैयारी में लग जाते है.
अगले २ दिन तक सब अपने कामों में व्यस्त रहते है लेकिन दिव्या चालाकी से दीपू से बचती रहती है. आखिर में दीपू दिव्या को अकेले में पकड़ ही लेता है और उसको एक कमरे में ले जाकर दीवार से सटा हुए कहता है
दीपू: क्यों मैं आके २ दिन हो गए है और अब तक एक बार भी नहीं मिली तुम. दिव्या शर्मा के अपनी आँखें नीचे करते हुए कहती है की मुझे शर्म आ रही है. दीपू धीरे से उसके कान में कहता है की तुम्हे ये शर्म बहुत महंगी पड़ेगी. दिव्या को ये बात समझ नहीं आती तो अपनी नज़र उठा के दीपू को देखती है तो दीपू हस के कहता है मेरा मतलब है तुम ऐसे ही शरमाओगी तो सुहागरात में तुम्हे बहुत महंगी पड़ेगी.
उस रात को तुम्हे सोने नहीं दूंगा याद रखना. दिव्या भी हस देती है और कहती है की वो भी उस पल का इंतज़ार करेगी. दीपू दिव्या को किस करने जाता है तो दिव्या कहती है १- २ दिन और रुक जाओ ना फिर मैं भी आपको कभी नहीं रोकूंगी.
दीपू को भी ये बात सही लगती है और मन में सोचता है की जब वो इतने दिन रुक गया है तो १- २ दिन और सही और दिव्या को छोड़ देता है. दिव्या वहां से जाने लगती है तो दीपू फिर से उसको पकड़ लेता है और हलकी आवाज़ में कहता है
दीपू: तुम वहां सब साफ़ और चिकनी रखना. दिव्या को समझ नहीं आता तो पूछती है क्या? दीपू हस देता है और अपना हाथ उसके साडी के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर रख कर.. यहाँ..
दिव्या एकदम शर्मा जाती है और उसको चिढ़ाते हुए वहां से भाग जाती है.
पहली शादी: दीपू और दिव्या की
आखिर में वो दिन आ जाता है जब पहले दीपू और दिव्या की शादी होने वाली थी. घर की सब महिलाएं दिव्या को अच्छे से सजाती है. सजाने के बाद दिव्या अपने आप को आईने में देखती है तो वो बहुत सुन्दर दिखती है जैसे कोई अप्सरा ऊपर से उतर के आयी हो. उसको देख कर उसकी नानी और वसु उसकी नज़र उतारते है और कहते है की वो बहुत सुन्दर लग रही है और प्यार से उसका माथा चूम लेते है.

वहीँ दुसरे कमरे में दीपू भी एकदम तैयार हो जाता है और वो भी दूल्हे के भेष में एकदम हैंडसम और सुन्दर लग रहा था.

सब महिलाएं दिव्या को सजा कर जब दीपू के कमरे में आकर उसको देखते है तो सब की आँखें खुश से बड़ी हो जाती है क्यूंकि दीपू वैसा लग ही रहा था. लता और कविता दोनों उसको देख कर अपने मन में सोचते है की वो कितना सुन्दर लग रहा है और काश उन्हें को इस उम्र में ऐसा कोई लड़का मिल जाए तो वो भी अच्छे से जी सकेंगे. वो दोनों अलग अलग ऐसी बातें सोचते रहते है और उन्हें पता भी नहीं चलता की उसको देख कर उनकी चूते पानी छोड़ देती है. जब उन्हें इस बात का एहसास होता है तो दोनों हस देते है और फिर चुपके से बिना किसी के दिखे बाथरूम जा कर अपने आप को साफ़ कर के फिर से दीपू के पास आ जाते है.
वहीँ मीना भी कुछ ऐसा ही सोचती है. मन में सोचती है लड़का तो बहुत स्मार्ट और हैंडसम है.. एकदम चिकना और प्यारा… काश इसके मामा भी ऐसा होता. लड़का इतना सुन्दर है लेकिन क्या उसका “सामान” भी ऐसा होगा क्या? फिर जब उसको थोड़ा होश आता है तो सोचती है की वो क्यों ऐसी बातें सोच रही है? लेकिन फिर उसका मन कहता है.. क्या करून.. ये साली जवानी भी ऐसी ही है. इसके मामा मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते और मैं तड़पती रह जाती हूँ.
इतने में पुजारी भी आ जाते है और फिर शादी का कार्यक्रम शुरू होता है और फिर समय पे दीपू दिव्या को देखते हुए उसका हाथ पकड़ता है और फिर उसकी मांग भर देता है और पूरे रस्मों के साथ शादी हो जाती है दोनों की.


शादी के बाद दोनों सब से आशीर्वाद लेते है. नाना नानी उनको आशीर्वाद देते हुए.. सदा सुखी रहो कर के उनको आशीर्वाद देकर उनको गले लगाते हुए उनका माथा चूम लेते है. ऐसे ही वो सब से आशीर्वाद लेते है और पुजारी भी अपना काम ख़तम कर के निकल जाते है. निकलने से पहले कहते है की वो कल भी इसी वक़्त आ जाएंगे.
शादी के बाद सब बहुत खुश होते है और सब दिव्या की टांग खींचते है की आखिर वो अब सुहागन हो गयी है. कविता उसको अकेले में ले जाकर उसके चेहरे को अपने हाथ में लेकर: तुम तो एकदम गुड़िया दिख रही हो बेटा और उसको प्यार से गाल पे चूम लेती है और कहती है की वो जल्दी से उसे खुश खबर भी दे और उसे (भी एक तरफ से) नानी बना दे.
दिव्या ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.
वहीँ बाकी सब भी उसके साथ छेड़खानी करते रहते है. सब फिर खाना खाने के बाद दोपहर को उनके नाना नानी सो जाते है. बाकी सब ये सोचते है की उनकी सुहागरात कब होगी तो कविता कहती है की पहले दीपू और वसु की भी शादी हो जाए. कल इस समय तक दोनों भी बंधन में जुड़ जाएंगे तो फिर सुहागरात के बारे में सोचते है. सब इस बात को मान जाते है और उस दिन दोनों दीपू और दिव्या अलग कमरों में सो जाते है.
दोनों अपनी अपनी सोच में रहते है.. जहाँ दीपू सुहागरात के बारे में सोचता है तो उसका लंड एकदम तन जाता है तो वहीँ दिव्या की भी बुरी हालत होती है ..लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाते और उत्तेजित हो जाती है.
दूसरी शादी: दीपू और वसु की
दुसरे दिन फिर सब वसु को तैयार करते है और वसु भी कल दिव्या की तरह सज कर एकदम सुन्दर लगती है.

उसको देख कर सब भी बहुत खुश हो जाते है और उसे भी बधाई देते है.
दोपहर को फिर पुजारी आते है और आज के दिन दीपू और वसु की शादी करवाते है. दोनों भी बंधन में बंद जाते है और उनके नाना नानी से आशीर्वाद लेते है.
वसु भी आज एकदम खुश हो जाती है की एक तो पहले उसकी बेहन की शादी हो गयी और वो भी फिर से सुहागन बन गयी है.
इस बार लता उसकी टांग खींचती है और कहती है की वो उसे जल्दी ही दादी बना दे तो वसु हस कर अपनी आँखें नीचे कर लेती है. वहीँ मीना और रानी भी दोनों से कहती है की वो भी जल्दी ही मौसी बनना चाहती है और हस देती है.
आज वसु के माता पिता बहुत खुश थे की आखिर में उनकी बेटी दिव्या की शादी हो गयी है और वो चैन से अपनी बाकी के दिन गुज़ार सकते है. ये बात वसु भी जान लेती है और जब वो दोनों दोपहर को खाना खाने के बाद सोने जाते है तो वसु भी उनके साथ जाती है.
वसु: माँ पिताजी आप खुश तो हो ना?
पिताजी: हाँ बेटी अब मेरी चिंता थोड़ी दूर हो गयी है. भगवान् के पास जाने से पहले मेरी यही इच्छा थी. अब पूरी हो गयी है.
वसु: आप चिंता मत कीजिये. दीपू उसको बहुत खुश रखेगा.
माँ: बेटी तू तो खुश है ना?
वसु: हाँ मैं भी खुश हूँ. सोचा नहीं था की मैं फिर से सुहागन बन जाऊँगी. लेकिन होनी को कौन टाल सकता है? मुझे पता है दीपू हम सब को बहुत खुश रखेगा. आप चिंता मत कीजिये.
पुजारी भी खाना खा कर जाने लगते है तो लता उनसे पूछती है की उनकी सुहागरात कब करा सकते है.. तो पुजारी कहते है की कल दीपू और दिव्या की और उसके बाद दिन दीपू और वसु की. ये बात सुनकर सब मान जाते है और फिर पुजारी अपने घर निकल जाते है.
फिर घर की बड़ी औरतें लता और कविता कहते है की आज भी दोनों वसु और दिव्या अलग सोयेंगे. और कल दीपू और दिव्या और परसों दीपू और वसु… ऐसा कहते हुए हस देते है क्यूंकि वहां पे सब को इसका मतलब पता था……
