10th Update:
नाना के घर
दो दिन बाद वसु उसे घर में फ़ोन कर के बताती है वो दिव्या और उसकी बेटी निशा आ रहे है. जब उसके नाना दीपू के बारे में पूछते है तो वसु कुछ बहाना बना कर कह देती है की वो अपने दोस्तों के साथ बाहर गया हुआ है और फिर तीनो वसु के पिताजी के घर के लिए निकल जाते है.
२- ३ घंटे की सफर के बाद तीनो घर पहुंच जाते है. उसके माँ बाप तीनो को देख कर बहुत खुश हो जाते है. तीनो उनके पेअर छु कर आशीर्वाद लेते है. उसके पिताजी मीना और रानी को भी बताते है की उनकी बेहने आ रही है तो वो लोग भी उनसे मिलने वहां आ जाते है. वसु और दिव्या अपनी बेहन और भाभी को मिलकर बहुत खुश होते है और फिर सब से गले मिलते है.
निशा भी उन सब को देख कर बहुत खुश हो जाती है और सब के गले लगती है.
मीना वसु के गले लग कर कहती है की आप तो दिन ब दिन जवान दिख रही हो. .. क्या राज़ है?
वसु: चुप कर. ..कुछ भी बोलती रहती है.
मीना: अरे मैं तो सही कह रही हूँ. तुम दोनों (निशा की तरफ देख कर) माँ बेटी नहीं बल्कि बेहन लग रही हो और हस्ते हुए आँख मार देती है.
फिर सब लोग एक दुसरे के हाल चाल पूछने के बाद आराम करते हुए बातें करते है तो इतने में उसके पिताजी पूछते है वसु से की उसको क्या बात करनी है? वसु कहती है की रात को वो लोग सब आराम से बात करेंगे क्यूंकि बात थोड़ी गंभीर है. सब लोग मान जाते है और फिर सब अपने कमरे में आराम करने चले जाते है. उनका घर बड़ा था और सब के लिए अलग अलग कमरे थे.
शाम को मीना सब के लिए चाय बनाती रहती है तो वसु किचन में जा कर उससे बात करने लगती है.
वसु: क्यों मीना कैसे चल रहा है? सब ठीक तो है ना? भाई कैसा है? तू हमें खुश खबर कब दे रही है?
वसु ये बात जब कहती है तो मीना का चेहरा एकदम उतर जाता है और रोने की सूरत बना लेती है.
वसु उसको देख कर घबरा जाती है और पूछती है की क्या हुआ? मीना एकदम रोनी जैसी सूरत से कहती है की होना क्या है? आपके भाई अपने काम से थके हारे होते है और फिर सो जाते है. मैं बहुत कोशिश करती हूँ की बेहलाओं… जगाओं… लेकिन वो कुछ नहीं कर पाते और मैं प्यासी ही रह जाती हूँ और अपने आप को संतुष्ट करते रहती हूँ.
वसु: ये कब से हो रहा है?
मीना: जब से उनको काम करते वक़्त कंपनी में चोट लगी थी तब से ऐसे है और धीरे से वसु से कहती है की अब तो उनका खड़ा भी नहीं होता.
वसु ये बात जान कर अपना मुँह खोले मीना को देखती रहती है और फिर अपने आपको संभालते हुए कहती है की तू चिंता मत कर.. भगवान के घर धेर है अंधेर नहीं.
वसु : तुम लोग बच्चा क्यों नहीं गोद ले लेते?
मीना नहीं दीदी.. मुझे गोद नहीं लेना है.. स्वय से माँ बनना और अपनी कोख में बच्चा पालना.. ये तो आपसे बेहतर कोई नहीं जाता. आप तो २ बच्चों की माँ हो. आपको तो सब पता है.
वसु: हाँ ठीक कह रही हो. बच्चों को कोख में पालना..उसका आनंद ही कुछ और है लेकिन चलो देखते है. मैं मनोज से बात करती हूँ.
मीना : बात करना लेकिन उन्हें ये मत बताना की हम दोनों के बीच भी बात हुई है लेकिन मुझे नहीं लगता की बात करने से कोई हल निकलने वाला है.
वसु: तू चिंता मत कर. मैं सब देख लूंगी.
इतने में चाय बन जाता है और सब आराम से चाय पीते हुए बात करते है. उतने में उसका भाई मनोज भी आ जाता है और वो भी सब को देख कर बहुत खुश हो जाता है और सब के गले लगता है. रात को जल्दी ही सब लोग खाना खा लेते है क्यूंकि उनके माँ बाप को जल्दी ही सोने की आदत थी.
दिव्या की बात
सब लोग खाना खा कर उसके पिताजी के कमरे में चले जाते है जहाँ सब लो इक्कट्ठा हो जाते है. मनोज, मीना, दिव्या, निशा, रानी और उनके माँ बाप.
पिताजी: तो बोलो बेटा क्या कहना चाहती थी जो तू फ़ोन पे नहीं बता सकती थी.
वसु: सब की तरफ देखते हुए कहती है.. आपको पता है की हम लोग छोटी (दिव्या ) के लिए लड़का ढूढ़ रहे है लेकिन अब तक नहीं मिला तो मुझे भी चिंता होने लगी तो मैंने छोटी की जनम कुंडली हमारे गाँव के में एक बाबा को दिखाया था. ये वही बाबा है जिन्होंने दीपू की जान बचायी जब वो छोटा था. शायद ये बात आप को भी याद हो.
पिताजी: हाँ याद है. तो बाबा ने क्या कहा?
वसु; बाबा ने छोटी की जनम कुंडली देखीं और कहा की इसमें कोई दोष है. ये बात जान कर सब को धक्का लगता है और मीना पूछती है की कैसा दोष? यह बात रानी और मनोज भी पूछते है.
वसु: ये दोष की वजह से ही अब तक इसकी शादी नहीं हुई है. ये बात जान कर सब लोग थोड़ा दुखी होते है तो इतने में वसु कहती है की बाबा ने इस दोष का इलाज भी बताया है जिससे उसकी दोष का कोई असर नहीं होगा और उसकी शादी हो सकती है.
सब एक साथ: क्या इलाज है?
वसु सब की तरफ देखती है और सबसे ज़्यादा अपने माँ बाप की तरफ देख कर कहती है की इसके दोष का इलाज ये है की इसकी शादी अपने घर में ही करनी है. सब लोग ये बात जान कर दंग रह जाते है और कहते है की ये कैसे मुमकिन है.. वसु फिर आगे कहती है की अगर छोटी की शादी बाहर हुई तो उसका पति मर जाएगा और वो जल्दी ही विधवा हो जायेगी और दुखों के पहाड़ में बाकी की ज़िन्दगी गुजारेगी.
उसके माँ बाप को कुछ समझ नहीं आता और अपना सर पकड़ कर एक दुसरे को देखते हुए रो रहे थे. बाकी सब का भी यही हाल था लेकिन वो लोग इस बात को मन्नने के लिए तैयार नहीं थे और कहते है की शायद ये झूट है .
पिताजी: इस उम्र में अभी यही देखना बाकी रह गया हम दोनों को और ऐसा कहते हुए फिर से रोते है.
वसु उनके पास जाकर उनका हौसला बढ़ाती है और कहती है की उसे उस बाबा पे बहुत भरोसा है और उन्होंने अब तक हो भी बात उनके ज़िन्दगी के बारे में बताया था वो सब सच निकला.
वसु फिर कहती है की एक काम करते है. आपको दुविधा है तो हम उसकी कुंडली यहाँ के अपने जो जान पहचान के ज्योतिषी को दिखाते है और देखते है की उनकी क्या राय है? ये वही ज्योतिषी है ना जो हम सब की कुंडली भी बनायी थी और मनोज की शादी की भी उन्होंने हाँ कहा था. अगर वो कुछ अलग कहते है तो फिर हम सोचते है आगे क्या करना है. बाकी सब को भी ये बात सही लगती है और हाँ कह कर कहते है की कल ही ज्योतिषी के पास जा कर दिव्या की कुंडली वहां दिखाते है.
वसु: जाने से पहले मैं एक बात कहना चाहती हूँ.
पिताजी: क्या?
वसु: यही की अगर यहाँ के ज्योतिषी भी वही बात कहते है जो दुसरे बाबा ने कहा है तो मैं छोटी की शादी अपने ही परिवार में करूंगी. वसु की बात सुन कर सब सोच पे पढ़ जाते है और उनके पिताजी कहते है की दुनिया क्या कहेगी की घर के आदमी ने ही दिव्या से ही शादी की है.
वसु: कहने वाले कहते रहेंगे.. लेकिन मेरे लिए आपकी ख़ुशी और छोटी का घर बसना ज़रूरी और ज़्यादा मायने रखता है ना की दुनिया वाले क्या कहेंगे. और वैसे भी मैं देख रही हूँ की इसकी चिंता में आप दोनों की तबियत भी खराब हो रही है. मैं चाहती हूँ की आप के रहते ही इसकी शादी हो जाए.
पिताजी: कौन है अपने परिवार में जो इससे शादी करेगा?
वसु: ये सब बातें बाद में. .. पहले हमें कल ज्योतिषी के घर जा कर एक बार फिर से कुंडली दिखा कर आते है. आगे कौन क्या. .. तब सोचेंगे.
फिर सब लोग कमरे से निकल कर अपने कमरे में जाने लगते है तो मीना पूछती है वसु से की वो मजाक तो नहीं कर रही है.
वसु: मीना की तरफ देख कर… तुझे क्या लगता है की ऐसी बात मैं मजाक में करूंगी? तुमने देखा है ना की बाबा (पिताजी) कितने चिंतित है दिव्या की शादी को ले कर तो मैं मजाक क्यों करूंगी. मीना वसु की तरफ देख कर हाँ में सर हिला देती है और फिर सब अपने कमरे में चले जाते है सोने के लिए.
कमरे में सोते दिव्या वक़्त वसु से पूछती है की आगे क्या होगा? तो वसु कहती है की तू चिंता मत कर. सब ठीक हो जाएगा. मुझे पता है की तू दीपू को भी चाहने लगी है. वसु की ये बात सुन कर दिव्या वसु को देखने लगती है तो वसु कहती है.. ऐसे ना देख मुझे. मैंने तेरी आँखों में उसके लिए प्यार देखा है तो ये नाटक बंद कर और उसके गाल को हलके से चिमटी काटी है तो दिव्या थोड़ा शर्मा जाती है.
वहीँ दुसरे कमरे में मनोज और मीना भी इस बारे में बात करते रहते है की जाने आगे क्या होगा और यहाँ के ज्योतिषी भी वही बात कहेंगे तो.
मीना: अपने परिवार में और कौन है जो दीदी से शादी कर सकता है?
मनोज: पता नहीं यार.. देखते है कल क्या होता है.
मीना फिर मनोज के होंठों को चूमती है और उसके लंड को पकड़ कर खड़ा करने की कोशिश करती है लेकिन वो नहीं हो पाता तो फिर से मीना गरम हो कर प्यासी ही सो जाती है.
दो दिन बाद सब लोग मंदिर जाते है और फिर भगवान का दर्शन कर के वहां से ज्योतिषी के पास मिलने जाते है जब वो थोड़ा अकेला होता है. उनसे बातचीत करके वसु के पिताजी दिव्या की जनम कुंडली उनको देते है और कहते है की ज़रा वो कुंडली को पढ़ कर बताये की क्या लिखा है उस (दिव्या) के लिए. ज्योतिषी वो कुंडली लेकर कहते है की उन्हें एक दिन का समय दे. वो कुंडली को अच्छे से पढ़ कर कल बताएँगे. वैसे भी मैंने ये कुंडली पहले भी पढ़ी है जब ये छोटी थी लेकिन मैं फिर से इसे एक बार देखता हूँ.
उस टाइम वसु भी ज्योतिषी से कहते है की उसकी कुंडली भी एक बार देख ले. ज्योतिषी कहते है की उसकी कुंडली कहाँ है तो वसु अपने पर्स में से अपना वो कुंडली दे देती है जो उसके गाँव में बाबा ने बनाया था. ज्योतिषी वो कुंडली लेकर दोनों को पढ़ कर वो कल बताएँगे ऐसा वो कहते है.
सब लोग मान जाते है और फिर उनका आशीर्वाद लेकर घर के लिए निकल जाते है ये कहते हुए की सब कल आएंगे.
घर आ कर रानी वसु से पूछती है की उसने अपनी कुंडली क्यों दी है? और वो कुंडली उसने कहाँ से बनवायी थी. वसु को पता था की उसने वो कुंडली क्यों दी है लेकिन कुछ नहीं कहती और कहती है की कल तक वो सब रुक जाए.
लोग घर वापस आ जाते है लेकिन सब को उनके माँ बाप के चेहरे पे चिंता साफ़ झलक रही थी. वसु कहती है की उन्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है और आगे जो भी होगा अच्छा ही होगा. उस दिन भी रात को सब अपने कमरे में सोने जाते है और कल की ही तरह आज भी मीना तड़पते हुए सो जाती है. अगले दिन सुबह जब वो काम कर रही होती है तो उसका चेहरा उखड़ा हुआ होता है. वसु पहचान जाती है और जब वो दोनों अकेले होते है तो वसु उसका कारण पूछती है तो मीना कहती है की को बहुत दिनों से प्यासी ही सो रही है. वसु को उसकी हालत पे दया आती है और कहती है की वो इस बारे में सोच कर कुछ करेगी.
दुसरे दिन फिर सब लोग ज्योतिषी के पास जाते है और पूछते है. ज्योतिषी उनसे कहते है की उनकी बेटी दिव्या की शादी में देरी हैं क्यूंकी उसकी कुंडली में दोष है और वो वही बात कहते है जो वसु के गाँव के बाबा कहते है की उसकी शादी उसके परिवार के सदस्य से ही होगी और अगर बाहर हुआ तो वो विधवा हो जायेगी. जब ज्योतिषी वो बात कहते है तो उसके माँ बाप एक दुसरे को देखते है जैसे पूछ रहे हो की और क्या कर सकते है.
पिताजी: और कोई इलाज नहीं है क्या? घर के सदस्य से करेंगे तो दुनिया क्या कहेगी.. की हमने घर में ही शादी कर दी है.
ज्योतिषी: आपकी बात तो सही है. अगर घर में शादी नहीं कर सकते तो मैं कहूंगा की वो बिन ब्याही ही रहे. बाहर शादी कर के विधवा होने से अच्छा है की वो आपके साथ ही रहे.
वसु: और आपने मेरा कुंडली पढ़ा है क्या? ज्योतिषी एक बार वसु की तरफ देखते है ये सोचते हुए की उन्हें पता है वसु क्यों उसके बारे में पूछ रही है.
ज्योतिषी: हाँ मैंने पढ़ा है लेकिन मुझे क्यों लगता है की तुम्हे सब पहले से ही पता है. ज्योतिषी जब ये बात वसु से कहते है तो बाकी सब को कुछ समझ नहीं आता. सिर्फ वसु और दिव्या को ही इस बात का मतलब पता था.
वसु: फिर भी मैं आपसे ही सुन्ना चाहती हूँ.
उसके माँ बाप भी उनसे पूछते है तो ज्योतिषी कहते है की वो जो बात कहेंगे उनको आश्चर्य होगा लेकिन होना वही है और ऐसा होने से ही सब की भलाई है.
माँ- बाप: ऐसा क्या लिखा है?
ज्योतिषी: मैंने आपकी बड़ी बेटी की कुंडली भी देखीं है और उसमें से मैं ये ज़रूर बता सकता हूँ की आप दोनों बेटियों की ज़िन्दगी एक साथ जुडी हुई है.
पिताजी: मतलब?
ज्योतिषी: मतलब ये की आपकी दूसरी बेटी की जहाँ शादी होगी वही आपकी बड़ी बेटी की भी शादी होगी. पिताजी: ये कैसे हो सकता है? वो तो विधवा है.
ज्योतिषी: क्यों विधवा फिर से शादी कर के घर नहीं बसा सकते क्या?
पिताजी: मतलब?
ज्योतिषी: मतलब ये की आपकी बड़ी बेटी की भी दूसरी शादी होगी और दोनों एक ही आदमी से शादी करेंगे. और इसी में आप सब लोगों की भलाई है. मैं इतना ही कह सकता हूँ की उनकी शादी होने के बाद वो सब ख़ुशी से अपनी ज़िन्दगी बिताएंगे.
सब लोग एक दुसरे का चेहरा देख कर और कुछ नहीं कहते और उनके माँ बाप के आँखों से आंसूं निकलते रहते है .
सब लोग ज्योतिषी से आशीर्वाद लेकर अपने घर आ जाते है. दिव्या जब ये बात सुनती है तो उसके मन में लड्डू फूटते है क्यूंकि उसे पता था की वसु उनके माँ बाप को मना लेगी की वो लोग उसकी शादी दीपू से कर दे क्यूंकि वो भी अब दीपू को चाहने लगती है ख़ास कर के उसके जन्मदिन के बाद जब उसने उसको बहुत उत्तेजित कर दिया था. और वैसे भी दिव्या उनके साथ बहुत दिनों से रह रही थी और उसको लगा की दीपू जैसा लड़का ही कोई उकसा जीवन साथी हो. उसका स्वभाव, बातचीत करने का ढंग, etc ये सब उसके मन को भा जाता है जिससे उसपर भी लगाव आ जाता है उसे.
वापस घर आने के बाद वसु सब से कहती है की वो रात को इस बारे में बात करेंगे क्यूंकि बात थोड़ी गंभीर है और सब को सोचने के लिए वक़्त भी चाहिए. अभी वो सब आराम करे और फिर सब दोपहर को खाना खा कर आराम करते है और मनोज अपने काम के लिए निकल जाता है.
रात को खाना खा कर सब उनके पिताजी के कमरे में जमा हो जाते है. तब तक मनोज भी आ जाता है.
वसु: हाँ पिताजी, आप ने भी सुन लिया ना की ज्योतिषी ने क्या कहा है. मुझे पता है की आपको बहुत चिंता है उसके बारे में और मैं भी चाहती हूँ की वो भी शादी कर ले.. वैसे भी अभी उसकी भी उम्र हो रही है और ज़्यादा देर करना सही नहीं होगा. उसे भी एक पारिवारिक जीवन का सुख पाने का अधिकार है और मैं भी यही चाहती हूँ.
पिताजी: तेरी बात तो सही है लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा है.
वसु: मुझे पता है ये बहुत सोचने वाली बात है.. लेकिन इन सब से ज़्यादा मुझे आप दोनों की तबियत और ख़ुशी की चिंता है और मैं चाहती हूँ की कुछ और बुरा होने से पहले (मन में सोचती है की आप के जाने से पहले) मैं आप दोनों के चेहरे पे संतुष्टि देखना चाहती हूँ की अपनी छोटी की शादी हो गयी है.
पिताजी: तुम सही कह रही हो बेटा. हमें भी उसकी ही चिंता लगी रहती है. तेरी माँ ज़्यादा कुछ नहीं कहती लेकिन मुझे पता है की उसको भी बहुत फ़िक्र है. लेकिन सवाल ये है की अपने परिवार में कौन है जिसकी छोटी से शादी कर सकते है और जो तुमसे भी शादी कर ले ..ऐसा कहते हुए वो सब की तरफ नज़र डालते है.
वसु चुप रहती है और देखना चाहती थी की और किसी का नाम आएगा क्या. मीना, मनोज और रानी भी एक दुसरे की तरफ देखते है लेकिन कोई कुछ नहीं कहता क्यूंकि उन्हें समझ में नहीं आता की किस्से शादी की जा सकती है. (मीना और वसु को पता था की मनोज में वो दम नहीं है.. मीना वैसे ही परेशान थी और दिव्या से शादी कर के उसे भी परेशानी हो सकती थी) आखिर में वसु सब की तरफ देख कर कहती है की वो एक लड़के के बारे में सोच रही है और ये बात कह कर चुप हो जाती है.
माँ: कौन है बेटा तेरी ज़ेहन में?
वसु थोड़ा ड्रामा करते हुए अपने गले को ठीक करते हुए कहती है की उसे कोई ऐतराज़ नहीं है अगर दिव्या की शादी दीपू से की जाए तो…….

