Update – 9
सामने उसकी माँ पूरी नंगी बेड से अपने दोनों पैर निचे लटकाये लेटी हुई थी और अपने दोनों हाथो मे अपने बॉब्स को लेकर मसल रही थी और बेड के निचे उनकी दोनों टैंगो के बीच में उनकी चुत मे मुह डाले उनके घर की नौकरानी बसंती थी जोकि पूरी तरह से नंगी थी….
बसन्ती उम्र ३५ साल सांवला कलर ३८ के ब्रैस्ट और चौडी काली गांड़….
सतीश का तो बुरा हाल हो गया बसंती अपनी जीभ से उसकी माँ की चुत कुरेद रही थी… और सोनाली की मादक सिसकारी पूरे कमरे म गुंज रही थी… सोनाली अपने होंठो को अपने दाँतो में दबाये अपनी सिसकारियों रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी पर वो ऐसा करने में असमर्थ थी….
ओ अपने दोनों हाथो से अपने दूध मसल रही थी और कभी अपनी उंगलियो में अपनी निप्पल्स को दबा कर मसल देती….
अब सतीश की नजर बसंती पर जाती है उसके दूध निचे लटक रहे थे और उसकी बड़ी गांड पर जाकर सतीश की नजर रुक जाती है उसकी गांड काफी चौडी थी और उसका काला छेद सतीश को साफ़ नजर आ रहा था… सतीश का लौडा पूरी तरह अकड कर तन गया था, वो उसे बाहर निकाल कर मुट्ठ मारना शुरू कर देता है और फिर उसकी नजर गांड से थोड़ी निचे जाती है तो उसे बसंती की चुत दिखाइ देती है, उसकी चुत काले बालो से घिरि हुई थी और एक दम काली…. अंदर दो मस्त घोडियों को इस तरह देख कर उसका लंड लावा उगलने को तैयार हो जाता है सतीश तुरंत अपना रुमाल निकाल कर अपने लौडे पर लगा देता है और उसका लंड सारा माल उसके रुमाल में गिरा देता है… आज ३ बार झड़ने के बाद वो थक गया था इस्लिये वो अपने लंड को वापस अंदर दाल कर जीप बंद करता है, तभी उसकी नजर घडी पर पड़ती है कॉलेज छूटने का टाइम हो गया था उसका मन तो नहि था ये नजारा छोड़कर जाने का पर उसकी मज़बूरी थी क्युकी शिप्रा उसका वेट कर रही थी… वो तुरंत अपना बैग उठाता है और बाहर निकल कर धीरे से दरवाजे को बंद करके निकल जाता है…
ओर थोड़ी देर मे ही वो कॉलेज पहुंच जाता है और शिप्रा का वेट करने लगता है, थोड़ी देर मे ही उसे शिप्रा किसी लड़के के साथ आती दिखाइ देती है उस लड़के को देखते ही सतीश की आँखों मे खून उतर आता है वो सतीश के क्लास का ही लड़का प्रिंस था और इस कॉलेज का सबसे हरामी लड़का भी वो अक्सर भोलि भाली लड़कियों को पटा कर उनके साथ सेक्स करता और फिर उनकी वीडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल करके अपने दोस्तों के आगे भी परोस देता और इस कारन उसकी और सतीश की कई बार लड़ाई भी हो चुकी थी इस कॉलेज में केवल सतीश ही था जिससे प्रिंस नहि उलझना चाहता था, और प्रिंस उससे बदला लेना चाहता था इस्लिये उसने जानकर शिप्रा से दोस्ती की थी…. और शिप्रा ने इसी साल इस कॉलेज मे एडमिशन लिया था इस्लिये उसे उसके बारे में कुछ भी नहि पता था….
सतीश को देख कर प्रिंस शिप्रा से बाई बोल कर चला जाता है…. शिप्रा सतीश के पास आ जाती है,
शिप्रा- “क्या हुआ भैय्या ऐसे मुह फुलाये क्यों खड़े हो?
सतीश- “तू उस लड़के के साथ क्या कर रही थी?
शिप्रा- “वो प्रिंस था भाईया बहुत अच्छा लड़का है, आपकी क्लास में ही तो पडता है वह”
सतीश- “मे जानता हूँ की कितना अच्छा लड़का है वह, तू बस उससे दूर ही रहा कर”….
शिप्रा- “पर भेया”…
सतीश- “पर-वर कुछ नहि सतीशने कहा ना की उससे दूर रहना मतलब उससे दूर रहना”..
सतीश का ख़राब मूड देख कर शिप्रा उससे कुछ नहि कहती और चुप-चाप बाइक पर बैठ जाती है, सतीश घर की तरफ वापस चल देता ह…
शिप्रा मूड चेंज करने के लिये
शिप्रा- “वैसे भाईया आज आप कहा थे?
सतीश- “थे का मतलब? क्लास मे ही था”….
शिप्रा- “झूठ मत बोलो भाईया मे जानती हूँ की आप कॉलेज में नहि थे… अब आप खुद बताते है की मे घर पर माँ को बताऊ”…
सतीश के पास अब कोई ऑप्शन नहि था पर सच तो वो बता नहि सकता था…
सतीश- हाँ वो आज मे दोस्तों के साथ मूवी देखने गया था”….
शिप्रा- “कोण सी?
सतीश को शिप्रा से इस बात की उम्मीद नहि थी वो उसके इस क्वेश्चन से हडबडा जाता है”….
सतीश- “ओ..वह..सतीश..वह”
शिप्रा- “रहने दो भाईया मे जानती हूँ की आप प्रियंका के साथ थे”…
सतीश की तो फट ही गई थी…
सतीश- “तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है आज कल, चल आज तुझे कॉफ़ी पिलवाता हूँ तू भी क्या याद करेगी की किसी रईश से पाला पड़ा था”….
शिप्रा- “हमं… मुह बंद रखने के लिए रिश्वत पर ऐसा नहि लगता की ये मामला आप कुछ सस्ते मे निपटा रहे हो”…
सतीश- “तो तू बोल मेरी माँ तुझे क्या चाहिये”…
शिप्रा- “अभी तो कॉफ़ी पिलाओँ बाकी बाद मे बताऊंगी”….
शिप्रा सोच रही थी की सतीश उसे डर की वजह से कॉफ़ी पीला रहा है जबकि सतीश चाहता था की सोनाली अपनी प्यास आराम से मिटवा ले और शिप्रा को इस बात का पता भी न चले ….
सतीश कैफ़े कॉफ़ी डे पहुँच कर बाइक स्टैंड पर लगाता है और फिर शिप्रा के साथ अंदर चला जाता है…
अंदर काफी कपल बैठे हुए थे पर सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर ही टिक जाती है…
सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर टिक जाती है, और टीके भी क्यों न वो दोनों एक खूबसुरत कपल लग रहे थे….
सतीश और शिप्रा जाकर अपनी जगह ग्रहण करते है”
सतीश- “कब से जानती है तू उस लड़के को?
शिप्रा जोकि अपने मोबाइल मे लगी हुई थी….
शिप्रा- “कोण से लड़के को?
सतीश- “प्रिंस को, कब से जानती है उसको?
शिप्रा अभी भी मोबाइल मे लगे हुये- “ह्म्म्म… हो गये ३-४ हफ्ते”…
सतीश-“और तुम मुझे अब बता रही हो”…
शिप्रा कोई जवाब नहि देती और मोबाइल मे लगी रहती है….
सतीश उसके हाथ से मोबाइल छीनते हुये- “मे तुझसे कुछ पूछ रहा हु??
शिप्रा मुह बनाते हुए थोड़े ग़ुस्से मे- “तो क्या मुझे तुम्हे अपनी हर बतानी पडेगी… जब मे तुमसे तुम्हारी प्राइवेट लाइफ के बारे मे नहि पूछती, तो तुम्हे क्यों जलन हो रही है, मेरी भी एक प्राइवेट लाइफ है, और मैं नहि चाहती की कोई मेरी प्राइवेट लाइफ मे इंटरफेर करे”….
शिप्रा ने ये बात इतने जोर से कही थी की सभी लोग उनकी तरफ देखने लगते है…
सतीश को तो यकीन ही नहि हो रहा था की उसकी छोटी बहन उससे इस तरह से बात कर सकती है…
थोड़ी देर तक टेबल पर शान्ति हो जाती ह,
इतने मे ही उनकी कॉफ़ी भी आ जाती है…
शिप्रा भी अब अपनी ग़लती पर पछता रही थी….
सतीश- “सॉरी सतीश भूल गया था की तुम्हारी एक प्राइवेट लाइफ भी है”…
सतीश अपनी सीट से उठता है और रूपये टेबल पर रख कर बाहर की और निकल जाता है…
शिप्रा उसे जाते हुये देखति है और फिर ग़ुस्से मे बड़बड़ाते हुये वो भी उसके पीछे तेज कदमो से चलि जाती है….
शिप्रा बाहर निकल कर सतीश को आवाज देती है… पर सतीश बिना सुने अपनी बाइक निकालने के लिए चल देता है…
शिप्रा उसके पीछे चल देती है- “भइया.., भाईया मेरी बात तो सुनो, आई एम सॉरी” उसे जाते हुए देखति रहती है, सतीश थोड़ी आगे जाकर बाइक रोक देता है,
शिप्रा के चेहरे पर हलकी सी स्माइल आ जाती है, और वो भगति हुई सतीश के पास पहुंच कर बाइक पर बैठ जाती है…
शिप्रा- “आई ऍम सॉरी भाई… वो पता नहि अचानक मुझे क्या हुआ, आई डीड नोट वांट तो हार्ट यु”….
सतीश उसे कोई भी जवाब दिए बिना आगे बढ़ जाता है…
शिप्रा पूरे रस्ते उसे मनाती रहती है, पर सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता…
सतीश घर के बाहर बाइक को खड़ी करके डोर बेल्ल बजाता है, डोर सोनाली खोलती है, सतीश एक नजर सोनाली को देखता है वो काफी फ्रेश नजर आ रही थि, ऐसा लग रहा था जैसे की वो अभी अभी नहा कर आई हो….
पर तुरंत ही सतीश ग़ुस्से मे अपने कमरे की और चल देता है….
सोनाली उसे आवाज लगाती है पर वो सीधे अपने कमरे मे चला जाता है….
सोनाली अब शिप्रा की तरफ देखति है तो वो भी अपना सर झुकाए अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी….
सोनाली शिप्रा को आवाज देकर रोकती है और शिप्रा के सामने जाकर खड़ी हो जाती है- “ये सतीश को क्या हुआ और तू इतनी उदास क्यों है?
शिप्रा कोई जवाब नहि देती बस मुह लटकाये कड़ी रहती है….
सोनाली- “लगता है आज फिर तुम दोनों ने झगड़ा किया है, तुम लोग कब सुधरोगे, मुझे तो समझ नहि आता”….
शिप्रा चुपचाप अपने कमरे मे चल देती है,
सोनाली- “है भगवान् कब अकल आयेगी इन दोनों को”…
सतीश अपने कमरे मे ग़ुस्से से आग बबूला हो रहा था आज शिप्रा ने उस दो कोडी के लड़के के लिए उससे इतनी बदतमीज़ी से बात करी थी….
उधार शिप्रा अपने रूम मे तकिये मे मुह छुपाये सुबक रही थी उसे अब तक अपनी हरकत का बहोत अफसोश हो रहा था….
ओ जाकर भाई से माफ़ी माँगना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी….
सतीश फ्रेश होकर अपने कपडे चेंज करता है और फिर नीचे आ जाता है… सोनाली किचन मे थी…
सतीश- “माँ मे अपने दोस्त के यहां जा रहा हूँ अब शाम को आऊंगा”….
सोनाली किचन से बाहर निकलते हुये- “पर लंच तो करता जा”….
पर सतीश नहि रुकता और बाइक निकाल कर बाहर निकल जाता है….
सोनाली- “आखिर हुआ क्या है इस लड़के को”….
सतीश अपनी बाइक से चला जा रहा था.कहा ये उसे भी नहि पता था…. आज उसका मूड पहली बार इतना ऑफ हुआ था….
सतीश १ घंटे तक बाइक को सडको पर युही दौडता रहता है, अब उसके पेट् मे चुहे कुदने लगे थे, पर वो घर भी नहि जाना चाह रहा था…. वो कहि बाहर खाना खा भी लेता पर फिर भी शाम तक का टाइम भी तो पास करना था…
सतीश अपना मोबाइल निकाल कर अपने फ्रेंड सागर को कॉल करता है…
सतीश- “कहा हो बेटा?
सागर- “कहा होंगे बे इस दोपहरी मे, घर पर ही मरा रहे है”…
सतीश- “चल ठीक है मे आ रहा हूँ तेरे पास”…
सागर- “ये भी कोई पुछने की बात है”…
सतीश- “ओके पहुचता हूँ १० मीनट में”
सतीश बाइक सागर के घर की तरफ मोड़ देता है, थोड़ी देर मे ही वो उसके घर पहुच जाता है…
बाइक खड़ी करके सतीश डोर बेल्ल बजाता है, गेट खुलता है और सतीश की सारी टेंशन जैसे काफूर हो गई…
सामने भारती खड़ी थि, सतीश को देखते ही उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है एक प्यारी सी स्माइल देख कर सतीश का मूड फ्रेश हो जाता है,
ओ दोनों एक दूसरे मे खो जाते है, सतीश और भारती एक दूसरे को बचपन से ही पसंद करते थे, दोनों ही एक दूसरे को टूट कर चाहते थे पर दोनों ने कभी इस बात का जिक्र एक दूसरे से नहीं किया था…
सागर- “अब सतीश को अंदर भी बुलाएगी या फिर उसे बाहर ही खड़ा रखने का ईरादा है”
भारती और सतीश दोनों का ध्यान सागर की तरफ जाता है वो भारती के पास खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था…
भारती- “ओह्ह्ह सॉरी ओ… वो सतीश”…
ओर वो शरमाकर अंदर की तरफ भाग जाती है… सतीश के चेहरे पर स्माइल आ जाती ह….
सागर- “अबे हमसे भी मिल ले कमीने”…
सतीश- “क्यों नहि भाई तुझसे ही तो मिलने आया हु”…
ओर वो आगे बड़कर सागर के गले लग जाता है…
सागर- “मे अच्छे से जानता हूँ की तू किस्से मिलने आया था”…
सतीश-“नहि भाई तू गलत समझ रहा है”….
सागर- “हरामखोर रग रग से वाकिफ हूँ मैं तेरी”…
सतीश सागर की बात पर मुस्कुरा देता है और दोनों सोफ़े पर बैठ जाते है…
सागर- “ह्म्मम्, तो इतने समय बाद तुझे हमारी याद आ ही गयी”….
सतीश- “भाई तुम्हे भुला ही कब था जो तुम्हारी याद आयगी”
सागर- “तो साले इतने समय बाद यहा का रास्ता कैसे भूल गया”….
सतीश- “आरे नहि यार मिलने का मन किया तो चला आया”…
सागर- “चल अच्छा किया जो तू आ गया”….
सतीश- “आंटी नजर नहि आ रही है, कही बाहर गई है क्या???
सागर- “हाँ दूर के रिलेशन मे चाचा है उनके यहा कोई फंक्शन है तो उन्ही के यहाँ गई है डैड के साथ्”…
सतीश-“ओ के”…
सागर- “और घर बार सब कैसे हैं?
सतीश- “सब बढ़िया हैं भाई”…
पहले वो दोनों नॉर्मली बात चित करने लगते है….
थोड़ी देर मे ही भारती कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स लेकर आ जाती है, और टेबल पर रख कर जाने लगती है…
सतीश- “भारती”…
भारती रुक कर सतीश की तरफ देखति है…
सतीश- “तुम भी बैठो ना हमारे साथ”…
भारती सागर की तरफ देखति है सागर हाँ मे गर्दन हिला देता है….
भारती सागर के पास जाकर बैठ जाती है
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