घर की प्यासी बुर – Update 5 | Family Sex Story

घर की प्यासी बुर - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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Update – 5

सतीश बहुत मुस्किल से अपने को रोकता है और नाश्ता ख़तम करके शिप्रा के साथ कॉलेज के लिए अपनी बाइक से निकल जाता है, पुरे रस्ते उसका लंड उसे परेशान करता रहा… कॉलेज पहुच ते ही शिप्रा उतर कर अपने क्लास की तरफ बढ़ जाती है, और सतीश पार्किंग( बाइक स्टैंड ) की तरफ बढ़ जाता है, पर आज वो बहुत बेचैन था उसे चुत चाहिए थी…. इसलिए वो अपने जेब से मोबाइल निकाल कर एक नम्बर. डायल करता है…

दूसरी तरफ से कॉल रिसीव होते ही- कहाँ है…

दूसरी तरफ से फीमेल की आवाज आती है- “घर पर हूँ क्यों क्या हुआ”?

सतीश – हाँ सुन आज कॉलेज कैंसिल कर दे, मे आ रहा हुन ५ मीनट. में..

ओर इतना कहकर वो कॉल डिसकनेक्ट कर देता है और अपनी बाइक कॉलेज से बाहर निकाल कर तेजी से चल देता है…..

ओर बाइक सीधे एक घर के आगे जाकर रूकती है… सतीश बाइक को लॉक करके तुरंत आगे बढ़ कर डोर बेल्ल बजाता है, उसकी जीन्स में एक उभार बना हुआ था, जिससे अन्दाजा लगाया जा सकता था की उसका लंड अभी भी खड़ा है…

तभी डोर खुलता है और सामने खड़े शख्स को देख कर उसका मुह खुला का खुला रह जाता है….

प्रियंका- उम्र- २० फिगर- ३४-२८-३४

एक बेहद ही खूबसूरत लडकि, पिछले एक महीने से प्रियंका और सतीश रिलेशनशिप में है… सतीश ने एक महीने में ही प्रियंका को अपने लंड की दासी बना लिया है…

नलिनी- उम्र- ४० फिगर- ३८-३२-३८

एक खूबसूरत और हॉट milf, और प्रियंका की माँ, पति विदेश में ही किसी कंपनी में जॉब करते हे, और साल में मुस्किल से २०-३० दिन के लिए आते हे, बेचारी अपनी चुत की आग नकली लंड की सहायता से बुजाति है…

चलिये अब कहानी की तरफ बढ़ते हे…

डोर ख़ुलते ही सतीश की आँखें आश्चर्य की अधिक्ता के कारन खुली की खुली रह जाती है…

उसके सामने एक औरत साड़ी में खड़ी थी जो की पारदर्शी थी और साथ में मैचिंग ब्लाउज जिसे केवल डीप कट कहना गलत होगा क्योकि वो हैवी डीप कट टाइप ब्लाउज था…

सतीश की नजर तो उसके उरोजों पर ही टिक जाती है, वो ब्लाउज कुछ छुपाने के लिए नहीं बल्कि एक्सपोस करने के लिए डिज़ाइन करा गया है, ब्लाउज में से उसका आधे से ज्यादा क्लीवेज और चूचियां दिखाइ दे रही थि, ब्लाउज को ऐसा डिज़ाइन करा गया था की निप्पल के ऊपर के बॉब्स पूरी तरह से एक्सपोस रहे….

सतीश का मुह खुला का खुला रह जाता है और वो एकटक उस औरत के ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने की कोशिश करते बॉब्स को घुरता रह जाता है…

तभी उसके कान में एक जानि पहचानी आवाज सुनाइ देती है…

नलिनी- “आरे सतीश बेटा तुम बाहर क्यों खड़े हो… अन्दर आओ”

सतीश का मुह तो खुला का खुला रह जाता है, जिस औरत को वो इतने देर से घुर रहा था वो कोई और नहीं बल्कि प्रियंका की माँ थी…

सतीश बिना कुछ बोले अंदर आ जाता है, नलिनी गेट बंद कर देती है, उसके होंठो पर भी एक विजयी मुस्कान थी क्युकी इस उम्र में भी उसने एक जवान लड़के के तोते उड़ा दिए थे…..

नलिनी अपने मन में- “कैसे घुर रहा था मेरे बॉब्स को जैसे की अभी अपने हाथो में लेकर निचोड देगा और अपने मुह में लेकर साबुत चबा जायेगा”…

ये सोचते ही नलिनी की चुत पनिया जाती है…

नलिनी- “तुम बैठो में अभी तुम्हारे लिए कॉफ़ी लेकर आती हु”…

ओर नलिनी अपनी हैवी गांड मटकाते हुये किचन की तरफ चल देती है… सतीश का तो उसके चुत्तड़ देख कर और बुरा हाल हो जाता है, उसका लंड जो पहले से ही स्टैंड मोड़ पे था अब जीन्स में उसे परेशानी दे रहा था…

ह.दी.- साला क्या माल है बे, अब तक इसपर नजर क्यों नहीं पड़ी मेरी… आये हाय क्या गांड मटकाती है यार मन कर रहा है की अभी जाकर इसकी गांड में अपना लंड पेल दु…

सतीश- “तुझे ऐसा नहीं लगता की तू आज कल मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगा है”…

ह.दी.- “सतीश परेशान करने नहीं बल्कि तेरे दिमाग में उठ रहे खयालो से तुझे अवगत करने आता हु”….

सतीश- “मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख़याल नहीं है, और हाँ ये प्रियंका की माँ है इन्हे चोदने का तो सतीश सपने में भी नहीं सोच सकता”….

ह.दी.- “क्यों बे जब अपनी माँ को चोदने की सोच सकता है तो ये तो फिर भी प्रियंका की माँ है”…

सतीश- “बात तो तू सही कह रहा है”….

ह.दी.- “बात तो मे हमेशा सही कहता हूँ बस तेरे दिमाग मे थोड़ी देर से घुसती है”….

तभी सतीश को एक हाथ अपने कंधे पर मह्सुश होता है और एक अवाज उसके कान में पड़ती है…

“क्या सोच रहे हो सतीश”?

सतीश पीछे मुद कर देखता है… पीछे प्रियंका अपने चेहरे पर एक खूबसूरत सी स्माइल लिए ब्लैक टॉप और स्कर्ट पहने खड़ी थी… उस ब्लैक टॉप में जो की उसकी नैवल से काफी ऊपर ही ख़त्म हो गया था, प्रियंका काफी सेक्सी लग रही थि, उसका गोरा चिकना पेट् और सेक्सी नैवल देख कर तो किसी का भी खड़ा कर देती फिर सतीश तो वैसे ही काफी बड़ा ठरकी था… फिर सतीश की नजर निचे जाती है, प्रियंका ने मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी जिससे उसकी गोरी मांसल जांघे दिखाइ दे रही थी…

सतीश अपने लंड को एडजस्ट करते हुये अपने मन में- “साला आज ये माँ बेटी तो मेरा झड़वा कर ही रहेगी”….

अब प्रियंका सतीश के बारबार में आकर बैठ जाती है, और उसके जिस्म की भीनी खुशबू सतीश के दिमाग में बस जाती है….

प्रियंका- “तुमने जवाब नहीं दिया, क्या सोच रहे थे”?…

सतीश उसे कोई जवाब नहीं देता बस उसके पिंक होंठो की तरफ देखता रहता है…

प्रियंका- “ऐसे क्या देख रहे हो”?..

ओर आगे की बात उसके के होंठो में घुट जाती है, सतीश ने एक दम से प्रियंका के सर को पकड़ कर उसे अपनी तरफ खिंच लिया और अपने जलते हुए लब प्रियंका के लबो पे रख देता है और उसके होठो को चुस्ने लगता है….. प्रियंका सतीश की इस हरकत से चौक जाती है, उसकी आँखे आस्चर्य से फ़ैल जाती हे… आज सतीश पर तो एक अलग ही भुत सवार था वो जंगलियों की तरह प्रियंका के होंठो को चुस रहा था तभी सतीश प्रियंका के होंठो को बाईट करता है, प्रियंका के शरीर में एक दर्द की लहर दौड जाती है…. और प्रियंका उसको पीछे धकेल देती है…

प्रियंका अपने होंठ पर निकल आये खुन को पोछते हुये- “पागल हो गये हो क्या? थोड़ी देर कण्ट्रोल नहीं कर सकते क्या, माँ देख लेती तो”…

सतीश- “क्या करू तुम्हारे जूसी होठ देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ”…

तभी नलिनी कॉफ़ी लेकर आ जाती है…

नलिनी- “क्या बातें हो रही हैं आपस में”…?

सतीश- “कुछ खास नहीं आंटी, बस ऐसे ही नार्मल बात चित हो रही थी… वैसे आप कही बाहर जा रही हैं क्या”…?

नलिनी- “नहीं तो क्यों तुम्हे ऐसा क्यों लगा”…?

सतीश- “नहीं बस ऐसे ही लगा तो पूछ लिया, वैसे आज आप इस साड़ी में काफी स… सुन्दर लग रही है”…

नलिनी- “कहा बेटा अब में बूढी हो गई हु”…

सतीश- “ये आपसे किसने कहा आंटी आप तो इतनी सेक्सी लग रही हो की कोई भी आपको २८ से ज्यादा नहीं कह सकता”…

उसकी बात सुनकर जहा नलिनी के चेहरे पर स्माइल आ जाती है वहि प्रियंका सतीश को घुर कर देखने लगती है…

नलिनी- “हट झूटा कही का शर्म नहीं आती तुझे मेरा मजाक बनाते हुये”….

सतीश- “कसम से आंटी मैं सच कह रहा हु… और आपको यकीन ना हो तो आप ऐसे ही बाहर घुमने चले जाओ, देख लेना हर एक नजर बस आप पर ही टिक जाएगी”….

वैसे ये बात तो नलिनी को पता थी की जिस रोड से वो गुज़रती है वहा पर सब की निगाहें बस उसी पर टिक जाती है पर सतीश के मुह से उसे अपनी तारीफ सुन्ना काफी अच्छा लग रहा था…

सतीश तो पता नहीं अभी नलिनी को कितने चने के झाड़ पर चढाता पर तभी प्रियंका बीच में ही बोल पड़ती है…

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