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खुले ख्यालात वाली शादी शुदा औरत और वैश्या में फर्क करना सीखो….. आज सच में मुझे बहुत बुरा लगा क्योकि आपने जबरदस्ती की ,  जिसे मैं दिल से अपना दोस्त मानती हु ,…”

“कुसुम जी मुझे माफ कर देना मैं तुम्हे गलत समझ गया, सॉरी, मैं जा रहा हु आशा करता हु की तुम मुझे माफ कर दोगी ..”

कुसुम ने पीछे मुड़ कर दरवाजे को देखा .. फिर मुझे

“क्या वो चला गया”

मैंने मोबाइल स्क्रीन में देखा घर का दरवाजा खुला और शर्मा बाहर निकला ,वो बेहद ही परेशान दिख रहा था ,

“हा वो चला गया “

कुसुम ने एक गहरी सास ली और जाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया वो आकर बिस्तर में लेट गई …

“जो हुआ वो नही होना था कुसुम, शायद ये सब कुछ मेरे कारण हो गया “

मैं उसे उदास देखकर बोला , उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान आई ..

“नही अरुण ये तुम्हारे कारण नही हुआ, मैं तो बस तुम्हे जलाना चाहती थी इसका हमारे उस खेल से कोई वास्ता नही था, मैं जानती हु की तुम मुझ पर भरोसा करते हो और मुझे समझते हो ….जो हुआ उसका कारण शायद मेरा कुछ ज्यादा ही खुले ख्यालात का होना है।

मैं चुप होकर उसकी बाते सुन रहा था, उसकी आंखों में कोई भी भाव नही थे जैसे वो शून्य में गुम हो गई हो ..

“ अब क्या हुआ कुसुम ..”मैं पूछ बैठा..

वो मुस्कुराई

“सुन पाओगे “

“थोड़ा तो समझ ही गया हु ,”

“फिर भी मुझसे प्यार करोगे ..”

उसकी आंखों से वो सवाल साफ था जो उसने मुझे पूछा था..

“कोई शक,”

“तुमने पूरे घर में मेरी बिना जानकारी के जासूसी कैमरे, क्यों लगाए ,.. ????

ओह वो…

जासूसी कर रहे थे ना मेरी “

मैं थोड़ा घबरा गया

“नही जान बस थोड़ा ..”

“चुप रहो संमझती हु आपको ,भले ही कितना भी कहो की प्यार करते हो लेकिन फिर भी दिल के किसी कोने में आप को शक का कीड़ा काटता ही रहता है ,सभी मर्द एक ही जैसे होते है तो आप कैसे उनसे जुदा होंगे ..’

मैं कुछ भी नही कह पाया ..वो भी कुछ नही बोली ,थोड़ी देर बाद ही उसने एक गहरी सांस ली और बोली अब सो जाओ गुड नाईट……और फोन कट हो गया।

मुझे कुसुम के दिल का कोई भी हाल समझ आना बंद हो गया था,आखिर वो चाहती क्या है …????

करीब 5-7 मिनट बाद एक बार फिर मेरे बेडरूम का दरवाजा खटखटाया गया लेकिन इस बार थोड़ा धीरे ..

मैने उठ कर दरवाजा खोला और अपनी बेटी रिंकी को सिर्फ लाल रंग की सेक्सी जालीदार पारदर्शी नाइटी में देख कर मै हैरान हो रहा था क्योंकि आज से पहले वो इस तरह कभी भी नजर नहीं आई थी

मुझे अपनी बेटी को इस अवस्था में देखकर उत्तेजना का भी एहसास हो रहा था, जैसे जैसे वो बेडरूम के अंदर कदम बढ़ा रही थी वैसे वैसे उसकी भरावदार कसी हुई गांड भी मटकती थी और अपनी बेटी की मटकती गांड को देख कर मेरे लंड ने पाजामे में खलबली मचानी शुरू कर दी थी,

अपनी बेटी की गांड का घेराव देखकर मेरे लंड का तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा था ,पलपल ऊत्तेजना बढ़ती जा रही थी,   अपनी बेटी को सेक्सी नाईटी में देखकर मै कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया था, क्योंकि नाइटी के अंदर से झांकती नंगी जांघें साफ साफ नजर आ रही थी, मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि रिंकी ने अंदर पैंटी नहीं पहनी है, ये देख कर मेरा लंड और ज्यादा उछाल मारने लगा,

इधर रिंकी भी अपनी भरावदार गांड को और ज्यादा मटकाते हुए कसमसा रही थी ,उसे इस प्रकार से अपने पापा को उकसाते हुए अजीब से आनंद की अनुभूति हो रही थी, अब मेरे पजामे में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था, मेरा मन अपनी बेटी की स्थिति को देख कर एक बार फिर से उसे चोदने को करने लगा और वो भी तो ये ही चाहती थी ,बस दोनों एक दूसरे से सब कुछ हो जाने के बाद भी इस समय पहल करने से डर रहे थे,

आखिर मैने ही बातों का दौर आगे बढ़ाते हुए कहा- “क्या बात है रिंकी , रात के एक बजने को आया सोई नही अभी तक….??

रिंकी अपनी लालसा को पूरी करने के लिए पहले से ही पूरी तरह से रुपरेखा तैयार कर चुकी थी, इसलिए मुझ को जवाब देने में कोई भी दिक्कत महसूस नहीं हुई वो बड़े शांत मन से बोली,

“नही पापाआआआ…. मुझे तो आपके साथ सोने में इतना सुख मिलता है जिसकी मैं कल्पना भी नही कर सकती , मन करता है कि दिन रात बस आपके…….. मेरा मतलब है कि आपके साथ ही रहूं” रिंकी ने मादकता के साथ कहा

“मैं भी यही चाहता हूं कि दिन रात अपने इस मोटे लंड को तुम्हारी चुत में ही घुसाए रखूं और तुम्हे हर पल चोदता रहूं” मै अब पूरी बेशर्मी पर उतर आया था, मै रिंकी को पूरी तरह से खोलना चाहता था

“इसस्ससस ….ये आप कैसी बातें कर रहे है पापाआआआ……” रिंकी शर्माती हुई बोली

“अरे इसमे शर्माना कैसा, मेरा बस चलता तो तुम्हे दिन रात अपनी बाहों में लेकर तुम्हारी चुत को चूसता, उससे प्यार करता, और अपने लंड से तुम्हारी चुत की जमकर कुटाई भी करता, तुम सच्ची सच्ची बताओ, क्या तुम्हारा मन नही करता ये सब करने को” मैने कहा

“ओहहहहहह पापाआआआ…. आप भी ना, मेरा मन तो हमेशा करता है कि मै…..” रिंकी बोलते बोलते शर्मा गई

“बोलो न क्या मन करता है तुम्हारा ” मैने पूछा

“नहीं मैं नही बताती” रिंकी ने शर्मा कर अपने चेहरे को हाथों से छुपाते हुए कहा

“प्लीज़ बताओ न रिंकी ,क्या मन करता है तुम्हारा, तुम्हे मेरी कसम, बताओ मुझे” मैने पूछा

“मेरा मन करता है, कि मैं हमेशा आपकी बाहों में रहूं, आप मुझे हमेशा प्यार करे, आप अपने उस बड़े से ……उससे…मेरा मतलब है कि अपने डि….क डिक से मेरी पुसी की चुद…….मेरा मतलब है कि वो सब करे जो हम छिप छिप कर करते है” रिंकी की सांसे अब उखड़ने लगी थी।

“अरे तुम शर्मा क्यों रही हो, अब तो हम सब कुछ कर चुके है, अब शर्माना कैसा, और ये डिक डिक क्या लगा रखा है ,उसे लंड कहते है और तुम्हारी पुसी को चुत कहते है, जो हम छिप छिप कर करते हैं उसे चुदाई कहते है, चलो अब तुम बोलो अभी हम क्या करेंगे” मै अब पूरे मूड में आ गया था, इन गर्म बातो से मेरे लंड में भयंकर तनाव आना शुरू हो गया था

“रहने दो ना पापा मुझे शर्म आती है ऐसे बोलते हुए” रिंकी बोली

“प्लीज़ रिंकी, बोलो ना,मेरे खातिर, प्लीज़” मैने कहा

“मेरा मन चाहता है कि आपके डिक नही नही आपके लंड….. को अपनी चुत …..में लेकर सदा आपसे चुदाई…. करवाती रहूं, अब खुश ” रिंकी शर्माते हुए बोली

“हां बिल्कुल खुश” मैने बोलते हुए रिंकी को घुमाकर उसकी नाइटी उतार दी और उसे वही बेड पर घोड़ी बना लिया, रिंकी भी समझ गई थी कि पापा क्या चाहते है, उसने भी तुरंत अपनी कमर को पीछे से उठा कर   घोड़ी style में आ गयी।

मैने भी बिना वक्त गंवाए अपने लंड को रिंकी की चुत के मुहाने पर सेट किया और फिर दे दना दन धक्के मारने लगा, हम दोनों के मुहँ से अजीब अजीब आवाज़े निकल रही थी

पहला राउंड करीब 13-16 मिनट तक चला, अब हम दोनों थककर चूर हो चुके थे, जब हम दोनों के सर से वासना का भूत उतरा तो मैने सोचा कि अब रिंकी को कुसुम की ट्रांसफर लेकर वापस यहाँ आने वाली बात बता देनी चाहिए।

“रिंकी, सुनो ” मैने लगभग हाँफते हुए कहा

“हां पापाआआआ….” रिंकी तो आनंद के सागर में गोते लगा रही थी

” अब हमें ये सब बंद करना होगा” मैने लगभग रिंकी के सर पर बम फोड़ते हुए कहा

“क्या, पर क्यों” रिंकी को तो जैसे विश्वास ही नही हो रहा था, उसने तो आने वाली रातो के लिए न जाने कैसे कैसे सपने संजोए थे, सोचा था इन रातों में वो अपनी सारी हसरते पूरी करेगी पर यहां तो सब सपने धरे के धरे रह गए,

मैने सारी बात रिंकी को बता दी, हालांकि मै खुद भी दुखी था पर अब इस नाजायज रिश्ते को खतम तो करना पड़ेगा ही।

“क्या पापाआआआ, आपको मम्मी के इस बाहिजात फैसले के लिए हां करने की क्या जरूरत थी, मना कर देते, मम्मी यहाँ आकर हमारी खुशियों मे आग लगा कर कोई ना कोई चूतियापा जरूर खड़ा कर देगी ” रिंकी बेबाकी से सब बोल गई।

हम दोनों बाप बेटी बिल्कुल नंगी हालत में बिस्तर पर लेटे थे, बेमन से, किसी भी प्रकार की उत्तेजना के अभाव में, मै रिंकी के मम्मे को हल्के से सेहलाते हुए और रिंकी मेरे मुरझाये हुए लंड को अपने हाथों में पकड़े हुए आने वाले कल के बारे में सोच रहे थे।

कभी कभी जायज रिश्ते भी भार बन जाते हैं, जिन्हें ढोना मजबूरी का सबब बन जाता है और कुछ नजायज रिश्ते बदनाम हो कर भी जायज रिश्तों से प्यारे लगने लगते हैं.

 ‘मेरी बेटी एक प्रेमिका बन अपना नजायज रिश्ता बचाना चाहती हैं और मेरी पत्नी घर, इन दोनों को बचाव करने लेने से आने वाले वक्त में मेरी जिंदगी उजड़ जाने से बच जाए शायद …????? ‘

अगले दिन सुबह मेरी मम्मी हम दोनों के जागने से पहले जागी और उन्होंने मुझे जगाने के लिए सबसे पहले मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया. मेरी बेटी मेरे कंधे पर सर रखे गहरी नींद मे डूबी हुई थी. मैं एकदम से घबरा गया मुझे लगा जैसे मेरी मम्मी अंदर आने वाली है और हम दोनो नंगे-पुंगे, रंगे हाथों पकड़े जाने वाले हैं. मगर मम्मी दरवाजा खटखटा कर चली गयी. मैने रिंकी को हिला कर जगाया और उसे जल्दी से रूम से जाने के लिए कहा क्योंकि उस समय रास्ता सॉफ था. आज सुबह सुबह तो हमारा बचाव हो गया था, मैने रिंकी को समझाया कि अब हमें ज़्यादा सावधानी रखनी होगी. यह भी एक एसा बदलाव था जिसकी हमें अब आदत डालनी थी.

मेरे और रिंकी के मिलन की आजादी के आगामी चार पांच दिन व्यर्थ ही चले गए। रिंकी अपने कॉलेज के एडमिशन की भागमभाग में पूरे दिन भर व्यस्त हो गयी थी। स्कूल, कॉलेज और बैंक वालो ने चक्कर लगवा लगवा कर उसे घन चक्कर बना दिया। कभी स्कूल से टी सी निकलवाने, कभी बैंक में डी डी बनवाने, कभी कॉलेज में कोई डॉक्यूमेंट जमा करने जाती तो कॉलेज वाले डॉक्यूमेंट मे नई नई कमियाँ खोज कर परेशान कर रहे थे।

दूसरी तरफ कुसुम भी मुझसे रात के 1 बजे तक वीडियो काल पर अपने वापस आने की त्यारियो और ऑफिस के हाल चाल बताने में उलझाए रखती।

नतीजन रिंकी और मुझे हमारे नाजायज रिश्ते के हिस्से में बचे हुए 4-5 दिन में इकट्ठे होने का निकटता का उतना समय नही मिल सका जितना हम दोनो एक दूसरे को प्यार करने के लिए चाहिए था। इन दिनों हम को झटपट जल्दी जल्दी संभोग से संतोष करना पड़ा मतलब मुझे जल्दी से अंदर डालकर जल्दी से स्खलित होना पड़ता, नतीजतन वो स्खलित भी नही होती और प्यासी रह जाती। इधर मेरी मम्मी का हमसे जल्दी जाग जाने का डर हमें साथ ना सोने को मजबूर कर गया था। मै अपने स्खलन होने के तुरंत बाद ही रिंकी को वापस उसके कमरे में भेज देता। अब हम बाप बेटी का प्यारा सा नाजायज रिश्ता बुरी तरह प्रभावित होकर अपनी आखिरी साँसे भर रहा था।

जारी है…. ✍🏻

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