कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 54

कर्ज और फर्ज एक कश्मकश - Erotic Family Sex Story
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क्या उसे बाहर जाकर मम्मी से कुछ कहना चाहिए? और कहे भी तो क्या कहे? यही कि उसकी मम्मी उसके पापा (अपने पति) के साथ सेक्स न करे? ऐसा कैसे कह सकती थी वो. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो करे भी तो क्या करे? पर इस तरह बिस्तर में करवट बदलते तड़पती तो नहीं रह सकती थी वो. उसे कुछ तो करना होगा…..

आज की सुबह तो मैं खुश था बहुत खुश था, मै बाथरूम से फ्रेश वगेरा होकर बाहर आया। देखा तो कुसुम का मोबाइल अभी भी वैसे ही पड़ा था,मुझे बहुत ही खुशी हुई और मैं जल्दी से उसे उठा लिया, मैंने उसे खोला तो ये संजय के msg थे…शायद कुछ रात में और कुछ सुबह में msg आये थे . एक भी मैसेज कुसुम ने पढ़े नही थे। अगर मैं उसे खोलता तो कुसुम को पता चल जाता इसलिए मैंने उसे नही छेड़ा बस जो आखिरी msg था वो दिखा रहा था,

” कुसुम जी आपके बिना आज ऑफिस में जाने का दिल नही कर रहा है, जल्दी से वापस आ जाओ ना……..।

चलो एक बार कुसुम के पढ़ने के बाद मैं पढ़ लूंगा….. पर मेरा मन नही मान रहा था आखिर ये संजय चीज क्या है…. और उसे देखने की ललक से मैने उसकी प्रॉफ़िल् पिक पर उंगली रख दी………. फुल अर्ध नग्न अवस्था में खड़ा हुआ, दिखने में 6 फुट लंबा और मसलमेंन संजय किसी हीरो से कम नही लग रहा था ,मुझे तो यकीन नही आ रहा था ,किसी मॉडल की तरह उसकी पर्सनाल्टी देख कर मैं थोड़ा सा घबरा भी गया क्योकि कुसुम उसके साथ ऑफिस में फ्लर्ट करती थी…

“” अपनी बीबी के मोबाइल फोन की जासूसी करने का यही फायदा और यही नुकसान होता है कि आपको कई ऐसी चीजे भी पता होती है जो की पता होनी नही चाहिए……””

मैं कुसुम का मोबाइल वापस यथा स्थान रख कपड़े पहनने लगा….. कुसुम के आशिक के बारे में सोच सोच कर मेरा थोड़ा सा मन भागता रहा पर मै क्या कर सकता हू…. तभी कुसुम के पापा का काल आ गया…

“हैल्लो अरुण कैसे हो “

“अच्छा हु पापा आप बताइये”

“अरे बेटा तुमसे एक बात कहनी थी समझ नही आ रहा हूँ कैसे कहु….???

“हा बोलिये ना”

“असल में बात ऐसी है की हमने जूली की शादी जब फिक्स की थी तब शादी का खर्चा आधा आधा करने की बात लड़कों वालों से हुयी थी। लड़के वालों ने अपने हिस्से का आधा खरचा का पैसा उन्होंने अपने सगे रिश्तेदारों के यहाँ भिजवा दिया।

मै — लड़के वालों ने आपके हाथों में सीधा पैसा क्यों नही दिया…???

ससुर — बेटा अपन नया रिश्ता जोड़ रहे है, उनके रिश्तेदार बने नही है, ऊपर से हैसियत में कम भी है, और गरीबों पर लोग कम विश्वास करते है।

मै — हु… तो फिर उनके यहाँ से आप ले आओ इसमें प्रोबलम क्या है..??

ससुर — बेटा मैने उनके रिश्तेदारों के यहाँ चार पांच बार चक्कर लगा चुका हूँ, हर बार चाय पिला कर रवाना कर देते है, पैसों के बारे में कोई बात नही करते। और मै रिश्तेदारी होने की वजह से खुद सामने से मांगने में झिझक महसूस कर रहा हूँ।

मै — क्या…?? ” तो फिर आप प्रीति को बोलो उसके तो जूली के ससुर रिश्ते में चचिया ससुर है, वो क्यों कुछ नही बोलती।

ससुर – जब कुसुम की मम्मी ने प्रीति और जूली के ससुराल वालों से इस विषय में बात की तो वो बोले अभी आप लोग खर्चा कर दो, हम जब बारात लेकर आयेंगे तब हिसाब कर लेंगे।

मै — हु… मै समझ गया पापा आप मुझे बताइये कितना पैसा चाहिए…??? टेंशन की बात नही है अब तो आपकी बेटी कुसुम भी कमाती है।

ससुर — पचास हजार रुपये, लेकिन बेटा इस बारे में अगर तुम्हारी मम्मी और संबधी जी की इजाजत मिल जाये तो ज्यादा अच्छा होगा और उनकी सहमति से अन्य रिश्तेदारों में हमारी नाक बच जायेगी। वैसे बस कल तक की बात है कल जूली के फेरों के बाद सारे पैसे हम तुम्हे वापस कर देंगे।

मै — अरे पापा ये भी कोई पूछने वाली बात है, आप बेफिक्र रहिये। मै पैसे लेकर अभी आता हू।

मै अलमारी से पैसे लेकर ससुर को देने के लिए तैयार हो चुका था। कुसुम अब तक अपने पति के लिए चाय नाश्ता तैयार कर चुकी थी और बस किचन में बर्तन समेट ही रही थी कि तभी मै पीछे से आया और अपनी पत्नी से लिपट गया. और अपनी प्यारी पत्नी कुसुम की पीठ को चूमने लगा.

” यदि रात सुहानी बीती हो तो सुबह सुबह पति इस तरह से और रोमांटिक हो ही जाते है.” कुसुम ने भी मेरे चुम्बन का प्यार भरा जवाब दिया और अपने कोमल हाथो से अपने पीछे खड़े मेरे चेहरे को छूते हुए वो मुझसे लिपट गई और मैं उससे, जिस्म में कोई आग तो नही थी बस अहसास था एक दूसरे के होने का अहसास…मैं उसके बालो को हल्के हल्के ही सहला रहा था वही वो आंखे बंद किये मेरे सीने पर ही सर रखे थी…हमारे रिश्ते में आगे क्या होने वाला था इस बात की गारेंटी दोनो में कोई नही दे सकता था,मैंने उसे आजादी दी थी और उसने उस आजादी का सही उपयोग अपने केरियर को आगे बढ़ाने के लिए किया था,

लेकिन मेरे मन में आने वाले भविष्य को लेकर कई दुविधा थी,क्योकि मैं कही ना कही ये जानता था की हमारे रिश्ते का ये नजरिया कुसुम को शिखर में भी पहुचा सकता है या एक रंडी की उपाधि भी दिला सकता है। और मैं जानता था की ये ना सिर्फ मेरे मेरे लिए बल्कि हमारे रिश्ते के लिए भी एक टर्निंग पॉइंट होगा,अगर हम अभी संभले तो जीत सकते है वरना मैं सब कुछ हार भी सकता हु………

“अब छोडो भी मुझे….. वैसे आज सुबह सुबह तैयार हो कर कहाँ चले,??

अरे वो तुम्हारे पापा का फोन आया था उन्हे कुछ पैसों की जरूरत है और मैने सारी बात कुसुम को बता दी।

आपका नाश्ता तैयार है.” पहले नाश्ता कर लो फिर जहाँ जाना हो जाओ, और कुसुम ने बड़े ही प्यार से मुझे नाश्ते की प्लेट पकड़ाई. पर कुसुम अब भी मेरी बांहों में गिरफ्त थी. उसे कोई शिकायत भी नहीं थी. मैने अपनी पत्नी के होंठो को एक बार रस भर कर चूमा और चाय नाश्ता कर, कुसुम के निप्पल में एक सिहरन सी छोड़ कर मै ससुर को पैसे देने चला गया. और कुसुम मेरे चुम्बन के एहसास को अनुभव करती वहीँ किचिन मे खड़ी रह गयी.

आखिर कल की रात बहुत हॉट थी. कुसुम ने अपनी तरफ से मुझ को खुश करने की पूरी कोशिश जो की थी. और फिर उसे भी मज़ा तो आया था. पर ये तो सिर्फ कुसुम का दिल जानता था कि कल की हॉट रात के पीछे रहस्य क्या था….. ??? पर इसके अलावा भी कुछ और बात थी. यही कारण था कि जब मैने रात को कुसुम को अपनी बांहों में लिया तो वो न सिर्फ अपने पति को धोखा देने के प्रायश्चित में मुझे पूरे समर्पण भाव के साथ अपना तन सौंप रही थी बल्कि साथ ही वो मुझ को भी एहसास दिलाना चाहती थी कि वो अपने पति के साथ सेक्स करके बहुत खुश थी.

भले ही कुसुम एक गरीब परिवार से मेरे घर ब्याह कर आई थी लेकिन वो तेज तरार औरत थी और उसे भी अपने रूप पर गर्व (घमंड) था. मेरे घर से जाते ही दुनियादारी की चिंता छोड़ कर कुसुम ने अपने ब्लाउज को अपनी साड़ी से ढंका और अब नहाने के लिए बाथरूम में आ गयी. बाथरूम में आकर कुसुम ने धीरे धीरे खुद को आईने में देख अपनी साड़ी उतारनी शुरू की. एक एक प्लेट को धीरे धीरे खिंच कर खोलती हुई कुसुम अपने रूप को देखकर इठलाने लगी. और फिर उसके बाद अपनी ब्लाउज को खोलने लगी.

 बिना ब्रा के उसके स्तन ब्लाउज से तुरंत बाहर निकल आये. और कुसुम ने अपने निप्पल को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया. उसे एक बार फिर बड़ा मज़ा आ रहा था. और फिर वो अपने दुसरे हाथ से अपने पेटीकोट के ऊपर सहलाने लगी और पहले हाथ से अपने स्तनों को मसलने लगी. जल्दी ही कुसुम की चूत गीली होने लगी आखिर उसने अन्दर पेंटी तक नहीं पहनी थी.

 उत्तेजना में कुसुम ने अपना पेटीकोट उतारा और सुडॉल् स्तनों को सहलाने लगी. कठोर निप्पल और बड़े बड़े स्तनों के साथ वो आईने में बड़ी सेक्सी लग रही थी. खुद के   “स्तनों के जोड़ा” को देख वो बड़ी खुश हुई. गुलाबी चमचमाता हुआ और बिलकुल साफ़ सुथरा निप्पल था और फिर मुस्कुराती हुई कुसुम शावर में जाकर नहाने लगी.

वो चाहती तो उत्तेजना में वो खुद को और सहला सकती थी. पर इतनी खुबसूरत औरत भला खुद को खुश करे? ये तो अपमान ही होगा न? जब पूरी दुनिया में कोई भी उसके जिस्म को छूकर उसे खुश करने को बेताब होगा तो वो क्यों भला खुद मेहनत करे? हंसती मुसकुराती हुई कुसुम नहाकर बाहर निकली और उसने एक सुन्दर सी लेस वाली ब्रा पहनी. भीगे बालो में बहुत ही सेक्सी लग रही कुसुम की ब्रा ने जब उसके बूब्स को अपने अन्दर कैद किया तब जाकर उसका खुद के तन पर थोडा सा वश वापस आने लगा था. और फिर कुसुम ने धीरे से अपने कोमल पैरो पर एक हलकी सी सैटिन पेंटी को सरकाया और खुद के चिकने पैरो को अपनी उँगलियों से छूते हुए कुसुम ने वो पेंटी पहन ली. और फिर उसके बाद एक मैचिंग पेटीकोट में अपनी कमर को लहराती हुई नाडा बांधकर कुसुम अब साड़ी पहनने को तैयार थी.

वैसे तो कुसुम को अपनी ब्रा के ऊपर ब्लाउज पहनना चाहिए था पर आज उसने बिना ब्लाउज के ही साड़ी पहनने की सोची. घर में वैसे भी सिर्फ रिंकी थी और वो भी स्कूल जाने वाली ही होगी. और न भी जाए, तो आज कुसुम को उसके रहने न रहने से फर्क नहीं पड़ता था. और फिर कुसुम ने अपने बड़े बड़े कुलहो पर अपनी साड़ी को एक राउंड लपेटा और फिर अपनी दुबली पतली उँगलियों की सहायता से अपने साड़ी में एक एक प्लेट सलीके से बनाने लगी.

भीगे लम्बे बालो में इतने करीने से प्लेट बनती हुई कुसुम को इस वक़्त कोई देख लेता तो यकीनन ही उसका खुद पर काबू नहीं रहता. यदि वहां कोई भी मर्द होता तो मदहोश होकर वो इस वक़्त कभी उसके स्तनों को दबाता या फिर उसके कुलहो को. और वो अपने घुटनों पर बैठकर उसके लंड को बाहर निकाल कर अपने रसीले होंठो से चुस्ती? हाय, ये कैसा ख्याल आ रहा था कुसुम के मन में? वो अपने पति को कभी धोखा नहीं देना चाहती थी. फिर भी न जाने क्यों उसके दिल में ये विचार आकर उसके जिस्म में आग लगा रहे थे. कुसुम आज बिना ब्लाउज के ही साड़ी पहनकर तैयार थी.

दूसरी तरफ रिंकी सुबह सुबह ही अपनी मम्मी से रूखे स्वर में बात कर गयी थी. और सुबह के दो शब्दों के कहने के बाद से वो एक भी बार अपनी मम्मी से बात करने के लिए अपने कमरे से बाहर तक नहीं आई थी. कल तक जो माँ बेटी के बीच एक प्यार भरा रिश्ता था वो एक बार में ही जिस्म की आग में झुलसते हुए कही बिखर गया था.

और फिर रिंकी बिना कुछ सोचे समझे अपनी घुटनों तक की नाइटी पहने हुए ही अपने कमरे से बाहर आ गयी. बाहर आकर उसने देखा कि उसकी मम्मी सोफे पर बैठी हुई अपने घुटनों को मोड़े हुए अपने पैरो की उंगलियों में नैल पोलिश लगा रही थी. उसकी मम्मी ने तो आज ब्लाउज भी नहीं पहना था. बस खुले पल्ले के साथ ब्रा को ढंककर साड़ी पहनी हुई उसकी मम्मी को भीगे बालो में देखकर एक ओर रिंकी को गुस्सा भी बहुत आ रहा था पर वहीँ दूसरी ओर… उसकी मम्मी उसे बेहद आकर्षक भी लग रही थी.

रिंकी को न जाने क्यों उसकी मम्मी को देखते ही उसकी मम्मी की कमर के निचले हिस्से की ओर ध्यान जा रहा था. उसकी मम्मी की धवल गोरी कमर में सॉफ्ट सी नाभि के निचे साड़ी की खुबसूरत प्लेट्स के पीछे उसके “पापा की मर्दाना कमजोरी का इलाज” छिपा है, यह ख्याल उसके मन में क्यों आ रहा था?

 रिंकी को देखते ही उसकी मम्मी ने अपनी साड़ी के आँचल को कुछ इस तरह सरकाया कि वो उसके दोनों स्तनों के बीच आकर बैठ गयी. अब कुसुम का एक स्तन उसकी लेस वाली ब्रा में और उभर कर दिखाई दे रहा था. पर रिंकी की ओर ज्यादा ध्यान न देते हुए कुसुम ने अपने एक पैर को दुसरे पैर पर रखा और अपनी नाभि को साड़ी से ढंकते हुए हाथ की उंगलियों को पलट कर देखने लगी. कुसुम रिंकी को अनदेखा करने का ड्रामा कर रही थी. वो उसे सच में अनदेखा करना चाहती थी पर कर नहीं पा रही थी. इसलिए अपनी नैल पोलिश में ध्यान देने की कोशिश कर रही थी. पर वहां भी उसका दिल कहाँ लग रहा था?

अपनी मम्मी की ऐसी हरकत देखकर एक बार फिर रिंकी के दिल में गुस्सा बढ़ गया. और वो गुस्से में ही अपनी मम्मी के बगल में आकर बैठ गयी. कुसुम ने रिंकी को अनदेखा किया तो रिंकी का पारा और चढ़ गया और अब उससे रहा नहीं गया और वो गुस्से से अपनी मम्मी पर चीख पड़ी, “क्यों मम्मी पूरी रात अपने पति के साथ बिताने के बाद भी तुम्हारे जिस्म की आग नहीं बुझी जो तुम अब भी इस तरह से अपने स्तन (चूचे) निकाले बेशर्मो की तरह बैठी हो?”

बहुत कडवी बात कह दी थी रिंकी ने. तो कुसुम भला कैसे चुप रहती? “मेरे जिस्म की आग से तुझे क्या करना है? हाँ मैं सोयी थी अपने पति के साथ. कम से कम अपने पति के साथ ही कर रही थी न. किसी ऐरे गिरे आदमी का लंड तो नहीं चूस रही थी न मैं? और वैसे भी तुझे क्या फर्क पड़ता है कि मैं क्या करती हूँ?”, कुसुम ने भी गुस्से में नैल पोलिश की शीशी को बंदकर पटकते हुए कहा.

“मम्मी!”, कुसुम की बात सुनकर रिंकी गुस्से से उबल उठी और अपनी मम्मी की नर्म बांहों को जोर से अपने हाथ से पकड़कर अपनी ओर खींचती हुई बोली. उसकी मजबूत पकड़ से कुसुम की नाज़ुक बांहों में थोडा दर्द हुआ जो उसके चेहरे पर दिख पड़ा. दोनों इस वक़्त एक दुसरे की नजरो में देख रही थी. गुस्से में दोनों की सांसें भी बहुत तेज़ चलने लगी थी. कुसुम के स्तन भी तेज़ साँसों के साथ फूलते और संकुचाते थे. और यही हाल रिंकी के स्तनों का उसकी नाइटी में हो रहा था.

सुबह सुबह ये क्या तमाशा हो रहा है, तुम दोनों माँ बेटी में…. दरवाजे से एक तेज तरार आवाज के साथ सास ससुर की एंट्री हुयी जो अभी अभी घर की सुख, चैन, शांति की प्राथर्ना करके मन्दिर से आये थे।

सास ससुर की कड़कती आवाज सुनकर दोनों माँ – बेटी जल्दी से भागकर अपने अपने कमरे में घुस गये……… सास ससुर उसी सोफे पर जाकर बैठ गये जो कुछ सेकंड पहले कुरुक्षेत्र (अखाड़े) का मैदान बना हुआ था। 😂😜🤣

जारी है…..!

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