” बेवफ़ाई या बेहयाई “”
भले अरुण उसका सौतेला बाप है पर आखिर है तो एक मर्द…. और इस तरह अब इतनी बाप बेटी को ज्यादा छूट देना ठीक नहीं है। अब कुसुम को अपनी बेटी का अपने पति के साथ ज्यादा खुलापन खटक रहा था।
कुसुम से फटाफट सेनेटरी पेड लेकर रिंकी अपने कमरे में दौड़ी चली आई। और बाथरूम मे जाकर सेनेटरी पेड use करने के बाद सोचते सोचते मोबाइल उठाती है और मुझ को व्हाट्सप् मेसेज कर देती है थैंक यू सो मच बट “मेरे प्यारे पापा पैड़ का साइज बड़ा है और मेरी पैंटी की जी- स्ट्रिंग बहुत छोटी है जिस की बजह से पैड़ पेंटी से बाहर आ रहा है। रिंकी समझ नहीं पाती वो सोचती कुछ और है कर कुछ और देति है ।
मै भी उसको reply कर देता हूँ।
” मेंशन नॉट एंड sorry. कभी भी किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो कॉल मि”।
बाहर घर के सदस्य सब तैयार हो चुके थे और रिंकी है कि अभी तक तैयार ही नहीं हुई। जानती थी कि अगर दस मिनट के अंदर तैयार नहीं हुई तो मम्मी अच्छा खासा हंगामा कर देगी। क्योंकि पहली बात तो यह कि जब मम्मी तैयार हो जाती तो उनसे सब्र नहीं होता और दूसरी और जरूरी बात कि आज दोपहर में जो माँ बेटी के बीच तानो भरा संवाद हुआ था उससे मम्मी भड़की हुई थी।
यह तो शुक्र मनाओ कि रिंकी ने बाथरूम में जाने से पहले खुद के कपड़े तो निकाल कर रख दिए थे। अब फटाफट हाथ मुंह धोकर कपड़े चेंज कर लिए। हल्का फुल्का मेकअप किया ही था कि इतने में बाहर से पापा की आवाज आने लगी,
” अरे रिंकी बेटी कितनी देर लगेगी तुम्हें जल्दी आओ। देर हो रही है”
इससे पहले कि रिंकी कुछ कहती उसकी मम्मी कुसुम ने चिल्लाना शुरू कर दिया,
” जब कह दिया था कि जल्दी तैयार हो जाना तो तैयार नहीं हो सकती थी। बस धीरे-धीरे समय बर्बाद करने में लगी हुई है”
पूरा प्रोग्राम बस लेट करने में लगी हुई है।
रिंकी को अब पता था कि मम्मी ने चिल्लाना शुरू कर दिया है। अब सब का मूड खराब होना लाजमी है। अब जब तक मम्मी उसे दो चार बातें ना सुना लेगी तब तक उन को चैन नहीं मिलेगा। खैर रिंकी फटाफट अपने सैंडल पहने लगी तो ये क्या सैंडल ही टूट गए। अब उसके पास तो पहनने के लिए कुछ भी नहीं। आखिर में मै कुसुम के कुछ कहने से पहले मै रिंकी का स्टेट्स देखने के लिए उसके कमरे में आया,
” क्या है रिंकी तुम अभी तक तैयार नहीं हुई हो। मम्मी तुम्हारा इंतजार कर रही हैं। तुम्हारी मौसिया भी वहां हम लोगों का इंतजार कर रही होगी”
मुझे देखकर रिंकी ने अपने टूटे हुए सैंडल दिखाते हुए कहा,
” मैं क्या करूं पापा ? मेरे सैंडल ही टूट गए हैं और मेरे पास दूसरी भी नहीं है”
मै बनावटी गुस्सा करते हुए ” हे भगवान! तुम इतनी लापरवाह कैसे हो सकती हो? एक और जोड़ी एक्स्ट्रा में नहीं रख सकती हो। जाकर देखो मम्मी की कोई सैंडल रखी हो तो वो पहन लो”
” पर मम्मी के सेंडल मुझे कैसे आएंगे? मम्मी के पैर मुझसे बड़े हैं” रिंकी ने धीरे से कहा। इतने में कुसुम भी दन-दनाती हुई कमरे में आ गई और चिल्लाते हुए बोली,
“अरे चलना नहीं है क्या तुम दोनों को? देर हो रही है” फिर रिंकी के हाथ में टूटे हुए सैंडल देखकर चिल्लाते हुए बोली, ” बस शुरू हो गया इसका तमाशा। कभी एक दिन भी ऐसा गया है कि जब कहीं जाना हो और इसने तमाशा शुरू ना किया हो। अब शुभ काम में जा रहे हैं तो ये महारानी सामने ये टूटी हुई चप्पल लेकर आ गई”
रिंकी ने अपने आप को संभालते हुए कहा,
” पर मम्मी मैंने जानबूझकर तो नहीं तोड़ा ना। ये काफी पुराने हो गए थे। उस दिन मैंने आपसे कहा भी था कि मम्मी मुझे सैंडल लानी है पर आपने मुझे पैसे देने से मना कर दिए थे”
” हां तो पैसे का पेड़ पर उगते हैं क्या? और मैं तो तुझे लेकर जा ही रही थी ना बाजार लेकिन अब तेरे काम ही पूरे नहीं हो तो मैं क्या कर सकती हूं ?जिसको नाटक करना है वो तो कहीं से भी कुछ भी नाटक कर लेता है”
मैने बात संभालते हुए कहा,” एक काम करते हैं रास्ते में से नए सैंडल दिला देंगे”
मेरी बात सुनकर कुसुम जोर से चिल्लाई,
” हां, हम तो फालतू बैठे हैं। अब समय बर्बाद नहीं होगा। रहने दो इसे यहीं पर जब घर में अकेली रहेगी तो अकल ठिकाने आ जाएगी”
” पर मम्मी..”
मै इससे पहले कुछ कहता मेरी मम्मी (दादी) ने कहा कुसुम मात्र टूटी सैंडल के पीछे इतना बखेड़ा क्यो खड़ा कर रही हो। तुम, अरुण के साथ जाओ, मै अपनी प्यारी बिटिया रिंकी को नयी सैंडल खरीदवा कर फंक्शन में उसके साथ ही आती हू।
मै भी ज्यादा कुछ कह ना पाया और रिंकी को घर पर ही छोड़कर मै और कुसुम रवाना हो गए। रिंकी की आंखों में आंसू आ गए। सोचते सोचते ही रिंकी की आंखों में से आंसू बहे जा रहे थे। क्या..??? आज सिर्फ एक सैंडल के कारण उसे मम्मी पापा छोड़ कर चले गए।
खैर शाम के चार साढ़े चार बजे मै और कुसुम पहुँच गए. ससुर जी ने अच्छा इंतज़ाम कर रखा था. शहर के बाहरी इलाके में एक मैरिज हाल में सब घर वालों के रुकने का था और वहीं शादी के सभी रस्मो रिवाज़ होने थे. बारातियों के रुकने के लिए नज़दीक के ही एक होटल में किया गया था.मैरिज हाल एक काफी बड़े लॉन में था. उसमें दो बैंक्वेट हाल थे: एक छोटा, एक बड़ा और 16 कमरे थे. शादी के लिए बड़ा वाला बैंक्वेट तय किया गया था और भोजन बाहर लॉन में. कमरे तो परिवार वाले मेहमानों को दे दिए गए. मेरे साढू प्रीति के पति हमसे पहले आ चुके थे. वो अपने दोनों बच्चे अपनी सास के पास छोड़ के दोनों मियां बीवी ही आए थे. तो हमको एक कमरा दे दिया गया, जो साढू वाले कमरे के बगल वाला था. जब मैंने कमरे से बाहर निकलती हुयी अपनी साली प्रीति को भली भांति देखा. कम्बख्त क्या गज़ब की क़ातिल जवानी दिख रही थी.
उसने एक नील रंग की साड़ी पहनी थी, उसकी जवानी उसके ब्लाउज से बाहर आने को बेकरार लग रही थी और नीला रंग उसके गोरी त्वचा पर बेहद फब रहा था,माथे में लगा गहरा सिंदूर उसके सुहाग की निशानी थी और हाथो की घनी चूड़ियां उसे और भी प्यारा बना रहे थे,,उसने अपने घने वालो को खुला ही रखा और जो उसके कमर को छू रहे थे,कमर में उसने पतला चांदी का करधन पहना, जो की उसके पतले और साड़ी से झांकते पेट को और भी मादक बना रहा था,.. कुल मिलाकर वो किसी भी मर्द को आकर्षित कर देने को तैयार थी, हल्की गंध वाली परफ्यूम से महकती हुई वो मुस्कुराते हुए मेरे पास आयी

… मैने जीजा साली के मजाकिया लहजे में पूछा….!
“किस पर जादू चलाने वाली हो “
उसकी आंखे चंचलता में मचली ..
“सभी पर “वो खिलखिलाई और कुसुम को जोरो से बाहों में जकड़ लिया। मैने शरारती अंदाज में कहा अपने जीजा से गले नही मिलोगी….??? उसने मुझे झूठे गुस्से से देखा….. और बोली “सबसे मुश्किल काम यही है “
इस तरह तो तुम्हारा हाथ पकड़ में आयेगा नही, लगता है चूड़ियों की दुकान खोलनी पड़ेगी मुझे…… मैने फिर से मजाकिया लहजे में कहा।
तो खोल लो…. ह्म्म्म ह्म्म्म
तभी कमरे से मेरे साढू भी बाहर आ गये उसका डॉक्टर पति मेरा साढू. मेरे सामने कहीं से ठहरता ही नहीं था. पांच फुट पांच इंच का मरियल सा बुजुर्ग की तरह दिखने वाला आदमी. औरतों जैसी पतली आवाज़. हाथ मिलाया तो पिलपिला सा हाथ. पिछली बार जब मुलाकात हुयी थी उसके मुकाबले अब कुछ ज्यादा ही बुड्ढा सा लग रहा था. उधर मैं चमड़ी चोर, ठरकी साला घाट घाट का पानी पिया हुआ पांच फुट ग्यारह इंच का हट्टा कट्टा, हैंडसम आदमी जिसके बदन से ताकत फूट पड़ती थी. कोई तुलना थी ही नहीं. यह तो पक्का था कि मेरी बड़ी साली प्रीति जैसी कामुक पटाखे को झेलना मेरे बूढ़े साढू के बस का रोग तो था नहीं. इसका अर्थ यह हुआ कि मेरी साली प्रीति एक ज़ोरदार मर्दानी चुदाई के लिए तरसती रहती होगी.
फिर हम चारों ऊपर से उतर कर नीचे आ गये ज़्यादातर मेहमान छोटे वाले बैंक्वेट में जमा हो गए. चाय पकोड़ों के दौर चलने लगे, जैसा शादियों में हुआ करता है. कुसुम देवी और प्रीति अपने रिश्तेदारों से गप्पे मरने में व्यस्त हो गई. बीच में बीच में मेरे आस पास मंडराती भी रही. दो तीन बार चाय लाकर भी दी. साढू महाशय भी साथ बैठा था और कुछ कुछ बोले जा रहा था. मैं भी उस को झेलता हुआ हूँ हाँ हूँ हाँ किये जा रहा था जबकि आज मेरा पूरा ध्यान अपनी बड़ी साली प्रीति पर केंद्रित था. उसके एक एक हाव भाव को, उसकी चाल को, उसके बदन के हर एक अंग को बड़े गौर से देख रहा था और अपने बेसाख्ता अकड़े हुए लौड़े को गहरी गहरी साँसें लेकर बिठाने की चेष्टा कर रहा था.
बार बार मैं उसे अपनी तरफ देखता हुआ पाता. जब भी आँखें मिलतीं तो वह निगाह पलट लेती. कभी माथे पर आयी हुई अपने बालों की लट को वापिस सिर तक ले जाती, नाज़ुक से सुन्दर से हाथों से. कभी अपने कानों के बुंदों को कुछ करती, तो कभी बैठ के अपने पैरों के बिछुओं के साथ कुछ घसर पसर करती. मैं उसकी नज़रों में भयंकर काम वासना बिजली की तरह कौंधती हुई देख रहा था.
कई बार मैंने जानबूजकर उसको अपने लौड़े वाली जगह पर सेहलाते (खुजाते) हुए दिखलाया। मै ठरकी जीजा बार बार अपना लौड़ा खुजाते हुए अपनी बड़ी साली प्रीति को अंदाज़ा और भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा था कि मेरी पैंट के नीचे जो औज़ार छुपा है वो कैसा है, कितना लम्बा है, कितना मोटा है. इसमें तो कोई संदेह था ही नहीं कि मै उसे चोदने को बेक़रार था. सवाल ये था कि कहाँ और कैसे. और दूसरा महत्वपूर्ण सवाल ये था कि पहल कैसे की जाए. मैने तो सब संकेत दे दिए थे तो अब यह जिम्मेदारी उसकी भी थी कि वो भी अपना पहला क़दम उठाये और जिससे मै चुदाई के लिए कोई जगह का इंतज़ाम करूं.
संयोग देखिए उसी वक्त फंक्शन में कुसुम का वही पुराना प्रेमी, “एक कमसिन बेवा (विधवा) की तन्हाई का साथी” दिनेश (उसका रिश्ते का कजिन मामा जिसने कुसुम जैसी जवान विधवा लड़की की तन्हाई से भरी जिंदगी में प्यार के दो पल दिये और आगनबॉडी में नौकरी लगवाने में मदद की थी) उसकी बीवी और उसका छोटा बच्चा आया हुआ था. मैंने दिनेश को जैसे ही देखा, तुरंत मैंने कुसुम के चेहरे को देखा. उसने नजरें झुका लीं.।
ये एक ऐसा संयोग था और ये तभी होता है जब किस्मत के सितारे किसी बहुत खास मौके पर किसी खास दिशा में आपकी गांड फाड़ने के लिए एक साथ तैयार हों. मेरे ख़याल से इसे और किसी तरीके से बतलाया नहीं जा सकता. ये वास्तव में एक अदुभूत संयोग था.
ऐसे तो कई मर्द थे जो कुसुम के दीवाने थे लेकिन ये पहला था जिसकी कुसुम दीवानी थी ,मैं आज उससे पहली बार मिलने वाला था,पता नही क्यो लेकिन मुझे थोड़ा नर्वस फील हो रहा था …अब कुसुम का चहरा बिल्कुल ही खिला खिला लग रहा था ,लेकिन फिर भी वो थोड़ी डर जाती शायद उसे इस बात का डर था की उसकी इतनी खुशी मुझे तकलीफ ना दे लेकिन मैंने फिर से उसे थोड़ा समझाया और वो अब खुल कर अपनी खुशी दिखा रही थी ..
मैंने कुसुम से मजाक में कहा- तुम्हारा पहला आशिक इधर ही आ रहा है, थोड़ा संभल कर के रहना.
वो झूठा गुस्सा दिखाती हुई बोली- धत् आप भी ना… ऐसा कुछ नहीं है.
मैंने कहा- दिनेश की तो लार टपक रही होगी तुम्हें सजा-धजा देख कर, उसने न जाने कैसे छोड़ दिया शादी से पहले तुमको. मैं तुम्हारा प्रेमी रहता तो तुम्हें पेले बिना किसी और का नही होने देता.
वो इस बात से झूठा गुस्सा होकर मुझे मुक्का मारने लगी और बोली- छीः कैसा बोलते हैं आप?
दिनेश वाकयी में गोरा चिट्टा और स्मार्ट था. परंतु भाग्य देखिए कि उसकी बीवी उसके बिल्कुल विपरीत थी. दिनेश की बीवी का नाम नीतू था. वो 5 फीट 3 इंच की नाटी और सांवली थी. उसकी उम्र लगभग 40 वर्ष रही होगी अर्थात मेरी बीवी से 05 वर्ष बड़ी.

उसकी बॉडी का साईज 36-34-36 का रहा होगा मतलब वो मोटी भी थी. मेरी कुसुम के सामने वो कुछ भी नहीं थी. कहां मेरी बीवी हूर की परी और कहां वो नाटी और मोटी और सांवली….
कुछ पल बाद ही वो वक्त आ गया जब दिनेश अपनी बीवी बच्चो के साथ हमारे .. सामने आन खड़ा हुआ। लेकिन जैसा मैंने सोचा था उसका उल्टा हुआ ,वो कुसुम की ओर लपकने के बदले बेहद ही सादगी से पेश आया,शायद उसे इस बात का इल्म था की कुसुम अब शादी शुदा है और उसका पति भी साथ में मौजूद है ..वो बेहद ही सभयता से व्यवहार कर रहा था उल्टे कुसुम बेहद खुस थी और उसके पास खड़ी हुई बिल्कुल किसी बिन ब्याही कुवारी लड़की जैसे व्यव्हार कर रही थी ,जैसे मैं हु ही नही ,
लेकिन दिनेश को मेरे होने का आभास था, जब कभी कुसुम बातों बातों में अपना हाथ उसके हाथ और पीठ पर मार देती वो मुझे देखता लेकिन मेरे तरफ से कोई खास रियेक्सन ना पाकर रिलेक्स हो जाता ,मैं भी उसकी बातो का मजा ले रहा था,वो किसी बिछड़े दोस्तो (प्रेमियों) की तरह एक दूजे के बातो और किस्सों में ही गुम हो गए थे, दिनेश जरूर झेंप रहा था लेकिन धीरे धीरे उसकी वो झेंप गायब होने लगी लेकिन अब भी वो अपनी मर्यादा में ही था,वो सच में एक अच्छा लड़का था जिसे अपनी मेहबूबा की शादी शुदा जीवन के खराब होने का भी डर रहता है ..
“ओहो सच में कितना बात कर रही हु,आप लोगो को तो बात करने का मौका ही नही मिला ..”
“तुम ऐसे भी किसी को कहा बोलने देती हु
“ दिनेश की बात से कुसुम बस मुस्कुरा कर रह गई ।
मैंने दिनेश से हाथ मिलाया और “अरे अब मैं क्या बात करू ,तुम दोनो सालो बाद मिले हो तो बाते करो “
“हमारी बाते तो कभी खत्म नही होंगी ,
और तू भी कम नहीं है कमीने..”
कुसुम उसे बड़े प्यार से कमीना कह रही थी , कुसुम की ये हँसी ठिठोली देखकर मुझे सच में दिनेश से जलन होने लगी क्योकि मेरी उसके (कुसुम) जैसी कोई (मेहबूबा) कभी नही रही थी ,उन दोनों की पुरानी यादे और बाते तो मेरे दिमाग की समझदानी के परे थी।
खैर … हम सब एक साथ कुर्सियों पर आ बैठे. मेरे बगल में मेरी बीवी और दूसरी तरफ दिनेश और उसकी मोटी बीवी. मेरे साढू प्रीति के साथ किसी और रिश्तेदार से मिलने चले गए थे,
मेरी कुसुम ने उस वक्त साड़ी पहनी थी और वो साड़ी में सबसे अच्छी लगती है. उस समय भी वो लाल गुलाबी रंग की साड़ी, सेक्सी ब्लाउज पहने हुई थी और उसने बहुत अच्छा मेकअप किया हुआ था. उसने गहरे रंग का चेरी रेड लिपस्टिक लगाई हुई थी. वो किसी अप्सरा से कम नहीं दिख रही थी. वो बला की खूबसूरत लग रही थी.

दिनेश बार बार मेरी बीवी को बहुत हसरत भरी निगाहों से देख रहा था और मायूस भी था. आखिर हो भी क्यों ना, जिसे वो जान से ज्यादा चाहता था और इतनी खूबसूरत और सेक्सी लड़की को कौन नहीं पाना चाहेगा.वो कभी कभी कुसुम के हंसते हुए चहरे को बड़े प्यार से देखता और थोड़ी देर के लिए खो जाता,फिर झेंप कर चहरा दूसरी ओर कर लेता, मैंने कुसुम को घूरते हुए बहुत से लड़को को देखा था लेकिन किसी की आंखों में कुसुम के लिए ऐसा प्यार कभी नही देखा था,उसकी आंखों में प्यार भी था तो कही कही कोई दुख कोई टीस सी भी थी ,जैसे जैसे वक्त की घडिया गुजरती जा रही थी माहौल में कुछ अजीब सी उदासी छा रही थी ,ऐसा लग रहा था जैसे कोई आशिक अपना टूटा हुआ दिल ले के बैठा है,लेकिन कुछ कह नही पा रहा कुछ जता नही पा रहा है।
एकाएक एक बार दिनेश और मेरी बीवी कुसुम की नजरें मिलीं, तो दिनेश की आंखें डबडबा गईं और कुसुम ने भी अपनी नजरों को नीचे कर लिया.
बातों को बीच में ही छोड़कर दिनेश उठ गया और कुछ जरूरी कॉल के बहाने वहां से चला गया. मैं और कुसुम इस बात को समझ गए थे और एक दूसरे को देखने भी लगे, पर कुछ बोले नहीं.. ..
मैंने कुसुम से कान में कहा- यार, दिनेश अब भी तुमसे बहुत प्यार करता है.
वो मायूस होकर बोली- लेकिन मैं अब सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ.
मैंने कहा- यार, कितना हैंडसम है और कैसी बीवी मिल गई, तुम्हारे सामने तो वो कुछ भी नहीं है. कैसे वो जिंदगी काट रहा होगा.
कुसुम बोली- हां, बहुत बुरा हुआ उसके साथ!
अब मैंने नोटिस किया कि कुसुम को भी कहीं ना कहीं दिनेश से हमदर्दी थी और उसके मन में अभी भी उसके लिए कुछ तो था………शायद प्यार……..????
थोड़ी देर बाद दिनेश घूम फिर कर वापस आ गया….. और हम बातचीत करने लगे
दिनेश से बातचीत के क्रम में पता चला कि मै जिस कॉलोनी में रहता हूँ, वहां भी दिनेश बिजनेस के सिलसिले में जाता है.
मैंने उससे वादा लिया कि अगली बार जब भी आए, मेरे यहां जरूर पधारे. वो कुसुम को देखकर मेरी बात से खुश हो गया और उसने आने का वादा कर दिया.
कुसुम ये सब सुनकर चुप थी.
तभी दिनेश का बच्चा सामने लगे आइस क्रीम काउंटर पर बच्चो को आइस क्रीम खाते देख आइस क्रीम की जिद करने लगा तो दिनेश की बीवी उसको लेकर जाने लगी, मेने दिनेश की बीबी को टोकते हुए कहा नीतू भाभी चलिए मै भी साथ चलता हूँ…. और सभी के लिए आइस क्रीम लेकर आता हू।
दिनेश मुझसे बोला आप बैठो मैं लेकर आता हू…. दिनेश को देखने से ऐसा नहीं लग रहा था. मैं समझ गया कि वो बहाना बना रहा है. खैर … यही तो मैं चाहता था।
तो मैंने झट से कहा कि आप यहां ही ठहरेंगे…… थोड़ा नानुकुर के बाद वो मान गया.
मैं कोई जानबूझकर या ककोल्ड और जलन की भावना से ऐसा नहीं कर रहा था मैं तो बस अपनी बीवी के दिल में छिपे राज और उसके प्यार को जानने के लिए प्रयास कर रहा था, कि मेरी बीवी कुसुम को उसके दिल में दबी यादें और बातें करने का कीड़ा पूर्ण रूप से मरना ही चाहिए.
फिर मै और दिनेश की बीवी नीतू भाभी आइस क्रीम कांउटर पर चले गए. दिनेश की नजर कुसुम से हट ही नहीं रही थी.
कुसुम शो ऑफ करते हुए अपना मोबाईल चला रहा थी. तभी दिनेश उठा और कुसुम के पास रखी हुयी मेरी रिक्त की गयी कुर्सी पर कुसुम के बगल में बैठ गया.
उसने कुसुम से पूछा- खुश तो हो कुसुम?
कुसुम बोली- पता नही और तुम ?
वो बोला- जिंदगी कट रही है! मेरे मां बाप ने बिना मेरी पसंद की लड़की से शादी कर दी, जो मुझे पसंद नहीं है. खैर तुमको तो काफी अच्छा लड़का मिला है, जैसा तुम चाहती थी. लंबा चौड़ा, सुंदर, नौकरी वाला सब है.
कुसुम बोली- हां वो तो है, अरुण बहुत अच्छे हैं. मेरा बहुत ख्याल रखते हैं.
इधर उधर की बात करते करते दिनेश ने अपने प्यार के दिनों की बात छेड़ दी और कुसुम भी उन्हीं यादों में खो गई.
मगर कुछ अल्फ़ाज़ ऐसे होते हैं कि आदमी चाह कर भी उन्हे नज़रअंदाज़ नही कर सकता, खास कर अगर वो अल्फ़ाज़ अपनी शादी शुदा आर्धगिनी के मुँह से सुन रहा हो तो. जब मैने कुसुम को वो बात कहते सुना तो मेरे कान खड़े हो गये….
एकाएक दिनेश बोला- याद है वो हमारा पहला किस?
कुसुम बोली- हां, उसे मैं कैसे भूल सकती हूं. दोनो ही खिलखिला कर हँस पड़े और देखते ही देखते दोनो की आंखों में आंसू आ गया,दोनो ने ही खुद को सम्हाला ।
लेकिन फिर भी मैं कुसुम के चहरे में आये हुए दुख के भाव को पहचान सकता था।
अब कुसुम काफ़ी समय तक चुप रही बस सुन रही थी और बीच बीच ‘हाँ’, ‘हुंग’, ‘मैं जानती हूँ’ कर रही थी. आख़िरकार अंत में वो बोली “मैं वो सब करके देख चुकी हूँ मगर कोई फ़ायदा नही. अब हमारी ज़िंदगी उस पड़ाव पर पहुँच गयी है।
ये सब बात करते करते दिनेश कुसुम के करीब आ गया था और कुसुम की आंखों में देखने लगा. कुसुम भी उसकी आंखों में खो गई.
तभी एकाएक कुसुम ने अपनी उंगलियों से अपने बालों को सहलाया और चेहरे पर गिरी हुयी जुल्फो, लटो को कान के पीछे की तरफ कर ठीक किया.
कुसुम के गालों को प्यार से चूमती हुयी जुल्फो की लटो को देखते हुए दिनेश बोला- तुम पहले से भी ज्यादा सुंदर हो गई हो और तुम्हारी जवानी तो कयामत ढा रही है.
ये सुन कर कुसुम शर्मा गई. कुसुम भी उस समय अलग ही दुनिया में थी.
उफफफ्फ़ मैं अब जाकर समझा था. मेरी बीवी मुझसे शादी करने के बाद भी खुश नही थी और दिनेश से शिकायत कर रही थी या अपना दुखड़ा रो रही थी. जाहिर था दिनेश अब भी कुसुम के दिल के बहुत नज़दीक था. इसीलिए वो उस शख्स से इतने खुलेपन और भरोसे से बात कर रही थी.
फिर से एक लंबी चुप्पी छा जाती है और वो सिर्फ़ सुनती रहती है. तब वो बोलती है “मुझे नही मालूम मैं क्या करूँ, मेरी समझ में कुछ नही आता. कभी कभी मैं रात भर चैन से सो भी नही पाती ।
मैने कभी भी अपनी बीवी कुसुम को बेवफ़ाई और बेहहयाई शब्द के साथ जोड़ कर नही देखा था. वो मेरे लिए इतनी पूर्ण, इतनी निष्कलंक थी कि मैं जानता भी नही था कि उसकी भी एक अधूरी मोहब्बत थीं हर औरत…की ही तरह. वो मेरे लिए सिर्फ़ पत्नी थी सिर्फ़ पत्नी, एक औरत कभी नही.
पूरी शुद्ध और पवित्र. जब उसकी बातचीत ने इस ओर इशारा किया कि उसके पास भी एक दिल है जो तड़प रहा है, धड़क रह है सिर्फ उसके यार के लिए. बस, मैं और कुछ नही देखना चाहता था. मैं यह भी भूल गया कि मैं यहाँ क्या कर रहा था और क्या करने गया था. मैं वहाँ से दूर हट जाना चाहता था इतना दूर की कुसुम को ना देख सकूँ।
बेवफ़ाई का दर्द क्या होता है ये मुझ जैसे ठरकी आदमी को अब समझ आ रहा था।
जिसे पहले कक्कोल्ड और वाइफ स्वैप खेलने का कीड़ा लगा बैठा था । और अब इस वक्त अपनी ही बीवी के अतीत के राज जानकर करके अपनी ही गांड जला रहा था, लेकिन मेरा दिमाग काम कर रहा था, कुसुम का मोबाइल अभी उसके हाथों में था जिस पर अभी अभी कोई मेसेज आया था,अब वो नंबर सेव हो चुका था, दिनेश के नाम से ,उत्सुकता तो बहुत हुई की उसका मेसेज जो मेरे फोन पर भी दिखा पढू लेकिन फिर दिमाग ने कहा की कोई नही अभी रहन दो एक बार जब कुसुम पढ़ ले उसके बाद पढ़ूँगा।
“एक्सक्यूज़ मि भाई साहब .. चलिए बच्चे ने आइस क्रीम ले ली अब चलते हैं, नीतू भाभी मुझसे बोली और हम वापस अपने अपने पति – पत्नी के पास जा पहुँचे ..”
हमें वापस उनकी ओर आता देख कुसुम और दिनेश दोनो ही खामोश हो गये थे ,एक अजीब सी खामोशी फैल रही थी , मैने दिनेश को आइस क्रीम देनी चाही… दिनेश बड़ी मुश्किल से अपने होठो पर झूठी हँसी ला पाया, लेकिन मैं उसके चहरे में आये हुए दुख के भाव को पहचान सकता था,
“माफ करो यार अरुण लेकिन मुझे भूख लगी है , और अब खाना खाता हूँ, आप भी ना चलो तुम लोग भी खाना खा लो “
इतना केहकर दिनेश ने हमसे इजाजत मांगी, कुसुम और दिनेश दोनो बिदा होते समय भी चुप ही थे,
“अच्छा लड़का है “
उसके जाने के बाद मैंने कुसुम से कहा
“हा बहुत ही अच्छा लड़का है ..”
बस इतना बोलकर कुसुम वँहा से सीधे ही सामने से सोलह श्रृंगार किये हुए आती हुयी मेरी छोटी साली जूली के पास में चली गई।
जारी है…..!

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