कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 59

कर्ज और फर्ज एक कश्मकश - Erotic Family Sex Story
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” बेवफ़ाई या बेहयाई “”

प्रोफेसर अरुण साहब आप से विनम्र अनुरोध है, अपनी और अपनी लुगाई कुसुम को रंगवा पुतवा कर जिस्म दिखाने की नुमाइश की चुल्ल मेरे घर के बाहर मिटाये कृपा कर मेरे गांड में उंगली ना करे।

अब खतम भी करो ये बेफिजूल की बहस, रिंकी बेटी तुझे मौसी के संगीत कार्यक्रम में नही जाना क्या….??? जा बिटिया अब तैयार हो जा…..तेरी मम्मी अगर तेरे से पहले तैयार हो गयी तो बड़ी आफत हो जायेगी, और तुझे छोड़ कर ही चली जायेगी जा जल्दी…… और अरुण तुम अपने कमरे में जाओ बहू से पूछो कितने बजे जायेगी। मेरी मम्मी, बाप बेटे की ज्ञान चर्चा का अंत करते हुए बोली।

इससे पहले मै कमरे दाखिल हो पाता पीछे से रिंकी की आवाज आई।

पापा… मैने आपको मैसेज किया था वो चीज लाये क्या….???

मै अपना माथा पकड़ते हुए ओह्ह शिट मुझे याद नही रहा मै अभी लेकर आता हू। मै शादीशुदा जरूर हू लेकिन अभी तीन महीने ही हुए है और कुसुम ही हमेशा खुद के use होने वाली चीज पैड, अंडर गारमेंट, हेयर removal etc जैसी खुद ही खरीदती है।

मेरे लिये लाइफ का ये पहला अनुभव था,

मैने आज तक कंडोम नही खरीदा और कुसुम को बिना कॉंडोम के ही चोद रहा हूँ।

 मेरे जैसे शर्मीले लड़को के लिए कंडोम खरीदना ही मुश्किल था और अब पैड  खरीदना से मुश्किल क्या होगा।

“”मेरी हालत वैसी थी जैसे हमारे छोटे शहरों में शराब की दुकान पर पहली बार मजबूरी में शराब खरीदने पर होती है “”

मै मेडिकल शॉप पर पहुँच गया।

शॉप कीपर एक लेडी थी मै उससे धीरे से शर्माते हुए  बोला  व्हिस्पर देना।

शॉप कीपर — कोनसा साइज

मै– मैं चोंकते हुए स स स साइज क्या,

शॉप कीपर– कितना बड़ा

मै– मन ही मन बेहनचोद इसमें भी साइज आता है, कोन कौन सा साइज है।

शॉप कीपर– normal, large, extra large

मै– मन ही मन अब रिंकी का साइज तो मुझे पता ही नही है अब क्या करू कही छोटा पेड ले लिया तो leekage की प्रॉब्लम हो सकती है और बड़ा ले लिया तो रिंकी की पैंटी में सेट नही हो पायेगा अब क्या करू रिंकी को फोन कर के पूंछू।

शॉप कीपर– क्या सोच रहे हो भाई साहब बोलो जल्दी कोनसा साइज देना,

मै— अटकते हुए वो साइज

शॉप कीपर– किसके के लिए चाहिए

मै– चिढ़ते हुए इससे तुम्हे मतलब क्या है ।

शॉप कीपर– हस्ती हुयी अरे भाई मै पूछ रही हूँ जिसके लिए चाहिए उसकी उम्र और शरीर कैसा है पीरियड पैड उमर और शरीर के हिसाब  से साइज दे देती हूँ।

मै– फिर फँस गया। सच बोल नही सकता कि बिटिया के लिए चाइये नही तो शॉप कीपर क्या सोचेगी।

शॉप कीपर– मेरी चुप्पी देखकर बोली आप ये नॉर्मल वाला ले जाये।

मै– दे दो जो होगा वो देखा जायेगा।

मै क़ाली थैलि में पेड लेकर अपने घर से कुछ दूर ही पहुँचा था कि ज्ञान प्रकाश गुप्ता मेरे वकील दोस्त का काल आ गया,

“कैसे हो दोस्त आ गयी भाभी”

“हा यार वो तो उसी दिन आ गयी थी जब मैं तेरे से मिलकर आया था,”

“अच्छा है साले तभी मैं बोलू साले कोई फोन कैसे नही कर रहा है,अभी क्या हालत है ,सब कुछ ठीक ही होगा तभी तो तेरा कोई पता नही है अभी तक,,”

“हा भाई सब ठीक ही लग रहा है,कोई भी ऐसी बात तो नही हुई जिससे मुझे कुछ शक हो,”

मैंने आवेश में आकर गलती से आज टेट्ट स्टूडियो वाली पूरी बात ज्ञान प्रकाश को बता दी,,,

मुझे ज्ञान प्रकाश की जोरो की हँसी की आवाज सुनाई दी,

“मादरचोद तू भी आखिर बन ही गया ना cuckold ,मुझे तो उस दिन बहुत ही ज्ञान दे रहा था” “अबे चुतिया, …. तुझे नही पता कि तू क्या था और क्या बन गया है… आज तक खुद की बीवी के अलावा किसी लड़की को चूमा तक नही तूने….बड़ी मुश्किल से 36 कि उम्र में अभी नई नई शादी हुयी है तेरी, अभी ठीक से तूने अपनी बीवी को भोगा भी नही होगा। और तू अपनी बीवी को गैर मर्दो के सामने परोसने की सोचने लगा। “साले जब बंदा नई गाड़ी भी खरीदता है, तो साल दो साल तक खुद रगड़ कर चलाता है, तब कही जाकर किसी मांगने वाले को देता है।” और तू तो अपनी नयी नवेली बीवी को इस तरह…… क्या यार मुझे तेरी मर्दान्दगी पर शक हो रहा है। 36 की उम्र में गुप्त रोग का शिकार तो नही हो गया।

ज्ञान प्रकाश की बात का मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगा, मैंने एक गहरी सांस छोड़ी साथ ही ज्ञान प्रकाश ने भी ..अब हम दोनों के मन शांत थे,,,पर एक अजीब सी झुनझुनाहट भी मेरे शरीर मे दौड़ गयी ये सोचकर कि अपनी नई नवेली बीवी को दूसरे मर्दो के साथ….साला क्या मैं सच मे नामर्द ( गुप्त रोगी ) हो रहा हु… इसलिए अपनी बीवी को किसी गैर मर्द के साथ…!

आखिरकार ज्ञान प्रकाश ने मुझे फिर से टोका

“क्या हो गया बे किस सोच में पड़ा है”

कुछ नहीं तू बोलता जा… तेरी कड़वी बातें आज मुझे उतनी कड़वी नही लग रही है।

जो cuckold का कीडा तुम्हारे दिमाग में चल रहा है उसका परिणाम सोचा है अगर भाभी को किसी और का लंड रास आ गया और उन्होंने तेरे गांड पर लात मार दी तो…..! फिर तू क्या सारी जिंदगी हाथ से हिलायेगा। प्रोफेसर अरुण कुमार औरत के अंदर एक बहोत बड़ी खूबी होती एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी…….. चूड़ी का रंग उतर जाएगा, चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी….बस यही खूबी औरत को विशिष्ट बनाती है….अभी तक तुमसे भाभी को कोई बच्चा भी नही है, लेकिन कल को जो जब तुम बाप बनोगे तो क्या गारंटी होगी वो बच्चा तुम्हारा ही होगा। मान भी लो वो तुम्हारा ही बच्चा हो, लेकिन तुम जिंदगी भर उस बच्चे को शक की नजर से देखोगे। पति के cuckold बनने के तीन कारण होते है… पहला जब उसकी बीवी उससे संतुष्ट नही होती। दूसरा जब उसकी बीवी चरित्रहीन छिनार हो जाती है। तीसरा उसके खुद के affair को छिपाने के लिए पत्नी को षड्यंत्र पूर्वक दूसरो के बिस्तर पर भेज देता है। इन तीनों मे से तेरे cuckold बनने का कोई कारण तो मुझे समझ नहीं आता।

ज्ञान प्रकाश से बात करके कुसुम के लिए दिल मे इज्जत जागी, पर साथ ही एक डर भी था,क्या मैं वाकई कुसुम को संतुष्ट नहीं कर पा रहा…. .. .शायद हा..! भावनात्मक रूप से तो कुसुम मेरी है पर शायद शारिरिक रूप से उसे और ज्यादा की जरूरत है जो मैं उसे नही दे पाता,या शायद मुझसे शादी पहले के वो दिन जिसमे कुसुम ने बहुत ही मजे किये थे या दर्द झेला था (वो तो वही जानती है) ने उसे इस कदर सेक्स के प्रति पागल बना दिया है कि वो भी अपनी मर्यादाओ से बाहर जाने से नही कतराती…

 वैसे ज्ञान प्रकाश तूने अचानक से फोन क्यों किया  ????

भाभी के ऑफिस के कुछ इनफार्मेशन निकले थे ,शायद अब तुझे उसकी जरूरत नही है,” क्योकि अब तू खुद ही अपनी बीवी को गैरों के बिस्तर पर देखने को तैयार है तो भाभी के चरित्र का आकलन करने का कोई मतलब नहीं…..!

साला वकील फिर से दिल की धड़कने बड़ा गया

“क्या पता चला तुझे”

“वही तेरे बीबी के ऑफिस में उसके हुस्न के चर्चे ”

अब मेरे माथे में पसीना था पता नही ये वकील क्या बताने वाला था, मैंने मन मे सोचा की यार ठीक है वो मुझसे ही गलती हो गयी, और अब cuckold की बात मै सपने भी नही सोचूँगा, और हिम्मत कर कह गया

“बता दे यार अब मुझे डर नही…. बीबियाँ हमेशा से ही ताकतवर रही है, चाहे बिस्तर हो या दफ्तर, इन्होंने दोनों ही जगह मर्दों को परास्त किया है।”

वकील की तो जोरो से हँसी छूट गयी और मुझे भी बड़ी शर्म महसूस हुई..

“साले मादरचोद “मैंने धीरे से कहा पर उस ने इसे सुन के अनसुना कर दिया,

“सुन एक काम कर जब भी फ्री हो तो मेरे घर आजा वही बैठ कर पीते पीते बात करते है।

वाह ये तो मेरे लिए कमाल ही हो गया

“थैंक्स यार ”

“कोई बात नही बेटा, लेकिन सिर्फ तू ही मजे ले अपनी बीवी के…. किसी और को ना लेने दे” और मौका मिले तो किसी और की बीवी को जरूर रगड़ दे…!

इतना कहकर वो जोरो से हसने लगा,साला बड़ा कमीना था पर आज ना जाने क्यों उसके कमीनेपन में मुझे गुस्सा नही आ रहा था,,,,

वकील के फोन कटने के बाद से ही मैं वापस घर आ गया।

मै वापस घर पहुँच गया अब मुझे दो टेशन थी एक whisper मै रिंकी के हाथ में दू या कुसुम के कुछ समझ नही आ रहा था। मैने whisper का पैकेट थैली में अपने पास ही रख लिया। और दूसरी टेंशन मुझे डर था कि अभी थोड़ी देर पहले हॉल में जो बाप बेटे की बीच जो बहस हुयी थी उन बातों को कुसुम ने तो नही सुन लिया, क्योकि पूरी बहस का मुद्दा तो एक मात्र वो ही तो थी। मैने रिंकी के पास ना जाते हुए कुसुम के पास जाने का फैसला लिया। अपने कमरे में डरते डरते मै अपने कदम बढ़ा रहा था,

जबकि दूसरी ओर अपने कमरे में आने के बाद कुसुम नहाने चली गयी थी उसने उसके पीठ पीछे जो बहस हुयी थी उसको जरा सा भी नही सुना था। जब वो गिले बालो के साथ बाथरूम में से निकली जैसे कोई ओश की बूंद ताजा हरी घास पर अटखेलिया कर रहा हो,मेरे सामने अपने बेडरूम का पूरा नजारा था पर मैं अपनी कुसुम के चहरे को देखकर दीवाना हो रहा था, उसकी लाली ताजा सेब की तरह,टबेल में लिपटी हुई बलखाती कमर उन्नत वक्ष जो तोलिये मे लिपटे हुए भी अपने शबाब की झलक दिखा रहे थे,उसने अंग अंग को आईने में निहारा और बड़ी शरमाते हुए अपने कपडे उठा लिए मुझे लगा था की वो अपना तोलिया गिरा देगी लेकिन उसकी शर्म ने मेरी जान की इज्जत मेरी नजरो में और बढ़ा दी,वो अकेले में भी अपने नग्नता से शर्मा रही थी, वही नग्नता जिसका भोग मै हर रोज करता आ रहा हूं, उसने बड़े सलीके से अपनी साड़ी पहन ली और पुरे मनोयोग से सजने लगी, उसने मेरे नाम का गहरा सा सिंदूर अपनी मांग मे भर लिया, फिर लाल चमकती हुयी एक छोटी सी बिंदी अपने माथे में लगाई और चूडियो को हाथो में डाल कर चूम लिया ये देख मेरे दिल में ऐसा प्यार जगा की अभी जा कर उसे चूम लू , जब वो सजके तैयार हो गयी तो उठकर बिस्तर के पास आई और मेरी और उसकी फोटो को उठा कर चूम लिया मेरा दिल तो भर आया की कोई किसी को इतना प्यार कैसे कर सकता है, और मैं अपनी ही सोच में डूब गया,की मैं कितना खुश किस्मत हु,

इस दृश्य ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या सच में कुसुम के ऑफिस में कुछ हो रहा है जिसकी मुझे भनक नहीं हो पा रही है,दिल कुछ गलत सोचने से भी इंकार कर रहा था पर दिमाग ने एक अंतर्द्वंद की स्तिथि पैदा कर दी थी, कुसुम का प्यार महसूस कर और देखकर मैं सोच भी नही पा रहा था की वो मुझे कभी धोखा भी देगी,मैंने आँखों देखि साँच पर ही विश्वाश करने की ठान ली,और भगवान से दुआ की की मेरा वकील दोस्त गलत हो,……….।

आज मैं एक बोझ में था उस हकीकत का बोझ जो अभी मेरी सिर्फ कल्पनाओ में था, कुसुम के चहरे पर कोई सिकन न थी न ही कोई ग्लानी के भाव,वही मुस्कुराता मासूम सा चहरा,वही नश्छल आँखे,मैं उसका चहरा देखता ही रहा अपलक निर्विचार,

क्या देख रहे है आप,  कुछ खामोश से है, कोई प्रोब्लम है क्या घर में, नहीं बस सोच रहा था की तुम इतनी सुंदर क्यों हो, क्यों हो इतनी मासूम, इतनीं निश्छल, इतनी पावन,

कुसुम ने मुझे घुर कर देखा,.

क्या हुआ है आपको. . . . . ???

कुछ नहीं ….!

कुसुम को शक तो था की मुझे कुछ हुआ है पर मैं उससे क्या कहता की मैं तुमपे शक कर रहा हु, क्या पूछता उससे की क्या वो अपने ऑफिस में गुल्छरे उड़ा रही है ,,

छि छि मैं इतना कैसे गिर सकता हु की कुसुम के बारे में ऐसा सोचु..

मैं प्यार से कुसुम के पास गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,मेरे आलिंगन में एक गहरा प्यार था जिसका आभाष कुसुम को हो गया था,उसने अपना सर पीछे करते हुए मेरे होठो को अपने होठो से रगड़ना शुरू कर दिया मैंने भी अपना मुह खोल उसके प्यारे गुलाबी लबो के रस का पान करने लगा…

हम मेक अप टेबल के पास खड़े होकर अपनी प्रेम लीला में खोये हुए थे,

ये तन्द्रा तब टूटी जब रिंकी ने खासते हुए कमरे में प्रवेश किया, कुसुम की आँखे शर्म से झुक गयी, मैं भी थोडा शर्मिन्दा हुआ पर जब मैंने रिंकी को देखा तो मै निश्चिंत हो गया क्योकि वो एक आश्चर्य से मुझे निहार रही थी जैसे पूछ रही हो अगर पति पत्नी की रास लीला समाप्त हो गयी हो तो मेरे सेनेटरी पेड मुझे मिले..??? रिंकी तो मेरा ही वेट कर रही थी की मै सेनेटरी पैड़ लाऊँ तो वो चेंज करे काफी टाइम हो गया है सुबह वाला यूज करते हुए।

कुसुम: बोलो रिंकी

रिंकी के कुछ बोलने से पहले मै…..ये लो रिंकी को दे देना मै कुसुम के हाथ मैं एक पैकेट पकड़ा कर और कमरे से बाहर चला आया।

कुसुम पैकेट को देखति है और खोलती है

उसमे जो था उससे देख कर शॉकड हो गयी।

एक तो इसलिए की उसमे व्हिस्पर था  दुसरा व्हिस्पर का सबसे महंगा प्रोडक्ट था जो उसने आज तक यूज नहीं किया था।

कुसुम को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे। पर रिंकी को इसकी ज़रूरत थी इसलिए वो उसे यूज करने के लिए दे देती है, और जल्द तैयार होकर फंक्शन में चलने के लिए केहकर बेड पर लेट जाती है। कुसुम अब इसी उधेड़बुन में थी मेरी जैसी मिडिल क्लास फैमिली कि औरत जो अपने mc पीरियड कि बात अपने पति के अलावा सबसे छिपाती है, खाना नही बनाने पर  बच्चो से तबियत खराब होने का बहाना बना कर टाल देती है। पर मेरी जवान बेटी ने आज अपने पापा को mc पीरियड कि बात बता दी। भले अरुण उसका सौतेला बाप है पर आखिर है तो एक मर्द…. और इस तरह अब इतनी बाप बेटी को ज्यादा छूट देना ठीक नहीं है। अब कुसुम को अपनी बेटी का अपने पति के साथ ज्यादा खुलापन खटक रहा था।

जारी है…….!

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