पूर्णिमा की रात्रि – Update 16
मां और में वापस वही पहुंच गई.. मां आते हुए मूतने के लिए चली तब तक में वहा पहुंच गया था जब मेरी नजर नीचे गई मेरे होस उड़ गई…
वहा ब्रा पेंटी पड़ी हुए थी ब्रा पेंटी देखने से महंगी लग रही थी मैने तुरत ब्रा पैंटी उठा के चारे के नीचे छुपा दिया…
मुझे सब सब समझ आने लगा की ये जगा का लोग कैसे उसे कर रहे हैं अब यहां रहना मुझे सही नही लगा…
जेसे ही मां आई मैने उन्हे मना लिया यहां से जाने के लिए…
हम आगे निकल गई वहा से और कुछ दूर जाके हम एक छोटी सी होटल में कमरा ले लिए…में काफी तक चुका था तो ने बेड पे पड़ते ही सो गया…और सुबह 10 बजे उठा… मेने जब उठा मां बालकोनी में थी और फोन पे बात कर रही थी…
एक रात पहले पापा आंटी को नहाते देख खेत की और निकल गई थे वो साम को वापस आई… आंटी ने पहले ही खाना तैयार कर दिया था… पापा आंटी से नज़रे नही मिला पा रहे थे.. आंटी की दर्द भरी छुदाई तो पापा ने नसे में की थी उन्हें ठीक से याद भी नहीं लेकिन ये सुबह वाला मादक जिस्म को वो भूल नहीं पाई.. जैसे ही वो आंटी की और देखते उन्हे उनके रस भरे उभरे हुए स्तन याद आ जाते….
जैसे तैसे खाना खत्म कर वो सोने के लिए चले गई…रात के कुछ 12 पापा की नींद दरवाजे की आवाज से खुल गई….पापा ने दरवाजा खोला तो सामने आंटी खड़ी थी… पापा जैसे दूसरे ही पल अपनी गहरी नींद से बाहर आ गई.. सामने कामुक औरत जो थी..
आंटी – जी क्या में यहा आप के साथ सो जाऊं मुझे बुरे बुरे सपने आ रहे ही बहोत दर लग रहा है प्लीज…
आंटी ने जितना हो सके उतनी बिचारी लगते हुए कहा…
पापा में मना किया लेकिन औरत के आगे क्या करे मर्द आखिर में सुलाना ही पड़ा.. पापा नीचे सो गई और आंटी उपर..
जब सुबह हुए पापा के होस उड़ गए आंटी पापा के सीने पे सर रखे बड़े आराम से अपनी नींद ले रही थी..
पापा को नींद में लगा कि मां है और वो आंटी को प्यार करने लगे उन्हें प्यार से सहलाने लगे और गालों को चूम लिया..जेसेही पापा की आंख खुली और उनकी बाहों में उन्होंने मां को नही लेकिन आंटी को पाया..
पापा हड़बड़ा गई और जट से उठ खड़े हुए… जिस से आंटी का सर जमीन से टकरा गया…वो भी उठ गई…
पापा – आप यहां कैसे आप पागल हो क्या…
आंटी – प्लीज मुझे माफ कर दीजिए वो ना रात में बहोत डर गई थी में इस लिए…
पापा – तो क्या आप इसे किसी के भी साथ छी….
आंटी – (रोने लगी) किसी के भी साथ नहीं उसके साथ जिस का बच्चा लिए घूम रही हू… सारी गलती तो आप की है में एक तो आप की मदद की और आप है की…
पापा को बहोत बुरा लगा…और वो बस बाहर निकल गई…
अब आते ही होटल में……
मां अंदर आई और हम नहा धोकर चाय नाश्ता करने लगे जो होटल की तरफ से था.. मेने अपना फोन देखा तो पाया कि मां ने पापा से बात ही नही की थी…मेने ठीक से देखा तो.. मुझे काफी गुस्सा आया…
में – मां आप पागल हो क्या…
मां – क्या हुआ बेटा…
में – आप आधे घंटे से चाचा के साथ बाते कर रहे थे…जिस ने आप के साथ…
और में रोने लगा…
मां – बेटा वो कॉल आया था तो बस बात की… तेरे चाचा हे वो.. परेशान थे वो न्यूज में हमारी खबर चल रही थी तो…
में – लेकिन आप ने उस गंदी नाली के कीड़े से बात ही क्यों की हमारा क्या रिश्ता है अब उस से…
मां का एक जोर का थप्पड़ मेरे गालों पे पड़ा…”कुछ भी बोलेगा अब तू इतना बड़ा हो गया है”
और कमरे में एक दम से सन्नाटा छा गया… और मां के आखों में भी आसू आ गई…

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