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chapter 6

    ( सारिका का बेटा दिलीप है और दिलीप अपनी मा के साथ राजू बन बाते कर रहा है सारिका को नही पता जिससे वो राजू समझ बात कर रही है वो उसका अपना सगा बेटा है – मे ये इस लिये बताया कियुंकी कुछ लोगो को समझ नही आ रहा तो समझ सके चल किया रहा है

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दिलीप अपने 10 इंच के लंड को बाहर निकाल अपने थूक से लंड को पुरा गिला कर मुठ मारते हुवे

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दिलीप – ऑन्टी सुरु करो ना

सारिका बाहर आके एक जगह खरी होके शर्मा के

सारिका – ठीक है सुरु करती हु

दिलीप मुठ मारते हुवे – ऑन्टी अपना फोन नजदीक रखना आवाज अच्छे से सुनाई देगी

सारिका सर्म से लाल होते हुवे – ठीक है

सारिका अपनी नाइटी उपर कर बैठ जाती है और अपने फोन को पकर अपनी चुत के पास कर के मुतना सुरु कर् देती है दिलीप के कान मे एक सिटी की आवाज जाती है सु सु सु सारिका ने तेज धार मारा था अपनी मा के मुतने की आवाज सुन दिलीप के लंड की नशे फुल जाती है दिलीप पुरे जोस से भर जाता है

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दिलीप अपनी मा के पिसाब की आवाज सुन पागल होने लगता है और तेज तेज हाथ चला के मुठ मारने लगता है दिलीप मुठ मारते हुवे मन मे – आह किया प्यारी आवाज है मा के पिसाब करने की सुन कर साफ पता चल रहा है बहोत तेज धार निकल रही है

सारिका वही सर्म से लाल फोन पकरे अपनी पिसाब करने की आवाज सुनाये जा रही थी 1 मिनट होते ही सारिका पिसाब कर उठ जाती है दिलीप को पिसाब की आवाज आना बंद हो जाता है तो दिलीप समझ जाता है दिलीप का पानी निकला था बाबा के दिया दवा का असर था नही तो दिलीप का अपनी मा के पिसाब करने की आवाज सुन उसका निकल गया होता

दिलीप अपने लंड को देख – कोई ना मेरे छोटे भाई जल्दी ही सीधा बिल मिलेगी तुझे

सारिका बिस्तर पे आके लेत जाती है

सारिका सर्म से लाल होते हुवे – हेल्लो सुन रहे हो

दिलीप – सुन रहा हु थैंक्स ऑन्टी आप बहोत अच्छी है

सारिका शर्मा के – अरे कोई बात नही

दिलीप – बरी बात है आपने मेरे लिये किया सच मे आप मेरी बेस्ट दोस्त है

सारिका हस्ते हुवे – इसी लिये तो किया कियुंकी तुम भी मेरे बेस्ट दोस्त हो

दिलीप फिर बात तो दूसरी तरफ ले जाने की सोचता है ताकि सारिका के मन मे गलत सही वाला सवाल ना आये इस लिये दिलीप नॉर्मल बाते करना सुरु कर देता है और सारिका भी सब भूल बातो मे खो जाती है

रात 2 बजे – फिर दोनो किस वाला सीन कर गुड नाइट बोल सो जाते है

       2 दिन बाद

रोज की तरह सारिका दिलीप की बाते जैसे होती थी इन 2 दिनों मे होती रही दिलीप सारिका को पिसाब करने की आवाज भी सुनाता रेहता है लेकिन दिलीप सारिका से पिसाब करने की और आवाज सुनाने के लिये नही के केहता है

कियुंकी दिलीप फिर वही कर रहा था दिलीप चाहता था सारिका खुद बात करे ताकि दिलीप को पता चल सके सारिका करना चाहती है या नही ताकि दिलीप बिना डरे आगे बढ़ सके और ऐसा होता भी है

सारिका सोचती भी है की आखिर राजू ने उसे पिसाब करने की आवाज सुनाने के लिये एक बार भी कियु नही कहा

 तीसरे दिन सुबह सारिका हल्का होने जा रही थी और दिलीप से बाते भी कर रही थी

सारिका शर्मा के – तुमने मुझे पिसाब की आवाज सुनाने के लिये एक बार भी नही कहा ऐसा कियु किया तुम मेरे पिसाब करने की आवाज सुनना नही चाहते

दिलीप कमरे मे बैठा हुवा बाते कर रहा था अपनी मा की बाते सुन दिलीप फिर नाचने लगता है कियुंकी उसका ये प्लान भी काम कर गया था दिलीप अपने नाटक मे आ जाता है

दिलीप – नही ऑन्टी ऐसा नही है सच कहु तो दिन मे कई बार मुझे आपके पिसाब करने की आवाज सुनने का दिल कर रहा था कई बार हिम्मत की आपको केहने की लेकिन डर लग रहा था आप गुस्सा हो जाओगी कही दोस्ती ना तोर दो इस लिये नही कहा

सारिका एक जगह रुक जाती है और दिलीप से

सारिका – मुझे पता है मेने तुमपे गुस्सा किया था इस लिये डरे हुवे हो लेकिन कसम से मे तुमपे गुस्सा नही करुगी तुम बोल सकते हो

दिलीप मुस्कुराते हुवे – जी ऑन्टी तो जब भी आप को पिसाब लगे मुझे सुनना

सारिका बहोत खुश होती है

सारिका शर्मा के -ठीक है अभी लगी है जोर की सुना देती हु

दिलीप – खुश होते हुवे थैंक्स ऑन्टी

सारिका – थैंक्स मत बोलो ठीक है मे करती हु

दिलीप – ऑन्टी फोन उस जगह पे पास रखना अच्छे से आवाज सुनाई देगी मुझे

सारिका समझ जाती है किस जगह की बात कर रहा है सारिका सर्म से पानी पानी हो जाती है

सारिका शर्मा के – ठीक है उसी जगह के पास रखुंगी

सारिका फिर सारी उठा के बैठ जाती है और फोन को बहोत अपने चुत के पास रख मूतने लगती है दिलीप को फिर अपनी मा के मूतने की साफ आवाज सुनाई देती है सु सु सु

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दिलीप अपनी मा के मुतने की आवाज सुन मन मे – आह मा कैसे तांगे फैला के अपनी फूली रसभरी चुत से चुत रही है आह वो सीन कितना कमाल का होगा ल लेकिन जल्द ही मे अपनी आखो के सामने मा को मूतने देखुंगा

सारिका का मुतना हो जाता है और सारिका खरी हो जाती है

सारिका शर्मा के – सुन लिया

दिलीप खुश होते हुवे – हा बहोत तेज सिटी जैसी आवाज आ रही थी

सारिका फिर सर्म से पानी पानी हो जाती है

सारिका – तुझे अच्छा लगा मेरे पिसाब करने की आवाज सुन कर

दिलीप – बता नही सकता मेरी जान बहोत अच्छा लगा

सारिका हैरानी से – ये जान मे तुम्हारी कब से बन गई

दिलीप डरते हुवे – वो वो ऑन्टी खुशी से निकल गया माफ कर दो

सारिका हस्ते हुवे – जान अच्छा है केह सकते हो मुझे

दिलीप हस्ते हुवे – लेकिन मुझे ऑन्टी हि केहना है अच्छा लगता है

सारिका हस्ते हुवे – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी

दिलीप फिर इधर उधर की बाते करने लगता है

अब ये होता है की सारिका को जब भी पिसाब लगता सारिका राजू को खुद फोन कर अपने पिसाब की आवाज सुनाती और दिलीप मजे से अपनी मा के पिसाब करने की आवाज सुनता

  5 दिन बाद पिसाब वाला सीन नॉर्मल हो चुका था अब बारी की उसके आगे जाने की

रात 12 बज रहे होते है दिलीप सारिका सोने वाले थे गुड नाईट वाला किस होने वाला था

दिलीप – ऑन्टी सुनो ना आज हम फिर अलग तरीके से किस करेगे

सारिका बिस्तर पे लेती करवट बदल के हस्ते हुवे

सारिका – अब कैसे करना है किस वो भी बता दो

दिलीप – पेहले ये बताओ आप रेडी है करने के लिये

सारिका हस्ते हुवे – रेडी हु बाबा तुम जरूर हट मे करोगे

दिलीप हस्ते हुवे – सही कहा ठीक है तो अपनी आखे बंद कर लीजिये

सारिका आखे बंद कर – हा कर ली

दिलीप – ठीक है आप कैसे लेती हुई है

सारिका – कमर के बल लेती हु

दिलीप – आप पीठ के बल अच्छे से लेत जाइये

सारिका पीठ के बल लेत कर – हा लेत गई

दिलीप – अब आखे बंद कर ये सोचिये की मे आपके उपर पुरा लेता हुवा हु

दिलीप की बात सुन सारिका हैरान हो जाती है सारिका को ये बहोत गलत लगता है लेकिन सारिका इतना आगे आ गई थी की उसे अब इस खेल मे मजा आने लगा था सारिका के दिमाग के कई बार ये जरूर आता था वो जो कर रही है गलत है लो लेकिन दिलीप ये जानता था ऐसा होगा एसी लिये दिलीप धीरे धीरे सारिका को सब की आदत लगवा दी सारिका से मस्ती मजाक कुछ अलग करते हुवे सारिका को इतना आगे लेकर आ गया यहा सारिका को गलत भी सही लगने लगा

सारिका – हा मे फिल कर पा रही हु तुम मेरे उपर पुरा लेते हुवे हो

दिलीप मुस्कुराते हुवे काम हो गया

दिलीप – ठीक है अब आप मेरे शरीर की को उसकी गर्मी को फिल करिये मे आपके सरीर को उसकी गर्मी को फिल कर रहा हु

सारिका फिल करती है राजू उसके उपर लेता है अपनी छाती अपने चुत पे पेट पे हर जगह राजू लेता फिल हो रहा है सारिका ये फिल कर उसकी सासे तेज होने लगती है सारिका के अंदर हलचल होने लगती हो

सारिका – हा फिल कर पा रही हु

दिलीप – अब आप अपना जिब बाहर निकाल दीजिये फिर मे उसको चुसुगा पियुगा

सारिका तेज सासे लेते हुवे – ठीक है निकाल रही हु

दिलीप – अब फिल कीजिये मे आपके जिब को चूस रहा हु पी रहा हु

सारिका फिल करने लगती है की उसका जिब राजू के मुह मे है और राजू उसके जिब को चूस चूस कर पी रहा था ये मेहसूस कर सारिका की चुत पेहली बार गीली होती है कियुंकी ये सीन आगे का था

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सारिका को मजा आने लगता है सारिका को लगता है सच मे राजू उसके उपर है और उसको किस कर रहा है सारिका उसका मजा लेने लगती है 2 मिनट बाद

दिलीप – मजा आया ऑन्टी

सारिका होस मे आते हुवे जोर जोर से सासे लेने लगती है

सारिका सर्म से लाल होके – हा बहोत मजा आया सच्ची मे

दिलीप खुश होते हुवे मन मे – अब मंजिल दूर नही

दिलीप – मुझे तो आपसे भी जायदा मजा आया आपके जिब को मुह मे लेके चूसने के बाद किया बताऊ बहोत मिठा लगा

सारिका शर्मा के – सच्ची मेरा जिब मुह मे लेके चूस कर मजा आया

दिलीप – साची ऑन्टी कसम से

सारिका शर्मा के – सुनो ना मुझे भी चुदना है

दिलीप मन मे – आग लग रही है धीरे धीरे

दिलीप – ठीक है मे लेता हु जिब निकाल कर आप मेरे उपर आके मेरे जिब को अपने मुह मे लेके चूसिये

सारिका शर्मा के – ठीक है

सारिका आखे बंद कर सोचती है बिस्तर पे राजू लेता है सारिका राजू के ऊपर आके राजू के जिब को चूस रही है मजे से

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सारिका अपने दिमाग मे ये सीन बना रही थी सारिका को रियल वाला मजा मिल रहा था सारिका मजे से राजू के जिब को लेके चुस्ती है 2 मिनट बाद

दिलीप – मजा आया

सारिका होस मे आते हुवे शर्मा के – बहोत मजा आया सच मे

दिलीप – अब हम रोज ऐसे हि किस करेगे किया केहती है

सारिका अंदर से बहोत खुश हो जाती है

सारिका – हा ऐसे हि करेगे

दिलीप – ठीक है गुड नाइट ऑन्टी

सारिका – गुड नाइट बेटा

फोन कट

सारिका बिस्तर पे लेत – ये लरका कहा से ऐसे बाते सोच लेता है और मुझसे करवाता है लेकिन सच कहु तू बहोत मजा आता है इतना मजा तो कभी किसी दोस्त के साथ बात कर के नही आया

दिलीप बिस्तर के लेता खुश होते हुवे – अब आगे जो होगा आपको अंदर से हिला देगा आपको फिल होगा आपको किस की जरूरत है और आप किस के लिये तरसी है आपने जिसे दबा के रखा है वो बाहर आ जायेगा

   दोपहर 12 बजे – सारिका बिस्तर पे लेती हुई थी और दिलीप पीपल के पेर के नीचे बैठा हुवा था राजू ने सारिका को बताया था आज काम बंद है इस लिये

दिलीप – ऑन्टी आप को एक बात कई दिन से केहना चाहता था लेकिन केह नही पाया

सारिका – किया केहना था और कियु केह नही पाये

दिलीप – इस लिये कियुंकी आप मुझपे गुस्सा करोगी

सारिका सोचने लगती है राजू किया कहेगा कि मे उसपे गुस्सा करुगी लेकिन सारिका को जानना था राजू किया केहने वाला है

सारिका – देखो हम दोस्त है और दोस्त से कोई बात नही छुपाना चाहिये

दिलीप – ये बाप तो हो टिक है बताता हु बात 6 दिन पेहले की है

सारिका – किया 6 दिन की बात आज बता रहे हो

दिलीप – डर लग रहा था ना आपके गुस्से से

सारिका हस्ते हुवे – ठीक है बोलो

दिलीप – हा तो 6 दिन पेहले मे साम को घूमने निकला था तभी एक लरकी को आते हुवे मेने देखा और मेरी नजर उसके ( दिलीप रुक जाता है)

सारिका बेचैनी से – उसके किया बोलो भी

दिलीप – मेरी नजर उसके बरे बरे दोनो पे चले गये और तभी लरकी ने मुझे अपने बरे बरे को देखते देख लिया और मुझे कमीना केह कर चली गई

सारिका दिलीप की बात सुन हैरान हो जाती है

सारिका गुस्से से – हरकत कमीने वाली करोगे तो कमीना कहेगी हि

दिलीप – लेकिन मेने जान बुझ कर थोरि देखा नजर चली गई और मेरी फूटी किस्मत लरकी ने मुझे देख लिया उसी वक़्त मुझे किसी ने आज तक कमीना नही कहा था लेकिन उसके केह दिया हद है यार

सारिका को हसी आ जाती है सारिका हस्ते हुवे – ठीक किया तुम्हारे साथ

दिलीप – किया आप भी मेरे मजे ले रही है

सारिका हस्ते हुवे – अरे नही मे तो बस केह रही थी

दिलीप – लेकिन एक बात है लरकी के बरे बरे थे आपके उतने बरे नही होगे सच केह रहा हु

सारिका जल्दी बाज़ी मे बोल परती है – मेरे भी बहोत बरे बरे है

दिलीप अपनी मा की बात सुन मुस्कुरा देता है तो वही सारिका का एहसास होता है उसने जल्दी बाज़ी मे किया केह दिया सारिका ये सोच सर्म से पानी पानी हो जाती है

असल मे ये दिलीप की बनाई झूठी कहानी थी और दिलीप का ये एक प्लान भी था और दिलीप ने जैसा सोचा था वही हुवा

दिलीप नॉर्मल तरीके से – मे नही मानता आपके बरे है

सारिका – अरे हद है मे सच केह रही हु मेरे दोनो बहोत बरे बरे है

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सारिका अपने बरे बरे चुचे जो ब्लाउस मे कैद थे उसे देख कर बोल रही थी सारिका मन मे – हु मेरे बरे है उसका छोटा होगा

राजू लरकी के बरे केह रहा था जो सारिका को अच्छा नही लग रहा था और यही तो दिलीप का प्लान था जो काम कर गया

दिलीप जाहिर नही होने देता वो खुश है या उसे मजा आ रहा है

दिलीप नॉर्मल होके – अच्छा आपका कितना है साइज

सारिका गुस्से से – 34 है

दिलीप – तब तो आप के बरे है आप सच केह रही थी

सारिका – अब आये ना लाइन पे मे केह रही थी तो मान हि नही रहे थे

दिलीप – माफ कर दो बाबा मेरी गलती थी मानता हु

सारिका को अब अच्छा फिल होता है

सारिका – माफ किया

दिलीप फिर जान बुझ कर इस बात को आगे नही ले जाता और बात को बदल दूसरे टॉपिक पे बाते करने लगता है

    3 दिन बाद – रात 1 बजे

किस वाला सीन हो गया था

दिलीप आज जाके चुचे वाली बात करने वाला था

दिलीप हस्ते हुवे – आप ने सही कहा था आपके बरे बरे है आपके उपर आके आपको किस कर रहा था तो मुझे आपके दोनो बरे बरे अपने सीने पे फिल हो रहा था

सारिका सर्म से पानी पानी होते हुवे – तुम भी ना पागल

दिलीप हस्ते हुवे – बहोत बुलायम टाइट भी है आपके

सारिका शर्मा के – वो है सो है तुम्हे अच्छा फिल हुवा

दिलीप – कसम से ऑन्टी आपके दोनो को फिल कर मजा आ गया

सारिका को पता नही कियु गलत के समझने की जगह अच्छा फिल होता है ये सुन कर अब तो यही होता आ रहा था सारिका के साथ कियुंकी उसका बेटा यानी दिलीप अपनी मा को कैसे जाल मे फसाना है पता था

सारिका शर्मा के – अच्छा समझ गई

5 दिन तक दिलीप चुचे को लेकर बात करते रेहता है लेकिन जायदा खुल कर नही करता था धीरे धीरे करता था ताकि सारिका को गलत फिल ना हो

   6 दिन बाद रात 11 बजे

दिलीप – ऑन्टी आप रात को किया पेहन के सोती हो

सारिका – नाइटी कियु

ये सवाल दिलीप बहोत पेहले पूछना चाहता था लेकिन दिलीप जनता था जल्दी मे ये सवाल नही पूछा जा सकता इस लिये इतने इंतज़ार के बाद आज पूछ ही लिया और जैसा दिलीप ने सोचा था सारिका ने आराम से जवाब दे दिया

दिलीप – नही वो मेरी मा भी नाइटी पेहेन कर सोती है ना इस लिये पूछा आप किया पेहन कर सोती है

सारिका – हस्ते हुवे अच्छा ये बात है तुम बताओ तुम किया पेहन कर सोते हो

दिलीप खुश होते हुवे मन मे – मै यही तो आप के मुह से निकलवाना चाहता था

दिलीप – मे जैसे आज जायदा गर्मी नही है तो हाफ पतली पैंट और पतली टीसत्

सारिका हस्ते हुवे – और अगर बहोत बहोत गर्मी होती है तब

दिलीप हस्ते हुवे – तब पुरा नँगा सोता हु

सारिका ये सुनते ही सोक् हो जाती है और सर्म से लाल भी

सारिका – छी तुम पुरे नंगे सोते हो

दिलीप – अरे तो किया हो गया कमरे मे कोन आ जायेगा आप की बात सुन लगता है आप कभी बिना कपरो के नही सोई है

सारिका – सही कहा मे नही सोती

दिलीप बातो मे सारिका को फसाता जा रहा था और जो बोलवाना चाहता था सुनना चाहता था जानना चाहता था सारिका सब से अंजान की वो अपने बेटे के जाल मे फस्ती जा रही है

दिलीप हस्ते हुवे – अरे सो कर देखना सुकून मिल जायेगा

सारिका शर्मा के – मुझे नही सोना तुम ही सो नंगे पुंगे

दिलीप हस्ते हुवे – मे तो सोउंगा

सारिका – अच्छा सुनो मुझे सुसु लगी है

दिलीप – ऑन्टी आज एक विनती है आपसे

सारिका हस्ते हुवे – किया बात है आज पेहली बार विनती कर रहे हो अब मुझसे किया करवाना चाहते हो

दिलीप – मे चाहता हु आज आप पूरी नंगी होकर पिसाब करे और मुझे सुनाये

सारिका सोक होते हुवे -किया कहा तुम ने

दिलीप डरते हुवे – माफ करना रेहने दो आप गलती हो गई

सारिका हस्ते हुवे – मे तो मजाक कर रही थी तुम ने पेहली बार मुझसे विनती की है तो करना पड़ेगा ही

दिलीप खुश होते हुवे – थैंक्स ऑन्टी आप बेस्ट हो

सारिका हस्ते हुवे – ठीक ठीक है

दिलीप जोस मे आते हुवे – ठीक है ऑन्टी आप अपनी नाइटी उतार दीजिये

सारिका सर्म से लाल होते हुवे नाइटी उतार पूरी नंगी हो जाती है

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दिलीप – आप ने उतार दिया

सारिका शर्मा के – हा उतार दिया

दिलीप – किया आप पूरी नंगी है सच केह रही है ना आप

सारिका – तुम्हारी कसम

दिलीप – ठीक है अब जाके पिसाब की आवाज सुनाइये

सारिका शर्मा के- ठीक है

सारिका घर के पीछे आके नंगी एक जगह खरी हो जाती है वही दिलीप अपना लंड हिलाते हुवे मन मे – मा पूरी नंगी है यकिन नही हो रहा सोच कर हि मेरा लंड फट रहा था मा पूरी नंगी कैसी दिखती होती जो भी हो पूरी आग है मेरी मा हाय मजा आ गया

सारिका – सुनो मे पिसाब करने जा रही हु

दिलीप – ठीक है ऑन्टी

सारिका एक जगह पे पूरी नंगी बैठ कर मोबाइल चुत के पास करके पिसाब करने लगती है दिलीप आखे बंद कर अमेजिंग करने लगता है उसकी मा नंगी बैठ पिसाब करते हुवे कैसी दिखेगी

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सारिका मन मे पिसाब करते हुवे – सोचा नही था मे ऐसा कुछ करुगी लेकिन मुझे मजा बहोत आता है राजू जब मुझे कुछ करने के लिये केहता है तो हाय बहोत सर्म आ रही है

सारिका पिसाब करने के बाद अंदर आके नंगी बिस्तर पे लेत जाती है

सारिका शर्मा के – कैसा लगा मजा आया तुम्हे

दिलीप सारिका की बात सुन मन मे – मा ये समझने के बजाये की वो जो कर रही है गलत है लेकिन नही मा खुद पूछ रही है मजा आया इसका मतलब अब आ खुद चाहती है राजू उसे और नया नया कुछ करने के लिये कहे कियुंकी अब मा को इस खेल की पूरी दीवानी हो चुकी तो असल मतलब ये है मा मेरे जाल मे अब पूरी तरह फस चुकी है ये सोच खुशी के मारे पागलो की तरह नाचने लगता है

सारिका दिलीप को कुछ ना बोलता सुन

सारिका – हेल्लो बोलोगे भी

सारिका की आवाज सुन दिलीप नाचना बंद कर बिस्तर पे लेत अपना लंड हिलाते हुवे

दिलीप – ऑन्टी आज मे सब से जायदा खुश हु आप का सुक्रिया ऑन्टी मेने नही सोचा था मुझे आप जैसा कभी दोस्त मिलेगा मुझे आप से बात कर इतना सुकून अच्छा लगेगा आप से जितना बात करू दिल नही भरता दिल करता है दिन रात बाते करता रहु लेकिन कर नही सकता सोना भी होता है काम पे जाना भी होता है मे अब सोचता हु हो मुझे खुशी होती है की उस दिन अच्छा हुवा गलती से आप के पास फोन लग गया नही तो आप जैसा दोस्त मुझे नही मिलता आप से बातें कर आपकी मीठी आवाज सुन मेरा हर एक दिन रात कैसे गुजरता है पता भी नही चलता पेहले मे सोचता था मेरी लाइफ मे कुछ भी अच्छा नही है मे उदास रेहता था अकेला पन फिल करता था मुझे एक दोस्त चाहिये था जिस से मे बाते कर सकु अपनी दिल कि बात कर सकु और उपर वाले ने मुझे आप जैसा बेस्ट दोस्त दे दिया आप जब से मेरी दोस्त बनी मेरी लाइफ बदल गई उपर वाले का आप का सुक्रिया सुक्रिया दिल से

आप को किया लगता है दिलीप ने इतना सारिका की तारीफ कियु की कियु सारिका को इतना महत्व दिया कियुंकी दिलीप सारिका को एहसास दिलाना चाहता है की वो बेस्ट है और राजू उसे दोस्त के रूप मे पाके बहोत खुश है उसका एहसान मंद है ताकि सारिका पूरी तरफ से सब भूल राजू के जाल मे फसी है इसके बारे मे सोचे भी ना

सारिका दिलीप की सारी बात सुन कर

सारिका – सच कहु राजू तो मेरा भी पेहले यही हाल था कोई घर घर मे मेरे बेटे के अलावा कोई रही है बेटी मायके पति बाहर बेटा है तो उसके साथ थोरि बाते कर लेती हु लेकिन मे अपने बेटे से हर वक़्त बात तू नही कर सकती और मा बेटे के बीच कितना ही बाते होगी हर रिश्ते की लिमिट होती है उसी हिसाब से हम बात कर सकते है काम मे लगी रेहती हु तो समय का पता नही चलता था लेकिन कोई काम नही होता था बोर हो जाती थी अकेला पन मेहसूस होता था मुझे भी एक दोस्त की कमी मेहसूस होने लगी थी फिर तुम आये सब चेंज हो गया आज 6 महीने हो गये हमारी दोस्ती के और ये 6 महीने मेरे ऐसे गुजरे तुम से बात कर मुझे खुद पता नही चला तुम्हारी बाते तुम्हारी मस्ती सब मुझे बहोत पसंद है मे भी उपर वाले तुम्हारा सुक्रिया करती हु

दिलीप अपनी मा की बात सुन मन मे – जानता हु एसी लिये तो मे राजू बन आपसे बात कर रहा हु ताकि आप को पा सकु और एक मा बेटे के रिश्ते की जो दीवार है तोर सकु तभी मे आपको हर एक खुसिया दे सकता हु आप चिंता मत कीजिये जल्दी ही आपको ढेर सारा प्यार दुगा

दिलीप – हम दोनो का सेम हाल था इसी लिये हम इतने अच्छे दोस्त मन पाये

सारिका – सायद तुम सही केह रहे हो

दिलीप हस्ते हुवे – कियु ना हम आज दोनो नंगे एक दूसरे के बाहों मे सोये

सारिका सर्म से लाल होके – पागल लरका ये तुम किया बोल रहे हो

दिलीप – सच्ची मुझे आप के साथ आपके उपर नँगा सोना है

सारिका शर्मा के – ठीक है लेकिन कैसे

दिलीप – अपनी आखे बंद करो

सारिका – कर ली

दिलीप – आप. पूरी नंगी लेती हो ना

सारिका – हा बाबा पूरी नंगी हु

दिलीप – ठीक है अब सोचो मे आपके उपर नँगा आके लेत गया हु

सारिका आखे बंद कर सोचती है की राजू उसके उपर आके नँगा लेत गया है सारिका को सब सियल फिल हो रहा था राजू यानी दिलीप भी बिस्तर पे लेता आखे बंद कर यही सोच रहा था उसकी मा नंगी लेती है और वो अपनी मा के ऊपर लेत गया है

दिलीप – फिल हो रहा है

सारिका – हा हो रहा है जैसे तुम सच मे मेरे उपर नंगे लेते हो

दिलीप – ठीक है अब मे फोन कट करता हु

सारिका आखे बंद किये – ठीक है

दिलीप फोन कट कर देता है लेकिन दोनो आखे बंद किये ये सोच की दोनो नंगे साथ मे सोये है

          आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏

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