( chapter 2 )
दिलीप बाबा के पास जाके बैठ जाता है और बाबा को देख – बाबा लगता है रात यही पर सोये है
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – सही कहा बेटा मे तो बाबा हु मेरा अपना कोई नही है ना कोई घर ना ठिकाना जहा दिल किया सो गये जो मिला खा लिया बस यही जिंदगी है मेरी
दिलीप – बाबा किया आपको अपनी जिंदगी से कोई सिकवा नही है
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – बिल्कुल नही किया तुम्हे है
दिलीप – नही मुझे भी अपनी जिंदगी से कोई सिकवा नही है गरीब घर मे पैदा हुवा लेकिन मे खुश हु कियुंकी मेरी मा बेहन पापा मुझे बहोत प्यार करते है लेकिन – दिलीप बहोत दुखी हो जाता है)
बाबा दिलीप को देख समझ जाते है बाबा – लेकिन किया बेटा
दिलीप बाबा को देख दुखी आवाज मे – बाबा सब मुझे बहोत प्यार करते है और मे भी सभी को बहोत प्यार करता लेकिन मे उनके लिये कुछ करना चाहता हु खास कर अपनी मा के लिये लेकिन लगता है मे उनके लिये कुछ नही कर पाऊगा मे एक बेकार लरका हु ( दिलीप दुखी नजरे नीचे किये बैठा रेहता है )
बाबा दिलीप को गौर से देखते है और मन मे – लरका दिल का अच्छा लेकिन किस्मत ने उसके L लगा रखे है और उसने खुद भी अपनी L लगवा ली है
बाबा दिलीप से – देखो बेटा हर किसी के जिंदगी मे एक ऐसा मोर आता ही है जहा लगता है वो कुछ नही कर सकता लेकिन असल से हर एक प्रॉब्लम कर सलूसन् होता है बस जरूरत है कोसिस करते रेहने की
दिलीप बाबा की देखता – बाबा की बाते बहोत कमाल की होती है हार तो मे भी नही मानुगा जो कर सकता हु जरूर करुगा
दिलीप – खरा होते ठीक है बाबा मे आता हु घर से
बाबा – अरे अभी आये और जा रहे हो
दिलीप – बाबा को देख अभी आ जाउंगा 5 मिनट मे
बाबा – ठीक है फिर जाओ
दिलीप घर आता तो सारिका खेतो मे गई थी दिलीप जाके 3 रोटी सब्ज़ी थैली मे लेकर सीधा बाबा के पास आ जाता है
दिलीप बाबा को खाना देते हुवे – ये लीजिये बाबा मे आपके लिये खाना लेकर आया हु आप भूके होगे खा लीजिये
बाबा हैरान दिलीप को देखते है फिर मुस्कुराते हुवे – तुम्हारा सुक्रिया बेटा तुम बहोत अच्छे हो
दिलीप – गरीब हु बाबा लेकिन जितना कर सकता हु जरूर करुगा और किसी की मदद करना तो अच्छी बात होती है
बाबा मुस्कुराते हुवे – बिल्कुल सही कहा तुमने
बाबा रोटी तोर एक निवाला खाते है तो बाबा को बहोत स्वादिस्ट लगता है
बाबा – मान गया बेटा तुम्हारी मा खाना बहोत अच्छा बनाती है
दिलीप खुश होते हुवे – सही कहा मा बहोत अच्छा खाना बनाती है खाके मजा आ जाता है
बाबा मन मे – तुम मुझे खाना खिला के मुझे मजबूर कर रहे हो तुम्हारी मदद करने के लिये
बाबा का खाना पीना हो जाता ये देख दिलीप – अच्छा बाबा मे चलता हु
बाबा दिलीप को रोकते हुवे रुको बाबा अपने थैले से एक छोटी से सीसी जिसमे लाल कलर का कुछ था बाबा उस लाल कलर की सीसी को दिलीप के आगे करते हुवे
बाबा – इसे ले लो और दूध मे एक बूंद दाल सुबह साम पीते रेहना
दिलीप सीसी को लेकर गौर से देखते हुवे – ये किया है कोई जेहर तो नही है ना कही आप मुझे तपकाना तो नही चाहते है ना
दिलीप की बात सुन बाबा जोर जोर से हसने लगते
बाबा हस्ते हुवे – तुम जोक अच्छा मार लेते हो नही ये जेहर नही है और भला मे तुम्हे कियु मारुंगा जो मुझे खाना देता है किया तुम्हे मे कोई हत्यारा लगता हु
दिलीप बाबा को देख हस्ते हुवे – अरे नही बाबा मेने सच मे मजाक किया था वैसे इस सीसी मे लाल लाल है किया और आपने मुझे कियु दिया इससे मेरा किया फायेदा होगा
बाबा दिलीप को देख – मेने जैसा कहा वैसा ही करना तुम्हे खुद पता चल जायेगा
दिलीप सीसी को अपने पास रखते हुवे – ठीक है आप ने कहा है वैसा ही करुगा
बाबा मुस्कुराते हुवे – ये हुई ना बात अब बताओ अपनी लाइफ मे किया करने के बारे मे सोचा है
दिलीप – बस मुझे अपनी मा को खुश रखना है लेकिन उसके लिये बहोत कुछ करना है मुझे पता नही कर भी पाऊगा या नही
बाबा – तुम कर लोगे मुझे तुमपे पुरा भरोसा है
दिलीप बाबा को देख – आपको ऐसा लगता है मे कुछ कर पाऊगा
बाबा – हा कोसिस करने वालो की हार नही होती
दिलीप – अगर हार मिली तो
बाबा मुस्कुराते हुवे – फिर से खरा हो जाना जब तक तुम्हे जो चाहिये मिल नही जाता जिंदगी ऐसे हि चलती है उतार चढ़ाओ आते रेहते है लाइफ मे
दिलीप बाबा को देख – आपकी बाते सुन पता नही कियु अंदर से मोटिवेट हो रहा हु
बाबा – अगर ऐसा है तो कुद जाओ मैदान मे
दिलीप खरा होते हुवे बाबा को देख – थैंक्स बाबा आपके कहे गये बात मुझे हिम्मत दे रहे है मे हार नही मानुगा अब मे चलता हु
दिलीप घर के लिये निकल परता है और बाबा दिलीप को जाते देख मुस्कुराते हुवे – तुम्हारी लाइफ बदलने वाली है बच्चे
दिलीप घर आ चुका था और अपने कमरे मे बिस्तर ले लेट बाबा की दी गई सीसी को देने जा रहा था दिलीप सीसी को देख
दिलीप – आखिर इसके अंदर है किया कोई दवा है या किया है बाबा ने कहा है खुद समय के साथ पता चल जायेगा
तभी सारिका आ जाती है खेतो से और हाथ पैर धोने के बाद दिलीप के कमरे मे आती तो दिलीप को बिस्तर पे लेता पाती है दिलीप की नजर मा पे चली जाती है
सारिका दिलीप के पास बैठते हुवे – किया कर रहा हो मेरा लाल
दिलीप सारिका को देखते हुवे – किया करुगा मा बस सोच रहा हु अपनी मा को कैसे एक अच्छी लाइफ दे सकता हु
सारिका दिलीप को देखते हुवे – जायदा मत सोच जैसी भी लाइफ चल रही है उसी मे बहोत खुश हु कियुंकी तु मेरे साथ है
दिलीप सारिका को देखते हुवे मन मे – झूठे कियु बोल रही है आप प्यार के लिये तरस रही है हर बीवी चाहती है उसका पति उसके साथ रहे प्यारी बाते करे कही घुमाने लेकर जाये
सारिका दिलीप को सोचता देख कहा खो गया
दिलीप होस मे आते हुवे – कही नही मा वैसे आप इतनी खूबसूरत कैसे है कही कोई राज तो नही है खूबसूरती का
सारिका दिलीप की बात सुन जोर जोर से हस्ते हुवे – तुम भी ना बेटा कोई राज नही है
दिलीप – हस्ते हुवे अच्छा मुझे लगा कोई राज होगा
सारिका – खूबसूरत बनने का कोई नुस्का नही होता बेटा पेर पे पका आम और पकाये गये आम मे बहोत बरा अंतर होता है
दिलीप हस्ते हुवे – समझ गया नेचुरल है
सारिका – मुस्कुराते हुवे हा अच्छा अब मे चलती हु
दिलीप – मा एक किस्सी तो देदो
सारिका मुस्कुराते हुवे दिलीप के गाल पे अपने होठ सता के किस करते हुवे दिलीप को देख – अब मे जाती हु
दिलीप सारिका को जाते देख देख – कम होगा हमारा मिलन
( रात 10 बजे )
सारिका नाइटी पेहने बिस्तर पे लेती अपने पति जगदीश से बाते कर रही होती है
जगदीश – कैसी हो मेरी रानी
सारिका – मुह फुलाते हुवे कैसी रहूगी आप के बिन आप तो सेहर मे पैसे कमाने मे लगे हुवे है
जगदीश – अरे भग्यवान मुझे कोई शोक थोरी चढ़ा है तुझे तुम सब को छोर सेहर मे रेहने का मजबूरी है और ये सब तुम लोगो के लिये ही तो कर रहा हु दिलीप ही एक लौटा बेटा है हमारा उसकी सादी भी तो करनी है
सारिका – जानती हु इसी लिये आपको ज्यादा कुछ नही बोलती
जगदीश – ये सब छोरो बताओ तुम कैसी हो दिलीप कैसा है
सारिका – हम दोनों अच्छे है आप बताओ कब आ रहे हो 6 महीने हो गये है घर से गये हुवे
जगदीश – बस कुछ महीने के बाद सोच रहा हु घर आने का फिर एक महीने रेह कर वापस आऊगा लेकिन इस बार आखरी होगा फिर दिलीप की सादी करने के बाद मे तुम लोगो के साथ ही रहुंगा खेती बारी कर बाकी जिंदगी गुजार दूगा
सारिका करवट बदलते हुवे – अच्छा है जल्दी जाइये आप की बहोत याद आती है
जगदीश – आ जाउंगा मेरी जान बस कुछ महीने मे ये बताओ किया पेहना है अभी
सारिका – टाइटी पेहनी है
जगदीश – अंदर मे किया पेहना है
सारिका – मुह बनाते हुवे पता तो है फिर भी पूछते रेहते है
जगदीश – हस्ते हुवे मजा आता है बताओ ना
सारिका – अंदर कुछ नही पेहना है आपको पता है ना
जगदीश – हस्ते हुवे जानता हु ये बताओ तुम्हारी मुनिया पे जंगल है या साफ कर दिया
जगदीश की बात सुन सारिका के अंदर एक लेहर सी दोर जाती है दबी चाहता जागने लगती है सारिका का हाथ पेट से धीरे धीरे अपनी चुत पे चली जाती है सारिका अपनी चुत को उपर से सेहलाने लगती है
जगदीश – किया हुवा कुछ बोलोगी
सारिका होस मे आते हुवे – हा वो किया है ना बिल मे अब साप जाता नही है तो बिल जंगल से घिर गया है
जगदीश – अरे साप नही जाता तो किया हुवा साफ रखना तो चाहिये
सारिका अपनी चुत को सेहलाते हुवे – जब साप बिल मे जाता नही तो साफ करने से किया फायेदा
जगदीश – समझ गया बाबा मे आऊगा तब साफ रखना अपना साफ तुम्हारे बिल मे जरूर घुसाउगा
सारिका जगदीश की बाते सुन जोस मे आने लगती है सोई हुई अरमान जाग जाते है बुर गीली होने लगती है सारिका बिस्तर पे बचलने लगती है
सारिका मदहोसी मे – आप के साप मे जो दम नही रहा जो मेरे बिल से पानी निकाल सके ( सारिका पूरी गरम हो चुकी थी अपनी नाइटी उतार पूरी नंगी होकर बिस्तर पे लेट जाती है )

सारिका पूरी नंगी बिस्तर पे लेती हुई थी और मचल रही थी सारिका को सरीर का सुख चाहिये था लेकिन मिल नही रहा था बेचारी
जगदीश – किया करू रानी वक़्त के साथ साप भी ढीला पर ही जाता है
सारिका – समझ सकती हु अब मे रखती हु सोना भी है
जगदीश – ठीक है सो जाओ
फोन कट
सारिका फोन बगल मे रख अपनी चुत से उंगली करते हुवे महीने मे एक बार इस तरह की बाते करते है जब उनका मुंड होता है लेकिन मेरे सो रहे अरमान को जगा देते है सारिका आह उह्ह् मा करते हुवे जोर जोर से अपनी चुत मे उंगली करने लगती है

सारिका तेजी से से अपनी चुत मे उंगली करते हुवे मेरी बिल को साप चाहिये लेकिन मेरे बिल का जो मालिक है उसके साप मे वो दम अब नही रहा मेरा बिल तरप के रेह रहा है सारिका आह मा आने वाला है आह उह्ह् मर गई सारिका झर जाती है सारिका की चुत बहोत पानी निकालती है
सारिका अपनी उंगली को देखती है जो उसकी चुत से भीगी हुई थी सारिका बिस्तर पे देखती है तो चुत का पानी बिस्तर के गिरा हुवा बिस्तर को गिला कर चुका था
सारिका बिस्तर पे लेती जोर जोर से सासे लेते हुवे – हाय रे मेरी किस्मत चुत मे उंगली करने से वो मजा वो फीलिंग नही मिलती अब तो ऐसे ही जीना है मुझे लगता है
( सारिका अपनी चुत मे उंगली अपनी मर्ज़ी से कभी नही करती है लेकिन कभी कभी जगदीश फोन पे गन्दी बाते कर लेता है तो सारिका के दबाये गये अरमान जाग जाते है और मजबुरन सारिका को चुत मे उंगली करनी परती है )
सारिका थकी हारी बिस्तर पे लेत सो जाती है लेकिन कोई था जो सारिका जगदीश की सारी बाते सुन लिया था सारिका की सिसकिया चुत से फच् की आ रही आवाजे सब कोई कमरे के सामने खरा होकर सुन चुका था हा ये दिलीप था
कमरे के बाहर दिलीप खरा था पेंट नीचे था लंड गिला था भाई ने मुठी मार पानी गिरा लिया था लेकिन फिर दिलीप का लंड खरा हो जाता है
दिलीप मन मे – साला सोचा नही था पापा भी गन्दी बाते करते होगे फोन पे लेकिन मा हाय उनकी सिसकिया चुत मे उंगली करने कि फच् वाली आवाजे मा की कामुक् आवाजे मेरे रोम रोम को जला रही थी काश वो सीन देख पापा लेकिन साला कही एक छेद भी नही है
दिलीप अपने कमरे मे आके लेत जाता है और आखे मंद कर दिमाग मे अपनी मा की बाते ( बिल मे जंगल है) इसका मतलब मा की चुत पे बाल है ( दिलीप अपने लंड को हिलाते हुवे) मा के चुत पे बाल है काश एक बार देखने का मोक्का मिल जाता है सोच कर ही मेरी हालत खराब हो रही है वो सीन कैसा होगा मा की चुत वाली बाल देखने मे
मा की सिसकिया आह मा मेरे रोम रोम मे करेंट डोर गया दिल कर रहा था अंदर जाके मा की टांगे फैलाके चुत मे लंड दाल दु लेकिन ऐसा कर नही सकता लेकिन मा की फूली गरम चुत मे लंड डालने का एहसास कैसा होगा कैसा फिल आयेगा कितना मजा आयेगा कितनी गर्म होगी मेरी मा की चुत कितनी फूली हुई होगी मा की चुत का छेद कैसा होगा बरा होगा या छोटा होगा
दिलीप अपने लंड को अंदर कर लेता है और कोई आईडिया सोचने लगता है अपनी मा को पाने का 10 मिनट सोचने के बाद दिलीप को एक आईडिया आता है दिलीप खुशी से उठ कर बैठ जाता है
दिलीप मन मे – सायद ये काम कर जाये लेकिन मेने जो सोचा वो आईडिया सायद काम ना करे कियुंकी मेरी मा सती सावित्रि है लेकिन किया पता काम कर भी जाये मे हार नही मान सकता मुझे हर एक कोसिस करनी चाहिये बाबा ने भी कहा था कोसिस करते रहने को हार ना मानने को समझ गया तो कल से इसी काम पे लग जाउंगा चांस बहोत कम है लेकिन कोसिस करने मे किया जाता है
दिलीप बिस्तर पे फिर लेत कल किया कैसे करना है आखे बंद किये सोचते हुवे सो जाता है
( सुबह के 10 बजे )
दिलीप फिर बाबा के लिये खाना पैक करके बाबा के पास जाता है
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – आया गया बच्चा
दिलीप बाबा को खाना देते हुवे – आ गया बाबा किया करू आप से बाते करना अच्छा लगता है अंदर मे हिम्मत आती है आपकी बातो से
बाबा खाना लेते हुवे – अच्छा ये बात है लेकिन कई लोग तो मुझे पागल भीखारी केहते है
दिलीप बाबा के पास बैठ – वो लोग चुतिये है बाबा जो आपकी बातो का अर्थ समझ नही पाते आपकी हर बाते हिम्मत ना हारने लाइफ मे आगे बरने की पेर्ना देता है हिम्मत देता है
बाबा दिलीप को देखते है बाबा जो आज दिलीप मे कुछ बदलाव दिखाई देता है ये देख बाबा मुस्कुराते हुवे खाना निकाल खाने लगते है
दिलीप बाबा को खाते हुवे देखने लगता है
बाबा – वाह मजा आ गया किया खीर है बहोत मीठी है खुद के गाय के दूध का लगता है कियुंकी मुझे दूध मे कोई मिलावट नही लगती
दिलीप मुस्कुराते हुवे – सही कहा बाबा अपनी गाय की दूध कि खीर बनाई है मा ने
बाबा – सुक्रिया बेटा इतनी मीठी अच्छी खीर खिलाने के लिये
दिलीप – मुझे खुशी है आप को पसंद आई
बाबा खीर खाते हुवे – कोई रास्ता मिला मंजिल पाने का जिसे तुम पाना चाहते हो
दिलीप बाबा की तरफ देखता फिर – हा मिला तो लेकिन चांस बहोत कम नजर आ रहे है सायद मंजिल मे ना जा पाऊ सायद जो हासिल करना है ना कर पाऊ
बाबा दिलीप को देख – रास्ता मिला है तो चलते रहो बेटा हार मत मानो कम से कम कोई रास्ता तो मिला हो सकता है वही रास्ता तुम्हारी मंजिल तक जाती हो
दिलीप – लेकिन किया होगा उस रास्ते पे कोई और मोर आ जाये तो
बाबा दिलीप को देखते है दिलीप बाबा को
बाबा मुस्कुराते हुवे – तो पेहले एक रास्ते के एंड तक चलो अगर उस रास्ते पे तुम्हारी मंजिल नही है तो फिर दूसरे रास्ते पे चलो कोई ना कोई रास्ता तुम्हे तुम्हारे मंजिल तक पहुँच ही देगा बस याद रहे हर एक रास्ते मे एंड तक जाना बीच मे मत हार मान कर बैठ जाना
दिलीप बाबा की बात सुन मुस्कुराते हुवे – सच मे आप मुझे बहोत ज्ञानी बाबा मालूम परते है आप की हर बाते जब जब सुनता हुई मेरे अंदर हिम्मत और बढ़ती जाती है
बाबा मुस्कुराते हुवे – अगर तुम्हे ऐसा लगता है तो मुझे खुशी हुई कोई तो है जो मेरे बातो का मतलब अच्छे से समझ रहा है अमल कर रहा है
दिलीप खरा होते हुवे – बाबा हर किसी की अपनी सोच होती है अब मे चलता है
बाबा – रुको जो मेने कहा था दूध मे दाल कर पीने के लिये पी तो रहे हो ना
दिलीप बाबा को देख – जी बाबा पी रहा हु जैसा आप ने कहा वैसे बता भी दीजिये किया है वो सीसी मे कियु पीने को कहा किया होगा
बाबा – मुस्कुराते हुवे ना ना ना खुद पता चल जायेगा कुछ दिनों बाद
दिलीप – हस्ते हुवे समझ गया आप नही बताने वाले ठीक है चलता हु
दिलीप घर की तरफ निकल परता है बाबा दिलीप को जाते देख मुस्कुराते हुवे – पेहले ही बता दूगा तो मजा खराब हो जायेगा बच्चे
दिलीप घर आके देखता है मा घास लेके नही आई है तो दिलीप को यही एक मोक्का दिखता है दिलीप घास ही बनी दीवार मे एक छेद कर देता है दिलीप अंदर छेद से देखता है तो सारिका का बिस्तर साफ दिख रहा था
दिलीप ये देख – चलो काम हो गया अब बाकी काम पे ध्यान देना होगा लेकिन मेरे लंड का किया सबसे परी परोबलम् तो ये है जो 1 मिनट भी ठीक नही पाता
( साम 3 बजे )
दिलीप सब से दूर एक सांत जगह पे बैठा अपने मोबाइल निकाल कर कुछ करने मे लगा हुवा था 10 मिनट बाद दिलीप घर आता है
( रात 8 बजे )
सारिका दिलीप बैठ खाना खाने मे लगे हुवे थे
सारिका खाना खाते हुवे – बेटा तूने पढाई छोर मजदूरी करने लगा पढ़ने की उमर मे पढ़ लेता तो काम आता ना
दिलीप सारिका को देख – मा पढाई तो कर लेता लेकिन आगे बहोत कर्चा होगा हो पढाई मे दूसरी पढाई करने के बाद भी नोकरी मिलेगी उसका कोई गरांति नही तीसरा मे जिंदगी भर किसी के अंदर मे रेह कर काम नही करना चाहता
सारिका दिलीप को देखते हुवे – तो किया करेगा
दिलीप – सोच रहा हु जल्दी ही आप कोई बता दूगा
सारिका – ठीक है जैसा तुम्हे ठीक लगे
खाना खाने के बाद दोनों अपने कमरे मे चले जाते है
दिलीप अपनी मा के बारे मे सोचे जा रहा था 30 मिनट बाद दिलीप धीरे से आके छेद से अंदर देखता है तो सारिका आराम से सो रही होती है दिलीप को कुछ देखने को नही मिलता दिलीप गौर से देखता है तो सारिका के बरे चुचे के उभार नाइटी के ऊपर से ही दिखाई दे रहे थे
दिलीप कमरे मे आके बिस्तर पे लेत मन मन मे – मा के चुचे के उभार तो हर दिन देखता रेहता हु मेने सोचा था आज भी मा चुत मे उंगली लेकिन मा तो सो गई किस्मत ही खराब है
( सुबह 9 बजे ) दिलीप बाबा के पास फिर खाना लेकर जाता है और खाना देकर बैठ बाते करता है
( साम 3 बजे) दिलीप फिर अपने घर से निकल दूर सांत जहा आप पास कोई नही होता वहा बैठ मोबाइल निकाल कुछ करने लगता है
अगले दिन सुबह 10 बजे
दिलीप बाबा के पास फिर खाना लेकर जाता है और बाबा के साथ बैठ बाते करने लगता है
बाबा खाना खाते हुवे – बेटा कुछ दिनों के लिये मे पास के गाव मे जा रहा हु कुछ दिन बाद आ जाउंगा
दिलीप हैरानी से बाबा को देख – लेकिन बाबा आप कियु जा रहे है आप से बाते करने मे मुझे अच्छा लगता है
बाबा दिलीप को देख मुस्कुराते हुवे – मुझे भी बच्चे लेकिन एक जरूरी काम से जा रहा हु लेकिन कुछ दिन मे आ जाउंगा
दिलीप उदास होते हुवे – ठीक है बाबा मे समझ गया
बाबा दिलीप के कंधे पे हाथ रख – उदास मत हो मे जल्दी ही आ जाउंगा दूसरी एक ना एक दिन मुझे यहा से जाना ही होगा मे तो बाबा हु एक जगह रुक नही सकता
दिलीप बाबा को देख – समझ सकता हु बाबा
थोरी देर बाते कर दिलीप फिर घर आ जाता है
बाबा के जाने के बाद दिलीप का दिल लग नही रहा था आदत पर गई थी बाबा से बात करने की लेकिन दिलीप लगा रहा
दिलीप रोज साम 3 बजे जहा कोई इंसान नही होता वहा मोबाइल निकाल कुछ करता ऐसे ही 40 दिन गुजर जाते है
40 दिन बाद
दिलीप कमरे पूरी तरह से हैरान नँगा खरा अपने लंड को देखे जा रहा था दिलीप का लंड 10 इंच लम्बा 5 इंच मोटा हो चुका था
दिलीप सर पकर के- बाप रे पेहले मुझे लग ही रहा था मेरा लंड मोटा लम्बा हुवे जा रहा है लेकिन मेने ध्यान नही दिया लेकिन आज मेरा लंड इतना मोटा लम्बा हो गया है एक मिनट यानी जरूर बाबा की दी गई दवा का कमाल है लेकिन बाबा को पता कैसे चला मेरी प्रोब्लम
दिलीप मन मे सोचते हुवे – और क्या क्या पता है बाबा को जाके पूछ भी नही सकता कुछ दिन केह के गये थे अभी तक नही आये लौट के
दिलीप अपने लंड को पकरता है तो बहोत गर्म मोटा फिल कर दिलीप खुश होते हुवे – मेरी सबसे बरी प्रोबलम खतम हो गई ( तभी दिलीप के दिमाग मे एक बात आती है) लंड तो मोटा लम्बा हो गया लेकिन टाइमिंग का किया ऐसा ना हो सिर्फ मोटा लम्बा हो गया लेकिन लंड मे दम ही ना हो इसका पता तो मुठी मारने से पता चल जायेगा
दिलीप आखे बंद कर अपनी मा की चुत के बारे मे सोचता है की वो अपनी मा को घोरी बना की चोद रहा है और सारिका मर गई हा मा किये जा रही है दिलीप ये सोचने के साथ तेजी से मुठी भी मारे जा रहा था
दिलीप जोर जोर से धक्का मार रहा है सारिका बस बेटा अब नही ले पाउंगी रुक जा कहे जा रही है सारिका की हालत खराब है लेकिन दिलीप पेले जा रहा है दिलीप मा मेरा निकलने वाला है सारिका बेटा मेरा भी आह के बाद दिलीप एक जोर की पिचकारी मारते हुवे झर जाता है
दिलीप मोबाइल मे टाइम देखता है तो दिलीप पूरी तरह से हैरान हो जाता है
दिलीप अपना सर पकर चिल्ला के – किया 51 मिनट बाद मेरा पानी निकला बाप रे बाबा ने मुझे किया दिया था जो मेरे लंड मे इतनी ताकत आ गई
सारिका घर पे नही थी खेत मे गई हुई थी दिलीप कपड़े पेहन कर वही बाबा के पास लेकिन बाबा अभी तक नही आये थे दिलीप पेर के पास जाके खरा हो जाता है तभी दिलीप की नजर जर के एक छेद मे रखे काजल पे जाती है दिलीप उस सोच पे पर जाता है उसकी कागज को देख कर साफ पता चल रहा था की उसे रखा गया है
दिलीप को रहा नही जाता और जाके कागज निकाल खोल कर देखता है तो कुछ लिखा हुवा था
बाबा – बेटा माफ करना मे तुमसे मिल नही पाया तुम बहोत अच्छे लरके हो तुमसे मुझे खाना दिया मुझसे अच्छे से बाते करते थे मुझे भी तुमसे बाते करने मे अच्छा लगता था चिंता मत करो एक ना एक दिन हम जरूर मिलेंगे दूसरी तुम्हे पता चल गया होगा मेने सीसी मे तुम्हे किया दिया था तुम्हारे मन मे कई सवाल होगे मुझे पता है बस इतना समझ लो मुझे तुम्हारे बारे मे सब पता है मेने तो बस मुझे खाना खिलाने के बदले तुम्हारी मदद कर दी तुम जो पाना चाहते हो तुम पा लोगे बस कोसिस करते रेहना बाकी मिलेंगे किसी दिन
दिलीप लेटर पढ़ इमोसनल हो जाता है दिलीप बैठते हुवे
दिलीप – बाबा को पता था सब मेरे बारे मे और बाबा सुरु से हि मेरी मदद कर रहे थे बाबा आप बहोत अच्छे है आप ने मेरे लिये जो किया उसके लिये आप का दिल से सुक्रिया मुझे नही पता जो मे पाना चाहता हु उसे पा पाऊगा की नही लेकिन आपने मेरी जिंदगी बर्बाद होने से बचा ली नही तो आगे मेरी लाइफ बुरी होने वाली थी थैंक्स बाबा
10 दिन बाद – दिलीप अकेला एक जगह मे बैठा मोबाइल निकाल आवाजे सुन रहा था आवाज सुनने के बाद – हा अब सही है आज से अपना मिसन सुरु
( दिलीप अकेले मे रोज आके अपनी आवाज चेंज कर बोलने की परेस्टिक कर रहा था और आज सफल हो गया है)
( रात 9 बजे)
दिलीप अपने कमरे मे था बिस्तर पे बैठा हुवा दिलीप एक नया सिम लेकर आया था दिलीप नये सिम को फोन मे लगा के अपनी मा का नंबर डायल कर फोन करने को होता है दिलीप कर रही पाता डर लगने लगता है घबराहट होने लगती है दिलीप फिर कोसिस करता लेकिन फिर डर जाता है 30 मिनट तक ऐसे ही चलता रेहता है
दिलीप मन मे – डर लग रहा है लेकिन मुझे करना हि होगा बाबा ने मेरे लिये इतना सब किया लेकिन जब वापस आयेगे तो मे उनके पास कैसे जा पाऊगा उनका सामना कर पाऊगा नही डरने से काम नही चलेगा मा को पाना है मा को खुशी देनी है तो करना ही पड़ेगा
दिलीप हिम्मत कर अपनी मा को फोन लगा देता है रिंग जाने लगती है दिलीप अभी भी डर रहा था लेकिन हिम्मत जुटाये हुवे था
सारिका बिस्तर पे लेती हुई थी फोन का रिंग सुन सारिका फोन उठा के नंबर देखती है तो कोई नया नंबर देख – ये नया नंबर किसका है
सारिका – हेलो
दिलीप आवाज बदल के – हैलो राकेश कहा है भाई तुम तो फोन भी नही करते यार दोस्त को भूल गया
सारिका – मे कोई राकेश नही हु बेटा रोंग नंबर लग गया है नंबर चेक कर के फोन किया करो
दिलीप – सॉरी सॉरी ऑन्टी माफ करना लगता है मेने गलत नंबर डायल कर दिया
सारिका – कोई बात नही कभी कभी गलती हो जाती है
दिलीप – थैंक्स ऑन्टी समझने के लिये वैसे आप की आवाज बहोत मीठी है ( दिलीप ये केह फोन कट कर देता है )
सारिका फोन को देखते हुवे – हद है जान ना पेह्चान किसी को ऐसे कैसे कुछ बोल सकता है कोई
सारिका फोन रख आखे बंद कर लेती है
वही दिलीप जोर जोर से सासे लिये जा रहा था पसीने भी डर के मारे निकल आये थे दिल धक धक कर रहा था दिलीप अपने सीने पे हाथ रख – बाप रे डर के मारे लग रहा था मेरी गांड फट जायेगी लेकिन चलो अच्छा हुवा मा मेरी आवाज पहचान नही पाई मेहनत करना सफल रहा लेकिन अभी भी मेन खेल सुरु होना बाकी है पता नही आगे किया होगा
( आज को लिये इतना ही ![]()
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