मैं हर्ष मध्यप्रदेश के एक महानगर में रहता हूँ। यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था जब मैं गयारहव ीं कक्षा में था। मैं एक आकर्षक व्यक्तित्व का माललक हूँ मगर तब तक ज वन में कभ कोई लड़क नह ीं पटाई थ । मेरा एक दोस्त था लववेक ! हालाींलक हम एक स्कू ल में नह ीं पढ़ते थे मगर बचपन में साथ खेले और घर पास-पास होने क वजह से हमार दोस्त काफ अच्छ थ । हम अक्सर एक दू सरे के घर आते जाते रहते थे। लववेक क एक छोट बहन थ जो गजब क खूबसूरत थ । मगर हाय र मेर लकस्मत- वो भ मेरे एक दोस्त न रज से पट हुई थ ।
जब भ उसको देखता था, तो लगता था लक एक मौका तो लमले अभ पकड़ कर बस चोद डालूूँ ! लदखने में लजतन सेक्स थ उतने ह त खे उसका तेवर थे, चलत थ तो कमर ऐसे मटकात थ जैसे कोई लिल्म लहरोइन रैं प पर मॉडललींग करने उतर हो ! गोरा रीं ग, लम्बाई ५ िु ट ४ इींच के लगभग थ , लम्बे बाल, भरा हुआ बदन, वक्ष-आकार 34 और एकदम लचकन थ । हाथ रखो तो लफसल जाये ! न रज एक रईस बाप क औलाद था और उस पर खूब पैसे लुटाता था। लदव्या और न रज जब भ साथ में होते, या लववेक के गैरहालजर में जब कोई मेसेज पहुूँचाना होता तो न रज के ललए मैं ह पोस्टमैन का काम करता।
शुरू शरू में तो मज़ा आता था, बाद में मुझे गुस्सा आने लगा। यह बात लदव्या भ समझ रह थ लक मैं उसके प्रलत आकलर्षत हूँ, मगर कहत कु छ नह ीं थ , शायद इसललए लक मेरा उसके घर आना-जाना था, और वो हमेशा अपने प्यार को सच्चा प्यार लदखात थ और कहत थ लक मैं शाद न रज से करूीं ग । सो मैं भ कु छ नह ीं कहता, बस अपने काम से मतलब रखता था। कभ कभ मौका लमलता तो इधर उधर से ताक-झाींक कर लेता था जैसे कभ मेज़ पर बैठ तो न चे झुक के चE का रीं ग देखना, या सामने बैठ के उसके वक्ष को घूरना, मौका लमले तो हाथ भ लगा देता था, मगर
कभ उसने कु छ कहा नह , बस घूर के दखत े थ । भाई का दोस्त होने क वजह से कु छ कहत नह ीं थ । शायद डरत
थ लक कह ीं मैं उसके और न रज के बारे में लववेक को बता न दूूँ ।
सब कु छ ऐसे ह चल रहा था, पर क्षा ख़त्म हो गई थ और अब कररयर बनने का समय था। इत्तेफाक से मैंने और लदव्या ने एक ह कोलचींग में प्रवेश ललया और हम दोनोीं साथ में आते-जाते थे। इस ब च मैंने एक बार उसको प्रोपोज़ लकया मगर उसने मुझे न रज से लपटवाने क धमक द और मैं चुप हो गया। मगर सोचा लक जब मौका लमलेगा तो देख लूूँगा !
एक लदन मेर लकस्मत खुल गई।
स्कू ल शुरु हो चुके थे और बाररश का मौसम था। मैंने अपने स्कू ल के दोस्तोीं के साथ लफल्म देखने क योजना बनाई। लफल्म थ लदल !
जल्द पहुींचने क वजह से हम लोगोीं को प छे क स ट लमल गई। लफल्म का इींटरवल हुआ लाइट जल तो देखा लदव्या
सामने क स ट में थ मगर न रज के साथ नह , लकस और के साथ !
पहले तो मेर समझ में कु छ नह ीं आया मगर बाद में समझ में आ गया लक यह तो बड़ चालू है। खैर मैं भ चुप रहा और ऐसे बैठ गया लक वो मुझे ना देख पाए लेलकन मैं उसे देख सकूूँ ।
लफल्म के मध्याींतर के बाद मैंने देखा लक वो लड़का उसको इधर-उधर हाथ लगा रहा था और वो लहल-डु ल रह थ । समझते देर नह ीं लग लक उनक चूमा-चाट चल रह है।
लफल्म ख़त्म हुई तो मैंने अपने दोस्तोीं से बहाना बना ललया लक मुझे कु छ खर दना है, तुम लोग घर लनकल जाओ।
अब मैंने अपन बाइक स्टैंड से लनकाल और लदव्या और उसके दोस्त का गेट से लनकलने का इींतज़ार करने लगा। वो लनकले, मैं उनका प छा करने लगा। थोड़ दू र ह एक पाकष है, जहाूँ लदन के समय कोई आता जाता नह ीं है, वो लोग उसमें चले गए, मैंने भ साइड में गाड़ लगा द ।
मैंने देखा लक वो दोनोीं कोने में बैठ गए। मैं भ एक पेड़ पर चढ़ कर तमाशा देखने लगा लक देखें क्या करते हैं।
थोड़ देर बाद लड़का उसके स्तन दबाने लगा। वो भ गरम हो गई थ , लड़के ने उसक शटष अस्त-व्यस्त कर द थ और उसका एक स्तन बाहर लनकाल के चूस रहा था।
मैंने मौका देखा और एकदम से उनके सामने आ गया और लदव्या को एक झापड़ रस द लकया। वो एकदम से सकते में आ गए। लदव्या का एक स्तन अभ भ बाहर था। मैंने उस लड़के को भ दो झापड़ मारे और स धे लदव्या को डाूँटने लगा, कहा- घर चल ! मम्म पापा और सबको बताऊूँ गा !
उस लड़के ने सोचा लक मैं कोई उसके घर का हूँ, वो वहाूँ से भाग गया। अब मैं और लदव्या वहाूँ अके ले रह गए। उसने बहाना बनने क कोलशश क तो मैंने लपक्चर हाल से लेकर अब तक का प छा करने क सार बात बता द और यह भ कहा लक न रज को सार बात बता दूूँगा और तेरे घर में भ !
वो डर गई और मुझसे माि मागने लग ।
अब मेर बार थ , मैंने उसको ध रे से सहलाया और कहा- ठ क है, पर जो कहूँगा वो करना पड़ेगा !
उसने मुझे लतरछ लनगाहोीं से देखा और कहा- ठ क ! लफर न चे देखकर कहा- ठ क है, मगर वादा करो लक लकस को कु छ नह ीं कहोगे !
मैंने लबना कु छ सोचे समझे उसके वक्ष पर हाथ रख लदया और दबाते हुए कहा- अब बोलो क्या सब कु छ? तो उसने कहा- हाूँ !
अरे मेर तो लॉटर लनकल पड़ । उसको बाइक पर लबठाया और स धे उसको लेकर उसके घर पहुूँचा। मुझे पता था लक
अींकल- आींट जॉब पर गए होगे और लववेक चार बजे स्कू ल से आएगा… मतलब लगभग दो घींटे थे मरे े पास…
अब हम घर के अन्दर आये, तब तक वो सामान्य हो गई थ । मैंने उससे कहा- एक ग्लास पान ला दो !
उसके जाते ह मैंने दरवाजा बींद कर ललया और स धे उसके प छे रसोई में चला गया। उसके हाथ में ग्लास था, मैंने पान लपया और उसको पकड़ ललया।
उसने कहा- हर्ष नह , मझसेु गलत हो गई, मझेु माि कर दो और यहाूँ से जाओ…
मैंने कहा- अच्छा ठ क है, जाता हूँ, शाम को आऊूँ गा और सबको सब कु छ बता दूीं गा !
यह कह कर मुड़ गया…..
उसने कहा- तुम ऐसा नह ीं करोगे….
तो मैंने कहा- तू कु छ भ करे तो ठ क ! और मैं तुमको प्यार करना चाहता हूँ तो तुमको गलत लगता है…….
वो रोने लग , मैंने आगे बढ़कर उसके आूँसू पौछ कभ समझा ह नह .ीं ……
े और कहा,”पगल … मैं भ तुमको बहुत चाहता हूँ…. मगर तुमने
तो उसने कहा कु छ नह ीं मगर प्यार से मुझे पप्प दे द ……
अब क्या था ! हो गई बल्ले बल्ले……..
मैंने उसको बेडरूम में चलने को कहा तो उसने बोला- कोई आ जायेगा तो क्या करें गे? मैं बोला- बोल देना लक ट्यूशन का होमवकष कर रहे थे।
इसके पहले वो कु छ कह पात , मैंने उसको अपन बाहोीं में उठा ललया और बेडरूम में ले आया।
उसने कहा- हर्ष ! कोई आ गया तो क्या होगा? मैंने कहा- मैंने दरवाजा बींद कर लदया है और अब तुम कु छ मत सोचो !
लफर मैंने उससे बेड पर बैठाया और उसके वक्ष पे हाथ िे रते हुए उसके शटष के बटन खोल लदए। लदव्या शाींत लेट हुई थ , उसके बदन में कोई भ हरक़त नह ीं हो रह थ । अच्छा तो नह ीं लग रहा था, मगर मैं यह अवसर जाने नह ीं देना चाहता था, सो शटष खोलने के बाद उसका स्कटष भ खोल द और अब वो लसफष मेरे सामने ब्रा-पेंट में थ । देर न करते हुए मैंने उसके दोनोीं अधोवस्त्र भ अलग कर लदए।
वाह, क्या स न था ! वो मेरे सामने एकदम नींग पड़ थ , उसके दोनोीं स्तन लाजवाब थे, गोल-गोल और उन पर गुलाब चुचूक देख कर मज़ा आ रहा था।
मैंने अपने कपड़े भ उतार फें के और उसके पास लेट गया और उसके बालोीं को सहलाया और गाल पर चूम ललया। मैं यह जान गया था लक अब बाज़ मेर है।
मैंने उससे कहा- लदव्या ! अब मेरे तुम्हारे ब च कोई पदाष नह ीं रहा ! तुम मेरा साथ दो और ज वन के मज़े लूटो !
आक्तखर तुम भ तो यह करना चाहत थ !
ये कहते ह मैं उसके रस ले होठ और चूत से खेलने लगा।
ोीं को चूमने लगा एक हाथ से उसके गोले मसल रहा था और दू सरे से उसक जाींघ !
ध रे ध रे उसके बदन में भ हरक़त होने लग । तब मैंने उसे कहा- अपन टाूँगे िै लाओ !
तो उसने साथ लदया, मैंने भ देर न करते हुए अपन ज भ स धे उसक चूत में डाल द और चाटने लगा। थोड़ देर में वो कसमसाने लग और उसका पान चूने लगा।
मैं बोला- तुम भ मेरा पप्पू मुूँह में लो !
और यह कहते ह उसके होठोीं में मनेैं अपना लण्ड रख लदया। मरे े लण्ड को दखतेे ह वो डर गई क्योलीं क मरे े लण्ड का
आकार सात इीं च का है और काफ तगड़ा है।
वो वोल – इतना मोटा? क्या तुमको कोई ब मार है? मैंने कहा- नह ीं पगल , यह तो सामान्य है !
तो उसने कहा- न रज का तो छोटा सा है ! ( लदल में ख़ुश हो रह थ लक अब वो मुझसे खुल रह है और बात भ कर रह है)
मैंने कहा- तो तुमने उसके साथ सेक्स कर ललया है?
तो वो बोल – नह , एक बार उसको सु-सु करते दखाे था।
मैंने कहा- अच्छा !
लफर वो बोल – तुम कु छ करना नह ीं ! नह ीं तो मैं मर जाऊीं ग ! तुम्हारा मेरे लहसाब से बहुत बड़ा है !
मैंने कहा- कोलशश करने में क्या जाता है, वैसे लड़लकयोीं क योलन में यह आराम से लफट हो जाता है, प्रकलत का लनयम है।
तो बोल – नह ीं हर्ष ! मुझे डर लग रहा है।
मैंने कहा- अच्छा इसको चूसो तो सह !उसने मुूँह खोला और ध रे ध रे करते हुए पूरा का पूरा अपने मुूँह में ले ललया। मैं तो सातवें आसमान पर पहुूँच गया। मेरा एक हाथ अब भ उसके स्तन मसल रहा था और मेरे मुूँह से लससलकयाूँ लनकलने लग ।
लगभग पाूँच लमनट के बाद मैंने बोला- अब लेटो !
तो वो मना करने लग ।
मैंने बोला- कु छ नह ीं होगा !
थोड़ा मनाने के बाद वो मान गई और टाूँगें फै ला ल , मैंने ऊूँ गल से उसक चूत को चौड़ा लकया और अपना सुपारा उसमें लटका लदया और ध रे से अन्दर डाला। लगभग एक इीं च तक वो वोल – नह ीं ! ददष हो रहा है !
मैंने बोला- पप्पू राजा अपन जगह बना रहा है, अब मज़ा आएगा ! और बोलते ह तेज़ झटका लदया। लगभग आधा लण्ड अींदर था। वो च ख पड़ – हाय मर गई ! मर मैं तो !
मैंने अपना हाथ उसके मुूँह पर रख लदया और उसके ऊपर लेट कर ध रे ध रे लहलने लगा।
अब उसको भ अच्छा लग रहा था, मगर मुझे अन्दर कोई च ज़ अड़ स रह थ । लफर मैंने उसके होटोीं पे अपने होठीं रख लदए और पूरा जोर का धक्का मारा। मेरा लण्ड एकदम अन्दर चला गया, वो च ख रह थ , उसक आूँखोीं से आींसू आ गए थे।
मैं शाींत हो गया और उसके ऊपर हाथ फे रने लगा। दो-त न लमनट तक वैसे ह पड़े रहने के बाद मैंने अपना मुूँह उसके मुूँह से अलग लकया तो वो बोल – बहुत ददष ह रहा है ! प्ल ज़ लनकाल लो !
मैंने कहा- हाूँ ! पर अब तो जो होना है हो गया ! तुम मेर हो गई हो !
उसने भ मुस्कु राते हुए अपन मुींड साइड में लछपाने क कोलशश क । मैंने कह लदया- अब चलो, लजन्दग के मज़े लूटते हैं !
वो कु छ नह ीं बोल । मैं अब अपना शर र आगे-प छे करने लगा, वो भ मेरा साथ देने लग और अज ब अज ब स मुखाकृ लतयाूँ बनाते हुए लससलकयाूँ ले रह थ । मेरे शर र के धक्कोीं के साथ उसके स्तन भ ऊपर-न चे हो रहे थे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
लगभग 15 लमनट के बाद मुझे कु छ होने लगा। इससे पहले लक कु छ समझ पाता, मेरे लण्ड से लपचकार िू ट पड़ । मेरा व यष उसक चुद में ह लगर गया।
अब मैं लनढाल हो गया, ध रे से अपना लण्ड बाहर लनकाला तो देखा उसका लबस्तर खून से लाल था, मेरे लण्ड में भ काफ जलन हो रह थ , दोनोीं ने एक साथ जो अपना कु वाींरापन खोया था और दुलनया के सबसे क मत सुखोीं में से एक प्राप्त कर ललया था।
हम दोनोीं एक दू सरे को देख रहे थे और अब उसने अपना सर मेर छात पर रख लदया और दोनोीं आराम से लगभग दस लमनट तक वैसे ह पड़े रहे। बातोीं ह बातोीं में मैंने उससे उस लड़के के बारे में जानकार हालसल कर ल और उसको कहा- मैं लकस को कु छ नह ीं बताऊीं गा और यलद तुम ठ क रह तो आगे चल के तुमसे शाद भ कर लूूँगा।
उसने मुझे पहल बार अपने मन से एक पप्प द , मुझे बहुत अच्छा लगा।
तभ समय देखा तो साढ़े त न हो रहे थे। मैं उठा और कहा- अब लववेक आने वाला है, अब मुझे जाना चालहये !
वो भ उठ मगर लड़खड़ा गई, मैंने उसे सहारा लदया, वो स धे बाथरूम गई, मैं भ साथ-साथ गया, देखा लक वो बैठ के मूत रह थ । लफर उसने सबसे पहले बेडश ट उठाई और पान में डाल द ।
मैंने पूछा- क्या तुम नोमषल हो? उसने कहा- हाूँ, थोड़ा ददष है !
मैंने कहा- ठ क है ! मैं जाता हूँ ! और चला गया।
शाम को मैं लववेक और न रज से लमला, उनको कहा- लदव्या को एक लड़का छे ड़ता है, जो उसके साथ पास वाल ट्यूशन में है।
हम लोग लमल गए और लफर अगले लदन त न चार और दोस्तोीं को लेकर उस लड़के क जम से धुनाई क । वो मुझे लदव्या का भाई समझ रहा था और माि माींग रहा था।
इस तरह रास्ते का एक काींटा साि हो गया। अब न रज क बार थ … मुझे मालूम था लक बहुत जल्द उसके मम्म पापा उसका पढ़ने के ललए लदल्ल भेजने वाले हैं और वो यलद चला गया तो लदव्या मेर कह कोई बात नह ीं टालेग ।
और लफर हुआ भ वह … अगले साल वो लदल्ल चला गया। लफर मैंने लगभग त न साल तक लदव्या के साथ मज़े लकये, मगर हम दोनोीं अलग अलग कॉलेज में ले ललए।
एक लदन मैंने लफर उसको लकस और के साथ देखा, उस समय उसके पास गया और दो तमाचे जड़े और कहा- अब सब ख़त्म ! हालाींलक उसके बाद भ हम लजींदग मज़े लेते रहे

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