मेरी माँ बहने और उनका परिवार – Update 24

मेरी माँ बहने और उनका परिवार - Family Sex Story
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मैं पूरी तरह से उत्तेजित था। सोनिया भी उतनी ही उत्तेजित थी। दीदी ने मुझे इशारा किया उसकी तरफ जाने का मैं उठ कर बेड पर उसके बगल में बैठ गया। हम दोनों की साँसे तेज चल रही थी। मैंने धीरे से हाथ बढ़ा कर उसके जांघ पर रख दिया उसने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद मैं उसके नंगे जांघ सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद मुझे अपने लंड पर उसके हाथ का एहसास हुआ। वो बरमूडा के ऊपर से ही मेरा लंड सहला रही थी।

दीदी उसकी तरफ देखते हुए बोली – बड़ा है न ? ले ले मजा आएगा।

सोनिया ने नजरे झुका ली पर मेरे लंड से अपना हाथ नहीं हटाया। मैंने तभी उसका चेहरा अपनी तरफ किया और उसे किस करने लगा। उसने मेरा कोई विरोध नहीं किया और मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और अपने दोनों हाथो से उसके मुम्मे दबाते हुए उसे ताबड़तोड़ किस करने लगा। तभी दीदी बोली – ये सो गया है। मेरा बिस्तर सीधा कर दे मुझे भी सोना है। लेत बुझा कर तुम भी अपना काम कर लेना।

हम दोनों एक दुसरे को देख कर मुश्कुरा पड़े। मैंने दीदी के बिस्तर को सीधा किया और लाइट बुझा दी। फिर मैं उसके पास जाकर लेट गया। पर उसने अबकी करवट बदल लिया था। अब वो मेरी तरफ पीठ करके लेटी थी। मैंने उससे धीरे से कहा – इधर घूमो न।

उसने कुछ नहीं कहा। मैंने अपना हाथ उसके ऊपर से ले जाकर उसके मुम्मो पर रख दिया। उसके शरीर में थोड़ी सी सिहरन हुई पर उसने मेरा हाथ नहीं उठाया। मैंने फिर उसके टी-शर्ट को ऊपर करने की कोशिश की तो उसने धीरे सी कहा – ऊपर से ही कर लो, जो करना है। मैंने उसके मुम्मे दबाते हुए कहा – तुम्हारी पेंट खराब हो जाएगी।

उसने कहा – मैं कई सेट लेकर आई हूँ।

मेरे लिए यही इशारा काफी था। मैंने अपना एक पेअर उसके कमर के ऊपर से उसकेऊपर रख दिया और अपने लौड़े को निकाल कर उसकी मस्त गांड पर रगड़ने लगा। मैं पीछे से धक्के देता और वो अपने गांड से मुझे पीछे धक्के देती। मैंने महसूस किया की वो अपना एक हाथ अपनी पेंट में डाल कर चूत सहला रही थी।

दीदी के दूध पीने से और सोनिया जैसी खूबसूरत कमसिन लड़की के पास होने से मैं पहले से उत्तेजित था। मैं तेजी से उसकी गांड पर रगड़ा मार रहा था। मुझे आने में टाइम लग रहा था पर वो शायद कुछ ही देर में स्खलित हो गई थी। उसने मुझसे धीरे से कहा – रुको मेरे ऊपर आजाओ।

वो पीठ के बल लेट गई। और मैं उसके ऊपर हो गया। अब मैं उसे चूमता हुआ ऊपर से ही अपना लंड उसकी पेंट के ऊपर से ही चूत पर रगड़ रहा था। मुझे लग रहा था जैसे मैं उसे चोद रहा हूँ। हम बस सिसकारियां ले रहे थे। कुछ देर बाद मैंने उसके पेंट पर अपना माल उलट दिया। मेरे माल निकलते ही उसने मुझे अपने बाँहों में तेजी से भर लिया और अपने दोनों पैओन को भी मेरे कमर के दोनों तरफ करके उससे मुझे जकड लिया। कुछ देर बाद जब हमारी साँसे स्थिर हुई तो उसने कहा – उठो। कपडे बदलने दो।

मैं उठ कर बैठ गया। मेरा पेंट तो बच गया था पर उसका पेंट मेरे वीर्य और उसके चूत के रास से भींग गया था। उसने अपने बैग से एक पैंटी और दूसरा शार्ट निकला और बाथरूम में घुस गई।

मैं बेड पर लेट गया और सोचने लगा कि कुछ दिनों में एक और कुँवारी चूत फतह हो जाएगी। मेरे सामने फिर से श्वेता का चेहरा आ गया।

मैं मन ही मन सोचने लगा कि एक चूत और बची है। फिर श्वेता मेरी।

यही सब सोचते सोचते कब मुझे नींद आ गई मुझे पता ही नहीं चला। देर रात जब नर्स ने दरवाजा खटखटाया तो मैंने देखा सोनिया चेयर पर ही बैठे बैठे सो रही है। मुझे उस पर बहुत प्यार आया।

मैंने दरवाजा खोला और नर्स को अंदर आने दिया। नर्स के आते ही मैंने सोनिया से कहा – बिस्तर पर सो जाओ। दीदी को कुछ दवा वगैरह देने के बाद नर्स चली गई। पर जाते जाते वो मुझे और सोनिया को अजीब नजरो से देख रही थी।

मैंने उसकी तरफ मुश्कुराते हुए कहा – गुड नाइट। नर्स वापस चली गई और मैं दरवाजा बंद करके सोनिया के बगल में सो गया। इस बार सोनिया मेरे तरफ चेहरा करके सोइ। बल्कि मेरे बाँहों में मुझसे चिपक कर सोइ। कोई भी देखता तो यही कहता हैं पति पत्नी या प्रेमी प्रेमिका हैं।

हम दोनों की नींद सुबह दरवाजे के नॉक से खुली। नर्स को कुछ दवाइयां देनी थी। दीदी ने मुझे आवाज दी – राज उठ, दरवाजा खोल।

मैंने उठ कर दरवाजा खोल दिया। सोनिया भी उठ गई थी। रात वाली नर्स ही थी। वो मुझे और सोनिया को बड़ी अजीब नजरों से देख रही थी। कोई एक्स्ट्रा बेड नहीं लगा था तो वो दिमाग लगा रही थी कि हम कैसे सोये होंगे।

जब वो दीदी को इंजेक्शन लगा रही थी तो दीदी ने धीरे से कहा – लवर्स हैं।

नर्स भी धीरे से बोली – मुझे लग रहा था। बढ़िया जोड़ी है।

मैं बाहर जाने लगा तो दीदी ने कहा – जल्दी आ जाना। चची और श्वेता चाय / नास्ता लेकर आ रहे हैं।

मैंने कहा – ठीक है।

कुछ देर बाद चाची और श्वेता आ गए। हम सबने वहीँ चाय , नाश्ता किया। श्वेता मुझे इशारे में बात करना चाह रही थी। सोनिया उसके और चाची के सामने थोड़ा शर्मा रही थी।

श्वेता ने मुझे बाहर आने का इशारा किय। एक किनारे ले जाकर उसने मेरे बाहों पर हाथ मारते हुए कहा – और हीरो, केस रही रात ?

मैं – तुझे क्या ? रात तो तेरे साथ बितानी है। आज रुक, यहीं सुहागरात मन कर तेरे लिए नौ महीने बाद का कमरा बुक कर देता हूँ।

श्वेता – चुप कर कमीने। वो सब असंभव है। सोनिया को ही अपनी दुल्हनिया बना ले।

मैं – और तू मेरी प्रेमिका बन कर रहेगी या उसकी सौत ?

श्वेता – यार तू मेरे पीछे क्यों पड़ा है ? सोनिया के साथ कुछ किया या नहीं ?

मैं – मैं तेरे आगे पड़ा हूँ। पहले आगे फिर पीछे।

श्वेता ने पैर पटकते हुए कहा – तुझसे बात करना ही बेकार है। मैं जा रही हूँ।

मुझे उसको छेड़ने में मजा आ रहा था। मैं जब वापस रूम में पहुंचा तो दीदी ने कहा – तुम और सोनिया घर चले जाओ। चाची और श्वेता यहीं रहेंगे। शाम को आ जाना फिर।

सोनिया ने थोड़ी ना नुकुर कि तो मैंने कहा – ठीक है चलो। वैसे भी रात सो नहीं पाई थी। थोड़ा सो लोगी तो फ्रेश रहोगी।

मेर बात सुनकर चाची मुश्कुराने लगीं। श्वेता बोली – बड़ा ख्याल रखा जा रहा है।

ये सुन दीदी बोली – अरे मेहमान है हमारे घर की तो ख्याल तो रखना ही होगा। जाओ अब तुम दोनों। पर टाइम से आ जाना।

मैं – आप दोनों के लिए लंच लाना है ?

चाची – नहीं। हम पूरी तरह से तैयार आये हैं।

मैंने उन्हें गले लगा कर कहा – मेरी प्यारी चाची। सबके दिल की बात जानती हो। उम्म्म्म

मैंने उनके गाल को चूम लिया। चची शर्मा गईं ।

रास्ते में सोनिया ने कहा – श्वेता क्या कह रही थी ? उसे कोई शक तो नहीं हुआ न ?

मैं – कुछ ख़ास नहीं। वो दीदी का हाल पूछ रही थी। वैसे उसे शक भी हो भी गया तो क्या?

सोनिया – शी लव्स यू ना।

मैं उसके चेहरे की तरफ देखने लगा। उसने अपना चेहरा सामने रोड की तरफ किया और बोली – आश्चर्य न करो। भाभी मेरी दोस्त भी हैं , सहेली भी और माँ जैसी भी। सब बताती हैं। मुझे पता है तुम दोनों आपस में बहुत प्यार करते हो।

मैं अवाक था। मैंने कहा – तुम ये सब जानते हुए भी मेरे साथ ~~~

सोनिया – हाँ। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मुझे तुम अच्छे लगते हो। मैं जो भी कर रही हूँ अपनी मर्जी से। अब हमारा तुम्हारा भविष्य है या नहीं मुझे नहीं पता। पर मुझे तुम्हे प्यार करने में कोई शर्म नहीं है।

मैं उसके प्यार और पसंद की बातें सुनकर ब्लश करने लगा। मन ही मन यही सोच रहा था कि शायद मैंने किसी के मन की बात जानने कि कोशिश ही नहीं की। मुझे सोनिया , श्वेता या तारा से प्यार करने के लिए कोई एफर्ट डालना ही नहीं पड़ा। मैं बिना बात खुद को इन्फीरियर समझ रहा था। पर इन सब प्यार करने वाले लोगों के दिल के साथ मैं नहीं खेल सकता था। मैं समझ नहीं पा रहा था कि किसका दिल टूटेगा ? कौन बाद में दुखी होगा। ख़ास कर सोनिया और श्वेता के लिए ज्यादा चिंतित था। सोनिया की इस बात ने मेरे मन में थोड़ी तो चिंता जगा दी थी। पर मैंने सर झटकार मन में ही सोचा – अभी इतना क्यों सोचूँ ? जो होगा देखा जायेगा।

घर पहुँच कर मैं अपने कमरे में फ्रेश होने चला गया। माँ सोनिया को अपने कमरे में लेकर चली गईं। वो वहीँ फ्रेश होने लगी। नहाकर आया तो वो भी फ्रेश हो चुकी थी और उसने एक सुन्दर सा पिंक सूट डाल लिया था। माँ ने हम दोनों को जबरदस्ती दोबारा खिलाया। मैं रात सो नहीं पाया था तो मैंने माँ से कहा – मैं खाना नहीं खाऊंगा। अब सोऊंगा। शाम को जगाना ताकि चाची और श्वेता को भेज सकें।

माँ ने कहा ठीक है। मैं तो अपने कमरे में जाकर सो गया।

शाम को सोनिया मेरे कमरे में चाय लेकर आई। चाय का प्याला साइड टेबल पर रखते हुए उसने मुझे जगाया – उठो, शाम हो गई है। हॉस्पिटल भी चलना है।

मैंने उसे देखते ही उसका हाथ पकड़ कर कहा – आओ न रात कि तरह सोते है। यहाँ कोई दिक्कत भी नहीं होगी।

उसने शर्माते हुए कहा – धत्त , माँ जी घर में हैं।

मैं – आय हाय , माँ जी। अगर नहीं होती तो सो जाती ? और तुम्हे तो सब पता है। कहो तो उन्हें भी बुला लूँ। मस्त थ्रीसम रहेगा।

सोनिया ने हाथ छुड़ाते हुए कहा – बड़े बेशरम हो तुम। उठो।

मैं हाथ मुँह धिकार बाहर आया तो माँ ने हम सबके लिए नाश्ता और खाना बना दिया था। उन्होंने हॉस्पिटल के लिए चाय और कुछ स्नैक्स दे दिए थे।

हॉस्पिटल पहुँच कर सबने चाय और नाश्ता किया। दीदी माँ के हाथ के चाय पीकर बहुत खुश थी। लौटने का हुआ तो श्वेता ने कहा – मैं रुक जाती हूँ। बाबू को छोड़ने का मन ही नहीं हो रहा है। कितना प्यारा है।

दीदी ने कहा – सौतें एक साथ कैसे रुकेंगी। तू जा। और बहुत मन कर रहा है बच्चा खिलाने का तो कर ले तू भी। राज भी खुश हो जायेगा।

श्वेता शर्म के मारे लाल हो गई। बोली – ठीक हूँ। जा रही हूँ। मुझे पता है आपकी दुलारी यही है। चलो माँ।

दीदी ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके माथे को चूमते हुए बोली – तू सब जानती है। तू हम सबकी जान है। जाकर आराम कर। एक दो दिन की बात है। घर आ जाउंगी तो दिन भर खेलना इसके साथ।

फिर मैं श्वेता और चाची को छोड़ने बाहर आ गया। मैंने श्वेता को छेड़ने के लिए चाची से कहा – चाची आपको कुछ जलने की बू नहीं आ रही है ?

चची कुछ बोलती इससे पहले श्वेता बोल पड़ी – चुप बहनचोद। देख तेरी झांट तो नहीं जल रही।

मैं हँसते हुए बोला – अभी एक बची है। बाकी तू अपने पैंटी में देख आग तो नहीं लगी है।

चाची ने कहा – कितना लड़ते हो तुम दोनों।

उन्होंने श्वेता से कहा – तेरी दी हुई शर्त तो थी। वर्ना ये सोनिया के पीछे क्यों पड़ता ?

श्वेता कुछ नहीं बोली। मैंने उन दोनों के लिए गाडी बुला लिया। तभी मेरे दिमाग में एक बात आई। मैंने कहा – श्वेता तू गाडी सीख लेती तो बढ़िया रहता।

श्वेता इस बात से खुश हो गई। बोली – सही कह रहे हो। एक बार सुधा दी आ जाता हैं तो सीखा देना।

उनके जाने के बाद लौट कर आया तो देखा सोनिया बच्चे को खेला रही थी और दीदी सो गई थी। मैं भी बैठ कर टीवी देखने लगा। शाम को जब शिफ्ट चेंज हुई तो कल रात वाली नर्स वापस आई। उसने कुछ दवाइयां दीदी को दीं और बोली एक दवा ख़त्म है। ले आना पड़ेगा।

मैंने बहार दवा की दूकान में खोजै तो वो नहीं थी। मैं वापस आकर बोला की वो तो नहीं मिल रही।

वो नर्स मुझसे बोली – चलो मेरे साथ देखती हूँ कहीं हॉस्पिटल में ही मिल जाये।

मैं उसके पीछे पीछे चल पड़ा। इससे पहले मैंने उसे ध्यान से नहीं देखा था , क्योंकि मैं थोड़ा व्यस्त था। आज गौर से देखने का मौका मिला था। नर्स का पिछवाड़ा बहुत ही मस्त था। लगता था शादी शुदा थी इस लिए शरीर भरा हुआ था। एक तरफ पैंट से उसके गांड बड़े मस्त लग रहे थे। चल रही थी तो मस्त हिल रहे थे। मैं उसे घूरते हुए पीछे ही चल रहा था। उसने एक जगह पलट कर मुझे देखा तो मैंने अपने नजरे फेर लीं।

वो मुझे हॉस्पिटल के ऊपरी फ्लोर में बने एक वार्ड की तरफ ले गई। उधर भीड़ कम ही थी। दोनों तरफ कमरे बने हुए थे पर लगता था पेशेंट नहीं थे। मैंने कहा – यहाँ कहाँ दवा मिलेगी ?

नर्स – हम भी कुछ स्टॉक अपने पास रखते हैं। ये नया वार्ड है , इधर मरीज नहीं है। हम यहाँ अपना सामान रखते हैं और मौका मिलने पर थोड़ा आराम कर लेते हैं।

मैं मन ही मन सोच रहा था कि ये आखिर चाह क्या रही है ?

तभी एक कमरे में वो घुसी। अंदर एक बेड लगा था और साइड में सोफा और अलमारी थी । उसने अलमारी खोली और उसमे से एक डब्बा निकाल कर दवा खोजने लगी। उसने फिर दवा निकाल लिया और बोली – मिल गई।

मैंने कहा – थैंक यू। कितने पैसे देने हैं।

नर्स मेरे एकदम करीब आई और बोली – पैसे लेने होते तो यहाँ तक तुझे क्यों लाती ?

मुझे सारा माजरा समझ आ गया। पर मैं कोई गलती नहीं करना चाहता था। मैंने भोला बनते हुए कहा – देखो तुम मुझे फंसाने के लिए तो नहीं लेकर आई हो। कोई कैमरा वामेरा सेट कर रखा हो ? बाद में ब्लैकमेल करो।

नर्स ने अपने हाथ सीधे मेरे लंड पर रख दिया और बोली – बहनचोद, रिकॉर्ड करके बलैकमेल करना होता तो तभी कर लेती जब तू अपनी बहन का दूध पी रहा था और उसके ननद को छोड़ने के चक्कर में था।

अब मेरे तोते उड़ गए। मैंने कहा – क्या बकवास कर रही हो ?

नर्स – साले नौटंकी मत कर। मुझे शक तो तभी हो गया था जब बच्चे के शक्ल तुझसे मिलती हुई लगी थी। पर तुम सबकी कुछ बाटने सुनी तो समझ आया। कल रात तेरी बहन को दवा देना था तो आई थी। पर अंदर तुम सबकी गुटरगूं सुना तो होश उड़ गए। अपनी जिंदगी में हर तरह के मरीज देखे हैं। बच्चा पैदा करने वाले भी और गिराने वाले भी। कई लड़कियों की चूत से खीरा खुद ही काट कर निकाला है। सो सांडा मत बन।

मैं – तुम गलत समझ रही हो।

नर्स – साले मेरा पिछवाड़ा देख रहा था तो गलत नहीं था। अब दे रही हूँ तो गलत लग रहा है। जल्दी कर टाइम नहीं है। दवा चाहिए या नहीं ?

मैंने कहा – तुम सबके साथ ऐसा करती हो ?

नर्स – साले तुम्हे रंडी दिखती हूँ मैं ? तू चिकना है पसंद आ गया। वार्ना यहाँ सब मेरे पीछे पड़े रहते हैं। हर कोई नहीं पाता मुझे।

मैंने कहा – कंडोम ?

नर्स – उसके बिना दूंगी भी नहीं। पर पहले अपना लंड दिखा?

मैंने कहा – तुम्हारे हाथ में ही है।

नर्स ने मुझे वही बेड पर बिठा दिया और मेरे पैंट का ज़िप खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया। उसका साइज़ देख कर वो सदमे में आ गई। बोली -साला ये तो बहुत बड़ा है।

मैं – बड़ा है , माल वाला है तभी बहन को चोद कर बच्चा पैदा किया है। ले पायेगी ?

उसने तुरंत मेरा लंड मुँह में जातक लिया और चूसने लगी। लगता था लंड चूसने में उस्ताद थी। मुझे लग ही नहीं रहा था कि मेरा लंड मुँह में है। चूसते चूसते वो एकदम गले तक ले ले रही थी। मने उसका सर पकड़ा और उसके मुँह में चोदने की कोशिश की तो वो बोली – भोसड़ी के , मैं कर रही हूँ करने दे।

मैंने फिर अपने आपको उसके हवाले कर दिया। कुछ देर मेरा लंड चूसने के बाद वो खड़ी हुई। पैंट की जेब से एक कंडोम निकाला और बोली पहन ले। फिर उसने अपना पैंट उतार दिया और बेड के सहारे घोड़ी बन गई। बोली अब जल्दी चोद ले।

मैंने अपना लंड पीछे से उसके गांड से सटाया तो बोली – गांड नहीं , चूत में डाल। चाल नहीं खराब करवानी है अभी।

मैंने उसके चूत में लंड डाल दिया और उसे छोड़ना शुरू कर दिया। वो खेली खाई लग रही थी। उसे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। पाने हाथ आगे बढाकर उसके मुम्मे पकड़ने चाहे तो बोली – आज नहीं बस तू चूत की खुजली मिटा। चुचे बाद में दबाना।

मैंने भी बस उसे चोदना ही बेहतर समझा। कुछ देर कि चुदाई के बाद मेरे लंड ने माल निकाल दिया। मैंने कंडोम वहीँ डस्टबीन में डाल दिया। मुझे ज्यादा मजा तो नहीं आया था पर बिना मांगे एक चूत मिली थी तो कोई किसे दिक्कत थी।

उसने अपने पैंट को चढ़ाते हुए कहा – मेरा नंबर डायल कर।

मैंने उसके बताये नंबर पर डायल कर दिया।

वो बोली – कॉल करुँगी तुझे। फिर मजे से करेंगे। टेंशन मत ले मैं कोई ब्लैकमेलर नहीं हूँ। अब तू निकल मैं कुछ देर में आती हूँ।

मैं वापस चल कर कमरे में आया तो दीदी जग चुकी थी। उन्होंने कहा – कहाँ चला गया था ?

मैंने कहा – अरे एक दवा थी यहाँ नहीं मिली तो बाहर जाना पड़ गया। उसी में टाइम लग गया।

उन्हें मेरी हालत देख कुछ शक तो हुआ पर कुछ बोलीं नहीं।

मैं दीदी से नजरें चुरा रहा था। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ हुआ क्या है ? उस नर्स को ये सब पता कैसे चला ? क्या उसने ऐसे ही गेस मारकर किया था या फिर उसने हम सबके ऊपर नजर राखी हुई थी और बातें सुन रही थी।  कैसे इतनी आसानी से वो मुझसे चुद भी गई।  खैर जो भी हो मुझे एक चूत और मिल गई थी  भले ही वो कुंवारी नहीं थी।  मैं बेटे समय को याद कर करने लगा था कि कहाँ कभी एक भी नसीब नहीं थी और कहाँ अब हर तीसरी चूत खुली पड़ी है।

मैं ये सब सोच ही रहा था कि मेरे फ़ोन की घंटी बाजी।  फ़ोन मामा का था। मामी को पेन हो रहा था।  वो उन्हें भी हॉस्पिटल ला रहे थे।  मामी और दीदी की डॉक्टर एक ही थी तो इसी हॉस्पिटल में उनकी भी डिलीवरी प्लांड थी।  मामा अकेले थे तो थोड़ा घबरा रहे थे। मैंने उनको तस्सल्ली दी की चिंता की कोई बात नहीं है।

मैंने दीदी को बताया तो दीदी खुश हो गईं।  सोनिया मामा मामी को ज्यादा जानती नहीं थी। पर वो खुश थी।  माँ का भी फ़ोन आया।  वो आने की जिद्द कर रही थी पर मैंने मना कर दिया।  मैंने कहा कि मैं संभाल लूंगा।

एक घंटे के अंदर मामी लेबर रूम में थी।  मामा और मैं बाहर इंतजार कर रहे थे।  सुबह तड़के मामी ने एक लड़की को जन्म दिया।  दो दिन के अंतर पर घर में खुशियां आई थी।  हम सब बहुत खुश थे। सुबह तक मामी भी उसी वार्ड के दुसरे कमरे में शिफ्ट हो गईं। मामा कि टेंशन दूर हो गई थी।  सुबह सुबह माँ , चाची और श्वेता भी हॉस्पिटल आ गए।  मामा माँ को देखते ही गले लग गए और बच्चों कि तरह रोने लगे।

बोले – दीदी , मैं बाप बन गया।  तुम बुआ बन गई।  घर में लक्मी आई है।

माँ के आँखों में भी ख़ुशी के आंसू थे।  मामा सच में बहुत सीधे साढ़े इंसान थे।  चाची और श्वेता भी उनके भोलेपन को देख कर मुश्कुरा रहे थे।  चाची तो ख़ास कर।

माँ ने मुझसे कहा – तू घर जा।  हम सब यहाँ संभाल लेंगे। रात भर जगा होगा।  उन्होंने मामा से भी घर जाने को कहा पर वो कहाँ मानने वाले थे। मैंने भी मना किया पर सब जिद्द में थे।

मैं बाहर जाने लगा तो माँ ने कहा – सोनिया को तो लेता जा।

मैं तो उसे भूल ही गया था।  वो मेरे साथ चल पड़ी।  अभी मैं जा ही रहा था कि श्वेता ने आवाज लगाई।  मैं रुका तो वो मेरे पास आकर कान में बोली – आज मत छोड़ना , अकेले रहोगे। फिर बस एक और।

मैंने उससे कहा – एक और की भी क्या जरूरत है।  छोडो ये शर्ते वर्तें चलो मेरे साथ घर।

श्वेता – तू बुद्धू है।  उसका चेहरा देख।  तेरी आशिक़ बनी है।

मैं – तू कैसी पागल है। 

श्वेता – हूँ तो हूँ।  तू आज मौका मत छोड़ना।

मैं सोनिया के साथ चल पड़ा।  कार में उसने धीरे से कहा – श्वेता क्या कह रही थी ?

मैं – कुछ ख़ास नहीं।  कह रही थी तुम्हारा ख्याल रखने को।  आज माँ नहीं हैं न।  हम तुम अकेले रहेंगे।

सोनिया – अच्छा।  मुझे पता है तुम कैसा ख्याल रखोगे।

मैं – जब पता है तो खुश हो जाओ।

सोनिया – नहीं जी , मुझे नहीं चाहिए ऐसा ख्याल व्याल।

मैं – मुझे तो चाहिए।

सोनिया – चाहिए तो श्वेता को ही बुला लेते।

मैं – ये सब उसी का किया धरा है।

ये सुन सोनिया के चेहरे पर उदासी आ गई।  उसे पता था मेरा और उसका भविष्य नहीं है।  वो दुखी भी थी और असमंजस में भी। मैंने उसके उदास चेहरे को देख कर कहा – देखो , उदास मत हो।  मैं कोई जबरदस्ती नहीं चाहता हूँ।  जरूरी नहीं तुम मेरे साथ सम्बन्ध बनाओ। मेरे लिए और भी रास्ते हैं।  हो सकता श्वेता ही अपनी जिद्द छोड़ दे।  मैं वैसे भी रह लूंगा। 

सोनिया कुछ नहीं बोली।  बाहर सड़क कि तरफ देख कर सोचती रही।

घर पहुँच कर मैंने उससे कहा – माँ के कमरे में फ्रेश हो लो तुम।  मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ। 

उसने कोई जवाब नहीं दिया।  वो माँ के कमरे में चली गई। मैं भी थोड़े निराश और दुखी मन से अपने कमरे में चला गया। मैं कपडे लेकर बाथरूम में घुस गया। बाथरूम से निकल कर मैंने कपडे चेंज किये और बिस्तर पर लेट गया।  रात भर जगे रहने के बाद से थका हुआ था तो एक झपकी सी आ गई।  मेरी नींद सोनिया के आवाज सी खुली।  उसने मुझे जगाया और कहा – नाश्ता कर लो फिर सो जाना।

मैं उठ कर ड्राइंग रूम में आ गया।  सोनिया ने एक शार्ट और व्हाइट टी शर्ट डाला हुआ था।  वो सीधे किचन में घुस गई।  बोली – माँ जी, नाश्ता और खाना बना कर गईं हैं।  मैं बस चाय बना लेती हूँ और फिर नाश्ता लेकर आती हूँ।

मुझे लगा जैसे वो एक नइ नवेली दुल्हन की तरह व्यवहार कर रही हो।  मुझे उसके प्यार पर बहुत प्यार आया और अपने ऊपर गुस्सा।  मुझे इस मासूम लड़की के दिल के साथ खेलने का बिलकुल भी मन नहीं था। मैं आँखें बंद करके सोफे पर अधलेटा ही दोबारा सो गया।

कुछ देर बाद सोनिया चाय और नाश्ता लेकर आई।  माँ हमारे लिए हलवा और पोहा बना कर गईं थी।

उसने मुझे आवाज दी – उठो चाय पी लो।

मैं आँख खोल कर बैठ गया।  उसे देख मैंने थैंक्स बोला और नाश्ता उठा लिया।  हम दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी थी।  मैं उससे नजरें नहीं मिला पा रहा था।  पर फिर भी मेरी नजर एक बार उस पर पड़ी , जैसे ही मैंने उसकी ओर देखा, उसने शर्मा कर अपने नजरे झुका लीं।  तभी मेरी नजर उसके सीने पर पड़ी।  वहां देखते ही मैं  आश्चर्य में थे।  उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी।  उसके माध्यम स्तनों के ऊपर सी उसके निप्पल एकदम नुकीले होकर तने हुए अवस्था में थे। जैसे टी शर्ट में छेड़ करके बाहर आ जायेंगे। शायद वो खुद भी उत्तेजित थी।

कुछ देर में उसने अपने नजरें उठाई तो उसने मुझे उसके स्तनों को घूरते हुए पाया तो तुरंत उठ गई और सोफे के पास रखा दुपट्टा उठा लिया।

मैंने कहा – रहने दो न।  इतना बढ़िया नजारा है।

वो शर्माते हुए बोली – तुम बहुत बुरे हो।

मैं – मेरे पास तो बुर है ही नहीं।  मैं कैसे बुरा हो सकता हूँ।

सोनिया – छी।

मैं – अच्छा , वो हॉस्पिटल में चिपक कर सोने में छी नहीं था।  अपनी पेंट के ऊपर मेरा माल लिया तो छी नहीं था।

सोनिया – चुप रहो।  अच्छा रहता सोने देती।

मैं – हाँ , और पास आकर सो जाती।

तभी श्वेता का फ़ोन आ गया।  वो बेचैन थी।  मैंने फ़ोन स्पीकर पर ले लिया।

श्वेता – हाँ हीरो , क्या चल रहा है।

मैं – कुछ नहीं, चाय , नाश्ता।

श्वेता – अबे साले।  पूरा खाना सजा पड़ा है तेरे सामने और तू चाय नाश्ता कर रहा है।

मैंने संजय कि तरफ देखा और कहा – तू गलत समझ रही है।  मैं शरीफ आदमी हूँ।  एक अबला के साथ कैसे जबरदस्ती कर सकता हूँ।

सोनिया मुश्कुरा उठी।  धीरे सी बोली – शरीफ  आदमी।

उधर सी श्वेता भी बोल पड़ी – शरीफ आदमी।  बहनचोद , मेरी टीचर की ले ली , उसकी बेटी चोद दी।  तेरा बेटा यहाँ अपनी नानी /दादी के गॉड में खेल रहा है और तू शरीफ बना हुआ है।

ये सब सुन सोनिया हंस पड़ी। 

श्वेता को उसकी हंसी सुनाई पड़ी।  श्वेता – सोनिया भी तेरे साथ ही है क्या ? तूने फ़ोन स्पीकर पर रखा हुआ है ?

अब सोनिया बोल पड़ी – श्वेता ये शरीफ तो बिलकुल नहीं है।  अभी मेरे छाती को घूर रहा था और कह रहा है अबला को परेशान नहीं करेगा।

श्वेता चौंक कर बोली – छाती को ? तू टॉपलेस है क्या ? बिस्तर पर हो तुम दोनों।

सोनिया – तुम सब भाई बहन एक जैसे ही हो।  हर दम दिमाग में यही चलता है।  तुम्हे इतनी ही चिंता है तो फालतू की शर्त क्यों लगाई ? खुडी ही चुद जाओ।  मुझे क्यों बीच में ला रही हो ?

श्वेता – नाटक ना कर अबला रानी।  मुझे सुधा दी से सब पता चल चूका है।  बिना ब्रा के टॉपलेस घूम रही है और शराफत दिखा रही है। तुझे ही चांस दे रही हूँ।  लेना है तो ले ले वार्ना और भी मिलेंगी।

सोनिया – बड़ी कमीनी हो तुम।

श्वेता – हूँ तो हूँ।  सुन राज , रहने दे।  इस अबला के साथ कुछ मत कर। बड़ी आई। फ़ोन रखती हूँ।

मुझे नहीं पता था ये दोनों लड़ पड़ेंगी।  मैं चुप चाप थ।  सोनिया भी चुप चाप नाश्ता करने लगी। 

मैं – सॉरी यार।  मुझे नहीं पता था वो इतना कुछ बोल पड़ेगी।

श्वेता का नाश्ता हो चूका था।  वो बिना बोले किचन की तरफ चल पड़ी। मन सोचने लगा कहाँ आज शायद आज काम हो जाता पर श्वेता ने अपनी बेचैनी में काम बिगाड़ दिया। सोनिया वापस माँ के कमरे में चली गई। मैं भी फटाफट से चाय नाश्ता ख़त्म कर किचन में प्लेट रखने के बाद अपने कमरे में जाने लगा ।

तभी सोनिया की आवाज आई – राज।

मैं माँ के कमरे में चल पड़ा।  देखा तो वो चादर ओढ़े लेटी हुई थी।  उसने कहा – मुझे अकेले नींद नहीं आती।  बचपन सी माँ के पास सोइ हूँ।  भाभी के आने के बाद भाभी के साथ सोती थी।

मैं – और जब दीदी यहाँ थी तो।

वो नजरे झुका कर बोली – माँ के साथ।

मैं – तुम तो मियां बीवी को अलग करने वाली हो।  पति पत्नी कैसे सेक्स कर पाएंगे जब तुम उनके बीच में होगी।

सोनिया – चुप रहो , आना है तो आओ वार्ना जाओ अपने कमरे में।

मैं – अब इतने प्यार से बुला रही हो तो आना ही पड़ेगा। पर ये चादर क्यों ओढ़ रखा है।

सोनिया – तुम सवाल बहुत करते हो।

मैं – मुझे तो गरमी लग रही है, वैसे भी मैं लगभग नंगा ही सोता हूँ।  तुम्हे दिक्कत न हो।

वो कुछ नहीं बोली।  मैंने भी सोचा थोड़ा टेस्ट किया जाए।  मैंने अपना बनियान उतार दिया। वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती रही।

मैं फिर बिस्तर पर उसके पास जाकर लेट गया।  मैं जैसे ही लेटा वो चादर लपेटे हुए ही मेरे पास आकर मुझसे लिपट गई।

उसके लिपटते ही मुझे एक झटका सा लगा।  उसने शायद नीचे कुछ नहीं पहना था।  मैंने उसे थोड़ा आपने पास खिंचा तो उसने मुझे किस कर लिया और बोली – आई लव यू।  मुझे दर्द तो नहीं दोगे न।

मैंने भी उसे किस कर लिया और कहा – नहीं।  सब प्यार से करूँगा।

उसने मुझे चादर के अंदर कर लिया।  अब हम दोनों एक दुसरे सी लिपटने और चिपटने लगे।  मैं लगातार उसे किस कर रहा था और वो भी। कुछ देर बाद उसने मेरा चेहरा नीचे किया और कहा – ये पीयो न।  जैसे भाभी के पी रहे थे।

मैंने उसके एक स्तन को  पकड़ लिया और झुक कर दुसरे को मुँह में ले लिया।  उसने जोर सी सिसकारी ली – आह।  आराम सी।  इसमें से दूध नहीं आएगा।

मैं उसके नरम मुलायम माध्यम अकार के स्तनों के साथ खेलने लगा।  ऐसा करते करते मैं उसके ऊपर हो गया।  उसने नीचे सिर्फ एक पैंटी पहनी हुई थी।  मैंने भी जल्दी से अपना लोअर निकाल दिया।  मैं नॉर्मली घर में अंडरवियर नहीं पहनता था।  मेरा लंड बाहर आते ही उसके चूत से टकराया, उसे लगा मैं अब उसे चोदूँगा तो उसने कहा – भाभी कहती हैं, चटवाने में बहुत मजा आता है।  पहले मेरे नीचे मुझे प्यार करो न।

मैं – तुम्हारी भाभी सिर्फ कहती हैं या करती भी है ?

सोनिया – काफी दिन हुए।  वो तो मेरे साथ सिक्सटी नाइन में ही रहत्ती थी।

मैं – सौ चूहे खा चुकी बिल्ली हो तुम।

मैं फिर निचे खिसक उसके पैरों के पास आ गया।  मेरे खिसकने तक वो पैंटी उतार चुकी थी।  मैंने उसके चूत को चाटना चूरू कर दिया।  मेरे जीभ लगाते ही वो बोली – आह , तुम सब भाई बहन एकदम एक्सपर्ट हो।  येस, ऐसे ही चाटो।  मैंने बहुत मिस किया चूत चटाई को।

मैं उसके कुंवारे चूत को चाटने लगा।  कुछ ही देर में वो धराशाही हो गई।  मुझे उसके इतने जल्दी आने की उम्मीद नहीं थी।  उसके चूत का नमकीन पानी मैं पूरा का पूरा चाट गया।

वो बोली – बस , मेरा तो हो गया।

मैं – अब मेरे साथ केएलपीडी ना करो। 

वो हंसने लगी।  बोली – ये क्या होता है ?

मैंने अपना लंड उसके चूत पर सेट कर दिया और कहा – पेल कर बताऊँ ?

वो इतनी भोली तो नहीं थी पर शायद उसे मेरे लंड के साइज का अंदाजा नहीं था।  वो होने वाले दर्द सी बेखबर थी। 

उसने कहा –  ठीक है।  पर आराम से।

मैंने फिर धीरे सी अपना लंड उसके चूत में डालना शुरू कर दिया। जैसे ही मेरा लंड थोड़ा अंदर गया तब उसे  लगा की उससे गलती हो गई है।  उसने कहा – ओहहहहह , ये क्या।  आह।  निकालो मुझे दर्द हो रहा है।

मैंने कहा – बस थोड़ा दर्द सह लो फिर मजा आएगा।

सोनिया – सच में।  कितना अंदर और जाएगा।

मुझे झूठ बोलना पड़ा – बस , थोड़ा और।

उसने कहा – आह ठीक है।  फिर निकाल लेना प्लीज

मैंने अबकी थोड़ा और अंदर डाला फिर थोड़ा बाहर निकाल लिया।  वो दर्द सी अपने होठ दबा रही थी।  मैंने सोचा अब रुका तो मैं उसे पेल नहीं पाउँगा।  मैंने फिर दुबारा थोड़ा अंदर किया और फिर बाहर निकाल लिया।  कुछ देर ऐसे पंप करने के बाद उसे अच्छा लगने लगा।  पर मेरा लंड पूरा नहीं गया था।  अब मजे में उसने अपने पैरमेरे कमर पर लपेट लिया था और मेरा साथ देने लगी थी।

सोनिया – हुह , आह आह , हाँ मजा आ रहा है।  थोड़ा तेज करो न।  और तेज , थोड़ा अंदर।

अब मुझे लगा वो तैयार है।  वो पुरे मस्ती में आ चुकी थी।  मैंने ऐसे ही झटके देते देते अपने लंड को और अंदर डालना शुरू कर दिया।  कुछ देर बाद जैसे ही पूरा लंड एकदम अंदर तक गया। उसकी चीख निकल गई – माआआआ  फट गई मेरी चूत।  भाभी बचाओ।  राज बस करो।

मैंने कहा – रानी, बस और।  कुछ देर और।

वो थोड़ी देर चिल्लाई पर फिर चुदाई के मस्ती में आ गई।  अब मैं पुरे रफ़्तार सी उसे चोद रहा था।  उसकी चूत ने कई बार पानी छोड़ दिया था।  और वो निढाल हो चुकी थी। कुछ देर बाद मैं भी स्खलित हो गया।  मैं भी थक कर उसके बगल में लेट गया। कुछ देर बाद मुझे होश आया तो देखा वो निस्चल पड़ी थी।  मैं घबरा गया।  सच में उसे कुछ हो तो नहीं गया।  मेरे लंड का वार अच्छे अच्छे नहीं झील पाए थे। मैंने चादर हटा दिया और देखा तो वो तेज तेज साँसे ले रही थी और उसकी आँखे बंद थी।  कमर के पास हल्का लाल खून भी था।  एक कुँवारी चूड़ी थी पर मेरा मन घबरा रहा था।  मैंने उसे कंधे सी पकड़ा और झकझोरते हुए कहा – सोनिया , क्या हुआ ? तुम ठीक तो हो ?

सोनिया ने आँखे खोली और धीरे से कहा – बड़े फट्टू हो यार।  मैं ठीक हूँ।  ठंढा पानी दो।

मैं भाग कर किचन में गया और एक ग्लास ठंढा पानी लेकर आया।  जैसे ही उसने उठने की कोशिश की उसे जोर का दर्द हुआ।  मैंने उसे सहारा दिया और फिर पानी पिलाया।

पानी पीकर वो बोली – बधाई हो। 

मेरे आँखों में आंसू आ गए।  मैंने उसे गले लगा लिया।  अब मेरे मुँह सी निकल पड़ा – आई लव यू।

उसने कहा – सच में ? श्वेता का क्या होगा ?

मैंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा – तुम दोनों ने मुझे कंफ्यूज कर दिया है।

सोनिया बोली – नहीं।  तुम सिर्फ उसके हो।  वैसे मुझे जब चाहो चोद सकते हो।  मुझे लगता है इससे उसे कोई परेशानी नहीं होगी।

मैंने हँसते हुए कहा – पहले अपनी हालत देखो। 

सोनिया – मुझे इसका अंदाजा था।  टेंशन मत लो मैं ठीक हूँ।  चलो अब सोते हैं।

मैंने फिर चादर बदली और सोनिया के कमर की थोड़ी मालिश की फिर हम दोनों बाँहों में बहन डाले लेट गए। कहने को तो मैंने एक कुँवारी की चूत ली थी।  शुरुवात वासना सी थी पर उसका प्यार और त्याग देख कर वासना सी ज्यादा प्यार हो आया था।  मैं उसके पुरे शरीर को सहलाता रहा और वो मेरी बाँहों में थक कर सो गई।  कुछ देर बाद मैं भी सो गया।

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