मैंने अब पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर मुँह रख दिया। उनकी चूत से क्या खुशबु आ रही थी। मैंने जैसे ही अपना जीभ उनके चूत पर फिराया, दीदी के कमर ने एक जोरदार झटका दिया और उन्होंने मेरा सर अपने हाथ के बल से अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। मेरे मुँह लगाते ही उनकी चूत धराशाही हो चुकी थी। दीदी के शरीर में कम्पन हो रहा था और वो धीरे धीरे स्खलित हो रही थी। मैंने उनकी पैंटी उतार दी और उनकी चूत से निकलते पानी को पूरा चाट लिया।
कुछ पल बाद जब दीदी को होश आया तो उनके चेहरे पर अजब सी संतुष्टि थी। उनकी नजरे जैसे मुझसे मिली शर्मा गई। वो प्यार से मेरी तरफ झुंकी और मुझे होठो पर चूम लिया। मैं उठकर ऊपर पलंग पर उनके बगल में लेट गया। उन्होंने अपना सर मेरे सीने पर रख दिया।
दीदी बोली – ऐसा मजा पहली बार आया है।
मैं – मैं तुम्हे ऐसा मजा कई बार दूंगा। जब जब कहोगी तब तब दूंगा। पति बना लिया है तुमने न।
दीदी – पर तुम तो दीदी दीदी किये जा रहे हो।
मैं – सच कहूँ तो जो मजा बहन चोदने में है , बीवी में कहाँ।
दीदी – पर मजा तो कुंवारी चूत में है। लड़के तो कुँवारी चूत की तरफ भागते हैं।
मैं – मुझे तो कुंवारी मिली नहीं। पर जो मिली मलाईदार , रसीली ही मिली। कुँवारी चूत और आम संतरे में क्या मजा। नशा तो भरे भरे मुम्मे और रसभरी चूत में ही है।
दीदी – चिंता मत कर तेरे लिए जब कुंवारियों की लाइन लगेगी तो गिनती भूल जायेंगे लोग। दीदी ने पैजामे के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और उसे मुठियाने लगी। बोली – बड़ा लम्बा तगड़ा है रे।
मैं – उसे फ्री तो करो। जरा प्यार करो और देखो फिर उसका बड़ा रूप
दीदी ने पैजामे के अंदर हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया। मैंने अपना पैजामा और अंडरवियर निकल दिया। अब मैं पूरी तरह से नंगा था। दीदी बैठ गई थी। उन्होंने मेरे लंड के टोपे को चूम लिया। दीदी बोली – माँ ने बताया था कि तेरा लंड खानदान में सबसे बड़ा है पर इतना बड़ा होगा मैंने नहीं सोचा था।
उनके चूमते ही मेरा लंड सलामी देने लगा । अब दीदी ने मेरे लंड को चूसने लगी। मैं दीदी के मुँह में नहीं आना चाहता था। मुझे उनकी चूत चाहिए थी। मैंने कहा – दीदी उसे अब असली जगह दिखाओ न।
दीदी ने कहा – बहुत बड़ा है रे।
मैं – दीदी तुम्हारी मक्खन सी चूत में बड़े आराम से समां जायेगा। कोशिश तो करो।
दीदी ने अब भी लहंगा पहना हुआ था। उनकी पैंटी तो पहले ही उतर चुकी थी। उन्होंने अपने पैर मेरे पैरो के दोनों तरफ किया और मेरी तरफ मुँह करके मेरे लंड पर बैठ गई। वो भी एक्सपर्ट थी , उन्होंने डायरेक्ट मेरे लंड को चूत में नहीं लिया बल्कि मेरे लंड को अपने चूत के दोनों लिप्स के बीच में सेट कर लिया और धीरे धीरे अपनी कमर आगे पीछे करने लगीं। मुझे इसमें भी मजा आ रहा था। दीदी मेरे मोटे से लंड का मजा अपनी चूत और क्लीट दोनों पर ले रही थी। मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उनके मुम्मे पकड़ लिए। क्या ही नजारा था। दीदी सिर्फ टॉपलेस थी पर मुझे ऊपर नीचे दोनों का पूरा मजा मिल रहा था।
मुझे लगा दीदी ऐसे ही रगड़ कर मेरा पानी न निकाल दे। मैंने उनसे कहा – दीदी कब तक दरवाजे पर रोके रखोगी। घर से इतनी दूर गोवा तक यात्रा करके बेचारा आया है और तुम उसे दरवाजे पर ही टहला रही हो।
दीदी – अस्स्स्ससससससस , आह। थोड़ा इन्तजार कर भाई , जगह बना रही हूँ। उसे पूरी जगह साफ़ न मिली तो मेरा घर तहस नहस कर देगा। कुछ पल और रुकजा
दीदी अपनी चूत के पूरी तरह पनीआने का इंतजार कर रही थी। कुछ पल बाद मेरा इंतजार ख़त्म हुआ। दीदी ने अपने कमर को उठाया और धीरे धीरे मेरे लंड को चूत में डालना शुरू किया। सच में दीदी की चूत कुँवारी ही थी। जीजा के लंड ने कुछ भी नहीं किया था। ‘
दीदी – हाय रे अम्मा , ये तो फाड़ देगा।
दीदी ने पूरा लंड नहीं लिया बल्कि थोड़े में ही ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी जबरदसतो नहीं करना चाहता था।
कुछ देर के बाद दीदी को मजा आने लगा। उनकी सिसकियाँ तेज हो गई। उनके दोनों आँख मस्ती में बंद हो गए थे। मैंने सोचा यही सही मौका है। दीदी की मर जब ऊपर से नीचे आ रही थी , तभी मैंने जोर लगा कर अपनी कमर पर ऊपर की ओर झटका दिया। मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर एक ही झटके में घुस गया। दीदी ने एक जोर की चीख निकाली – मार डाला रे। फाड़ दी तूने मेरी चूत।
मैंने दीदी को अपने तरफ खींचा और उनके मुँह पर अपना हाथ रख दिया। दीदी गुं गुं कर रही थी। थोड़ी देर मैं स्थिर ही रहा। मुझे लग रहा था जैसे मैंने एक जलती भट्टी में अपना लंड डाल दिया हो। कुछ देर बाद जब मुझे लगा कि दीदी का दर्द कुछ काम हुआ तो मैंने अपना हाथ उनके मुँह से हटा दिया।
दीदी ने चटाक से एक चांटा मेरे गाल पर मारा और कहा – भोसड़ी के , मादरचोद मैं ले रही थी न तेरे लंड को अंदर। इतना बावला क्यों हुआ जा रहा है। हाय रे , कितना दर्द हो रहा है। साला आदमी का लंड है या हाथी का। आह , मैया बचाओ मुझे।
दीदी के चांटे से मुझे ही नहीं मेरे लंड को भी सांप सूंघ गया। उसे सिकुड़ता देख , दीदी ने कहा – बहनचोद , अब अंदर गया है तो निकालियो मत। पेलने के लिए अंदर गया है , पेल के निकलना। अब चूत फटती है तो फैट जाये।
दीदी अब झुक कर मुझे किस कर लेती हैं और अपनी कमर भी हिलाने लगती है ।
दीदी ने प्यार से मुझे कहा – भाई नाराज हो गया क्या ? सॉरी मैंने तुझे मारा पर तेरे जीजा का लंड कुछ भी नहीं इसके सामने। मेरी चूत वास्तव में कुँवारी है। मैं भाग थोड़े ही रही थी। पेलना ही था तो प्यार से करता। देख अब मेर चूत तेरे लंड के लिए जगह बना रही है।
मैं मजे में तो था पर दर्द मुझे भी हो रहा थ।
मैंने दीदी से कहा – जीजा की तो गांड मार लूंगा। काम से काम कुछ तो चौड़ी की होती तुम्हारी चूत। इतनी टाइट तो सरला दी की भी नहीं है। खैर मैं मैं तुमको इतना पेलुँगा कि फ़ैल तो जाएगी ही।
दीदी को अब मजा आने लगा था। उन्होंने मेरे ऊपर तेजी से उछलना शुरू कर दिया था। थोड़ी देर में ही वो मस्ती में आ गई। उनकी चूत अब पूरी तरह से पनिया चुकी थी। मुझे भी मजा आ रहा था।
दीदी – आह , राज बच्चा , क्या मजा आ रहा है। लग रहा है मैं जन्नत में हूँ। चोद मुझे और जोर से चोद , फाड़ दे मेरी चूत। आह , माँ क्या बेटा पैदा किया है। कुछ ही देर उछलने के बाद दीदी की चूत फिर से धराशाही हो गई। वो मेरे ऊपर गिर पड़ी। पर मेरा तो हुआ ही नहीं था।
मैंने दीदी से कहा – तुम तो झड़ गई , मेरे लंड का क्या होगा।
दीदी ने कहा – मेरी चूत सच में फट जाएगी। रुक मैं मुँह में ले लेती हूँ।
मैंने कहा – तुम्हे बच्चा भी तो चाहिए।
दीदी – पहले मजे ले लें। बच्चा तो कर ही लेंगे।
मैं फिर बेड पर ही खड़ा हो गया। दीदी घुटनो के बल आ गई और मेरे लंड को अपने मुम्मे के बीच में फंसा लिया और दोनों हाथो से मुम्मे दबा लिए। बोली – पेल दे मेरे मुम्मे।
दीदी के सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स में फंसा मेरा लंड मस्ती में आ गय। मैं अब कमर हिलाकर उनके मुम्मो को चोदने लगा। थोड़ी देर में ही मुझे लगा की मेरा पानी निकल जायेगा। जैसे ही मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू किया , दीदी ने मेरा लंड मुँह में ले लिया। अब मेरा लंड उनके मुँह में झटके दे रहा था। थोड़ी ही देर में मेरा खूब सारा पानी निकल गया। दीदी ने उसे पूरा घोंटने की कोशिश की पर बहुत सारा माल था। दीदी ने कुछ पिया कुछ टॉवल पर उगल दिया। इतना माल देख दीदी बोली – कितना माल छोड़ता है तू। इतने में तो मामी और सरला को भी तू प्रेग्नेंट कर सकता है। कहे तो बुला दूँ।
मैं हंस पड़ा। कहा – बुला लो , वैसे भी आज नहीं तो कल चुदना ही है।
दीदी को अब शुशु आई थी। वो जैसे ही उठी गिर पड़ी। बिस्तर पर देखा तो खून बहा पड़ा था। मैंने झट से साड़ी लाइट जलाई। मैं डर गया कहीं सच में तो उनकी चूत नहीं फट गई। उन्होंने अपना लहंगा उतार दिया। उनकी जांघो पर भी हल्का फुल्का खून था। पर दीदी की चूत फटी नहीं थी। कोई घाव नहीं था। वो तो उनकी सील टूटी थी। वो वाकई में कुँवारी थी। लगता है जीजा का लंड ाकभी अंदर ठीक से गया ही नहीं , बाहर ही सर्रेंडर कर देता होगा।
दीदी से चला नहीं जा रहा था तो मैंने उन्हें गोद में उठा लिया। बाथरूम में उन्हें पॉट पर बिठा दिया। मैं वहीँ खड़ा था।
दीदी ने कहा – जा मैं आ जाउंगी।
मैंने कहा – चूत चटवा भी ली , कूद कूद कर फड़वा भी ली और अब शर्मा रही हो। पति से क्या शर्माना।
दीदी – धत्त कुछ भी कहता है। उनकी इस अदा पर मुझे इतना प्यार आया की मैंने उनके माथे को चूम लिया।
बाथरूम काफी बड़ा था और उसमे एक बाथटब भी था। मैंने उसमे हल्का गरम पानी स्टार्ट कर दिया। मैंने दीदी से कहा – थोड़ी देर बाथटब में बैठोगी तो आराम मिलेगा।
दीदी – कितना ख्याल रखता है मेरा। सच का तो पति नहीं बन बैठा। मेरी सोनिया का क्या होगा।
मैं बाथटब के किनारे बैठ गया। मैंने कहा – उसे तो बस तुम्हारी शादी में देखा था। छोटी सी थी। शादी का तो पता नहीं पर उसकी चूत जरूर मरूंगा।
दीदी – देख कोई जबरदस्ती नहीं है। पर पुरे ससुराल में वही बच्ची मुझे पसंद है वार्ना सब गांडू हैं। उसकी वजह से ही तो मेरा मन लग लग गया।
मैं – तुम्हारा मन या चूत का मन
दीदी – दोनों का। मस्त चाटती है। एकदम मेरी माफिक है। चूत चाटते ही नशा चढ़ जाता है उस। जब तक मेरा दो तीन बार पानी नहीं निकाल देती, मेरी कमर नहीं छोड़ती।
दीदी अब उठकर टब में बैठ गई थी। मुझे भी शुशु आई थी तो अब मैंने करना शुरू किया। साथ ही पुछा – ये सब शुरू कैसे हुआ ? तुम्हारी सास ससुर को बुरा नहीं लगा।
मैं अब टब के किनारे बैठ कर गरम पानी से दीदी के कंधे की मालिश करने लगा था।
दीदी – सब आज ही जानेगा क्या ? और बात ही करेगा तो काम कब करेगा। आजा तू भी बैठ अंदर।
अब मैं भी बाथटब में था। मैंने टब में ही साबुन का फोम बनाया और दीदी शरीर की मालिश करने लगा। हम दोनों आमने सामने बैठे थे। हमारे पैर एक दुसरे से सटे हुए थे। मैं कभी दीदी के मुम्मे की मालिश करता और कभी जांघो तक उनके पैरो की। दीदी भी मेरी छाती और कंधे सहला रही थी। मैं फिर उनके नजदीक गया और उनके जांघो की धीरे धीरे मालिश करने लगा। दीदी को अच्छा लग रहा था। एक तो गरम पानी उस पर से मालिश। पर टब में ऐसी मालिश से मेरे लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैं थोड़ा आगे झुक कर दीदी के जांघो के बीच चूत के आस पास की जगह भी सहलाने लग। दीदी को भी अब मजा आने लगा था। दीदी अब आगे झुक गईं और मेरे कंधे पर सर रख दी हम दोनों बाथटब में चिपक कर आमने सामने बैठे थे। दीदी का सर मेरे कंधे पर था। मेरा एक हाथ उनकी चूत को सहला रहा था और दूसरा उनके पीठ पर था। दीदी ने भी हाथ बीच में डालकर मेरे लंड को पकड़ लिया।
वो एकदम नशीली आवाज में बोली – क्या भाई , तूने तो इसे फिर से खड़ा कर दिया। अभी तो सील फाड़ी है। चूत भी फाड़ोगे क्या ?
मैं उनकी चूत सहलाते हुए बोला – कोई जल्दी नहीं है , जब तुम्हारी चूत बोलेगी तभी डालूंगा।
दीदी – ऐसे प्यार करेगा तो वो मना करेगी क्या ? वैसे उसे मनाने के लिए उसके दरबान से भी सिफारिश कर सकता है।
मैंने अब अपने अंगूठे से उनके क्लीट को मसलना शुरू कर दिया।
दीदी – आह , कहा से सीखा तूने ये सब। पक्का माँ ने सिखाया होगा। हम सबकी गुरु वही है।
मैं – हाँ , उनसे बढ़िया कौन है। अब इजाजत दो तो चूत महारानी की थोड़ी और सेवा करु।
दीदी – अब तो तुम्हारे हवाले है।
मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उनके चूत में घुसाई और बाकी दो उंगलियों से उनके चूत के लबों को दबाया और अंगूठे से उनके क्लीट को। अब मैं अपने हाथो से उनके पुरे चूत को मजा दे रहा था। दीदी ने पूरी तरह सरेंडर कर दिया था। अब दीदी से रहा नहीं गया। उन्होंने मेरे हाथ को रोक दिया और पलट कर बाथटब के किनारे पर हाथ रख कर कुतिया सी बन गई। उन्होंने अपना हाथ पीछे किया और मेरे लैंड को पकड़ कर बोला – कहा था तुमसे कि तुम्हारी हरकतों से मेरी चूत फिर से तैयार हो जाएगी। अब उसे लौड़ा चाहिए। चोद दो मेरी चूत को। फटती है तो फट जाये।
मैंने पहली बार दीदी के बड़े बड़े चूतड़ों को गौर से देखा। ऐसा लग रहा था जैसे दो घडो पर सफ़ेद मक्खन लगा कर चिकना कर दिया गया हो। मैंने दीदी के हिप्स पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मैंने उनके चुड़तों को थोड़ा सा फैलाया तो मुझे उनकी गांड कि छेद दिखाई दी। गुलाबी , गुलाबी गोल गोल। मैंने तुरंत उस पर मुँह लगा दिया। दीदी के तन बदन में आग लग गई।
उन्होंने कहा – ऐसे तो मुझे बिना चोदे ही फिर से झड़ा देगा। गांड भी तुम्हारी है , बाद में देख लेना , अभी तो बस चोद डालो मुझे।
मैंने कहा – तुम्हारी गांड देखने वाली तो है पर मारने वाली ज्यादा है।
दीदी – खबरदार तो गांड मारने कि भी सोचा। अभी मेरी चूत तो ले नहीं पा रही गांड क्या लेगी। चल चोद मुझे अब मत तड़पा।
दीदी एकदम छुडासी हो राखी थी।
मैंने कहा – अब रहम कि आशा मत करना फाड़ दू तो रोना मत।
दीदी – साले , बहनचोद , कह रही हूँ तो डाल। बकचोदी ही करेगा या चूतचोदी भी। न्योता देना पड़ेगा क्या ?
मैं – गांड ने तो न्योता दे ही दिया है। उसकी बाद में देखूंगा।
मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत पर लगाया और कहा – डाल दू ?
दीदी – भोसड़ी के , बकलन्ड अब पलेगा कि पड़ोस के कमरे से मामा बेटीचोद को बुला लू
मैंने एक झटके में ही अपना लंड उनकी चूत में थोक दिया और कहा – मामा क्या लेंगे , अभी तो मामी कि मैं खुद लूंगा।
दीदी – आह , फाड़ दिया न। साले मामी के नाम पर मत चोद। तेरी बहन कुतिया बनी है उसे चोद। अबकी रुकना मत
मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने एक तरफ दीदी के गांड पर थप्पड़ लगाने शुरू किये और दूसरी तरफ लंड से उनकी मस्त चूत खंगालने लगा।
दीदी – आय रे माँ। देख तेरा बेटा तेरी बिटिया चोद रहा है। कितना बड़ा लंड दिया है तुमने। मेरी चूत रो रही है। कहाँ फसा दिया। आह आह
दीदी बाथरूम में चीख रही थी।
मैंने कहा – साली रंडी चीखना बंद कर वरना तेरा मरद आ जायेगा कहेगा कि मेरी बीवी कि जान क्यों ले रहे हो।
दीदी – साले बहनचोद , रंडी तो उसी ने बनाया है। बहन के लौड़े में दम होता तो तुझसे बच्चा मांगती मैं। भडवा है। उसे कुछ न हो पायेगा। चोद देना उसके आने पर भी।
मैं – उसकी तो मैं बहन भी छोडूंगा और माँ भी। सालों ने मेरी बहन को बहुत दुःख दिया है।
दीदी – सही कह रहे हो भाई। असली सुख तो तुम्ही दे रहे हो। बस मेरी चूत के आंसू नहीं रुक रहे। पेलते रहो।
मैं भी बस उबाल पर था। मैं स्खलित होने ही वाला था तभी दीदी ने जोरदार चीख मारी – मैया रे , मैं तो गई। भाई के लंड ने तो जन्नत दे दी।
उसी के साथ दीदी का पूरा शरीर कांपने लगा। उनके पैर थरथरा रहे थे। वो अपने चरम पर पहुँच चूँकि थी।
उनकी ये हालत देख मेरे लंड ने भी अपना पूरा पानी उड़ेल दिया। दीदी ने मुझे पीछे धकेला और मेरे लंड पर बैठ गई। बोली – पूरा माल अंदर जाना चाहिए। मैं इसे अंदर तक महसूस करना चाहती हूँ।
मैंने भी पूरा लंड दीदी के चूत कि बच्चेदानी तक डाल दिया और दीदी को जोर से पकड़ लिया। मेरे लंड के झरने से दीदी कि चूत भर गई थी।
हम दोनों जोरदार तरीके से स्खलित हुए थे।
मैंने भी पूरा लंड दीदी के चूत कि बच्चेदानी तक डाल दिया और दीदी को जोर से पकड़ लिया। मेरे लंड के झरने से दीदी कि चूत भर गई थी।
हम दोनों जोरदार तरीके से स्खलित हुए थे।
उसके बाद हम दोनों ने ठीक से नहाया । मैंने टॉवल से दीदी को पोछा और दीदी ने मुझे। वापस आकर हम दोनों एक दुसरे के बाँहों में इस कदर सोये जैसे वर्षो बाद मिले दो प्रेमी एक दुसरे में खोये हुए हों। रात की जोरदार चुदाई के बाद हम काफी देर तक सोते रहे। लगभग दोपहर में मेरी नींद दरवाजे के पीटने से खुली। मैंने समय देखा तो दोपहर का १२ बज चुके थे। दीदी अब भी बेसुध सोइ थी। मैंने दरवाजे पर देखा तो सरला दी और मामी आई हुई थी। उनको देख कर मैंने दरवाजा खोल दिया। दोनों ने कमरे की हालत देखी तो समझ गई कि रात घमासान हुआ था।
मामी बोली – कल रात लगता है जबरदस्त कब्बड्डी हुई है।
मैं – हम सब यहाँ आये ही इसी लिए हैं। आपकी नहीं हुई तो आ जाओ हमारी टीम में। सब संभाल लूंगा।
मामी – बहने क्या छोड़ ली बाबू साहब कि जुबान लम्बी हो गई है।
मैं – जुबान ही नहीं कुछ और भी लम्बा है। बोलिये चाहिए तो।
मामी – हीहीहीहीहीहीहीही
मैं जाकर बगल वाले कमरे में चला गया , जहाँ जीजू रात में थे।
सरला दीदी तब तक जाकर सुधा दी को जगा दी। उन दोनों को देख कर सुधा दी थोड़ा शर्मा गई। चादर के नीचे वो नंगी ही थी। उन्होंने सरला दी से कपडे कपडे मांगे। सरला दी ने उनके ब्रीफकेस से एक नाईटी निकाल कर दे दी। अब सरला दी ने सुधा दी को छेड़ना शुरू किया – क्या दीदी , मजा आया।
सुधा दी – मत पूछ मजा था या सजा। तूने इतना बड़ा अंदर लिया कैसे था। इसने तो कल रात मेरी छूट फाड़ दी।
मामी – हायं, क्या लल्ला कि इतना बड़ा है।
सुधा दी – अंदर जायेगा मामी तब पता चलेगा। हमारे पतियों का तो कुछ भी नहीं इसके सामने।
सुधा दी – सिर्फ लंबा या बड़ा ही नहीं , इसको तो प्यार के इतने तरीके आते हैंमत पूछो। दो बार तो सिर्फ जीभ से ही चूत बहा दी इसने।
सरला दी – आखिर माँ ने ट्रैन किया है इसको। एक बार जो इसके नीचे आ जाता है वो लालायित रहता है। बढ़िया है इसका , तुम्हारा बच्चा अच्छा होगा।
मामी हँसते हुए – हम भी इसी से ही प्लान कर लें क्या ?
सरला दी – क्या मामी , पहला है अपने पति से करने आई हो। बाद के लिए तो ये है ही।
मामी – सही कह रही हो।
सुधा दी – आपने तो गांड मरवाई हुई है। गांड का ये भी शौक़ीन है । कल तो लगा गांड भी फाड़ देगा पर मेरी मर्जी के बगैर कुछ भी नहीं किया। मामी आप डबलिंग कर लो , चूत में मामा, पिछवाड़े में भांजा। हीहीहीहीहीहीही
मामी – आईडिया तो सही है। देखते हूँ मौका मिले और आपके मामा मान जाएँ तो।
सुधा दी -अरे बकचोदी और चूत चुदाई होती रहेगी। गोवा आये हैं तो कहीं घूमने भी जाना है। दीदी तुम जल्दी से तैयार हो जाओ। अरे राज कहा गया। बोलो जल्दी से तैयार हो जाये। कहीं घूम कर आते हैं।
सुधा दी – मेरी चलने वाली हालत तो नहीं है।
मामी – कोई नहीं आपका आशिक गोद में ले चलेगा।
सरला दी फिर मेरे कमरे में आई। उन्होंने मुझे भी तैयार होने को कहा।
फिर हम सब जल्दी से तैयार हुए और वहीँ होटल में लंच किया और घूमने के लिए एक गाडी में सब जन निकल पड़े।
पिछली रात कि चुदाई कि वजह से सब थके हुए से थे , तो हमने आस पास के शॉपिंग एरिया और बीच के किनारे ही घुमते रहे।
फिर हम सब जल्दी से तैयार हुए और वहीँ होटल में लंच किया और घूमने के लिए एक गाडी में सब जन निकल पड़े।
पिछली रात कि चुदाई कि वजह से सब थके हुए से थे , तो हमने आस पास के शॉपिंग एरिया और बीच के किनारे ही घुमते रहे।
सब लड़को ने कैप्री और टी-शर्ट डाली हुई थी सिवाय राजीव जीजा के। इन्होने पुराने स्टाइल में ही पेंट शर्ट डाला हुआ था। सरला दी ने एक छोटी सी निकर और वाइट टी-शर्ट डाली हुई थी। मामी ने सूट डाला हुआ था ुर सुधा दीदी को बहुत जिद्द करके मैंने एक पेंट और टी-शर्ट डलवाया था। मामी ने बाहर बिकिनी और शॉर्ट्स में लड़किया देखी टी उन्हें अफ़सोस हुआ कि उन्हें भी कुछ और ही डालना था। खैर आज पहला दी था।
बीच पर अधिकांश लड़कियांऔर औरतें बिकिनी में ही थी। बिकिनी में क्या ढाका और क्या छुपा। टहलते टहलते बड़े जीजा हमसे कब अलग हो गए हमें पता नहीं चला। शायद उन्हें ऑड लग रहा था। हमने भी उनकी ज्यादा खोज खबर नहीं ली। हम सब जोड़े में थे और एक दुसरे के हाथों में हाथ डाले हुए थे। मस्ती में मामा मामी एक दुसरे को चूम भी ले रहे थे। टहलते टहलते बीच के एक कोने में हमें भीड़ थोड़ी काम दिखाई दी। वहां कुछ बड़े बड़े बोल्डर से थे। पहले तो मामा, सुधा दी और मामी ने आगे जाने से मना किया पर शलभ जीजा , सरला दी और मैं जोश में थे। हम तीनो किसी तरह बोल्डर के पास से पत्थरो और लहरों के साथ उन बड़े बोल्डरो को पार कर लिए। वहां का नजारा देख तो हम सब कि आँखे फटी रह गई। हमारे पीछे पीछे मामा , मामी और सुधा दी भी आ गए। सुधा दी और मामी ने तो तुरंत लौटने को कहा पर मामा के लिए नया अनुभव था।
दरअसल वो बड़े बोल्डरों के पीछे का एरिया एक तरह से न्यूड बीच वाला एरिया था। वहां बालू का एरिया तो था ही पर छोटे बड़े कई पत्थर थे।
वहां अधीकांश लड़किया टॉपलेस थी। कुछ आदमी और औरतें पूरी तरह से नंगे थे। देख कर लग ही नहीं रहा था कि किसी को किसी से मतलब भी है। कुछ जोड़े तो वहीँ खुले में चादर बिछाए चुदाई में मशगूल थे।
एक जगह बियर और खाने पीने कि चीजें भी मिल रही थी। हम सब थोड़े ठिठके। पर शलभ जीजा और सरला दी तो मूड में आ गए। उन्होंने वहीँ एक पत्थर के किनारे बैठने कि जगह ढूंढ ली और बैठ गए। उन्होंने हमें भी इशारा किया। वहां एक दो और पत्थर थे और बालू भरा एरिया भी था। जब तक हम चारो वहां पहुंचते , शलभ जीजा ने सरला दीदी का टॉप उतार दिया था और उनका ब्रा ऊपर करके उनके मुम्मे दबाने में लगे थे।
मामी – आप दोनों तो शुरू भी हो गए।
जीजा – मौका है , माहौल है। कोई बेवक़ूफ़ ही होगा जो खली समुन्दर देखेगा।
मामा ने भी मामी को खींच कर एक पत्थर के साइड में कर लिया और उनके दुपट्टे को ही बिछा कर बैठ गए। वो दोनों भी एक दुसरे को किस करने में लग गए।
मैं दीदी कि तरफ देख रहा था। हम दोनों थोड़ा और आगे बढे। वहां एक टेंट सा बना हुआ था। निचे एक मैट बिछी हुई थी। लगता था कोई जोड़ा बैठा होगा फिर इधर उधर निकल गया होगा। थोड़ी देर तो हम सोचते रहे फिर दरी पर बैठ गए। सोचा देखा जायेगा जो होगा। दीदी ने मेरे कंधे पर सर रख दिया। हम दोनों समुन्दर कि तरफ देख रहे थे।
दीदी बोली – मेरी जिंदगी भी समुन्द्र की तरह ही हो गई है। उथल पुथल भरी। लहरों से ऊँची नीची होती हुई। हमेशा अंदर लहार सी उठती है पर अंत में वापस शांत।
मैं समझ गया दीदी अपने पास्ट के बारे में सोच रही है। मैंने कहा – मैं हूँ न उस अचल चट्टान की तरह। जब भी तन मन में कोई तूफ़ान उठे मेरे पास आ जाना। मैं तुम्हे हमेशा मिलूंगा।
दीदी – पर हम एक नहीं हो सकते न। तेरे पास आउंगी तो पर लौट कर तो जाना पड़ेगा न।
मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मैंने उनके चेहरे को ऊपर किया और उनके होठो को किस कर लिया। फिर मैंने कहा – कहो तो एक हो जाएँ हमेशा के लिए। शादी तो कर ही लिया है। असली वाले फेरे भी ले लेते हैं। मुझे कोई और नहीं चाहिए।
दीदी – नहीं भाई, ज़माना क्या कहेगा। जमाने के डर से ही तो यहाँ आकर प्यार कर रहे हैं। वैसे भी तुम मुझ बूढी क साथ क्यों बंधे रहोगे। तुम्हे तो कोई कुँवारी सुन्दर लड़की मिलनी चाहिए।
मैं – तुम और बूढी। भूल गई कल रात ही तो तुम्हारी सील तोड़ी है। और यहाँ जो ये सब कपल एक दुसरे के साथ चुदाई का खेल खेल रहे हैं सब शादी सुदा है क्या ? यही कुछ साल साथ रहेंगे फिर किसी और के हो लेंगे। और सच कहूँ तो मेरी बहनो से सुन्दर कोई नहीं। तुम सबसे सुन्दर हो।
दीदी – श्वेता के बारे में क्या ख्याल है। मुझे तो लगता है हम तीनो बहन में सबसे सुन्दर वही है।
मैं – पर तुम सा कोई नहीं। मैं अब दीदी के कंधे पर रखे हाथ से उनके मुम्मे दबाने शुरू कर चूका था। दीदी मेरे पास सिमट कर चली आई और मुझे किस करने लगीं। हमने देखा शलभ जीजा, सरला दीदी को टॉपलेस कर चुके थे और खुद पत्थर के सहारे खड़े थे। दीदी वही झुक कर उनके लैंड को मुँह में डाले चूस रही थी। झुकने से उनके मुम्मे लटक गए थे जैसे कोई गाय का थान हो।
सुधा दी उन दोनों की स्थिति देख गरम हो चुकीं थी। मैंने उनको वहीँ दरी पर लिटा दिया। और उनका टी शर्ट उठा कर उनके मुम्मे चूसने लगा। दीदी को भी मस्ती चढ़ने लगी थी।
दीदी – आह भाई , पी ले मेरा दूध। चूस लो उनको।
मैंने थोड़ी देर तक उनके मुम्मे पीने के बाद उनकी पेंट उतारने लगा। दीदी ने पहले तो मना किया। पब्लिक में सेक्स करने से डर रही थी। पर यहाँ आस पास कोई नहीं था। मैंने भी चेक कर लिया कोई चुप कर देख तो नहीं रहा या रिकॉर्डिंग तो नहीं कर रहा। मैंने फिर भी दीदी से कहा अपना चेहरा ढक लो। दीदी ने अपने हाथो से अपना मुँह ढक लिया और और मैंने अपना निक्कर निचे किया और लैंड निकल कर उनकी चूत में सीधे घुसा दिया।
दीदी – आह ,, आराम से। दर्द है अभी।
मैं – दीदी , रहने दूँ अगर दर्द हो रहा है तो। होटल में चलकर कर लेंगे।
दीदी – तू हमेशा लैंड निकाल कर अच्छा बच्चा क्यों बन जाता है। बहनचोद खुद भी नंगा है मुझे भी कर दिया और अब कह रहा है बाद में , साले चोदने बैठा है तो चोद ना।
इतना सुनते ही मैंने अपने कमर से रफ़्तार पकड़ी और उनको दनादन चोदने लगा।
दीदी – हाय रे। अभी तक चुदाई छुप के कमरे में घर में हुआ करती थी। देख ले अम्मा तूने खुले आसमान के निचे भी चुदवा दिया। आह आह
क्या मजे है इसके भी।
मैंने झुककर उनके मुम्मे मुँह में भर लिए। अब मैं उनके मुम्मे चूस रहा था और चोद भी रहा था।
उधर शलभ जीजा ने दीदी को पत्थर के सहारे उल्टा खड़ा कर दिया था और खुद उनके पीछे से लैंड दाल कर मस्त कुत्ते की तरह चोद रहे थे।
उस पुरे एरिया में सिसकियाँ ही गूँज रही थी। किसी को कोई मतलब नहीं था कौन क्या कर रहा है। कुछ लोग जरूर समुन्दर में तैर रहे थे पर वो भी नंगे ही थे।
कुछ देर की घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया। दीदी तो कब का आ चुकी थी। मैं दीदी के ऊपर ही लेट गया और दीदी ने मुझे अपने बाहिं में भर लिया। कुछ मिनटों बाद होश आया तो जैसे ही हम दोनों सीधे हुए तो देखा पास में ही एक बुजुर्ग जोड़ा एक दुसरे के बाँहों में बाहें डाले खड़ा है।
हम घबरा कर कपडे सही करने लगे।
मैंने उनसे कहा – ये टेंट आपका है ? सॉरी हम यहाँ बैठ गए।
बुजुर्ग महिला ने कहा – कोई बात नहीं। तुम्हे देख हमें अपनी जवानी याद आ गई। कितने प्यार में हो तुम दोनों।
मैं – आप काफी देर से हैं यहाँ ?
मर्द – नहीं बस आये ही थे। तुम तब तक एक दुसरे से लिपटे हुए थे। इतने जोरदार भावनाओ में थे थे की हमने तुम्हे डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा
दीदी ने भी कपडे पहन लिए था। महिला बोली – तुम किस्मत वाली हो इतना प्यार करने वाला आदमी मिला है। इसका पूरा ख्याल रखा। इसके जैसा हथियार नहीं देखा मैंने। खूब खिलाओ पिलाओ। और दमदार बनाओ।
दीदी शर्मा गई। कुछ नहीं बोली। हमने भी चलने में ही भलाई समझी।
हमने उन्हें बाय किया और सरला दी लोगो की तरफ चल पड़े। उन दोनों का भी हो चूका था। पीछे मामा मामी भी आये। दोनों के कपडे में और शरीर पर पूरा बालू लगा था। दोनों को देख हम सब हंस दिए।
सुधा दी बोली – देखना मामी अंदर न बालू गया हो।
मामी – धत्त कुछ भी बोलती है आप।
सरला दी – मतलब सामान बचा रखा है।
सब हंस दिए। फिर हम सब वहां से निकल कर होटल चले आये। सबने यही डिसाइड किया कि अब एक बैग में काम से काम एक चादर और शाल तो हो। मामी ने मामा से बिकिनी और शार्ट पेंट कि शॉपिंग के लिए भी बोला। हमारे पास दो तीन दिन और थे। मस्ती भरी चुदाई के तो कई राउंड होने थे।

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