मेरी माँ बहने और उनका परिवार – Update 5

मेरी माँ बहने और उनका परिवार - Family Sex Story
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थोड़ी देर बाद बोगी का ऐसी भी चल गया और हम दोनों की गर्मी भी शांत हो गई।  फिर आराम से बैठ कर हमने खाना खाया और उसी बर्थ पर अगल बगल लेट गए। ।

मैंने दीदी से पुछा – दी आप इतनी गरम माल हो , खुले विचारो वाली हो कैसे कटती है ससुराल में।

दी – अरे बस मेरे सास ससुर कड़क हैं।  उनके सामने ही घूँघट रखना पड़ता ह।  जैसे ही अपने मंजिल पर आती हूँ फ्री हो जाती हूँ।  तेरे जीजू मुझे बहुत प्यार हैं।  सेक्स जबरदस्त तरीके से करते हैं।  बस वो एक आध चीजें हैं जो मैं चाहती हूँ उन्हें नहीं पसंद। पर सबको सब कुछ नहीं मिलता न।

मैं – सही कह रही हो।  सर्वेश भी मुझे सही आदमी लगे।

दी – अरे उनकी तो पूछो मत।  बहुत मानते हैं।  वैसे तो मेरी सास भी अच्छी है पर ससुर जी के सामने थोड़ी ज्यादा कड़क हो जाती हैं।  और तू बता हम दोनों बहनो के जाने के बाद तो लगता है तूने माँ को शीशे में उतार लिया है।  घर में नंगी घुमा रहा है उन्हें ?

मैं सकते में था, दीदी को ये कैसे पता चला।  मैंने कहा – क्या बात करती हो दीदी ऐसा कुछ नहीं है।

सरला दी – फ़ालतू बात मत कर वो कुछ दिन पहले माँ ब्लाउज खोले किचन में काम कर रही थी।  पक्का तूने ही नंगा किया होगा।  साले दूध पीना नहीं छोड़ा तूने। और क्या क्या कर लिया उनके साथ। 

मैंने सोचा अब झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं।  वैसे भी दीदी वहां सब समझ ही जातीं।  उनके साथ फ्री होने के लिए राज तो खोलने पड़ेंगे।  फिर भी मैंने पुछा – तुम्हे कैसे पता मैं वहां था।

सरला दी – उस दिन वीडियो कॉल पर जब मैंने माँ को खुले मुम्मे में टोका तो पहले वो सकपका गईं।  फिर कॉल लेते लेते जब वो कमरे में जा रही थी तो तेरे कपडे वहीँ कमरे में दिखे थे।  मुझे पहले से ही शक था क्योंकि तब तक तुम घर आ जाया करते थे।  पर माँ भी खिलाडी निकली , सफ़ेद झूठ बोल गईं।  तूने गाय बना डाला है न।

मैं – क्या करता दी।  उनके दूध का तो मैं बचपन से ही दीवाना हूँ।  तुम लोग जब तक थी तब तक तो माँ छुपा कर पिलाती थी पर अब घर में कोई होता तो है नहीं तो कैसा पर्दा। तुम भी तो बता रही थी की तुम्हे माँ का शरीर चाटने में मजा आता था।

दी – मजा तो आता  था।  माँ एकदम शराब की बोतल हैं।

मैं – एक बात बताओ , सिर्फ पसीना पिया है या और भी कुछ ?

दी – भाई , औरतें एक दुसरे से खुली होती हैं।  पसीने का नशा करना भी मैंने उन्ही से सीखा है।  कुछ लोगो को मिटटी से नशा होता है , कुछ को पेट्रोल और डीजल की महक से।  कुछ बाम से तो कुछ कफ सिरप से।  माँ को पसीने से होता है।  जब हम छोटे थे तो गर्मी में माँ हमारा पसीना साफ़ करते करते चाट भी लेती थी।  थोड़े बड़े हुए माँ की ये हरकत थोड़ी अजीब लगी।  एक बार खुद ट्राई किया तो मजा आया।  बाद में तो बस नशा घर में ही मिल जाता था। 

मैं – सुधा दी भी ऐसी है क्या ?

दी – ना रे।  उन्हें ये पसंद नहीं।

मैं – और क्या क्या नशा किया है।

दी – खुल के बोल न की माँ की चूत छाती है क्या ? हाँ चाटी है।  तूने जो मुझे हरकत करते देखा था माँ ने ही सिखाया था।  माँ हमारी गुरु हैं।  हमारा कहीं बाहर चक्कर न हो , इस करके तो उन्हें समय आने पर  हम दोनों बहनो को मास्टरबेट करना सीखा दिया।  हम कई बार तो एक दुसरे के सामने भी मास्टरबेट कर लिया करते थे। 

मैं – तभी तुम्हे मुझे देख आश्चर्य नहीं हुआ।

दी – मुझे पता था की कभी न कभी तू हमें देख ही लेगा।  वैसे भी तीन तीन जवान गदराई औरतों के बीच पल रहा था तू।

मैं – क्या सुधा दी भी संग में होती थी ?

दी – सीधी सी बात है।  बड़ी थी।  माँ की चूत सबसे पहले उन्हें मिली , फिर मुझे।

मैं – मुझे तो नहीं मिली

दी – मिल जाएगी।  जब इतना कर लिया तो वो भी मिल जाएगी।

मेरे दिमाग में ना जाने क्या आया मैंने बोल दिया – पर मुझे भी एक चूत मिल चुकी है

दी – पता है चाचीचो।  मुझे पता है तूने चाची को पेल दिया।

अब मेरा दिमाग घूम गया।  मैंने कहा – तुम्हे कैसे पता?

दी – सारा राज जानेगा ? खैर बता देती हूँ।  तेरी शिकायत मुझसे श्वेता ने की थी।  उसने बताया की तूने उसके हॉस्टल में क्या हरकत की और तुम उसके पीछे भी पड़े हो।  मेरे आने का सुन कर उसने मुझे चेताया था और कहा था की तुम्हारी खबर लू।

मै – साली को तो मैं छोडूंगा नहीं।  बहन की लौड़ी मुझे सबक सिखवायेगी।  उसकी माँ टी उसकी चूत भी दिलवाना चाहती है पर कमिनी मेरी ही शिकायत कर रही है।

दीदी ने मुझे किस किया और कहा – देख वो अच्छी लड़की है।  उसे अभी लंड का स्वाद नहीं मिला।  मुझे तो लगता है उसने चूत में ऊँगली भी नहीं करी होगी।  जिस दिन उसे चूत में मुसल जाने का मजा मिलेगा सब भूल जाएगी।  पर ये याद रख किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती नहीं।  जब तक लड़की तैयार न हो , उसे छूना भी मत।  और हाँ हर लड़की को पटाने का तरीका अलग अलग होता है।  समझना पड़ता है उन्हें। और हो सकता है लड़की तेरे से दोस्ती भी कर ले पर तेरे साथ सेक्स भी कर ले ये जरूरी नहीं।  पर एक बार हो गया तो बस मजे ही मजे हैं।  समझा ? चाची तो मिल गईं, हम बहने और माँ मिल जाएँगी क्योंकि हम तुमसे प्यार करते हैं।  पर कोई और , शायद नहीं।  उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी।

मैं – दीदी तुम एकदम गुरु हो।

दीदी – चिंता मत करो।  तुमको एकदम ट्रेंड कर दूंगी।  आखिर मेरे दुलारे भाई जो हो।  एक दिन आएगा की तू जिस चूत को चाहेगा , अपना गुलाम बना लेगा।

मैं एकदम रिलैक्स्ड था।  थोड़ी देर की और ज्ञानबाजी के बाद दीदी भी सो गईं।

अगली सुबह दीदी ने एक फुल टाइट ट्रॉउज़र डाला और ऊपर से टी-शर्ट।  मैं वापस अपने कपडे में था।  घर जाते वक़्त दीदी ने मुझे हिदायत दी की ट्रैन में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में माँ को कुछ नहीं बताना है।  उन्होंने मुझसे कहा की माँ को पता नहीं चलना चाहिए की उन्हें सब पता है।  मौका देख कर वो सब ठीक करेंगी और कोशिश करेंगी की न सिर्फ माँ की बल्कि श्वेता की भी चूत दिला दे।  पर कहीं भी जल्दीबाजी नहीं।

मेरे पास गुरु की बात मानने के सिवा कोई ऑप्शन नहीं था। 

माँ ने सरला दीदी को देखा तो एकदम खुश हो गईं।  थोड़ी देर तक दोनों गले लग कर रोटी रहीं।  एकदम रुलाने वाला माहौल था।  उसी में सुधा दी का फ़ोन भी आया।  वीडियो कॉल पर वो भी रोने लगी।  मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मैं बाहर घूमने निकल आया।

दीदी के आने के बाद से मेरी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव आ गया था।  अब मुझे माँ का दूध न के बराबर मिलता था।  दीदी बहुत दिनों बाद आई थी तो घर में माँ के साथ ही समय बिताती थी।  उन दोनों की बातें ख़त्म ही नहीं होती थी।  पर मेरा नयन सुख दोगुना हो गया था।  दीदी घर में सिर्फ एक टाइट और छोटी सी निक्कर और कॉटन स्लिप में ही रहती थी।  कई बार बिना ब्रा के।  एक बार तो माँ ने मेरे सामने दीदी को धीरे से ब्रा के बारे में टोका तो दीदी ने कह दिया – तुम भी तो ऐसे ही रहती हो।  बिना ब्रा के फ्री रहना अच्छा लगता है।  माँ कुछ नहीं बोल पाई।

एक दिन दीदी अपने कमरे में थीं ।  माँ कुछ काम कर रही थी।  मैंने उनसे चुहलबाजी करने की कोशिश की तो दीदी का हवाला दे दिया।  मैंने सोचा फिर चलकर दीदी से ही बात कर लेता हूँ। जब मैं कमरे में घुसा तो वो जीजू के साथ फ़ोन पर बात कर रही थ।  उन्होंने मुझे अपने मुँह पर ऊँगली रख कर चुप रहने का इशारा किया।  मैं समझ गया की कोई प्राइवेट बात हो रही होगी।  दीदी ने मुझे दरवाजा बंद करने का इशारा किया। मैंने धीरे से दरवाजा बोल्ट कर दिया और उनके बगल में आकर बैठ गया।  दीदी ने इयरफोन लगा रखा था।

दीदी ने जीजा को कुछ सेकंड वेट करने को कहा और बोली – रुको मैं कमरा बंद कर देती हूँ फिर आराम से बात करेंगे।

दरवाजा तो बंद ही था उन्होंने फ़ोन म्यूट पर किया और कहा – चुप रहेगा तो मजे दूंगी वरना यहाँ से जा, माँ की ले ले।

मैंने कहा – यार माँ तो एकदम सीधी साधी घरेलु महिला बानी हैं।  तुम्ही कुछ करो। 

फिर दीदी ने एक तार मेरे कान में डाला और कहा बिलकुल चुप होकर सुन।  कोई हरकत नहीं, कोई चूं तक नहीं।

मैं ने सर हिला दिया।  अब दीदी ने फोन अनम्यूट किया।

उधर से जीजा – अरे कहाँ चली गई थी ?

दीदी – अरे वो माँ को बोलने गई थी की मैं सोने जा रही हूँ डिस्टर्ब न करे।

जीजू – राज कहाँ है ?

दीदी – बाहर दोस्तों के साथ मस्ती कर रहा होगा।

जीजू – तब सही है।  सुनो न अब अकेली हो तो एक पप्पी दे दो।

दी – आप बहुत शरारती हो रहे हैं।  अभी दो दिन ही तो हुए हैं आये हुए और उस रात भी आपने जमकर मेरी ली थी।

जीजू – अरे तुम्हारी रोज न लूँ तो लगता है दिन पूरा ही नहीं हुआ।  देखो अभी भी मेरा पप्पू शिकायत कर रहा है की तुम्हे क्यों जाने दिया

दी – आपका नहीं पप्पू मेरा है।

जीजू – और मुनिया मेरी।  सुनो पप्पी दो न

दी ने फोन पर ही एक पप्पी दी और कहा – ये आपके लेफ्ट गाल के लिए।

जीजा ने भी पलट कर पप्पी दी और कहा दुसरे गाल पर।

दी ने फिर वही किया।  दो तीन वर्चुअल चुम्मी के बाद जीजा बोले – देखो न तुम्हारा पप्पू भी खड़ा होकर पप्पी मांग रहा है।

दी – ओह्हो मेरा सोनाआ पप्पू।  उम्मम्मम आह लो उसे भी दे दिया।

जीजा – आय हाय।  मजा आ गया।  सुनो मेरे दशहरी आम कैसे हैं

दी – पके हैं , लटक गए हैं पर कोई चूसने वाला ही नहीं है।

जीजा – सुनो वीडियो कॉल करें मैं उन्हें देखना चाहता हूँ। 

दीदी – अभी बातो से काम चला लो।  कोई भी आ सकता है।  रात में वीडियो कॉल पर बात करेंगे। आप भी तो ऑफिस में होंगे।

जीजू – ठीक है , फोटो तो भेजो।

दीदी ने कॉल कट किया।  मुझसे बोलै आँखे बंद कर।  मैंने कहा – अब भी आँखे बंद करवाओग।

दीदी ने फिर झट से अपना स्लिप ऊपर किया और एक सेल्फी ली और जीजा को भेज कर उन्हें कॉल किया।

दीदी – कैसे लगे

जीजा – अरे मेरे आम तो सुख जायेंगे। बिना चूसे तो रस बर्बाद हो जायेगा।  सुनो उन्हें बाहर निकालो।

दीदीने फिर से अपना स्लिप ऊपर कर लिया।  कसम से एकदम गदराया माल थी मेरी दीदी।  उनके मुम्मे बहुत बड़े नहीं थे पर  टाइट और गोल थे। उनके निप्पल एकदम नुकीले हो रखे थे।  उसके चारो तरफ भूरा सा गोला था।  माँ और चाची जितने रसीले तो नहीं लग रहे थे पर जीजा ने उन पर काम काफी किया था। 

दीदी गहरी सांस लेकर बोलीं –  निकाल लिया।

जीजा – थोड़ा उन्हें प्यार करो, दबाओ समझो मैं दबा रहा हूँ। 

दीदी – आह आह शलभ थोड़ा धीरे दबाओ न।  प्यार से।  आह आह सससस मजा आ रहा है।

जीजा – सरला क्या चुचे हैं तुम्हारे , सोफ्टी सोफ्टी।  मन करता है दबाता रहूँ।  जानती हो वो स्ट्रेस रिलीवर हैं।  दिन भर थक कर आने के बाद जब उन्हें दबाता हूँ न तो सारा टेंशन चला जाता है। 

दीदी – दबाओ न।  रोका किसने है , दबाओ मेरे साजन।  जितना मन करे दबाओ।  आह आह हाँ ऐसे ही।

सच में औरतों के बूब्स दबाकर जो स्ट्रेस रिलीव होता है पूछो मत।  मै भी कॉलेज से आकर माँ के मुम्मे दबाता था तो एकदम से साड़ी थकान मिट जाती थी।  दीदी को खुद अपने मुम्मे दबाते देख मेरा हाथ खुद बा खुद उन पर पहुँच गया।  दीदी ने मुझे रोका नहीं।  अब मैं दी के सामने बैठकर उनके मुम्मे दबाबे लगा। 

दीदी – आह आह , मजा आ रहा है।  और दबाओ।  निचोड़ दो मेरी अमिया।

जीजा – अमिया से तो वो रसभरे आम बन चुके हैं मेरी जान।  ढंग से निचोड़ो तो दूध निकल आये।

दीदी – सही में जानू।  अब तो पपीता हो चुके हैं।  दूध पीना है तो बच्चा करना पड़ेगा।  माँ कह रही थी हमें बच्चा कर लेना चाहिए।  वहाँ अम्माजी भी अब कहने लगी हैं।  अब कर ही लेते हैं।  मेरे पपीते फिर और बड़े हो जायेंगे और आपको दूध भी मिलेगा।

जीजा – हम्म सोचता हूँ।  पर तुम अपने निप्पल निचोड़ो न

मैंने दीदी के निप्पल को उँगलियों के बीच में फंसा लिया और उमेठने लगा।

दीदी – हाँ , शलभ , निचोड़ दो उन्हें ।  यससससस। 

जीजा – क्या निप्पल हैं तुम्हारे।  मस्त नुकीले।  जीभ से चुभलाते समय मजा आ जाता है।

दीदी मेरी आँखों में देखते हुए बोलीं – तो चूसो न। 

मैंने तपाक से झुककर दीदी के मुम्मे मुँह में भर लिया।  दीदी – आह आह आराम से।  चूस लो मेरी जान।

जीजा – आह आह।  स्वाद है तुम्हारी चूचियों में।  मैं पी रहा हूँ।  पिलाते जाओ

दीदी – आह आह पीलो।  ये रस  भरी बगिया तुम्हारे हैं।  इनमे जो फल लटके हैं खा जाओ।  चूस लो।  पी लो।  निचोड़ लो उनका रस।

दीदी थोड़ी देर बाद – अपना लौड़ा निकालो न  शलभ।  मुझे वो मुँह में चाहिए।

जीजा – तब से निकाल रखा है मेरी जान।  इतने गरम माहौल में वो अंदर कैसे रहता। 

दीदी – तो मुठ मार रहे हो।

जीजा – हाँ

दीदी – समझ लो मैं तुम्हारे लॉलीपॉप मेरे मुँह में हैं।  क्या मजा आ रहा है उन्हें मुँह में लेकर। 

मैं भी अब खड़ा हो गया और अपना लंड निकाल कर उनके मुँह के सामने कर दिया।  अब वो मेरा लंड मुँह में लेती तो बात कैसे करती।  तो उन्होंने मेरे लौड़े को हाथ में लिया और आगे पीछे करने लगीं।

बोली – क्या मीठा लॉलीपॉप है।  साथ में दो मीठी गोली भी फ्री है।  उसके गुलाबी गिलाबी टिप पर मै चुम्मा दे रही हूँ।  उम्मम्मम्मम्म

दीदी ने मेरे सुपाडे को किस कर लिया।

अब दीदी जीजा को वर्चुअल ब्लो जॉब दे रहीं थी और मुझे रियल।  उधर मुठ मारे जा रहे थे।

जीजा – पेल दू तुम्हारी चूत में

दीदी अब एक हाथ अपने पेंट के अंदर ले गईं और ऊँगली करने लगी।

दीदी – वो तो कब का पेल चुके हो। चोदो मुझे जोर से चोदो।  आह आह चूत का कबाड़ा कर दो।  बहुत सता रही है न मेरी मुनिया।  मारो उसे।  आह आह पेल दो मुझे राजा।  शैलाभ्ह्ह्हह्ह आह

दीदी और जीजा के नशीले संवाद से।  दीदी की हरकतों से मेरा आने वाला था।  जीजा भी आने वाले थे।

आह आह आह करते एक साथ हम तीनो झाड़ गए।  मेरा पूरा वीर्य दीदी के चेहरे पर गिर पड़ा। 

दीदी ने फ़ोन काट किया और गुस्से में मुझे कहा – कुत्ते निचे नहीं कर सकता था।  मेरा पूरा चेहरा और कपडे गंदे कर दिए। 

मैंने मायूसी से कहा – लास्ट टाइम तो तुम पूरा पी गई थी।

दीदी मेरा चेहरा देख हंसने लगीं।  और अपने पुरे चेहरे पर लगे वीर्य को साफ़ करने लगी। 

तभी बाहर माँ की आवाज आई – सरला क्या हुआ ? सब ठीक है न ? ये राज कहाँ है दिख नहीं रहा।

दीदी गुस्से में – माँ थोड़ी तो प्राइवेसी रहने दिया करो और मुझे राज का क्या पता।  गया होगा कहीं। थोड़ी देर में आती हूँ।

कह कर दीदी ने मुझे झट से कपडे पहनने को कहा और बेड के निचे छुपा दिया।  चेहरा धोकर पोंछ लिया।  मुझसे कहा – मैं माँ को बातों में उलझाती हूँ तू घर से बाहर निकल जा।  थोड़ी देर में आना।

फिर दीदी बाहर आ गई।  माँ से बोली – कभी तो अकेले रहने दिया करो।  मिया को छोड़ कर आई हूँ।  बातें कर रही थी।

माँ दीदी की हालत देख समझ गईं बोली – सॉरी यार।  पर राज भी नहीं दिख रहा था तो मैं थोड़ा घबरा गई थी।

दीदी ने माँ को बाँहों में लिया और बोली – मेरी माँ , तुम कितनी सेक्सी हो।  हमें भी सेक्स करने दिया करो।  चलो छत पर ताज़ी हवा खाते हैं।

दोनों छत पर चली गईं और मैं चुप चाप बाहर चला गया।

शाम को खाना खाने के बाद दीदी अपने कमरे में जाने लगी और बोली – कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा मुझे। थोड़ी प्राइवेसी चाहिए मुझे। माँ आप आपने लाडले का भी थोड़ा ख़याल रख लो। आजकल उदास दीखता है।

मुझे पता था की दीदी रात जीजू से वीडियो कॉल पर बात करेंगी फिर भी मैं अनजान बनता हुआ माँ से बोला – क्या हुआ माँ, दी ने ऐसे क्यों बोला।

माँ – कुछ नहीं रे पागल। दोपहर में वो अपने पति से बात कर रही थी मैंने आवाज लगा दी थी बस।

मैं – तुम भी ना। खैर चलो ना , कितने दिन हो गए हैं दुद्धू पिए।

माँ – चल कमरे में मैं आती हूँ।

मैं झट से माँ के कमरे में पहुँच कर नंगे ही बेड पैट लेट गया। माँ बाकी बचा खुचा काम निपटा कर आई। मुझे देख कर मुश्कुरा कर बोली – तू भी कितना पागल है रे। तेरु उम्र के लौंडे जवान चूत के चक्कर में पड़े रहते हैं और तू अपनी माँ के दूध से ही खेलता रहता है।

मैं – माँ , तो दिला दो न कोई जवान चूत। चाची ने श्वेता की बात करि थी पर वो तो गुंडा निकली । अब दीदी को ही शामिल कर लो। कम से कम चूत तो मिल जाएगी।

माँ – तू भी न घर की औरतों पर ही नज़र रखता है। कोई बाहर की जवान लौंडिया पट।

मैं – यार , आप भी न। दीदी की दिलाओ। बाहर की बाद में देखूंगा। अपना तो आप देती नहीं हो। कुछ ऐसा करो जिससे की वो भी हमारे साथ हो ले। काम से काम पुराने दिन तो लौटेंगे।

माँ – देखती हूँ। तू भी कोशिश कर। वैसे लगता है उसे कुछ अंदाजा तो है। देखा नहीं कैसे तेरा ख्याल रखने को बोल गई।

मैं – तो आओ न।

माँ ने अपनी साडी और ब्लॉउस दोनों उतार दिया । सिर्फ पेटिकट में आकर लेट गई। मैंने लपक कर उनके मुम्मो पर मुँह लगा दिया।

थोड़ी देर में ही मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था।

माँ बोली – बड़ी जल्दी खड़ा कर लेता है इसे तू।

मैं – इतना गदराया माल हो तुम की झट से तैयार हो जाता है पर तुम हो की चूत के दर्शन करवाती ही नहीं हो।

माँ – सही समय आएगा तो ये भी मिल ही जाएगी। कह कर माँ उलटी होकर लेट गई। ये इशारा था मेरे लिए मैं उन पर चढ़ सकता हू।

मै माँ के ऊपर लेट गया और उनकी पेटीकोट कमर पर करके उनकी गांड की फांको के बीच में अपना लंड फंसा कर रगड़ने लगा।

मेरे लंड को अभी तक माँ की गांड ही नसीब हुई थी वो भी गांड के अंदर नहीं बस उसकी फांको के बीच।

उधर दीदी भी जीजा के साथ लगी हुई थी। मैंने आज दो बार पानी निकाल लिया था तो थक गया था सो गया।

माँ थोड़ी देर बाद उठी, ब्लॉउस के दो हुक लगाए । मूतने के बाद पानी पिने किचन में आई तो देखा दीदी भी वहां पानी पी रही थी।

माँ मुश्कुरा कर – हो गई मियां बीवी की बात। हो ली पानी पानी।

दीदी ने माँ को गालों पर चुम लिया और कहा – हाँ , बहा दिया पानी।

माँ – कुछ बचा है या सब वेस्ट कर दिया।

दीदी – है न चाहिए ?

माँ – ये भी पूछने की बात है।

दीदी को अंदाजा था की मैं सो चूका होऊंगा , सो वो बिना पैंटी के ही एक स्लिप डाल कर आई थी। उससे उनकी चूत और गांड का थोड़ा हिस्सा ही ढाका था।

माँ ने दीदी के कमर पर हाथ लगाया तो दीदी उचक कर किचन के स्लैब पर टांग फैलाये बैठ गई। माँ ने झुक कर उनकी चूत में मुँह लगा दिया।

अब माँ दीदी की चूत को चाटने में लग गई। अब सडप सडप की आवाज आने लगी।

दीदी – सससससस मायआआआ मस्त कुतिया की तरह चाटती हो तुम। पूरा खा जाओ। मुझे पता था की तुम्हे मेरी चूत का रस चाहिए। तभी तो बोल कर गई थी।

माँ – रंडी फिर दोपहर में काहे मना कर दिया। आवाज सुनकर तो मैं तब भी गई थी।

दीदी बात को छुपाते हुए बोली – गलती हो गई तभी तो अभी आ गई।

माँ – अगली बार ऐसी गलती की तो चूत सी दूंगी तेरा। तेरा मरद भी न छोड़ पायेगा।

दीदी – नहीं माँ। आह आह। ऐसी गलती नहीं होगी फिर। पहली बार पानी निकलना जब सिखाया था तभी से दे रही हूँ। तूने ही तो खुद से खुद को खुश करना सिखाया है। आह आह आह। जीभ अंदर डालो न।

माँ जीभ को गोल करके उनकी चूत में अंदर बाहर करने लगीं। फिर एक ऊँगली अंदर डाल दी।

दीदी – आह माआआ मेरे लौड़े को चूसो न जरा। साले ने मुझे गरम तो कर दिया पर मेरा पूरा नहीं हुआ। पानी निकलते ही बस सो गया।

माँ – सब मरद ऐसे ही होते हैं। तभी तो एक औरत का दर्द औरत ही समझ सकती है। मैंने तभी समय आने पर तुम दोनों को सब सिखाया था।

दीदी – आह आह। माआआआ ,मेरा होने वाला है।

कहकर दीदी ने खूब सारा पानी छोड़ दिया। माँ भी उनकी चूत से निकलते एक एक बूँद को चाट गईं।

दीदी बोली – मेरा हिस्सा। माँ ने तब उन्हें चूम लिया। अब दीदी माँ के होठो को चूमने लगी। माँ ने जीभ निकाल दी। दीदी ने उसे भी चूस लिया।

अब बारी दीदी की थी। वो निचे कूदी और माँ के पेटीकोट में घुस गईं। माँ ने भी अपने दोनों हाथो से उनका सर पकड़ा और अपनी चूत पर दबा दिया। दीदी की चूत चटाई से माँ गरम हो गई थी। माँ ने फिर दीदी के मुँह पर चूत सेट किया और कमर को ऐसे हिलाने लगी जैसे चुद रही हो। दीदी ने भी जीभ निकल दी थी जिसपर माँ अपनी चूत रगड़ रही थी। माँ के कमर की स्पीड बढ़ गई उन्होंने दीदी को जोर से पैरो के बीच में जकड लिया। थोड़ी ही देर में वो जोरदार तरीके से कांपने लगी और चरम स्थिति पर पहुँच गईं। दीदी ने भी उनको पूरी तरह से चाटा और फिर कड़ी हो गईं। माँ और उनके होठ फिर से आपस में जुड़ गए।

माँ – क्या नशा है रे तेरी चूत में। चुदाई के बाद से और भी रसीली और नशीली हो गई है तू।

दीदी – माँ तुम इतनी बड़ी चुदक्कड़ हो कैसे काम चलता है तुम्हारा। एक तुम हो जो तड़पती रहती हो और एक भाई है जिसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। कर लो उससे दोस्ती फिर खेलो चोदम चुदाई

माँ एकदम सीधी बनती हुई बोली – हाँ एक आध बार उसने लौंडिया पटाने की कोशिश तो की पर रिजेक्ट हो गया। पर मैं टी माँ हूँ। ऐसे कैसे उसके साथ कर लू।

दीदी – हमारे साथ करो तो कोई दिक्कत नहीं। उसके साथ दिक्कत है।

माँ – तू कर लेगी क्या उसके साथ सेक्स। बोल तो ऐसे रही है की वो तुझसे तेरी चूत मांगे तो दे देगी।

दीदी – तुम्हे कोई दिक्कत तो नहीं होगी न।

माँ – मुझे क्या , उसका कुछ काम हो जायेगा।

दीदी – अच्छा मैं दे दूंगी तो तुम भी दे दोग।

माँ – सोचूंगी।

दीदी उन्हें चूम ली और बोली – करती हूँ कुछ जुगाड़ मेरी चुदक्कड़ माँ।

दोनों फिर सोने चली गईं।

अब हाल ये था की दीदी तो मुझसे खुल के चुदना चाहती थी पर माँ अब भी संकोच में थी। मैं चाहता था की घर में मैं जब चाहूँ, जिसे चाहूँ , जहाँ चाहू चोद दू। अब मेरा लंड हमेशा शिकार की तलाश में रहता। एक दिन शाम हम बैठ टीवी देख रहे थे। मैंने माँ की गोद में सर रखा हुआ था और मेरा पैर दीदी के गोद में था। माँ ने साडी पहन राखी थी और दीदी हमेशा की तरह एक छोटी सी निक्कर और स्लिप में थी। मैंने भी बरमूडा और बनियान पहन रखा था। तभी अचानक से जोरदार बारिश होने लगी। दीदी ने कहा चल नहाते हैं। मैं तुरंत तैयार हो गया। दीदी ने माँ से कहा तो माँ ने पहले तो मना किया फिर तैयार हो गई।

अब आपको हमारे घर के बारे में बता दूँ। हमारा घर दोमंजिला है और आस पास के घरो से ऊँचा है। हमारी रेलिंग भी थोड़ी ऊँची है। मेरे सीने से बस थोड़ी ही नीची। एक कोने में इमरजेंसी पर्पज के लिए एक छोटा सा कमरा और बाथरूम बना था। कमरा तो स्टोर रूम में तब्दील हो चूका था पर बाथरूम यूज़ में था। वहीँ पास में एक बड़ी सी सीमेंटेड पानी की टंकी थी जिस के एक तरफ सीमेंट का ही बेंच सा बना रखा था।

बारिश धुआंधार हो रही थी। दीदी और मैं तो तुरंत बारिश में चले गए। माँ संकोच कर रही थी पर उन्हें भी मैंने और दीदी ने खींच लिया।

अब हम तीनो बारिश में भींग रहे थे। दीदी का स्लिप एकदम चिपक गया था। मेरी बनियान बह भींग गई थी। माँ अपनी साडी से खुद को ढकने की कोशिश में लगीं थी पर दीदी को तो ठरक सवार थी। उन्होंने माँ का पल्लू लिया और खींचने लगी।

माँ – क्या कर रही है।

दीदी – घर में तो चूचियां दिखाती फिरो और यहाँ साडी नहीं उतर रही।

माँ- भाई छत पर कोई देख लेगा।

दीदी – हम ऊंचाई पर हैं। हम सबको देख सकते हैं हमें कोई नहीं देख सकता।

माँ ने चारो तरफ देखा और फिर दीदी को उनकी वाली करने दी। अब माँ सिर्फ पेटीकोट ब्लाउज में थी। ब्लाउज तो पहले ही भींग चूका था।

पेटीकोट भी आगे पीछे दोनों तरफ से चिपक गई थी। माँ ने न ब्रा पहना था न ही पैंटी। उनकी गांड एकदम मस्त तबले जैसी लग रही थी।

दीदी का भी वही हाल था। तभी मैं भाग कर निचे अपना मोबाइल लाने गया। लाकर मैंने कमरे की खिड़की पर रख दिया और सेक्सी बरसात वाले गाने लगा दिए। गाना बजते ही दीदी ने मुझे पकड़ लिया और डांस करना शुरू कर दिया। उन्होंने माँ को भी खींच लिया डांस के लिए।

हम हम तीनो डांस कर रहे थे। डांस करते करते एक दुसरे से चिपक रहे थे। उनकी हालात देख मेरा लंड खड़ा हो गया। मेरी स्थिति देख दीदी ने माँ से गाना गाते हुए कहा – अम्मा देख तेरा लौंडा बिगड़ा जाए। अपनी माँ बहन को देख लंड खड़ा किया जाय। माँ हंसने लगी।

मैंने तभी दीदी की पिछवाड़े पर धीरे से एक चपत लगा दी। दीदी ने यही देख माँ के गांड पर चपत लगा दी। मैंने माँ को किस कर लिया। माँ भी मस्ती में थी उन्होंने दीदी को किस कर लिया। खेल चालू हो चूका था। मैंने अपना बनियान उतार दिया। दीदी ने भी मस्ती में अपना स्लिप उतार दिया। अब सिर्फ एक डिज़ाइनर ब्रा में थी। वो भी पूरा भींगा हुआ। उनके निप्पल टाइट होकर निकल चुके थे। सब लगभग दिख रहा था। माँ थोड़ा सकपकाई पर दीदी आगे बढ़ी और उनका ब्लॉउस पकड़ कर फाड़ दिया। चट चट करके सारे हुक टूट गए। उन्होंने माँ के ब्लॉउस को उतार दिया और उनके मुम्मे पीछे से जाकर पकड़ लिए। अब दीदी माँ के पीछे चिपक कर कड़ी थी। उन्होंने माँ के निप्पल निचोड़ते हुए मुझसे कहा – राज , तुझे मम्मी के मुम्मे पसंद हैं न।

मैंने कहा – बहुत

दीदी – माँ तेरे मुम्मे एकदम दुधारू गाय की तरह है। देखो न लड़का तड़प रहा है पीला दो।

माँ ने अब शरम तोड़ते हुए कहा – पी ले। मेरा दूध तो तुम दोनों के लिए है। पी लो।

मैंने आगे बढ़कर उनके मुम्मो पर हाथ लगा दिया और उनको किस कर लिया। दीदी ने कहा – बहनचोद ,मुझे भी किस कर लेगा तो तेरी जीभी घिस नहीं जाएगी।

मैंने माँ के गर्दन से ही सर आगे किया और दीदी को किस कर लिया। अब दीदी पीछे से माँ के मुम्मे दबा रही थी और मैं आगे से।

माँ – तुम दोनों दबाओगे या पियोगे भी। आह आह। आराम से।

फिर दीदी माँ को लेकर टंकी के पास गईं । मैं बेंच पर बैठ गया। दीदी ने माँ को टंकी से लगाकर चौपाया बना दिया और साइड से आकर उनके मुम्मे ऐसे दबाने लगीं जैसे दुह रही हो और मैं बछड़ा बना पीने लगा। ऊपर से बारिश की बुँदे गिर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे माँ के स्तनों से सचमुच दूध निकल रहा हो।

माँ – आह , रराज बेटाआअअअअअ पी ले माँ का दूध। तेरी माँ एकदम दुधारू गाय है। तेरी बहन आ गई तो तुझे मिला नहीं था न। देख तेरी बहना ही तुझे पीला रही है। कितना खेल रखती है तेरा। आह आह। सरला तू मेरी प्यारी बेटी है। तू नहीं पीयेगी क्या। पी ना

अब दीदी भी मेरे बगल में बैठ गई और हम दोनों उनके मुम्मे पीने लगे।

माँ – आह कितना अच्छा लग रहा है। तुम दोनों के बचपन की याद आ गई। फिर माँ बैठ गई। मै उनके गोद में सर रख कर पीने लगा और दीदी ने दुसरे मुम्मे पर कब्ज़ा कर लिया।

माँ – ऐसे ही जब मैं राज को बचपन में दूध पिलाती थी और तू बहुत जिद करने लगती थी पीने के लिए। जब भी मैं राज को पिलाती तू दूसरा मुम्मा ऐसे ही चूसने लगती थी। आह आह राज के बाद तूने ही सबसे ज्यादा मेरा दूध पिया है इस लिए ही तुझमे मेरे जैसे ही गुण हैं।

मैं – काश इसमें आज भी दूध आता।

दीदी – साले , नहीं आता है तब भी तू इनसे लटका रहता है। आते तो दिन भर माँ के पल्लू में ही रहता। माँ सुधा दी फिर क्या करती थी।

माँ – मत याद दिला सुधा की। उसे तो कुछ और ही पीने की आदत थी। बड़ी थी न। उसे बड़ो का खेल पसंद था

मैं – माँ अब मैं भी बड़ा हो गया हूँ मुझे भी वो करने दो न

दीदी फिर अपना ब्रा खोल दिया और खड़ी हो गई। बोली – मेरे दोनों थनों में भी काश दूध होता।

माँ ने दीदी को अपने गोद में बिठा लिया। उमके मुम्मे दबाते हुए बोली – आ जायेंगे। तू तो मुझसे भी बड़ी दुधारू गाय निकलेगी।

माँ ने अब दीदी के मुम्मे पीने शुरू कर दिए। मैंने भी माँ की गोद से उठ कर दीदी का खली मुम्मा मुँह में भर लिया।

दीदी – सससस, आह क्या चूसती हो माँ। तुमने भाई को भी अच्छा सिखाया है। आह भाई तुम्हारा लौंडा तो तेरे जीजू से बड़ा है ही तेरी जीभ भी उनसे ज्यादा चटोरी है। पी जाओ मेरा दूध। जब असली वाला आएगा तो भी पिलाऊंगी। मेरा वादा है। आह आह मेरे भाई। पहला बच्चा मायके में ही होता है। तुझे पूरा मौका मिलेगा। आह आह।

दीदी ने अपने हाथ मेरे बरमूडा के अंदर डाला और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। माँ को दिखाते हुए बोली – माँ कितना प्यारा है न। लंबा , और गोल। कितना साफ़ रखता है भाई।

मैं अब बेकाबू हो रहा था। मैंने बोला – माँ का ही हेयर रेमोवेर यूज़ करता हूँ।

दीदी – माँ तुम खुद क्यों नहीं साफ़ कर देती हो इसका।

मेरी आहें निकल रही थी। मैंने कहा – कितना बदकिस्मत हूँ। ऊपर से बादल रो रहा है , निचे मेरा लंड। दो दो चूत हैं यहाँ पर एक भी नसीब नहीं।

दीदी तभी उठी और एकदम से कमर लहराते हुए अपने पेंट को उतार दिया और मेरी तरफ पीठ करके मेरे ऊपर बैठ गईं। मेर लंड उनके गांड की फांको से निकलता हुआ आगे उनकी चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। दीदी ने वैसे ही थोड़ी देर मेरे ऊपर कमर आगे पीछे किया।

माँ – क्यों तड़पा रही है मेरे बेटे को। जब खोल ही दिया है तो दे दे न।

दीदी – देने के लिए ही खोला है मेरी अम्मा। आज भाई को बहन की चूत तो मिलेगी ही। पर रोड़ा तू है

माँ – मैं कहा। कह तो रही हूँ दे दे।

दीदी – आज तुम्हे भी देनी होगी अपनी चूत। आज भाई अगर बहन चोदेगा तो माँ की भी चूत में घुसेगा। बोलो मंजूर है।

माँ – अब बचा ही क्या है।

दीदी ने फिर मेरे पैर बेंच के दोनों तरफ किया और अपने भी। आग हम दोनों का पैर बेंच पर लटक रहा था।

माँ दीदी की सामने दोनों तरफ पैर करके बैठ गई। उनका पेटीकोट कमर पर आ गया था।

अब दीदी धीरे से उठी और मेरे लंड को चूत पर सेट किया। बैठने वाली थी की मुझसे रहा नहीं गया और मैंने निचे से धक्का देकर उनकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया।

दीदी – बहनचोअअअअअ द, दे रही थी न। सब्र नहीं हुआ तुझे। आह , मार ही डाला रे। दीदी ने मुझे हिलने नहीं दिआ और जमकर मेरे लंड पर पूरा बैठ गईं। आह आह कितना लम्बा है रे। लगता है पहली बार चूत में लंड लिया है। आह माँ ये तो फाड़ देगा मेरी चूत को।

माँ दीदी के नजदीक आई और उनके मुम्मे को दबाते हुए बोली – अब समझ आया मैं क्यों नहीं दे रही थी। मेरी चूत ने खानदान के कितने लंड लिए होंगे पर यही असली मर्द है। मुझे भी इससे डर लगता है। तेरी चाची की तो फट ही गई थी।

दीदी – चाची बड़ी हिम्मत वाली है माँ। क्या करूँ ?

माँ – अब उखली में मुसल घुसा ही लिया है तो तेल पेरवा ही ले। तेल निकलेगा तो भी तो मैं पियूँगी।

अब दीदी ने धीरे धीरे मेरे लंड को थोड़ा सा निकाला और फिर अंदर ले लिया। मुझे लग रहा था की मेरा लंड जलती भट्ठी के अंदर है।

दीदी ने धीरे धीरे मेरे लंड पर कूदना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे पूरा कण्ट्रोल किया हुआ था तो सब उनके हाथ में था। मै पीछे से उनके मुम्मे पकड़ कर दबाने लगा।

दीदी – आह ससससस आह कितना बड़ा लंड दिया है माँ ने तुझे। मैं भी अपने बच्चे को खूब दूध पिलाऊंगी। उसका भी लंड बड़ा होगा। मामा के जैसा होगा। मेरी सेवा वो भी करेगा। आह आह तुझ पर झूलने में कितना मजा है। अब दीदी ने स्पीड बढ़ा दिया था। माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर दीदी की चूत को ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया।

दीदी ने माँ को बोला – माँ थोड़ा ग्रीज लगाओ न। मेरी मुनिया को प्यार करो न।

अब माँ झुक गईं और दीदी की चूत पर अपना जीभ फेरने लगी। दीदी की चूत पर डबल अटैक था। माँ दीदी की चूत में अंदर बाहर जाते लंड को बीच बीच में चाट ले रही थी।

दीदी – आह आह माआआआआ मजा आ रहा है। भाई तू भी कुछ मेहनत कर लगा दे जोर।

अब मैंने निचे से धक्के लगाने शुरू किये।

मैं – क्या मस्त चूत है दीदी। एकदम कुँवारी। जीजा ने तुम्हे ठीक से चोदा नहीं है।

दीदी – नहीं रे , ऐसा नहीं है। प्यार तो करते हैं पर उनकी माँ के दूध में दम नहीं रहा होगा। लंड तेरे जैसा बड़ा नहीं है। आह मार जोर से मार स्पीड बढ़ा। मेरा आने वाला है आह आह आह आह बहन चोद ही ली तूने। स्स्सस्स्स्स रहा नहीं जा रहा। पेल दे। आह आह आह

दीदी ने अपनी चूत से आखिर कार नमकीन पानी छोड़ ही दिया। मेरे लंड ने भी उसी समय पिचकारी छोड़ दी। दीदी एकदम से मेरे लंड पर बैठी ही रही। माँ अपना काम कर रही थी। दीदी की चूत के पानी के साथ साथ मेरा वीर्य भी बाहर रिस रहा था। माँ यूज़ पूरा चाट रही थी। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद दीदी उठी। उनकी चूत से मेरा लंड गप की आवाज के साथ बाहर आ गया। वो माँ को चूमने लगी। माँ के मुँह में जो रास था उसे चाटने लगीं। मेरा लंड अब भी खड़ा था। माहौल का असर था या फिर अगली चूत का इंतजार। दीदीको अपने गांड पर मेरे लंड का अहसास हुआ तो वो घूम गईं और बोली – क्या रे तेरा अभी तक शांत क्यों नहीं हुआ। माँ की मार कर ही मानेगा क्या ?

दीदी फिर मेरे लंड को चाट चाट कर साफ करने लगीं। माँ भी निचे बगल में आ गईं और उन्होंने भी मेरा लंड चाटना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड फिर से तैयार था। पर उसे माँ की चूत चाहिए थी। दीदी समझ गई थी यही सही मौका है।

उन्होंने माँ से कहा – कितना सुन्दर है न तेरा लल्ला।

माँ – हां रे , गोल गोल सुन्दर। देख इसका चेहरा कितना लाल है।

दीदी – वो वही जाना चाहता है जहाँ से आया है। ले ले माँ इसे अपने शरण में ले ले। देख कितना तड़प रहा है।

माँ – अब तो लेना ही पड़ेगा सरला। बहुत तरसाया है इसे मैंने।

कह कर माँ उठी और मेरे होठो को किस कर लिया। फिर बोली – आजा मेरे लाल , तेरी माँ की चूत तैयार है तुम्हे अंदर लेने के लिए।

मैं उठ खड़ा हुआ। माँ ने अपना वही बेंच पर टिकाया और चौपाया बन गई। मै उठकर उनके पीछे गया और उनके पीछे से अपना लम्बा मुसल उनके चूत पर सेट कर लिया। दीदी माँ के सामने बैठी थी उन दोनों का लिप लॉक हो चूका था। मैंने अपना लैंड धीरे धीरे माँ की चूत में डालना शुरू किया मैन उन्हें तकलीफ नहीं देना चाहता था। उन्होंने मेरे लिए छूटों का इंतजाम जो किया था। मैन धीरे धीरे माँ को पीछे से धक्का लगा रहा था और दीदी ने माँ के जीभ को अपने मुँह में ले राखी थी। मैंने अब स्पीड बढ़ा दिया। क्या गजब की चूत थी माँ की। पापा के जाने के बाद से कुँवारी ही थी। मेरे लंड तो लग रहा था जैसे एकदम संकरी गली में फंसा हुआ हो। इतने गरम माहौल में माँ की चूत में पानी की वजह से चिकनाई तो थी पर मुझे बिलकुल भी ढीलापैन नहीं लग रहा था।

माँ – आह जैसा लगा था वैसा ही है तेरा लंड। एकदम गधे जैसा। आह आह आह। पेल ले अपनी माँ को। कर ले अपनी तमन्ना पूरी। बहुत तरसाया है न मैंने आज कर ले अपनी वाली। जोर से घुसा आह आह।

मेरा लंड पूरा टाइट था। दीदी को पेलने के बाद भी पूरा कड़क था। मेरी पेले की स्पीड बढ़ गई थी। माँ खड़े खड़े थक गई थी तो मैंने उन्हें सीधा किया और उनका एक पैर उठा कर बेंच पर कर दिया और सामने से अपना लंड उनकी चूत में घुसा कर पेलने लगा। माँ ने अपने बाहों को मेरे कंधे पर लपेट लिया था। अब माँ भी धक्के लगा रही थी।

माँ – क्या मस्त चोदता है रे तू। अब समझ आया छोटी (चाची) से लेकर तेरी बहन भी दीवानी हो गई है। पेल मेरे राजा पेल। आह आह । देख सरला मेरी चूत कितनी खुश है। तेरे पापा के जाने के बाद उसे लंड नसीब हुआ है वो भी इतना तगड़ा।

दीदी माँ के पीछे जाकर बैठ कर उनकी गांड चाट रही थी। बीच बीच में वो उनके चूतड़ों पर थप्पड़ भी मार रही थी।

माँ एक बार झाड़ चुकी थी पर मेरा लंड तो थकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

माँ – आह इतनी पिलाई के बाद भी थका नहीं रे तू। तेरा लंड तो और भी बड़ा होता जा रहा है।

मै -अपने घर में गया है माँ। वहां इतना अच्छा लग रहा है उसे की निकलने को तैयार नहीं है। आज वो बहुत खुश है।

माँ – आज तो खुश होना ही है। बहन चोदने के बाद माँ भी जो चोदने को मिल गई।

दीदी ने तभी अपनी एक ऊँगली गीली करके माँ के गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी

माँ – आउच , रंडी कहीं की। उसमे आज तक कुछ नहीं गया। तेरे बाप ने बहुत कोशिश की थी मारने की वो तक नहीं पा पाया। क्या कर रही है।

दीदी नई ऊँगली जितनी गई थी उतनी डाले रखी

माँ अब तड़प रही थी। माँ – आह मादरचोद क्या हुआ तेरे मुसल को। पेल मुझे। इतना बड़ा लौंड़ा रखे है और कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तुझे तीन तीन चूत मिल गई। और भी छूटें दिलाऊंगी , बस तुम मेरी चूत को पेलते रहना।

मैं – मेरी गदराई माँ। तू तो मेरी रानी है। पहला प्यार है। मैं चाहे जितनों को अपना बना लूँ पर तुझसे दूर कभी नाह जाऊंगा।

माँ – आह आह आह मैं टी आ गई रे। जल्दी कर। देख तेरी एक बहन ने तो चूत दे ही दिया है , सुधा तो कब से प्यासी है। उसकी भी दिलवा दूंगी। हम चारो एक साथ होंगे तो कितना मजा आएगा। आह तेरी गर्लफ्रेंड बह बनेगी। एक नहीं कई बनेगी। सब तेरे सामने चूत खोल कर कड़ी रहेंगी। आआ आ माआआआ फाड़ दिया रे।

माँ की गरम गरम बातें सुन कर मेरे अंदर का लावा फुटने को तैयार था। कुछ ही क्षणों में मै भी धराशाही हो गया। हम दोनों एक दुसरे के बाहों में थे। दीदी भी आकर हमसे लिपट गई। बारिश तो कब की थम चुकी थी पर यहाँ अलग ही बारिश हुई थी। मैं सबसे ज्यादा खुश था आखिर माँ की चूत मिल ही गई थी। अब मैं सरला दी और माँ के साथ फ्रीली सेक्स कर सकता था।

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