अगले दिन जब मैं सुबह उठा तो माँ और चाची किचन में काम कर रही थी। दोनों ने पेटीकोट और ब्लॉउस पहना हुआ था। दूर से ही देख कर समझ आ रहा था की उन्होंने निचे कुछ भी नहीं पहना है। मैं पहुँच कर बोला – क्या हो रहा है ?
माँ – तेरे लिए कुछ बादाम और ड्राई फ्रूट शेक बना रहे है । कल तूने बड़ी मेहनत जो की।
चाची सुन कर शर्मा गई। मैंने उनको पीछे से जकड लिया और अपना लंड उनके गांड में घुसाते हुए बोला – कल तो बड़ा उचक उचक कर चुद रही थी। आज नई नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही हो।
चाची – छोडो मुझे , रात इतनी ली फिर भी मन नहीं भरा। मेरा तो बदन दुःख रहा है। जाकर माँ से लिपटो।
छोड़ने के लिए तो कह रही थी पर पीछे से अपना गांड भी मेरे लंड पर धकेली जा रही थी। कत्तई चुदासी माल थी मेरी चाची भी।
मैंने भी उन्हें छोड़ने के बजाय और जोर से जकड़ लिया और साथ ही अपने दोनों हाथो से उनके मुम्मे पकड़ लिए। मैं उनके मुम्मे दबा रहा था और वो अपने गांड को पीछे धकेल कर मेरे लंड को अंदर लेने की कोशिश में लगी थी।
हम दोनों को ऐसे देख माँ ने कहा – लल्ला तेरे हाथ में दुधारू गाय आई है दूह ले तो ताजा दूध शेक में डाल दूँ। उनकी बात सुनकर मैंने चाची के ब्लाउज को खोल दिया और आगे जाकर उनके मुम्मे ऐसे खींचने लगा जैसे वो सच में गाय हो और मैं उनका दूध निकाल रहा हूँ।
चाची – आह आह आह राजआज मैं सच की गाय थोड़े ही हूँ क्यों ऐसे थन से लटका है।
मै – अरे चाची तेरे थन नहीं दुहूँगा तो माँ की साइज के कैसे होंगे ? वैसे भी तुम्हारे चूचक उनके जैसे करने हैं न
चाची – अरे खींचने भर से थोड़े ही हो जायेगा। दुध भी तो होना होगा न।
माँ – कर ले दूसरा बच्चा , आ जायेगा तेरे थनों में भी दूध। राज को भी तब ताजे दूध का शेक बना कर देंगे।
चाची – क्यों इस बुढ़िया को माँ बनाने पर तुली हो जिज्जी। आह आह आह। कहाँ तो मेरी बिटिया के बच्चे देने की उम्र है ऑर्टम मुझे ही माँ बना रही हो।
मैं – कहो तो तुम माँ बेटी दोनों के कोख में एक साथ बच्चा दाल दूँ। कल रात तुमने श्वेता को भी दिलाने का वादा किया था।
चाची – वो तो चुदाई के नशे में मैं न जाने क्या क्या बक रही थी।
माँ – कोई नहीं तू राजी हो जा
चाची – अरे श्वेता क्या सोचेगी ? दुनिया क्या बोलेगी की इस उम्र में माँ बानी है। वैसे भी इनका खड़ा होता तो है नहीं बच्चा क्या देंगे।
मैं अब चाची के पेटीकोट की डोरी खोल चूका था और निचे से उनकी चूत चाटने में लग गया था। चाची सिसस्कारियाँ लेने लगीं।
चाची – स्स्स्सस्स्स्स , क्या मस्त चूसता है रे। चाट ले , तेरे छूने भर से पनिया जाती है मेरी चूत। वो जो छोटा ला लटक रहा है न उसे भी चूस। खा जा उसे। जब से तेरा लंड लिया है रोती रहती मेरी चूत तेरी याद में। पोछ दे उसके आंसू पी जा। आह आह आह ससससस जिज्जी क्या मस्त लौंडा पैदा किया है। कहा से सिखाया है तुमने इसे चूसना। आह आह
चाची की हालत देख माँ भी चुदासी हो गईं। शेक बनाना भूल वो अपने कमर को शेक करने लग गईं। उन्होंने ने भी अपना ब्लाउज खोल दिया और खुद से ही अपने चूचक उमेठने लगी। अब उन दोनों को इस हालत में देख मेरे लंड ने जवाब दे दिया था। अब उसे कोई न कोई जगह चाहिए था माल उड़ेलने को। मैं तुरंत उठा और चाची के पीछे जाकर अपने लंड को उनकी चूत पर सेट किया और एक ही झटके में अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।
चाची – अरे मार डाला रे। अबे चोदू मैं भाग थोड़े ही रही थी। आराम से डालता। फाड़ डाला तूने मेरी चूत।
मैं – अभी कहाँ चाची , ये तो शुरुआत है। तुम्हारी चिकनी चूत इतनी पनिया चुकी थी की मेरा लंड एकदम से चला गया और तुम हो की चिल्ला रही हो
चाची – आह रआआआअज , जिज्जीीीी , मार ले मेरी ले ले।
मैं एकदम रेस के घोड़े की तरह चाची की चूत में लंड के सहारे दौड़ लगा रहा था। कल रात ही झड़ा था मेरे आने में थोड़ी देर लग रही थी। चाची को लगा ये तो उनके लिए घातक हो जायेगा। उन्होंने मुझे जल्दी झड़ाने के लिए फिर से बोलना शुरू किया।
चाची – स्स्स्सस्स्स्स आह आह आह क्या जानवर की तरह चोदता है तू। सुधा और सरला तो फिर भी संभाल लेंगी मेरी श्वेता का क्या होगा
उसकी तो फट ही जाएगी। जीजजी आप माँ बनने के लिए बोल रही थीं न मैं तैयार हूँ। कम से कम पेट में बच्चा रहेगा तो ये चोदू मुझ पर नजर तो नहीं रखेगा। बना दे राज मुझे माँ बना दे। अपना ताजा दूध पिलाऊंगी फिर। बेटा देना। जब वो बड़ा हो जायेगा तो तो तुम दोनों भाई अरे नहीं तुम दोनों बाप बेटे मेरी एक साथ लेना। आह आह आह। मैं तो आ गई रे। कब आएगा तू।
चाची अब मेरी बहनो का नाम लेकर बोलने लगी – सुधा आ जा तू भी भाई से चुद कर माँ बन जा। तेरे मर्द में दम नहीं है। तेरा भाई मामा भी बनेगा बाप भी।
न जाने माँ को क्या सुझा बोली – उससे पहले बहनचोद बनेगा। बहन की लेगा मेरा लड़का। सबकी लेगा , सबकी चूत का भोसड़ा बनाएगा।
मेरा दूध पिया है इसने। सबको माँ बनाएगा। पेल दे इस रंडी को राज इसको आज अपना बीज दे ही दे।
माँ और चाची की इतनी उत्तेजक बात सुनकर आखिर मेरे लंड ने खुशी से अपना पूरा का पूरा माल चाची के अंदर उड़ेल दिया। हम दोनों थक चुके थे। तब माँ ने शेक बनाया और हम सब वहीँ किचन में निचे जमीन पर बैठ कर पीने लगे। मेरे सामने दो दो मस्त गायें अपना थान लेकर बैठी थी और हाथ में दूध , फलों और ड्राई फ्रूट से बना शेक था। मुझे सच में ताकत की जरूरत थी। लग रहा था जैसे अंदर से सारा माल निचोड़ लिया हो।
शेक ख़त्म करके मैं वहीँ माँ के गोद में सर रख कर लेट गया। माँ के मुम्मे मेरे सामने लटक रहे थे। मैं उनका दीवाना भला शांत कैसे रहता। मैंने उनके दो इंच के चूचक को मुँह में भर कर चूसने लगा। उस पर चाची बोली – दूध का दीवाना है ये तो। इसका बस चले तो दिन भर थन से लटका ही रहे।
सुनकर माँ हंसने लगी। दोनों दरअसल मेरी दीवानी हो चुकी थी। मैं माँ के लाड में तो था ही अब चाची का भी पूरा प्यार मिल रहा था।
अगले दो तीन दिन मेरे बहुत मस्ती में बीते। दो दो गदराई माल थी पास में। दोनों ने मुझे पूरी छूट दे रखी थ। मैं जब चाहता किसी को नंगा कर देता। चाची तो दिन में कई बार चुद रही थी पर माँ सिर्फ अपने मुम्मे देती थी। हद से हद तक अपने पिछवाड़े में मेरा लैंड फंसाने देती थी। चाची ने कई बार बोलै चुद क्यों नहीं जाती पर माँ रिश्ते की सीमा की दुहाई देखर चुप करा देती। मैं चाची के चुचकों को खूब खींचता और चूसता था। जब मैं थोड़ी बेरहमी करता तो कहती आराम से तेरे खींचने से दूध नहीं निकल आएगा। तिस पर मेरी माँ उन्हें माँ बनने को कन्विंस करने लगती। धीरे धीरे चाची का मन भी मान गया। बस अड़चन थी तो चाचा और श्वेता को मनाना। माँ ने दोनों को मनाने की जिमेदारी ले ली। शनिवार को चाची ने कहा की चलकर श्वेता को ले आते हैं। मैं और चाची उसके कॉलेज गए और वार्डन से परमिशन लेकर श्वेता को घर ले आये। रास्ते भर श्वेता चाची को अजीब नजरों से देख रही थी। वो कभी कभी मुझे भी वैसी ही नज़रों से देख रही थी। माँ बेटी बहुत चालू थी। लोगों को समझने और भांपने की बहुत अद्भुत क्षमता थी। उसे कुछ शक तो हो गया। घर पहुंची तो माँ उसे देखकर बहुत खुश हुई। उसे माँ को देख कर भी कुछ शक हुआ। मैं और चाची दोनों समझ गए की श्वेता को शक हो रहा है।
एकांत में श्वेता ने चाची से कहा – एक हफ्ते में ही शहर की हवा लग गई है तुम्हे। बदली सी नजर आ रही हो।
चाची – क्यों मेरी ख़ुशी से तुझे परेशानी है। गाँव में सब होते हुए भी मैं कितनी अकेली थी तुझे पता नहीं क्या ? तेरे बाप को मेरी कोई फिरकर तो है नहीं। न ही मेरी जरूरतों का पता।
श्वेता – तो अब खुश रहने के लिए तुम कुछ भी करोगी ?
चाची – मैं भी एक औरत हूँ , बाहर इज्जत लुटाने से बढ़िया है घर में खुश रहा जाये। देख न तेरी बड़ी अम्मा भी खुश हैं।
श्वेता – हाँ सब देख रही हूँ। राज राजा बना हुआ है।
चाची – राजा बेटा है। काश मेरा भी एक बेटा होता।
तभी मेरी माँ भी वहां आ गई। बोली – माँ बेटी में क्या गुपचुप बातें हो रही हैं
चाची – देखो न जिज्जी , लड़की बाहर क्या निकली माँ की फ़िक्र ही नहीं है। इसे मेरे अकेलेपन का अंदाजा भी नहीं है।
माँ – तभी तो कह रही हूँ एक बार फिर से प्रेग्नेंट हो जा। बच्चा हो जायेगा तो बढ़िया टाइम पास हो जायेगा।
श्वेता – आप दोनों लोग पागल हो गईं हैं।
खैर बात आई गई हो गई पर हमारी आपस की हरकतों से मेरे माँ और चाची के साथ बदले रिश्ते पर उसका शक यकीन में बदल गया। चाची ने उसे सवाल जवाब में इस चीज लगभग स्वीकार कर ही लिया था।
दो दिन ऐसे ही बीत है। माँ और चाची ने उसके पसंद की खाने पीने की चीजें बनाई। उसके लिए शॉपिंग भी की। संडे दोपहर में तीनो ने बिउटी पार्लर जाने का प्लान करने लगीं। श्वेता माँ को भी लेकर जाना चाहती थी । माँ मना कर रही थी मैंने कहा की ले जाओ ये अपने पर बिलकुल ध्यान नहीं देती।
श्वेता – चलो बड़ी अम्मा। तुम पर कोई तो ध्यान दे रहा है। सज लो उसी के लिए।
मैंने मजाक किया – तू भी सज ले। तेरे पर भी ध्यान दे दूंगा बहना।
श्वेता ने मुझे झापड़ दिखाते हुए कहा – मुझसे दूर ही रहना। उन्ही से चिपके रहो। माँ और चाची को देख कहा – चलो मिल्फ चलो।
चाची – ये क्या कह रही हो।
श्वेता – कुछ नहीं , अपने दुलारे से पूछ लेना। आखिर में तीनो चली गईं। और मैं बाहर उनके आने तक घूमता रहा।
एक घंटे बाद जब तीनो निकली तो उनकी रंगत बदली हुई थी। श्वेता ने कॉलेज के चक्कर में उतना ही काम करवाया जिससे वहां कोई ऑब्जेक्शन न हो पर माँ और चाची का फेसिअल से लेकर मैनीक्योर और पैडीक्योर तक करवाया था। माँ की आँखें आबादी बड़ी थी वो और सुन्दर लगने लगी। मैं तीनो को देखता ही रह गया।
श्वेता बोली – सुधर जा माँ बहन पर नजर डाल रहा है।
मैं – माँ और बहन पर तो बस नजर डाला है। पर चाची पर तो कुछ और भी डाला है।
चाची – सशह्ह्ह कुछ भी बोलता है।
मैं – अरे मैं कह रहा था की तुम एंटी सुन्दर लग रही हो अब चाचा तो घर से निकलेंगे ही नहीं।
चाची – अरे कहाँ। उन्हें मेरी कदर कहाँ
मैंने मजाक में कहा – मैं उनकी जगह होता तो बस तुमसे चिपका ही रहता।
श्वेता – मुझे तो लगता है तुम चिपक चुके हो
मैं – हीहीहीहीही
रात में है सब श्वेता को हॉस्टल छोड़ने गए। सोमवार से उसकी कॉलेज शुरू होने थी। मैं तो बस टाइम पास करता था।
चाची रात में थोड़ी उदास थी। मैंने कहा – उदास क्यों हो जान। वो बहुत समझदार है। उसकी चिंता मत करो
माँ भी चाची को मनाने लगी। अगले दिन चाचा चाची को लेकर जाने वाले थे। वो इस बात से भी दुखी थी। हम सब माँ के कमरे में बिस्तर पर बैठे थे। मैंने सिरहाने से टेक लगाया हुआ था चाची मेरे सीने पर सर रख कर अधलेटी अवस्था में थी। माँ कमरे में कपडे वगैरह सही कर रही थी। माँ हमें उस स्थिति में देख कर बोली – लग रहा है जैसे दो प्रेमी बैठे हों।
चाची इस बात पर इमोशनल हो गईं और रोने लगी। मैंने उन्हें अपने बाहों में और कस लिया और चुप कराने लगा। पर उनके आंसू थम ही नहीं रहे थे। उनके आंसू देखकर ना जाने मेरे मन में क्या आया मैंने जीभ निकाल कर चाट लिया आंसू चाटते चाटते मैं उनके पुरे चेहरे को चाटने लगा। अब सिचुएशन ये मैंने चाची को लिटा दिया और उनके आंसू पीते पीते उनके पुरे चेहरे को चाट भी रहा था और चूम भी रहा था।
चाची ने साडी पहनी हुई थी किसका पल्लू अब खिसक चूका था। मेरा एक हाथ उनके बालो में उलझा था और एक से मैं उनके मुम्मे दबा रहा था। चेहरे को चूमते चाटते मैं चाची के गर्दनपर भी चूमने और चाटने लगा। चाची ने तभी अपने हाथ उठा कर मुझे बाँहों में भर लिया और अपने सीने से लगा लिया। चाची का ब्लाउज मेरे चूमने से गीला हो रखा था। मेरी उंगलिया अब चाची के पेट पर नाभि के आस पास टहल रही थी। मुझे पेट और नाभि से खेलने की आदत तो थी ही। चाची की नाभि भी गहरी और गोल थी। मैं अपनी ऊँगली से उनकी नाभि के अंदर बाहर करने लगा। अब चाची पर मस्ती छा चुकी थी वो अपने पैरों को आपस में रगड़ रही थी। हम दोनों उत्तेजना में एकदम पसीने पसीने हो रखे थे। माँ भी हमारे बगल में आकर लेट गईं थी। वो बस हमें देख रही थी।
चाची – आह आह जिज्जी क्या देख रही हो आओ न तुम भी।
माँ – देख रही हूँ तुम दोनों कितने पागल हो रखे हो। थोड़ी देर पहले बेटी के लिए रो रही थी अब भतीजे के साथ मदमस्त हो राखी हो।
चाची – आज की ही तो रात है।
माँ – अरे पगली भेज दूंगी इसे गाओं । कर लेना मस्ती। या फिर आ जाय करना यहाँ जब भी चुदने का मन करे।
चाची ने माँ को भी बाहों में भर लिया। अब हम तीनो एक साथ लिपटे पड़े थे। चाची कभी मुझे चूमती तो कभी माँ को। मैं भी कभी माँ को चूमता कभी चाची को।
इस लिपटी लिपटे के खेल में हम तीनो पसीने पसीने हो रखे थे। थोड़े देर बाद मैंने चाची के ब्लॉउस के हुक खोल दिए और स्तन पान करने लगा। मैंने देखा माँ चाची के गले को चाट रही थी। गले को चाटते चाटते माँ चाची कंधे को चूमने लगी। अब वो चाची के पुरे बाहो को चाट रही थी। माँ ने चाची को उठाकर उनका ब्लाउज निकाल दिया और उनके बगलों को चाटने लगी।
चाची – जिज्जी क्या करती हो। पसीना लगा है। गन्दा है।
माँ – मुझे नमकीन पानी पसंद है। पसीने की खुशबु एकदम नशा कर देती है। मैंने माँ को इस तरह करते पहली बार देखा था। वो चाची ले ऊपरी हिस्से को बुरी तरह चाट रही थी। उनको ऐसा करते देख मैं भी चाची के दुसरे साइड के पसीने को चाटने लगा। सच में नशा सा फील हुआ। अब चाची एकदम पागल सी हो गईं। अहम दोनों माँ बेटे उन्हें बुरी तरह से चाट रहे थे। थूक और पसीने से चाची का शरीर गिला भी हो गया था और चमक भी रहा था।
चाची – तुम दोनों मार डालोगे मुझे। जाते जाते मुझे पागल बना दोगे। सससससस आआह ाआअह बस करो। मेरो चूत पनिया चुकी है कोई उसका भी ख्याल करेगा। मैं नीचे सरकने को था तो माँ ने मुझे रोक दिया और चाची की पेटीकोट उठा कर उनकी चूत चाटने लगी।
मेरा लैंड बिलकुल उफान पर था। मैं सिक्सटी नाइन वाले पोजीशन पर आ गया और अपना लैंड चाची के मुँह में डाल दिया अब मैं और माँ दोनों चाची की चूत को बारी बारी से चाट रहे था। मेरा लंड चाची के मुँह में था तो बस गों गों की आवाज कर पा रही थी। मैं और माँ आपस में कभी कभी एक दुसरे को चूम भी ले रहे था। हमारे होठ पसीने। थूक और चूत के रास से भींगे हुए थे। मैं अब चाची के मुँह में लंड ऊपर निचे करने लगा था। माँ चाची की चूत में उंगली कर रही थी और मैं उनके लबो और छोटे से लंड को प्यार कर रहा था। थोड़े देर में चाची की चूत ने खूब सारा पानी छोड़ दिया। माँ ने अपनी ऊँगली निकाल ली और पहले खुद चाटी फिर मेरे मुँह में डाल दिया। मैं उनकी ऊँगली चूसने लगा। माँ ने एकदम नशीली आवाज में कहा – चाट ले अमृत है।
मैंने कहा – अपना अमृत कब दोगी। माँ उठ कर बैठ गई। उन्होंने अपना हाथ अपने पेटीकोट में डाला। उनकी चूत भी पानी छोड़ चुकी थी। उन्होंने अपनी उँगलियों को अपने चूत रास से भिंगोया और मेरे मुँह में डाल दिया। कहा – ले अपनी माँ का भी अमृत ले ले।
इतनी मादक आवाज को सुन मेरा तन मन और लंड चारम सुख की अवस्था में पहुँच गया । मेरे ने खूब सारा पानी चाची के मुँह में उड़ेल दिया।
चाची की हालत खराब थी। वो जल्दी से उठ कर मेरा वीर्य बाथरूम में जाकर उड़ेलने को थी की माँ ने उन्हें रोक लिया और उनके मुँह में अपना मुँह सत्ता लिया और मेरा पूरा वीर्य ले लिया। कहा – मेरे बेटे का माल ऐसे थोड़े ही बर्बाद होने दूंगी। उन्हें ऐसा करते देख चाची भी रुक गईं और मेरे वीर्य को निगल लिया।
मैं वहीँ बिस्तर पैर लेता था और मेरे सामने दोनों एकदम रंडियों जैसे बिहेव कर रही थी। फिर चाची उठ कर बाथरूम चली गई।
मैंने माँ को पकड़ लिया और कहा – कितनी मस्त माल हो तुम माँ। एकदम चुदास। अपने चूत का अमृत डायरेक्ट कब पिलाओगी। अमृत मंथन करवाओग। मेरे लंड से अंदर चक्की कब चलवाओगी।
माँ – इंतजार का फल मीठा होता है लाल। समय आने पर सब मिलेगा। अभी तुझे जो मिल रहा है उसी से मजे ले।
चाची लौटकर आईं तो मैंने उन्हें भी अपने बाहों में भर लिया। माँ ने मेरा लंड मुठियाना शुरू कर दिया था। मेरा लंड दुबारा खड़ा हो गया। चाची बोली – हाय रे अभी तो इतना माल निकाला है फिर से तैयार।
मैंने कहा तुम्हारा इन्तजार कर रहा ह। आओ सवारी करो। चाची भी बेशर्मो की तरह उठी और अपना पेटीकोट उठाते हुए मेरे लंड को अपने चूत में निगल लिया। दूसरा राऊंड शुरू हो गया था। अब चाची मेरे ऊपर कूद रही थी जिसके वजह से उनके मुम्मे ऊपर निचे हो रहे थे। मैंने उनको पकड़ कर मुँह में लेना चाहा तो माँ ने मना कर दिया कहा – देख उछलते मचलते कितने मजे दे रहे हैं। पीने के लिए मेरा है न। उन्होंने अपने मुम्मे मेरे मुँह में डाल दिया।
चाची चुद रही थी और उनके उछलते फूटबाल क्या खूब लग रहे थे।
उस रात चाची को मैंने दो राउंड और पेला। चाची भी मेरा साथ दे रही थी। रात हम कब सोये याद ही नहीं।
अगले दिन चाचा आये और चाची को लेकर चले गए। जाते जाते माँ ने चाचा से वादा लिया था की वो चाची को महीने में एक बार जरूर भेजें ।
चाचा ने भी वादा किया और दोनों चले गए

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