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रिंकी मुझे जाते हुए देख रही थी, लेकिन उसकी नजर मोबाइल पर थी….. उसकी नजरे बता रही थी…… कि उसके मोबाइल फोन में कोई गहरा राज छिपा हुआ है…???

मै अपनी बाइक पर सवार सीधा अपने दोस्त की मोबाइल शॉप पर पहुँच गया। उसकी छोटी सी दुकान है, बेचारा खाली बैठा था। उमर में वो मुझसे छोटा है बेचारे की शादी भी नही हुयी है। मुझे देखकर एकदम खुश हो कर बोला और भैया बड़े दिनों के बाद दर्शन हुए……???? बस एक बार भाभी के दर्शन और करा दो, तो जीवन सफल हो जाए, वैसे “भाभी मजे में तो है”….???

 “भाभी मजे में तो है” दोस्तो के मुह से ये शब्द अक्सर हम सुनते हैं, दोस्त बड़े हरामी होते है, वो जानबूजकर ऐसा पूछते है, अगर सामने वाला जरा सा इस बात को सीरियस ले, और अपनी पत्नी की कथा शुरु कर दे। तो ये हरामी दोस्त सलाह कम सामने वाले की लुगाई को फँसाने की जुगाड़ में लग जाते है।

 भैया – भाभी सब मजे में है, तू बता भोसड़ी के तू क्यों परेशान सा दिख रहा है….! मैने जबाब दिया।

नौकरी मिल नही रही, लड़की पट नही रही, शादी हो नही रही, घरवाले दारू पीने नही देते। परेशान नही दिखूँ तो क्या करू??

हाहा हाहाहा सही कह रहा है यार… एक समय मेरी भी हालत तेरी जैसी थी… लेकिन  होप मत छोड़…. किनारे पर बैठे रहो एक ना एक दिन लहर आयेगी….. मैने हस्ते हुए जबाब दिया।

जब तक लहर तो आयेगी तब तक मेरी गांड फट जायेगी…  हाहा हाहाहा पहले औरत नसीब लेकर आती थी, अब औरत नसीब देखकर आती है। उसने भी हस्ते हुए कहा।

सच कह रहा है यार “” समाज में बदलाव उस दिन होगा, जब नौकरी करती लड़कियों की शादी होगी बेरोजगार लड़को से “” अचानक से मेरे अंदर का प्रोफेसर बोला।

बस करो प्रोफेसर साहब, ये अपने सामाजिक उपदेश अपनी क्लास के बच्चो को सुनाना… अगर मेरा भला करना चाहते हो तो अपने कॉलेज की कोई कन्या या मास्टरनी का नंबर दे दो। हाहा हाहाहा हाहा हाहाहा

खैर छोड़ो आज मेरी याद कैसे आ गयी भैया….???

 सुन जरा ये मोबाइल फोन देखो अचानक से हाथ से छूट गया और बंद हो गया है, इसे ठीक कर…..!

वो मोबाइल हाथ में लेकर बोला डिस्प्ले चली गई है, बदल देता हूँ….. थोड़ी देर बाद उसने मोबाइल ठीक कर दिया…. जैसे ही फोन ऑन हुआ और उसकी स्क्रीन पर चमक रहे वालपपेर को देखकर उच्छल कर गाना गाते हुए नाचने लगा….!

देख ली भैया आज आखिरकार मैने भाभी के दर्शन कर ही लिए…….. ह्म्म्म

मै भी मुस्कुरा रहा था, लेकिन जब मैने उसके गाने  की शब्द पर गौर किया तो अचानक से चोंक पड़ा।

मैने उसके हाथ से मोबाइल लिया और उसकी स्क्रीन पर छपे फोटो को देखा तो मेरी आँखे खुली रह गयी……. रिंकी ने मेरी और कुसुम की शादी की स्टेज पर खींची गयी फोटो जिसमें…… मै बीच में और कुसुम, रिंकी अगल बगल खड़ी थी उसको क्रॉप कर के कुसुम को हटा दिया था और अब फोटो में मै, रिंकी के साथ इस तरह खड़ा हुआ नजर आ रहा था कि मेरी बेटी ही मेरी दुल्हन है, मजे की बात ये है उस समय रिंकी भी लहंगा चोली पहने हुए थी।

मैने माथे का पसीना पोछते हुए दोस्त से कहा…. चल अब चलता हूँ और उसके बताए हुए पैसें देकर घर की ओर वापस चल दिया। मेरे मन में बहुत जिग्यसा हो रही थी कि आखिर रिंकी के फोन में और कौन कौन से राज छिपे हुए है, जिनको मै नही जानता। मैने सड़क किनारे बने एक छोटी सी चाय की दुकान पर बाइक खड़ी कर चाय की चुस्की लेते हुए रिंकी के फोन का पोस्ट मार्टम कर उसके छिपे गहरे राज को मोबाइल में खांगालने लगा।

आखिरकार मैने मोबाइल में अपनी बेटी के गुपत राज को ढूँढ लिया था. इस छोटे से फोन मे मेरी बेटी अपना इतना बड़ा राज़ छिपा कर रखती थी. ये मोबाइल बेहद व्यक्तिगत चीज़ों का ख़ज़ाना था. इनमे कुछ सस्ती ज्वेलरी जैसे नोज रिंग, ईयर् रिंग, मॉडर्न ड्रेस, शूज़, साड़ी, घड़ी, आदि की फोटो थी जिनकी कीमत बाज़ारु कीमत से ज़्यादा शायद जज़्बाती तौर पर थी.

रिंकी के इंस्टा पर पोस्ट होने की राह देख रहे बेहद भड़कीले, सेक्सी, उत्तेजक शॉर्ट वीडियो देखकर मै तो हिल गया। लेकिन एक बात नोटिस करने वाली ये थी कि उसने सारे वीडियो बनाकर सिर्फ सेव किये हुए थे, पोस्ट नही किये थे। यानी कि वो ऐसे वीडियो सिर्फ खुद की खुशी के लिए बनाती है।

कुछ उसकी स्कूल के ग्रुप टूर में एक साथ सहेलियों के फोटोग्रॅफ्स थे, कुछ कभी नज़दीकी लोगो जैसे जूली मौसी, प्रीति मौसी, उसकी मौसी की लड़की के द्वारा लिखी गयी शयरिया, जोक्स, बर्थ डे, त्यौहार, बेस्ट विशेज, मैसेज थी. कुछ स्कूल की नोटस, गैस पेपर, प्रोजेक्ट के स्क्रीन शॉट थे जो शायद उसके मतलब के थे. एक खास किसम का मार्का लिए दो शहर के फोटो थे, इस मार्क को मैं जानता नही था. ये शहर मॉरिशस या लंदन के फोटो है ऐसा मुझे लग रहा था। जहाँ जाने के लिए मै सपने में भी नही सोच सकता था.

उसके बाद कुछ ख़ास चीज़ें सामने आई. तीन बड़े बड़े मैसेज प्रेम पत्र टाइप के जो उसके आशिको ने उसको लिखे थे. दो बड़े बड़े मैसेज किसी एक लड़के के लिखे हुए थे जिसने नीचे, मैसेज के अंत में अपने नाम के सुरुआती अक्षर “र” से साइन किए हुए थे मै अपने बेटी के आशिको के बारे में अभी तक यकीनी तौर पर नही जानता था.

तीसरा मैसेज किसी ऐसे लड़के का था जिसका दिल मेरी बेटी ने किसी मामूली सी बात को लेकर तोड़ दिया था और वो मेरी बेटी रिंकी से वापस दोस्ती करने की भीख माँग रहा था.

“”बहुत मोहब्बत है तुझसे,

बस जताना नहीं आया !

इतनी मेहनत से 30 से 34 के बना दिये,

और तुम कहती हो दबाना नहीं आया !””

😜
😂

इसके अलावा मुझे अलग अलग सेक्सी पोज में, मॉडर्न ड्रेस में, तीन फोटो या यूँ कहे कि तीन सेक्सी लड़कियों की फोटो मिली. सभी एक से एक सुंदर और जवान,  उनमे से एक फोटो को देख कर मैने फ़ौरन पहचान लिया, वो वही लड़की थी जो दोपहर में पार्किंग लॉट में एक लड़के के साथ अपने चूचे चुसवा रही थी, लेकिन फोटो में उसके चूचे देखकर मैं यह कह सकता था कि फोटो उसकी लड़के से चूचे चुसवाने के पहले की थी क्योकि तस्वीर में उसके चूची का साइज काफी छोटा नींबू का जैसा दिख रहा था और आज हकीकत में उसके चूचे का साइज संतरो से भी बड़ा था।

इन सबको देखना कुछ कुछ दिलचस्प तो था मगर उतना नही जितना मैने मोबाइल के स्क्रीन पर लगे वालपपेर फोटो को देखने के वक्त सोचा था. मुझे अपनी बेटी की निजी जिंदगी से कुछ लेना देना नही था मगर मुझे ताज्जुब था कि यह सब मेरी पत्नी कुसुम और उसकी मम्मी की नज़रों से कैसे बचा रह गया और अगर उसे पता है तो उसने मुझको अभी तक बताया क्यों नही. या तो कुसुम को अपनी बेटी की कोई परवाह नही है, क्योंकि कुसुम के लिए उसकी सरकारी अफसर बनने का सपना उसकी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है या शायद अपनी बेटी का यह मोबाइल फोन का राज अभी तक उसकी निगाह से छिपा हुआ है.. .. … .

इस सब मे जिस चीज़ ने मेरा ध्यान खींचा वो था माई ब्यूटीफ्युल् ड्रीम के नाम वाला  एक फोल्डर में चमकता हुआ दिल का शेप वाला इमोजी. वो फोल्डर जब मैने खोलकर देखा तो मालूम चला कि उसमें कोरियन लड़के लड़कियों की सेक्स करती हुयी फोटो थी . इन फोटो में लड़की और लड़का   अलग अलग आसनों/मुद्राओं मे संभोग करते हुए नजर आ रहे थे। अधिकांश फोटो में कैप्शन (जैसे किसी के नाम) लिखे हुए थे   और लड़की लड़के की उमर में अंतर साफ साफ नजर आ रहा था। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे एक बाप अपनी बेटी के साथ संभोग कर रहा हो तब ये फोटो खीची गयी है.

पहले पहल तो मुझे अपनी आँखों पर यकीन ही नही हुआ कि शायद मैने सही से देखा ही नही है, मैं अपनी आँखे फाड़ कर टकटकी लगाकर पूरे ध्यान से देखने लगा.

मैने आज से पहले कभी भी अपनी बेटी रिंकी को संभोग के साथ जोड़ कर नही देखा था. वो मेरे लिए सिर्फ सेक्सी, सिडक्टिव थी कि मैं जानता भी नही था कि उसकी भी शारीरिक ज़रूरतें थीं उसकी उम्र की अन्य लड़कियों ही तरह. अब तक तो रिंकी मेरे लिए सिर्फ़ बेटी थी सिर्फ़ बेटी, एक संभोग सुख देने वाली लड़की कभी नही….. और यही मेरी बेटी का असली राज़ था जिसे उसने अपनी मम्मी से, मुझसे, दुनिया से छिपाया हुआ था. अपनी मम्मी के पति यानी कि अपने पापा के साथ संभोग करना उसका खूबसूरत सपना है.

अब यह मेरी बेटी के मोबाइल में कैद खूबसूरत सपने का राज उसका अकेला का राज नही रहा था। ना जाने कितने दिनों से

वो ना सिरफ़ अपने राज़ की हिफ़ाज़त कर रही थी बल्कि उसे कब अपनी कल्पनाओ में सच करती होगी इस बात का भी पूरी शिद्दत से ध्यान रख रही थी.

लेकिन नियति या होनी से यह बात मुझसे छिपी ना रह सकी कि उसके खूबसूरत सपने का राज की मुझे भी जानकारी हो गयी थी। मेरे अंदर का प्रोफेसर मुझसे ही सवाल कर रहा था….. क्या एक पिता अपनी कमसिन् जवान बेटी से संभोग कर सकता है ????? उसकी वासना की पूर्ति कर सकता है ??!?? उसकी शारीरिक जरूरतों का ख्याल रख सकता है?????

क्या ऐसा कभी हुआ है????? होता है???? किसी किताब मे ??? किसी धर्म में पिता और पुत्री के शारीरिक सम्बधो को जायज बताया गया है????? ऐसे अनगिनत सवाल प्रोफेसर अरुण के मन आज अचानक से खड़े हो गए।

ठरकी अरुण तो कब से बेटी के प्यार में पागल है, वो तो खुश है, कि घर में उसके और बेटी के अलावा कोई नही है मौका अच्छा है उठा लो फायदा…..!!!

लेकिन प्रोफेसर अरुण का जमीर गँवारा नही कर रहा था उसे बस एक प्रमाण की आवश्यकता थी जो पिता पुत्री के बीच बने सम्बधो को जायज ठेहरा दे।

तभी अपने खुद के सवालों की उलझनों में उलझे प्रोफेसर अरुण के निजी फोन पर अज्ञात नंबर से एक व्हाट्स अप में मैसेज आया….. उसे पढ़कर प्रोफेसर साहब के चेहरे पर चमक आ गयी मेरे जवान जिस्म में हलचल सी हुई, मुझे लगा मेरे हाथ में दुनिया का कोई अजूबा लग गया था. प्रोफेसर साहब को लिखित में प्रमाण मिल गया था।

इस मैसेज को पढ़कर मेरे तन बदन में आग लग गयी। लेकिन जो शब्द लिखे थे वो सत्यता की कसोटी पर खरे थे। खुद के लगाए पेड़ के फल खाने में कैसा पाप????? खुद की मेहनत से तैयार की गयी फसल का भोग करने में कैसा दोष???? अपनी पाली गयी भैस का दूध पीना कैसा अधर्म ????? मेरे अंदर कामवासना का संचार होने लगा। मारे खुशी के मैने बाइक स्टार्ट कर तेज रफ्तार से घर की ओर चल पड़ा।

सोचने और करने में बहुत फर्क होता है, मै अपनी तरफ से पहल नही करना चाहता था। मुझे बस उसकी पहल करने का इंतजार करना था इसलिए मैने रिंकी से मोबाइल फोन सही होने में दो दिन लगेगे ऐसा बहाना बनाने का फैसला लिया। और इन दो दिनों में अपना मोबाइल उसे उपयोग में लाने का विचार किया। इस उम्मीद से कि वो मेरे मोबाइल में क्या क्या देखेगी???

शाम के साढ़े सात बजे मै घर पहुँचा, जब मैने उसे रसोई में देखा तो मुझे उसकी उपस्थिती में बेचैनी सी महसूस होने लगी. मुझे थोड़ा अपराध बोध भी महसूस हो रहा था के मैं उसके मोबाइल फोन में छिपे राज को और उसकी अंतरंग दूबिधा को जान गया था और उसे इस बात की कोई जानकारी नही थी. उस अपराधबोध ने अपनी बेटी के लिए मेरी सोच को थोड़ा बदल दिया था. उसके हसी सपने की जानकारी ने उसके प्रति मेरे नज़रिए में भी तब्दीली ला दी थी. मैं शायद इसे सही ढंग से बता तो नही सकता मगर मेरे अंदर कुछ अहसास जनम लेने लग थे.

जब वो किचिन से बाहर हॉल में आई तो बरबस मेरा ध्यान उसकी टाँगो की ओर गया. मैं चाहता नही था मगर फिर भी खुद को रोक नही पाया. सिर्फ़ इतना ही नही, मेरी नज़र उसकी टाँगो से सीधे उस स्थान पर पहुँच गयी जहाँ उसकी टाँगे आपस में मिल रही थीं, उपर से वो टाइट जीन्स पहने हुए थी और उसने अपनी टीशर्ट जीन्स के अंदर दबा रखी थी जिस से उसकी टाँगो का वो मध्य भाग मुझे बहुत अच्छे से दिखाई दे रहा था बल्कि थोड़ा उभरा हुआ नज़र आ रहा था. मैं उसकी जाँघो को घूर रहा था.

वो अपनी फॅवुरेट जीन्स पहने हुए थी और वो स्थान जहाँ उसकी जांघे आपस में मिल रही थी वहाँ थोड़ा गॅप था जो उसकी चूत को हाइलाइट कर रहा था……..खूब उभर कर. मैने अपनी बेटी को पहले भी उस जीन्स में देखा था मगर टाँगो के बीच का वो गॅप मुझे कभी नज़र नही आया था ना ही वो तिकोने आकर का भाग. असलियत में, शायद मैने वो उभरा हुआ हिस्सा देखा ही नही था, शायद वो मेरी कल्पना मात्र थी. उसकी जीन्स काफ़ी मोटे कपड़े की बनी हुई थी इसलिए उस हिस्से को देखना बहुत मुश्किल था मगर आज मैं उसे एक अलग ही रूप में देख रहा था..उसकी चूत की ओर बार बार ध्यान जाने से मुझे कुछ बेचिनी महसूस होने लगी थी. मै जल्दी से खाना खा कर सीधे अपने कमरे में चला गया।

समय अपनी रफ्तार से भाग रहा था, रात के दस बजने वाले थे लेकिन अभी तक रिंकी की तरफ से कोई पहल नही हुयी थी। ना ही उसने अभी तक अपने मोबाइल फोन के बारे में कुछ पूछा था। घर में अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। पापा हाल में, मै अपने कमरे में, और रिंकी अपने कमरे में करवटे बदल रहे थे।

नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी, रह रह कर रिंकी के मोबाइल में संभोगरत फोटो मेरे जिस्म में वासना का स्तर बढ़ा रहे थे। मेरे शरीर में आग लगी हुई थी, मैने अपने सारे कपड़े उतारे और एक हाथ से अपने लंड को सहलाने लगा।

तभी खट से मेरा मोबाइल फोन बजने लगा, मेरी मम्मी का वीडियो काल था। उन्होंने मेरी सलामती की खैरियत पूछने के लिए बात करने के लिए काल किया था।

बेटा अरुण ऐसे बिना कपड़ो के क्यो लेटा है, गर्मी ज्यादा पड़ रही है क्या  ???

मैं मम्मी से बात करने में  कतरा रहा था, मै उन फोटो को देखकर पहले से ही बहुत उत्तेजित हो गया था, और मेरी हिम्मत नही हो रही थी कि मैं मम्मी की तरफ देखूं,

“””क्योकि ऐसी तस्वीरें देखकर नीयत घर की औरतों के प्रति बदल जाती है, देखने वाला वो ही सोचता है और बहुत उत्तेजित हो जाता है पर अगले ही पल ग्लानि से भर भी जाता है। पर मन नही मानता है वो तो कभी कभी ग्लानि से ऊपर उठकर सोचने लगता है कि घर में ही मिल जाए तो कितना मजा आ जाए, पर ये असंभव चीज़ होती है, इसलिए बस ये सिर्फ कल्पना में ही होता है “”

एक बार मैंने चुपके से फोन में मम्मी को देखा तो वो झुककर मुझसे वीडियो काल में बातें कर रही थी जिससे उनके भारी भरकम स्तन मेरी ओर थे ।

“” पत्नी के साथ नाता जुड़ने के बाद जब मेरे दिल में माँ के बारे में ख़याल आता है तो मुझे लगता की मैं पत्नी के साथ दगा कर रहा हूँ. जब माँ से मेरी नज़दीकियाँ बढ़ती है तो मुझे बेटी का ख़याल आने से लगता कि मैं माँ से दगा कर रहा हूँ, “”

आज पहली बार मम्मी को इस नज़र से देखकर आत्मग्लानि के साथ साथ जो उत्तेजना हुई उसका कहीं कोई मेल नहीं, शर्म के मारे मैं इधर उधर देखने लगा। अभी कुछ ही पल बीते थे कि एकाएक मम्मी की आवाज सुनकर मैं चौंक गया।

बेटा आज बहू के साथ मेरी कहासुनी हो गयी, तुम जरा उससे बात कर थोड़ा समझाओ…..??

मै : अरे…. क्या हुआ…???

बेटा बहू को नौकरी की इजाजत देकर में पछता रही हू, उसका ऑफिस में चाल चलन मुझे ठीक नहीं लग रहा है, बेटा बड़ा डर सा लग रहा है, पता नही क्या अनर्थ होने वाला है ?????

मै :  क्यों क्या हो गया, पूरी बात विस्तार से बताओ मम्मी।

बेटा कुसुम मुझसे बोली मम्मी आज मेरे साथ ऑफिस में चलने के लिए तैयार हो जाओ…. मैने पूछा क्यों..???? तो बहू बताने लगी आज उस के ऑफिस में ESIC का कैंप लगा हुआ है जिसमें सब कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा किया जाने वाला है.

सबने अपना और अपने परिवार का नाम दर्ज कराया है कि जिस दिन बैंक वाला आएगा, उस दिन जिन जिन का नाम दिया गया है, उसे हस्ताक्षर करने ऑफिस बुलाया जाएगा.

उस दिन उसी हिसाब से सबके घर वाले रोजाना आ रहे है, माँ-बाप, बीवी-बच्चे   सबको हस्ताछर करना अनिवार्य है.

उसने मुझसे कहा कि मम्मी बस दस मिनट के लिए एक हस्ताक्षर वास्ते चलना है.

मैने कहा ठीक है और हम दोनों तैयार होने लगे…!!

वो अपनी लाल साड़ी, डीप कट ब्लाउज के ऊपर जिस्से उसकी आधे से ज्यादा चूचीया ब्लाऊज से बाहर झॉंक रही थी। बदन पे   अधखुला ब्लाऊज और चीकना सपाट पेट चरबी का नामो निशान नही। जवान बेटी की मां होने के बावजुद भी उसका कसा और गठीला बदन देखकर कोई ये नही कह सकता था की ये जवान बेटी की मां होगी।

आदि पहनकर एकदम रांड बनकर मुझे भी अपने साथ ले गयी थी।

अगले चौराहे से ही ऑटो पकड़ के ऑफीस जाना था । चौराहे पर पहुंच कर हम ऑटो का ईन्तजार करने लगे की पीछे से एक बुजगॅ टकरा गया । और माफ करना बेटी कहकर चला गया। मेरे जी मे तो आ रहा था की उसे जोर से थप्पड़ लगा दे। क्योकी उसने टकराते समय बहू गांड पर चुटकी काट लिया था। लेकीन मै बात को बिगाड़ना नही चाहती थी। ईसलिए कुछ बोली नही।

कुछ ही देर मे ऑटो आ गई और हम उसमे बेठकर उसके ऑफीस चले गए।

ऑफीस मे पहुंचते ही सबसे पहले शर्मा जी ने गुड मानिॅग कहा।

शर्मा जी; गुड मानिॅंग कुसुम जी ।

वो भी मुस्कुरा के गुड मानिॅंग बोली। 

(बहू का जवाब सुनते ही शर्मा ने तुरन्त बोल दीया।)

कुसुम जी; आज बहुत खूबसूरत लग रही हो।

बहू मुस्कुरा गई। और उसने औपचारीकता वश मेरा परिचय शर्मा जी से करवाया.

इतने में बहू का एक चेला (ऑफिस बॉय) तो मेरे लिए और कुसुम के लिए चाय तक लेकर आया.

बहू बातूनी भी बड़ी है। उसे काफी बात करने की आदत है ये मुझे पता है। लेकिन उसे मेरे सामने हँस हँस कर परपुरुषों से बात करने में कोई झिझक नहीं हो रही थी।

शर्मा जी: (गंदी हंसी चेहरे पर लाते हुए)अरे कुसुम मेडम जी। आज सच मे आप बहोत खुबसुरत लग रही हो।

मै गुस्से से आंख तरॉते हुए : ताने मार कर बसंती (शोले पिक्चर वाली हेमामालिनी) अगर बातें हो गयी हो तो जिस काम के लिए मुझे साथ लाई हो वो कर ले। और ईतना सुन के कुसुम मुझे अपनी केबीन की लेकर तरफ चल दी।

मैं अन्दर बहु के साथ कैबिन में कुर्सी पर जाकर बैठ गयी, थोड़ी देर बाद शर्मा ऑफिस का एक संजय नाम के लड़के के साथ ESIC रजिस्टर को लेकर आ गया, और पेन देते हुए मुझसे बोला बहन जी इस पर हस्ताछर कर दीजिये,

मैने जैसे ही पेन लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने जानबूजकर पेन नीचे गिरा दिया, गिरे हुए पेन को उठाने लिए बहू (रांड की तरह) ने शर्मा को झुककर अपनी दौलत (अपने बड़े बोबे निप्पल के साथ) दिखा दी.

मैंने ये सब अपनी नंगी आँखों से चुपके से देखा. शर्मा का खड़ा लंड हो गया था और उसने अपनी पैंट के ऊपर से मसला भी था.

तभी कुसुम इठला कर बोली- सर अगर पैंट पर कुछ फंसा है, तो थोड़ा हल्का कर लो ना!

ये सुनकर मुझे ग़ुस्सा आया मुझे ये बात खटकी, तो शर्मा के जाने के बाद मौका मिलते ही मैंने बहू को ऑफिस में मर्दो से दूर रहने का बोल दिया. इस बात पर कुसुम भड़क उठी और फिर मै वहां से गुस्से में घर निकल गयी.

नहीं मैं कुसुम के साथ ऐसा नहीं होने दूंगा. उस से बात करूंगा, उसे समझाऊंगा. वह मेरी पत्नी है समझ जाएगी. नहीं मानी तो उस शर्मा से मिलूंगा, उस के परिवार से मिलूंगा, परंतु मुझे पूरा यकीन है ऐसी नौबत नहीं आएगी… कुसुम समझदार है मेरी बात समझ जाएगी……… ।  इतना कहकर मैने मम्मी से पूछा वैसे कुसुम अभी कहाँ है??

छत पर….

ठीक है मै उससे बात करता हूँ ।

और कुसुम से बात करने के लिए उसे फोन लगाया तो उसका फोन बिजी आ रहा था।

शायद वह अपने किसी सहेली से बात कर रही थी. लेकिन मम्मी की बातों को सुनकर मै खुद को ठगा सा महसूस कर रहा था.

तभी कुसुम का काल आ गया….

हैलो

कुसुम : आ गयी बीवी की याद, मिल गयी फुर्सत, माँ ने अपने लाडले से अपनी बहू की शिकायत जो जरूर कर दी है। ह्म्म्म

मै : शिकवा शिकायते तो होती रहती है जानेमन….. रही बात याद करने की तो

याद उन्हे किया जाता है, जिन्हे भूला जाये… तुम्हे तो मै अपनी हर आती जाती सांस के साथ याद करता हूँ…..

” साँसों की माला पर मै सिमरू तेरा नाम “

कुसुम : ह्म्म्म ठीक ठीक है वैसे बताओ फोन क्यो किया था…..???

मै : फोन जब किया था, तब तुम किसी के साथ बिजी थी…. जो कहना था वो अब याद नही ह्म्म्म…….

कुसुम : ओह्ह्ह् …… अरे यार वो ऑफिस का शर्मा मुझे काल करता है। शर्मा जी बड़े रंगीन मिजाज के है, पचास के करीब होने को आ गए हैं लेकीन औरतो को देखकर लार टपकाना आज तक नही छोड़े। जब से ऑफीस मैने जॉइन किया है उस दीन से शर्मा जी लार टपकाए पीछे पडे़ है। लेकीन आज तक यहां ईनकी दाल नही गली। बस आहें भरकर रह जाते है। ऑफीस मे शर्मा जी जेसे और भी कई लोग है ।

कुसुम के मुह से गैर मर्द की बातें सुनकर मेरे शरीर में सनसनी होने लगी।

मै :: ह्म्म्म कैसी कैसी बातें करता है डार्लिंग….??

कुसुम :: तुम्हे तो पता ही है, शर्मा जी की वजह से मुझे ये नौकरी मिली है, ऊपर से वो सीनियर है। जब कोई काम नहीं होता, तो वो मेरे कैबिन में आते हम बातें करते है। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे से काफ़ी घुल-मिल गए। धीरे-धीरे हम एक-दूसरे की शादीशुदा जिन्दगी के बारे में बातें करने लगे। हम एक-दूसरे से अपने पति-पत्नी की बातें करने लगे। उसने बताया कि वो अपनी पत्नी से खुश नहीं है फिर अपनी सम्भोग क्रिया के बारे में बातें करने लगे। मैंने भी अपने पति (तुम्हारे) के बारे में बता दिया। मै तो अपने पति के साथ अपनी सम्भोग क्रिया में बहुत खुश हू।

” मै अपनी पत्नी कुसुम के मुह से अपनी मर्दांगी की तारिफ, कसीन्दे वो भी गैर मर्द को तीखा व्यंग/ताने के रूप सुनाने की बात सुनकर खुशी से झूम गया “

मै :: कुसुम वो सब छोड़ो ये बताओ अभी वो ठरकी बुड्ढा फोन पर क्या कह रहा था???

कुसुम :: अभी जब उस का फ़ोन आया। हम पहले तो इधर-उधर की बातें करते रहे। फिर शर्मा ने वो बात कह दी, जिसका मुझे डर था। उसने मुझसे कहा- कुसुम, मुझे एक साथी की जरूरत है, जो मेरा साथ दें और मेरी इच्छाओं को पूरा कर दे? उसके लिए मै अपनी सारी दौलत खर्च करने के लिए तैयार हू। मेरे दिलो-दिमाग में बिजली सी सनसनी आ गई। मैं उससे बातें तो करती थी, पर कभी सोचा नहीं था कि ऐसा हो सकता है क्योंकि वो मुझसे उमर में काफ़ी बड़े थे। मैंने फ़ोन बिना कुछ कहे रख दिया। कुछ देर बाद उनका दोबारा फ़ोन आया, पर मैंने नहीं उठाया। करीब 4 बार के बाद मैंने फ़ोन सुना तो वो मुझसे माफ़ी मांगने लगे।

” जिस स्त्री से मुझे नफरत होनी चाहिए थी. मुझे उस पर प्यार आ रहा था और गर्व भी हो रहा था, क्योंकि इस पुरुष दंभी समाज को चुनौती देने की कोशिश उसने की थी.’’

अपनी पत्नी का यह वचन सुनकर मै बड़ा   उत्साहित हो गया। आखिर कुसुम एक शादीशुदा औरत जिसकी एक जवान बेटी है और उसकी चूत बल्कि उसका पूरा बदन अपने पति के भोग के लिए ही है यह कुसुम के मन में भलीभाँती वृक्ष की जड़ की तरह स्थापित हो चुका है। भला वह कैसे कोई साधारण छिनाल औरत की तरह पति के अलावा किसी दूसरे लण्ड के बारे में सोच भी सकती है? और मै यह जानता भी था की कुसुम की यही प्रतिक्रया होगी। अब मुझे धीरे धीरे कुसुम के मन के अंदर जा कर हर औरत के मन के छोटे से कोने में जो एक छिनालपन होता है उसे उजागर करना था।

 अपनी खुशी पर काबू रख कर मैने बड़ा ही उत्साह दिखाते हुए कुसुम को छेड़ते हुए बोला, “ यह सब तो मैं जानता हूँ, पर देखो ना तुमने बेचारे शर्मा के साथ बड़ी नाइंसाफी की है……. बेचारे के साथ KLPD हो गया..

हाहा हाहाहा

कुसुम ने अपने सुर में कठोरता लाते हुए कहा, “ अरुण, तुम यह सोचना भी मत की मैं किसी और मर्द को अपना यह बदन सौपूंगी। सेक्स करने की बात तो दूर, मैं कभी किसी और मर्द को मेरा बदन छूने तक नहीं दूंगी। मैं सिर्फ तुम्हारी शादीशुदा पत्नी हूँ और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी।”

अरुण जब जब मै तुम्हारे मुह से इस तरह की बेफिजूल की बातें सुनती हू तो मेरे मन में रह रह कर यही सवाल उठता है की

“मैने तेरे बिस्तर में सारी दुनिया को पाया, तुम कहते हो गैरों को उस पर ले आओ।”

मै :: जब इतना प्यार करती हो मुझसे तो फिर छोड़ क्यों नही देती ऐसी नौकरी जहाँ हर मर्द तुम्हारे जिस्म को गंदी नजर से देखता है। उनके द्बारा कसी गई गंदी गंदी फब्तीयो को सुनकर भी अनसुना कर देना क्यो रोज का काम बना लिया है????

कुसुम :: क्योकी मुझे पता है सरकारी नौकरी की अहमियत, बड़ी मुस्कील आज के समय मे ये सरकारी जॉब मिलती है । और मै इस जॉब को खोना नही चाहती। पत्नी के बुढा होने पर पति, बच्चे धोख़ा दे सकते है, लेकिन सरकारी नौकरी नही, मेरे मरते दम तक पेशन रूपी मदद करती रहेगी।

मै :: तो फिर शर्मा जैसे हरामियो से हँसी मजाक, फोन पर बातें क्यों करती हो…?? अपने काम को बखुबी बेहद ईमानदारी से क्यों नही करती हो….??

कुसुम ::: ‘‘ माय डियर पतिदेव अब वह मुरगा खुद कटने को तैयार बैठा है तो फिर मेरी क्या गलती? उसको लगता है मै उसे पसंद करती हू? उसे यह नहीं पता कि वह सिर्फ मेरे लिए एक सीढ़ी है, जिस का इस्तेमाल कर के मुझे आगे बढ़ना है. जिस दिन उस ने मेरे और मेरे सपने के बीच आने की सोची सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी फिर उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’” हाहा हाहाहा हाहा हाहाहा

कुसुम के हँसी भरे ठहको के बीच मै सोच में पड़ गया….! उसकी बातों ने जैसे आईना सा दिखा दिया था कि…. जैसे उसने ये बात

मेरी लिए कही हो……

 “”सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’”

अगर मेरा और मेरी बेटी के साथ बन रहे नाजायज रिश्ते की भनक उसे लगी तो मेरा क्या हश्र होगा उसे सिर्फ खुदा जानता है।

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