———— “”थोड़ी सी बेवफ़ाई “” ————
मै बाइक ले कर होटल पहुँच गया और होटल मैनेजर बाइक सौंप कर थैंक्स बोलकर टैक्सी से मामी के घर सुनील की बहु सुनीता को पिक करने के लिए चल दिया। थोड़ी देर में मै मामी के घर पहुँच गया, और इधर उधर की बातें करने लगा।
मैंने मामी को कहा की मामी आप सुनीता को बुलाये ट्रेन का टाइम होने वाला है, मामी बोली अरे बेटा तुझे तो सब पता है आजकल की बहू बिटिया तैयार होने में कितना टाइम लगती है ऊपर से मेरी बहू सुनीता तो रात से तैयारी में लग गयी, चेहरे पर उबटन लगाया ताकि चेहरा ओर खिल जाए। फिर अपने पुरे शरीर का वैक्सीन किया ताकि सारे अनचाहे बाल निकल कर त्वचा चिकनी हो जाये।
मै मामी की बातें मुस्करा कर सुन रहा था,
आज तो समय भी जैसे धीरे धीरे बीत रहा था। जब किसी का बेसब्री से इंतज़ार होता हैं तो समय ऐसे ही परीक्षा लेता हैं।
कहने को सुनीता से मेरा रिश्ता जेठ और बहू का था, लेकिन मै सुनीता को सुनील से शादी से पहले जानता था, क्योकि वो हमारे शहर की ही रहने वाली है, यहाँ उसकी ससुराल है, एक ही जाति बिरादरी के होने की वजह से शादी से पहले अक्सर मेरा सामाजिक और धार्मिक फंक्शन पर सुनीता की फैमिली से मेल मिलाप होता था।
शादी से पहले भी सुनीता काफी सूंदर लगती थी, मासूम ज़्यादा और सेक्सी कम | सुनीता कि हाइट 5 फीट 6 इंच है, लंबे काले बाल, नशीली आँखें और गोरा-गोरा रंग, पतला शरीर, वजन में केवल 54 किलो। दुबले-पतले शरीर के बावजूद बड़े-बड़े चूतड़ और गोल-गोल भारी चूचे । भले ही मैंने सुनीता को कभी गंदी नजरो से नहीं देखा था, पर मुझे इस बात का अंदाजा था कि वो ड्रेस के अंदर कितनी आकर्षक और सेक्सी होगी ।
दस मिनिट बाद एक बार फिर से मामी जी की चिर परिचित आवाज़ सुनाई दी, तैयार हो गयी क्या सुनीता।
बस दो मिनिट मम्मी आई, और मै बैग लेकर दरवाजे पर खड़ा हो कर मामी से बात करने लगा, तभी सामने से सीढ़ियों से उतरती हुई सुनीता पर मेरी नजर पड़ी।
मैंने महसूस किया कि सुनीता थोड़ी परेशान सी और दुखी थी । वह बहुत-बहुत सुस्त और किसी दबाव में लग रही थी | उसने एक भारी साड़ी पहनी हुई थी और सिर को अच्छे से ढक रखा था । सेक्सी शरीर तो छोड़ो, उसका चेहरा भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था । सुनीता को शादी से पहले मॉडर्न कपडे पहनने कि आदत थी पर उसकी सास या मामी ने उसे कभी भी साड़ी के अलावा कुछ भी पहनने नहीं दिया ।
उसकी शकल देखते हुए, अचानक से मेरा ध्यान उसकी छाती पर गया, उसकी छाती
बहुत ही बड़ी और भारी लग रही थीं ।
लेकिन उसकी ब्लाउस को देख कर ये तो कह सकता था की सुनीता पहले से अधिक सुंदर और सेक्सी हो गयी है । मैंने पिछले दो सालों में सुनीता को नहीं देखा था ।
साड़ी ब्लाउस में सुनीता के सुंदर चेहरे और सेक्सी शरीर को देखते-२ मेरा लौड़ा बुरी तरह से टन्ना गया |
सुनीता के ससुराल वाले मतलब मेरी मामी मामा थोड़े पुराने जमाने के हैं |
ज्यादातर सुनीता को अपनी सास के साथ घर पर और अपने कमरे में ही समय बिताना पड़ता था ।
इसलिए जब मेरे साथ जाने का प्लान बना तो सुनीता अंदर ही अंदर बहुत खुश थी | उसे तो जैसे जेल से रिहाई मिल रही थी | लेकिन उसकी सास की अनुमति के बिना जाना संभव नहीं था |
मै सुनीता को देखता ही रह गया ।
तभी मामी मेरा ध्यान भंग करते हुए सुनीता से बोली बहुत देर लगा दी अरुण कब से इंतजार कर रहा है।
इतनी तैयारियों में ध्यान ही नहीं रहा कि कब वो समय हो गया आपका मुझे कब से इंतज़ार था। सुनीता मुस्कुराती हुई बोली।
सुनीता ने मामी से एक महीने कि अनुमति मांगी। मेरी बातों ने उन्हें प्रभावित किया और उन्होंने उसे अनुमति दे दी, लेकिन केवल पंद्रह और बीस दिनों के लिए | सुनीता के पास उनकी बात मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था ।
मामी ठीक ठीक है अब आराम से जाओ पहुँच जाओ तो फोन कर देना। अरुण तुम्हारा जेठ है तो सिर पर पल्लू ढक कर रखना । अरुण बेटा इसका ठीक से ख्याल रखना, मैने मामी से नमस्ते किया और हम ऑटो मे बैठकर स्टेशन के लिए चल दिये।
मै रिश्ते में सुनीता का जेठ था तो उससे ज्यादा बात ना करते हुए चुप हो कर बैठा था। थोड़ी देर बाद सुनीता बोली भाई साहब आप इतने चुप चुप क्यों बैठे है। कुसुम जेठानी की याद आ रही है। या फिर जेठानी जी बातें करने से मना किया है, सुनीता मेरी फिरकी लेते हुए हस्ती हुयी बोली।
“” दूसरे की लुगाई और अंग्रेजी दवाई आदमी के शरीर पर तुरंत असर करती है “”
मै सुनीता से अटकते हुए बोला नही स स स सुनीता ऐसी बात नही है, चुटकी लेते हुए बोला मै रिश्ते में आपका जेठ हू और जेठ अपने छोटे भाई की बीवी के साथ ज्यादा बातें करे तो रिश्ते की मर्यादा टूट सकती है।हा अगर हम देवर भाभी होते तो हँसी मजाक कर सकते है, सुनीता हँसी और बोली अब ये सब नही चलता है। और वैसे भी साल में एक महिना जेठ का आता है।
ये सुनकर मेरी हँसी निकल गयी।
हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा
और बताओ तो मै आपको क्या बोलू भाभी या बहू। सुनीता बोली सबसे पहले तो मुझे आप मत बोलो मै आपको जब से जानती हू जब मेरी शादी भी नही हुयी थी, आप मुझे सुनीता ही बोलो।
हम ट्रेन स्टेशन पहुँच गए । ट्रेन पहले से प्लेटफार्म पर खड़ी थी । मैने स्लीपर श्रेणी के डिब्बे में आरक्षण करवा रखा था और हम उस पर चढ़ गए। हमारा कंपार्टमेंट के अगले दरवाजे पे ही शौचालय था। चूंकि हमारा अंतिम डिब्बे था इसलिए काफी छोटा था | नीचे एक तरफ एक लंबी सीट और ऊपर एक लंबी बर्थ थी । एक तरफ एक छोटी सी खिड़की थी और उसके विपरीत तरफ एक डिब्बे का दरवाजा था ।
चूंकि डिब्बे का फर्श बहुत गंदा था, इसलिए सामान को ऊपरी बर्थ पर रखा, जिससे बर्थ भर गया। तो नीचे की एकमात्र सीट मेरे और सुनीता के लिए रह गयी थी | ट्रेन ने सीटी दी और जब ट्रेन चल पड़ी और प्लेटफॉर्म आँखों से औझल हो गया तब सुनीता के चहेरे पे पहली बार मुस्कराहट दिखी |
सुनीता अंगड़ाई लेते हुए अपने दोनों हाथों को फैलाया और मुस्कुराते हुई बोली “भाई साहब! क्या मैं इन कपड़ों को बदल दूं “
“ठीक है, सुनीता ! तुम कपड़े बदल लो, मैं टॉयलेट हो कर आता हूँ | दरवाजा अंदर से बंद कर लो और मैं बाहर खड़ा रहूँगा । जब तुम्हारा काम हो जाए तो तुम दरवाजा खोल देना,” मैंने उससे कहा।
“ओ.के. मेरे प्यारे भाई साहब!” उसने मस्ती भरे लहज़े से कहा ।
सुनीता की तो बोली ही बदल गयी थी | जब तक वह घर से निकल कर ट्रेन में नहीं चढ़ी थी, तब तक सुनीता बहुत चुप-चुप और शांत थी । वह बात नहीं कर रही थी या चेहरे पर कोई हावभाव नहीं दिखा रही थी । और अब, किसी चंचल हसीना कि तरह सब बंधन से मुक्त हो गई थी । मैं टॉयलेट के दरवाजे के बाहर खड़ा हो गया । थोड़ी देर बाद सुनीता ने दरवाजा खोला । जैसे ही मैंने सुनीता को देखा तो मैं चकित रह गया ।
सुनीता ने साड़ी बदल कर एक टाइट फिटिंग वाली सलवार कमीज पहन ली थी । यह सलवार कमीज शिफॉन की क्रीम रंग की थी और पारदर्शी भी थी | ऐसे लग रहा था मानो उसने साड़ी के साथ लाज और शर्म भी उतार दी हो | अब सुनीता कोई भयंकर पटाखा लग रही थी | उसने अपने लंबे काले बाल खुले छोड़ दिए थे। मेकअप भी कर लिया था | होंठों पे गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगा रही थी । उसके लाल होंठ रस से भरी चेरी की तरह लग रहे थे । मैं उसके सामने हैरान खड़ा सुनीता को लिपस्टिक लगाते देख रहा था ।
सुनीता अब पहले की तरह पतली नहीं रही थी | उसके अंगों पर थोड़ी चर्बी चढ़ गयी थी, लेकिन सही जगह पर | सबसे ज़्यादा उसकी छाती पर। उसकी छाती अब बड़ी और भारी लग रही थी । उसके बोबे जो पहले सेब की तरह लगते थे अब बड़े होकर नारियल के आकार के हो गए थे | पारदर्शी ड्रेस से, उसकी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी । ब्रा बहुत अच्छे इलास्टिक की बनी होगी, कोई लोकल ब्रा होती तो फट ही जाती |
इतने बड़े बड़े बोबों को संभालना कोई आसान काम थोड़ा न है | उसकी कमीज पूरी तरफ से स्ट्रेच हो रखी थी, एक-२ टांका खींचा हुआ था, जैसे अब फटा की तब | और तो और उसकी कमीज का गला इतना गहरा था की आधे से ज्यादा चूचे बाहर आने को थे, क्या मस्त क्लीवेज दिखाई दे रहा था |
मैं बेमन से अपनी नज़रें बोबों से हटा के निचे की तरफ देखने लगा | पारदर्शी शर्ट से उसका सपाट सफेद गोरा पेट और गहरी नाभि साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थे | नीचे उसने क्रीम कलर की ही सलवार पहनी हुई थी । और उसने जो ऊँची हील की सैंडल पहनी हुई थी, सेंडल पहन के तो वो मुझ से भी लम्बी लग रही थी | मुझे याद नहीं कि मैं अपने कजिन छोटे भाई कि बीवी को कितनी देर तक कामुक नजर से घूरता रहा | हो सकता है की कुछ सेकंड ही देखा हो पर मेरे लिए तो जैसे समय रुक गया था |
“” उमर में बड़ी है लेकिन हरकतो से कच्ची लग रही थी… अब चाहे जैसी हो मुझे अच्छी लग रही थी “”
मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था। मेरा लंड इतना टाइट था कि जैसे अंडरवियर फाड़ से बाहर आ जायेगा | मेरी पैंट से लंड का बड़ा सा उभार दिखाई दे रहा था | मेरा लण्ड अब मेरे नियंत्रण में नहीं था । मैं कर भी क्या सकता था ? अपनी कजिन छोटे भाई कि बीवी की बेकाबू जवानी, उसका सेक्सी स्लिम शरीर, बड़े चूचे, विशाल चुस्त गांड , सामने पाकर मेरा लंड मेरे काबू में नहीं रहा था | मैं जल्दी से सीट पर बैठ गया ताकि मेरे लंड का उभार कजिन छोटे भाई कि बीवी को दिखाई न दे जाये, लेकिन उसके चेहरे से पता लग रहा था की उसने देख लिया था |
वह मुस्कुराई और थोड़ा सा खांसी | उसकी आवाज़ सुन के मैं तन्द्रा से बहार आया |
वो बोली, “क्या हुआ, भाई साहब? तुम ऐसे देख रहे हो जैसे तुमने कभी लुगाई नहीं देखी ।”
हह मममम! नहीं ……. ! मेरा मतलब है, देखी तो बहुत है, लेकिन इतनी सुंदर लुगाई कभी नहीं देखी | मुझे नहीं पता था की आप अब इतनी सुंदर लगने लगी हो |” ना जाने कैसे मैंने अचानक से बोल दिया |
सुनीता बोली “ओहो, अच्छा जी, इतना मस्का लगाने की ज़रुरत नहीं है | मैंने ये ड्रेस आपको सुंदर दिखने के लिए नहीं पहनी है | वो यो मुझे ऐसे कपडे पहनने का मौका नहीं मिलता | आपके छोटे भाई ने पिछले साल मुझे ये ड्रेस दिलवाई थी, तभी से पहनना चाह रही थी, लेकिन सास आपकी मामी के सामने कभी हिम्मत ही नहीं हुई | भाई साहब अब तो ये ड्रेस थोड़ी टाइट हो गयी है, क्या करूँ, मोटी भी तो हो गयी पहले से | देख ना कितनी तंग हो गयी है |”
“हम्म्म्म” मेरे मुंह से इतना ही निकला |
वो बोली, मैं बहुत खुश हूं कि मैं आपके साथ भाई साहब घर जा रही हूँ, |”
ट्रेन अपनी रफ्तार मे दोड़ रही थी, पूरी सुबह खिल चुकी थी, सूरज की तेज रोशनी से अब गर्मी महसूस होने लगी।
अभी तक हमारे चैंबर में कोई सवारी नही आई, ट्रेन लगभग खाली सी थी, शायद कम दूरी कि ट्रेन होने की वजह से।
उस दिन बहुत गर्मी थी | बाहर का तापमान लगभग 45 डिग्री होगा | हवा तो चल रही थी, लेकिन वो भी गरमा-गरम | मुझे बहुत पसीना आ रहा था । और उसके ऊपर से कजिन छोटे भाई कि बीवी सुनीता की उफनती जवानी | अब और बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं बचने के लिए जल्दी से उठा और उससे कहा कि बहुत गर्मी हो रही है | पूरा सफर गर्मी में ही करना पड़ेगा |
फिर मैं पैंट्री कार में गया और हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स ले के तकरीबन दस मिनट के बाद वापस आया ।
सुनीता खिड़की के पास बैठी मोबाइल देख रही थीं। मैंने उसे पेप्सी दी और सामने की सीट पर बैठ गया ताकि चुपचाप सुनीता को ताड़ सकूँ । सुनीता को भी बहुत पसीना आ रहा था। उसकी पारदर्शी कमीज उसके शरीर से चिपक गयी थी | ब्रा ना होती तो बिलकुल “राम तेरी गंगा मैली” की मंदाकनी बन जाती | उसका ये रूप देख कर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा | गरम लंड के सामने कोल्ड ड्रिंक भी फ़ैल हो गयी, लंड ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा था |
उसके शरीर से ध्यान हटाने के लिए मैंने सुनीता से बातचीत शुरू कर दी। उसके मम्मी, पापा, स्टडीज, सास बहू, मेरी पत्नी कुसुम आदि बातों के बाद आखिरकार हम मूवीज पे पहुँच गए ।
उसने मुझसे पूछा, “भाई साहब, आप मूवीज देखते हो या नहीं?”
“हाँ, देखता तो हूँ, लेकिन ज़्यादा नहीं, कुछ खास-खास | मेरा मतलब है, जिस मूवी के reviews अच्छे हों “सही है भाई साहब, फिर हम कुछ देर तक चुपचाप बैठे रहे।
कुछ देर की खामोशी के बाद सुनीता बोली भाई साहब आप बड़े भाग्यशाली है जो कुसुम जेठानी जैसी सर्व गुण सम्पन पत्नी मिली है।
सुनीता की सर्वगुणसम्पन पत्नी वाली बात सुनकर मेरे अंदर का प्रोफेसर जाग गया और मै उसे एक सर्वगुणसम्पन स्त्री पर एक लंबा सा लेक्चर पेलने लगा…..
सुनो सुनीता कोई स्त्री सर्वगुणसम्पन नहीं होती********
1 यदि मैं एक सीधी-सादी स्त्री का चुनाव करता तो मुझे यह मानना पड़ेगा कि वह मुझ पर निर्भर रहेगी।
2 यदि मैं खूबसूरत लड़की चुनता तो मेरे खर्चे भी बढ़ेंगे |
3 यदि मैं एक कामकाजी स्त्री को प्राथमिकता देता तो यह भी तय है कि घर के सारे काम वह नहीं कर पाएगी।
4 यदि वह गृहिणी होगी तो स्वाभाविक है कि वह धनार्जन नहीं करेगी ।
5 यदि मैं महान स्त्री चुनता तो उसकी दृढ़ता और कठोरता के साथ भी मुझे निर्वाह करना होगा।
6 यदि मैं वीर स्त्री का चुनाव करता तो यह मानना पड़ेगा कि उसके अपने भी कुछ विचार होंगे।एक स्त्री की कुछ अच्छी विशेषताएं जाहिर करतीं हैं कि वह कौन है और उसे क्या सबसे हटकर मौलिक बनाता है।
किसी ने सही कहा है कि “सर्वगुणसम्पन्न स्त्री एक ही nation में मिलती .., …वह है imagination.
“
वास्तव में “कभी किसी को मुकम्मल जीवनसाथी नहीं मिलता,दोनों एक दूसरे की कमियों को अपनी खूबियों से पूरा करके मुकम्मल बनते हैं।”
यह बात उम्र बढ़ने के साथ जिनको समझ में नहीं आती,वे सारी जिन्दगी एक दूसरे से उलझते रहते है।
मेरा लंबा चौड़ा लेक्चर सुनकर सुनीता खामोश हो गयी और थोड़ी देर बाद…
“ओह्ह्ह्हह्हह … कितनी गर्मी है | मुझे तो आलस आ रहा है | भाई साहब, क्या मैंने थोड़ी देर के लिए नींद ले लूँ? ” थोड़ी देर बाद सुनीता ने कहा। और बोली मुझे तकिया लगा कर सोने की आदत है अगर मै आप कि गोद में सर रख कर थोड़ी देर सो लू।
मै कुछ बोल पाता उससे पहले वह कह कर उठ गई। मैं उठ कर खिड़की के पास बैठ गया। बिना कुछ कहे तुरंत सुनीता ने अपना सिर मेरी गोद में रख दिया वह सोने लगी |
मेरी हालत बहुत टाइट हो गयी थी। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और अब तो सुनीता का सर बिलकुल मेरे लंड के ऊपर आ गया था | उसके बदन का मेरे पैरों पे गरम-२ स्पर्श, मेरे हाथों में उसके रेशमी बाल, १० इंच से भी कम दुरी पे पारदर्शी शर्ट से झांकती उसकी लगभग नंगी छातीयां, उसके शरीर से आती परफ्यूम और पसीने की मिलीझुली मदहोश कर देने वाली गंध से मेरा लंड खुली हवा में सांस लेने की लिए तड़पने लगा | लंड की हालत ऐसी थी की अगर बाहर निकल की सिर्फ दो-तीन बार हिला भी लेता तो इतने में ही मेरा माल निकल जाता |
मेरा लंड बहुत दमदार है, लम्बा और बहुत मोटा | मेरा लंड सुनीता के सर को मेरी गोदी से उठाने में लगा हुआ था | अचानक से मेरे लंड में एक लहर सी आयी और लंड ने सुनीता के सर को झटके से हल्का सा उछाल दिया | सुनीता को कुछ पता नहीं चला, शायद नींद थोड़ी गहरी हो गयी थी | उसको पता ही नहीं चला की उसके जवान जेठ का हब्शी लंड उसके सर से साथ खेल रहा है |
अब सुनीता की साँसे गहरी और लयबद्ध चल रही थी, उसी लय के साथ उसके बोबे भी ऊपर-नीचे हो रहे थे | उसकी पारदर्शी शर्ट पसीने से लथपथ हो कर उसके अंगों से चिपक गयी थी | उसका शरीर पूरी तरह से दिखाई दे रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे उसने सिर्फ ब्रा पहन रखी हो । उसके बोबे इतने गोर थे के उनमें से उसकी नीली-हरी नसें भी दिखाई दे रही थी | मेरा दिल कर रहा था की अभी उसकी कमीज फाड़ कर उसके बोबों की गहरी घाटी में अपना मुंह घुसा दूँ | लेकिन मुझे हर हाल में अपने अंदर के जानवर को बाहर आने से रोकना था।
उसके पसीने की गंध अब शायद बढ़ गयी थी, अब उससे और ज्यादा पसीना आ रहा था | शायद नींद में सभी को ज़्यादा गर्मी लगती है और पसीना आता है | महिलाओं का पसीना भी किसी परफ्यूम की तरह ही होता है | जो भी हो सुनीता के पसीने की नमकीन गंध बहुत ही मदहोश करने वाली थी | पसीने की बूंदे उसकी गर्दन, कन्धों और बोबों पे चिपकी हुई दिखाई दे रही थी | दिल कर रहा था की कुत्ते की तरह जीभ निकल के उसका सारा पसीना चाट जाऊं |
तभी अचानक से सुनीता ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और मेरी तरफ करवट ले ली | उसने मुझे वैसे ही पकड़ा हुआ था जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी माँ से लिपटा होता है | उसके हाथ का स्पर्श बहुत गरम था | अब इस नयी पोजीशन में उसका बायां मुम्मा मेरे पेट से चिपक गया था | उसके मुम्मे का स्पर्श बहुत ही मस्त था | और तो और अब उसकी पारदर्शी कमीज से उसकी पसीने से लथपथ कांख बिलकुल साफ़ दिखाई दे रही थी |
बड़े आश्चर्य की बात थी की सुनीता के कांख में गहरे काले-२ बाल थे | कांख में अगर बाल हों तो बहुत पसीना आता है, सुनीता से आती हुई पसीने की गंध सबसे ज़्यादा उसकी कांख से ही आ रही थी | आज की मॉडर्न लड़कियां अपनी कांख बिलकुल सफाचट रखती हैं, लेकिन शायद वो ये नहीं जानती की कांख के बाल कितने सेक्सी दीखते हैं | बाकि सब का तो पता नहीं लेकिन मैं कांख के बालों का दीवाना हूँ | लड़कियों की काखों में बाल होना बहुत ही कामुक होता है और कामोन्माद को बढ़ाता है। लेकिन आजकल, लड़कियों को अपनी त्वचा पर बाल नहीं रखना चाहती | अपनी कजिन छोटे भाई की बीवी की काखों में बाल देख के मुझे बहुत खुशी हुई, मेरा लंड और भी टाइट हो गया |
अब और बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए नामुनकिन हो गया था, मैं थोड़ा सा झुका और अपनी नाक को, जितना हो सकता था उतना, सुनीता की काखों के पास ले गया | मैं बता भी नहीं सकता, ये सब मेरे लिए कितना नशीला और कामुक था | ऐसा लग रहा था की उसका मुम्मा और मोटा होके मुझे बुला रहा था | मेरा लंड अंडरवियर फाड़ के बाहर आने को मचल उठा था, ऐसा लग रहा था कि लंड अभी फटेगा । आखिरकार में अपना हाथ धीरे से उसके मुम्मों पे रखने के लिए उठाया |
जैसे ही मैंने अपना अपना हाथ उठा के उसके सीने की तरफ बढ़ाया, सुनीता ने अपनी आँखें खोल दीं । मैंने तुरंत अपना हाथ अपने बालों पर ऐसे घुमाया जैसे मैंने अभी-अभी अपने बालों को हिलाने के लिए ही उठाया हो।
“कितनी देर से सो रही हूँ? अरे यार कितनी गर्मी है ……… मैं तो पसीने से पूरी तरह नहा ली हूँ …. ये शर्ट पूरी गीली हो गयी है, मैं इसे बदल लेती हूँ | ,” सुनीता उठते हुए बोली |
सुनीता ने मुझे ऊपर की बर्थ से बैग उतारने को कहा | मैंने बैग उतार दिया | सुनीता अपने पर्स में बैग की चाबी तलाश करने लगी | उसने बहुत ढूंढी लेकिन नहीं मिली।
मैंने सुनीता से कहा, “कहीं आप चाबी घर पे तो नहीं भूल आये?”
“नहीं भाई, मैंने अभी तो कपडे चेंज किये हैं| साडी भी बैग में रखी थी। उसके बाद बैग लॉक करके शायद से चाबी पर्स में ही तो रखी थी|,” उसने जवाब दिया ।
मैंने कहा, “फिर कहाँ जा सकती है? मैं ढूंढ़ता हूँ, शायद सीट के नीचे ना गिर गयी हो |”
मैं नीचे झुक गया और सीट के नीचे झाँकने लगा । जमीन पर बहुत गंदगी पड़ी थी लेकिन चाबी कहीं नहीं दिख रही थी । मैं थोड़ा और झुक के ध्यान से देखने लगा । अचानक से मुझे सीट के निचे, एक कोने में चाबी दिखाई दी | मैंने सोचा की अगर मैं सुनीता को चाबी दे देता हूँ तो सुनीता कपडे चेंज कर लेंगी और इतना सेक्सी शो ख़तम | ना ना ।
मैंने उठ के सुनीता से कहा,” सुनीता, चाबी तो नहीं मिल रही | अभी कुछ काम चला लो, जब घर आने वाला होगा तब दोनों मिल के चाबी अच्छे से ढून्ढ लेंगे, अभी छोड़ो, गर्मी से वैसे भी कुछ काम करने का मन नहीं हो रहा |”
ओके”, फिर से हम दोनों वापस सीट पर बैठ गए।
“भाई साहब सीरियसली, बहुत गर्मी लग रही है | मैं इस गर्मी और पसीने से मरी जा रही हूँ? ” सुनीता बोली ।
अब मैं क्या कहूं मन ही मन सोच रहा था की अगर गर्मी ना होती तो अपनी कजिन छोटे भाई की बीवी के सेक्सी बदन का जलवा कैसे देखने को मिलता |
“ओह्ह्ह्हह ….. | मुझे पूरा सफर इस पसीने से भीगी ड्रेस में ही करना होगा | अब क्या कर सकते हैं ….. एक ये फैन, चल रहा है की हिल रहा है ….. जब ठीक से चलता ही नहीं तो लगाने की भी क्या ज़रुरत थी |”, सुनीता ने परेशान होते हुए कहा |
सच में अगर आप कहो तो मैं इस अखबार से आपको हवा कर देता हूँ,” में अपने बैग पड़ी एक पुराना अखबार उठाते हुए कहा ।
“ओहो, क्या बात है, अपने छोटे कजिन भाई कि बीवी की इतनी सेवा ……… अभी रहने दे भाई साहब …. बता दूंगी जब सेवा करवाने का मन होगा,” उसने हँसते हुए कहा | वैसे भी कुसुम जेठानी को पता चल गया तो आपके हाथ ही नही बचेंगे कुछ भी हिलाने के लिए ये बात उसने एक नॉटी style में बोली।
कुछ समय बाद सुनीता ने मेरी तरफ देखा और कहा, “आपको कितना पसीना आ रहा है भाई साहब| देख कैसे पसीने से भीग गया है |”
मैं: तो कर भी क्या सकता हूँ ?
सुनीता : उतार दो क्यों इतनी मोटी कमीज पहन रखी है? उतार दो कमीज को |
सच पूछो तो मैं भी यही सोच रहा था और अब तो सुनीता ने भी कह दिया | बढ़िया था, सुनीता सही लाइन पे जा रही थी | मैंने जल्दी से शर्ट निकाल दी।
मेरे हष्ट-पुष्ट शरीर देखकर सुनीता की आँखें चमक उठीं। उसने कहा, “क्या बात है भाई साहब, बॉडी तो मस्त बना रखी है | एकदम मरदाना, वाह”
मैं: चलो अच्छा है, आपको मेरी बॉडी पसंद आयी |
सुनीता: मुझे फिट लोग ही पसंद हैं | एक आपके छोटे भाई सुनील हैं, तोंद फुलाए पेटूमल लगते हैं |
मैं: तो आप बोला करो ने उन्हें जिम जाने के लिए
सुनीता (धीमी आवाज़ में): हाँ, वो और जिम, कुछ होता-हवाता तो है नहीं उनसे ….
सुनीता: ओह्ह उफ् गर्मी ने तो जान ही निकाल दी जरा फ्रेश होकर आती हू, और वाश रूम में चली गई।
मैं खिड़की से बाहर के नजारा देखने लगा। मेरी आँखों में अब नींद भर आई थी, मैने अपनी आँखे बंद कर ली।
“ये मुई नायलॉन की ब्रा इतनी देर से मेरे बदन को काट रही थी।”, वो अपने बैग में ब्रा रखते हुए बोली |
उसकी आवाज सुनकर जब मैने अपनी आँखें खोलीं और उसकी तरफ देखा।
ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, क्या नज़ारा था | सुनीता के सीने से ब्रा गायब हो गई थी | उसके गोरे-२, बड़े-२ विशाल मुम्मे उसकी पारदर्शी, थोड़ी गीली शिफॉन शर्ट से साफ़-२ दिखाई दे रहे थे | ब्रा के बिना उसके मुम्मे और भी बड़े लग रहे थे | गोरे गोरे मुम्मे के बीच में डार्क चॉकलेट रंग का निप्पल साफ दिखाई दे रहा था । उसके निप्पल बिलकुल कड़क लग रहे थे और उनकी शेप ऊपर से साफ़-२ दिखाई दे रही थी ।
मैं अपनी कजिन छोटे भाई की जवान बीवी को लगभग ऊपर से नंगा देख कर बुरी तरह से मदहोश हो गया | ऐसा लग रहा था जैसे मेरा कड़क लंड किसी भी पल में झड़ जाएगा । ये नज़ारा देख के मेरा पूरा शरीर गरम हो गया और मुझे पहले से भी ज़्यादा पसीना आने लगा | मेरा दिल कर रहा था की अभी लंड बाहर निकाल के उसके मुम्मे पे मुठ गिरा दूँ | लेकिन, क्या कर सकता था, आखिर जेठ बहू का रिश्ता था | मैं मन को समझा के बैठ गया |
सुनीता मेरी हालत से बेखबर दिख रही थी, उसके चेहरे पे कोई भाव नहीं थे, बस हल्का सा मुस्कुरा रही थी|
ब्रा ही क्यों, पूरी नंगी हो जा ना सुनीता”, मैंने मन में सोचा |
हम फिर से पहले वाली पोजीशन में आ गए | वो पहले की तरह खिड़की के पास बैठ गयी और आँखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगी।
ब्रा निकालने के बाद सुनीता के बोबे बिलकुल साफ़ दिखाई दे रहे थे | तकरीबन 25 % बोबे तो वैसे ही कमीज से बाहर थे और जो 75 % अंदर भी थे वो भी उस पसीने से भीगी पारदर्शी कमीज से नंगे ही प्रतीत हो रहे थे | उसके उभरे हुए निप्पल उसकी ड्रेस में अलग से खड़े हुए स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे थे | उसके पसीने ही उग्र गंध मेरे नथुनों में समा रही थी |
उसके नंगे बोबे, खड़े निप्पल, पसीने से लथपथ शरीर मेरी आँखों और लपलपाती जीभ से केवल कुछ फुट की दूरी पर थे । मैं अत्यधिक उत्तेजित हो चूका था | मैं मन ही मन प्रार्थना कर रहा था कि कहीं मेरा वीर्य छूट न जाये | अगर ऐसा हुआ तो मैं मर ही जाऊंगा | सुनीता को पता चल जायेगा | वो शायद मुझसे नफरत करने लग जाये, शायद मुझसे फिर कभी बात ना करे | ये विचार आते ही मैं घबरा गया था।
मेरे काखों में भी बहुत बाल हैं, मुझे काखों से बाल साफ़ करना अच्छा भी नहीं लगता | एक तो मौसम इतना गरम था और उस पर गरमा-गरम जवानी, मुझे भी बहुत पसीना आ रहा था | पहले तो शायद मेरे पसीने की गंध शर्ट की वजह से रुक रही थी, लेकिन अब तो मैंने शर्ट भी उतार दी थी | मेरे पसीने की गंध पूरे कम्पार्टमेंट में फ़ैल रही थी |
मुझे यकीन था कि सुनीता सो रही थी और उसे मेरे पसीने की गंध का पता नहीं चला होगा | माना की मेरे पसीने की गंध तेज थी लेकिन सुनीता भी इस बात में पीछे नहीं थी | उसके पसीने की महक मुझे पागल कर रही थी । मैं सुनीता को टंग बाथ देना चाहता था, उसके पूरे शरीर को चाटना चाहता था | मुझे विश्वास था की उसके पसीने में शराब से भी ज़्यादा नशा होगा | मेरा लंड बुरी तरह से सख्त हो चूका था और उसमें से थोड़ा सा पानी भी निकलना शुरू हो गया था | मुझे लग रहा था कि कहीं मेरी पैंट गीली ना हो जाये, लेकिन मैं कर भी क्या सकता था, ये मेरे नियंत्रण में नहीं था ।
यह सब मेरे लिए किसी कामुक सपने की तरह था |
तभी ट्रेन एक झटके के साथ रुक गई कोई स्टेशन आ गया था।
मैं: सुनीता, अभी तो बहुत भूख लगी है | मैं कुछ खाने को लेके आता हूँ,
सुनीता: हाँ भाई साहब, पहले पेट पूजा, फिर काम दूजा .. या फिर काम पूजा ये बात उसने जोर देते हुए बोली।
मैं हँसते हुए प्लेटफॉर्म की और जाने लगा | मैं गुनगुनाते हुए जा रहा था और सोच रहा था की सुनीता की कैसे चुदाई करूँगा …..
“”वो कहावत है ना जब किस्मत में दण्ड तो भुगत बहन के लंड “”
वापस आया तो सामने वाली बर्थ पर एक बुजुर्ग दंपति जो शायद अस्थमा के मरीज थे अपना सामान सेट कर रहे थे। वो बुजुर्ग बहुत ही बीमार से नजर आ रहे थे, उनकी हालत देखकर मेरी काम उत्तेजना गायब हो गयी और मै और सुनीता शांत होकर बैठ गये।
फिर सेक्स की उमीद तो छोड़ो हमने कुछ खाया भी नही और उस बुजुर्ग परिवार को sympathy देते रहे।
तीन घंटे बाद हमारा स्टेशन आ गया। सुनीता का भाई उसका प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहा था और हम अपने अपने घर की ओर चल दिये।
शायद जो हुआ अच्छा हुआ क्योकि मै अपनी प्यारी पत्नी कुसुम से एक छोटी सी बेफवाई करने से बच गया।।।
जारी है……..

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