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जल्द ही हरिया अपनी बीवी के साथ अपनी लड़की के ससुराल पहुंच गया वहां पर हरिया और मधु की खूब खातिरदारी हुई जिसका कारण यह भी था कि हरिया की बेटी मां बन चुकी थी और वह भी जुड़वा बच्चों की जिसकी उसके ससुराल वालों को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी यह तो बहुत खुशी की बात थी हरिया के लिए भी और मधु के लिए भी लेकिन हरिया इस बात से पूरी तरह से अनजान था कि उसकी बेटी का बाप उसका ही खुद का जवान बेटा राजू है,,,,, यह सब कब कैसे कहां हो गया इस बारे में हरिया को बिल्कुल भी पता नहीं था लेकिन मधु अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि जब मधु अपने पति को अपनी ही ननंद के साथ रंगे हाथ पकड़ ली थी तब गुलाबी नहीं सारी सच्चाई बता दी थी और तभी मधु को पता चला था कि उसकी बड़ी बेटी के साथ राजू का शारीरिक संबंध है राजू अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाकर उसे पेट से कर दिया था जिसका नतीजा आज प्राप्त हुआ था,,,,,।

Madhu ki madmast jawani

अपनी बेटी के जुड़वा बच्चों को देखने के बाद मधु एकदम से चौक गई थी क्योंकि उन दोनों की शक्ल एकदम राजु से मिलती जुलती थी सब लोगों को तो यही लगता था कि परिवार का होने की वजह से राजू से शक्ल मिलती है आखिरकार वह मामा जो था लेकिन असलियत कोई नहीं जानता था सिवाय मधु के मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि राजू इन बच्चों का मामा बन गया या बाप दुनिया की नजर में तो वह मामा ही था लेकिन असलियत में तुम दोनों बच्चों का असली बाप राजू ही था अपनी ही बड़ी बहन को गर्भवती करके वह उसे मां बनने का सुख प्राप्त करवाया था,,,,,,,,,

दूसरी तरफ राजू अपनी बुआ के साथ एकांत पाकर दिनभर उस की चुदाई में लगा रहा गुलाबी भी अच्छी तरह से जानती थी कि अब वह शादी करके अपने घर चली जाएगी फिर राजू जैसा मुस्टंडा लंड उसे नहीं मिल पाएगा इसीलिए मैं जितना हो सकता था उतना राजू के लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो जा रही थी,,,,,। राजू के गर्म लावा को अपनी बुर में पूरी तरह से खींच लेने के बाद थोड़ी ही देर में गुलाबी राजू के लंड पर से अपनी बुर को खींचते हुए उसे बाहर निकाली और उसके बगल में ढेर हो गई दोनों गहरी सांस ले रहे थे दोपहर का समय होने की वजह से और आज घर में उन दोनों के सिवा कोई नहीं था इसलिए इस पल का वह दोनों भरपूर आनंद ले रहे थे,,,,।

Godam k pas apni ma ki chudai karta raju

गहरी सांस लेते हुए गुलाबी राजू से बोली,,,।

राजू तुझे बड़े भैया का व्यवहार कुछ अजीब सा नहीं लग रहा है,,,

बिल्कुल बुआ लेकिन सही भी है,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,,(एक ही खटिया पर राजू पीठ के बल लेटा हुआ था और गुलाबी पेट के बल लेटकर बातें कर रही थी और उसकी उभरी हुई गांड पर राजू अपनी हथेली से सहला रहा था)

अरे इसमें समझने का क्या है जब एक पति के सामने उसकी बीवी अपने ही बेटे के साथ चुदवाएगी तो भला उस पति पर क्या बीतेगी,,, तुम ही बताओ,,,,,,, और पिताजी इसीलिए ना तो तुम्हें और ना तो मुझे अपने साथ ले गए दीदी के वहां और तो और हम दोनों की जल्द से जल्द शादी करके अपने और मां के बीच के फासलों को कम करना चाहते हैं,,,,,

Madhu or uska beta ek sath maje lete huye

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लेकिन राजू भैया तो समझ ही गए होंगे कि जो मजा तो दे सकता है वह उनके बस की बात बिल्कुल भी नहीं है,,,,,,

सही बात है पिताजी को मैंने सब कुछ दिखा दिया हूं,,,

मतलब,,,,

मतलब यही कि पिताजी को यकीन नहीं हो रहा था कि मां  मेरे साथ चुदवाने के लिए तैयार हो गई है उनके ईसी शंका को दूर करने के लिए मैं,,, पिताजी को सारा कार्यक्रम दिखा दिया जिस दिन पिताजी पड़ोस के गांव में शादी में जा रहे थे,,,,

हां हां याद आया,,,

Apne ma or pitaji ki gerhajiri me apni bua ki chudai karta raju 

पिताजी कोई शादी में नहीं जा रहा था मैंने ही उनसे यह बहाना करने के लिए कहा था और यह भी कहा था कि घर से निकलने के बाद 1 घंटे में ही घर के अंदर वापस आ जाना मैं दरवाजा खुला रखूंगा,,,,,(राजू की बात सुनते ही गुलाबी की उत्सुकता बढ़ने लगी और वहां हाथ की कोहनी के सहारे  टेका लेकर हल्के से अपने गर्दन को उठा दी,,,,) और पिताजी ने ठीक वैसा ही किया जैसा कि मैंने कहा था थोड़ी देर में पिताजी वापस आ गए और मैं पिताजी को घर में बुलाकर दबे पांव उन्हें मां के कमरे के सामने खड़ा कर दिया और दरवाजा बंद करके हल्का सा दरवाजा खोल दिया था कि पिताजी को सब कुछ दिखाई दे और मैंने इसीलिए मां के कमरे का लालटेन भी नहीं बुलाया था कमरे के लालटेन का उजाला पूरे कमरे में कमरे को प्रकाशित कर रहा था जिसमें पिताजी को सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था और बुआ मैंने पिताजी को दिखाते हुए मां की ऐसी चुदाई किया  ऐसी चुदाई किया कि पिताजी भी देखते रह गए,,,, सबसे पहले तो उन्हें मेरे लंड की लंबाई और मोटाई देखकर शर्मिंदगी महसूस हुई होगी क्योंकि वह तुम और मैं अच्छी तरह से जानते हैं कि पिताजी का लंड कितना बड़ा और मोटा है,,,

Raju apni bua ko mast karta hua

हां तेरे मुकाबले तो कुछ भी नहीं है,,,,

वही तो मां को तो पता ही नहीं था कि पिताजी दरवाजे पर खड़े होकर उसकी कामलीला देख रहे हैं मां तू इतनी पागल हुए जा रही थी कि मेरे लंड पर खुद कुद रही थी मुझे पूरा यकीन है कि यह सब देख कर एकदम से जल भूल गए होंगे और इसीलिए वह हम दोनों का विवाह जल्द से जल्द कर देना चाहते हैं ताकि तू अपने घर पर अपने पति के साथ मजा करे और मैं अपनी बीवी के साथ और वह अपनी बीवी के साथ,,,,,

ओहहहह अब मुझे समझ में आया तभी तो मैं कहूं कि भैया को इतनी जल्दबाजी क्यों है क्योंकि उन्हें भी तो चोदने के लिए मेरी बुर में रही रही थी तो इतनी जल्दी मुझे अपने से अलग कैसे कर रहे हैं जबकि भैया का सारा ध्यान भाभी पर है वह भाभी को तेरे साथ नहीं देखना चाहते,,,,

हां यही तो लेकिन देखना भले ही पिताजी सारे तिकड़म लगा लें भले ही मेरी शादी झुमरी के साथ हो जाए लेकिन मां को जो मेरे लंड का चस्का लग गया है जो आदत पड़ चुकी है वह कभी जाने वाली नहीं है तुम तो जानती हो वह एक बार बुर में मोटे तगड़े लंड का सांचा बन जाए तब पतला छोटा लंड जरा भी अच्छा नहीं लगता,,,, सब कुछ छोड़ छाड़ कर मेरे लंड का मजा लेने के लिए मेरे पास आएगी,,,( राजू अपनी बुआ की बड़ी-बड़ी गांड पर हथेली घुमाते हुए बोला,,)

तभी तो मुझे शादी करके इस घर को छोड़कर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही है क्योंकि जैसा तुम कह रहे हो मेरी भी बुर में  भी तो तुम्हारे लंड का सांचा बन गया है अब इसमें छोटा लंड जाएगा तो मजा ही नहीं आएगा,,,,

हाय मेरी छिनार बुआ तु बिल्कुल भी चिंता मत कर,,, मैं हूं ना तेरी जवानी की प्यास बुझाने के लिए,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू धीरे से उठा और अपनी बुआ के ऊपर चल गया और उसकी टांगों को खोलकर अपने लंड को पीछे से उसकी बुर में घुसा दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया थोड़ी ही देर में खटिया चरर मरर करने लगी और गुलाबी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,,

दूसरे दिन ही मधु और हरिया अपनी बेटी के ससुराल से वापस आ चुके थे और हरिया सब कुछ व्यवस्था करके गुलाबी और राजू दोनों की सगाई एक साथ कर देने का जुगाड़ कर लिया वह लड़कों वालों से भी बात कर लिया था पर अपने साले को भी बुलाया था क्योंकि वही तो इस रिश्ते को लेकर आया था और फिर खुद ही झुमरी की मां से बात करने के लिए झुमरी के घर पहुंच गया था झुमरी की मां को इस रिश्ते से बिल्कुल भी इनकार नहीं था क्योंकि वह राजू को अच्छी तरह से जानती थी और उसे मजा भी लेती थी इसलिए वह भी हामी भर दी,,,,)

निश्चित किए हुए दिन पर सभी मेहमान इकट्ठा होने लगे गांव के सभी लोग राजू और गुलाबी दोनों की सगाई में आमंत्रित थे इस सगाई में लाला और उसकी बहन भी आमंत्रित हैं जो कि थोड़ी ही देर में दोनों को आशीर्वाद देने के लिए पहुंच चुके थे,,,,, राजू दौड़ दौड़ कर सारे काम देख रहा था क्योंकि खाना पीना भी रखा गया था राजू की सगाई देखकर ही गांव वाले दंग रह गए थे,,,,, बहुत ही अच्छी व्यवस्था बनाया था राजू ने उसके सभी दोस्त दौड़ दौड़ कर काम कर रहे थे कोई खाने पीने की व्यवस्था देख रहा था तो कोई मेहमानों को इज्जत के साथ मान पान देते हुए बैठा रहा था,,,,,,,

लाला और उसकी छोटी बहन सोनी के लिए अच्छी व्यवस्था की गई थी वह दोनों ही ईस व्यवस्था से बहुत खुश थे,,,,, गुलाबी के ससुराल वाले भी इकट्ठा हो गए थे और मुहूर्त देखते हुए राजू और गुलाबी दोनों की सगाई संपन्न कर दी गई दोनों बहुत खुश नजर आ रहे थे गांव की औरतें विवाह का गीत गा रही थी कुछ औरतें नाच रही थी गांव वाले सभी बहुत खुश थे क्योंकि राजू ने ऐसा कोई भी इंसान नहीं था जिसे अपनी सगाई में ना बुलाया हो क्योंकि राजू अब दिन-ब-दिन तरक्की करता जा रहा था,,,, थोड़ी देर में खाने-पीने का भी कार्यक्रम शुरू हो गया था,,,,।

लेकिन राजू और उसके परिवार के साथ साथ गांव वाले की खुशियों के बीच एक शख्स ऐसा भी था जो इस सगाई से बिल्कुल खुश नहीं था वह था विक्रम सिंह का भतीजा रंजीत सिंह रंजीत सिंह ने हमेशा के लिए अपना एक खबरी झुमरी के पीछे लगाया हुआ था और उसी ने ही रंजीत सिंह को जल्द से जल्द खबर देकर उसे गांव में लेकर आया था जो कि दोनों चोरी-छिपे इस सगाई को देख रहे थे और रंजीत सिंह तो जोड़ी की खूबसूरती देखकर और भी ज्यादा उस पर मर मिला था क्योंकि आज हमारी दुल्हन की तरह सज धज कर सगाई में शामिल हुई थी,,,,, झुमरी की खूबसूरती को देखते ही रंजीत सिंह का चेहरा खिल उठा था उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे लेकिन अगले ही पल राजू से सगाई होता देखकर प्रसन्नता से भरा हुआ चेहरा एकदम क्रोध से लाल हो गया था वह एकदम क्रोधित हो चुका था उसका बस चलता तो इसी समय वह राजू का खून करके झुमरी को उठा ले जाता लेकिन वह मजबूर था क्योंकि  राजू की ताकत को अच्छी तरह से पहचानता था,,,,,,,,, लाला को भी सगाई में शामिल होता देखकर और उसकी बहन जो कि वह भी दुल्हन की तरह सोच कर आई थी उसे भी देखकर रंजीत सिंह आग बबूला हो गया था और जल्द से जल्द खबर अपने चाचा को देना चाहता था इसलिए वह तूने वहां से निकला और सीधा जाकर अपने चाचा की हवेली पर पहुंच गया और बिना कुछ बोले सीधा अपने चाचा के कमरे में जो कि दरवाजा बंद जरूर था लेकिन उस पर सिटकनी नहीं नहीं लगी हुई थी,,,, और रंजीत सिंह इतने गुस्से में था कि बिना कुछ सोचे समझे एक झटके में ही अपने चाचा के कमरे का दरवाजा खोल दिया और उसकी आंखों के सामने जो दृश्य उसे नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,,, कुछ नजारे को देखकर रंजीत सिंह एकदम से चौक गया था,,,,,,,, एक झटके से दरवाजा को खोलते ही उसने देखा कि उसके चाचा पलंग के नीचे खड़े हैं एकदम नंगे और पलंग पर उसकी चाची जो कि इस उम्र में भी बहुत खूबसूरत एकदम नंगी होकर पीठ के बल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को चोरी करके उसे अपने पति के कमर से लपेटी हुई थी और रंजीत सिंह के चाचा अपने लंड को उसकी बुर में डालकर अपनी कमर जोर जोर से हिला रहे थे रंजीत सिंह तो यह नजारे को देखता ही रह गया क्योंकि उसकी चाची के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था केवल मंगलसूत्र था जो हर धक्के के साथ इधर उधर हिल रहा था और उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां उसके चाचा के जबरदस्त धक्को के साथ ही पानी भरी गुब्बारों की तरह छातियों पर लहरा रही थी अपनी चाची को इस अवस्था में देखकर खुद से रंजीत सिंह का लैंड खड़ा हो गया था इससे पहले उसने अपनी चाची को इस अवस्था में कभी नहीं देखा था,,,,

Is tarah se vikaram sing apni biwi ki chudai karta hua

विक्रम सिंह कुछ ऐसे ही इस बात का एहसास हुआ की दरवाजा उसके भतीजे ने खोला है तो वह एकदम से आग बबूला हो गया विक्रम सिंह की बीवी का भी था वह भी गुस्से से लाल हुए जा रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि जिस पल से वह गुजर रही थी वह बेहद नाजुक पल था चरमसुख के बेहद करीब था इसलिए विक्रम सिंह की बीवी तो नहीं लेकिन विक्रम सिंह एकदम से जोर से चिल्लाते हुए बोला,,,,।

रंजीत यह क्या बदतमीजी है तुम्हें बिल्कुल भी एहसास है कि तुमने क्या किया है तुम्हें जरा भी तमीज है कि किसी के कमरे में प्रवेश करने से पहले दरवाजे पर दस्तक दी जाती है,,,,

ममममम मै माफी चाहता हूं चाचा जी मुझसे बड़ी भूल हो गई और चाची तुमसे भी माफी मांग रहा हूं,,,(अपनी चाची के नंगे बदन को देखते हुए दोनों हाथ को जोड़कर माफी मांगते हुए) मैं क्या करूं हमें अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाया क्योंकि खबर ही कुछ ऐसी है,,,,

Vikaram sing ki biwi ekdam mast hote huye

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जो भी हो रंजीत थोड़ी देर बाद आना जाओ कमरे से दफा हो जाओ,,,(रंजीत की तरफ देखे बिना ही विक्रम सिंह की बीवी उसे आदेश देते हुए पूरी क्योंकि वह रंग में भंग डाल रहा था और इस समय वह अपने चरम सुख के बेहद करीब थी,,,, अपनी चाची का आदेश मिलते ही वह एकदम से कमरे से बाहर चला गया और जाते-जाते दरवाजे को भी बंद कर दिया लेकिन दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा वह अपनी चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनना चाहता था जो कि थोड़ी ही देर में कमरे से बाहर तक आने लगी और वह अपनी चाची की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर उत्तेजित हुआ जा रहा था इससे पहले उसने कभी भी अपनी चाची को इस अवस्था में नहीं देखा था इसलिए पहली बार अपनी चाची को इस तरह की हालत में देखकर उसकी खुद की हालत खराब हो गई थी,,,, विक्रम सिंह भी अपने अधूरे काम को पूरा करते हुए अपनी  बीवी की बुर में जोर जोर से धक्के लगा रहा था थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ झड़ गए,,,,,

थोड़ी ही देर में खुद विक्रम सिंह कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आया तो,,,, थोड़ी ही दूर पर रंजीत सिंह खड़ा था उसे देखते ही थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए विक्रम सिंह बोला,,,,।

रंजीत तुम्हें जरा भी तमीज है किसी भी कमरे में किसी के भी कमरे में बिना ईतला कीए घुस जाते हो,,,,

चाचा जी मैं माफी चाहता हूं लेकिन क्या करूं खबर ही कुछ ऐसी थी हमें तो लगा था कि लाला हमारी धमकी से डरकर अपनी हवेली में मुंह छुपाए बैठा होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह तो गांव के जश्न में शामिल होता है नाश्ता गाता है खुश रहता है उसे तो बिल्कुल भी फर्क ही नहीं पड़ा,,,,

क्या बक रहे हो,,,,,

हां चाचा जी मैं ठीक कह रहा हूं आज गांव में उसी लड़की की सगाई थी जिस पर मेरा दिल आ गया था वहीं पर मैं गया हुआ था तो देखा लाला और उसकी बहन दोनों जश्न में शामिल होकर बहुत खुशियां मना रहे थे,,,,

हमारी धमकी का लाला पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा,,,,, जरूर कुछ करना होगा हमें तो लगा था कि लाला घबराकर सब कुछ हमारे नाम कर के चला जाएगा लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा होता नजर आ रहा है,,,,

हां चाचा जी हमें कार्रवाई करनी होगी वरना हमारी इज्जत के साथ साथ लाला की जमीन जायदाद भी चली जाएगी,,,,,,,,

कल ही चलते हैं फिर से लाला के पास,,,,,(विक्रम सिंह एकदम क्रोधित होते हुए बोला)

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