काफी दिनों बाद राजू कमला चाची की बहू से मिल रहा था,,,, राजू को आज भी याद है कि कैसे उसने कमला चाची की बहू को बहला-फुसलाकर उसकी जवानी पर काबू पाया था और उसे चोदने के बाद पूरी तरह से तृप्त हो चुका था ऐसा नहीं था कि राजू ने केवल खुद ही मजा लिया था वह कमला चाची की बहू को भी पूरी तरह से आनंदय बना दिया था,,,, आज महीनों बाद वह फिर से समय आ गया था जब वह कमला चाची की बहू को चोदने के लिए उसके घर पर जा रहा था,,,,,, कमला चाची की बहू भी राजू से चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी और अपनी सास का घर में ना होने का पूरा फायदा उठा लेना चाहती थी इसीलिए तो मौका देखकर वह राजू को अपने घर पर आने का आमंत्रण देती थी और राजू भी उसके पीछे-पीछे उसकी मटकती हुई गांड को देखते हुए पहुंच गया था,,,,।
कमला चाची की बहू

अपने चारों तरफ नजर घुमाकर देखने के बाद कमला चाची की बहू अपने घर का दरवाजा खोल कर घर में प्रवेश कर गई और दरवाजे को खुला छोड़ कर इशारा करके राजू को भी अंदर आने के लिए बोल दी और मौका देखते ही राजू भी कमला चाची के घर में प्रवेश करके और दरवाजे को बंद तो कर दिया लेकिन जल्दबाजी में सीटकनी नहीं लगाया,,,, इस घर से राजू का बहुत गहरा नाता हो चुका था चुदाई के अद्भुत पाठ्यक्रम को विस्तार से समझाने वाली केवल कमला चाची ही थी जिसने पहली मर्तबा राजू को जवानी के स्वाद से वंचित कराई थी और उस स्वाद को चखकर राजु आज पूरी तरह से मर्दाना घोड़ा बन चुका था जो मौका देखते ही किसी की भी सवारी करने के लिए तैयार हो जाता था और उन्हें चरम सुख के अद्भुत सीमा तक ले जाकर के धन्य कर देता था,,,,, आज से मौका मिला था कमला चाची की बहू की सेवा करने का उस पर चढ़ने का और इसके लिए राजू बेहद उत्सुक था,,,,।
घर में प्रवेश करते ही कमला चाची की बहू घर के बीचो-बीच आंगन में खड़ी हो गई और प्यासी नजरों से राजू की तरफ देखने लगी जोकि पजामे में उसका तंबू बना हुआ था जिस पर नजर पड़ते ही कमला चाची की बहू की बुर से काम रस की बूंद टपकने लगी,,,,,, राजू बेहद उत्साहित और उत्तेजित था वह कमला चाची की दोनों की तरफ आगे बढ़ा और करीब पहुंचकर अपने हाथों से कमला चाची की बहू के घूंघट को उठाते हुए बोला,,,।
अब तो घूंघट उठा दो मेरी रानी,,
(राजू के हाथों घुंघट उठते ही कमला चाची की बहू एकदम से सिहर उठी उसके बदन में उत्तेजना की लहर रुकने लगी उसे इस बात का एहसास होने लगा कि जैसे राजू उसके साथ सुहागरात मनाने की तैयारी कर रहा हो,,,,, अपने पति से तो उसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए सिर्फ राजू पर ही उसकी उम्मीद टिकी हुई थी इसीलिए तो मौका देखते ही राजू को अपने घर पर लेकर आई थी,,,, घूंघट के उठते ही जो नजारा राजू की आंखों के सामने नजर आया उसे देखकर राजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया,,,,)
तुम बहुत खूबसूरत हो भाभी,,,, तुम्हारे लाल लाल होंठ,,,(अपनी उंगलियों को कमला चाची की बहू के लाल-लाल होठों पर घुमाते हुए) इतने रसीले हैं कि मन कर रहा है कि इसे अपने मुंह में भर कर इसका सारा रस चूस जाऊं,,,,.
सहहहरह आहहहहह तो देर किस बात की है राजू,,,,,
ओहहहह भाभी तुम्हारी रजामंदी का ही इंतजार कर रहा था,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने दोनों हाथों में कमला चाची की बहू का खूबसूरत चेहरा लेकर उसे अपनी तरफ खींचा और उसके लाल-लाल होठों पर अपने तपते हुए होंठ को रख दिया और इतने मात्र से ही कमला चाची की बहू एकदम से पिघल गई उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर में से रस टपकने लगा,,,,, शर्म और उत्तेजना से वह संकोच आते हुए राजू की तरफ आगे बढ़ती चली जा रही थी और राजू देखते ही देखते अपने दोनों हाथों को उसके खूबसूरत चेहरे से हटाते हुए उसकी पतली चिकनी कमर पर रख दिया और उसे उत्तेजना के मारे कस के दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया मारे उत्तेजना के कमला चाची की बहू से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,,, राजू किसी भी हालत में कमला चाची की बहू के लाल लाल रसभरी होठों को छोड़ना नहीं चाहता था वह उसके रस को पूरी तरह से अपने होठों से नीचोड़ लेना चाहता था,,,,,।
राजू ने जिस तरह से कमला चाची के बहू के लाल लाल होठों का चुंबन करते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींच कर अपने बदन से सटाया था ऐसे हालात में कमलेश तहसील की बहू की बुर सीधे जाकर राजू के टनटनाए लंड से टकरा गई और महीनों बाद राजू कैलेंडर को अपनी बुर से टकराता हुआ महसूस करते ही कमला चाची की बहू एकदम से पानी पानी हो गई एकदम से मस्त हो गई और राजू का साथ देते हुए अपने लाल-लाल होठों को खोल कर उसकी जीभ को अपने होंठों के बीच आने की इजाजत दे दी,,,, मौके की नजाकत को समझते हुए राजू अपनी जीभ को कमला चाची की बहू के होठों के बीच डालते हुए उसके लाल को चाटना शुरू कर दिया,,,,
स्त्री के प्रति प्रेम और वासना भी अजीब होता है ऐसे हालात में मर्दों को इस बात का एहसास ही नहीं होता कि वह क्या कर रहा है उसे औरत का हर एक चीज हर एक अंग बेहद मदहोश कर देने वाला लगने लगता है,,, और इस समय यही राजू के साथ भी हो रहा था राजू पागलों की तरह मदहोशी के आलम में कमला चाची की बहू की थुक और लार दोनों को अपने गले के नीचे गटक रहा था और यही क्रिया कमला चाची की बहू भी कर रही थी महीनों से वह मर्द के लिए तड़प रही थी पति से तो उसकी मुलाकात होती ही नहीं थी वह ना जाने कहां घूमता फिरता था किसी को कुछ भी पता नहीं था ऐसे हालात में कमला चाची की बहू रात भर बिस्तर पर करवट बदलते हुए गुजार देती थी लेकिन बिस्तर पर साथ देने की आस उसे राजु में ही नजर आती थी,,,,
उसे पूरा विश्वास था कि उसके बदन में उठ रहे मीठे-मीठे दर्द को राजू ही अपनी बाहों में लेकर अपनी मर्दाना ताकत का जोड़ दिखाते हुए उसके दर्द को दूर करेगा इसीलिए तो वह राजू की बाहों में पूरी तरह से मचल रही थी,,,,, पल-पल राजू की हालत खराब होती जा रही थी कमला चाची के घर के आंगन में उसकी बहू के साथ और पूरी तरह से मस्ती करने के इस अवसर को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह अपने दोनों हाथों को साड़ी के ऊपर से ही उसकी गोल-गोल बड़ी बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया अपने नितंबों पर राजू की हथेली का जोर पडते ही कमला चाची की बहू उत्तेजना से तड़पने लगी आज उसके हर एक अंग पर महीनों बाद राजू की हथेलियां पहुंच रही थी जिसे वह अपने बदन पर महसूस करके पानी पानी में जा रही थी उसकी बुर से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था जिसे रोक पाना इस समय किसी के बस में नहीं था एक राजू ही था जो अपने लंड के जोर से उसकी बुर में मदन रसके बाहों में रुकावट डाल सकता था,,, लेकिन इस समय राजू कमला चाची की बहू की खूबसूरत बदन से खेलना चाहता था इसीलिए एक हाथ उसके नितंबों पर रखे हुए दूसरे हाथ को उसकी गांड से हटाकर साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर वाली जगह पर रखकर उसे दबाने लगा,,,,,, राजू की हर एक हरकत कमला चाची की बहू के बदन में आग लगा रही थी कमला चाची की बहू तिलतिल उत्तेजना के दलदल में धंयती चली जा रही थी,,, औरत को काबू करने में और औरत को चुदवाती बनाने में राजू को महारत हासिल थी वह इस खेल में पूरी तरह से दिल से डूब जाता था और औरत को मस्त कर देता था और यही अपनी कला का प्रदर्शन वह कमला चाची की बहू पर पूरी तरह से आजमा रहा था जो कि पहले से ही राजू की बाहों में काबू से बाहर होती जा रही थी,,,,
ओहहहह राजू तूने तो मुझे मस्त कर दिया रे तेरा लंड मेरी बुर पर ठोकर मार रहा है,,,,
कमला चाची की बहू अपना ब्लाउज उतारते हुए

ओहहहह भाभी,,,,(गर्दन पर चुंबनो की झड़ी बरसाते हुए) तो खोल दो दरवाजा अंदर आने दो अपने मेहमान को डूब जाने दो तुम्हारी मेहमान नवाजी में आखिरी से भी तो पता चले कि वह किस घर में दाखिल हुआ है जहां पर मेहमान को पूरी तरह से तृप्त करके ही बाहर जाने देते हैं,,,,, मेरी रानी,,,,
ओहहहहह राजू,,,(राजू की हरकतों से मदहोश होते हुए) रोका किसने है आने दे मेरे मेहमान को मेरे अंदर डूब जाने दे मेरी प्यास की गहराई में छोटी सी जगह जरूर है लेकिन तुझे भी अंदर लेने की ताकत रखती है,,,,
ओ मेरी प्यारी भाभी तेरे छोटे से छेद में अच्छे-अच्छे राजा महाराजा सिकंदर डूब गए तो मैं क्या चीज हूं,,,,,
तुझे तो तैरना आता है रे मुझे पूरा विश्वास है तो डूबेगा नहीं चाहे जितनी भी गहराई मैं तुझे डाल दिया जाए,,,
Kamlaa chachi ki Bahu ki madmast kar Dene wali gaand

यह सब तो तुम्हारी मेहरबानी है भाभी जो कुछ भी सीखा हो तुम से ही सीखा हूं,,,,(ब्लाउज का बटन अपने हाथों से खोलते हुए,,,,,)
मुझसे ही सीखा है लेकिन मुझे ही तड़पाता है,,,,
कोई बात नहीं भाभी आज तुम्हारी पूरी तड़प में मिटा दूंगा तुम्हें ऐसा सुख दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,,
लेकिन आंगन में नहीं,,,,(राजू अपने दोनों हाथों से उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठा रहा था लेकिन कमला चाची की बहू उसके हाथ को पकड़कर रोकते हुए,,,,)
तो कहां मेरी रानी जहां बोलो वहां,,,,
चल मेरे कमरे में,,,,
जो आज्ञा महारानी,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू बिना कुछ बोले कमला चाची की बहू को अपनी गोद में उठा लिया जिससे कमला चाची की बहू एकदम से घबरा गई और उसे नीचे उतारने के लिए बोली लेकिन राजू कहां मानने वाला था कमला चाची की बहू को लग रहा था कि उसका भारी-भरकम बदन उससे उठाया नहीं जाएगा लेकिन राजू को कमला चाची की खूबसूरत बहू का बदन फूल की तरह हल्का लग रहा था इसीलिए वह बोला,,,)
घबराओ मत भाभी मैं तुम्हें गिराऊंगा नहीं तुम्हारा वजन कुछ ज्यादा नहीं है एकदम गुलाब के फूल की तरह तुम्हारा वजन है,,,,
लेकीन राजू मुझे डर लग रहा है,,,,
कमला चाची की बहू अपनी साड़ी उतारते हुए

डरना तो तुम्हें भाभी मेरे लंड से चाहिए क्योंकि आज मैं तुम्हारी बुर फाड़ दूंगा,,,आज तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,
ऐसा जुल्म मत करना मेरे राजा वरना ढीली बुर तुम्हें ही बाद में पसंद नहीं आएगी,,,,,
तुम चिंता मत करो मेरी रानी तुम्हारी बुर में डालने में मुझे बहुत मजा आएगा,,,,,(ऐसा कहते हुए कमला चाची की बहू को अपनी गोद में उठाए हुए ही राजू उसे उसके कमरे तक ले आया और पैर के सहारे से दरवाजा को खोल कर उसे उसके कमरे में ले गया और खटिया पर पटक दिया,,,, वह खटिया पर चारों खाने चित हो गई और राजू अपने हाथों से अपना कपड़ा उतारने लगा और तुरंत एकदम से नंगा हो गया कमला चाची की बहू की निगाहें राजु के मोटे तगड़े टन टनाए हुए लंड पर टिकी टिकी रह गई,,,, कमला चाची की बहू का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,,, और राजू अपने लंड को उंगलियों के सहारे से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए कमला चाची की बहू की तरफ मुस्कुराता हुआ देखकर बोला,,,,।
ऐसे क्या देख रही हो भाभी थोड़ी ही देर में तुम्हारी बुर की गहराई नाप रहा होगा,,,,
मैं महीनों बाद तेरे लंड के दर्शन कर रही हूं इसीलिए आज एकदम से गदगद हो गई हूं,,,,,,
अभी तो तुम हुई हो थोड़ी ही देर में तुम्हारी बुर भी गदगद हो जाएगी,,,,
तो आजा मेरे राजा रोका किसने है,,,,,
(उसके आमंत्रण को पाकर राजू एकदम से उत्साहित होता हुआ कमला चाची की बहू के खटिया के पास गया और आखरी बचे ब्लाउज के बटन को खोल करो उसकी नंगी बड़ी बड़ी चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर दिया,,,, और फिर उसे उतारकर खटिया के नीचे फेंक दिया कमर के ऊपर कमला चाची की बहू एकदम नंगी हो गई उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छातियों पर लौटने लगी जिसे राजू अपने हाथों में पकड़ कर उससे खेलने लगा,, महीनों बाद अपनी चूची को मर्दाना हाथों में महसूस करते ही उसकी बुर पानी पानी होने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी राजू औरतों से खेलना अच्छी तरह से जानता था उनकी चुचियों से कैसे खेला जाता है इसका अभ्यास उसे अच्छी तरह से था,,,,वह बड़ी जोर जोर से दोनों हथेलियों में भरकर कमला चाची की बहू की चूचियों को दबा रहा था वैसे भी औरतों की चूचियां उसे बहुत अच्छी लगती थी उसे दबाना मुंह में लेकर पीना उनसे छेड़छाड़ करना उसे बेहद आनंदित कर देती थी और इस समय वह चूची से खेलता हुआ मस्त हो जा रहा था उत्तेजना के मारे कमला चाची की बहू की चूची ओके छुआरे पूरी तरह से खड़े हो चुके थे जिसे राजू अपने मुंह में लेकर पी रहा था बारी-बारी से दोनों को हथेली में भरकर उसे मुंह में लेकर पीने में अपना एक अलग मजा था और इसी मजे को कमला चाची की बहू भी लूट रही थी वह खटिया पर छटपटा रही थी उत्तेजना के मारे उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी वह राजू के सर पर अपना हाथ रख कर उसे जोर से अपनी छातियों पर दबा रही थी ताकि राजू जितना हो सके उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दें और ऐसा राजू कर भी रहा था,,,,,,
कमला चाची के घर में राजू उसके बहू के कमरे में पूरी तरह से नंगा था और उसकी बहू को नंगी करने में जुटा हुआ था,,,, जिसकी शुरुआत उसने कमला चाची की बहू की ब्लाउज को उतारकर कर चुका था और धीरे-धीरे उसकी साड़ी की गीठान को भी खोल रहा था,,,, जिसमें उसे कामयाबी हासिल हो रही थी धीरे-धीरे करके उसने कमला चाची की बहू की साड़ी को भी उसके बदन से अलग कर दिया,,,,, जैसे-जैसे उसके बदन से कपड़े वाले होते जा रहे थे वैसे वैसे उसकी उत्तेजना में बढ़ोतरी होती जा रही थी वह पागल हो जा रही थी खुमारी उसकी आंखों में पूरी तरह से छाई हुई थी,,,.
भाभी तुम्हें अपने हाथों से कपड़े उतार कर नंगी करने का मजा ही कुछ और है,,,
राजू तू नहीं जानता मैं इस दिन के लिए कितना इंतजार कर रही थी कितना तड़प रही थी तू तो जानता है कि तेरे भैया घर पर आते नहीं है,,,
सच कहूं तो भाभी भैया को तुम्हारी कदर ही नहीं है नहीं तो तुम्हारी जैसी जवान खूबसूरत औरत अगर मेरे पास होती तो दिन रात में अपना लंड बुर में डालकर पड़ा रहता और दूसरा कोई काम करने से रहता,,,,
ओ राजू मेरे राजा काश मेरा पति तू होता तो मजा आ जाता,,,,,
चिंता मत करो भाभी जब तक मैं हूं तब तक तुम्हारी बुर की सेवा करता रहूंगा,,,,,
ओहहहह राजू तू ही तो एक सहारा पूरे गांव में जिसका मैं इंतजार करती रहती हूं नहीं तो अब तो मुझे अपने पति का भी इंतजार नहीं है अब जल्दी से मेरी पेटीकोट उतार कर मुझे नंगी कर दे मेरी भूल को अपनी आंखों इसे देखकर ही उसका पानी निकाल दे,,,,
ओहहह मेरी भाभी तुम तो एकदम छिनार हो गई हो,,,
क्या करूं राजू बुर की तड़प ही कुछ ऐसी है कि किसी भी औरत को रंडी बना दे,,,,,
तुम बिल्कुल की चिंता मत करो भाभी,,,(दोनों हाथों को कमला चाची की बहू की पेटीकोट की डोरी पर रखते हुए) तुम्हारी इस रंडी पन में अपने लंड से दूर कर दूंगा,,,,
ओहहहहह राजू तेरा मुसल (हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को पकड़ते हुए) डाल दे मेरी ओखरी में और कूट दाल धान की तरह,,,,
चिंता मत करो रानी आज यह मुसल तुम्हारी ओखली में धमाल मचा देगा,,,, ऐसा धान कुटुंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू ने एक झटके से पेटीकोट की डोरी को खोल कर पेटीकोट को कमला चाची की बहू की कमर से एकदम से ढीली कर दिया और फिर राजू दोनों हाथों से पेटीकोट को पकड़कर नीचे की तरफ खींचने काका मौके की नजाकत को समझते हुए कमला चाची की बहू अपनी गोल गोल गांड को हवा में थोड़ा सा उठाकर राजू की मदद करने लगी ताकि वह उसके पेटीकोट को आराम से उतार सके,,,,, और उसकी समय सूचक ता को देखते हुए राजू भी तुरंत पेटीकोट को नीचे खींच कर उसके बदन से अलग कर दिया और अगले ही पल कमला चाची की बहू खटिया पर पूरी तरह से नंगी हो गई जिसे देखकर राजू का लंड कमला चाची की बहू की हथेली में और ज्यादा कड़क होने लगा जिसे महसूस करके कमला चाची की बहू बोली,,,)
कौन सा तेल लगाता है रे तेरा लंड तो पहले से भी ज्यादा मोटा लग रहा है,,,
तुम्हारी बुर के रस का मालिश करता हूं तभी तो तुम्हारी बुर की सेवा कर पाऊंगा,,,,
ओहहह राजू,,,(नजर उठा कर राजू के लंड की तरफ देखते हुए,) जल्दी से कर मेरी बुर की सेवा मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,
अभी तो शुरुआत है भाभी धीरे-धीरे बहुत मजा आएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो गया और सीधे जाकर कमला चाची की बहू के पैरों की तरफ से खटिया पर चढ़ते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और उसकी दोनों टांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर थोड़ा सा फैलाते हुए उसकी टांगों के बीच के पतली दरार को बड़े गौर से देखने लगा जो कि उत्तेजना के मारे कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,,,, कमल चाची की बहू सोच रही थी कि राजू अपने लंड को उसकी बुर में डालने की तैयारी कर रहा है लेकिन राजू कमला चाची की बहू की तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था इसलिए तुरंत अपने प्यासे होठों को उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,, राजू की इस हरकत से कमला चाची की बहू अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाई और एकदम से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दी और उसके मुख्य से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूट पड़ी राजू तुरंत उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में लेता हुआ अपनी जीत को उसकी गुलाबी छेद में अंदर तक डाल दिया और उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया कमला चाची की बहू बिस्तर पर जल बिन मछली की चरह तड़प रही थी,,,, राजू औरतों का जवानी की याद में तड़प आना भी जानता था उन्हें अपने लंड के फुहारे से बुझाना भी जानता था लेकिन अभी कमला चाची की बहू की जवानी की गर्मी को ठंडक देने का समय नहीं आया था इसलिए राजू उसे और थोड़ा गर्म कर रहा था,,,,
Kamlaa chachi apne Ghar k pichwade

एक तरफ कमला चाची की बहू अपनी जवानी की गर्मी बुझाने में लगी हुई थी और दूसरी तरफ पड़ोस में हो रही पूजा में उपस्थित कमला चाची को बड़े जोरों से पेशाब लगी और वह पड़ोस के घर से बाहर निकल कर पेशाब करने के लिए अपने घर के पीछे की तरफ जाने लगी धीरे-धीरे कमला चाची अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए अपने घर के पीछे की तरफ चली जा रही थी वह जल्द से जल्द,,,,मुत लेना चाहती थी,,,,, क्योंकि किसी भी वक्त वह साड़ी में ही पेशाब कर देती,,,, देखते ही देखते वह अपने घर के पीछे पहुंच गए और अच्छी सी जगह देखकर पहले तो अपने चारों तरफ देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और फिर नीचे बैठकर पेशाब करना शुरू कर दी उसके पेशाब की धार बड़ी दूर तक जा रही थी,,,, और बुर से फूट रही सीटी की आवाज तो गजब ढा रही थी लेकिन उसे सुनने वाला इसमें कोई नहीं था क्योंकि दोपहर का समय था और इस समय खेतों में कोई नजर नहीं आ रहा था वरना इस नजारे को जरूर खेतों में काम करने वाले मजदूर गांव के लोग देखे ही लेते और इस तरह का नजारा देखने के बाद तो मर्दों की क्या हालत होती है यह तो एक मर्द ही अच्छी तरह से जानता है,,,,,
Ghar k piche bethkar pesan karti huyi kamlaa chachi

मुतने की प्रक्रिया से दुरुस्त होने के बाद वह अपनी जगह से खड़ी हुई और अपने कपड़ों को ठीक करके वह वापस पड़ोस के घर पर जाने लगी लेकिन जैसे ही वह अपने घर के पीछे वाले भाग से दीवार की ओर से गुजरने लगी तो उसे पीछे की खिड़की से कुछ आवाज सुनाई दी जिसे सुनकर वो एकदम से रुक गई उसे समझ में नहीं आ रहा था की आवाज कैसी है जैसे जैसे वह खिड़की का करीब जाने लगी अंदर से आ रही आवाज उसके कानों में एकदम साफ सुनाई देने लगी जो कि एक औरत की गरमा गरम सिसकारी की आवाज थी वह एकदम से चौक गई थी अभी तक उसने खिड़की से अंदर की तरफ झांकी नहीं थी लेकिन समझ गई थी कि अंदर क्या खिचड़ी पक रही है,,,,, उस गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुन कर खुद कमला चाची की सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि उसे भी महीनों गुजर गए थे अपनी बुर में लंड लिए हुए,,,,
धड़कते दिल के साथ कमला चाची पीछे की खिड़की से अंदर की तरफ देखने की कोशिश करने लगी तो अंदर का दृश्य एकदम से साफ होने लगा और अंदर के नजारे को देखकर उसके होश उड़ गए उसका मुंह आश्चर्य खुला का खुला रह गया उसे साफ तौर पर दी पा रहा था कि उसकी बहू खटिया पर एकदम नंगी पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगे फैली हुई थी और उस दोनों टांगों के बीच एक जवान लड़का अपना मुंह डाले उसकी बुर को चाह रहा था लेकिन कमला चाची उस लड़के को पहचान नहीं पा रही थी क्योंकि वह पूरा का पूरा मुंह उसकी बुर में डाला हुआ था कमला चाची के तो होश उड़ गए और उसकी खुद की दोनों टांगों के बीच की दरार में हलचल मचाने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें इतना तो वह समझ रही थी कि जिस हालात से उसकी जवान बहू गुजर रही थी वही हालात उसे भी परेशान कर रहा था कमला चाची समझ सकती थी कि दोनों सास बहू एक ही नाव पर सवार थे दोनों की मंजिल भी एक थी बस खेवईया नहीं मिल रहा था,,,,,।
थोड़ी देर खिड़की से नजर सटाकर रखने के बाद उस लड़के को कमला चाची पहचान लिया और कमला चाची के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह समझ गई कि राजू अपना खेल कर रहा है,,,,,, कमला चाची तुरंत खिड़की से दूर हुई और जल्दी-जल्दी चलते हुए अपने घर के आगे जाकर खड़ी हो गई उन्हें इस बात का डर था कि अगर दरवाजा बंद हुआ तो अंदर तक आवाज भी नहीं जा पाएगी और कहीं ऐसा ना हो कि अंदर की आवाज को सुनकर राजू दीवार फांद कर भाग जाए और फिर उसका भी इरादा धरा का धरा रह जाए लेकिन उसकी किस्मत बड़ी तेज थी दरवाजा बंद जरूर था लेकिन कड़ी नहीं लगी थी इसलिए धीरे से धक्का देकर वह दरवाजे को खोल दी और धीरे से घर में प्रवेश करके दरवाजे को बंद करके कमला चाची ने कड़ी लगा दी ताकि अब बाहर से कोई अंदर ना आ सके क्योंकि अंदर काम कीड़ा का अद्भुत खेल चल रहा था जिसमें वह सह भागी होने जा रही थी,,,,,
देखते ही देखते कमला चाची ने अपनी बहू के कमरे तक पहुंच गई कमरे के अंदर से गरमा गरम सिसकारी की आवाज बड़ी साफ तौर पर सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर खुद कमला चाची की बुर पानी छोड़ रही थी,,,, कमला चाची पल भर में ही समझ गई थी कि उसे क्या करना है वैसे भी कमला चाची और उसकी बहू एक दूसरे के राजदार बन चुके थे दोनों एक दूसरे को राजू से चुदवाते हुए अपनी आंखों से देख चुके थे इसलिए दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था और ना ही अब इस बात को लेकर शर्म थी इसलिए बिना कुछ बोले कमला चाची एकदम से दरवाजा खोल दी और दरवाजा फटाक की आवाज से एकदम से खुल गया और दरवाजा के खुलते ही राजू और कमला चाची की बहू दोनों फटी आंखों से दरवाजे की तरफ देखने लगे जहां पर कमला चाची खड़ी थी दोनों के होश उड़ गए थे क्योंकि आज कमला चाची की बहू रंगे हाथ पकड़ी गई थी वैसे तो वह पहले भी अपनी सांस के हाथों रंगे हाथ पकड़ी जा चुकी थी लेकिन आज उसके साथ राजू भी था और जगह पर मौजूद भी था,,,,।
Kamla chachi apne blouse ka button kholte huye

ककककक कमला चाची तुम,,,,,(राजू एकदम से हडबढ़ाते हुए बोला,,,)
घर मेरा है मैं नहीं आऊंगी तो कौन आएगा,,,,,
चाची वह मैं,,, मैं,,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू शर्मिंदा होते हुए कमला चाची की बहू की दोनों टांगों के बीच से अपने चेहरे को ऊपर की तरफ करने लगा और कमला चाची की बहू अपनी सांस के द्वारा एक बार फिर से पकड़े लिए जाने पर शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और बगल में पड़ी चादर को अपने चेहरे पर ढक कर अपनी शर्मिंदगी को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी राजू को अपनी जगह से खड़ा होता हुआ देखकर कमला चाची बोली,,,,)
तू अपना काम जारी रख मैं तुम दोनों के बारे में अच्छी तरह से जानती हूं और मेरी बहू भी मेरे और तेरे बारे में अच्छी तरह से जानती है,,,
Kamaa chachi apni peticoat utarti huyi

क्या कह रही हो चाची,,,(एकदम आश्चर्य जताते हुए राजू बोला)
हा में ठीक कह रही हूं इसलिए डरने की जरूरत नहीं है,,, तू बहू की बुर चाट,,,, और बहु तू शर्मा मत बुर गांड सब दिख रहा है और मुंह ढक रही है,,,,,।
(अपनी सास की तरफ से रजामंदी प्राप्त करने के बावजूद भी शर्म के मारे कमला चाची की बहू अपने चेहरे पर से चादर को हटाने रही थी और राजू कमला चाची की तरफ से खुली छूट पाकर एकदम से प्रसन्न हो गया और बिना शर्माए अपने होठों को फिर से कमला चाची की बहू की बुर से लगा दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया कमला चाची से देखा नहीं जा रहा था और वह तो रात अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई राजू तिरछी नजर से कमल चाची की तरफ देखा तो मन मन मुस्कुराने लगा और इशारे से ही कमला चाची को अपनी तरफ बुलाकर एक हाथ आगे बढ़ा कर,,,, उसकी बड़ी बड़ी चूची पकड़ लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया पल भर में कमला चाची के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूटने लगी और इस आवाज को सुनकर कमला चाची की बहू से रहा नहीं गया और वह अपने चेहरे से चादर को हटाकर देखने लगी और अपनी सास की बेशर्मी को देख कर मुस्कुराने लगी सास बहू के बीच अब किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था राजू कमला चाची के घर में उसकी बहू और कमला चाची के साथ संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र अवस्था में काम क्रीड़ा का नंगा खेल खेल रहा था,,,,,, राजू पागलों की तरह कमला चाची की बहू की बुर चाट रहा था और यह देखकर कमला चाची की हालत खराब हो रही थी और वह तुरंत अपनी बाहों की तरफ आगे बढ़ गई और खटिया के नीचे खड़ी होकर धीरे से आगे की तरफ झुकी और अपनी बुर को अपनी बहू के होठों से लगा दी पहली बार कमला चाची और उसकी बहू औरत होने के बावजूद भी एक दूसरे से आनंद लेने की प्रक्रिया की शुरुआत कर चुके थे पहले तो कमला चाची की बहू को कुछ अजीब सा लगा लेकिन जैसे ही अपनी सास की बुर में से उठ रही माजक खुशबू उसके नाक में गई वह पूरी तरह से मस्त हो गई,,,, और अपनी जीभ निकालकर अपनी सास की दुर्घटना शुरू कर दी यह देखकर राजू की उत्तेजना भी एकदम से बढ़ने लगी राजू पागल होने लगा राजू इस तरह के नजारे को पहले भी अपनी मां और अपनी बुआ के साथ देख चुका था लेकिन अपने घर के बाहर इस तरह के नजारे को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजना से पागल होने लगा और पागलों की तरह कमला चाची की बहू की बुर को चाटने लगा,,,,।
कमला चाची को पीछे से चोदता हुआ

सास बहू और राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूबते चले जा रहे थे कमला चाची अपनी बहू से अपनी दूर चढ़ावा कर पूरी तरह से मदहोश हो जा रही थी और दोनों हाथों से अपनी बहू की ही चूची को जोर जोर से दबा रही थी ऐसा करने से कमला चाची की बहू को दुगना आनंद आ रहा था क्योंकि नीचे राजू लगा हुआ था और ऊपर खुद उसकी सांस लगी हुई थी,,,,,, गरमा गरम सिसकारियों से पूरा कमरा गूंज रहा था लेकिन दिन की दुपहरी में इस तरह के मदहोश कर देने वाले शोर को तीनों को सिवा और कोई नहीं सुन रहा था,,,, कमला चाची की बहू और उसकी सास दोनों की स्थिति एकदम नाजुक होती चली जा रही थी दोनों एकदम चुदवाती हुए जा रही थी दोनों की बुर मोटे तगड़े लंड को मांग रही थी अब शुरुआत किससे करना था यह राजू को तय करना था,,,,, लेकिन अपने लंड को दोनों औरतों में से किसी की भी बुर में डालने से पहले वह अपने लंड की धार बढ़ा लेना चाहता था इसलिए कमला चाची की बहू की दोनों टांगों के बीच से अपने चेहरे को उठाता हुआ वह घुटनों के बल बैठ गया और अपने खड़े लंड को पकड़ कर इशारा करके कमला चाची को अपने पास बुलाने लगा और कमला चाची घुटनों के बल अपनी बहू के ऊपर से होते हुए राजू के करीब पहुंची और उसके लंड को पकड़ कर मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी और ऐसे हालात में उसकी बुर ठीक कमला चाची की बहू के ऊपर थी जिसे देखकर कमला चाची की बहू अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और अपने दोनों हाथों को अपनी सास की गांड पर रखकर अपने चेहरे को उठाकर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दी बहुत आनंद से भरे हुए इस खेल का मजा बढ़ता जा रहा था राजू पागलों की तरह अपनी कमर को हिलाता हुआ अपने लंड को कमला चाची के मुंह में अंदर बाहर कर रहा था कुछ देर तक यह क्रिया इसी तरह से चलती रही राजू ने कमला चाची के घर में प्रवेश करने से पहले यह सोचा भी नहीं था कि अब खेल में तीसरा खिलाड़ी भी उतार आएगा लेकिन इस खिलाड़ी से मजा और भी ज्यादा बढ़ गया था और तीनों के बीच की जवानी की गर्मी उफान मारने लगी थी और इसी उफान को कम करने के लिए राजू ने तुरंत कमला चाची के मुंह में से अपने लंड को बाहर खींचा और तुरंत अपने लंड को कमला चाची की बहू की गुलाबी छेद से लगा दिया और एक ही धक्के में पूरा का पूरा लंड एक ही बार में उसकी बुर में डाल दिया राजू के इस तरह से एकाएक हमले से कमला चाची की बहू एकदम से दहल उठे और उसके मुख से चेक निकलने ही वाली थी कि कमला चाची अपनी बुर को उसके चेहरे पर दबा दी और उसकी चीख गले में ही घुट कर रह गई,,,,,
एक ही खटिया पर सास बहू और राजू तीनों दंगल मचा रहे थे राजू पागलों की तरह अपनी कमर हिला कर कमला चाची की बहु को चोद रहा था और दोनों हाथों से कभी कमला चाची की बहू की सूची तो कभी कमला चाची की बड़ी-बड़ी पपैया जैसे चूची को पकड़कर दबा रहा था और मजा ले रहा था,,,
सहहहह राजू मेरी पीठ पीछे मेरी बहू को चोदता है मेरा ख्याल नहीं रखता थोड़ी बहुत अपनी दया की कृपा मुझ पर भी दिखा दिया कर नहीं तो तुझे चोदना सिखाई हूं और मुझे ही भूल गया,,,,।
तुम्हें कैसे भूल सकता हूं चाची आखिरकार तुम ही तो मेरी गुरु हो वरना इस खेल में मैं बिल्कुल अनाड़ी था तुम ही नहीं तो लंड पकड़ कर अपने हाथों से अपनी बुर में लगाई थी तभी तुम्हें चोदना सीखा,,,,
हां और आज मेरी बहु को चोद रहा है,,,,
चिंता मत करो मेरी जान तुम्हारा भी नंबर आएगा बस अपनी बुर मेरी तरफ कर दो दोनों को बारी-बारी से चोदुंगा ,,,(और इतना सुनते ही कमला चाची अपनी दिशा और दशा बदलते हुए घुटनों के बल अपनी बहू के ऊपर ही झुक गई और अपनी गांड को राजू की तरफ आगे बढ़ा दी कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड देखकर राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह लगातार कमला चाची की गोरी गोरी गाल पर दो-चार चपत लगाकर उसकी गोरी गोरी गांड को टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, और फिर कमला चाची के गुलाबी छेद को देखते हुए वह तुरंत अपने लंड को कमला चाची की बहू की बुर से बाहर निकाला,,, और फिर अपने खड़े लंड को जो कि कमला चाची की बहू की बोर के रस से सराबोर होकर टपक रहा था उसे तुरंत राजू कमला चाची की बुर में डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़कर चोदना शुरू कर दिया,,,,,
गजब का मदहोशी धरा माहौल बना हुआ था राजू सोचा भी नहीं था कि आज उसे दो दो बुर एक साथ चोदने को मिलेगी,,,, वह तो अच्छा हुआ कि राजू पहले से ही अपनी मां और बुआ के साथ अनुभव प्राप्त कर चुका था इसीलिए सास और बहू दोनों की जवानी की आग बुझाने में उसे बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हो रही थी और यहां पर वह अपना अनुभव दिखाते हुए दोनों को बराबर का सुख दे रहा था इस समय तीनों पसीने से तरबतर हो चुके थे गर्मी का महीना होने की वजह से,,,,, तीनों के बदन से जवानी की गर्मी पसीना बनकर बह रही थी,,,,।
राजू बारी-बारी से दोनों सास बहू की बुर में लंड डाल रहा था दोनों को अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी दोनों खटिया पर जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी और मजा भी ले रही थी हर एक धक्के से खटिया चरर मरर कर रही थी राजू को इस बात का डर था कि कहीं खटिया टूट ना जाए लेकिन ऐसी चुदाई का मतलब ही क्या जिसमे खटिया ना टूटे,,,,,, राजू की उत्तेजना और मदहोशी बढ़ती जा रही थी वह लंड डालने से पहले अपने लंड के सुपारी को जोर-जोर से दोनों सास बहू की बुर में रगड़ लेता था और फिर एक हीं धक्के में अंदर डाल देता था मानो की वह खुद भी अंदर घुस जाएगा,,,,
ओहहह राजू मेरे बच्चे मेरी बुर में डाल मुझसे रहा नहीं जा रहा मेरा पानी निकलने वाला है जल्दी डाल मेरे बेटे,,,,
नहीं-नहीं राजू अपनी भाभी की बुर में डाल तेरी भाभी की बुर में आग लगी हुई है अपना पानी निकाल कर बुझा दे मेरी आग को,,,,सहहहहह आहहहहहहह
तुम दोनों चिंता मत करो तुम दोनों रंडियों का एक साथ पानी निकालूंगा,,,,, अब देखो मेरे लंड का कमाल,,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही राजू दोनों की बुर में बराबर धक्के लगा रहा था दोनों को संभालने का बिल्कुल भी मौका नहीं दे रहा था और देखते ही देखते तीनों एक साथ पानी पानी हो गए तीनों निढाल हो गए,,,,, तीनों तृप्त हो चुके थे राजू अपनी जगह से उठ कर खड़ा हुआ उसके चेहरे पर अद्भुत संतुष्टि का अहसास था कमला चाची भी अपनी बहू के ऊपर से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी,,, कमला चाची की बहू जो कि अभी भी गहरी गहरी सांस लेते हुए पीठ के बल खटिया पर लेटी हुई थी,,,, वह भी धीरे से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी,,,
दो औरतों की जवानी की प्यास बुझाने के बावजूद भी अभी भी राजू का लंड पहले की तरह ही टनटनाया हुआ था,,,, जिसे देखकर सास बहू दोनों आश्चर्यचकित हो रही थी दोनों के चेहरे पर अद्भुत संतुष्टि के साथ-साथ मुस्कान की तैर रही थी और वह राजू की लंड की तरफ देख कर ही मुस्कुरा रही थी राजू एक बार दोनों सास बहू की तरफ अपने लंड को पकड़ कर ले जाता हुआ उसे पजामा में डाल दिया और हंसते हुए बोला,,,,।
तुम दोनों छीनारो ने मुझे मस्त कर दिया,,,,
तू भी तो मादरर्चोद हम दोनों को मस्त कर दिया,,,,।
(अपने आप के लिए मादरचोद शब्द प्रयोग करने पर राजू तनिक भी गुस्सा नहीं दिखाएं और मुस्कुराता हुआ वहां से फिर आने का वादा कह कर निकल गया,,,,)

