राजू अपनी मां को सही सलामत घर पर लेकर आ गया था उसकी मां कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके साथ इस तरह का हादसा होगा वह एकदम से घबरा गई थी लेकिन रास्ते भर राजू ने उसे समझा-बुझाकर उसे शांत रहने के लिए कहा था गोदाम पर जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में तो वैसे भी मधु किसी को बताने वाली नहीं थी क्योंकि जिस हालत में वह गोदाम में उस आदमी के द्वारा पकड़ी गई थी वह बेहद शर्म शार कर देने वाला था,,,, मधु नहीं जानती थी कि गोदाम में जिस आदमी ने उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ा था वह कोई और नहीं बल्कि जमीदार विक्रम सिंह था,,,, वैसे भी उसे कुछ सोचने समझने का समय नहीं मिला था वह तो एकदम से घबरा गई थी,,,,

एक संस्कारी और मर्यादा सील औरतों के लिए उसकी इज्जत ही सब कुछ होती है और वैसे भी मधु के लिए उसकी इज्जत जान से बढ़कर थी भले ही वह घर में ही अपने ही बेटे के साथ मर्यादा की दीवार लांग चुकी थी लेकिन फिर भी वह पराए मर्दों के लिए तो अभी भी संस्कारी और मर्यादा से भरी हुई एक सुशील औरत थी इसलिए किसी गैर मर्द के सामने उसके बदन का एक झलक भी दिख जाना उसके लिए शर्मसार कर देने वाला था और उस आदमी ने तो उसे संपूर्ण रूप से एकदम नंगी देख लिया था उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था और उस समय के हालात भी कुछ और थी उस समय राजू का लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई नाप रहा था,,, सही शब्दों में कहा जाए तो उस आदमी ने उसे चुदवाते हुए देख लिया था और वह भी उसके ही सगे बेटे के साथ वह तो गनीमत था कि उसे यह नहीं मालूम था कि उसके और राजू के बीच किस प्रकार का संबंध है वरना गजब हो जाता,,,,

मधु घर पर पहुंचने के बाद यही सब सोच रही थी अभी भी उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी वह यह सोच कर और घबराई हुई थी कि अगर उसका बेटा बलशाली ना होता हिम्मतवाला ना होता तो वह आदमी जरूर उसकी इज्जत लूट लिया होता क्योंकि वह एकदम ललचाए आंखों से उसके नंगे बदन को देख रहा था बार-बार मधु को वह पल याद आ जा रहा था जब वह आदमी उसके हाथों से उसकी साड़ी खींच कर नीचे जमीन पर फेंक दिया था और उसे पूरी तरह से फिर से नंगी कर दिया था उस हालत के बारे में सोच कर उसके बदन में डर फेल जा रहा था,,,,, वह सोच कर और शर्म से गाड़ी जा रही थी कि आज तक उसने अपने बदन का एक भी हिस्सा किसी गैर मर्द को दिखाई नहीं थी और ना ही किसी ने अनजाने में ही देखा था लेकिन उस आदमी ने उसे नग्न अवस्था के साथ साथ संभोग रत देख लिया था,,,,,,, घर पर आराम से बैठी होने के बावजूद भी उस हादसे के बारे में सोच कर उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी वह घबरा जाती थी,,,,,, लेकिन उसे अपने बेटे पर गर्व था जिस बहादुरी से राजू ने उस बलशाली विक्रम सिंह से मुठभेड़ किया था और उसे मार गिराया था उसे देखते हुए वह पूरी तरह से राजू जैसे बेटे को पाकर गदगद हुए जा रही थी,,,। अगर वह अपनी कसम देकर उसे रोकी ना होती तो शायद राजू उसकी जान ले लेता लेकिन ऐसा कुछ भी मधु नहीं चाहती थी इसलिए अपने बेटे को कसम देकर उसे रोक ली थी,,,,,,,,

गोदाम से घर तक मधु अपनी नजरों को शर्म से नीचे करके ही पहुंची थी वह शर्म के मारे अपनी नजरों को उठा नहीं पा रही थी,,,, गोदाम पर अपने बेटे के साथ आने में उसे पछतावा भी हो रहा था लेकिन गोदाम पर आने पर जिस तरह के आनंद की अनुभूति वह अपने अंदर महसूस की थी उसे लेकर वह पूरी तरह से संतुष्ट भी थी बस आखरी में ही विक्रम सिंह ने गोदाम में आकर सारा मजा किरकिरा कर दिया था वैसे तो उसी समय ही मधु अपने बेटे की जबरदस्ती चुदाई से झड़ चुकी थी और उसका बेटा भी अपना पानी निकालते हुए विक्रम सिंह को देखकर अपने लंड को अपनी मां की गांड में से बाहर निकाल दिया था लेकिन निकालते निकालते भी उसके लंड से पिचकारी फूट रही थी जिसे देखकर विक्रम सिंह पूरी तरह से वासना से लिप्त हो चुका था एक तो उसकी आंखों के सामने दुनिया का सबसे खूबसूरत मंजर जो था,,, एक खूबसूरत जवानी से भरी हुई औरत को एकदम नंगी देखकर किसी भी मर्द का ईमान डोल जाए इसमें कोई शक नहीं था और यही विक्रम सिंह के साथ भी हुआ था वैसे तो विक्रम सिंह सिर्फ गोदाम का जायजा लेने आया था वह समय-समय पर लाला के व्यापार पर ध्यान देता था कि कितना व्यापार फल फूल रहा है लड़की नाच शायद राजू की किस्मत खराब थी जो अपनी मां को लेकर गोदाम पर आया था वह अपनी मां के नंगे बदन का दर्शन विक्रम सिंह जैसे हरामि को करा दिया था,,,,

जैसे तैसे करके राजू ने अपनी मां को मना लिया था और वह इस हादसे को पूरी तरह से भूलने की कोशिश कर रही थी और इसी कोशिश में दो-तीन दिन गुजर चुके थे दो-तीन दिनों के भीतर राजू ने अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध बनाना उचित नहीं समझा था वह अपनी मां को पूरी तरह से उस हादसे से ऊभर जाने देना चाहता था जो कि धीरे-धीरे हो भी रहा था,,,,
विक्रम सिंह की जमकर पिटाई करने के बाद राजू को भी अपने मन में थोड़ा सा भी महसूस हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि विक्रम सिंह उसे भले ही मजदूर समझता है लेकिन अपने आदमियों के साथ वह गोदाम पर जरूर आएगा और फिर उसकी हालत खराब कर देगा,,,, इसी के चलते राजू ने लाला से एक और बंदूक मांग कर उसे अपने साथ ही लिया रहता था और राजू की हर एक बात मानते हैं लाला उसे बंदूक भी दे दिया था क्योंकि राजू की काबिलियत लाला पूरी तरह से परिचित था दूसरी तरफ विक्रम सिंह दूसरे दिन होश में आने के बाद लड़खड़ाते हुए जैसे तैसे करके अपनी हवेली पहुंचा था वहां पर विक्रम सिंह की हालत देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गई थी लेकिन विक्रम सिंह ने बड़ी चालाकी से असली बात छुपाते हुए जंगली सूअर का हमला हुआ है उसका कहकर बात को टाल दिया था आखिरकार वह अपने घरवालों को बताता भी तो क्या बताता रंजीत सिंह की जैसी हालत उसकी भी हो चुकी थी रंजीत सिंह ने जैसे असली बात को छुपा ले गया था उसी तरह से विक्रम सिंह भी अपने साथ हुए असलियत को छुपा ले गया था और उसे जंगली सुअर के हमले का कारण बताकर बात को टाल दिया था अगर वह हकीकत बता देता तो गजब हो जाता जमींदार की इज्जत पानी में मिल जाती,,,, क्योंकि आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई थी हवेली की तरह पर हवेली में रहने वालों की तरफ कोई भी आंख उठाकर देखा और यहां तो विक्रम सिंह की जमकर पिटाई हो गई थी इसलिए बड़ा हंगामा खड़ा हो जाता है इसलिए विक्रम सिंह किसी को असलियत नहीं बताया था लेकिन राजू की सक्ल उसे याद रह गई थी,,,,,,

जमकर मार खाने के बावजूद भी विक्रम सिंह की आंखों के सामने मधु का खूबसूरत नंगा बदन नाचने लगता था जिंदगी में पहली बार उसने इतनी सुगठित खूबसूरत औरत को बिल्कुल नंगी देखा था हालांकि वह कई औरतों को भी चुका था लेकिन मधु की बात ही कुछ और थी मधु को देखते ही उसके लंड में जो सुरसुराहट महसूस हुई थी उस पल को याद करके अभी भी उसके बदन में हलचल मच जाती थी,,,, क्योंकि विक्रम सिंह ने आज तक कितनी खूबसूरत बदन वाली औरत को नहीं देखा था उसका खूबसूरत बदन एकदम घटिया चुचियों का साइज एकदम खरबूजे की तरह गोल गोल जरा भी लटकन नहीं था और नितंबों की गोलाई तो एकदम जानलेवा थी,,,,, विक्रम सिंह का मधु एक सपना परी की तरह लगती थी जिसे याद करके जब चाहे तब उसका लंड खड़ा हो जाता था अपने मन में यह सोच रहा था कि अगर वह लड़का बीच में ना आता तो उसी दिन उसकी जवानी का स्वाद चख लिया होता लेकिन इस बात का भी एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था कि उस औरत के चक्कर में ही एक जमीदार होने के बावजूद भी गांव के लड़के से वह मार खा गया था और जब जब उसे यह बात याद आती थी उसका खून खोलने लगता था लेकिन करें भी तो क्या करें उस लड़के को मतलब कि राजू को वहां ठीक तरह से जानता भी नहीं था कौन है कहां रहता है इस बारे में उसे बिल्कुल भी अंदाजा भी नहीं था और तो और मधु के बारे में भी कुछ नहीं जानता था अगर वह इतना जान जाता है कि मधु कहां रहती है तो शायद मधु को वह कब से अपने आदमियों से उठा लेता है और उसकी जवानी से जी भर कर खेलता,,,, खैर राजू के होते विक्रम सिंह के मन की बिल्कुल भी नहीं चली थी इसीलिए तो वह आग बबूला हो गया था,,,

जैसे तैसे करके चार-पांच दिन गुजर गए स्थिति एकदम सामान्य हो गई मधु भी गोदाम वाले हादसे को भूल चुकी थी,,,,,,, राजू अब अपनी मां से अपनी और झुमरी की शादी की बात करना चाहता था लेकिन कैसे करें उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,, वह अपनी मां को किसी भी तरह से झुमरी से शादी करने के लिए मना लेना चाहता था वैसे तो उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां उसकी पसंद था बिल्कुल भी इनकार नहीं करेगी लेकिन फिर भी वह,,, शादी की बात करने के लिए कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहता था इसलिए अपनी मां को अपने पक्ष में लेने के लिए वह उसके लिए सोने के दो झुमके बनवाया था,,,,,,, झुमके बहुत खूबसूरत बने हुए थे दो दो मोती झुमके की शोभा बढ़ा रहे थे,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां झुमके देखकर एकदम खुश हो जाएगी और झुमरी से शादी करने के लिए तैयार हो जाएगी और साथ में खुशी की मारा चोदने भी देगी,,,, इसलिए अपने पहचाने की जेब में झुमके को रखकर खुश होता हुआ राजू अपनी मां से शादी की बात करने के लिए अपने घर की तरफ निकल चुका था ,,,,अंधेरा हो चुका था,,,, गांव में सभी घर के चूल्हे जल चुके थे अक्सर इस समय गांव के लोग गांव की औरतें खाना ही बनाती थी इसलिए उसे भी पक्का यकीन था कि उसकी मां भी खाना बना रही होगी वह आज अपनी मां को झुमके दिखा कर अपनी शादी की बात और पूडी और खीर बनवाना चाहता था,,,।

राजू बहुत खुश था अंधेरा धीरे-धीरे गहरा चुका था और वह अपने घर पर पहुंचा तो घर में प्रवेश करता है इससे पहले ही घर के पीछे से गाय की आवाज आने लगी जोकि जोर जोर से चिल्ला रही थी राजू एक बाल्टी में पानी लेकर घर के पीछे की तरफ जाने लगा राजू अच्छी तरह से जानता था कि गाए जा इस तरह से आवाज करती थी तो जरूर उसे चारा पानी चाहिए होता था इसलिए घर में जाने से पहले वह घर के पीछे की तरफ चल दिया एक हाथ में बाल्टी लेकर और दूसरे हाथ में हरी हरी घास का बोझा लेकर वह जैसे ही घर के पीछे पहुंचा तो उसे अजीब सी आवाज आने लगी वह कान लगाकर उस आवाज को सुनने लगा कि वह आवाज आप कौन से दिशा से रही है,,,,, धीरे-धीरे वह करीब जाने लगा और वह आवाज एकदम स्पष्ट हो गई राजू उस आवाज को अच्छी तरह से पहचानता था उस आवाज को अच्छी तरह से जानता था कि ऐसी आवाज कम निकलती है राजू के कानों में गरमा गरम सिसकारी की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर उसका लंड खड़ा होने लगा था,,,,, हालांकि गरमा गरम संस्कारी की आवाज से वह निश्चित नहीं कर पाया कि वह गर्मागर्म सिसकारी की आवाज कौन निकाल रहा है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद उसकी मां होगी और उसके पिताजी होंगे जो कि घर के पीछे मौका पाकर उत्तेजित हो गए होंगे और चुदाई का खेल खेल रहे होंगे,,,, और यही सोच कर राजू वहां से जाना चाहता था और जाने के लिए अपने कदम को पीछे भी ले लिया था कि उसके कानों ने कभी आवाज सुनाई दी जिसे सुनकर वह एकदम से चौक गया,,,,।

ओहहहह गुलाबी मेरी बहन की बुर एकदम कसी हुई है तेरी बुर में डालने में बहुत मजा आता है,,,,
(इतना सुनते ही राजू के कान के साथ-साथ उसका लंड की खड़ा हो गया इस आवाज को राजू अच्छी तरह से जानता था क्योंकि यह आवाज उसके पिताजी की थी और उनकी बातों में उसकी बुआ का जिक्र था राजू को समझते थे नहीं लगी कि उसके पिताजी अपनी ही सगी बहन को चोद रही है पल भर के लिए उसका मौत है एकदम से थाना गया तभी उसके कानों में फिर से आवाज आई,,,)
आहहहह भैया जल्दी करो कहीं भाभी आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे जोर जोर से धक्के लगाओ,,,,।
(यह आवाज गुलाबी की थी राजू के बुआ की राजू इस आवाज को सुनकर पूरी तरह से चौक गया था वह समझ गया था कि एक भाई अपनी बहन को चोद रहा है जैसा कि वह खुद अपनी बुआ और अपनी मां के साथ साथ अपनी बहन की चुदाई कर चुका है,,,,,,,, पहले तो वह अपने पिताजी की हरकत पर पूरी तरह से गुस्से से आगबबूला हो गया,,,, लेकिन तभी अपनी मां और अपनी बुआ के साथ-साथ अपनी बड़ी बहन का ख्याल आते ही उसका गुस्सा हवा में फुर्ररर हो गया क्योंकि अपने मन में कौन सोचने लगा कि अगर उसके पिताजी गलत कर रहे हैं तो वह कौन सा सही कर रहा है,,,, अपनी बुआ अपनी मां अपनी पहली बहन घर में तीनों की को चुदाई करता रहा है और तो और अपनी बड़ी बहन को अपनी चुदाई अपनी मर्दानगी के चलते गर्भवती भी कर दिया है,,,,, इस तरह का ख्याल आते ही राजू एकदम से सोचने लगा और अपना दिमाग दौड़ाने लगा वजह सोचने लगा की झोपड़ी के अंदर उसके पिताजी और उसकी बुआ दोनों चुदाई का मजा लूट रहे हैं अगर इसी समय बाद झोपड़ी में चला जाता है तो उसके पिताजी एकदम से घबरा जाएंगे और उसकी बुआ भी,,, उसके पिताजी डर जाएंगे घबरा जाएंगे तो फिर वाह अपने मन की बात अपने पिताजी को बताकर अपनी मनमानी कर सकता है यह ख्याल उसके मन में आते ही उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,,

अब उसे अपने पिताजी के साथ नाटक करना था जैसा कि वह अपनी बुआ के कहने पर अपनी मां के साथ नाटक कर रहा था,,,, और उसकी मां भी सब कुछ जानते हुए उस नाटक में सहभागी होकर अपनी ननद को पूरी तरह से अपने पक्ष में ले रही थी अब वही खेल इधर राजू को खेलना था इसलिए वो धीरे से हरी हरी घास का ढेर और बाल्टी को जमीन पर रखा है और दबे पाव झोपड़ी में एकदम से प्रवेश कर गया जहां पर उसके पिताजी लालटेन की रोशनी में अपनी छोटी बहन की चुदाई कर रहे थे जैसे ही झोपड़ी के अंदर राजू ने प्रवेश किया तो देखा कि उसकी बुआ सलवार खोल कर झोपड़ी के बीच का बंबू पकड़ कर झुकी हुई है और पीछे से उसके पिताजी उसे चोद रहे हैं अंदर प्रवेश करते ही राजू एकदम से चौंक ने का नाटक करते हुए बोला,,,,)
यह क्या हो रहा है,,,?
(राजू को झोपड़ी के अंदर और उसकी बात सुनकर हरिया और गुलाबी दोनों एकदम से चौक गए हरिया का चौक ना तो बेहद लाजमी था लेकिन गुलाबी भी चौक गई थी जो कि राजू के हर कारनामे में उसकी सहभागी थी लेकिन राजू इस बात से अनजान था कि उसकी बुआ अपने ही बड़े भाई के साथ चुदवाती है इसलिए वह भी एकदम से घबरा गई थी हरिया का तो गला ही सूख गया था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी वह एकदम से राजू की तरफ देखने लग गया था उसकी कमर एकदम से स्थिर हो चुकी थी उसका लंड अभी भी गुलाबी की बुर में घुसा हुआ था,,,, हरीया और गुलाबी दोनों कुछ भी बोल नहीं पाए बस आश्चर्य से एक दूसरे की तरफ देख रहे थे तो राजू फिर से जोर से बोला,,,)

मैं पूछता हूं यह क्या हो रहा है,,,,।
(इतना सुनते ही जैसे हरिया को होश आया होगा तुरंत अपने लंड को अपनी बहन की बुर में से बाहर निकाल कर बगल में पड़ी धोती उठा लिया और उसे अपनी कमर पर लपेट लिया मौका देखकर गुलाबी भी शर्म से नजर को नीचे झुका कर खुद नीचे झुकी और अपनी सलवार उठाकर उसे कमर तक लाकर उसकी डोरी को बांधना शुरू कर दी,,,,)
मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है कि तुम दोनों इस तरह की नीच हरकत कर सकोगे,,,, बुआ तुम तभी शादी की बात से नाराज हो गई थी तुम्हें शादी करके इस घर से इसलिए नहीं जाना था क्योंकि घर में ही तुम्हारी जरूरत पूरी हो रही है,,,,

नहीं राजू ऐसी बात नहीं,,,
तुम चुप रहो बुआ,,,(बीच में ही गुलाबी को चुप कराते हुए राजू जोर से बोला,,,) मुझे तुमसे भी इस तरह की उम्मीद नहीं थी तुम्हारी कितनी भी इज्जत करता था और तुम पिताजी तुम्हें तो मैं देवता की तरह पूछ रहा था लेकिन तुम इतने गिरे निकल गए कि अपनी ही बहन को चोद रहे हो,,,
बबब,,,,बेटा,,,,
मत कहो मुझे बेटा तुम्हारे मुंह से यह शब्द अच्छे नहीं लगते,,,, तुम्हें पता है कि ताजी अगर यह बात मां को पता चले कि तुमने कितना दुख होगा वह तो जीते जी मर जाएगी वह तो तुम्हें भगवान मानती हैं तुम्हारे सिवा और किसी को देखना गवारा नहीं समझती और तुम हो कि अपनी बहन के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा रहे हो,,,, अरे बदन में इतनी गर्मी थी तो मां कहां दूर थी वह तो तुम्हारी हर जरूरत पूरी करती है तो फिर तुम्हें ऐसा करने की क्यों सुझी,,,,,
(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर हरिया एकदम से रोने लगा राजू पहली बार अपने पिताजी को रोते हुए देख रहा था इसलिए उसके मन में अपने पिताजी के लिए दया उमर रहा था वैसे भी जिस तरह के रिश्ते वह अपने घर में बनाते आ रहा था उसे देखते हुए अपने पिताजी की यह हरकत कोई बड़ी बात उसे नहीं लगी थी लेकिन फिर भी पल भर के लिए वह क्रोधित हो गया था लेकिन अपने पिताजी की हरकत पर उसे एक युक्ति भी सुझ गई थी इसीलिए वह नाटक कर रहा था,,,,)
Hariya apni bahan gulabi k sath

मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा है क्या यह सच में जो कुछ भी नहीं देख रहा हूं हकीकत है यह सब कुछ गलत है सपना है,,,,, नहीं यह सपना नहीं हो सकता यह बहुत भयानक है अगर मां को इस बारे में जरा भी भनक लगेगा तो मैं तो जीते जी मर जाएगी वह कैसे बर्दाश्त कर पाएगी कि जिसे वह भगवान की तरह मानती है जिसकी पूजा करती है वह इंसान अपनी ही बहन को चोद रहा है,,,,,
(राजू अपनी बातों के जाल में अपने पिताजी को पूरी तरह से फंस रहा था और अपनी बुआ की तरफ देख कर आंख मार कर इशारा भी कर दिया था कि जो कुछ भी वह कर रहा है वह सब कुछ एक नाटक है,,,,)
नहीं नहीं राजू ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,, भैया के बारे में अगर भाभी को पता चल गया तो पूरा घर बिखर कर रह जाएगा,,,, जो कुछ भी हुआ भले ही इसमें भैया की मर्जी थी लेकिन मेरी गलती है राजू मुझे ही भैया की बात नहीं मानना चाहिए था,,,
मैं सब कुछ समझता हूं बुआ लेकिन मां को कौन समझाएगा,,,
Hariya apni bahan k sath kuch is tarah se

लेकिन उन्हें पता ही कैसे चलेगा,,,(गुलाबी राजू की आंखों में देखकर आंख मारते हुए बोली)
मैं बताऊंगा मां को पिताजी की इतनी बड़ी गलती को मैं छुपा नहीं सकता मुझे बताना होगा,,,,(राजू की बात सुनते हरिया जोर जोर से रोने लगा उसे रोता हुआ देखकर गुलाबी राजू को आंख मारते हुए बोली,,,)
नहीं-नहीं राजू ऐसा मत करना नहीं तो गजब हो जाएगा भैया का घर भी कर कर रह जाएगा और भाभी मायके चली जाएगी,,,,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने दूंगी,,,,,
तुम कर क्या लोगी बुआ मैं तो मां को बता कर ही रहूंगा पिताजी ने मां के साथ खिलवाड़ जो किया है उसकी भरपाई तो पिताजी को देनी होगी,,,,
भरपाई,,,,,,(कुछ देर सोच कर) भरपाई अगर मैं कर दूं तो,,,,
(इतना सुनते ही राजू जानबूझकर चौक ने का नाटक करते हुए आश्चर्य से अपनी बुआ की तरफ देखने लगा और हरिया भी गुलाबी की तरफ देखने लगा क्योंकि कुछ-कुछ हरिया अपनी बहन के कहने का मतलब को समझ रहा था)
Raju is tarah se apni ma ka petticoat utarte huye

भरपाई,,, तो पिताजी को करनी होगी तुम कैसे करोगी तुम्हारी तो आज नहीं तो कल शादी हो जाएगी अपने घर चली जाओगी सब कुछ बात आई गई हो जाएगी लेकिन मां के लिए तो यह कलंक बनकर रह जाएगा,,,
तुम समझ नहीं रहे हो राजू मैं किस भरपाई की बात कर रही हूं तुम जवान हो खूबसूरत हो और मुझे पूरा यकीन है कि औरतों को देख कर,,,(अपने भाई की तरफ देखते हुए) तुम्हारा भी खड़ा होता होगा,,,
कककक,,,, कहना क्या चाहती हो तुम बुआ,,,,
मैं यही कहना चाहती हूं राजू,,,,(मादक चाल चलते हुए राजू के बेहद करीब आए और उसके गले में अपनी बाहों का हार डालते हुए बोली,,,) तुम भी मेरे साथ वही कर लो जो भैया कर रहे थे,,,,
(अपनी बुआ की बात सुनते ही राजू उत्तेजना से गहरी सांस लेते हुए अपने पिताजी की तरफ देखा जो कि उन दोनों को ही देख रहे थे और बोला,,,)
नहीं नहीं यह कैसे हो सकता है तुम मेरी बुआ हो,,,
Raju rat me kamre me apni ma k sath

पर मैं भी तो भैया की छोटी बहन हूं,,,,
(गुलाबी की बातें सुनकर हरिया को भी उम्मीद की किरण नजर आने लगी और वह भी उत्साह दिखाते हुए बोला)
राजू हो सकता है तुम्हारी तो हुआ है लेकिन मेरी तो बहन है फिर भी मेरे साथ ऐसा हो गया,,,,
नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकता,,,(अपनी बुआ के बाहों के हार को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने गले में से निकालकर अलग करते हुए बोला,,,)
Raju or madhu

मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं राजू,,,,, मुझ पर रहम करो अपनी मां को इस बारे में बिल्कुल भी मत बताना गुलाबी के साथ तुम भी वैसा ही करो जैसा मैं कर रहा था मुझे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा,,,,।
(अपने पिताजी की बात सुनकर उनकी हालत को देखकर राजू अंदर ही अंदर खुश हो रहा था उसे पूरा यकीन हो गया था कि उसके पिताजी अब उसकी बात मानने के लिए तैयार हो गए हैं तो वह अपने असली मकसद पर आते हुए बोला,,)
मैं बुआ को नहीं चोद सकता,,,(अपने पिताजी के सामने एकदम खुले शब्दों में बात करते हुए)
क्यों नहीं कर सकते राजू,,,,(हरिया बोला और उसके सुर में सुर मिलाते हुए गुलाबी बोली)
हां राजू तुम मुझे क्यों नहीं चोद सकता अगर भैया चोद सकते हैं तो,,,,
समझने की कोशिश करो बुआ मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है तुम्हारी बुर में जाएगा तो तुम्हारी बुर फट जाएगी और एक दो महीने में तुम्हारी शादी हो जाएगी अगर तुम अपने पति के घर जाओगी,,, अगर पहली रात में ही तुम्हारे पति को शक हो गया तो तुम्हारी जिंदगी भी खराब हो जाएगी,,,,(राजू जानबूझकर अपने पिताजी के सामने एकदम खुले शब्दों में बोल गया था और इस बात को सुनकर गुलाबी भी जानबूझकर चौक ने का नाटक करते हुए बोली)

हां यह बात तो है,,,,, लेकिन तू झूठ बोल रहा है राजू ईतना मोटा और लंबा किसी का नहीं होता,,,,
मेरा है बुआ यकीन करो,,,, पिताजी का तो तुम बड़े आराम से ले लेती हो लेकिन मेरा ले नहीं पाओगी,,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर हरिया राजू की तरफ आश्चर्य से देखने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू जो कुछ भी कह रहा है उसमें जरा भी सच्चाई है,,,)
चल झूठा हम लोगों को इस हालत में देख लिया इसलिए बातें बना रहा है अब तुझे इतना अच्छा मौका दे रही हूं अपना मुंह बंद रखने का मेरे साथ जो कुछ भी करना है कर ले तो बहाना मार रहा है,,,,
नहीं बुआ मैं सच कह रहा हूं,,,
अब रहने दे राजू मेरी हालत पर तरस खाओ मेरा बसा बसाया घर उजड़ जाएगा तू अपनी बुआ के साथ कुछ भी कर ले मेरी बहन होने के नाते भी मैं कुछ नहीं कहूंगा,,,

तुम दोनों की यकीन नहीं आ रहा है,,,, तो देखो,,,(इस तरह की बातें करते हुए पहले से ही राजू का लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था इसलिए वह तुरंत अपने पजामे को नीचे कर लिया और अपने लंड को बाहर निकाल दिया,,,, उसका नंबर तुरंत हवा में लहराने लगा जिस पर नजर पड़ते ही हरिया की हालत खराब हो गई वाकई में उसके बेटे का लंड उससे दोगुना था,,,, गुलाबी और राजू हरिया की तरफ देख रहे थे हरिया की आंखें फटी की फटी रह गई थी इस मौके को अपने हाथ से ना जाते हुए कि सोचकर गुलाबी तुरंत बोली,,,)
बाप रे इतना मोटा और लंबा यह तो सच में मेरी बुर में जाएगा तो मेरी बुर फट जाएगी,,,,
हां राजू तो सच कह रहा है,,,,(हरिया भी आश्चर्य से देखते हुए बोला और फिर राजू तुरंत पैजामा को ऊपर कर लिया और अपने लंड को पजामे के अंदर छुपा लिया)

तो अब क्या करें भैया राजू जो कुछ भी कह रहा है उसमें सच्चाई है मेरी बुलाकर फट गई तो सुहागरात को मुसीबत खड़ी हो जाएगी और अगर ऐसा हो गया तो मेरा घर बसने से पहले ही उजड जाएगा,,,, तो राजू तु क्या करेगा,,,
मैं तो मां से बता दूंगा और अभी जाकर बता देता हूं,,,
नहीं नहीं राजू ऐसा बिल्कुल भी मत कर मैं तेरे हाथ जोड़ता हूं,,,,,,
राजू एक बेटा होने के नाते तुझे अपनी पिताजी की बात को सुनना चाहिए,,,,
नहीं मैं किसी की बात नहीं सुन लूंगा मैं जा रहा हूं,,,,

अगर भाभी की मिल जाए तो,,,,,
(गुलाबी असली पाशा फेंकते हुए बोली,,,, यह सुनकर हरिया एकदम आश्चर्य से गुलाबी की तरफ देखने लगा उसे थोड़ा गुस्सा भी आया लेकिन अगले ही पल गुलाबी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भैया समझने की कोशिश करो भाभी दो बच्चों को पैदा कर चुकी उनकी बुर ज्यादा लचीली होगी जो कि राजू के मोटे तगड़े लंड को बड़े आराम से ले लेगी,,,, इतना सुनते ही राजू के मन की हो रही थी इसलिए वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए बोला,,)
हां जी ठीक है मां की बुर में मेरा मोटा तगड़ा लंड़ बड़े आराम से चला जाएगा,,,,
अरे बदतमीज वह तेरी मां है और अपनी मां के बारे में ही ऐसी बातें कर रहा है,,,(हरिया थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,)
तो क्या हुआ बुआ भी तो तुम्हारी बहन है अभी तो उसकी शादी भी नहीं हुई है फिर भी आप उसके साथ गलत कर रहे हैं,,,,

राजू की बात मानने के सिवा तुम्हारे पास कोई रास्ता नहीं है यह जाकर भाभी को बता दिया तो सब काम कर बढ़ हो जाएगा मेरा क्या है मेरा तो कल विवाह हो जाएगा मैं अपने घर चली जाऊंगी लेकिन तुम दोनों को साथ में जिंदगी गुजारना है अगर भाभी से बिगाड़ हो गया तो जिंदगी भर वह तुम्हें हाथ भी नहीं लगाने देती और फिर तुम्हें अपने हाथ से हिला कर ही काम चलाना पड़ेगा,,,,,
लेकिन गुलाबी ये अपनी मां के बारे में,,,,
इस समय भैया तुम सब कुछ भूल जाओगी कौन मा है कौन बैठा है कौन बहन है मेरे साथ भी तो तुम भूल जाते हो ना कि मैं तुम्हारी बहन हूं मुझ में सिर्फ तुम्हें एक औरत नजर आती है उसी तरह से राजू को भी भाभी के साथ कुछ करने दो ताकि तुम्हारा राज राज रह सके और सोचो अगर राजू और भाभी के बीच शारीरिक संबंध हो गया तो तुम्हें भी खुला दौर मिल जाएगा तुम्हें मेरे साथ जब चाहे तब कुछ भी कर सकते हो,,,,।
(गुलाबी की बात सुनकर हरिया सोच में पड़ गया उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था अगर वह इंकार करता है तो राशि तुरंत जाकर यह बात मधु को बता देना और फिर सारा मामला बिगड़ जाएगा और ऐसा हरिया बिल्कुल भी नहीं चाहता था और जिस तरह से गुलाबी उसे बता रही थी कि अगर राजू और उसकी मां का सारी संबंध स्थापित हो गया तो वहां भी कभी भी गुलाबी के साथ शारीरिक संबंध बना सकता है मजे ले सकता है,,,)
बुआ सही कह रही है पिताजी,,,

राजू क्या तू अपनी मां को चोदेगा,,,!(आश्चर्य जताते में हरिया बोला तो राजू भी जवाब देते हुए बोला)
पहले तो मैं ऐसा सपने भी नहीं सोचता था लेकिन तुमको और बुआ को एक साथ देख कर और बुआ के मुंह से मां के बारे में सुनकर अब मेरा भी मन करने लगा है मां को चोदने का क्योंकि मैं जानता हूं कि मां की बुर में मेरा लंड आराम से चला जाएगा मां की गांड बड़ी-बड़ी है और बुर भी थोड़ा ज्यादा लचीली होगी,,,,
राजू अपनी मां के बारे में ऐसी बातें कर रहा है,,,,(हरिया आश्चर्य जताते हुए बोला)
तो कोई बात नहीं मैं जा रहा हूं मां को बताने,,,,(इतना क्या कर रहा है जो पीछे कदम लिया ही था कि गुलाबी तुरंत आगे बढ़ कर उसका हाथ पकड़ ली और उसे रोकते हुए बोली,,,)
क्या कर रहे हो भैया मेरे साथ तो बड़े आराम से कर लेते हो और भाभी की बात आई तो इधर-उधर हो रहे हो इस समय अपने परिवार में कोई रिश्तेदारी की नजर से मत देखो बस यह देखो कि कौन औरत है और कौन मर्द है और औरत और मर्द के बीच किस तरह का रिश्ता होता है या तुम अच्छी तरह से जानते हो तो हो जाने दो भाभी और राजू के बीच इससे तुम्हारा राज भी बना रहे जाएगा वरना राजू अगर अपना मुंह खोल दिया तो सब कुछ बिगड़ जाएगा,,,,

लेकिन मधु क्या मान जाएगी,,,(कुछ देर सोचने के बाद हरिया बोला)
मान जाएगी कि नहीं मानेगी यह राजू को देखना है अगर नहीं मानेगी तो राजू तुझे ना तो हम दोनों का राज भाभी से बताना है और ना ही फिर उनके पीछे पड़ना है समझ गया ना मंजूर है तुझे,,,,
ठीक है बुआ की बात मैं मान जाता हूं मैं एक ही बार प्रयास करूंगा अगर मां नहीं मानी तो मैं फिर ऐसा करने की दोबारा सोचूंगा भी नहीं और ना ही तुम दोनों का राज किसी को बताऊंगा,,,,,
ठीक है,,,,(इस बात से हरिया थोड़ा मुस्कुराते हुए बोला उसे पूरा यकीन था कि उसकी बीवी अपने ही बेटे के साथ चुदवाने के लिए कभी भी तैयार नहीं होगी इसलिए वह थोड़ा निश्चिंत हुआ जा रहा था,,,)
और हां बुआ और पिताजी तुम दोनों भी सुन लो मैं झुमरी को पसंद करता हूं और झुमरी के साथ विवाह करना चाहता हूं,,,, मैं इस बारे में मां से बात करने के लिए आया था लेकिन सही समय पर घर के पीछे आ गया और तुम दोनों को देख लिया अब शायद मेरा भी उद्धार हो जाएगा,,,
झुमरी के साथ विवाह ओ जो अपने गांव के नुक्कड़ पर रहती है वही ना,,,, अब यह क्या नया झमेला है,,,,(हरिया आश्चर्य जताते हुए बोला गुलाबी भी राजू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी तो राजू बोला)
पहले तो मुझे बताने में शर्म आ रही थी लेकिन तुम दोनों की हालत देखकर अब मुझ में भी हिम्मत आ गई है हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करने के लिए तैयार हैं उसकी माफी शादी के लिए तैयार है बस अपने घर की हमें चाहिए थी और अब तुम दोनों की हालत देखकर जिस तरह से मेरे पकड़ में आए हो मुझे यकीन है कि आप मेरे विवाह में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी और वैसे भी बुआ के चले जाने के बाद कोई तो चाहिए मां का हाथ बंटाने के लिए,,,,
राजू तू अपने लिए खुद लड़की देख लिया,,,,
तो क्या हुआ बुआ तुम भी तो मजा कर रही हो ना मुझे भी तो कुछ चाहिए,,,,
अब भाभी की तो दिला ही रहे ना फिर भी,,,,
अरे तुम्हें भी तो भैया का मिल रहा है ना तो क्या जिंदगी भर यही रहोगी शादी करके अपने घर तो जाओगी ना,,,
चल ठीक है मैं तैयार हूं लेकिन अभी भी तुझ से हाथ जोड़कर बोलता हूं अपनी मां से कुछ भी मत बताना,,,
तुम चिंता मत करो पिताजी यह राजू की जुबान है,,,, पूरे गांव में मेरी इज्जत है ईसलिए निश्चिंत हो जाओ मैं मां से कुछ भी नहीं बताऊंगा,,,,, लेकिन मां की लेने के बारे में सोच कर ही मेरा लंड खड़ा हुआ जा रहा है,,,
चल ज्यादा मत सोच वह तुझे लात मार कर ही भगा देगी,,,,
हां राजू,,,, भाभी को ऐसी वैसी औरत मत समझना तेरी दाल गलने वाली नहीं है,,,,, और हां फिर उसके बाद अपना वादा याद रखना वैसे भी तू आता जमीदार बन चुका है और जमीदार अपने वादे के पक्के होते हैं समझ लेना हम दोनों का राज राज ही रहना चाहिए,,,,
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बुआ अगर में असफल रहा तो मां को कभी नहीं बताऊंगा,,,,।

