,, लाला अपनी बहन सोनी को आंख से इशारा करके मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया था,,,,, अपनी बहन को आंख से इशारा करने का मतलब साफ था कि अपनी जमीन जा जात जमीदारी बचाने के लिए लाला किसी भी हद तक गुजरने को तैयार था लेकिन उसे विक्रम सिंह के हाथों अपनी जमीन जायदाद या अपने हवेली की इज्जत लूटने देना किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था इसीलिए तो वह राजू को मना लिया था जमीन दारी व्यापार मैं हिस्सेदारी देकर लेकिन अभी भी लाला का कार्य पूरा नहीं हुआ था जब तक उसकी बहन अपनी जवानी का जलवा दिखा कर राजू को अपनी तरफ आकर्षित करके उसे संभोग सुख प्रदान ना कर दे क्योंकि लाला का भी यही मानना था कि जब तक मर्दों में औरतों को पाने की लालच नहीं होती तब तक वह लोग किसी भी तरह का बेवजह दूसरों के लिए खतरा उठाने के लिए तैयार नहीं होते,,,,, और राजू को इस खतरे में उतारने के लिए व्यापार में हिस्सेदारी का लालच और दैहिक सुख देना बहुत जरूरी था इसलिए लाला इस बहाने से हवेली से बाहर निकल गया था इस बात से अनजान की सोनी का तो पहले से ही राजू से शारीरिक संबंध स्थापित है और वह दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे से खूब मजा भी करते हैं,,,,

सोनी चाहती तो अपने भाई को अपनी और राजू की हकीकत को बता सकती थी लेकिन वह ऐसा करना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसके भाई को किसी भी प्रकार का दुख पहुंचे कि उसकी पीठ पीछे उसकी बहन अपनी शारीरिक जरूरत को पूरा करने के लिए किसी के भी साथ सोने के लिए तैयार हो जाती है रिश्ता तो अब जाकर राजू से मजबूत हुआ था पहले तो वह हवेली से बिल्कुल अनजान था हवेली वालों के लिए बिल्कुल पराया था,,,, भले ही लाला सोने की हकीकत जानने के बाद नाराज ना होता लेकिन उसके मन में एक बात की कसक रह जाती कि सोनी से उसे ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए सोनी खामोश थी,,,,

लेकिन लाला की मंजूरी से सोनी को खुला दौर मिल चुका था अब वह राजू के साथ जब चाहे तब शारीरिक संबंध बनाकर अपनी जवानी की प्यास बुझा सकती थी,,,, लाला के हवेली से बाहर जाते हैं राजू आगे बढ़ा और दरवाजा बंद कर दिया राजू की हरकत देखकर सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि राजू क्या करने वाला है,,,,, राजू तुरंत सोनी के पास आया और उसे अपनी बाहों में भर कर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया उसके होठों का रस पीने के बाद वह बोला,,,,।
सोनी मेरी जान मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि लाला ने मुझ पर इतना बड़ा एहसान कर दिए हैं,,,
तुम नहीं जानते राजू भैया का दिल बहुत बड़ा है तुम्हारी ईमानदारी तुम्हारी मेहनत और लगन देखकर भैया ने यह फैसला किया है,,,,।

ओहहहह सोनी,,,,(खुश होता हुआ वह तुरंत सोनी को उसको नितंबों के आसपास अपनी भुजाओं का घेरा बनाकर उसे उठाते हुए) आज मैं बहुत खुश हूं सच में मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं इस हवेली का मालिक हूं और यहां की हर एक चीज मेरी है यहां तक कि तुम भी,,,
वह तुम्हें तुम्हारी यूं ही देखे नहीं भैया कैसे हम दोनों को अकेला छोड़ कर हवेली से बाहर चले गए,,,,
मैं कुछ समझा नहीं,,,,
अरे बुद्धू पहले नीचे उतारो तो बताती हूं,,,,
(इतना सुनते ही राजू सोनी को नीचे उतारते हुए उसकी तरफ आश्चर्य से देखने लगा) सुनो राजू एक तुम ही हो जो मेरे और भैया के बीच क्या चल रहा है जो सब कुछ जानते हो और आज तुमने देख ही लिए तुम्हारे सामने भैया बिल्कुल भी शर्म किए बिना कैसे मुझे चोद रहे थे,,,
हां वह तो है,,,,

अरे बुद्धू इसका मतलब साफ है कि तुम भी मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो आखिरकार तुम हमारे राज के राजदार जो हो इसलिए तुम्हें भी तो थोड़ा सुख देना चाहिए ताकि तुम भी अपना मुंह बंद रखो भैया यह चाहते हैं,,,,
क्या लाला ने ऐसा अपने मुंह से कहें,,,,
तो क्या बुद्धू तभी तो तुम्हारी आंखों के सामने ही मेरी चुदाई कर रहे थे और तुमसे बिलकुल भी घबरा भी नहीं रहे थे और इस बात का डर उनके मन में बिल्कुल भी नहीं था कि कल जान जवान लड़के के सामने अपनी ही बहन को चोद रहे हैं,,,,,
ओहहहह मेरी जान अब मुझे समझ में आएगा तभी मैं सोचु कि लाला इतने बेशर्म कैसे हो गए वरना औपचारिक रूप से कोई भी होता तो उस तरह के हालात में एकदम से घबरा जाता लेकिन लाला के चेहरे पर घबराहट बिल्कुल भी नहीं थी वह एकदम सहज थे,,,,,

तो सोचो राजू आज भैया की तरफ से तुम्हें दो दो उपहार मिले हैं एक तो व्यापार जमीदारी में हिस्सेदारी एकदम मालिक की तरह हो और दूसरी में जिसे पाकर तुम धन्य हो जाओगे,,,,
ओहहह मेरी जान तुम्हें पकड़ तो मैं सचमुच में धन्य हो गया हूं,,,,, फिर देर किस बात की है जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का,,,।
(राजू की यह बात सुनकर सोनी हंसने लगी और उसे हंसता हुआ देखकर राजू बोला)
तुम हंसते हुए स्वर्ग की परी लगती हो,,,,
चल झूठा,,,,अब, मैं चली खाना बनाने,,,,
खाना बनाने,,,(इतना कहने के साथ ही सोने की कलाई पकड़ कर उसे रोक लिया)
तो क्या खाना नहीं खाना है क्या,,,?

तुम्हें देखकर ही मेरा पेट भर गया है अब तो बदन की भूख है पेट कि नहीं जो कि तुम्हें चोदने के बाद ही मिटेगी,,,,
अरे बुद्धू अभी तो बहुत समय है,,,, सुबह तक का समय हम दोनों के पास है और अभी तो रात की शुरुआत हुई है अभी तो खाना बनाने का समय है जाकर तुम्हारे लिए थोड़ा पकवान बना लो उसके बाद मजा करेंगे,,,,
सोनी की नंगी गांड से खेलता हुआ राजु

मेरी बात समझ में नहीं आती जमींदार होकर भी इतनी बड़ी हवेली के मालिक होकर भी खाना बनाने वाली नौकरानी नहीं रख सकते,,,,
नहीं रख सकते पता है क्यों,,,, क्योंकि मेरे और भैया के बीच जो संबंध है तुम देख ही चुके हो अगर घर में नौकरानी रहेगी तो औरतों की आदत तुम जानते हो हमेशा नजर गड़ाए रहती हैं और अगर हम दोनों का राज खुल गया तो पूरे गांव में हल्ला मच जाएगा इसीलिए भैया खाना बनाने वाली कोई नौकरानी नहीं रखते भले ही नौकर रखते हैं और वह भी हवेली के बाहर पहरेदारी करने के लिए हवेली के अंदर नहीं,,,,
ओहहह अब मुझे समझ में आया,,,,
समझ में आ गया ना मेरे राजा अब मुझे जाने दो खाना बनाने के बाद जितना चाहे उतना प्यार कर लेना,,,,
चलो कोई बात नहीं लेकिन एक शर्त पर,,
क्या,,,?
राजू और सोनी

तुम्हें अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर खाना बनाना होगा और सुबह तक बिना कपड़ों के रहना होगा,,,,
पागल हो गए हो क्या,,,(हंसते हुए सोनी बोली तो राजू एक झटके से उसकी कलाई पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसे सीने से लगा लिया पलभर में ही राजू के तन बदन में मदहोशी जाने लगी उसकी आंखों में नशा सा छाने लगा और वह सोनी की आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,)
हां पागल हो गया हूं,,,(सोनी के खूबसूरत चेहरे पर अपनी उंगली को ऊपर से नीचे तक घुमाते हुए) तुम्हारे हुस्न में,,,, तुम्हारी खूबसूरती में,,,,(और तुरंत अपने दोनों हाथ को सोनी के पीछे ले जाकर उसकी गोल-गोल खान को अपनी हथेली में जोर से दबोच कर अपनी तरफ सटाते हुए,,) तुम्हारी गांड देखकर पागल हो गया हूं,,,,(संजू की इस तरह की हरकत से सोनी के तन बदन में भी आग लगने लगी उसकी आंखों में भी खुमारी छाने लगी वह मदहोश होने लगी वह भी राजू की आंखों में आंखें डाल ते हुए जवाब देते हुए बोली)

तुम्हें जैसा पसंद होगा मैं वैसा ही करूंगी,,,,,।
(और इतना सोनी के मुंह से सुनना था कि राजू ने तुरंत उसकी दोनों बाहों को पकड़कर घुमा दिया और उसे पीछे से अपनी बांहों में भरते हुए सीधे अपने दोनों हथेलियों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर रखकर दबाते हुए उसकी गर्दन पर चुंबन करने लगा राजू की इस हरकत से सोनी के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुट में लगी वह मदहोश होने लगी उसकी गोल-गोल कांड पर राजू का लंड चुभ रहा था जिसे वह खुद अपनी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए राजू के लंड की चुभन को अपनी गांड पर महसूस करने लगी,,,,और सिसकारी भरते हुए बोली,,,)
सहहहह ओहहहहह राजु,,,,ऊममममम,,,
(राजू मदहोश होकर सोने की बड़ी बड़ी चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा और साथ ही अपने तने हुए लंड को जोकी पर जाने के अंदर कैद था उसे बार-बार उसके नितंबों के बीच गडाने लगा,,, राजू की हरकत से पलभर में ही सोनी के पसीने छूटने लगे उसकी बुर से मदन रस का रिसाव होने लगा और देखते ही देखते राजू एक-एक करके सोने के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और अगले ही पल उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज की कैसे दम आजाद हो गई और खुली हवा में सांस लेते भी ऊपर नीचे होने लगी जिसे राजू तुरंत अपने हाथों में दबोच कर उसका रस नीचोड़ने लगा,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से सोनी की चूची से खेलता रहा और फिर ब्लाउज को उसकी दोनों बाहों में से पीछे की तरफ खींचते हुए निकालनी शुरू कर दिया और सोनी भी उसका साथ देते हुए अपने बदन को एकदम ढीला छोड़ दी और अगले ही पल राजू सोनी का ब्लाउज उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया,,,, और फिर उसकी कमर में ठुंशी हुई उसकी साड़ी की गठान को खींचकर उसे खोलना शुरू कर दिया और साड़ी की किनारी को पकड़कर धीरे-धीरे खींचने लगा और सोनी एकदम मस्त होकर अपने हाथों को ऊपर की तरफ उठाकर गोल गोल घूमने लगी जैसे जैसे साड़ी को खींच रहा था साड़ी के साथ सोनी गोल-गोल घूम रही थी एक अद्भुत दृश्य हवेली के अंदर नजर आ रहा था जिसे देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था बेहद अद्भुत और उन मादक से भरा हुआ या दृश्य मदहोश कर देने वाला था राजू जो कि गांव का लड़का था और यह सामान्य सा लड़का हवेली की इज्जत की साड़ी उतार रहा था,,,, और देखते ही देखते राजू सोनी के बदन से साड़ी को भी उतार कर फेंक दिया और सोनी इस समय उसकी आंखों के सामने सिर्फ पेटीकोट में खड़ी थी,,,,
उत्तेजना के मारे सोने की सांसे बेहद गहरी चल रही थी और वह अपनी आंखों में 4 बोतलों का नशा लिए राजू की तरफ देख रही थी और ऐसा लग रहा था कि जैसे राजू को कच्चा चबा जाएगी क्योंकि इस कदर उसकी आंखों में मदहोशी छाई हुई थी उसका बस चलता तो इसी समय राजू को जमीन पर पटक कर उसके लंड पर अपनी गांड पटकना शुरू कर देती,,,,, पेटीकोट में खड़ी सोनी को देखकर राजू बोला,,,।
वाह मेरी जान बहुत खूबसूरत लग रही हो तुम्हारे बदन से कपड़े उतारना भी एक कला है जिसका सुख केवल एक किस्मत वाला ही भोग सकता है और इस समय वह किस्मत वाला मैं हूं,,,,(जवाब में बिना कुछ बोले सोनी केवल गहरी गहरी सांस ले रही थी और अगले ही फल राजू उसकी तरफ आगे बढ़ा और उसकी पेटीकोट की डोरी को अपनी उंगली में पकड़कर खींचने वाला था कि सोनी उसकी तरफ देख कर बोली,,,,)
लेकिन तुम्हें भी मेरी बात माननी पड़ेगी राजू,,,,
बोलो मेरी जान तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूं,,,,,
तुम्हें भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा ही रहना होगा तुम अगर मेरे अंगों को देखोगे तो मैं भी तो तुम्हारे लंड को देखूंगी,,,,,
कोई बात नहीं मेरी जान तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूं,,,,, लेकिन जिस तरह से मैं तुम्हारे बदन से कपड़े उतार रहा हूं उसी तरह से तुम्हें भी मेरे कपड़ों को अपने हाथों से उतार कर मुझे नंगा करना होगा,,,।
ठीक है मेरे राजा ,,,(सोनी मुस्कुराते हुए बोली)
और फिर राजू पेटीकोट की दूरी को एक झटके से खींचकर कमर से बनी हुई पेटीकोट को एकदम खिला कर दिया और अगले ही पल पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर थोड़ा सा खोल कर ढीला किया और कमर से ही सोने की पेटीकोट को अपने हाथ से नीचे छोड़ दिया और पेटीकोट तुरंत भरभरा कर सोनी के खूबसूरत कदमों में ढेर हो गया,,,, हवेली के अंदर हवेली की शोभा बढ़ा रही सोनी पल भर में ही पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी एकदम निर्वस्त्र कपड़े का रेशा तक उसके बदन पर नहीं था,,,,,
सोनी अपनी अवस्था पर थोड़ा सा शर्मा रही थी और यह देखकर राजू बोला,,,,
तुम शर्मा रही हो मेरी रानी मुझे यकीन नहीं हो रहा है,,,,
क्यों शर्मा नहीं सकती क्या,,,,?
तभी तो आश्चर्य की बात है दिन-रात मेरे लंड को अपनी बाहों में लेकर मस्त होने वाली औरत आज शर्मा रही है,,,,
क्या करूं मेरे राजा थोड़ा बहुत तो शर्म अभी भी मेरे में बाकी है वरना भैया के सामने ही तुम्हारे लंड पर चढ़ गई होती,,,,
अच्छा हुआ ऐसा नहीं कि वरना तुम्हारे भैया के अनजाने पन का मजा कैसे लिया जाता,,,,
ठीक कह रहे हो राजू,,,,
मैंने तो अपना काम कर दिया,,,(सोनी की गांड को अपनी हथेली में कस के दबाते हुए,,) अब तुम भी अपना काम करो मेरी जान,,,,
(इतना कहने के साथ ही सोनी मुस्कुराने लगी और राजू की तरफ एक कदम आगे बढ़ा कर अपने होठों को उसके होंठ पर रखकर चुंबन करने लगी और फिर राजू के होठों पर चुंबन करते हुए ही वह राजू के कुर्ते को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी राजू जी सोनी का साथ देते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर करके अपना कुर्ता निकलवाने में सोने की मदद करने लगा और अगले ही पल सोनी राजू के कुर्ते को उतार कर फेंक दी कुर्ते के उतरते ही राजू की चौड़ी छाती एकदम से चमकने लगी राजू की छाती देख कर ही औरत इस बात का अंदाजा लगा लेती थी कि राजू के मर्दाना अंग में कितना जान है और इस समय सोनी जोकि अंदाजा नहीं बल्कि महसूस कर चुकी थी वह एक बार फिर इसे एहसास भी डूबने लगी कि राजू का लंड उसकी बुर में जाएगा तो कितना मजा आएगा,,,
सोनी की आंखों में मदहोशी छा रही थी सोनी अपने होठों को राजू की छाती पर रखकर उसकी छाती का चुंबन करने लगे और उत्तेजना के मारे उसकी एक छाती को औरत की छाती की तरह अपनी हथेली में दबोच कर दबा दी जिससे राजू एकदम से चौक कर हल्का सा चीख पड़ा लेकिन अगले ही पल उसे इस बात का एहसास हुआ कि सोनी उसके बदन से खेल रही है इसलिए मैं कुछ बोला नहीं और सोनी अपनी मादक अदाओं बिखेरते हुए अपने होठों को संजू की छाती से रगडते हुए नीचे की तरफ आने लगी,,,,,,, देखते ही देखते अपने घुटनों के बल बैठ कर राजू के पजामी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगी और अगले ही पल राजू का मुसल जैसा लंड पजामे की कैद से एकदम आजाद हो गया राजू का लहराता हुआ लंड देखकर सोनी के मुंह में पानी आ गया क्योंकि बहुत दिनों बाद वह राजू के लंड को देख रही थी इसलिए उससे रहा नहीं गया और वह हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को पकड़ ले और उसे अपनी मुट्ठी में दबाने लगी,,,, यह देखकर राजू बोला,,,)
सहहहह आहहहहह सोनी मेरी जान दबाने से अच्छा है कि अपने मुंह में ले लो,,,,
मेरा भी मन बहुत कर रहा है राजा लेकिन खाना बनाने के बाद,,,
ओहहहह सोनी तुम तो एक ही बात पर अटक गई हो चलो छोड़ो अच्छे से मुंह में एक बार लेकर निकाल दो बार मुझे भी थोड़ा सुकून मिल जाएगा,,,,,।
(इस बार राजू की बात मानते हुए राजू की तरफ देखते हुए उसकी आंखों में आंखें डाल कर उससे इस आरोही सहारे में बातें करते हुए सोनी लंड की जड़ को अपनी दो उंगलियों से पकड़कर राजू की लंड के सुपाड़े को अपने होठो के बीच दबाकर उसे अपने अंदर लेने लगी सोनी अपने होठों का कसम और दबाव राजू के लंड पर पूरी तरह से बढ़ाते हुए उसे अंदर की तरफ ले रही थी और राजू को ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उसका मोटा तगड़ा लंड सोनी के मुंह में नहीं बल्कि उसकी बुर में घुस रहा हो राजू पूरी तरह से मस्त हो चुका था और उसकी आंखें मदहोशी में बंद हो चुकी थी और देखते ही देखते सोनी राजू के समूचे लंड को अपने गले में उतार कर उसे पूरी तरह से मस्त करते हुए कुछ पल तक उसी अवस्था में रुकी रही जब उसे एहसास हुआ कि उसकी सांस अटक रही है तो वह फिर उसी तरह से ही अपने होठों का दबाव उस पर बनाए हुए उसे धीरे-धीरे करके अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और जैसे ही लंड मुंह में से बाहर निकला राजू एकदम से मस्त होते हुए अपनी आंखों को खोल दिया और सोनी की तरफ देखते हुए बोला,,,।
निकाल कर दी मेरी जान बहुत मजा आ रहा था ऐसा लग रहा था कि तुम्हारे मुंह में नहीं बल्कि तुम्हारी बुर में जा रहा है,,,,
सोनी राजू के मोटे तगड़े लंड से खेलती में

अभी नहीं खाना बनाने के बाद,,,(और इतना कहने के साथ ही सोनी अपनी जगह से खड़ी हुई और अपनी गांड मार खाते हुए रसोईघर की तरफ जाने लगी और उसकी गोल गोल गांड को देखकर राजू बोला,,,)
रुको मैं भी आता हूं,,,,

