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खबर मिलते ही राजू हवेली की तरफ निकल चुका था,,, डाका डालने आए डाकुओं के 2 साथी मारे जाने और उनके गांव छोड़कर भागने की खबर सुनकर लाला बहुत खुश हो रहा था वह सोनी से बातें कर रहा था कि,,,, यह काम राजू का ही है क्योंकि राजू को उसने की बंदूक दिया था और इस तरह का कारनामा राजू के सिवा और किसी मैं दम ही नहीं है कि वह ऐसा कारनामा कर सके,,,,, सोनी से बात करते हुए लाला बोला,,,।

देखी नहीं थी सोनी जिस दिन राजू ने हम दोनों को हमबिस्तर हुए रंगे हाथ पकड़ा था उसकी आंखों में जरा भी डर नहीं था हम लाला है जमीदार हैं हम चाहे उसका कुछ भी करवा सकते हैं लेकिन वह बिल्कुल भी घबराया नहीं था बल्कि हिम्मत दिखाते हुए मुझे कैसे धमका रहा था मैं उस दिन ही समझ गया था कि राजू बहुत बड़े काम की चीज है,,,,

हां भैया उस दिन तो मैं भी पूरी तरह से घबरा गई थी राजू किस तरह से हम दोनों को धमका रहा था और सही मायने में राजू ने उसी दिन अपनी मर्दानगी का परिचय दे दिया था वरना गांव भर में ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जो आप से ना डरता हो लेकिन राजू की आंखों में बिल्कुल भी डर नहीं था,,,, और तो और भैया अगर राजू की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो शायद उस समय उस मौके का गलत फायदा उठा कर ना जाने और क्या कर दिया होता,,,।

(सोनी की बात सुनकर लाला तिरछी नजरों से सोने की तरफ देखते हुए कुछ सोच कर बोला)

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मैं जानता हूं सोनी तुम क्या कहना चाह रही हो मैं भी तो हैरान था कि अगर राजू की जगह कोई और होता और इतनी हिम्मत दिखाया होता तो जरूर वह तुम्हारे साथ हमबिस्तर होने की शर्त रखा होता और तुम्हारे साथ हम बिस्तर भी हुआ होता लेकिन राजू ऐसा लड़का बिल्कुल भी नहीं है वह सिर्फ इज्जत और रुतबे का भूखा है ना कि एक औरत के जिस्म का,,,,(अपने भाई की बात सुनकर सोनी मन ही मन मुस्कुराते हुए अपने आप से ही बोली,,, तुम्हें क्या मालूम भैया कि राजू किस चीज का भूखा है खूबसूरत औरत मिल जाए तो घंटों तक रोंदता रहता है वह तो पहले से ही मेरे बदन से मजा ले चुका था इसलिए उस दिन इस तरह की शर्त नहीं रखा वरना राजू ऐसे मौके का फायदा उठाना अच्छी तरह से जानता है,,,) और उसके कहे अनुसार ही,,,, मेरे बदौलत आज उसकी इज्जत पूरे गांव में बहुत ज्यादा है उसे सब इज्जत की नजर से देखते हैं और उससे डरते भी हैं,,,, उसे आज बहुत लोग जानते हैं और यह जानकर उसकी और इज्जत करते हैं कि वह लाला का आदमी है लाला का खास है,,,,

तुम सच कह रहे हो भैया राजू को बहुत कुछ मिला है,,,

यही तो मैं कह रहा हूं सोनी मेरी बदौलत अगर राजू को इतना कुछ मिला है तो उसका भी तो फर्ज बनता है मेरे लिए कुछ करने का,,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,,

जिस बहादुरी से उसने गांव में से डाकुओं को मार भगाया उसकी बहादुरी देखते हुए मेरे मन की लालच बाहर आ गई है,,,,

तुम क्या कहना चाहते हो भैया,,,,

मैं चाहता हूं कि राजू विक्रम सिंह से हम लोगों की रक्षा करें,,,

लेकिन क्या राजू कर पाएगा,,,

कर तो लेगा सोनी लेकिन सवाल यह है कि क्यों करेगा आखिर इतना बड़ा खतरा कौन अपने सर पर उठाएगा और वह भी बेवजह,,,,,

बात तो सही है भैया,,,, बिना लालच के इतना बड़ा खतरा कोई अपने सर पर ले भी नहीं सकता क्योंकि बिना किसी लालच के कोई काम करता नहीं है,,,,

यही तो बात अटक जा रही है सोनी,,,,(मेहमान घर में अपने आसन पर बैठकर हुक्का गुड गुडाते हुए लाला बोला,,,)

उसे भी रुपया पैसा की लालच दो,,,

तुम्हें क्या लगता है सोनी थोड़े से रुपया पैसे की लालच में आकर वह इतना बड़ा खतरा उठाएगा,,,

फिर,,,,(सोनी आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखते हुए बोली)

जर जमीन और जोरु यही तीन चीज ऐसी है जो इंसान से कुछ भी करवा सकती है,,,,

मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे इसमें समझना क्या है,,,, हम लोग राजू को विक्रम सिंह से मुकाबले के लिए लालच देंगे,,,

लालच किस बात की लालच,,,,

वैसे भी राजू अपने गोदाम का कारोबार देखता ही है अगर उसे गोदाम का आधा हिस्सा दे दें और उसके नाम पर आम का बगीचा कर दें फिर तो वह इतना बड़ा खतरा अपने सर पर लेने के लिए तैयार हो जाएगा वैसे भी राजू बहुत दिमाग का तेज है वह जरूर कोई ना कोई रास्ता निकाल लेगा,,,,,

और अगर फिर भी ना माना तो,,,,(सोनी चिंतित स्वर में बोली)

अगर राजू फिर भी नहीं माना तो फिर एक ही रास्ता है,,,

वह क्या,,?

तुम,,,,

मैं कुछ समझी नहीं भैया,,,,

सोनी तुम जवान हो खूबसूरत हो गोरे बदन की मालकिन हो तुम्हारा अंग अंग खरा सोना है तुम्हें पाने के लिए दुनिया के सभी मर्द पागल हुए रहते हैं,,,,

मैं अभी भी कुछ नहीं समझी भैया,,,,

सोनी अब तुम ही इस मुसीबत से बचा सकती हो,,,,, राजू पूरी तरह से जवान है मेरे साथ तुम्हें लग्न अवस्था में संभोग रत देख चुका है,,,

तो,,,,,

तो क्या जवान होने के नाते उसके मन में भी तो कोई अरमान होंगे औरत को लेकर और तुम्हारे नंगे बदन को देख कर जरूर उसका मन डोला होगा लेकिन उस समय वह कुछ कर नहीं पाया,,,, औरत की खूबसूरती तो बड़े-बड़े तपस्वी को भी उनकी तपस्या भंग कर देती है तो राजू की क्या बिसात है,,,,, मैं चाहता हूं सोनी कि तुम राजू के साथ प्रेम संबंध बढ़ाओ अपनी अदाओं से अपनी खूबसूरती से उसे रिझावो,,,,

यह क्या कह रहे हो भैया,,,,?

मैं सच कह रहा हूं सोनी राजू को तुम अपनी मादक अदाओं से अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हो गई तो समझ लो अपना काम बन गया,,,,

तुम तो भैया मुझे,,,, विक्रम सिंह के हाथ से बचाकर राजू के हाथ में सौंप रहे हो,,,

सोनी समझने की कोशिश करो राजू और विक्रम में जमीन आसमान का फर्क,,, है,,, विक्रम सिंह तुम्हारे बदले में हमारी जमीन जायदाद हमें वापस नहीं लौटाएगा जमीन जायदाद तो लेगा ही लेगा और ब्याज के तौर पर तुम्हारी जवानी से भी खेलेगा लेकिन राजू के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है राजू अगर तुम्हारे प्यार में तुम्हारी जवानी के पीछे पागल हो गया तो वह है जमीन जा जात में हिस्सा लिए बिना ही विक्रम सिंह से अकेले भिड जाएगा,,,,

(अपने भाई की है बातें सुनकर सोनी का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,, सोनी तो अपने भाई के इस प्रस्ताव को सुनकर ही अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि अगर ऐसा हो गया तो उसके लिए भी सब कुछ आसान हो जाएगा,,,, वह जब चाहे तब राजू के साथ अपनी जिस्मानी भूख को मिटा सकेगी वैसे भी राजू के साथ चुदाई करने का जो मजा उसे बहुत दिनों से वह अपने अंदर महसूस करके पागल हुए जा रही थी अपने भाई के इस प्रस्ताव पर तो उसे उम्मीद की किरण नजर आने लगी थी,,,) सोनी तुम्हें मेरी यह बात माननी पड़ेगी,,,,।

लेकिन भैया इसमें इज्जत का बहुत बड़ा सवाल है अगर राजू ने किसी को यह बात कह दिया तो,,,

नहीं सोनी राजू ऐसा लड़का बिल्कुल भी नहीं है,,,, मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारे साथ संबंध बनाने के बाद वह इस राज को राज रखेगा,,,,,

फिर भी भैया,,,,

अब कुछ मत कहो सोनी तुम तो अच्छी तरह जानती हो किस अवस्था में राजू ने हम दोनों को देखा था अगर वह चाहता था तब से ही तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बना लिया होता लेकिन उसने ऐसा नहीं किया वह एक इज्जत दार लड़का है,,,,

वही तो मैं कह रही हूं भैया वह एक लड़का है भला एक पराई औरत के साथ इस तरह की हरकत‌ वह कैसे कर पाएगा,,,,

क्यों नहीं कर पाएगा मैं भी तो तुम्हारा बड़ा भाई हूं आप दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता होना ही नहीं चाहिए बल्कि इस तरह के रिश्ते के बारे में सोचना भी पाप है लेकिन मैं तुम्हारी खूबसूरती से पागल हो क्या तुम्हारी अदाओं को देखकर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और हम दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता होने के बावजूद भी मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो गया,,,, फिर तुम्हारे और राजू के बीच तो किसी भी तरह का रिश्ता नहीं है तुम दोनों की हर मर्द और औरत है और औरत और मर्द के बीच यह रिश्ता होना लाजमी है,,,,

लेकिन भैया,,,,,!

अब लेकिन वेकिन कुछ नहीं,,,,,,(सोनी को बीच में ही रोकते हुए लाला बोला) घर की इज्जत मान मर्यादा को दांव पर लगाकर आज परसों की बापदादा आजा पुरखो की जमीदारी और जमीन जायदाद बचाने की जिम्मेदारी अब तुम्हारी है सोनी,,,,, वरना सब कुछ हाथ से चाहता रहेगा और अगर ऐसा हो गया तब तो मैं मर जाऊंगा और तुम भी दरबदर ठोकर खाती फिरोगी,,, या फिर विक्रम सिंह की रखैल बन कर रह जाओगी,,,,

(सोनी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका भाई जो कुछ भी कह रहा है वह बिल्कुल सच कह रहा है अगर राजू इस मामले में नहीं पड़ेगा तो वाकई में सोनी विक्रम सिंह की रखैल बन जाएगी और विक्रम सिंह रोज उसे रोदेगा,,,, वैसे भी अपने भाई की बात मान लेने में सोनी को बिल्कुल भी इंकार नहीं था बल्कि वह तो मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि उसके और राजू के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध स्थापित हो चुके थे और वह इस रिश्ते से बेहद खुश थी लेकिन वह डरती भी थी कि कहीं उसके भैया को इस बात का पता ना चल जाए लेकिन यहां तो उसका भाई खुद उसे राजू के साथ हमबिस्तर होने के लिए बोल रहा था यह सुनकर तो सोनी का दिल खुशी से झूम उठा था लेकिन फिर भी जानबूझकर अपने भाई के सामने चरित्रवान होने का नाटक कर रही थी,,,,)

मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूं भैया लेकिन मुझे नहीं लगता है कि राजू इस तरह की बात मानेगा या मेरे साथ हमबिस्तर हो जाएगा,,,,

जरूर होगा मुझे तुम्हारी जवानी पर पूरा विश्वास है तुम्हारी गदराई जवानी की झलक देखकर ही वह पागल हो जाएगा,,,,

पूरी तरह से नंगी तो देखा है फिर भी तो उस पर कोई असर नहीं हुआ,,,

हो सकता है हम जमीदार हैं इसलिए वह तुम्हारे साथ कुछ किया नहीं लेकिन तुम्हें नंगी देखकर जरूर अपने हाथ से हिला कर अपनी गर्मी शांत किया होगा,,,,

यह तो मालूम नहीं,,,,

लेकिन अब तुम्हें उसे मजबूर करना होगा अपने साथ हमबिस्तर होने के लिए ताकि तुम्हारी जवानी का कायल होकर तुम्हारी मतलब से जवानी के आगे घुटने टेक कर वह कुछ भी करने को तैयार हो जाए,,

भैया मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी,,,,।

(हालात पूरी तरह से बदल चुके थे लाला गांव का जमीदार था ऐसे में उसकी बहन बेटियों की तरफ किसी की आंख उठाने की हिम्मत नहीं होती थी लेकिन हालात के हाथों मजबूर होकर लाला आज अपनी ही घर की इज्जत अपनी बहन को गांव के एक नौजवान लड़के को सौंपने के लिए तैयार हो चुका था ताकि वह नव जवान लड़का ढाल बनकर उन लोगों की हिफाजत कर सकें,,,,, थोड़ी ही देर बाद राजू हवेली पहुंच चुका था और हवेली के अंदर मेहमान कक्ष में प्रवेश करते हुए वह द्वार से ही लाला के सामने हाथ जोड़कर बोला,,,)

नमस्कार लाला,,,,

अरे राजू मेरे सामने हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है तुमने जो कारनामा कर दिखाया है उसे देखते हुए तो हमें तुम्हारे सामने हाथ जोड़ना चाहिए,,,(लाला अपनी जगह से खड़ा होता हुआ बोला)

यह क्या बात कर रहे हैं लाला,,,,, वर्षों से समाज में चले आए इस दस्तूर को बदला थोड़ी जा सकता है आप हमारे मालिक हैं और हम आपके नौकर हैं हाथ जोड़ना हमारा फर्ज है,,,,

यह तो तुम्हारा बड़प्पन है राजू,,,(लाला जल्दी से राजू के करीब पहुंच गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे अपने आसन की तरफ लाते हुए बोला,,)

वैसे लाला आपको किसने कह दिया कि कल रात को जो कारनामा हुआ है वह मैंने किया हूं,,,

राजू,,,, यह बात हमसे किसी ने कही नहीं है लेकिन हम जानते हैं कि कल रात को जो कुछ भी हुआ जो कारनामा हुआ है उसमें तुम्हारा ही हाथ है मुझे तुम पर पूरा भरोसा है राजू तुमने हमारी दी हुई बंदूक का सही उपयोग किया है,,,,

लाला इसके लिए मैं शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे बंदूक दिया वरना कल रात को अनर्थ हो जाता,,,,, वैसे लाला इस बात को आप किसी से कहना नहीं,,,

वह क्यों राजू,,,(सोनी बीच में बोली) तुमने जो हिम्मत दिखाई है मर्दों वाला काम किया है उसके बारे में तो पूरे गांव वालों को खबर होनी चाहिए ताकि पूरे गांव में तुम्हारी जय जयकार हो,,,,

नहीं नहीं मालकिन ऐसा गजब बिल्कुल भी मत करना अगर इस बारे में किसी को पता चल गया और यह खबर उड़ते उड़ते डाकूओं के कान में चली गई तो मेरे परिवार के लिए मुश्किल हो जाएगा इसलिए इसका जिक्र भी कभी मत करना,,,,

चलो छोड़ो यार आओ पहले बैठो,,,,(जहां पर लाला बैठा हुआ था वहीं पर उसने राजू को भी अपने बगल में ही बिठा लिया और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तुम्हारी हिम्मत की दाद देनी होगी तुम्हारी मर्दानगी देखकर मेरा इंतजार एकदम खत्म हो गया,,,,

इंतजार कैसा इंतजार,,,,(आश्चर्य जताते हुए राजू बोला)

अरे बताता हूं थोड़ा सब्र तो करो सोनी जाओ पहले चाय नाश्ता लेकर आओ,,,,।

जी भैया,,,(इतना कहकर सोनी अपनी जगह से उठी और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की तरफ जाने लगी लेकिन आज उसकी चाल में एक मादकता थी एक नशा था जो कि आज एकदम साफ नजर आ रहा था राजू की नजर सोनी पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया सोनी जानबूझकर सीढ़ियां चढ़ते हुए जब अपने पैर ऊपर की तरफ उठाती थी तो अपनी गांड के ऊभार को कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकाल देती थी,,,, और राजू सोनी की बड़ी बड़ी उभरी हुई गांड देखकर पागल हुआ जा रहा था वैसे भी बहुत दिन हो गए थे सोने की मद मस्त जवानी को नंगी देखे हुए,,,, राजू तब तक सोनी को देखता रहा जब तक कि सोनी अपनी मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ी पर नहीं चढ़ गई,,, लाला अपनी बहन की कामुक हरकत और राजू की नजर को अच्छी तरह से पढ़ने की कोशिश कर रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था,,,,।

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