आर्या मैडम – Update 4
बहुत सी सुंदर औरतों के पैर सुंदर नहीं होते, मैडम के पैर सच में बड़े नाजुक और खूबसूरत थे. तलवे भी एकदम मुलायम और चिकने थे. पाँव की आर्च अकदम गोलाकार थी और एड़ियाँ भी मांसल फ़ूली हुई थी. मुझसे न रहा गया और मैंने उन्हें चूम लिया. उनका स्पर्श और खुशबू मुझे इतने अच्छे लगे कि मैं जीभ निकाल कर बड़े आदर और प्यार से मैडम के तलवे चाटने लगा.
मैडम को भी मेरा यह काम अच्छा लगा और वे अपने पैरों से मेरे गाल सहलाने लगी. “तू तो सच में अपनी टीचर का चरण पुजारी निकला रे, मैं आशिर्वाद तो दूँगी ही, साथ में ही अपने इस शरीर का हर भाग तुझे चखाऊँगी, जो चाहिये मांग ले बेटे, मिलेगा.”
मन भर कर मैडम की चरण पूजा करने के बाद मैं उठ बैठा. “मैडम, प्लीज़ अब चोदने दीजिये, मैं मर जाऊंगा, अब नहीं रहा जाता.” मैडम प्यार से मेरा लंड पकड कर उससे खेलती हुई बोली. “मैं तो अभी चुदवा लूँ मेरे राजा, कौन औरत नहीं चुदवाएगी ऐसे मस्त जवान लंड से, पर मैं तो तेरे बारे में सोच रही थी, अभी रात काफ़ी बाकी है, अभी से चोद लिया तो बुर का रस कैसे पियेगा फ़िर? तेरे वीर्य से भर जाएगी तो तुझे स्वाद अलग लगेगा बेटे. सुबह नहाने के पहले जरूर चोद लेना जितना चाहे.”
बात तो सच थी, मैडम की बुर मैं और कई घंटे चूसना चाहता था. यही रास्ता था कि फ़िर उनसे लंड चुसवा लूँ. मैडम भी यही चाहती थी, और मेरे लंड को भूखी नज़रों से देख रही थी.
“मैडम आप बहुत अच्छा लंड चूसती हैं, आप दिन रात चूसिये तो भी मैं तैयार हूँ, पर अभी आप के इस मादक पके हुए शरीर पर इतना प्यार आ रहा है कि मैं आपको हचक हचक कर चोदना चाहता हूँ.”
मैंने उनके स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही चूमते हुए कहा.
“कोई बात नहीं बेटे, आ एक नया आसन लगाते हैं, मैं चूस भी लूँगी और तू भी मेरे मुंह को चोद लेना.” पलंग पर लेटती हुई वे बोली.
मैडम अब सीधी पलंग पर अपनी टांगें फ़ैलाकर और नितंबों के नीचे दो तकिये लेकर लेट गई.
“चूत उठी रहेगी तो ठीक से चूस पायेगा तू, आ अब उल्टी तरफ़ से मेरे ऊपर आ जा.”
मैडम के पैरों की तरफ़ मुंह कर के मैं धीरे से उनके ऊपर चढ. गया. मेरा लंड उनके लाल होंठों के ऊपर थिरक रहा था और उनकी मुलायम रेशमी बालों से घिरी चूत मेरे मुंह के नीचे थी.
मैडम ने कहा
“अब मैं तेरा लंड चूसती हूँ, मुझे कुछ देर मजा ले ले कर चूसने दे, तू भी मेरी बुर का रस पी ले, आज तो सच में इतना रस निकल रहा है जैसा कभी नहीं चुआ. लगता है तेरे लिये ही मेरी चूत आज लबालब रस बना रही है. जब तुझ से न रहा जाये तो पूरा लंड मेरे मुंह में डाल देना और ऐसे चोदना जैसे बुर चोद रहा हो.”
मैं मैडम के ऊपर लेट कर उनकी बुर चूसने में लग गया. मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे सरकाकर मैडम ने मेरा लंड अपने मुंह के ऊपर कर लिया और उसे चाटने और किस करने लगी. कभी वे उसे गले तक निगल लेती और कभी सिर्फ़ सुपाड़ा मुंह में अपनी जीभ पर टिकाकर चूसती. उधर उनकी बुर से अब लगातार पानी बह रहा था.
मैंने अपने आप पर बहुत कंट्रोल किया पर आखिर जब वासना असहनीय हो गई तो मैंने मैडम का सिर पकड़कर अपना लौड़ा जड. तक उनके गले में उतार दिया और फ़िर अपनी जांघों में उनके सिर को भींच कर हचक हचक कर उनका मुंह चोदने लगा.
उनके गीले कोमल गले में मेरा लंड ऐसा अंदर बाहर हो रहा था जैसे कोई चूत हो. मैंने आँखें बंद कर ली और ऐसी कल्पना की कि उनकी चूत उनका मुंह है जिसे मैं किस कर रहा हूँ और उनका मुंह उनकी चूत है जिसे मैं चोद रहा हूँ. बड़ी मादक कल्पना थी और मैं उसे नब्बे प्रतिशत सही मानकर मैडम के गले को खूब चोदा. सिर्फ़ एक बात थी जिससे मैं उसे शत प्रतिशत सही नहीं मान पाया – उनकी घनी झांटे जो मेरे चेहरे पर दबी हुई थी.
आखिर मैं मचल कर जोर से झड गया और मेरे लंड ने अपना गाढ़ा माल मैडम के गले में उगल दिया. वे उसे तुरंत निगल गई. आखिर जब मैं तृप्त होकर उनके शरीर पर से उतर के पलंग पर सो गया तब वे उठी. “मजा आया बेटे? मुझे तो अपना मुंह चुदाने में बड़ा आनंद आया. बस तेरे वीर्य का स्वाद नहीं ले पायी, सीधा पेट में गया, तेरा लंड इतना गहरा गड़ा था मेरे गले में, लगता था जैसे पेट में घुस गया हो.”
मेरी तृप्ति अब हो गयी थी और मैंने इतना आनंद देने के लिये उनके प्यारे पैर चूम कर उन्हें थैंक यू कहा. “चल, अब मेरी बुर पूजा कर सकता है ना दो तीन घंटे? फ़िर सोने के पहले चोदने दूँगी.” मैंने उनकी पिंडलियों को चूमते हुआ कहा. “रात भर सेवा करवा लीजिये मैडम, अब आप से जिद नहीं करूंगा.”
मेरी बात पर हंसते हुए उन्हों ने मुझे ठीक से तकिये पर सिर रख कर उस संकरी नीची बेंच पर लिटाया और फ़िर मेरे सीने पर चढ. कर बैठ गई. आगे सरकते हुए उन्हों ने अपनी चूत मेरे मुंह पर लगायी और मेरे सिर को जांघों मे दबाकर उसपर साइकिल की सीट जैसे सवार हो गई. “अब कुछ देर साइकिल चलाऊँगी तेरे मुंह पर. यह बहुत प्यारा आसन है, खास कर तब जब तेरे जैसा मन लगाकर बुर चूसने वाला कोई मिल जाये.”
ऊपर नीचे उचकते हुए उन्हों ने मन भर कर साइकिल चलाई. जब थक गई तो पलंग पर आकर करवट पर लेट गई और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा कर पैर फ़टकारते हुए खूब हस्तमैथुन किया. हमें समय का कोई ख्याल ही नहीं रहा. वे ऐसे मुझसे खेल रही थी जैसे कोई प्यारा खिलौने का गुड्डा मिल गया हो. बीच में आराम करने के लिये वे अलग हो जाती तो मेरे मुंह में अपनी नरम चूची दे देती चूसने के लिये.
आखिर रात के दो बजे उन्हें पूरी तृप्ति हुई. लस्त होकर वे पलंग पर सो गई और मुझे चोदने को कहा. मैं झट उनपर चढ बैठा और बुर में अपना फ़न्नाया लंड डाल कर उन्हें अपने पूरी शक्ति से चोद डाला. वे ऐसे सिसक सिसक कर कराह रही थी जैसे कोई उनसे जबरदस्ती कर रहा हो पर उनके चेहरे पर एक स्वर्गिक आनंद झलक रहा था. चोद कर जब मैं स्खलित हुआ तो इतना थक गया था कि बस दो मिनिट में सो गया.
सुबह मेरी नींद बहुत देर से खुली. मैडम पहले ही उठ चुकी थी. मुझे जगा देखकर बड़े प्यार से चाय बना कर लाई वे नहा कर एकदम फ़्रेश लग रही थी. सिर्फ़ एक गाऊन पहने थी और नीचे ब्रेसियर न होने से उनकी लटकती चूचियाँ और उनके बड़े निप्पलों का उभार गाउन में से दिख रहा था. “हो गया आराम? मैंने जान बूझकर नहीं उठाया. जितना आराम करेगा उतनी ज्यादा सेवा मैं तुझसे करवा सकती हूँ, है ना?” मेरे बालों को प्यार से बिखेरकर वे बोली. “चल, अब नहा कर आ, फ़िर ब्रेकफ़ास्ट करते हैं.”
नहा कर वैसा ही नंगा मैं वापिस आया. नाश्ता करने के बाद मैडम मुझे चूम कर लंड को पकड़कर बोली. “अब आराम कर, इसे जरा मस्त कर, मैं टेस्ट पेपर करेक्ट करने को कॉलेज जा रही हूँ. शाम को वापिस आऊँ तो लंड एकदम तैयार मिलना चाहिये. और देख ऐसे ही नंगे रहना. तेरे कपड़े अब छुट्टी खतम होने पर होस्टल जाते समय दूँगी”
मैंने मैडम से कहा कि वे पेपर घर ही ले आयेम. वे हंसते हुए बोली. “घर में रहूँगी तो कुछ काम नहीं होगा सिवाय काम कर्म के” मैंने कहा “नहीं मैडम, आप काम कीजिये, मैं बस आपके सामने नीचे बैठ कर आपकी सेवा करता रहूँगा.”
सुनकर मैडम शायद मेरा मतलब समझ गई क्यों की वे हंसने लगी. बड़ी मादक मुस्कान थी. “ठीक है, तू सो ले, मैं दो घंटे में आती हूँ”
उनके जाने के बाद मैंने तुरंत पहला काम यह किया कि उनके रबर के स्लीपर जो पलंग के नीचे थे, उठा कर पलंग पर रख लिये. साथ ही उनकी जितनी चप्पलें मिली, उठा लाया. फ़िर उन्हें देखकर उत्तेजित होकर मैं उन्हें प्यार करने लगा. कल वाले सेंडल भी थे और साथ में रबर की एक और मोटी हील वाली पुरानी घिसी हुई स्लिपर थी. एक जोड़ी काले सैंडलों की थी. किसी को मैं लंड पर रगडता, किसी को चाटता और किसी को सूँघता. मुझे तो मानों खजाना मिल गया था. बड़ी मुश्किल से मुठ्ठ मारने से अपने आप को रोका. जब दो घंटे हो गये तो जाकर सब चप्पलें अपनी जगह रख दी और आकर सो गया.
यह सब मैं मैडम के सामने भी कर सकता था पर शरम आ रही थी. उन चप्पलों और मैडम के पैरों के बारे में सोचते हुए मुझे नींद लग गयी और मैं ऐसी गहरी नींद सोया कि मैडम ने चुंबन लेकर उठाया तभी आँख खुली. हमने खाना खाया और खाने के समय मैडम मुझसे तरह तरह की गप्पें लगाती रहीं. मुझसे मेरी गर्ल फ़्रेन्ड्स के बारे में पूछा. मैंने साफ़ बता दिया कि मुझे उन जैसी उम्र में बड़ी औरते ही ज्यादा अच्छी लगती हैं इसलिये अपनी उम्र की फ़्रेन्ड अब तक नहीं बनायी थी. वे भी मेरी बात समझकर हंसने लगी.
लंच के बाद उन्हों ने एक अंगड़ाई ली और टेस्ट पेपर उठाकर अपने स्टडी टेबल पर बैठ गई. मैं उनके पास उनकी जांघों पर सिर रख कर नीचे बैठ गया. जानी पहचानी बड़ी भीनी मादक खुशबू आ रही थी. आर्या मैडम शायद फ़िर मस्ती में थी. वे धीरे धीरे अपनी जांघें सटाकर रगडती हुई पेपर चेक करने लगी.
मैं अब धीरे से टेबल के नीचे घुस गया. उन्हों ने अपनी बाथरूम स्लिपर फ़िर पहन ली थी और पैर उठाकर उंगलीयो से लटकाकर स्लिपर नचा रही थी जैसा अक्सर लोग करते हैं. मैं सीधा नीचे लेटकर उनके पैर पकड़कर उन्हें और उनकी चप्पलों को चूमने और चाटने लगा. मेरे इस अनपेक्षित काम से वे चौंक कर बोली. “अरे क्या कर रहा है? बहुत दीवाना है लगता है मेरे पैरों और चप्पलों के पीछे!” मैंने गिड़गिड़ाकर कहा. “बहुत अच्छा लगता है मैडम, प्लीज़ करने दीजिये. बस दस मिनिट, फ़िर आपकी चूत की सेवा करूंगा.”
वे हंस पड़ीं. “ले चाट, और चाट ही रहा है तो कल जैसे तलवे चाट. गुदगुदी होती है तो बड़ा मजा आता है.” मैंने मन भर कर उनके तलवे चाटे, उंगलीयाँ चूसी और चप्पलें भी मुंहे में लेकर उनका स्वाद लिया. फ़िर सरककर मैडम के सामने टेबल के नीचे ही जमीन पर बैठ गया.
मैंने धीरे से मैडम की साड़ी उठायी. वे अंदर कुछ नहीं पहने थी. उन्हों ने भी ऐसे अपने पैर फ़ैला दिये जैसे इसी का इंतज़ार कर रही हों. मैं उनकी टांगों के बीच आराम से पलथी मार कर बैठ गया और उनकी चूत चूसने लगा. चूत में से खूब रस बह रहा था. मैडम ने तुरंत अपनी टांगें सिकोडकर मेरे सिर को अपनी बुर पर दबा लिया और साड़ी नीचे करके मुझे उसमें छुपा लिया. फ़िर आगे पीछे होते हुए मेरे मुंह पर मुठ्ठ मारती हुई अपना काम करने लगी.
तीन घंटे वे अपना काम करती रहीं और मैं लगातार उनकी बुर चूसता रहा, वे भी प्यार से झड झड कर मुझे रस पिलाते हुए चुसवाती रहीं. बीच बीच में वासना ज्यादा हो जाने पर पेन नीचे रखकर मेरा सिर जोर से अपनी बुर पर दबा कर रगडने लगती. कभी कहती. “जीभ से चोद बेटे, अंदर डाल” कभी कहती. “क्लिट को चाट मेरे बच्चे, जीभ से रगड”
बीच में उन्हें पेशाब लगी. बोली. “वरुण, जरा ठहर राजा, अभी बाथरूम जाकर आती हूँ.” मैं अब तक इतना उत्तेजित हो गया था कि उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था. दूसरे यह कि मैडम के प्रति मेरी दीवानगी इतनी बढ. गयी थी कि सुबह से उनके शरीर के और रसों का पान करने को मैं मरा जा रहा था. तो भला यह सुनहरा मौका क्यों छोड़ता? उनकी चूत में मुंह और घुसाकर बोला. “मत जाइये मैडम, यहीं कर लीजिये.”
वे थोड़ी चिढ. गई. “यहाँ फ़र्श पर करू? तेरा दिमाग तो नहीं खराब हो गया है?” मैं उनकी चूत को चूमता हुआ उनके मूत्र छिद्र को अपनी जीभ से सहलाता हुआ बोला. “मैडम, मैं इस शराब को जमीन पर क्यों गिरने दूंगा? मेरे मुंह में मूतिये मैडम, प्लीज़.”
मेरी बात सुनकर वे पल भर चुप रहीं. मुझे लगा कि नाराज हो गयी हैं इसलिये मैंने डरते हुए सिर उठाकर देखा. उनकी आँखों में से प्यार और कामुकता छलक रही थी. मेरे बाल सहला कर बोली. “सच, पियेगा, मेरा मूत? देख फ़िर मुकरना नहीं! और एक बार पियेगा तो इसके बाद हमेशा पीना पड़ेगा. एक बार आदत लग गयी तो मैं फ़िर छोड़ने वाली नहीं तुझे. ऐसा मस्त जवान जिंदा बाथरूम मिलने पर मैं फ़िर और कुछ नहीं इस्तेमाल करूंगी मैं!”
जवाब में मैंने सिर्फ़ उनकी बुर को चूमा और मुंह खोल कर उनकी पूरी चूत को मुंह में ले लिया. वे समझ गई. एक गहरी सांस लेकर मेरे सिर को कसकर अपनी बुर पर दबाया और बोली. “ले पी बेटे, पी अपनी मैडम की बुर का शरबत, पर छलकाना नहीं. दो तीन गिलास भर है” और मूतने लगी.
वह खारा गरम जल मेरे लिये अमृत था. मैं गटागट पीने लगा. वे इतनी मचली कि कस के जोर से मूतने लगी. मुझे जल्दी जल्दी निगलना पड़ा कि कहीं कुछ बूंदें छलक न जाये. उनकी जांघों को दबाकर मैंने रुकने का इशारा किया. वे समझ गई और मूतना बंद कर दिया. “क्या हुआ रे, इतनी जल्दी मन भर गया” थोड़े रूखे स्वर मे बोली.
“नहीं मैडम, आप का तो मटकाभर मूत पी लूँ तो भी नहीं थकूँगा. जरा धीरे धीरे घूंट घूंट मूतिये मैडम प्लीज़. पहली बार यह अमृत चख रहा हूँ, जरा स्वाद तो लेने दीजिये.” मैंने विनती की. वे खुश होकर प्यार से बोली. “सॉरी वरुण, मैं इतने जोश में आ गयी थी कि मुझे खयाल ही नहीं रहा. लगी भी बहुत जोर की थी, चार पाँच घंटे हो गये ना. ले आराम से पी. अब रुक रुक कर मूतूँगी”
