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Update 46

केसा गया इम्तिहान?

जैसा हर बार जाता है..

मतलब इस बार भी पास हो जाएगा..

उसमे आपको कोई शक है?

नहीं.. मैं तो बस पूछ रही थी.. आखिरी इम्तिहान भी ख़त्म अब फ्री..

तो? अब आपको कोई औऱ काम है मुझसे?

अरे इतना क्यों बिगड़ता है ग़ुगु..

मैं कहा बिगड़ रहा हूँ माँ.. आप ही कब से कितने फालतू सवाल पूछ रही हो.. हटो मुझे नींद आ रही है..

ग़ुगु अभी तो दिन है औऱ दिन में ही तुझे सोना है?

रातभर जाग कर रिवीज़न कर रहा था.. सुबह एग्जाम देने चला गया अब सोना है.. आप तो आज मेरे पीछे ही पड़ गई माँ..

अच्छा ठीक है सो जा.. शाम को कहीं जाना है..

कहाँ जाना है शाम को?

मेरी एक सहेली है उसने invite किया है 25th एनिवर्सरी मना रही है आज अपनी शादी की..

आपकी कोनसी सहेली आ गई.. आज तक तो किसी से बात करते नहीं देखा आपको.. अब अचानक से ये कौन पैदा हो गई..

अरे है एक सहेली.. तू नहीं जानता.. कभी मेरी साथ मार्केट आता तो जानता.. मगर तू चलता ही नहीं.. कुल्लू दर्जी की दूकान के पास सलून है उसका.. मिसेस झांटवाली नाम है..

गौतम हसते हुए – क्या? झांटवाली ? ये केसा नाम है.. औऱ वो झांटवाली है तो आप क्या बिना झांटवाली हो? आपकी भी तो कितनी लम्बी लम्बी झांटे थी. पहली बार तो मेरी मुंह में ही आ गई थी..

सुमन – मज़ाक़ नहीं.. शाम को 7 बजे हम चल रहे है मतलब चल रहे है..

गौतम – ठीक है चल चलेंगे.. अब सोने दो औऱ शाम को उठा देना..

सुमन – अच्छा मेरी शहजादे..

ग़ुगु कब तक सोता रहेगा बेटा? देख साढ़े छः बज गए.. चल उठ जा.. कब से सो रहा है.. इम्तिहान ख़त्म हुए तो क्या सोता ही रहेगा?

उठ रहा हूँ यार माँ..

उठा जा.. बच्चा.. चल आँख खोल..

चाय बना दो ना एक कप..

कोई चाय वाई नहीं है ग़ुगु.. जल्दी से बाथरूम जा औऱ मुंह हाथ धोकर तैयार हो जा.. जाना है..

माँ छोडो ना.. कहा जाना है.. आप भी किसी ने एक बार बुलाया औऱ जाने को तैयार हो गई…

ग़ुगु एक बार नहीं कई बार बोला है कार्ड भी व्हाट्सप्प किया है.. बेटा अच्छा नहीं लगता ऐसे बार बार बुलाने पर ना जाए तो.. सलून जाती हूँ तो मुझसे पैसे भी कम लेती है.. अगर नहीं गई तो कहीं नाराज़ ना हो जाए..

गौतम उठकर बाथरूम जाते हुए – अच्छा ठीक है.. कपडे निकाल दो.. मैं नहा के आता हूँ..

सुमन – ठीक है.. निकालती हूँ..

गौतम बाथरूम से – आप भी जो करना है कर लो.. फिर मुझे तैयार करके खुद आईने के सामने बैठी रहोगी..

सुमन मुस्कुराते हुए कपडे निकालकर बेड पर रखती हुई – जैसा तेरा हुकुम.. मेरे दिल के चोर..

गौतम नहाने के बाद कपडे पहन के परफ्यूम लगाते हुए – आपके सात बज गए माँ.. मैं तो तैयार हूँ आप हुई या नहीं?

सुमन – बस थोड़ी देर.. होने ही वाली हूँ..

गौतम जूते पहनते हुए – कितना टाइम?

सुमन – बस 10 मिनट ग़ुगु..

15 मिनट बाद..

गौतम – माँ यार औऱ कितना टाइम?

सुमन – हो गया बेटा.. सिर्फ काजल लगा रही हूँ..

गौतम कमरे में आते हुए सुमन को देखकर – साडी भी नहीं पहनी आपने अभी तक?

सुमन – बस पहनने ही वाली हूँ ग़ुगु. तू तो जानता है औरत को तैयार होने में कितना टाइम लगता लगता है बेटा..

गौतम बेड पर बैठते हुए – क्यों हो रही हो इतना तैयार? सोना तो चुत में ऊँगली करके ही है.. फिर ये मेहनत किसलिए?

सुमन मुस्कुराते हुए – तू भी ना ग़ुगु… अब इतने बड़े फंक्शन में जा रहे है. थोड़ा तैयार तो होके ही जाना पड़ेगा.. तेरी तरह फट से तैयार तो नहीं हो सकती ना मैं.. मेकअप करने में टाइम तो लगता ही है ना..

गौतम – तो क्यों करना है मेकअप? मेकअप के बाद आपको देखकर मेरे दिल पर जो छुरिया चलती है उसका क्या? छोटा ग़ुगु तो बेचारा खड़ा का खड़ा ही रह जाता है.. पता नहीं कब उसे आपका खज़ाना मिलेगा..

सुमन हसते हुए आईने के सामने से उठकर साडी उठाकर पहनती हुई – छोटे ग़ुगु को समझाओ कि इस पार्किंग में ये गाडी पार्क नहीं हो सकती..

गौतम – समझें तब ना माँ.. कब से ज़िद पर अड़ा हुआ है.. गाडी तो इसी पार्किंग में लगेगी..

सुमन साडी पहनती हुई – तो अपने से दुगुनी उम्र कि जो तूने दोस्त मनाई है उनकी पार्किंग में गाडी पार्क कर दे..

गौतम – उनमे औऱ आपमें फर्क है माँ…

सुमन साडी पहनकर कुछ सोचती हुई – तो फिर एक ही रास्ता है तुझे दो में एक को चुनना होगा..

गौतम – किन दो में से?

सुमन – मैंने बहुत सोचा औऱ अब अपने मन को समझा लिया है गौतम.. मगर तुझे मेरी औऱ अपनी सभी रखैल में से एक को चुनना होगा.. या मुझे अपना बना ले या उन सब औरतों को जिसके साथ तूने सम्बन्ध बनाये है.. फैसला तेरा है.. मैं ये नहीं बर्दास्त कर सकती जो मेरा हो वो किसी औऱ का भी हो…

गौतम – माँ क्या कह रही हो? वो सब अकेली औऱ प्यार की भूखी है उन्हें मैं प्यार नहीं करूँगा तो कौन करेगा?

सुमन लिपस्टिक लगाते हुए – वो सब मुझसे क्यों पूछता है? मैंने थोड़ी कहा था इतनी सारी औरतों के साथ अपना ये चाँद सा गोरा मुंह काला कर.. अब चल.. पहुंचते हुए आठ बज जाएंगे…

गौतम सुमन के साथ घर से निकलता हुआ – अरे ये क्या बात हुई? समंदर देने के बदले मुझसे मेरी नादिया ही छीन रही हो आप तो..

सुमन दरवाजे पर ताला लगती हुई – सोच ले मेरे कच्चे बादाम.. तुझे जो चाहिए वो मिल जाएगा पर कीमत चुकानी पड़ेगी..

गौतम कार मैं बैठते हुए कार स्टार्ट करके चलाना शुरु करते हुए – कोई औऱ उपाय नहीं है क्या? ये तो बहुत दुविधा में डाल रही हो आप.. मेरे ऐसा करने पर कितनो का दिल टूटेगा पता है ना आपको?

सुमन खिड़की से बाहर देखते हुए – मुझे कुछ नहीं पता.. तुम सोच सकते हो आज रात तक का समय है तुम्हारे पास..

गौतम – इसमें सोचना क्या है.. आप मेरा फैसला जानती हो.. पर आप कैसे मुझसे ये करवा सकती हो माँ.. ऐसा करते हुए मुझे खुद बहुत बुरा फील होगा..

सुमन एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगाकर सुलगाती है औऱ एक कश लेकर कहती है – जब मेरी चुत में अपना लंड डालके मुझे चोदेगा तब तुझे केसा फीलिंग होगा?

गौतम मुस्कुराते हुए – अच्छा मंज़ूर है.. पर एक शर्त मेरी भी है..

सुमन सिगरेट के कश लेती हुई – क्या?

गौतम ठेके के आगे गाडी रोककर – बताता हूँ.. रुको..

गौतम ठेके पर जाकर एक 2 बियर के केन ले आता है औऱ वापस गाडी चलते हुए सुमन को एक बियर का केन खोलकर देते हुए कहता है – आपके अलावा मुझे दो औरत औऱ चाहिए..

सुमन सिगरेट के साथ बियर पीती हुई – नहीं..

गौतम अपनी केन खोलकर उसमे से बियर पीते हुए – इतना तो रहम करो माँ.. बच्चा हूँ आपका.. तरस खाओ मुझपर..

सुमन सिगरेट का कश लगाकर – ठीक है एक.. पर उससे भी कभी कभी वाला रिलेशन रखना पड़ेगा..

गौतम बियर पीते हुए कुछ देर सोचकर – ठीक है..

सुमन – तो बोलो.. कौन होगी वो? कोमल, आरती, रजनी, माधुरी, रूपा, शबाना या शबनम?

गौतम – इनमे से कोई नहीं..

सुमन हैरानी से – तो औऱ कौन है?

गौतम मुस्कुराते हुए – आपकी ननद.. औऱ मेरी बुआ..

सुमन हसते हुए – पिंकी?

गौतम शरमाते हुए – हम्म्म…

सुमन बियर का आखिरी घूंट पीकर केन खिड़की से बाहर फेंकते हुए – एक बार फिर सोच लेना ग़ुगु.. मैंने मज़ाक़ नहीं कर रही..

गौतम – मैंने भी मज़ाक़ नहीं कर रहा.. उन सब से कैसे दूर रहना है मैं अच्छे से जानता हूँ..

सुमन – यही वाला गार्डन है शायद.. नाम पढ़ो जरा..

गौतम पार्किंग में गाडी लगाता हुआ – यही है माँ..

गौतम – चलो.. अंदर चलते है..

सुमन – रुको..

गौतम – क्या हुआ?

सुमन – ग़ुगु अब जब सब होने वाला है तो कुछ बातें साफ साफ कर लेना चाहती हूँ..

गौतम – कोनसी बात माँ..

सुमन – है कुछ बात ग़ुगु.. पहली तो ये की तू मुझे माँ सिर्फ लोगों के सामने कहेगा.. अकेले में सुमन कहकर ही बुलायेगा..

गौतम सुमन की जांघ पर हाथ रखकर सहलाते हुए – जैसा आप कहो सुमन…

सुमन गौतम के हाथ पर अपना हाथ रखकर -औऱ दूसरी की तू मुझे आप नहीं.. तुम या तू ही कहकर बात करेगा..

गौतम हाथ जांघ से चुत पर लेजाकर – जैसा तू कहेगी वैसा ही करूँगा सुमन.. औऱ कुछ..

सुमन – हाँ.. तेरा जब भी कुछ गन्दा कहने का मन हो या गाली देने का मन हो तू दे देगा.. खुदको रोकेगा नहीं..

गौतम – पर मैं गाली नहीं देता..

सुमन – मैंने सब जानती हूँ तू कितनी गाली देता है कैसे गाली देता है..

गौतम – पर सुमन…

सुमन – गौतम अगर तुझे मंज़ूर है तो बोल.. वरना कोई बात नहीं..

गौतम – अच्छा ठीक है.. यार.. औऱ कुछ?

सुमन शरमाते हुए – बिस्तर में बताउंगी..

गौतम मुस्कुराते हुए – तो वापस घर चले?

सुमन हसते हुए – पहले अंदर चलकर मिसेस झांटवाली से मिल तो ले औऱ खाना खा ले.. 

गौतम गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए – ठीक है. जब इतना सब्र किया है तो कुछ देर औऱ सही..

सुमन भी गाडी से उतरती है गौतम के साथ अंदर आ जाती है..

गौतम चकाचोध देखकर – काफी मालदार पार्टी लगती है..

सुमन – हाँ.. झांटवाली बता रही उसके हस्बैंड का ट्रांसपोर्ट का बीजनेस..

गौतम – अच्छा है.. मैं तो खाना खाऊंगा.. तुम मिल लो जिससे मिलना है…

सुमन – साथ में खाएंगे ग़ुगु.. अभी चल मेरे साथ..

गौतम – यार सुमन..

सुमन – ज्यादा नखरे मत कर.. चल..

गौतम – ठीक है चलो..

गौतम औऱ सुमन झांटवाली से मिलके वापस आ जाते है औऱ खाना खाने लगते है..

गौतम – मेरा तो हो गया.. आप खाओ मैं बाथरूम जाके आता हूँ..

सुमन – ठीक है..

गौतम बाथरूम में जाता है औऱ मूतने लगता है कि उसके फ़ोन पर जगमोहन का फ़ोन आता है..

गौतम – हेलो..

जगमोहन – कहाँ हो बेटा? घर ताला क्यों लगा है.. औऱ सुमन फ़ोन क्यों नहीं उठा रही है?

गौतम – माँ अपनी किसी सहेली के एनिवर्सरी फंक्शन में लेकर आई थी.. औऱ नाराज़ है आप से इसलिए फ़ोन भी नहीं उठा रही होगी..

जगमोहन – बात करवा अपनी मम्मी से..

गौतम वापस जाते हुए – रुको करवाता हूँ..

गौतम – लो बात करो..

सुमन – कौन है?

गौतम – पापा..

सुमन गुस्से से – बोलो.. क्या बात है?

जगमोहन – सुमन.. मेरी बात सुनो.. कल सुबह गाँव से माँ के साथ बृजमोहन और मानसी आने वाले है..

सुमन – तो? मैं क्या करू? औऱ इतने साल बाद तुम्हारे घरवालों को अचानक कैसे याद आ गई? अब क्या चाहिए उनको? जमीन औऱ घर को तो हड़प कर ही गए अब क्या हड़प करना चाहते है?

जगमोहन – सुमन.. फालतू बात मत करो.. बटवारे में पापा की नोकरी के बदले मैंने ही भईया को वो सब रखने को कहा था.. औऱ गौतम को सुबह घर पर ही रखना.. मैं सुबह जल्दी घर आ जाऊंगा..

सुमन – नहीं रहेगा वो घर पर..औऱ तुम अपने घरवालों से कहदो आने की कोई जरुरत नहीं है.. अब 18 साल बाद क्या लेने आ रहे है वो?

जगमोहन – अरे तुमसे तो बात करना बेकार है.. कोई बात नहीं समझती..

सुमन – मैं नहीं समझती तो अपनी उन रखैलो को समझा दो.. पहले तो एक ही थी अब तो दो-दो हो गई.. वो दोनों तुम्हारी बात अच्छे से समझ जायेगी..

जगमोहन – देख सुमन तेरी बातों के करण मैं घर दूर हूँ.. ऐसा करेंगी तो जिंदगी से भी दूर चला जाऊँगा..

सुमन – कल के जाते आज जाओ मेरी बला से.. मुझे क्या सुनाते हो..

जगमोहन – मुझे कुछ औऱ बात नहीं करनी.. कल वो लोग आ रहे है.. तू माँ औऱ बृजमोहन मानसी से कोई कड़वी बात नहीं करेगी.. (फ़ोन काटते हुए)

गौतम सुमन से – कौन आ रहा है? औऱ इतना क्यों गुस्से में हो?

सुमन – तेरी दादी औऱ चाचा चाची आ रहे है..

गौतम हैरानी से – पर पापा का कोई रिश्तेदार नहीं है.. आपने ही तो बताया था.. अब अचानक से ये लोग कहा से पैदा हो गए?

सुमन – पुरानी बात है ग़ुगु.. छोड़..

गौतम – बताओ ना.. क्या मुंह में दही जमा के बैठी हो तुम भी..

सुमन उठकर – चल घर चलते है…

गौतम साथ में चलते हुए – बात क्या है कुछ बताओगी?

सुमन पार्किंग जाते हुए – घर चल बताती हूँ..

गौतम कार में बैठकर – नहीं यही बताओ.. क्या बात है औऱ मुंह क्यों लटक गया तुम्हारा?

सुमन सिगरेट सुलगा कर कश लेती हुई – गौतम.. 18 साथ पहले तक तेरे पापा औऱ मैं गांव में तेरे पापा के परिवार के साथ रहते थे.. तेरे दादा दादी औऱ चाचा ब्रजमोहन चाची मानसी भी साथ रहते थे..

गौतम – कहा? कोनसा गाँव?

सुमन – सलामपुर.. यहां से 3 घंटे का रास्ता है..

गौतम – फिर क्या हुआ?

सुमन – एक दिन तेरे दादा मंगुलाल की मौत हो गई.. उसके बाद जमीन औऱ घर के बटवारे को लेकर तेरे चाचा चाची औऱ हमारे बीच मनमुटाव होने लगा.. तेरे पापा ने तेरे दादा की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर तेरे चाचा को दे दिया.. औऱ हम गाँव से यहां आ गए.. तेरे पापा ने एक छोटी सी हवलदार की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर दे दिया.. तेरे चाचा ब्रजमोहन ने अपने नशे की लत औऱ ऐश पूरा करने के लिए जमीन साहूकार को बेच दी..

गौतम – फिर क्या हुआ माँ?

सुमन सिगरेट का कश खींचती हुई धुआँ छोड़कर – होना क्या था ग़ुगु.. 18 साल हो गए मैंने आज तक पलटकर वापस उस गाँव में कदम नहीं रखा ना ही जगमोहन और पिंकी से तुझे इस बारे में बात करने औऱ बताने को कहा.. मैं तुझे सबसे दूर रखना चाहती थी.. मगर अब ना जाने क्यों वो लोग यहां आ रहे है..

गौतम सुमन के चेहरे से जुल्फ हटाते हुए – अरे इतनी सी बात.. तुम चिंता मत करो.. आ रहे है तो आने दो आकर चले जाएंगे.. तुम नहीं चाहती तो मैं उनसे नहीं मिलूंगा..

सुमन मुस्कुराते हुए सिगरेट का अगला कश लेकर – तू कितना अच्छा है ग़ुगु..

गौतम भी मुस्कुराते हुए – तू भी तो बहुत प्यारी है सुमन..

सुमन सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट फेंक देती है औऱ गौतम के लबों पर अपने लब रखकर गौतम के होंठ चूमते हुए कहते है – अब घर ले चल अपनी माँ को..

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गौतम सुमन को खींचकर अपनी गोद में बैठा लेता है औऱ गाडी स्टार्ट करके चलाते हुए – हमारी पहली चुदाई होने वाली है सुमन आज.. कुछ चाहिए तुझे बदले में?

सुमन गौतम को देखकर – तेरा लंड तो मैं ले ही लुंगी.. बाकी जो तुझे देना हो दे देना. तेरा फ़ोन आ रहा है ग़ुगु..

गौतम फ़ोन देखकर – रहने दो बाद मैं बात कर लूंगा. 

सुमन – फ़ोन किसका है?

गौतम – अरे कोई स्टेज डायरेक्ट है.. पीछे पड़ा हुआ है कब से.. 

सुमन – क्या कह रहा है?

गौतम – अरे एक कंडोम कंपनी के प्रमोशन के लिए एक स्टेज नाटक कर रहा है दिल्ली में.. औऱ मुझे लीड एक्टर लेना चाहता है..

सुमन – तो क्या परेशानी है ग़ुगु.. कर ले.. पैसे भी दे रहे होंगे वो..

गौतम – पैसे तो दे रहा है मगर नाटक में सेक्स है भी करना पड़ेगा हीरोइन के साथ.. औऱ ये कोई आम नटाक नहीं है माँ.. सीक्रेट नाटक है 200 लोगों के सामने करना होगा.. इसके बारे में किसीको पता नहीं है.. सब लोग अँधेरे में शो में आते है नाटक देखकर निकल जाते है..

सुमन – अच्छा.. ऐसा क्या सीक्रेट नाटक है?

गौतम – वही.. Incest है.. एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स करता है शो में.. औऱ इस कंपनी का कंडोम लगाता है जिससे दोनों HIV से बच जाते है..

सुमन – ये सब होता है? कैसे कैसे नाटक बनने लगे है.. वैसे पैसे कितने मिल रहे है..

गौतम – एक शो के 2 लाख देने को कह रहा था..

सुमन – अच्छा.. इतने देने को कह रहे है?

गौतम – हाँ.. हीरोइन को तो 5 लाख मिलते है.. शो के बाद डायरेक्ट प्रोडूसर से चुदवाना भी पड़ता है उसको.. पर छोडो.. हमें क्या.. कोनसी हमें पैसो की कमी है..

सुमन गौतम को देखती हुई – अच्छा… बहुत पैसे है तेरे पास?

गौतम – हम्म.. सब बुआ की मेहरबानी है.. बाइक फिर कार… बिना मांगे सब दे देती है.. बहुत प्यारी है..

सुमन जलन से – मैं प्यारी नहीं हूँ?

गौतम घर के आगे गाडी लगाते हुए – ये जानने के लिए तो बिस्तर में चलना पड़ेगा माँ..

सुमन मुस्कुराते हुए – मैंने तो हामी भर दी है मेरी दिल के टुकड़े… अब तू अपनी माँ को घर के बिस्तर में लेटाकर चोद या सडक के किनारे फुटपाथ पर.. मैं मना नहीं करने वाली…

गौतम सुमन को उठाकर घर के अंदर लता है औऱ बेड पर लेटा कर उसकी साडी उठाकर चुत चाटता हुआ चुत गीली करके अपना लंड को चुत पर टिका देता है मगर सुमन एक कंडोम गौतम के लंड पर पहना देती है औऱ अब घुसाने को कहती है. 

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गौतम – माँ यार अब क्या कंडोम का नाटक कर रही हो तुम? मैं कल प्रेगनेंसी रोकने की गोली लाकर दे दूंगा..

सुमन लंड पकड़कर अपनी चुत पर रगडती हुई – जब ले आओ तब कर लेना.. अभी तो ऐसे ही करना पड़ेगा..

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गौतम सुमन के ऊपर आकर – जैसा तू बोले मेरी मेरी लोडे की ठंडक.. चल घुसा भी ले.. कब तक बस रगढ़ती रहेगी?

सुमन लंड को चुत के छेद पर टिका कर घुसाती हुई – आहहहहह… ग़ुगु कितना बड़ा है तेरा जा ही नहीं रहा अंदर… अह्ह्ह्ह…

गौतम दबाव डालकर लंड का टोपा घुसा देता है औऱ सुमन सिसकियाँ लेने लगती है दर्द से मचल उठती है..

गौतम – अभी तो सिर्फ टोपा गया है औऱ तू तड़पने लगी? चुदाई में क्या होगा?

सुमन सिसकते हुए -अह्ह्ह्ह.. ग़ुगु पता नहीं कैसे सिकुड़कर इतनी टाइट हो गई मेरी चुत? बहुत दर्द हो रहा है बेटा…

गौतम थोड़ा दबाब डालकर लंड अंदर डालने लगता है औऱ कहता है – माँ पूरी टाँगे फैला लो.. दर्द कम होगा..

सुमन टाँगे पूरी चौड़ी करके – बेटा धीरे धीरे घुसाना..

गौतम थूक लगा कर दबाब डालने ही लगता है की घर का दरवाजा बज जाता है…

गौतम गुस्से में – इस वक़्त कौन आ गया मादरचोद?

सुमन चुत पर से गौतम का लंड हटाकर साडी नीचे करके – देख तो ज़रा कौन है?

गौतम लंड पर से कंडोम उतारकर सुमन के ब्लाउज में डालता घुसा देता है औऱ लंड जीन्स में डालकर गेट खोलने जाता है…

आप?

क्या हुआ ग़ुगु?

कुछ नहीं..

आज आखिरी एग्जाम था ना..

हाँ..

ठीक गया?

हाँ पास हो जाऊँगा..

सुमन कहा है?

कमरे में है सो रही है..

ठीक है तू भी जाके सो जा..

सुमन बाहर आते हुए – यहां क्या लेने आये हो? रखैलो ने निकाल दिया किया?

जगमोहन – सुमन.. वापस ड्रामा शुरु करने की जरुरत नहीं है.. कमरे में चलो बैठके बात करते है..

सुमन – कमरे क्यों यही बात करो..

जगमोहन – गौतम सुन रहा है सुमन..

सुमन – तो सुनने दो.. उससे क्या छिपा है? तुम्हारी सारी करतूते तो वो पहले से ही जानता है..

जगमोहन सुमन का हाथ पकड़कर कमरे में ले जाता है औऱ गौतम अपने कमरे के बाथरूम में घुस जाता है औऱ अपने बाप जगमोहन को गाली देते हुए अपनी माँ सुमन की टाइट चुत को याद करके लंड हिलाने लगता है..

गौतम मन में – इस बहन के लोडे को भी अभी आना था.. सुबह नहीं आ सकता था साला.. इतने दिनों से फ़ोन तक नहीं किया औऱ अब अचानक आ धमका.. आज तो माँ चुदने ही वाली थी.. लंड का टोपा घुसते ही मचलने लगी.. जब लंड अंदर जाएगा तो क्या हालत होगी माँ की.. उफ्फ्फ बहनचोद.. सोचकर ही दिमाग खराब हो रहा है.. जिस चुत से पैदा होके निकला हूँ उसी चुत को चोद चोदकर मैंने अपनी माँ को नहीं रुला दिया तो लानत है मेरे मर्द होने पर.. उफ्फ्फ यार.. घोड़ी बनके चुदेगी तो कितना मज़ा देगी मेरी माँ.. कितनी कसी हुई चिकनी कमर है माँ की औऱ गांड तो जैसे मीसर के पिरामिड है.. बिलकुल परफेक्ट.. गोद में उठाके लंड के ऐसे ऐसे झटके मारूंगा ना कि माँ खुद बोलेगी.. बेटा धीरे.. आह्ह.. बेटा धीरे.. इतना माल भरूंगा माँ की चुत में कि पहली बार में ही बच्चा लग जाएगा.. अह्ह्ह..

गौतम ये सब सोचते हुए सुमन कि एक तस्वीर अपने फ़ोन में देखकर अपना लंड हिला रहा था उधर सुमन जगमोहन से झगड़ रही थी..

सुमन – अरे खड़ा होता नहीं तो क्यों शादी पर शादी किये जा रहे हो तुम? औऱ मेरी सहेली ही मिली थी शादी के लिए?

जगमोहन – अब कैसे समझाऊ तुझे? मैं फंसा हुआ था.. मेरी पास औऱ कोई चारा नहीं था.. अगर शादी नहीं करता तो हाथ से ये घर औऱ नोकरी दोनों चली जाती..

सुमन – जाती तो चली जाती.. कोनसा मेरी औऱ मेरे ग़ुगु के काम ही आ रही थी.. घर तो तुमने अपनी रखैलो के लिए बनाया था ना..पता क्या दिल बदला दोनों का और मुझे ये घर इतनी आसानी दे कर चली गई दोनों.. 

जगमोहन – सुमन रूपा ने मुझे पर दबाव बनाया था शादी का मैं नहीं करना चाहता था.. औऱ अगर किसी को पता चला कि मैंने तेरे अलावा माधुरी औऱ रूपा से शादी कर रखी है तो नोकरी गई समझो..

सुमन – वो सब तुम जानो.. मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है.. तुमसे अच्छी तो तुम्हारी वो बहन पिंकी है.. उसे मैंने कितना भला बुरा कहा.. उसके लिए कितना ज़हर दिल में रखा लेकिन वो जितना मेरी ग़ुगु के लिए करती है उतना तो तुमने अब तक नहीं किया होगा..

जगमोहन – मैं तुमसे लड़ने झगड़ने नहीं आया सुमन..

सुमन – तो क्या अपने मरियल लंड की प्रदर्शनी लगाने आये हो मेरे सामने?

जगमोहन – सुमन…. ये मत भूलो मैं अब भी तुम्हारा पति हूँ औऱ गौतम का बाप..

सुमन – सिर्फ नाम के लिए.. औऱ अब 18 साल बाद क्यों आ रहे है वो लोग? एक छोटी सी नोकरी के बदले इतनी सारी जमीन हड़प कर ली घर भी रख लिया.. अब क्या चाहिए उन लोगों को हमसे?

जगमोहन – पुरानी बातों को छोडो सुमन.. कल जब मम्मी के साथ बृजमोहन आएगा तब पता चल ही जाएगा.. गौतम भी पहली बार अपनी दादी औऱ चाचा चाची से मिल लेगा..

सुमन – कोई जरुरत नहीं है गौतम को उनसे मिलने की.. मेरा बेटा किसीसे नहीं मिलेगा.. समझें तुम..

जगमोहन – वो मेरा भी बेटा है.. तेरे कहने पर मैंने उसे कुछ नहीं बताया.. मगर अब उसे एक बार तो अपने गाँव जाकर सबसे मिलना चाहिए..

सुमन – तुम्हे जाना है चले जाओ.. मैं गौतम को नहीं भेजूंगी.. ना खुद वहा जाउंगी..

जगमोहन – सुमन अब अगर तुम चुप नहीं हुई तो मेरा हाथ उठ जाएगा..

सुमन – हाथ तो नामर्द का भी उठ जाता है.. मर्द हो तो लंड उठा के बताओ.. तब जो कहोगे वो मानुँगी…

जगमोहन बेड पर बैठकर – मुझसे औऱ बहस नहीं होगी.. नींद आ रही है आज यही सोऊंगा..

सुमन लाइट बंद करके तकिया खींचकर बेड पर लेटते हुए – सोने के अलावा कर भी क्या सकते हो..

जगमोहन आगे कुछ नहीं कहता औऱ सो जाता है.. सुमन अपने ब्लाउज में से गौतम का पहना हुआ कंडोम निकालकर अपनर मुंह में डाल लेटी है औऱ चविंगम की तरह चबाने औऱ उसका स्वाद लेने लगती है वही गौतम अब अपनी माँ के नाम पर मुट्ठी मारके बाथरूम से बाहर आ चूका था औऱ अपने धागे को देखकर अब बारी बारी उसने बड़े बाबाजी के बताये अनुसार गायत्री, कोमल, शबनम, पूनम, सलमा, शबाना, रेशमा, आदिल, नरगिस, रज़िया, सिमरन, मनोज के मन से अपनी मनोरम औऱ मधुर मिलन की यादे और बाकी सारी बातें मिटा दी.. औऱ दुखी मन से सबकी तस्वीर देखते हुए अब अपनी माँ सुमन के साथ ही रहने का फैसला करते हुए बेड पर लेट गया.. उसने रूपा और माधुरी को भी छुपके मिलने का फैसला किया.. ऋतू और आरती से भी अपना रिश्ता परदे के पीछे वाला ही रखने का निर्णय लिया.. 

गौतम का मन दुखी था उसने पिंकी के अलावा लगभग सबके मन से अपनी यादे मिटा दी थी.. 

उसकी आँखों में नींद नहीं थी औऱ वो सोच रहा था की क्यों सुमन औऱ जगमोहन ने कभी उसे गाँव औऱ बाकी चीज़ो के बारे में नहीं बताया..

गौतम उदासी से पिंकी को फ़ोन कर दिया..

कैसी हो बुआ?

मैं अच्छी हूँ.. तेरा फ़ोन आने औऱ भी ज्यादा अच्छी हो गई बाबू.. आज अचानक इतनी रात को फ़ोन किया है जरुर कुछ बात होगी? कुछ चाहिए? एटीएम कार्ड में पैसे ख़त्म हो गए क्या? मैं अभी डालती हूँ..

अरे नहीं बुआ.. मैंने तो अभी तक एटीएम इस्तेमाल भी नहीं किया है.. औऱ उसमे इतना सारा पैसा है की मेरे इस्तेमाल करने से ख़त्म भी नहीं होगा…

पिंकी – तो ग़ुगु.. फिर क्या बात है? औऱ तेरी आवाज इतनी रूखी क्यों है? तू उदास है?

गौतम – नहीं बुआ.. मैं ठीक हूँ..

पिंकी – सच सच बता बाबू.. मैं अभी तेरे पास आ जाउंगी.. मेरे ग़ुगु को कोई परेशानी है?

गौतम – ऐसा कुछ नहीं है बुआ.. बस आपसे बात करने का मन हो रह था.. इसलिए फ़ोन कर लिया..

पिंकी छेड़ते हुए – अच्छा? गन्दी बातें करनी है मेरी साथ? चुत लंड वाली? मुझे याद करके हिला तो नहीं रहा तू.. वीडियो कॉल कर मुझे दिखा जरा.. मेरा ग़ुगु कैसे नाम की मुट्ठी मार रहा है..

गौतम – बुआ यार.. क्या कुछ भी बोल रही हो आप? मैंने बस नोर्मल्ली बात करने के लिए फ़ोन किया था.. रहने दो..

पिंकी – अच्छा सॉरी बाबू.. बोल.. खाना खाया?

गौतम – हाँ.. आपने खा लिया?

पिंकी – मैंने भी खा लिया बाबू.. बार बार उल्टी हो रही पाता नहीं क्या हुआ है मुझे सुबह डॉक्टर के जाउंगी… अभी बस सोने की तैयारी में थी.. तू पास होता तो लिपटकर सोती..

गौतम – आप पास होती तो मैं सोने कहाँ देता बुआ आपको? रातभर जगा के रखता.. औऱ बहुत तंग करता.. वैसे उल्टी क्यों हो रही है? कुछ गलत तो नहीं खा लिया? 

पिंकी – नहीं कुछ गलत नहीं खाया.. और ऐसे तंग होने के लिए तो मैं कब से मरी जा रही हूँ.. तू जीतना तंग करेगा मैं उतना प्यार करूंगी..

गौतम – बुआ कुछ बात करती थी आपसे..

पिंकी – बोल ना बाबू.. क्या बात है?

गौतम – गाँव के बारे में.. कल गाँव से दादी औऱ चाचा चाची आने वाले है..

पिंकी – तुझे किसने बताया..

गौतम – पापा ने.. मगर आज तक उनके बारे में मुझे किसी ने नहीं बताया.. ना आपने ना माँ ने.. ना पापा ने..

पिंकी – बाबू तेरी माँ ने मना किया था सबको.. औऱ वैसे भी क्या फर्क पड़ता है.. गाँव में अब बचा भी क्या है? जितना कुछ था वो तो ब्रजमोहन भईया ने अपने शोक पुरे करने में गवा दिया.. मानसी भाभी ने भी उन्हें नहीं रोका… ले दे के अब एक घर औऱ एक छोटा सा खेत बचा है.. तू सोचना छोड़ दे ग़ुगु उस बारे में..

गौतम – बुआ कुछ बताओ ना स्वभाव केसा है सबका?

पिंकी – मुझे भी कितने साल हो गए बाबू गाँव छोड़े हुए.. मैं क्या बताऊ.. इतने सालो में कुछ बदल गया हो तो..

गौतम – हम्म्म..

पिंकी – तू कल मिलके खुद ही जान लेना..

गौतम – माँ मिलने कहाँ देगी? वो तो कह रही है सुबह जल्दी घर से कहीं चले जाता ताकि वो लोग मुझसे मिल ना पाए.. माँ बहुत नाराज़ लगती है..

पिंकी – नाराज़ तो होगी ही ना.. उनका हक़ जो छीन लिया था औऱ तेरे पापा ने भाईचारा निभाते हुए सारा कुछ दे भी दिया..

गौतम – मुझे गाँव जाने की इच्छा हो रही है बुआ.. आप भी आओगी ना..

पिंकी – नहीं ग़ुगु.. वहा मेरा क्या काम.. मैं तो पहले ही बदनाम हूँ.. वहा ना जाने कैसी कैसी बातें होती है मेरे बारे में..

गौतम – बुआ…

पिंकी – क्या बाबू..

गौतम – गीली वाली चुम्मी चाहिए..

पिंकी हसते हुए – उम्म्महा.. ले खुश? इस बार आना बहुत सारी चुम्मी करूंगी मेरे बाबू को..

गौतम – जल्दी आऊंगा बुआ.. आप तो अब आदत बन चुकी हो..

पिंकी – अच्छा अब सोना है या रातभर बातें ही करनी है.. नींद भी जरुरत है ना बाबू..

गौतम – ठीक है बुआ सोता हूँ.. गुडनाइट..

पिंकी – गुडनाइट बाबू.. बुआ loves you…

गौतम – i love you too बुआ..

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