Update 31
सुबह 10:00 बजे नींद के आगोश में सोए गौतम की नींद दिन के 2:00 खुली.. गौतम ने जो सपना देखा था उसके बारे में काफी देर तक वो सोचता रहा कि कैसे उसे ऐसे अपने आ रहे है.. लेकिन फिर अपना ध्यान सपने से हक़ीक़त में लाता हुआ बेड से खड़ा हो गया… गौतम ने होटल में देखा तो लगभग सब घर जा चुके थे.. होटल में सिर्फ कुछ मेहमान लोग ही बचे थे. गौतम ने सुमन को फोन किया तो सुमन ने उसे घर आने के लिए कहा.. गौतम का सारा सामान सुमन अपने साथ घर ले जा चुकी थी बस एक शराब की बोतल यही पड़ी थी अभी तक.. और नींद में होने के कारण सुमन ने गौतम को जगाना जरूर नहीं समझा क्योंकि सुमन जानती थी कि गौतम रात भर का जगा हुआ है. सुमन से बात करके गौतम ने फोन रख दिया और फिर अपना मुंह धो कर होटल से घर के लिए निकल गया उसने देखा की यहां आज भी किसी ना किसी की शादी तैयारी चल रही थी..
गौतम जब घर पहुंचा तो उसने देखा कि ऋतु के विदाई की तैयारी चल रही है और घर पर कुछ खास मेहमानों के अलावा घर के लोग ही थे. गौतम अपने कमरे में जाकर नहाने लगा. जब गौतम बाथरूम से नहा कर निकाला तो उसके सामने चाय का कप हाथ में लिए गायत्री खड़ी थी गायत्री ने चाय का कप टेबल पर रखा और फिर गौतम के गाल को सलाहकार उसपर एक प्यारा सा चुंबन करती हुई बोली..
गायत्री – गूगु चाय पी ले और जल्दी से तैयार होकर नीचे आ जा.. तेरी दीदी की विदाई होने वाली है..
गौतम ने गायत्री की कमर में हाथ डालकर उसे अपने बिल्कुल करीब खींचते हुए गले से लगा लिया और दीवार से चिपक कर उसके होठों के बिल्कुल करीब अपने होंठ लाकर गायत्री से बेहद कामुक अंदाज में बोला..
गौतम – विदाई तो होती रहेगी नानी थोड़ी सी चुदाई करें?
गायत्री गौतम के होठों से अपने होंठ सटाती हुई बोली – अभी नहीं बेटा.. पिछली बार का दर्द अब तक बाकी है जब ठीक हो जाएगा तब कर लेना..

गौतम ने कुछ पल गायत्री के होठों का चुम्मा ही था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी और वह गायत्री से दूर हटकर टेबल पर रखे चाय के कप को उठाकर चुस्कियां लेते हुए चाय पीने लगा और दरवाजे के बाहर से अंदर आते हुए उसे संजय दिखा जिसने आते ही गायत्री से कहा..
संजय गायत्री से – माँ चलो ना ऋतू को विदा करना है..
गायत्री – चल संजय मैं तो ग़ुगु को चाय देने आ गई थी..
संजय – ग़ुगु तू जल्दी नीचे आजा बेटा..
गौतम – ज़ी मामा ज़ी.. नहाने लग गया था मैं बस तैयार होकर आता हूँ..
गायत्री संजय के साथ नीचे चली गई थी और गौतम अपने कपड़े पहनने लगा था.. गौतम तैयार होकर जैसे ही नीचे आया उसने देखा कि हॉल में बहुत सारे लोग एकत्रित हो रखे थे और बीच में ऋतु में बैठे हुए थी राहुल के साथ. दोनों से मेहमान हंसी स्टोरी कर रहे थे और अपनी अपनी बातें एक दूसरे को बता रहे थे जब विदाई की बारी आई तो ऋतु के आंसू निकलने लगे और वह रोती हुई संजय औऱ गायत्री से लिपट गई..


ऋतू तो फूट के रोने लगी और एक-एक करके सबसे मिलने लगी उसने सबसे पहले अपने पिता संजय फिर गायत्री फिर कोमल सुमन चेतन आरती और फिर ग़ुगु के गले लगते हुए रोना जारी रखा.
गौतम के गले लगकर रितु बहुत जोर से फूट-फूट कर रोने लगी जिस पर गौतम ने धीमी आवाज में ऋतु के कान में कहा.. दीदी इतना ड्रामा मत करो.. मैं जानता हूं आपको घंटा रोना नहीं आ रहा..
गौतम की बात सुनकर रितु रोना कम कर देती है मगर रोना बंद नहीं करती.. ऋतू आम लड़कियों की तरह ऐसा जता रही थी जैसे वह घर से विदा नहीं होना चाहती और हमेशा यही रहना चाहती है मगर गौतम को ऋतू की ये नाटक और ड्रामेबाजी अच्छे से समझ आ रही थी. सबके बार-बार समझाने पर भी रितु रोने का नाटक करने के राहुल के साथ विदा होने से इनकार कर कर रही थी और जाने से मना कर रही थी..

घर के दरवाजे पर गाड़ी तैयार थी मगर ऋतू उसमे बैठने को तैयार नहीं थी उसने अब तक घर के हाल से कदम आगे नहीं बढ़ाया था और सब उसे बारी बारी से समझा कर थक चुके थे की बेटी लड़की को ससुराल जाना पड़ता है लड़की पराया धन होती है. जब ऋतू किसी के समझाने से नहीं समझी और अपना रोने धोने का नाटक जारी रखते हुए हाल में ही बैठ गई तो गौतम में रितु को अपनी गोद में उठा लिया और हाल से उठकर बाहर लाते हुए गाड़ी में बैठा दिया..
गौतम इमोशनल ड्रामा करते हुए ऋतू के बगल में बैठे हुए राहुल से कहा – जीजा जी ख्याल रखना मेरी बहन का.. फूलों की तरह कोमल नाजुक प्यारी है.. बहुत संस्कारी सुशील औऱ पवित्र भी.. कभी दिल मत तोडना मेरी बहन का..
राहुल – आप फ़िक्र मत कीजिये.. मैं ऋतू को खुश रखूँगा..

गौतम इतना कहकर गाड़ी से दूर हो गया और फिर बारी-बारी से घर के लोग ऋतू से मिलने लगे और उसे समझने लगे की ससुराल में उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. इतना सब हो ही रहा था कि गौतम घर के गेट पर खड़ा हो गया.. औऱ अपने फ़ोन में पिंकी का कॉल आते देखकर ऊपर छत पर चला गया और पिंकी का कॉल उठाकर बोला..
गौतम – हेलो बुआ?
पिंकी – केसा है मेरा ग़ुगु?
गौतम – आपके बिना केसा हो सकता हूँ बुआ? कल कितने फ़ोन किये आपको.. पर आप फ़ोन बंद करके बैठी थी.. उस दिन कहा था ना शादी में आना है.. आपके बिना बोरिंग थी सादी..
पिंकी – सॉरी ग़ुगु.. वो फ्लाइट इतनी डिल्य हो गई की आना हो ही नहीं पाया.. फ़ोन भी चार्ज नहीं किया था मैंने.. अभी अभी घर पहुंची हूँ..
गौतम – कहाँ गई थी आप?
पिंकी – तेरे फूफा ज़ी के साथ लन्दन गई थी ग़ुगु.. तेरे लिए बहुत से गिफ्ट लाई हूँ.. अभी यही है ना?
गौतम – हाँ.. दीदी की विदाई का नाटक चल रहा है..
पिंकी हसते हुए – अच्छा वो सब छोड़ जल्दी मेरे पास आजा..
गौतम – एड्रेस पहले वाला ही है ना?
पिंकी – नहीं बाबू अब वहा नहीं रहते.. मैं तुझे व्हाट्सप्प करती हूँ अड्रेस.. तू जल्दी से आजा अपनी बुआ के पास.. मुझे तेरे प्यारे से होंठ चूमने है..
गौतम – आता हूँ बुआ..
पिंकी – बाय बाबू..
गौतम – बाय बुआ..
ऋतू की विदाई हो चुकी थी औऱ गौतम अपने कमरे में जूते पहन रहा था तभी सुमन अंदर आते हुए बोली – खाना खा ले ग़ुगु..
गौतम – होटल में खा लिया था माँ.. अब रात को ही खाऊंगा..
सुमन – कहीं जा रहा है..
गौतम – हाँ.. उस दिन आपने बुला लिया तो शहर अच्छे से घूम नहीं पाया था.. कल तो वैसे भी वापस घर चले जाएंगे तो आज बाकी का शहर घूम लेता हूँ..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के सर को चूमकर – वापस आने में ज्यादा देर मत करना..
गौतम – I’ll be back soon माँ..
सुमन – हम्म्म.. क्या ग़ुगु?
गौतम सुमन के गाल पर चूमा देकर – मैंने कहा मैं जल्दी आ जाऊंगा..
सुमन मुस्कुराते हुए – हाँ तो ऐसे बोल ना.. अंग्रेजी में क्या गिटर पीटर करता मेरी तो कुछ समझ नहीं आता..
गौतम – आपने ही बड़े स्कूल में डलवाया था याद है?
सुमन – हा हा तो क्या अपनी अंग्रेजी अपनी अनपढ़ माँ पर झाड़ेगा?
गौतम सुमन का हाथ पकड़ते हुए – अनपढ़ कैसे हुई आप.. पढ़ना लिखना तो अच्छे से आता है आपको.. टीवी देखकर सारे इंग्लिश के वर्ड भी सिख गई हो.. औऱ घर का सब काम भी कितनी अच्छे से करती हो.. आप तो भारतीय संस्कारी नारी का परफेक्ट एक्साम्प्ल हो..
सुमन गौतम के होंठों को उंगलियों से पकड़कर – अब इतनी भी तारीफ़ मत कर अपनी माँ की..
गौतम सुमन ऊँगलीयों को चुमकर – काश मैं आपकी तारीफ़ कर सकता माँ.. आपकी तारीफ़ के लायक़ शब्द हो नहीं बने दुनिया में..
सुमन हसते हुए – हट बदमाश.. चल अब जा.. मुझे भी बहुत काम है अभी..
गौतम प्यार से बच्चों जैसा फेस बनाकर – किस्सी तो दे दो माँ..
सुमन मुस्कुराती हुई गौतम के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसके होंठों से अपने होंठ मिलकर एक छोटा सा चुम्मा करती हुई गौतम से बोली – खुश? चल अब जाने दे..
सुमन चली जाती है औऱ गौतम भी घर से निकल जाता है..

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अरे अरे कहा घुसे चले आ रहे हो भाई? क्या काम है, किससे मिलना है?
गॉर्ड ने बँगले के गेट पर गौतम को रोककर कहा..
गौतम – ज़ी मुझे पिंकी बुआ से मिलना है..
बँगले के गेट पर खड़े दो गार्डो में से एक ने कहा – यहां कोई पिंकी नहीं रहती जाओ यहां से..
गौतम फ़ोन में एड्रेस देखकर – पर ये अड्रेस तो यही का है..
एक गार्ड ने एड्रेस देखकर कहा – एड्रेस तो यही का है भईया पर यहां कोई पिंकी नहीं रहती.. गलत अड्रेस भेजा है किसी ने आपको.. आप जाइये यहां से मालकिन बहुत गर्म मिज़ाज़ की है.. उन्होंने किसी अजनबी को देख लिया तो हमारी नौकरी खतरे में पड़ जायेगी..
गौतम पिंकी को फ़ोन लगाता हुआ – हेलो.. बुआ?
पिंकी बँगले के गेट के पास अंदर बने गार्डन में एक चेयर पर बैठी हुई कोई फेशन मैगज़ीन पढ़ रही थी की गौतम का फोन आने पर फोन उठती हुई बोली – हाँ बाबू..
गौतम – बुआ ये अड्रेस तो गलत है शायद.. गेट पर खड़े गार्ड बोल रहे है यहां कोई पिंकी नहीं रहती है..
पिंकी गुस्से में मैगज़ीन सामने रखी टेबल पर फेंककर – तू रुक वही.. मैं आती हूँ..
गौतम को तुरंत ही रूपा का फ़ोन आ जाता है औऱ वो रूपा से बात करते हुए गेट से दूर चला जाता है..
पिंकी गुस्से से तिलमिलती हुई गार्डन से गुजरते हुए बंगले के गेट पर पहुंची..
पिंकी को देखकर दोनों गॉड सर झुकाकर एक साथ बोले – नमस्ते मेम साब..
पिंकी गुस्से में – तुम दोनों की हिम्मत कैसे हुई मेरे भतीजे को गेट पर रोकने की? इतनी भी तमीज नहीं है कि किसे रोकना है औऱ किसे नहीं? ये सब भी सीखना पड़ेगा तुम लोगों को..
एक गार्ड सर झुका कर – माफ़ करना मेमसाब.. हम नहीं जानते थे भईया ज़ी कौन है.. गलती हो गई हमसे..
पीछे से पिंकी के पति फ़कीरचंद आता हुआ..
फ़कीरचंद – क्या हुआ प्रमिला.. क्यों चिल्ला रही हो इन दोनों बेचारो पर..
पिंकी गुस्से में – चिल्लाऊ नहीं तो क्या करू.. पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है औऱ उसे अंदर आने से रोक दिया दोनों ने.. इनको अभी नौकरी से निकालती हूँ मैं..
दूसरा गार्ड सर झुका कर – मालिक.. हमें माफ़ कर दो.. हमें गलतफेहमी हो गई थी.. हमें पता नहीं था प्रमिला मेमसाहेब के घर का नाम पिंकी है..
फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए – अरे छोडो ना प्रमिला.. गलतफहमी हो जाती है.. इंसान है.. औऱ ग़ुगु आया है? कहा है वो?
प्रमिला गेट के बाहर आकर देखती है तो गौतम थोड़ी दूर पर रूपा से फ़ोन पर बात कर रहा होता है..
पिंकी आवाज लगा कर – ग़ुगु..
गौतम पिंकी को देखकर रूपा से बाद में बात करने की बात बोलकर फ़ोन रख देता है औऱ वापस आ जाता है..
फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए – कितना बड़ा हो गया है ग़ुगु? बिलकुल हीरो लगने लगा है..
पिंकी गौतम को जोर से गले लगाती हुई – लगने क्या लगा है.. है ही हीरो मेरा ग़ुगु..
गौतम – बुआ आराम से..
फ़कीर चंद हसते हुए – अब छोड़ भी दो अपने भतीजे को प्रमिला..
प्रमिला – सॉरी तुझे वेट करना पड़ा गेट पर..
गौतम – कोई बात नहीं बुआ.. ये तो बहुत छोटी सी बात है..
पिंकी – पैर वेर छूना नहीं सिखाया भाभी ने तुझे..
गौतम मुस्कुराते पिंकी के पैर छूकर – अच्छा लो..
पिंकी – अरे मेरे नहीं अपने फूफाज़ी के.. पागल बच्चा.. चल अंदर.. तेरे लिए तेरी मनपसंद चीज बनाई है..
फ़कीरचंद – अच्छा तभी आज अपने हाथों खाना बनाया जा रहा था..
पिंकी – तो ना बनाउ? पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है..
फ़कीरचंद – अच्छा तुम बुआ भतीजे बात करो मैं जरा बाहर हो आता हूँ..
पिंकी – अब आप कहा जा रहे हो?
फ़कीरचंद – फैक्ट्री हो आता हूँ.. मुकेश को कुछ कागजो पर दस्तखत चाहिए थे..
पिंकी – तो उसे ही यहां बुलवा लिया होता.. आपको मैनेजर के पास जाने की क्या जरुरत?
फ़कीरचंद – वो तो आ रहा था मैंने ही मना कर दिया.. सोचा थोड़ा टहल भी आऊंगा.. बहुत समय हो गया फैक्ट्री गए हुए.. आते हुए कारखाने की तरफ भी हो आऊंगा..
पिंकी – दवाइया साथ लेकर जाना.. औऱ ड्राइवर से कहना गाडी धीरे चलाये..
फ़कीरचंद – ठीक है..
गौतम पानी पीते हुए – दवाइया कैसी?
पिंकी – मधुमय है तेरे फूफाजी को.. तू चल बैठ टेबल पर.. मैं अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी मेरे बाबू को आज..
गौतम – खाना तो खा चूका हूँ बुआ..
पिंकी – ठीक पर खीर तो खानी पड़ेगी.. पसंद है ना तुझे? (पिंकी आवाज लगाकर) कम्मो.. ख़िर लेकर आना जरा.. एक औरत ख़िर की प्याली लेकर आती है जिसे पिंकी लेकर गौतम के बगल में डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसे खिलाने लगती है..
गौतम ख़िर खा कर – बस बुआ.. औऱ नहीं..
पिंकी – अच्छा.. ये बता भईया भी आये है शादी में?
गौतम मुंह साफ करता हुआ – नहीं बुआ.. उनको कहा फुर्सत.. मैं भी नहीं आने वाला था मगर माँ ने कसम खिला दी औऱ ले आई..
पिंकी गौतम को ऊपर अपने कमरे में लेजाती हुई – अच्छा किया भाभी.. वरना तू मुझसे मिलने कैसे आता?
गौतम – वैसे बुआ उस दिन फूफाजी को देखकर लगा नहीं था इतने अमीर होंगे वो..
पिंकी कमरे का दरवाजा लगाकर मुस्कुराते हुए – सही हाथ मारा है ना तेरी बुआ ने?
गौतम – ऐसे क्यों बोल रही हो बुआ.. आप कितना ख़याल रखती हो फूफाजी का.. उनको आपका शुक्रगुजार रहना चाहिए..
पिंकी अपनी साडी उतारते हुए – शुक्रगुजार तो है ही.. इसलिए मेरे नाम पर ये बांग्ला ख़रीदा है उन्होंने औऱ कुछ दिनों में दोनों फैक्ट्री औऱ कारखने भी मेरे नाम करने वाले है..
गौतम मुस्कुराते हुए – वो तो करना ही था.. आगे पीछे है भी कौन फूफाजी के आपके अलावा.. सही खेल गई बुआ आप तो..
पिंकी हसती हुई अपनी साडी कमरे में रखे सोफे पर पटककर बेड पर गौतम के पास आती हुई – मान गया ना अपनी बुआ को? है ना मेरा शातिर दिमाग.. पहली मुलाक़ात में ऐसा फसाया की अब तक फसा रखा है..
गौतम – वो तो है.. अच्छा लन्दन केसा है? सिर्फ तस्वीरों में देखा है मैंने.. जैसा फिल्मो में दीखता है वैसा ही है?
पिंकी गौतम के ऊपर आती हुई – काश में तुझे वहा ले जा पाती.. भाभी को फ़ोन किया था पर तेरी माँ तो जैसे मेरे पिछले जन्म की बैरी है.. मेरे कहते ही बोलने लगी.. ग़ुगु वहा जा कर क्या करेगा? तू अकेले ही चली जा.. ग़ुगु के इम्तिहान भी आने वाले है.. फलाना ढिमकाना.. औऱ एक हफ्ते से तुझे यहां शादी में लाकर बैठी है.. अब भाभी को तेरे इम्तिहान की परवाह नहीं है.. चालक चुड़ैल कहीं की..
गौतम – बुआ माँ को चुड़ैल मत बोलो..
पिंकी – क्यों तुझे बहुत तकलीफ होती है.. वो जब मेरे बारे में इतना कुछ कहती है तब तुझे तकलीफ नहीं होती?
गौतम – जब माँ आपके बारे में कुछ गलत बोलती है तो मैं उनको भी मना करता हूँ चाहो तो पूछ लो.. मुझसे तो आप औऱ माँ दोनों एक जैसा प्यार करती हो.. मैं आप दोनों के लिए कुछ गलत नहीं सुन सकता..
पिंकी – अच्छा छोड़.. मुझे अब मेरी किस्सी चाहिए..
गौतम पिंकी को चूमते हुए – ठीक है बुआ..
पिंकी चूमते हुए – बहुत सॉफ्ट लिप्स है तेरे बाबू..

गौतम – आपके भी तो कितने प्यारे लिप्स है बुआ मन करता है खा जाऊ..
पिंकी जीभ से चाटते हुए – खा जा ना बाबू.. बुआ मना थोड़ी करेंगी अपने ग़ुगु को..
गौतम चूमता हुआ – बहुत miss किया बुआ आपको..
पिंकी गौतम की टीशर्ट उतारकर – ये सब क्या है ग़ुगु.. तेरे गले पर सीने पर इतने निशान किसने किये?
गौतम मुस्कुराते हुए – ये शादी में मिले है बुआ.. एक लड़की ने बहुत तंग किया मुझे..
पिंकी मुस्कुराते हुए – क्या नाम था उसका?
गौतम – सिमरन..
नाम लेटे ही सिमरन का फ़ोन गौतम के फ़ोन पर आ गया जिसे देखकर गौतम हसता हुआ बोला – देखो ना बुआ.. शैतान का नाम लिया शैतान हाज़िर..
पिंकी मुस्कुराते हुए – उठा ना.. बात कर क्या कहती है..
गौतम फ़ोन उठाकर – हेलो..
सिमरन – क्या कर रहे हो?
गौतम – तुम्हे याद कर रहा था..
सिमरन – झूठ.. बड़े आये तुम मुझे याद करने वाले.. कल तो कितना भाव खा रहे थे..
गौतम – आखिर में प्यार भी तो किया था भूल गई?
सिमरन – कैसे भूल सकती हूँ रसगुल्ले.. अब तक चुत में आतंक मचा हुआ है.. सुबह तुझे याद करके बहुत गालिया दी मैंने..
गौतम हसते हुए – खतरों से खेलने का शोक तो तुम्हे ही था.. वापस कब मिलोगी?
सिमरन – मिलना चाहो तो आज रात को मिल सकती हूँ.. पर याद रखना सुरंग में नहीं घुसने दूंगी..
गौतम – तेरा बाप मान जाएगा? तूने तो कहा था बहुत स्ट्रिक्ट है वो..
सिमरन – वो सब मुझपर छोड़ दो.. सिटी मॉल में मिलना आठ बजे.. मूवी देखेंगे साथ.. लेट मत करना रसगुल्ले वरना घर से उठवा लुंगी..
गौतम हसते हुए – उठवाने की जरुरत नहीं पड़ेगी मैं पहुंच जाऊँगा.. फ़ोन कट हो जाता है..
पिंकी गौतम को छेड़ती हुई – रसगुल्ले.. हम्म्म..
गौतम मुस्कुराते हुए – बुआ आप भी ना..
पिंकी – अच्छा फोटो तो दिखा सिमरन की.. आवाज तो बहुत प्यारी है.
गौतम फोटो दिखाकर – लो.. कैसी है..
पिंकी – है तो मस्त.. चुचे औऱ चुत्तड़ भी अच्छे है फेस भी बड़ा प्यारा है.. पहली बार कैसे चोदा तूने इसको?
गौतम अपनी गांड मराई याद करते हुए – मैंने कहा चोदा बुआ.. यही मुझे चोद गई..
पिंकी हसते हुए – उसका क्या कसूर? तू है ही इतना चिकना..
गौतम – आप भी ना बुआ.. अब जल्दी से अपना ये घाघरा उठाओ बहुत मन कर रहा है आपकी गुफा में घुसने का..
पिंकी पेटीकोट कमर तक ऊपर करके – घाघरा नहीं पेटीकोट बोलते है इसे बाबू..
गौतम जीन्स खोलकर – पेंटी तो उतारो..
पिंकी गौतम के लंड को पकड़कर मसलते हुए – उतारने की क्या जरुरत है बाबू.. साइड हटा के घुसा दे.. (पिंकी पेंटी को एक हाथ से साइड करके दूसरे हाथ से गौतम का लंड अपनी चुत में घुसाती हुई)
गौतम पूरा लंड चुत में पेलकर – आह्ह.. बुआ अब मिली है असली जन्नत…

पिंकी सिसकती हुए – आह्ह… बाबू.. बहुत याद किया इसे मैंने..
गौतम अपने दोनों हाथ से पिंकी के ब्लाउज को पकड़कर एक झटके में पूरा फाड़ देता है औऱ उसकी ब्रा ऊपर करके पिंकी के बूब्स चूसते हुए पिंकी को धीरे धीरे चोदने लगता है..


पिंकी – ग़ुगु चूसके खाली कर अपनी बुआ के बोबो को बेटा.. आहहह…चोद बुआ को अच्छे से.. रांड समझके चोद मुझे बाबू.. मार झटके मेरी चुत में..
गौतम चोदने की स्पीड बढ़ाते हुए – लो बुआ सम्भालो.. अपने ग़ुगु के लंड को..
पिंकी – आह्ह.. ग़ुगु.. आह्ह… चोद मुझे.. आह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है बाबू.. आह्ह..

गौतम मिशनरी में चोदने के बाद पिंकी को घोड़ी बनाता हुआ चोदने लगता है – कितनी मोटी गांड है बुआ आपकी.. फूफाजी ने तो नहीं की चोदकर इतनी बड़ी.. कौन है बुआ आपका आशिक आवारा?
पिंकी आह करती हुई – बाबू तूने ही पेला था पिछली बार.. तब से किसीके साथ नहीं किया..
गौतम बाल पकड़ कर पीछे से झटके मारता हुआ – चल मेरी बुआ टूक टुक टुक.. चल मेरी बुआ टुक टुक टुक..
पिंकी – अहह.. अहह… अहह..


गौतम बाल छोड़कर पिंकी के दोनों हाथ पकड़ कर पीछे से चोदने लगता है – बुआ गांड कब दोगी मुझे?

पिंकी – बड़ा है तेरा ग़ुगु.. चुत में दर्द कर देता है गांड का पता नहीं क्या हाल करेगा..
गौतम पिंकी को उठाकर अपनी गोद में लेलेता है औऱ चोदने लगता है – तो क्या मैं आपकी गांड से वंचित रह जाऊँगा बुआ?

पिंकी चुदवाते हुए आहे भरकर – इस बार चुत से काम चला ले मेरे बाबू.. अगली बार पक्का गांड दे दूंगी.. पिंकी झड़ चुकी थी औऱ अब झड़ने के साथ अब मूतने भी लगी थी जिसमे उसे शर्म आ रही थी मगर गौतम ने लंड निकालकर अपना मुंह पिंकी चुत पर लगा दिया औऱ उसकी चुत से निकलते मूत को पिने लगा.. पिंकी ये देखकर हैरान औऱ रोमांचित हो उठी थी औऱ बार बार गौतम को अपना मूत पिने से रोकने की कोशिश कर रही थी मगर गौतम ने पिंकी की आखिरी मूत की बून्द तक अपने मुंह में लेकर पी ली..


मूत पिने के बाद गौतम पिंकी की चुत चाटने लगा औऱ पिंकी गौतम के बाल पकड़ कर फिर से काम के दारिया में गोते खाने लगी. पिंकी ने अपनी चुत चटवाने का आनंद भोगते हुए गौतम का सर बहुत जोर से अपनी चुत पर दबा दिया जिससे गौतम की सांस घुटने लगी मगर गौतम ने जैसे तैसे अपने आप को पिंकी के हाथ से छुड़वा कर पिंकी दोनों टाँगे हाथों से उठा कर उसकी चुत चाटने लगा..
गौतम चुत चाटने के बाद पिंकी को उठाकर दिवार के सहारे खड़ा करते हुए उसी तरह छिपकली बनाकर चोदने लगा जैसे उसने सुबह शबनम को चोदा था..

पिंकी चुदवाते हुए कामुक सिसकियाँ लेकर – थोड़ा धीरे ग़ुगु.. तेरी बुआ को दर्द हो रहा है.. अहह…
गौतम थोड़ी देर छिपकली पोज़ में चोदने के बाद पिंकी को पलट कर अपनी तरफ घुमा लेता है औऱ दिवार से सटाकर पिंकी की दोनों टाँगे उठाकर उसे चोदने लगता है.

पिंकी गौतम के गले में दोनों हाथ डालकर उसे चूमते हुए सिस्कारिया भरके चुदवाती रहती है. वो वापस झड़ने वाली थी औऱ अब गौतम का भी निकलने वाला था..
गौतम – बुआ होने वाला है..
पिंकी – मेरा भी वापस होने वाला है बाबू.. मुझे बेड पर लेटा दे..
गौतम पिंकी को अपने ऊपर में लेटा कर पेलने लगता है औऱ कुछ देर बाद पिंकी के साथ ही झड़ते हुए पिंकी की चुत में अपना वीर्य भर देता है..


पिंकी औऱ गौतम एक दूसरे की शकल देखते हुए मुस्कुराने लगते है पिंकी अपने फटे हुए ब्लाउज से गौतम के चेहरे पर आ रहा पसीना पोछती है..
पिंकी थोड़ी देर उसी तरह लेटी रहकर गौतम से बात करके बोलती है – अब इस शैतान को तो मेरी गुफा से बाहर निकाल लो..
गौतम – रहने दो ना बुआ थोड़ी देर गुफा के अंदर.. बेचारा बहुत दिनों बाद अपनी बुआ से मिला है..
पिंकी पलटकर- अच्छा ठीक है..

गौतम पिंकी के ऊपर ही उसकी चुत में लंड घुसा के हल्का हल्का झटका मारते हुए लेटा रहता है औऱ पिंकी गौतम के होंठों को चूमते हुए उसके बालों में उंगलियां फिराती हुई गौतम के नीचे लेटी रहती है.. कुछ देर चूमने के बाद गौतम की आँख लग जाती है औऱ पिंकी भी अपने ऊपर लेटे हुए गौतम को सोने देती है करीब एक घंटे बाद जब गौतम की आँख खुलती है तो वो देखता है की पिंकी अभी भी उसके नीचे लेटी हुई है औऱ उसका लंड अभी भी पिंकी की चुत में घुसा हुआ है.
गौतम की नींद टूटने पर पिंकी – उठ गया मेरा बाबू?
गौतम – टाइम क्या हुआ है बुआ?
पिंकी – सात बजे है..
गौतम चुत से लंड निकाल कर खड़ा होता हुआ – जाना है बुआ..
पिंकी मुस्कुराते हुए खड़ी होकर – सिमरन के पास?
गौतम कपडे पहनते हुए – हाँ..
पिंकी पास में पड़े अपने पर्स से एक कार्ड निकाल कर गौतम की जीन्स में रखती हुई बोली – 2002..
गौतम एटीएम कार्ड देखकर वापस देता हुआ – बुआ मुझे नहीं चाहिए.. आप इसे अपने पास रखो..
पिंकी गौतम के होंठ चूमकर एटीएम वापस उसकी जेब में डालती हुई – मैंने पूछा नहीं है तुझसे लेना है या नहीं.. चुपचाप रख ले.. कुछ भी चाहिए हो खरीद लेना.. शर्माना मत.. मैंरे पास औऱ भी दो है..
गौतम पिंकी का बोबा पकड़कर उसके होंठ चूमते हुए – आई लव यू बुआ..

पिंकी – लव यू टू मेरा बच्चा…
गौतम – अच्छा बुआ अब चलता हूँ.. जल्दी मिलूंगा आपसे..
पिंकी ब्रा औऱ पेंटी के बाद nighty पहनते हुए – ग़ुगु रुक..
गौतम – हाँ बुआ..
पिंकी एक बेग निकालकर – इसे लेजा..
गौतम – इसमें क्या है..
पिंकी – कुछ कपडे है घड़ी परफ्यूम औऱ शूज भी तेरे लिए..
गौतम – बुआ इतना सब लाने की क्या जरुरत है हर बार..
पिंकी – क्यों जरुरत नहीं है.. तेरे सिवा मेरा है ही कौन जिसके लिए मैं कुछ खरीदू.. आगे जाके इन सब चीज़ो का वारिस तुझे ही तो बनना है.. ये तुझे ही तो संभालना है..
गौतम मुस्कुराते हुए पिंकी को बाहों में भरके – मुझे पैसो में कोई दिलचस्पी नहीं है बुआ, चुत में है… कम पैसो से भी मेरा काम चल जाता है.. पैरों में जूते जॉर्डन के हो या कैंपस के मुझे फर्क नहीं पड़ता..
पिंकी गौतम का चेहरा अपने हाथों में लेकर – पर मुझे फर्क पड़ता है ग़ुगु.. अपनी पसंद की चीज के लिए जैसे मैं तरसी हूँ वैसे मैं तुझे तरसते नहीं देखना चाहती.. मेरे पास जो कुछ है सब तेरा है.. तू मेरा सबकुछ है ग़ुगु.. तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. किसी की जान भी ले सकती हूँ..
गौतम – माँ सच कहती है बुआ.. आप ना सनकी हो..
पिंकी चूमते हुए – ऐसा सोचती है मेरे बारे में तेरी माँ..
गौतम – बुआ आप अब यूँही मुझे पकड़े रहोगी तो मैं जा नहीं पाऊंगा..
पिंकी गौतम अपनी बाहों से आजाद करती हुई – चल जा.. मज़े कर अपनी उस गर्लफ्रेंड के साथ.. मगर कंडोम लगा कर.. नहीं तो इतनी सी उम्र में बाप बन जाएगा..
गौतम पिंकी के सर औऱ गाल को चूमते हुए – बाय मेरी प्यारी बुआ..
पिंकी गौतम के होंठों को डांत से खींचकर चूमती हुई –
बाय बच्चा..

गौतम पिंकी के पास से सिटी मॉल की तरफ चल देता औऱ कार पार्किंग में लगा कर मॉल के बाहर बनी एक चाय की टपरी पर बैठते हुए सिमरन को फ़ोन करता है..
गौतम – कहा रह गई यार..
सिमरन – आ रही हूँ बाबा.. जरा भी सब्र नहीं है तुम्हे तो.. अभी तो सिर्फ पौने आठ बजे है.. मूवी शुरू होने में डेढ़ घंटा है..
गौतम – मतलब अभी घर पर ही हो तुम.. ठीक है आ जाओ अपनी मर्ज़ी से.. मैं इंतजार कर लूंगा..
सिमरन – अच्छा सुनो भईया भी साथ आ रहे है उनकी भी टिकट बुक कर देना..
गौतम – वो कबाब में हड्डी बनने क्यों आ रहा है?
सिमरन – बाबा.. मम्मी ने अकेले जाने से मना किया इसलिए भईया को लाना पड़ेगा.. तुम उनकी फ़िक्र मत करो.. भईया थोड़ा दूर बैठ जाएंगे..
गौतम – ठीक है सिम्मी..
सिम्मी – क्या पहन के आउ रसगुल्ले?
गौतम – कुछ भी पहन के आजा मेरी रसमलाई.. होना तो नंगा ही है तुझे.. चल बाय.. मैं वेट कर रहा हूँ..
