अपनी शादीशुदा बेटी को मां बनाया – Incest Story | Update 2

अपनी शादीशुदा बेटी को मां बनाया - Incest Story
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भाग 2

अभी तक आप लोगों ने पढ़ा कि राजनाथ की मां आपने पड़ोसी के घर गई थी  जिसका नाम शंकर है उसकी बेटी का बच्चा हुआ था उसको देखने के लिए

और जब वह वापस अपने घर आई तो उसके दिमाग में यही चल रहा था कि सभी के बच्चे हो रहे हैं लेकिन उसकी पोती आरती को बच्चा नहीं हो रहा है।

यही सब सोंचते हुए उसने अपने बेटे राजनाथ से बोली बेटा राजू कुछ सोचा है इसके बारे में कि सिर्फ अपने काम में ही लगा रहेगा या इसके बारे में भी कुछ सोचेगा।

राजनाथ– किसके बारे में  क्या सोचा है मां।

राजनाथ की मां अरे अपनी आरती के बारे में और किसके बारे में तुझे कुछ होश है उसकी शादी को इतना साल हो गया और अभी तक उसकी गोद नहीं भरा है उसको कहीं  जाकर दिखाएगा या ऐसे ही छोड़ देगा उसको।

राजनाथ– ठीक है मां मैं दामाद जी से बोलता हूं  कहीं जाकर इलाज कराने के लिए और समधी जी से भी बोलता हूं कि वह भी दामाद जी से कहे की आरती को यहां से ले जाए और इलाज करवाए।

राजनाथ की मां अरे उनको क्या बोलेगा उनको इतनी फिक्र होती तो वह आरती को यहां लाकर नहीं छोड़ देते अब तक कहीं ना कहीं जाकर दिखाए होते उनको तो बस पोता और पोती से मतलब है।

इसलिए अब तुमको ही कुछ करना पड़ेगा अब तुम इसको अपने जाकर दिखाओ।

राजनाथ– ठीक है मां मैं कोई अच्छा सा डॉक्टर पता लगाता हूं उसके बाद मै इसको ले जाकर दिखाऊंगा।

राजनाथ की मां अरे डॉक्टर के पास काहे के लिए लेकर जाएगा डॉक्टर कुछ नहीं करेगा वह खाली पैसा लूटेगा मैं जहां कहती हूं वहां इसको लेकर जाओ काली पहाड़ी के पीछे एक बाबा रहते हैं और वह इन सब का बहुत बढ़िया इलाज करते हैं इसलिए तुम भी आरती को वहीं लेकर जाओ।

 राजनाथ– नहीं मां ऐसी कोई बात नहीं आजकल बहुत सारे -अच्छे अच्छे डॉक्टर हैं जो बढ़िया से इलाज करते हैं इसलिए एक बार कोई अच्छी लेडिस डॉक्टर के पास चेकअप करवा कर देख लेता हूं कि वह कुछ बताता है कि नहीं बताता है तो ठीक है अगर नहीं बताया तो तुम जहां कह रही हो जो बाबा के पास फिर वही लेकर जाऊंगा।

 राजनाथ की मां ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी अगर तुमको डॉक्टर के पास जाकर तसल्ली करना है तो जाकर देख ले।

और आरती यह सब बात दरवाजे के पीछे से खड़ी होकर सब सुन रही थी।

और वह लोग आंगन में बैठकर बातें कर रहे थे फिर उसकी दादी ने आवाज लगाई आरती  आरती

 उधर दरवाजे के पीछे से आरती ने आवाज दी जी दादी अभी आई फिर वह शरमाते हुए अपने बाबूजी और दादी के पास जाकर खड़ी हो गई और बोली हां दादी क्या हुआ फिर दादी ने कहा बेटा खाना बन गया

आरती हां दादी खाना बन गया अभी लेकर आती हूं   फिर सभी लोगों ने खाना खाया और खाना खाने के बाद राजनाथ अपने कमरे में सोने चला गया और आरती और दादी दोनों एक ही कमरे में सोती थी तो आरती अपनी दादी की पैर दबा रही थी तो फिर उसकी दादी ने कहा तुम्हारा बाबूजी भी इधर-उधर घूमते फिरते थक जाता है उसको भी जाकर पैर हाथ थोड़ा दबा दे जब से तुम्हारी मां गई है उसे बेचारे को देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

 आरती अपनी दादी की बात सुनकर शर्मा रही थी और सोच रही थी कि कैसे वह अपने बापू के पैर जाकर दबा आएगी क्योंकि आज तक उसने कभी ऐसा नहीं किया था इसलिए उसे शर्म आ रही थी और वह चुपचाप अपनी दादी की पैर दबा रही थी तो फिर उसकी दादी ने कहा अरे मेरा पैर को छोड़ और जा अपने बाप का पैर थोड़ा दबा दे उसकी थकान मिट जाएगी।

फिर वह ना चाहते हुए भी अपने बाप के कमरे में जाने लगी और दरवाजे के पास जाकर उसने धीरे से आवाज दी बाबूजी सो गए क्या अंदर से उसके बाप ने आवाज दी के आरती जी बापू जी क्या बात है बेटा आओ अंदर आओ खुला है फिर वह अंदर गई तो उसके बाप ने पूछा क्या बात है कोई काम है क्या।

  फिर आरती ने कहा कि जी आपका पैर दबा दूं क्या।

 तो राजनाथ ने चैंकते हुए पूछा  क्यों क्या हुआ मेरे पैर को।

 तो फिर आरती ने कहा कि जि वो दादी कह रही थी कि आप थक गए होंगे इसलिए बोल रही थी जा जाकर पैर दबा दे।

 फिर राजनाथ ने कहा कि क्या दादी ने ऐसा करने के लिए कहा तो फिर आरती ने कहा कि जी दादी ने हीं बोला है।

फिर राजनाथ ने बोला कि ठीक है जाओ जाकर तुम सो जाओ और दादी को बोल देना कि मैंने मना किया

 फिर आरती ने कुछ देर सोचने के बाद बोली कि मैं वापस जाऊंगी फिर मुझे दादी डांटेगी और बोलेगी कि मैंने जो तुमको करने के लिए बोली वह बिना किए हुए वापस आ गई ।

 फिर राजनाथ ने कहा कि क्या सच में तू मेरा पैर दबाना चाहती है।

तो आरती ने कहा कि जी हां

तो फिर राजनाथ ने कहा ठीक है हल्का-हल्का दबा दे फिर वह सीधा होकर लेट गया और आरती पलंग के साइड में झुक कर खड़ी हो गई और पैर दबाने लगी और राजनाथ को भी अपनी बेटी से पहली बार पैर दबाते हुए हैं बहुत ही आनंद आ रहा था और कुछ देर इसी तरह आनंद लेने के बाद उसने कहा कि बेटा अब हो गया अब रहने दे और तू जाकर आराम कर फिर आरती वहां से चली गई और वह दादी के पास जाकर सो गई और अपने बापू के बारे में सोचने लगी कि मेरे बाबूजी  इस उम्र में भी कितने मजबूत है क्योंकि आरती का पति एक दुबला पतला और ढीला डाला इंसान है इसलिए जब आज उसे अपने बाप का पैर हाथ दबाने को मिला तो उसे समझ में आया कि एक

 असली मर्द कैसा होता है। और यह सब सोचते सोचते उससे भी नींद आ गई।

आगे की कहानी अगले भाग में

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