उसके सामने उनके लॅंड ने घुटने टेक दिए और मेरी चूत के अंदर ही उन्होने एक के बाद एक कई पिचकारियाँ मारकर अपने प्यार का सबूत मेरे अंदर जमा कर दिया
“आआआआआआआअहह मेरी जनंननननननननननननणणन् मैं तो गया……आआआआआआअहह आई लव यु माय स्वीट हार्ट ”
मैं : “आई लव यू टू पापा”
मैने तो पहले से ही सोच लिया था की बाद में गोली ले लूँगी
मॉम के ड्रावर में मैने * पिल की काफ़ी गोलियाँ देखी थी
उनमें से एक मेरे काम आने वाली थी आज
उसके बाद मैं काफ़ी देर तक उसी पोज़िशन में उनके उपर लेटी रही
और वो मुझे प्यार करते रहे
ये तो अभी शुरुवात थी , आज के बाद ऐसे कई मौके आने वाले थे
मैं ऐसे ही नंगी उठी और फ्रिज़ से बॉटल निकालकर पानी पीने लगी
मेरे रूम के बाहर ड्रॉयिंग रूम में फ्रिज़ था, इसलिए लगभग उनके सामने ही थी मैं
सुधीर सर की नज़रें मुझे उपर से नीचे तक ताड़ रही थी
मैं भी जान बूझकर दरवाजा खोलकर काफ़ी देर तक ऐसे ही खड़ी रही और फिर झुक कर अंदर कुछ ढूँढने का नाटक करने लगी
ऐसा करने से मेरी गोल मटोल गांड बाहर की तरफ निकलकर उन्हें ललचा रही थी
और वो ललचा भी गये
कुछ ही पलों में मुझे अपने पीछे उनके लॅंड का गरमा गर्म एहसास हुआ
फ्रिज की ठंडक और लॅंड की गर्मी के बीच मेरा सैंडविच गर्म हो रहा था
कुछ देर पहले ही बुरी तरह से चुदी मेरी चूत से फिर एकबार भाप निकलने लगी
क्योंकि सर ने मेरा पिछवाड़ा घिसकर मेरा इंजन स्टार्ट कर दिया था
भले ही लॅंड खड़ा नही था उनका
भले ही वो मेरी चूत के अंदर भी नही था
पर उनके लयबध हल्के झटके मेरे पूरे शरीर को एक थिरकन प्रदान कर रहे थे
मेरे बूब्स कच्चे अमरूद की तरह मेरे शरीर की डाल से लटके हिचकोले खा रहे थे
जिसे उन्होने अपने हाथों में पकड़कर निचोड़ डाला
मैं अपनी पूरी ताक़त से कराह उठी पर मेरी चीख उस फ्रिज में घूमकर गुम सी हो गयी
सुधीर सर ने अपना मुँह मेरी पीठ पर रखकर मुझे चूम लिया
उस आलिंगन में कितना रोमांच था मैं बता नही सकती
काश इस वक़्त उनका लॅंड मेरी चूत में होता तो इस पोज़िशन में चुदवाने में कितना मज़ा आता
अभी नही है तो क्या हुआ
बाद में तो कभी खड़ा होगा ही ना
तब करवा लूँगी
अब सर कहाँ भागे जा रहे है
रहेंगे तो अब हमेशा यहीं
मेरे पास
इसी घर में
मैं खड़ी हुई और पलटकर उनके सीने से चिपक गयी
और उन्हे एक जोरदार किस्स करने का बाद वो बोली
“मन तो अभी भी नही भरा मेरा पापा….”
मैं जान बूझकर अपनी चूत को उनके सोए हुए लॅंड पर रगड़ रही थी
वो मुस्कुराए और बोले : “मेरा भी….चलो नहाने चलते है, तब तक ये भी जाग ही जाएगा…”
उन्होने भी अपने लॅंड को मेरी चूत पर दबाते हुए कहा
मैं खुश हो गयी पर बाथरूम में जाने से पहले मैं जान लेना चाहती थी की मॉम को अभी और कितना टाइम लगेगा
इसलिए मैने अपना मोबाइल उठाया और उन्हे कॉल मिलाया
मैं : “हाई मोंम ….आप कितनी देर में आओगे, मुझे भूख लगी है…”
मॉम : “बेटा मैं तो अभी बॅंक में पहुँची हूँ बस ….मुझे अभी काफी टाइम लगेगा , तुम सेंडविच बनाकर खा लो ना, फ्रिज में सारा समान रखा है…”
मैं : “हाँ …दिख रहा है, मैं फ्रिज़ खोलकर ही खड़ी हूँ , ओके आप आराम से आना, बाइ”
इतना कहकर मैने कॉल काट दी
और हंसते हुए सर के साथ बाथरूम की तरफ चल दी
बाथरूम सैक्स एक ऐसी चीज़ थी जिसके सपने मैने ना जाने कितनी बार देखे थे
किसी भी लड़के या सर के बारे में सोचकर मैं सीधा बाथरूम सैक्स को ही इमेजीन कर लेती थी, उसमें मुझे इतना रोमांच मिलता था की मैं कब झड़ जाती मुझे भी पता नही चलता था
आज उन्ही सपनो को पूरा करने का दिन आ चुका था
मेरे सपनो का राजकुमार या यूं कहलो की राजा, आज मेरे साथ नहाने जा रहा था
और उन्हे सैक्स के लिए कैसे तैयार करना है ये मैं पहले ही सोच चुकी थी
मेरी ठरक इतनी बढ़ चुकी थी की मेरे निप्पल्स तन कर पत्थर के बन चुके थे इस वक़्त
और मेरी ठरक का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हो की जो चूत अभी कुछ देर पहले ही पहली बार चुदी थी, जिसमें अभी तक पहली चुदाई की खरोंचे भी ताज़ा थी वो एक बार फिर से झरने गिराती हुई लॅंड के आगमन का इंतजार करने लगी थी
मेरे बाथरूम में बाथटब के उपर ही शावर लगा हुआ था
मैं अक्सर गर्म या ठंडे पानी की बौछारों का आनंद लेते हुए उस बाथटब में घंटो लेटे रहकर अपनी पुस्सी और निप्पल्स रगड़ती रहती थी और ऐसा करते हुए मैं अक्सर 1 से ज़्यादा बार झड़ती थी
इतना जनून था मुझे बाथरूम सैक्स को लेकर
सर ने अंदर जाकर शावर चला दिया था और मैं उनके साथ उसके नीचे जाकर खड़ी हो गयी
सुधीर सर ने बॉडी शावर जेल लेकर मेरे पूरे शरीर को अच्छे से रगड़ा
मेरी जाँघो और चूत के बीच वाले हिस्से को भी अच्छे से सॉफ किया
और जब अपनी 2 उंगलियाँ अंदर डालकर उन्होने उसे अंदर से सॉफ किया तो ढेर सारी चिकनाई उनके हाथ में आ गयी
वो समझ गये की मैं अगली चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ
अब तो उनके लॅंड में भी हल्की हरकत होने लगी थी
होती भी क्यों नही, मेरे जैसी जवान जिस्म की मल्लिका जो उनके पास थी
बाकी उन्हें कैसे पूरा तैयार करना है
ये मेरे हाथ में था, आई मीन मेरे मुँह में था
मैं टब में घुटनो के बल बैठ गयी और उनके लटके हुए पाइप जैसे लॅंड को पकड़ कर मुँह में भर लिया
उपर से गिर रहा पानी ऐसा एहसास दिला रहा था जैसे मैं उनका लॅंड बारिश में बैठ कर चूस रही हूँ
यही सोचा करती थी मैं अक्सर अपने ख्यालों में
मुँह में जाते ही उनका लॅंड आश्चर्यजनक रूप से अपने पूरे आकार में आ गया
मैं समझ गयी की एक के बाद लगातार दूसरी चुदाई के लिए तैयार करने के ये शोर्टकट तरीका है
मर्द का लॅंड अपने मुँह में लेकर चूस डालो
साला एक मिनट में दोबारा चुदाई के लिए तैयार हो जाएगा
अपनी सैक्स लाइफ की किताब में बड़े-2 शब्दो में मैं इस लाइन को लिख चुकी थी
मैं लॅंड के साथ -2 उनकी बॉल्स को भी चूम चाट रही थी
उनके खड़े हुए लॅंड को अपने चेहरे पर रगड़ कर उस से फेस मसाज़ करवा रही थी
अब सर का लॅंड पूरी तरह से तैयार हो चुका था
उन्होने मुझे उपर उठाया और मेरे नन्हे बूब्स को पकड़कर जोरों से चूस लिया
फिर मेरी कमर के दोनो तरफ हाथ लगाकर उन्होने मुझे किसी गुड़िया की तरह उपर उठाया और मुझे उस पानी के तालाब से बाहर निकालकर टब के किनारे पर बिठा दिया
एक बार फिर से हम दोनो एक गहरी स्मूच में डूब गये
वो मेरे लिप्स को जितना चूमते थे, उतना ही नीचे जाकर मेरे बूब्स और निप्पल्स को भी प्यार करते थे
उनकी ये अदा मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थी
ऐसा करते हुए उनके हाथ भी हरकत में आ चुके थे
उन्होने एक बार फिर से अपनी उंगलिया मेरी पुस्सी में डाल कर मुझे अंदर तक रगड़ना शुरू कर दिया
एक साथ 3 सेंसेशन मिल रहे थे मुझे
मेरे लिप्स पर
मेरे बूब्स पर
और
मेरी पुस्सी पर
इन मर्दों को सब पता होता है की एक लड़की को कैसे गर्म किया जाता है
उनके इस ट्रिपल अटैक से मैं उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी
अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था
मैने उछलकर उनके गले में बाहें डाली और अपनी टांगे उनकी कमर से लपेट कर उनकी गोद में शिफ्ट हो गयी
उन्होने अपनी ताक़त दिखाते हुए मुझे बिना अपनी गोद से उतारे अपने आप को घुमा कर बाथटब के किनारे पर बिठा लिया
अब वो आराम से उस जगह पर बैठे थे जहाँ पहले मैं थी
और मैं उनकी गोद में चड़कर उन्हे बेतहाशा चूमने में लगी थी
और साथ ही अपनी नर्म और गीली गांड उनके खड़े लॅंड पर रगड़ कर उसे अंदर आने के लिए आमंत्रित भी कर रही थी
उफ्फ कितना चिकनाई से भरा स्पर्श था इन शरीरों का
बॉडी शावर की वजह से दोनो का शरीर एक दूसरे पर फिसल रहा था
पर उनके लॅंड को अंदर जाने के लिए उस फिसलन का नही बल्कि मेरे अंदर से निकल रहे लुब्रीकेट का सहारा चाहिए था
जो उनके लॅंड पर मैं काफ़ी मात्रा में रगड़-2 कर लगा चुकी थी
मैने अपने टांगे उनकी कमर पर लपेट दी और उन्होने हाथ नीचे करके अपना लॅंड मेरी चूत पर टीका दिया
पानी की बूँदों की तरह मेरा शरीर भी फिसलकर कुछ इंच नीचे हुआ और मैंने उनके लॅंड को एक ही बार में निगल लिया
गीली और रसीली चूत में लॅंड जाने का इतना सरल तरीका शायद ही कोई और होगा
अब उन्होने मेरे हिप्स के नीचे अपने पंजे लगा दिए और धीरे-2 मुझे उपर नीचे करके चोदने लगे
मैं उन बारिश की गिरती बूँदो के साथ सीसीया उठी
“आआआआअहह….. ओह…. सुधीईईईर सर………. आई लव दिस पोज़……. अहह…… मजाआाआआअ आआआआआआआअ रहाआआआआअ है बहुत……………… उम्म्म्मममममममम….. आई केन फील यू ….. पूरा का पूरा …… ओह गॉड …….. कितना मोटा और लंबा लॅंड है आपका ………. उफफफफफफफफफफ्फ़…. बहुत मज़ा आ रहा है पापा……………. ज़ोर से चोदो मुझे पापा………..आई लव यु पापा……ज़ोर से चोदो ना मुझे ….अपनी प्यारी बेटी को पापा…..”
इस बाप बेटी वाले एंगल से हमेशा उनकी उत्तेजना काफ़ी हद तक बढ़ जाती थी
ये अक्सर मैने नोट किया था
इसलिए मैं भी ऐसा बोलकर उन्हे उनकी उत्तेजना के शिखर पर ले जाना चाहती थी
आख़िर में फ़ायदा तो मुझे ही मिलना था उसका
और मिला भी
उनके झटकों की गति एकदम से काफ़ी तेज हो गयी
वो मुझे अपनी गोद में उठाकर किसी खिलोने की तरह चोद रहे थे
मैं भी उनकी भुजाओं की ताक़त देखकर हैरान थी
अब मेरी चूत काफ़ी गर्म और चिकनी हो चुकी थी
जिसकी वजह से 1-2 बार सुधीर सर का लॅंड फिसलकर बाहर भी आ गया
इसलिए मैं उनकी गोद से उतर गयी और दीवार पर हाथ रखकर अपनी गांड पीछे निकालकर खड़ी हो गयी
जैसा कुछ देर पहले फ्रिज़ के अंदर खड़ी थी
सर ने अपना फौलादी लॅंड मेरी चूत को टटोलकर नीचे से लगाया और एक बार फिर से हुंकार भरकर वो मुझे चोदने लगे
इस बार शावर का पानी हम दोनो के मिलन स्थल पर सीधा पड़ रहा था
जिसकी वजह से पानी की थपकीया कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से बज रही थी
उन्होने अपने लॅंड को अंदर डालकर मेरी चूत को बुरी तरह से चोदना शुरू कर दिया
और अचानक उनका शरीर ऐंठने लगा
मैं कुछ समझ पाती इस से पहले ही उनके लॅंड से निकले गर्म लावे ने मेरी चूत को भरना शुरू कर दिया
उस गर्मी के एहसास से मैं तड़प उठी पर मैं अभी झड़ी नही थी
शायद दोबारा उत्तेजित होने के बाद मुझे थोड़ा ज्यादा समय चाहिए था
पर तब तक सर का लॅंड शिथिल पड़ चुका था
मैने उन्हे कहा भी की मेरा अभी हुआ नही है पर उनके झटके व्यर्थ ही गये क्योंकि उनके लॅंड में अब पहले जैसा तनाव नही रह गया था
मैं झल्ला उठी
मैने उनके लेस से लिबड़े लॅंड को अपनी चूत से बाहर निकाला और नीचे बैठ कर उसे मुँह में भरकर जोरों से चूसने लगी पर मेरी मेहनत का भी उनके उपर कोई असर नही पड़ रहा था
वो बस आँखे बंद किए अपने लॅंड से निकलने वाली आख़िरी वीर्य की बूंदे मुझे पिलाने में लगे रहे
मुझे सच में काफ़ी गुस्सा आ रहा था उनके उपर क्योंकि इस वक़्त मेरी चूदासी मेरे सर चड़कर बोल रहा थी
मुझे किसी भी हालत में झड़ना ही था
मेरी मनोदशा समझकर उन्होने मुझे उठाया और कमरे में चलने के लिए कहा
अब वो किसी दूसरे तरीके से मेरी आग को ठंडा करने वाले थे शायद
मैने शावर बंद किया और उनके पीछे -2 चल दी
बाहर आकर मैं अपने बेड पर लेट गयी
उन्होने मेरे सामने लेटकर अपना मोर्चा संभाल लिया
मैं आने वाले मज़े को महसूस करके ही मुस्कुरा उठी
अब वो बड़े प्यार से मेरी चूत को देख पा रहे थे
एकदम गुलाबी रंग की चूत
जिसकी पंखुड़िया उन्होने ही खोली थी
पर इस वक़्त वो चूत फिर से बंद होकर एक कली होने का एहसास दे रही थी
वो उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुगध से हो रहे थे
फिर उन्होने अपनी करामाती जीभ को मेरी पुस्सी पर रखकर उसे सहलाया
मैं तड़प सी उठी
उन्होने मुझे सताने के लिए जान बूझकर सिर्फ़ जीभ की टिप से मेरी पुस्सी के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई नाग अपने फन से करामात दिखा रहा है
अपनी नन्ही सी गीली जीभ निकाल कर मुझे सता रहा है
मैने आँखे बंद करके उनके सर को पकड़ा और ज़ोर से उन्हे अपनी पुस्सी पर दबा दिया और चिल्ला पड़ी
“पपाााआआआआआआआ……. प्लीज़….. सकक्क मी ना……. ऐसे सताओ मत ……… ज़ोर से चूसो मुझे……. आई एम् डायिंग ……”
वो भी समझ चुके थे की ज़्यादा देर तक मुझे सताना सही नही है
इसलिए जब मैने उनके सर पर दबाव डालकर नीचे दबाया था उसके साथ ही उन्होने अपना मुँह खोल दिया था और परिणामस्वरूप मेरी पूरी की पूरी चूत एक ही बार में उनके मुँह के अंदर थी
वो उसे चूस रहे थे
उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर घुस कर वहां की गर्मी और गीलेपन का मज़ा ले रही थी…
ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी चूत के थ्रू मुझे पी रहे है
क्योंकि उनकी हर साँस के साथ मैं अपने आप को पिघलते हुए महसूस कर रही थी
और वो उस पिघले हुए शरबत को चूस-2 कर पी रहे थे
मैं उनके सर पर हाथ रखकर सिर्फ सिसकारियां लेने के शिव कुछ कर ही नहीं पा रही थी
मैं तो यहाँ अपनी मस्ती में डूबकर अपनी पुस्सी रही थी
और वहां मेरी मॉम उसी वक़्त अपनी डुप्लीकेट चाभी से घर में दाखिल हो चुकी थी
दरअसल बैंक में लॉकर की देखभाल करने वाला आज छुट्टी पर था
इसलिए उन्होने अगले दिन आने का टाइम लेकर घर आने का निश्चय किया
पता नही क्यो जब से सुधीर सर घर आए थे, उनका हर समय चुदने का ही मन करता रहता था
इसलिए जल्द से जल्द फिर से घर पहुँचकर वो एक बार फिर से चुदाई का खेल खेलना चाहती थी
जो कुछ समय पहले उनकी बेटी यानी मेरी वजह से अधूरा रह गया था
और जब सर की जीभ मेरी चूत में धमाल मचा रही थी लगभग उसी वक़्त वो घर के दरवाजे पर पहुँची थी
पर बेल बजाने से पहले ही अंदर से आ रही मेरी चीखों ने उन्हे ऐसा करने से रोक लिया
शायद जिस बात का उन्हे डर था वो अंदर हो रही था
उनके हाथ कांपकर रह गये इस विचार के आते ही
वो जिस इंसान से शादी करने जा रही थी इस वक़्त वो शायद अंदर उनकी बेटी की चुदाई कर रहा था
मेरा और मॉम का भले ही कैसा भी रिश्ता रहा हो
एक बेड पर उन्होने चुदाई करते वक़्त मुझे चूसा भी था,
सुधीर ने भी मेरा नंगा जिस्म और पुस्सी देखि थी मॉम के सामने
और मैंने भी उन्हे आज चुदाई के वक़्त बीच में धमककर पकड़ा था
पर कोई रिएक्शन नही दिया था
वो सब अलग बात थी पर मॉम एक औरत भी है
वो अपने होने वाले पति के साथ किसी दूसरी औरत का साथ कभी बर्दाश्त नही कर सकती
उपर से वो उनकी कच्ची उम्र की कुँवारी लड़की
ये सब उनके दिमाग़ पर किसी हथोड़े की तरह पड़ रहा था
उन्होने अपने बेग से डुप्लीकेट चाभी निकाली और बिना किसी आहट के अंदर दाखिल हो गयी
ठीक उसी तरह से जैसे आज मैं आई थी घर पर
मॉम अंदर आकर बुक शेल्फ के पीछे छिप गयी जहाँ से मेरे रूम का सारा नज़ारा दिख रहा था
और अंदर का नज़ारा देखकर उनका शरीर एक बार फिर से काँप गया
वहां सुधीर सर मेरी चूत को अपनी जीभ से भेदकर मुझे मुँह से चोदने में लगे हुए थे
एक पल पहले जिस नज़ारे को सोचकर वो गुस्से से काँप गयी थी उसे अपनी आँखो से देखकर वो गुस्सा कब उत्तेजना में बदल गया उन्हे भी पता नही चला
और अनायास ही उनका एक हाथ अपनी चूत पर पहुँच गया
एक दम सेम सीन चल रहा था
जहाँ मैं थी सुबह वहां इस वक़्त मेरी मॉम थी और जहाँ मॉम थी वहां मैं
मैं मज़े मे चिल्ला रही थी
“आआआआआआआआआहह ओह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……. म्म्म्मआममममममममममममममममममममममम…. मजाआाआआआआआअ आ रहा है ………. अहह मेरे प्यारे पापा……………. उम्म्म्मममममममममम…… ज़ोर से चूसो अपनी बेटी की चूत को ……. इसमें तो आपके लंड से ज्यादा मज़ा मिल रहा है अहह”
मोंम भी मेरे मुँह से उन शब्दों को सुनकर हैरान थी
क्योंकि उनके सामने मैंने अभी तक सुधीर सर को पापा बोलना शुरू नही किया था
और यहाँ सैक्स के समय मैं उन्हे पापा पापा बोल रही थी
ये सच में उनकी समझ से परे था
और तभी मेरे अंदर बन रहे ऑर्गॅज़म ने अपना बाँध तोड़ दिया और मैं भरभराकर उनके चेहरे पर झड़ने लगी
“ओह पापा………………… आई एम् कमिंग………. पी जाओ मुझे…… सारा का सारा.”
और सुधीर सर ने भी बिना किसी देरी के अपनी जीभ को मेरी चूत पर फिराना जारी रखा
कुछ ही देर में सब कुछ शांत हो गया
सर सपर-2 करके मेरी चूत का सारा रस पी गये
मैं शांति से आँखे बंद करके लेटी थी की तभी मॉम की आवाज़ से मेरी तंद्रा भंग हुई
“मैं आ गयी”
मॉम ने मेरा हथियार मुझपर ही चला दिया था
जैसे मैंने किया था ठीक वैसे ही उन्होंने भी किया
मेरी तो फट्ट कर हाथ में आ गयी
और शायद सर का भी यही हाल था
वो हमे घूरकर कुछ देर तक देखती रही और फिर पलटकर अपने रूम की तरफ चल दी
हम दोनो एक दूसरे का चेहरा देखते रह गये
पता नही अब क्या होने वाला था.










