अनु ने अपना बेग उठाया और भागती हुई बाहर निकल गयी
बाहर जाते हुए उसने गार्ड केबिन में बैठे मंसूर को उसने नरंदाज किया, वो उससे नज़रें मिलाकर उसे शक करने का कोई बहाना नही देना चाहती थी
पर बेचारी ये नही जानती थी की उसकी आधी से ज़्यादा पिक्चर तो वो देख ही चूका है
अब आगे क्या करना है उसके लिए बिनोद के साथ बैठकर उसे अपना प्लान समझने वाला था वो
अनु भी आज बहुत खुश थी, उसकी चूत का पुर्जा-2 खुल सा गया था आज की चुसाई से
जैसे सर की तेल मालिश करने से होता है, ठीक वैसे ही
अब तो उसे बस लॅंड का इंतजार था
जो सुधीर सर लिए बैठे थे
आज वो उनसे कुछ ना कुछ तो करवाकर रहेगी
ये सोचते हुए वो घर की तरफ चली जा रही थी.
घर पहुँची तो आशा के अनुरूप उसे सुधीर सर की कार बाहर ही खड़ी मिली
यानी आज की रात भी उनका यहीं रहने का प्रोग्राम था
वो खुशी-2 अपनी नन्ही बॉल्स उछालती हुई घर की तरफ चल दी
पर बेल बजाने से पहले उसने कान लगाकर अंदर सुनने की कोशिश की तो उसे मॉम की ख़तरनाक वाली सिसकारियाँ सुनाई देने लगी
उसने मन में सोचा की ये मॉम भी कितनी बड़ी वाली चुदक़्कड़ है, चुदाई के वक़्त इतना चीखती है की पड़ोसियों का डर भी नही रहता इन्हे
वो तो भला हो उनकी सोसायटी में हर घर के बीच गाड़ी खड़ी करने के लिए एक छोटा सा लॉन टाइप एरिया दिया हुआ है, वरना दीवार से दीवार लगी हो तो कोई भी सुन ले इनके रंग बिरंगे गीत
पर अभी तो वो सुनने के साथ उसे देखना भी चाहती थी
इसलिए उसने बेग से अपनी डुप्लिकेट चाभी निकाली और दरवाजा खोलकर दबे पाँव अंदर आ गयी
अंदर आकर उसने अपने शूज़ उतारे और बेग साइड में रखा और दीवार के पीछे खड़े होकर अंदर का नज़ारा देखने लगी,
वहां से मॉम का बेडरूम सॉफ दिखाई दे रहा था
जहाँ मॉम अपनी जवानी का पतीला खोले नंगी पड़ी थी और सुधीर सर उनकी चूत की मलाई अपनी जीभ की चम्मच से कुरेद कर खा रहे थे
“आआआआआआआआहह…… ओह सुधीईईईईईईईर मेरी ज़ाआाआआआआन्णन्न्……. अहह…….. कितना मज़ा देते हो तुम…………………उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़……. मन करता है तुम्हे चिपका कर ही रखूं अपनी चूत से हमेशा…………… इसे अपनी जीभ से चाटते रहो हमेशा……………. खाते रहो और मजाआाआआआआआआआअ देते रहोऊऊऊऊऊऊऊऊऊ”
लास्ट में जो उन्होने ऊऊऊऊऊओ बोला तो मुझे डर था की कहीं घर के शीशे ही ना टूट जाए, इतनी तीखी आवाज में वो झड़ी थी शायद
क्योंकि उसके बाद उनके होंठ उसी ओ की मुद्रा में खुले रह गये और शरीर जो कुछ देर पहले तक कमान की तरह उठा हुआ था हवा में , वो हयड्रोलिक मूमेंट में धीरे-2 बेड पर आ गिरा
सुधीर सर भी नंगे थे और मेरा सारा ध्यान अब उनके लॅंड पर ही था
याआआआआआआररर…….ये लॅंड भी कितने कमाल की चीज़ होती है ना
उफ़फ्फ़…..मेरी चूत में जब जाएगा तो कैसा फील होगा
इस एहसास से ही मेरा शरीर गुदगुदा उठा
कमरे का हाल देखकर ही पता चल रहा था की आज पूरा दिन सिर्फ़ और सिर्फ़ चुदाई हुई थी वहाँ पर
2 हेंड टावल पड़े थे ज़मीन पर
सुधीर सर के वीर्य से भीगे
जो उन्होने मॉम की चूत में निकाला था और उसे सॉफ करके मॉम ने उसे ज़मीन पर फेंक दिया होगा
तीसरा टावल बेड पर तैयार पड़ा था
यार सुधीर सर, ये सब माल ऐसे ही वेस्ट करते रहोगे तो मुझे कैसे मिलेगा मेरा हिस्सा
इसलिए मुझे पहले जैसा तरीका एक बार फिर अपनाना पड़ेगा
सुधीर सर ने अपना लंड मॉम की चूत पर रखा और उसे एक ही झटके में अंदर धकेल दिया
“आआआआआ हहहहहह। …….. मममममममम मजा sssssss आआआआआ sssssss गयाआ ssssss “
और जैसे ही सुधीर सर ने अपना पूरा जोर लगाकर उनकी चूत में झटके मारे
मैं दनदनाती हुई अंदर दाखिल होती चली गयी
“मोम ….मैं आ गयी……….”
मॉम की चूत में सुधीर सर का लॅंड और दोनो के चेहरे के भाव एकदम से बदल गये
मैने उन्हे देखा तो उन्हे अपने शरीर को छुपाने का भी वक़्त नही मिल पाया
मैं बोली : “ओह्ह्ह …अभी तक ये चल रहा है…मुझे लगा अब तक तो ख़त्म हो गया होगा…..एनीवेस, यू गाइस केरी ओंन ….सॉरी “
और सॉरी बोलकर मैं वहां से अपने रूम की तरफ दौड़ पड़ी
अब इस तरह से छापा पड़ने के बाद क्या ही उन्होने करना था
2 या शायद 3 बार चुदाई तो वो पहले ही कर चुके थे
उपर से मैने उन्हे देख भी लिया था
वैसे तो सुधीर सर और मॉम दोनो ही जानते थे की अब उतना भी फ़र्क नही पड़ता उन्हे जितना पहले पड़ता था
पर फिर भी अब पहले जैसा जोश नही रहा दोनो में और उन्होने अपने-2 कपड़े पहने और मॉम रूम सही करने में लग गयी
सुधीर सर बाहर आकर सोफे पर बैठ गये और अपना लॅपटॉप देखने लगे
तब तक मैं अपने कपड़े चेंज करके आ गयी
आज जान बूझकर मैने वो कपड़े पहने थे जो मॉम मुझे घर पर पहनने से मना करती थी
वो एक छोटी सी निक्कर और हॉल्टर टॉप का सेट था जिसमें आधे से ज़्यादा नंगा पेट और नाभि वाला हिस्सा चमकता रहता था, बूब्स के निचले हिस्से की गोलाई भी दिखाई देती थी
मैं अगर अपने हाथ भी उपर उठा दूं तो मेरे बूब्स बाहर आ जाए, इतना छोटा था वो टॉप
और शॉर्ट तो इतनी शॉर्ट थी की मेरी पेंटी भी उसमें दिखाई देती थी , इसलिए मैं पेंटी नही पहनती थी उसके नीचे
मेरी चूत के दोनो लिप्स दोनो तरफ बराबर मात्रा में लटके रहते थे, कोई गोर से देखे तो उसे बिना कपड़े उतारे ही उनके दर्शन हो जाए
मॉम ये पहले एक बार नोटीस कर चुकी थी
उसके बावजूद मैने आज ये सेट पहना था
और वो भी सुधीर सर के होते हुए
पर अब जितना खुलापन हम सबमे आ चुका था तो मुझे लग रहा था की वो मुझे इसके लिए नही टोकेगीं
और उन्होने टोका भी नही
बस मुझे एक नज़र देखकर ठंडी आ भरी और फिर से अपने काम मे लग गयी
मैं इठलाते हुए सर के करीब पहुँची जो मुँह फाड़े मुझे उस नन्ही सी ड्रेस में देखकर हैरान हो रहे थे
मैने जान बूझकर अपने दोनो हाथ उपर उठाए और कमर पर रखकर बोली : “मेरे लिए भी कुछ बचा कर रखा है या सारी एनर्जी मॉम पर निकाल दी…”
सर को समझ नही आ रहा था की क्या बोले, क्योंकि वो तो मेरे आधे लटक रहे बूब्स देखने में बिज़ी थे
मुझे सर को ऐसी अवस्था में पहुँचाकर सच में बड़ा मज़ा मिलता था
थोड़ी देर में मॉम लंच में बनाए वेज पुलाव ले आई
शायद चुदाई करवाने के चक्कर में ज़्यादा कुछ बनाने का टाइम नही मिला होगा
खैर, लंच करने के बाद मॉम ने वो कहा जिसका मुझे और सर को अंदाज़ा भी नही था
वो बोली : “सुधीर, अब जब हमने डिसाइड कर ही लिया है शादी का तो इसे ज़्यादा डिले करना सही नही है, मैं सोच रही थी की आने वाले संडे को हम शादी कर लेते है, क्यों अनु, ठीक है ना…?”
मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता था, मैं तो कब से इसी का वेट कर रही थी की शादी हो और मुझे सुधीर सर के साथ रहने को मिले.
मॉम भी शायद अब पूरा क़ब्ज़ा कर लेना चाहती थी सर के उपर
अब वो उन्हे पूरा चाहिए थे बिना किसी अवरोध के.
सर ने भी हामी भर दी
और इसके बाद मॉम ने दिल खुश करने वाली बात कही
वो बोली : “तो मैं एक काम करती हूँ , आज मैं अपना बॅंक का कुछ काम निपटा लेती हूँ, लॉकर से मुझे अपने कुछ गहने भी निकालने है, शादी मंदिर में करेंगे पर मैं एक दुल्हन की तरह तैयार होना चाहती हूँ …”
मॉम के चेहरे से उनकी खुशी सॉफ झलक रही थी,
उन्हे दुल्हन के रूप में सजे होने की कल्पना करके मेरी आँखे भी भीग आई
और हम दोनो ने एक दूसरे को गले से लगा लिया
हम दोनो का प्यार देखकर सुधीर सर भी आगे आए और हमे अपनी लंबी भुजाओं में क़ैद कर लिया
उनका हाथ मेरी कमर के नंगे हिस्से पर था, और उन्हे मेरे आधे नंगे बूब्स का एहसास बराबर हो रहा था
अब पता नहीं ये उन्होने जान बूझकर किया था या नही पर इसमे मुझे मज़ा बहुत आया
कुछ ही देर में मॉम चली गयी और दरवाजा बंद करके मैं लगभग भागती हुई सी वापिस आई और सुधीर सर के उपर कूद पड़ी जो इस वक़्त बेड पर आधे लेटकर मोबाइल चेक कर रहे थे
मैं : “बड़ी बदमाशी आ रही थी उस वक़्त जब गले मिल रहे थे तो…बताऊँ क्या “
मेरा झूठा गुस्सा देखकर वो हंसते हुए बोले : “इतना एकांत शायद पहली बार मिला है और वो भी बिना किसी डर के, तुम्हारी माँ 2 घंटे से पहले आने वाली नही है और तुम हो की ये टाइम लड़ने झगड़ने में निकाल रही हो….”
सर की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठी और साथ ही मेरे शरीर मे एक करंट सा दौड़ गया
आज की रात तो मैं पहले से ही चुदाई करवाने के मूड में थी चाहे इसके लिए सर को आधी रात को सोते हुए उठाना पड़ता पर मॉम के बैंक जाने की वजह से अब वो सारा काम आराम से अभी दिन में भी हो सकता है
सर शायद उस हद तक नही सोच रहे थे अभी
पर मैं अंदर से निश्चय कर चुकी थी
और ये बात सुधीर सर को पता नहीं थी
आज उन्हे सर्प्राइज़ मिलने वाला था
मेरी कुँवारी चूत के रूप में
मैं सर की कमर के उपर दोनो तरफ टांगे करके बैठी थी
और मुझे उनके लॅंड के उठने का एहसास अपनी चूत पर सॉफ महसूस हो रहा था
जैसे कोई साँस ले रहा हो मेरी चूत के नीचे
एक गर्माहट सी निकल रही थी मेरे अंदर से शायद उसी को महसूस करके उनका काला नाग उठ गया था
अब जब सब कुछ हिसाब से हो रहा था तो देर करने का कोई फायदा नही था क्योंकि इन 2 घंटो का एक एक मिनट मैं इस्तेमाल कर लेना चाहती थी
मैने सीधा नीचे होते हुए उनके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूमना शुरू कर दिया
एक मर्द के लिए शायद इससे हसीन पल कोई और हो ही नही सकता जब उसकी बेटी की उम्र की जवान लड़की उसकी गोद में बैठकर उसे स्मूच करे
उनके दोनों हाथ मेरी नंगी कमर वाले हिस्से पर आ लगे और वो उसे सहलाने लगे
हमारी किस्स हर पल और गाड़ी होती चली जा रही थी
उन्हे मेरी जीभ चूसना सबसे ज़्यादा पसंद था
इसलिए मेरे होंठो को कुछ देर चूसने के बाद उन्होने मेरी जीभ को अपने मुँह में दबोच लिया और उसे अंदर लेकर चूसने लगे
उनके ऐसा करने से मेरे होंठो ने उनके होंठो को उपर और नीचे से पूरी तरह से ढक लिया और मैं भी पूरा ज़ोर लगाकर उन्हे चूसने लगी
दोनो तरफ से चूसम चुसाई का जोरदार खेल चल रहा था
जिसमें जीत सर की ही हुई और मैने अपने होंठो को निढाल सा होकर उनके हवाले कर दिया
कुछ देर बाद जब साँस लेने के लिए हम दोनो अलग हुए तो मेरा चेहरा पूरा लाल हो चुका था
शायद आज जैसी खुशी मुझे आज तक नही हुई थी
एक ऐसे इंसान को किस्स करके जो मेरा गुरु भी था, मेरा प्यार भी था और अब मेरे पापा भी बनने वाले थे
और आज उन्हे गुरुदक्षिणा के रूप में मैं अपना यौवन सोंपने वाली थी
इसलिए मैं सीधी हुई और उस नन्हे से टॉप को जो मेरे यौवन के फलों को ढक कर बैठा था, उसे दोनो हाथ से पकड़ कर निकाल कर नीचे फेंक दिया
अब उनकी आँखो के सामने मेरे 2 कच्चे अमरूद थे
जिन्हे उन्होने आज तक कई बार चूमा था, पकड़कर निचोड़ा था
मेरे जवानी के अंगारों यानी मेरे निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर मेरा दूध भी पिया था
वो एकबार फिर से उनके सामने नंगे खड़े थे, अपना आदर सत्कार करवाने के लिए
ये मेरे प्यारे पापा के फ़ेवरेट थे
उन्होने दोनो हाथो से उसे दबोचा और उसे अपने पंजों में दबाकर जोर -२ से दबाने लगे
“आआअह्हह्ह्ह्ह पापाआआआआ ……. धीरे sssssssss “
पर मैं चाहती थी की वो उन्हें और जोर से दबाएं , उन्हें खा जाए
शायद मेरे दिल की बात सो समझ गए और उन्हें करीब लाकर उन्हें अपने चेहरे पर रगड़ने लगे
हल्की दादी की चुभन मेरे सेन्सिटिव निप्पल्स को रगड़ दे गयी
और मेरे मुँह से आहहह निकल गयी
“आआआआआअहह……… धीरे मेरे स्वीटू पापा……आपके ही है अब तो ये…..पूरी लाइफ के लिए…….आराम से प्यार करो इन्हे…”
मैने सुधीर सर के पीछे हाथ रखकर उनके चेहरे को अपने में समेट लिया
कितना प्यार था इस आलिंगन में
पर प्यार तो मेरे नीचे भी उबाले खा रहा था
सुधीर सर का लॅंड रह रहकर हिचकोले खाकर अपने खड़े होने का एहसास दिला रहा था
मेरी छोटी सी शॉर्ट से झाँक रहे चूत के लिप्स उस कंपन को महसूस करके पानी-2 हुए जा रहे थे
चूत से रिस रहा पानी सर के पायजामे को गीला करता हुआ लॅंड तक पहुँच चुका था
और अब उनके लॅंड का हाल एक भूखे शेर जैसा हो गया था जिसके मुँह खून लग जाता है
यहाँ खून तो नही पर उससे भी नशीला पानी लग चुका था उसके मुँह
करीब 10 मिनट तक सर मेरे बूब्स को प्यार करते रहे
इसी बीच मैने अपनी उस छोटी सी शॉर्ट को खोलकर नीचे की तरफ खिसका दिया और अब मैं अपने होने वाले पापा के उपर पूरी नंगी लेटी थी
कोई दूर से देखले तो लगे जैसे कोई नंगी नागिन मोटे पेड़ के तने पर आराम फरमा रही है
सर के हाथ मेरे कूल्हों पर आ लगे और वो उन्हे धीरे-2 दबाकर मुझे उपर की तरफ लाने लगे, उनके होंठ मेरे जिस्म से हट ही नही रहे थे, नीचे से उनके कठोर पंजो ने मेरे कुल्हो को पकड़कर मुझे उपर खिसकना जारी रखा और उपर वो मेरी गर्दन के बाद बूब्स और फिर नाभि वाले हिस्से को चूमने चाटने में लगे हुए थे
आज हम इतने आराम और प्यार से ये सब कर पा रहे थे क्योंकि वक़्त बहुत था हमारे पास
वहाँ मॉम बैंक से अपने जेवर लेने गयी थी और पीछे घर पर उनका होने वाला पति उनका खजाना लूटने में व्यस्त था
वो खजाना जिसे उन्होने अपनी कोख से पैदा करके अनमोल बनाया था, उसे ही उनके होने वाले पति अपने लॅंड का ताज बनाने की तैयारी में थे
पर वो ये करने वाले थे ये तो अभी उन्हे भी पता नही था
मेरे दिमाग़ में तो आ ही चुका था की वो आज सर का लॅंड लेकर रहूंगी
क्योंकि इसके बिनोद के मोटे लॅंड का असली मज़ा लेना चाहती थी
और वो काम पहली चुदाई के बाद ही हो सकता था
जिसे मैं सुधीर सर से ही करवाना चाहती थी
अब मैं पूरी नंगी थी और सुधीर सर मेरी चूत का गरमा गरम पानी पीना चाहते थे
जो उन्होने पिया भी
उनके कपडे भी अब पूरी तरह से उतर चुके थे और अपना कड़क लंड हाथ में लेकर वो उसे शांत करने की असफल कोशिश कर रहे थे
मैं पूरी बेड पर खड़ी हो चुकी थी और अजंता अलोरा की मूर्ति की तरह अपनी एक टाँगे उनके कंधे से सटाकर अपनी चूत उनके चेहरे पर रगड़ रही थी
और अपनी टपक रही चूत को उनके कुलबुला रहे होंठो से नुचवाकर सिसकारियां भर रही थी
सर का तो मुँह बंद हो गया पर मेरा खुला था
मैं आनंदमयी सिसकारी मारती हुई एक सियार की तरह गर्दन उपर करके कराह उठी
“आआआआआआआआआआहह…………………………. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……. म्म्म्मआमममममम…. य्ाआआआआआआरररर कितना मज़ा मिलता है ये करवाकर……………… उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…….. अंदर तक “
अंदर तक तो सुधीर की जीभ जा रही थी
उन्हे ऐसा लग रहा था की वो जीभ नही ड्रिल मशीन है जो किसी गीली चट्टान को भेद रही है और अंदर से पानी की धार रिसकर उस ड्रिल मशीन को ही भिगो रही है
उनका चेहरा अनु के रज़ से भीग चुका था
वो मुँह खोलकर जितना हो सकता था उस क़ीमती रस को पी रहे थे और बाकी उनकी छाती पर गिरकर उन्हे सुगंधित कर रहा था
अनु ने उनके सर के बाल पकड़कर अपनी चूत की रेल उनके चेहरे पर भगानी शुरू कर दी
“आआआआआआआहह पापा…………………………… ओह मेरे प्यारे पापा……………..सककककककक इट हार्ड पापा…….. ज़ोर से चूसो ना पापा……..अपनी प्यारी बेटी की छूट को……आआआआआआआआआआआहह ….. म्म्म्मआममममममममममम….. मजाआाआआअ एयेए रहा है पापा…….हन ऐसे ही आआआआआअहह ओह मेरी क्लिट एस्स…..एसस्स….पापा यही दब्ाओ इसे….आआआहह काटो नही ना पापा…………….सिर्फ़ होंठो से चोसू इसे….आआआआआहह एसस्स……ऐसे ही ….ओह मेरे प्यारे पापा………..कितने अछे हो आप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प……अहह…… अहह…. आई एम् कमिंग……………….इम कमिंग ओंन युवर फेस पापा….ओंन युवर फेस……”
इतना कहते हुए उसने ढेर सारा देसी घी निकालकर अपने प्यारे पापा के चेहरे को चोपड़ दिया
उस घी की खुश्बू 4 दिन तक जाने वाली नही थी उनके अंदर से अब…..
जब मैं झड़ कर नीचे उनकी गोद में गिरी तो उनका लॅंड मेरी गांड पर आ लगा और उसपर ठोकरे मारने लगा
मैं सुधीर सर के सीने से लगकर हांफती हुई अपनी साँसे काबू करने की कोशिश कर रही थी
इतने जबरदस्त तरीके से शायद मैं आज तक नहीं झड़ी थी
उनके पूरे शरीर पर मेरी चूत से निकला चिपचिपा रस लग गया था
और अब तो मैं भी उस रस में सराबोर हो चुकी थी
पर ये रेशमी एहसास दोनो को ही काफ़ी अक्चा लग रहा था
मैने धीरे से सिर उठाया और सिर के होंठो को चूम लिया
वो किस्स कब एक स्मूच में बदल गयी मुझे भी पता नही चला
ज़्यादा ज़ोर तो सुधीर सर की तरफ से लग रहा था
क्योंकि उनकी उत्तेजना चरम पर थी इस वक़्त
वो कभी मेरे होंठो को चूमते और कभी मेरे बूब्स को
कभी मेरी बाजुएं उठाकर मेरी बगल को चाटने लगते तो कभी मेरे निप्पल्स को दांतों के बीच भींचकर उनके जोर से भींचते
ऐसा करते-2 मेरे अंदर भी फिर से एक नयी उत्तेजना का निर्माण हो चक्का था
अब मेरी चूत पहले से ज़्यादा कुलबुला रही थी और अब उसे जीभ से ज़्यादा कुछ चाहिए था
पर उसे अंदर लेने से पहले और सर को उनकी लाइफ का सबसे बड़ा गिफ्ट और सर्प्राइज़ देने से पहले मैं उनके लॅंड को भी तार कर देना चाहती थी
इसलिए मैं उनके पैरों के बीच घोड़ी बनकर बैठ गयी और उनके लॅंड को दोनो हाथों से पकड़कर सहलाया और फिर धीरे-2 उसे निगलने लगी
और देखते-2 देखते मैं उसे पूरा निगल गयी
सुधीर सर अपनी कोहनियो पर टेक लगाकर मेरी कलाकारी को निहार रहे थे
और सीसीया रहे थे
“ओह मेरी ज़ाआाआआआनन्न……. अहह…. क्या बात है……तुम तो अपनी माँ से भी एक कदम आगे हो इसे चूसने में ……शाबाश मेरी लाडो……मेरी बिटिया……मेरी रानी…….चूस इसे…आआआआआआअहह दाँत नही सिर्फ़ होंठ……अहह….ज़ोर से….शाबाश….मेरी गुड़िया……”
जैसे मैं उन्हे निर्देशित कर रही थी अपनी चूत चूसने के समय, वैसे ही वो भी मुझे कर रहे थे इस वक़्त अपना लॅंड चुस्वाते हुए
अब मैने उसे पूरी तरह से गीला कर दिया था
यानी वो चूत में जाने के लिए पूरा तैयार था
मैने उसे मुँह से निकाल दिया और उछलकर फिर से उनकी गोद में आ चढ़ी और गीले होंठो से उन्हे फिर से स्मूच करने लगी
सुधीर : “अहह…..रोक क्यूँ दिया…इतना मज़ा आ रहा था…..5 मिनट और करती तो निकाल देता यहीं ….तेरे मुँह में …….”
पर उन्हे क्या पता था की आज मैं उनके माल को अपने मुँह में नही बल्कि कहीं और लेने के मूड में थी
मैं अपनी गांड से लेकर छूट तक को उनके खड़े लॅंड पर रगड़ रही थी
ऐसा करने में कई बार उनके लॅंड का सिरा मेरी चूत के होंठो मे फँस कर रह गया
जिससे उनके होंठो से आहह निकल गयी
आज जैसा लॅंड और छूट का संगम पहले कभी नही हुआ था
इसलिए वो थोड़ा सकुचा भी रहे थे
आज तक उन्होने और मैने कभी भी चूत में लॅंड डालने की कोशिश नही की थी
पर आज जो हो रहा था उसके बाद कुछ भी हो सकता था
मैं अपनी रसीली गांड आगे पीछे करती हुई उनके लॅंड को अपनी चूत के पानी से भिगो रही थी
मैं पीछे की तरफ जाती तो उनका लॅंड स्प्रिंग की तरह मेरी चूत से रगड़ ख़ाता हुआ मेरे सामने प्रकट हो जाता और मैं जब उस लॅंड पर घिस्से लगाती हुई आगे की तरफ आती तो वही लॅंड मेरी चूत की दरारों में जमा रस को निचोड़ता हुआ पीछे जाकर मेरी गांड को ठोकर मारता
इस खेल में दोनो को ही काफ़ी मज़ा आ रहा था
मैने सर के दोनो हाथ पीछे की तरफ बाँधकर उनके होंठो पर कब्जा जमाया हुआ था और नीचे का सारा खेल मैं ही कंट्रोल कर रही थी
और अचानक मैने अपनी गांड को मटकाना बंद कर दिया
और ये वो पल था जब उनका लॅंड मेरी टांगो के बीचो बीच था और मेरी चूत के होंठो में फँसा हुआ था
एक पल के लिए तो उन्हे कुछ समझ नही आया की मैं रुक क्यों गयी
पर जब मैने अपना एक हाथ नीचे करके उनके खड़े लॅंड को थोड़ा अड्जस्ट किया और उसका मुँह सीधा करके अपनी चूत के मुहाने पर लगाया तो उनका शक यकीन में बदल गया की मैं क्या करने वाली हूँ
एक ही पल मे उनके चेहरे के भाव कई बार चेंज हुए
आश्चर्य के साथ एक नयी खुशी का एहसास उनकी आँखो में सॉफ दिख रहा था
शायद इस दिन का उन्हे भी काफ़ी दिनों से इंतजार था
आख़िर होता भी क्यों नही
एक कच्ची कली की चूत की फांको को अपने लॅंड से ककड़ी की तरह चीरने का मज़ा एक मर्द ही जान सकता है
और आज वो चीरम चिराई होने वाली थी
लॅंड और चूत दोनो ही काफ़ी गीले थे
बाकी का काम सर के उस जोरदार झटके ने कर दिया जो उन्होने मेरी कमर को पकड़कर नीचे से मारा
मेरी आँखे उबल कर बाहर गिरने को हो गयी
उनका मोटा लॅंड मेरी चूत में आधा धँस चुका था
पहले जो मज़ा मिल रहा था वो एकदम से सज़ा बन गया
पहली बार की चुदाई में जो दर्द होता है उसके बारे में तो मैं भूल ही गयी थी
पर अब कुछ नही हो सकता था
मैं उन्हे मना करना चाहती थी पर मेरे मुँह से कुछ निकल नही रहा था
इसका फ़ायदा उठाकर उन्होने मेरी कमर को पकड़कर मुझे थोड़ा उपर उठाया और फिर उतनी ही तेज़ी से वापिस नीचे अपने लॅंड पर पटक दिया
घापप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प की जोरदार आवाज़ के साथ उनका पूरा लोढ़ा मेरी चूत की सारी बंदिशे तोड़ता हुआ अंदर घुसता चला गया
“आआआआआआआआआआआअहह……. मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गाइिईईईईईईईईईईईईईईईईईईई पापा…………………..”
मैं कुछ और ना बोल पाई क्योंकि उन्होने मेरे होंठो पर अपने होंठ रखकर मुझे चुप करवा दिया
मेरे आँसू लुढ़क कर नीचे गिर रहे थे
और उनका लॅंड धीरे-2 मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था
मेरा नीचे वाला हिस्सा एकदम से जाम हो गया
और जब हल्का सेंसेशन आना शुरू हुआ तो सर का घोड़ा मेरी चूत के अस्तबल में तेज़ी से दौड़े जा रहा था
उन्होंने मुझे बीएड पर लिटाकर मेरी चूत में लंड डालकर ऊपर से जोरदार झटके मारकर मेरी चूत चोदने में लगे हुए थे
अब तो मुझे भी मज़ा आने लगा था
वो पहला दर्द का पड़ाव पार हो चुका था
नयी मंज़िलों के दरवाजे खुल चुके थे
उनके लॅंड ने अंदर दाखिल होकर नये-2 रास्तों को बना दिया था जिनपर आज के बाद ना जाने कितने लॅंड ले जाने वाली थी मैं
पर ये मज़ा इस बार ज़्यादा देर तक नही चल सका
क्योंकि सर तो काफ़ी देर से उत्तेजित थे
और मेरी चूत भी काफ़ी टाइट थी
उसके सामने उनके लॅंड ने घुटने टेक दिए और मेरी चूत के अंदर ही उन्होने एक के बाद एक कई पिचकारियाँ मारकर अपने प्यार का सबूत मेरे अंदर जमा कर दिया
“आआआआआआआअहह मेरी जनंननननननननननननणणन् मैं तो गया……आआआआआआअहह आई लव यु माय स्वीट हार्ट ”
मैं : “आई लव यू टू पापा”
मैने तो पहले से ही सोच लिया था की बाद में गोली ले लूँगी
मॉम के ड्रावर में मैने * पिल की काफ़ी गोलियाँ देखी थी
उनमें से एक मेरे काम आने वाली थी आज
उसके बाद मैं काफ़ी देर तक उसी पोज़िशन में उनके उपर लेटी रही
और वो मुझे प्यार करते रहे
ये तो अभी शुरुवात थी , आज के बाद ऐसे कई मौके आने वाले थे












