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सर ने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रख दिए तो मैं सिसक उठी
मेरी नजरें माँ की तरफ ही थी
वो जिस अंदाज़ से काम कर रही थी उससे पता चल रहा था कि वो बस किचन से निकलने वाली है

इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे सर के पास से उठना पड़ा
मेरी चूत का पानी सर का लंड चख चुका था
उसे पसंद भी आया था
इसलिए वह किसी कड़क खीरे की तरह लहरा रहा था
मैंने माँ की तरफ इशारा करके सर को समझाया, तो उन्होंने अनमने मन से अपना लंड वापस अंदर ढकेल दिया
और फिर मैं अपने कमरे में आ गई
वैसे भी आज की रात काफी लंबी होने वाली थी…

मॉम ने जो खाना बनाया था वो सच में काफ़ी स्वादिष्ट था
आज उन्होने उसमें प्यार भी मिलाया था अपना जो वो सुधीर सर पर लुटाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी
बाद में कस्टर्ड ने समां ही बाँध दिया
मेरा तो मन कर रहा था की अपने पूरे जिस्म पर वो कस्टर्ड लगा लूं और सुधीर सर से उसे चटवाऊ

उफ़फ्फ़……ये मॉम ना होती बीच में तो कितना मज़ा आता हम दोनो को ये सब करने में
जो भी मेरा मन करता वो उनसे करवाती
उन्हे अपने इशारों पर नचवाती
उन्हे अपना कुत्ता बनाकर रखती….
हाय …..

कुत्ता क्यों बोल रही हूँ उन्हे मैं
कुत्तिया तो मैं बनी फिर रही हूँ उनके लिए
जो उनके कड़क लॅंड को अंदर लेने के लिए तड़प रही है
उनके सामने आते ही अपनी टांगे खोलकर उनके कदमो में गिर जाने का मन करता है
किसी कुतिया की तरह….

खाने के बाद मॉम बाथरुम में चली गयी चेंज करने और सुधीर सर भी हिचकिचाते हुए मॉम के रूम की तरफ चल दिए
मुझे इसी मौके की तलाश थी, मैने जो प्लान बनाए थे, उनमे से पहला यही था, उनके रंग में भंग डालना

इसलिए मैं भी उछलकर उनके पीछे-2 रूम में चली गयी

सर बेड पर लेटे ही थे की मैं भागकर गयी और उनके उपर कूद गयी
जिस हिसाब से मॉम बाथरूम में चेंज करने गयी थी, उन्हे अभी 5 मिनट लगने ही वाले थे
इसलिए वो सारी केल्कुलेशन मेरे दिमाग़ में पहले से थी
इन 5 मिनट का इस्तेमाल में अच्छे से करना चाहती थी

सर हड़बड़ा कर रह गये
उन्हे शायद उम्मीद नही थी की मैं ऐसी हरकत करूँगी
वो कुछ समझ पाते इससे पहले ही मैने उनके होंठो पर अपने होंठ रखे और उन्हे चूसना शुरू कर दिया
मेरे कस्टर्ड से भीगे होंठ जब उनके मुँह से लगे तो उनसे भी नही रहा गया और वो उनका रस पूरी ताक़त लगा कर चूसने लगे

उनके हाथ मेरे कड़क कुल्हो पर आ लगे और वो उन्हे दबा-दबाकर मज़े लेते हुए मेरे होंठ चूसने लगे
अब तक शायद उन्हे भी इस बात का यकीन हो गया था की मैं जो भी कर रही हूँ सब कुछ हिसाब से ही कर रही हू
इस हिसाब से की मॉम उनकी चोरी पकड़ ना पाए
इसलिए उन्होने अब शायद डरना छोड़ दिया था और सब कुछ मेरे उपर ही छोड़ कर इस पल के मज़े लेने लगे बस

और तभी मेरे तेज कानो ने बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ सुन ली और एक झटके से मैं साइड में होकर अपना हुलिया ठीक करके बैठ गयी

मॉम जब रूम में आई तो मुझे सुधीर सर की बगल में बैठे देखकर चोंक गयी
मतलब इसलिए नही की मैं उनके करीब बैठी थी, बल्कि इसलिए की मुझे इस वक़्त उन्होंने वहां होना एक्सपेक्ट नही किया था

पर चौंक तो सुधीर सर और मैं भी गये
क्योंकि मॉम ने जो नाईटी पहनी हुई थी उसमें उन्हे देखकर हम दोनो की आँखे फटी की फटी रह गयी

उनका नशीला जिस्म उस सी थ्रू नाईटी में एकदम कमाल का लग रहा था
शायद वो आज पूरे मूड में थी सर के साथ मज़े लेने के
पर मुझे उस रूम में देखकर उनका मूड अपसेट सा हो गया था शायद

मॉम : “अनु….तुम यहां क्या कर रहे हो…..जाओ अब अपने रूम में , इट्स टाइम टू स्लीप”

मैं बोली : “मुझे पापा के साथ सोना है, आज पहली बार पापा घर पर रुके हैं और मैं अकेली सो जाऊं , ऐसा तो हो ही नही सकता, है ना पापा “

इतना कहकर मैने सुधीर सर को साइड से एक झप्पी डाल ली और उनकी टॅंगो पर अपनी टांगे रख दी, जैसे उनपर अपना हक जता रही हूँ मैं

शेफाली : “बेटा….बोला ना अपने रूम में जाओ…”

इस बार मॉम का लहज़ा थोड़ा सख़्त था और वो आँखे तरेर कर बोल रही थी
उनके लहजे से सॉफ पता चल रहा था की उन्हे अपने सपने धराशायी होते दिख रहे थे

मैं : “पर पापा भी तो यहीं है ना, इन्हे भी बोलो मेरे साथ मेरे रूम में चले..”

मॉम ने गहरी साँस छोड़ी, जैसे उन्होने हथियार डाल दिए हो

तब सुधीर सर ने मोर्चा संभाला : “रहने दो ना शेफाली इसे यहीं ….बच्ची है ये, शायद कुछ ज़्यादा ही लाड आ रहा है इसे मुझपर आज”

वो शायद कहना चाह रहे थे की थोड़ी देर की ही तो बात है, सोने दो इसको, अपना प्रोग्राम बाद में कर लेंगे

मॉम : “बच्ची नही है ये….बच्चे पैदा करने लायक हो गयी है, और अक्ल घुटनों में है अब तक..”

मॉम का गुस्सा देखते ही बनता था
मुझे उनकी हालत देखकर अंदर ही अंदर हँसी भी आ रही थी
और तरस भी.

मैं भी सुधीर सर को अपना पक्ष लेते देखकर उनसे और ज़्यादा चिपक गयी
मॉम भुनभुनाती हुई दूसरी तरफ जाकर बैठ गयी और अपना फोन चेक करने लगी
अब मैं बीच में थी और मेरे अगल बगल सुधीर सर और माँ थे
बेचारे एक दूसरे से मिलने के लिए कैसे तड़प रहे थे

मैं कुछ बात करने लगी तो मॉम ने डांट कर चुप करवा दिया मुझे और बोली : “अनु…ये सोने का टाइम है, चुपचाप सो जाओ..”

शायद वो चाहती थी की मैं जल्दी से सो जाऊं ताकि वो दोनो अपना प्रोग्राम स्टार्ट कर सके..

मैने जो प्लान बनाया था वो अभी तक तो सही जा रहा था इसलिए मैने आँखे बंद की और सोने का नाटक करने लगी

सर भी एक बुक पड़ते रहे जो मैने शेल्फ से निकाली थी और मॉम अपने मोबाइल में रील्स देखती रही

करीब आधे घंटे बाद मैने जान बूझकर हल्के-2 खर्राटे भरना शुरू कर दिए, जिससे लगे की मैं गहरी नींद में हूँ
मॉम का हाथ मेरी पीठ पर आया और उन्होने मुझे हिलाया
“अनु…..ओ अनु….सो गयी क्या….”
वो मुझे टटोल रही थी शायद, पर मैने कोई रिस्पॉन्स नही दिया, उसी हालत में पड़ी रही आँखे भींच कर

तब वो धीरे से फुसफुसाई : “लगता है सो गयी…..आप आ जाओ इस तरफ…”
सुधीर : “मैं इसे उठाकर रूम में लिटा देता हूँ …”
मॉम (हंसते हुए) : “उठा कर देख लो, पता चल जायेगा की सच में अब ये बच्ची नही रह गयी है”
सर ने मुझे उठाना चाहा पर मैने अपना पूरा भार बेड पर छोड़ दिया, ऐसे में सर तो क्या उनका बाप भी मुझे बेड से नही उठा सकता था

सुधीर की हालत देखकर मॉम हँसने लगी और बोली : “बोला था ना मैने, अब छोड़ो उसे, यहाँ आ जाओ, मेरी तरफ”

उनके बुलावे के हर शब्द से सैक्स टपक रहा था जिसे वो सुधीर सर से चटवाना चाहती थी

सर ने मेरे हाथ को साइड करते हुए, मेमें री टाँगो को धीरे से पकड़ा और उन्हे भी बेड पर रख दिया
मैने सोते वक़्त एक स्कर्ट और टी शर्ट पहनी हुई थी, इसलिए उनकी टांगे मेरी जाँघो में दब कर रह गयी
मैं चाह कर भी सिसकारी नही मार सकी

सर उठकर दूसरी तरफ गये और मॉम ने खुले हाथो से उन्हे अपने उपर गिरा सा लिया
दोनो मिलने के साथ ही एक गहरी स्मूच में डूब गये
भले ही आज दिन में उन्होने जी भरकर चुदाई की थी पर ये सैक्स चीज़ ही ऐसी है , हर बार पहले से ज़्यादा मज़ा आता है

मन तो मेरा भी कर रहा था की उनकी तरफ घूम जाऊं और देखु की कैसे किस्स कर रहे है वो दोनो
पर सोने का नाटक करना छोड़ देती तो वो मज़े ना ले पाती जो अब ले पा रही थी मैं

माँ के उपर सर का भार ज़्यादा देर तक टीका नही रह सका और वो फिसलकर मेरी तरफ गिर गये, अब उनका शरीर मुझसे छू रहा था

मॉम अभी भी उन्हे चूमने में लगी हुई थी

सुधीर : “यहाँ थोड़ी परेशानी रहेगी, दूसरे रूम में चले क्या ?”

मॉम : “मुझे फकिंग सिर्फ़ अपने बेड पर ही पसंद है…”

इतना कहते हुए उन्होने सुधीर सिर को फिर से अपनी तरफ खींच लिया और स्मूच करने लगी

सर ने स्मूच तोड़ी और अपने दिल की बात कही : “पर कही…बीच ये जाग गयी तो…”

मॉम समझ गयी की उन्हे डर लग रहा था शायद, अनु के सामने वो ऐसे नही दिखना चाहते थे

माँ उठी और उन्होने लाइट बंद कर दी और एक नाइट बल्ब जला दिया, पूरे रूम में एक नशीला सा ब्लू कलर फैल गया
मैने भी हल्के अंधेरे का फ़ायदा उठाकर कुन्मूनाते हुए एक करवट ली और उनकी तरफ अपना चेहरा घुमा लिया

अब मैं उन्हे सॉफ देख पा रही थी

वापिस बेड पर आने से पहले मॉम ने अपनी सैक्सी नाईटी उतार दी जिसके अंदर उन्होने कुछ भी नही पहना हुआ था

नीली रोशनी में उनका दूधिया बदन एक अलग ही नशा बिखेर रहा था

सर का हाथ अपने लॅंड पर चला गया जिसे वो धीरे-2 मसलने लगे

मेरे चेहरे से सिर्फ़ 1 हाथ की दूरी पर था सर का लॅंड, मन तो कर रहा था की सरक कर अपना चेहरा उनकी गोद रख दूँ
काश ऐसा कर सकती उस वक़्त

पर अभी के लिए तो मुझे मॉम और सर को मज़े लेते देखना था
माँ ने अपने दोनो बूब्स हाथो में पकड़े और उन्हे सर के चेहरे के सामने आकर छोड़ दिया
मोटे मुम्मे किसी पानी भरे गुब्बारों की तरह सर के चेहरे से टकरा कर थिरकने लगे

सर ने उन्हें चूसना शुरू कर दिया

सुधीर सर ने अपनी जीभ निकाल कर उन मुम्मो को चाटने और चूसने का प्रयास किया
तब तक माँ खिलखिलती हुई उन्हे सर के जिस्म से रगड़ती हुई नीचे तक आई और उनकी शॉर्ट्स को खींचकर नीचे कर दिया
अब उनका लॅंड जो काफ़ी देर तक अंडरवीयर की क़ैद में था, उछलकर लड़ने के लिए मैदान में आ गया
वो जब स्प्रिंग की तरह उछला तो उसके प्रिकम की बूंदे छिटककर मेरे चेहरे तक आई, कुछ मेरे गालो पर पड़ी रह गयी और जो होंठो पर आई उन्हे मैं चाट गयी

वही चिरपरिचित सुगंधित रस की खुश्बू
मुझे तो आज के दिन खुद पर भी विश्वास नही था की मैं इस अवस्था में कब तक रह पाऊँगी
मुझे तो लग रहा था की मैं किसी भी वक़्त अपना आपा खोकर सर पर टूट पड़ूँगी, बाद में जो होगा देखा जाएगा

पर अभी के लिए उन पलों पर माँ का कब्जा था
पलों पर ही नही उनके लॅंड पर भी
उन्होने सर के लॅंड को 2-4 बार हथेलियों के बीच ज़ोर से रगड़ा और फिर एक गहरी साँस लेकर उसे निगल गयी

सर की गांड हवा में तैरने लगी और सी सी की आवाज़ों से पूरा कमरा गूँज गया

लॅंड तो उनका मेरी माँ चूस रही थी और लार मेरे मुँह से बहकर बिस्तर पर गिर रही थी
मुँह से भी और चूत से भी

मॉम को मैने पहली बार इतने करीब से लॅंड चूसते हुए देखा
वो उसे हाथ में पकड़ कर, माथे से लगा कर, नीचे की बॉल्स को चाट रही थी
मुझे भी कुछ नया सीखने को मिल रहा था

कुछ देर तक चूसने के बाद सुधीर सर ने उन्हें बेड पर लिटाया और खुद उनके पैरों के बीच पहुँच गये
अब टाइम था एहसान उतारने का

सुधीर सर की लपलपाती हुई जीभ जैसे ही माँ की चूत में गयी वो बेड की चादर पकड़ कर ज़ोर से चिल्ला पड़ी

“आआआआआआअहह उहह सुधीईईईईरर्र्र्र्ररर…….. मररर्ररर गयी………आआआआआअहह”


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सुधीर सर बेचारे मेरे चेहरे की तरफ देखने लगे की कहीं उनकी आवाज़ से मेरी नींद तो नही खुल गयी
तो मॉम बोली : “तुम इसकी फ़िक्र ना करो, एक बार सोने के बाद तो इसको ढोल नगाड़े भी नही उठा सकते….तुम कंटिन्यू करो….”

मॉम की बात सही थी…पर वो बात सोने के बाद की कर रही थी
जब मैं जाग रही होती हूँ इस बात का तो उन्हे पता भी नही है

कोई इस वक़्त मेरा जिस्म छू भी लेता तो खुद भी सुलग कर रह जाता, इतनी गर्म हुई पड़ी थी मैं
पहले भी मैने उनका ये खेल देखा था छुप कर
पर कमरे के बाहर से देखने में और एकदम करीब से देखने में ज़मीन आसमान का अंतर था
उस वक़्त तो मैं अपने बूब्स और चूत को हाथ भी लगा सकती थी, उन्हे दबाकर हल्की सिसकारियाँ भी मार सकती थी
पर इस वक़्त तो मेरा हिलना डुलना भी बंद था
काश ये कमरे में रहने वाला प्लान ना ही बनाती मैं

पर अब बना ही लिया है तो जिस बात को सोचकर बनाया था उसका इंतजार करना तो बनता ही है

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