Mera Safarnama – Update 10

Mera Safarnama - Kamuk pariwarik Chudai Ki Kahani
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Update 10



Abi applogo ne pada kaise ham dono ne masti kiya aur fir thakar ekdusare se lipat kar bed pe lete rahe….ab aage…..


सुधा दी पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी, मैंने अपनी जीभ से उनके कान को चाटते हुए उनसे पूछा कि दी आपको कैसा लगा…….
सुधा दी: बहुत ही अच्छा
ऐसा लग रहा था कि मैं हवा में उड़ रही हूं….. जैसे कि मैं डांस कर रही हूं….. awasome……
फिर हमारी नजर घड़ी पर गयी तो पता चला कि 9 बज चुके थे , दी घबरा कर उठ बैठी और जल्दी से वासरूम में चली गई, खुद को साफ करने के बाद कपड़े पहन कर वापस आई और बोली जाओ कपड़े पहन लो…..
मैं भी अपने कपड़े पहन लिए और जब दी के तरफ देखा तो पता चला कि वो काफी तनाव में हैं….
मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ…..
सुधा दी: हमलोग इतनी देर तक ये सब करते रहे , रस्सी या शिखा ने तो नहीं देखा होगा ना…..
मैं: नहीं देखा होगा , आप परेशान ना हों….
आप अपने रूम में जाकर देख लो कि वो लोग सो रहे हैं कि नहीं, खुद ही पता चल जाएगा…..
सुधा दी: सही कह रहे हो,
फिर सुधा दी चली गई…. उनके जाने के बाद मुझे अपने लन्ड में दर्द हुआ तो मैंने shorts को नीचे कर के देखा तो पता चला कि मेरे लन्ड की चमड़ी पूरी तरह से छिल चुकी है…. उसमें से हल्का हल्का खून भी निकल रहा है…. खैर मैंने उसपर दवा लगाया और फिर सो गया……
दोपहर में जब मैं खाना खाने दी के रूम में गया तो वहां मुझे सबकुछ नार्मल लगा , तो मैंने सुधा दी से धीरे से कहा कि आप फालतू में टेन्सन ले रही थी, देखिए सबकुछ नार्मल है…..
सुधा दी: हम्ममममममम

खाना खाने के बाद हमलोगो ने थोड़ा मस्ती की फिर मैं अपने रूम में आ गया…..
थोड़ी देर TV देखने के बाद फिर से सो गया….
करीब 5 बजे उठा और फ्रेश होकर जैसे ही बेड पर बैठा था कि मेरे रूम में रस्मी दी आ गयी और मेरे तरफ देख कर मुस्कुराई फिर बेड पर बैठते हुए मुझसे पूछा कि और बताओ सुबह तक लगे रहे ….. आज तो बहुत मौज किया…..
ये सुनकर मेरे होश उड़ गए…. फिर मैंने कहा आप क्या बोल रही हो दी….
रस्मी दी: ज्यादा नाटक मत करो , मैंने सबकुछ देखा तुम और सुधा क्या कर रहे थे…..
मैं : सबकुछ
रस्मी दी: हम्ममममममम
मैं: दी ये सब ऐसे ही होगया please आप किसी से कहना मत….. प्लीज़………
रस्मी दी: उसमें मेरा क्या फायदा….
मैं: आपको क्या चाहिए
रस्मी दी: वही जो सुधा को दिया है….

ऐसा कहते हुए रस्मी दी सीधा मेरे उपर सवार हो गयी….मेरा लन्ड फन निकाल फुफकारने लगा…
रस्मी दी मरे जांघो पर बैठ अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रख दिया…. और झुककर मेरे होंठों को चूमने लगी….
ये दुसरी बार था जब हम दोनों के बीच चुम्बन हो रहा था…. हमारी आंखे बंद थी और हमारे होंठ कुस्ती लड़ रहे थे…… कितने रसिले होंठ थे रस्मी दी के… मैं बयां नहीं कर सकता……

Wait for next update…..

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