मेरी मॉम अपनी गांड मरवाने की प्लानिंग कर रही थी
ये सुनकर अचानक मुझे पता नही क्या हुआ,
मैं एकदम से कमरे में घुसती हुई बोली : “मॉम .मैं आ गयी….”
और उन्हे अपने बिस्तर पर देखकर मैने चौंकने का नाटक भी किया
जैसे मुझे कुछ पता ही नही था की वो वहाँ है
अब आलम ये था की मैं उनके बेड के बिल्कुल करीब खड़ी थी
और वो दोनो एकदम नंगे लेटे थे, मेरे ही बेड पर
बेचारों का चेहरा देखने लायक था
पर देखने लायक तो मेरे निप्पल्स भी थे
जो शर्ट पहने होने के बावजूद ऐसे चमक रहे थे जैसे कुछ पहना ही नही है मैने..
पता नही क्या होने वाला था अब उस कमरे में.
सबसे बुरा हाल तो सुधीर सर का था, जिनका लंड सिकुड़ कर सुखे करेले जैसा हो चुका था
बेचारे सुधीर सर
उनके अरमानों पर मैंने पानी फेर दिया था
वो आदमी मेरे बारे में सोच रहा होगा कि एक तो खुद ही घर पर भेजती है फिर खुद ही दनदनाती हुई घर में आ जाती है
आख़िर चल क्या रहा है इस छोरी के दिमाग़ में

माँ भी मुझसे नजरें चुरा रही थी
उनका सोने जैसा बदन खुल कर मेरे सामने था
मन तो कर रहा था की बीच में कूद जाऊ
पर ये मौका नहीं था इसके लिए
इसलिए मुझे थोड़ा इंतजार करना सही लगा
मैंने अपना बैग एक तरफ रखा और अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए बाथरूम में घुस गयी
और अंदर जाने से पहले, मैंने अपनी शर्ट उतार दी और मेरे सांवले स्तन और चमकते हुए निपल्स को देखकर सुधीर सर की आंखें खुली की खुली रह गईं.

उन्हें आश्चर्य हो रहा था कि मेरी मां के सामने मुझमें इतनी हिम्मत कैसे आ गई.
लेकिन मैंने इसे पहले ही नोटिस कर लिया था.
माँ की आँखे झुकी हुई थी , वो मेरी तरफ नहीं देख रही थी और मुझसे नज़रें चुरा रही थी
इसलिए मैंने सर को खुश करने के लिए ऐसा किया।
मेरे बाथरूम में जाने के बाद वे दोनों बिजली की गति से उठे, अपने कपड़े पहने और मेरे कमरे से बाहर आ गये
और मैं अपने कपड़े बदल कर उनके साथ ड्राइंग रूम में बैठ गयी
उन दोनों के चेहरे के रंग उड़े हुए थे
दोनों को पता था कि मैंने छुपकर उनकी चुदाई का खेल देखा है
लेकिन जिस तरह से मैंने आज उनके सामने आकर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया था, ये उनकी समझ से परे था
वो चाहकर भी कुछ बोल नहीं पा रहे थे
उनकी मनोदशा देखकर मुझे बहुत मजा आ रहा था
सर का मेरे साथ क्या रिश्ता है, ये बात नहीं पता है माँ को, पर माँ के साथ मेरा कैसा रिश्ता है, ये सर को पता है
और सर को ये बात पता है, माँ को ये भी नहीं पता
यानि आने वाले समय में माँ को काफी झटके मिलने वाले थे
मैंने एक शॉर्ट स्कर्ट और टी शर्ट पहनी थी, जो अक्सर मैं घर पर पहन कर घूमती थी, इसमें मेरी चिकनी टांगें और छाती उभर कर दिखती थी

सुधीर सर की नजरें मेरी गोरी जांघों को घूर रही थी, शायद इतने करीब से मेरी चिकनी जांघ उन्होंने पहली बार देखी थी
मन तो मेरा कर रहा था कि उनके चेहरे को अपनी जांघ पर रगड़ दू ताकी वो अपनी जीभ निकाल कर मेरे लेग पीस को अपनी लार से तरबतर कर दे
फिर उस टंगड़ी को खाने में जो मजा आएगा उसका कोई मुकाबला ही नहीं होगा
पर माँ के रहते अभी ये नहीं हो सकता था
पर मैंने भी सोच लिया था कि आज कुछ तो करके रहूंगी सर के साथ
इसलिए चाय पीने के बाद जब उन्होंने अपना बेग उठाया जाने के लिए तो मैं लगभाग उनसे लिपट ही पड़ी और बोली: “नहीं…आप नहीं जाओगे आज…यही रहोगे हमारे साथ…”
मेरी इस बचकानी हरकत को देख कर माँ और सुधीर सर दोनो हंसने लगे
सुधीर सर: “देखो अनु….तुम तो जानती हो….अब कुछ ही समय की बात है, मेरी और तुम्हारी माँ की शादी तो होने ही वाली है, फिर हम सब एक साथ ही रहेंगे….मेरे घर या यहाँ, जहाँ तुम चाहो …”
मैं : “नहीं…नहीं, मुझे नहीं पता, इतने सालो बाद मुझे पापा बोलने के लिए कोई मिला है, मैं उन्हें अब हर पल अपने पास रखना चाहती हूँ , प्लीज पापा, रुक जाओ ना, अपनी बेटी की बात नहीं मानोगे क्या? “
मैंने उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल किया
माँ: “ये कैसी जिद्द है बेटा, ये बोल तो रहे हैं, कुछ दिनों की बात है, फिर तुम ऐसी जिद क्यों कर रही हो…।”
अंदर से शायद उन्हें भी खुशी हो रही थी कि इसी बहाने उन्हें रात भर सुधीर के साथ रहने को मिलेगा…
इसलिए मैंने अपना जिद्द का पैमाना थोड़ा और बड़ा दिया
“नहीं….मुझे नहीं पता….आज आप कहीं नहीं जायेंगे….यही रुकेंगे…मेरे पास…आपको मेरी कसम ”
इतना कहकर मैंने बड़ी मासूमियत के साथ अपने आप को उनके जिस्म से चिपका दिया
माँ भी मेरा बचपना देखकर हंस दी
पर मैं और सुधीर सर ही जानते थे कि वो बचपना नहीं था मेरा
और ना ही मेरे लहज़े में कोई मासूमियत थी
मेरे नन्हें स्तन उनको चौड़े सीने से लगकर पिचक गए वे जैसे बंगाली रसगुल्ले की सारी मिठास निचोड़ कर दिवार से चिपका दिया हो
उनके खड़े हुए लंड को मैं अपनी नाभि के ऊपर रेंगता हुआ साफ महसूस कर पा रही थी
जैसे कोई सांप अपने मांद को तलाश रहा हो
उनके सीने की धड़कन मुझे साफ सुनाई पड़ रही थी जो चीख कर कह रही थी कि बस कर अनु, ऐसे क्यों तड़पा रही हो , वो भी अपनी माँ के सामने
उनके हाथो की चुभन मेरी पीठ पर इतने जोर से पढ़ रही थी मानो वो मेरे कपड़े ही फाड़ देंगे अगर कुछ देर तक ऐसे ही रही मैं
उनकी हालत देखकर मुझे तरस आ गया, इसलिए मैंने उन्हें छोड़ दिया
और तभी माँ भी बोल पड़ी: “देख लो ना आप, अगर रुक सकते हो आज की रात तो…रुक जाओ…”
ऐसा बोलते हुए वो अपनी जीभ को अपनी गालों के अंदरुनी भाग पर रखकर घुमा रही थी, मानो लंड चूसने का न्योता दे रही थी कि रुक तो जाओ, आज की रात सब मिलेगा , शादी जब होगी, तब होगी, सुहागरात तो आज ही मना लेते है
सैक्स एक ऐसी चीज है कि जितनी बार भी किया जाये वो अलग ही लगता है और हर बार नया आनंद प्रदान करता है
इसलिए दोनों की बात मानते हुए सुधीर सर ने भी हथियार डाल दिए
“ठीक है….ठीक है…..तुम इतना कह रहे हो तो….रुक जाता हूँ…”
आखिरी के 3 शब्द बोलते हुए वो टी शर्ट में उभरे मेरे निपल्स को निहार रहे थे
जैसे उन्ही से बात कर रहे हो

मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, मैंने दौड़ कर अपनी माँ को बाहों में भींच लिया
माँ भी मेरी ख़ुशी देखकर मुस्कुरा दी
और तभी मुझे अपने पीछे सुधीर सर का एहसास हुआ, वो भी हम माँ बेटी की ख़ुशी में शामिल होने चले आये थे
और मुझे बीच में रखते हुए, अपनी लंबी बाजुओं से मुझे और माँ को अपने आगोश में ले लिया
ऐसा लग रहा था जैसा परिवार पूरा हो गया था आज मेरा
माँ तो थी ही हमेशा से मेरे पास, अब पापा भी आ गये
जो मेरी गांड में अपना लंड चुभो कर मेरी जिंदगी में अपनी उपस्थिति का एहसास दिला रहे थे
और तभी सुधीर सर ने कुछ ऐसा किया, जिसकी ना तो माँ ने और ना ही मैंने उम्मीद की थी
उन्हें आगे झुककर माँ के होठों पर एक छोटी सी किस्स कर दी
जैसे अंग्रेज लोग करते हैं, ठीक वैसे ही
उसमें कोई सैक्स की भावना नहीं थी
बस स्नेह था
प्यार का
परिवार का
मैं भी उनके उन्मुक्त स्वभाव को देखकर खुश थी
सर ने अपना बैग रख दिया और माँ किचन का काम करने के लिए अंदर चली गई, आज वो कुछ स्पेशल बनाना चाहती थी
सुधीर सर ने घर पर कॉल करके ना आने का बहाना बना दिया
शायद दोस्त के साथ शादी में जाने का बहाना लगाया था उन्होंने
और फिर वो टॉवल लेकर बाथरूम में चले गए नहाने, वो भी जानते थे शायद कि आज रात उन्हें कितनी मेहनत करनी है जिसके लिए उनका फ्रेश रहना जरुरी था
मैं सोफ़े पर बैठ कर अपने अगले मूव की प्लानिंग करने लगी
और मेरा दिमाग तो ऐसे कामों में चालाक लोमड़ी जैसा चलता है, उनके नहाकर बाहर निकलने से पहले मैंने 2-4 अच्छे-2 प्लान बना लिए थे आज रात भर के लिए.
जैसे ही सुधीर सर नहाकर निकले मैंने उन्हें आवाज दी
“पापा…..यहाँ आओ ना प्लीज़, मेरी मदद करो…”
मेरे मुंह से ये सैक्सी स्टाइल में पापा शब्द सुनकर उनका हमेशा खड़ा हो जाता है, आज ये बात मैंने ज्यादा करीब से नोट की, उनके तौलिये में तंबू सा बन चुका था
सुधीर सर ने मुझे देखा तो मैं बुक शेल्फ के पास खड़ी होकर ऊपर देख रही थी
बुकशेल्फ़ के सबसे ऊपर वाली किताब की तरफ मैंने इशारा किया और कहा: “मुझे वो किताब निकालनी है, प्लीज मेरी हैल्प कीजिए”
वो बेचारे तौलिया में खड़े सोच रहे हैं कि पहले कपड़े पहनूं या मदद करूं
उनको मेरी शरारत का अंदाज़ा भी नहीं था
मैंने किचन की तरफ देखा, माँ मटर छील रही थी, सामने गोभी भी पड़ी थी, यानी अभी उन्हें काफी समय लगने वाला था
वो मेरे करीब आए तो मैं झट से एल्युमिनियम की सीढ़ी उठा लाई और बोली: “मैं ऊपर चढ़ती हूं, आप इसे पकड़े रहना, मैं गिर ना जाउ”
इतना कहकर मैं धीरे-2 ऊपर चढ़ गई और किताब निकालने लगी
अब वो समय था, जिसके लिए मैंने ये खेल रचा था
मेरी स्कर्ट के अंदर का पूरा भूगोल सर देख पा रहे थे
मेरी गोरी जांघे जिन्हे वो कुछ देर पहले तक घूर रहे थे, उसके अंदर का भी पूरा नंगापन उन्हें एक ही पल में दिखाई देने लगा
ऐसा लग रहा था जैसे आकाश में बिखरी सुंदरता देखकर उनकी आंखें चुंधिया गई हो
मेरी नंगी चूत और उसमें से रिस रहा मीठा पानी उन्हें साफ दिखाई दे रहा था
मैं भी बुक निकालने में पूरा समय ले रही थी
ताकि मेरे होने वाले पापा अपनी बेटी को अच्छे से निहार सके और जान सके कि उन्हें दहेज में क्या मिलने वाला है
उनके हाथ मेरी पिंडलियों पर थे, जिन्हें वो जोर से जकड़ कर उनका गुदाजपन महसूस कर रहे थे
फिर उनके हाथ धीरे-2 ऊपर खिसकने लगे, और मेरी जांघों से होते हुए मेरे कूल्हों पर आ लगे
मेरे हिप्स उन्हें शुरू से ही पसंद थे, मुझे गले लगाकर सबसे पहले उनके हाथ पीठ से होते हुए मेरे हिप्स पर ही आते थे, और उन्हें ऐसे मसलते जैसे आटा गूंध रहे हो
पहले वो सामने खड़े होकर आटा गूंधते थे, आज नीचे से गूंध रहे थे
फिर उन्होंने अपनी 2 उंगलीया ऊपर करते हुए हुए मेरी चूत के ऊपर लगा दी , जहाँ काफी गीलापन आ चुका था
फिर अपनी उंगली उस रस में डुबो कर उन्होंने उन्हें धीरे से मेरी चूत का दरवाजा खोला और उंगलियों को अंदर ढकेल दिया
मेरे मुँह से एक धीमी पर ठंडी सी सिसकारी निकल गई
“स्स्स्सस्स्स्स …… आआह्ह्हह्ह्ह्हhhhhhhhh………..”
सर का एंगल ऐसा था कि वो थोड़े साइड में होकर सामने की तरफ किचन में काम कर रही माँ को भी देख सकते थे
पर माँ अगर देखती तो उन्हें शेल्फ का पिछला हिसा ही दिखाती, जिसके पीछे मैं सीढ़ी पर चढ़कर अपने होने वाले पापा को मज़े दे रही थी
सुधीर सर की दो उंगली मेरी चूत में थी और उन्होंने अपने दहकते हुए होंथ मेरी पिंडलियो पर रख दिए और उसे काटकर, चाटकर, चूसकर अपनी प्यास बुझाने लगे
मैंने उन्हें देखा तो वो माँ के ऊपर नज़र रखे हुए ये काम कर रहे थे
और अचानक ना जाने कैसे उनका तौलिया निकल कर नीचे गिर गया और वो नंगे खड़े रह गए
मेरी तो हंसी निकल गई उनकी हालत देखकर
पर जब ऊपर से उनका खड़ा हुआ लंड देखा तो मेरी चूत का पानी और जोर से बहने लगा
मन तो कर रहा था कि ऊपर से ही कूद जाउ उनके लंड पर और घप्प से ले लू उसे अंदर
पर अभी उसका टाइम नहीं आया था
इसलिए ये लुका छुपी वाले खेल खेलने पड़ रहे थे
पर इसमे भी अलग ही मजा मिल रहा था हम दोनों को
सर का तौलिया गिर चुका था
पर उन्हें उठाने की हिम्मत नहीं हुई
शायद उन्हें अपनी टाइमिंग का भरोसा था
की माँ आई तो हमसे पहले ही वो तौलिया उठा कर पहन लेंगे
इसलिए वो मेरी चूत में उंगली करते हुए, अपनी जीभ से मेरी पिंडलियों को चाटते हुए, अपने लंड को हाथ में लेकर रगड़ने लगे
उफ़्फ़्फ़्फ़
कितना सेक्सी नजारा था वो
ऊपर से देखने में सुधीर सर इस वक्त हल्क जैसे लग रहे थे
जो नंगे खड़े होकर अपने लंड को मसल रहे थे
पर मैं नहीं चाहती थी कि वो मेरे और माँ के होते हुए अपना कीमती पानी ऐसे ही रगड़ कर निकाल दे
अभी मॉम तो रसोई में थी, इसलिए मुझे यानी उनकी प्यारी होने वाली बेटी को ही ये काम था
मै झट्ट से नीचे उतरी और ज़मीन पर बैठकर सर के लंड को मुंह में ले लिया
एक बार फिर सुधीर सर मेरी हिम्मत के कायल हो गए
बेचारी माँ किचन में सब्जी बना रही थी और उनकी लाड़ली बेटी उनके होने वाले पति का लंड चूसने में लगी थी

पर ये खेल ज्यादा देर नहीं चला क्योंकि माँ रसोई का काम छोड़ कर अचानक बाहर आने लगी,
सर का पूरा ध्यान वही पर था
इसलिए उन्होंने अपना लंड बाहर खींचा
झुककर अपना तौलिया उठाया और एक ही पल में बांध कर खड़े हो गए
मैंने भी अपना चेहरा साफ़ किया और सीढ़ी पर वापिस चढ़ गयी
माँ वहां आई और मुझे देखकर मुस्कुराई: “अपने पापा को कपड़े तो पहनने दे, उनसे काम करवाने की इतनी भी क्या जल्दी थी…”
मैं धीरे से फुसफुसाई: “कपड़े तो वैसे भी नहीं पहनने दोगी आप उन्हें आज…”
भले ही मैंने धीरे से बोली थी ये बात, पर दोनों ने सुन ली,
सर तो शरमा कर रह गए और माँ ने खिलखिलाते हुए मेरी टांग पर चपत लगाई और बोली: “कुछ ज्यादा ही शैतान हो गई है तू…चल उतर अब…इन्हें कपड़े पहनने दे…अभी के लिए”
आखिरी वाली लाइन बोलकर वो खुद ही हंस पड़ी और हंसती हुई ही बालकनी की तरफ निकल गई, जहां से उन्हें किचन टॉवल लेकर आना था शायद
सुधीर सर मुझे एक आखिरी बार घूरते हुए अंदर चले गए, माँ ने उनके लिए एक टी शर्ट और शॉर्ट्स निकाल दी थी, जो शायद पापा की थी
मैं भी वहां से उतरकर बाथरूम में चली गई और अपनी स्कर्ट को एक झटके में निकाल फेंका
टी शर्ट भी उतार दी क्योंकि नंगे होकर अपना शराबी शरीर को शीशे में देखने का मजा ही अलग है
मैंने अपना कसावदार जिस्म ऊपर से नीचे तक देखा, अपनी कुंवारी चूत पर ऊँगली ऱखकर उसे रगड़ा भी और उसे दिलासा दिया की जल्द ही तेरी प्यास बुझाने का काम करुँगी

शावर ऑन करके अनु ने अपने पूरे शरीर को सुगंधित बॉडीवाश से साफ किया
शेम्पू लगाया और चूत को भी अच्छे से रगड़-2 कर धोया, बाल तो उसने 2 दिन पहले ही काटे थे
क्योंकि ऐसा माहौल बन चुका था कि कभी भी कुछ भी करने की नौबत आ सकती थी
इसलिए पहले से ही तैयार रहना बेहतर था
माँ शायद आज कुछ ज्यादा ही खुश थी
इसलिए सर के लिए वो मीठे में कस्टर्ड भी बनाने लग गयी
यानि उनको किचन में अभी कुछ और टाइम लगने वाला था
मैं बाथरूम से निकली तो सर को सोफ़े पर आज का न्यूज़ पेपर पढ़ते देखा
वो सोफ़े पर लेटे हुए थे और अपनी सुबह की थकान उतार रहे थे
मेरे दिमाग में फिर से एक शरारत आई और मैं अपनी वही किताब उठा कर उनके पास पहुंच गई जो अभी ऊपर शेल्फ से उतारी थी
हालांकी उसे पढ़ने में मुझे कोई खास दिलचस्पी नहीं थी पर सर के साथ जो मजे लेने थे, उसमें वो काफी सहायक होने वाली थी
मैं भी अपने हिप्स उसी सोफ़े पर टीका कर बीचो बीच बैठ गई जिसपे सुधीर सर लेटे हुए थे
पहले तो वो चोंके क्योंकि दूसरे सोफे भी थे वहां पर
और मेरी मॉम भी सामने किचन में थी
पर मुझे जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था उनके होने या ना होने से
वो कुछ ना बोले और अख़बार पढ़ते रहे
माँ कुछ देर के लिए बाहर आई और बोली कि अभी आधा घंटा और लगेगा खाने में, कुछ और चाहिए इस बीच तो बता दो
सुधीर सर और मैंने मना कर दिया
वो हमें मुस्कुराकर देखती हुई वापस किचन में काम करने चली गई
और अचानक मैंने वो किया जिसके बारे में सर ने भी शायद नहीं सोचा था
मैं भी सोफे पर लेट गई और उनके कंधे पर सर रख दिया
हालांकी मेरा चेहरा बाहर की तरफ था जहां से मैं मॉम को किचन में काम करते हुए भी देख रही थी
पर ऐसे खुल्लम खुल्ला सुधीर सर के साथ एक ही सोफे पर लेटना और वो भी तंग हालात में, इस बात से सर को डर लग रहा था
वो फुसफुसाए: “ये क्या कर रही हो अनु….तुम्हारी माँ सामने ही है….वो क्या सोचेगी”
मैं: “सोचूंगी क्या, यहीं की एक बेटी अपने होने वाले पापा से लाड लड़ा रही है, आप मेरे असली पापा होते तब भी क्या यही सोचती, नहीं ना, इसलिए आप फिक्र ना करो, मैं मॉम को अच्छे से जानती हूं, वो तो पहले इस बात से परेशान थी कि इस उम्र में मैं कैसे रिएक्ट करूंगी जब वो शादी कर लेंगी, मेरी और आपकी बॉन्डिंग देखकर तो उन्हें अच्छा ही लगेगा, अगर यकीन ना आए तो अभी दिखती हूँ …”
इतना कहते ही मैंने माँ को जोर से आवाज दी
“माँ….माँ, प्लीज़ एक गिलास पानी देना, पापा के लिए”
सर मेरा मुंह देखने लगे
उन्हें शायद उम्मीद नहीं थी कि जिस हालात में मैं उनके कंधे पर सर रखकर एक ही सोफ़े पर लेटी हूं, ये दिखाने के लिए मैं मां को स्पेशली वहां बुलाऊंगी
माँ जल्दी से एक गिलास पानी की ट्रे लेकर आई
मुझे जब उन्हें सर की बगल में ऐसे लेटे देखा तो वो बोली: “तू नहीं दे सकती क्या, देख रही है ना मुझे किचन में कितना काम है”
मैं बड़े प्यार से लाडली आवाज में बोली: “मैं तो पापा के पास लेटकर बुक पढ़ रही हूं ना”
माँ कुछ ना बोली, मुस्कुराती हुई आई और सुधीर सर को पानी देकर चली गई
सर भी मेरी चालाकी देखकर हैरान थे
वो शायद उन्हें समझ आने लगा था कि आने वाले दिनों में मैं क्या-2 करने वाली हूं
आने वाले दिनों में जो होना होगा वो होकर रहेगा, पर आज मैं कुछ शरारत करने के मूड में जरूर चुकी थी
और कुछ मजे लेने के मूड में भी थी आज तो
सुधीर सर ने अख़बार फ़ेला रखी थी अपने सामने जिसमें उनका और मेरा शरीर ढक सा गया था
उसका फ़ायदा उठाते हुए मैंने अपना हाथ नीचे लेजाकर सीधा उनके कड़क लंड पर रख दिया
जो बेचारा अभी पिछले सदमे से भी नहीं उबर पाया था
सर एक बार फिर से कांप कर रह गए
मैं उनके शरीर पर लगभाग गिरी पड़ी थी इस वक़्त
उनके लंड की हालत पहले से ही खराब थी
ऊपर से मेरा हाथ लगते ही वो जैसे झड़ने की स्थिति में पहुंच गए एकदम से
मैंने स्कर्ट पहनी थी
सुधीर सर ने उसका पिछले हिस्सा उठा कर मुझे नीचे से नंगा कर दिया

अख़बार के अंदर क्या चल रहा था ये पास आकर भी कोई खड़ा होता तब भी शायद नहीं देख पाता
इसलिए मेरे इरादे बुलंद थे
सुधीर सर की दबी हुई सिसकारियाँ मेरे जिस्म के अंगारो को भड़काने का काम कर रही थी
मैंने हाथ नीचे करके उनकी शॉर्ट्स में से उनका उफनता हुआ लंड निकाल लिया
और उसे हाथ से हिलाने लगी
तभी माँ की नज़रें हमारे ऊपर पड़ी
मेरी नजरें भी उनकी तरफ ही थी, वो बस मुझे उनके पास ऐसे चिपककर लेटे देखकर मुस्कुरा दी
और अपना काम करने में लगी रही
मैंने सुधीर सर का लंड पकड़े -2 एक करवट ली और बाहर की तरफ मुंह करके लेट गई
अब मेरी नंगी गांड सुधीर सर की तरफ थी
मेरा हाथ पीछे की तरफ होकर अभी भी उनके लंड को पकड़े हुए था
मैंने उनके लंड को खींचकर अपने नंगे कुल्हे पर टच करवाया
वो अभी भी मेरी दिलेरी देखकर हैरान रह गई कि माँ के होते हुए मैं कैसे नीचे से नंगी होकर उनके लंड से मजे ले रही हूँ
मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा और उन्हें अपने पीछे चिपकाने के लिए कहा
वहां जगह काफी कम थी
उन्होंने एक हल्की सी करवट ली
अब उनका खड़ा हुआ लंड मेरी गांड से टकरा कर मुझे उत्तेजित कर रहा था
वो धीरे-2 अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगे
उनको भी अपने कड़क लंड को मेरी चिकनी गांड पर रगड़ने में काफी मजा आ रहा था
मेरी चूत की नमीं लंड को अपनी तरफ खींच रही थी
सुधीर सर ने अपने लंड को नीचे करते हुए मेरी टांगो के बीच फंसा दिया
अब चोंकने की बारी मेरी थी
क्योंकि उनके लंड का अगला हिसा सीधा मेरी गिली चूत पर आ लगा था
इस वक़्त अगर मैं थोड़ा सा घूम जाती और अपनी एक टांग उठा लेती तो वो कड़क लंड सीधा मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर दखिल हो जाता
उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
कितना मजा आ रहा था लंड को इतने करीब से महसूस करके
वो जब अंदर जाएगा तो कितना मजा देगा
मैं तो पिघल सी गई इस गर्म एहसास को महसूस करके
सर की भी हालत ख़राब थी
उन्होंने अपना दाँया हाथ मेरे स्तनों पर रख दिया और उसे धीरे से दबाने लगे
पूरा माहोल तैयार था
कमी थी तो बस लंड के अंदर जाने की
माँ ना होती तो शायद ये काम अभी हो ही जाना था

सर ने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रख दिए तो मैं सिसक उठी
मेरी नजरें माँ की तरफ ही थी
वो जिस अंदाज़ से काम कर रही थी उससे पता चल रहा था कि वो बस किचन से निकलने वाली है
इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे सर के पास से उठना पड़ा
मेरी चूत का पानी सर का लंड चख चुका था
उसे पसंद भी आया था
इसलिए वह किसी कड़क खीरे की तरह लहरा रहा था
मैंने माँ की तरफ इशारा करके सर को समझाया, तो उन्होंने अनमने मन से अपना लंड वापस अंदर ढकेल दिया
और फिर मैं अपने कमरे में आ गई
वैसे भी आज की रात काफी लंबी होने वाली थी…
