उसके भैया के लंड से निकलते गरम गरम पानी को अपनी चूत मे महसूस कर रही थी….. जब उसके भाई के लंड से पानी की पिचकारी छूटी तो सीधा उसकी चूत की यूटरिन मे जा के गरम गरम पानी गिरा…..
मनीषा ने पहली बार अपनी चूत के इतने अंदर तक कुछ गरम गरम महसूस किया था….. वो उस लम्हे को बया नही कर सकती थी कि उसे केसा महसूस हो रहा है….. मनीषा को तो ऐसा लग रहा था जेसे चूत की गहराइयो मे कोई ज्वाला मुखी फुट पड़ा हो……
खेर दोनो ने एग्ज़ाइट्मेंट मे अपनी हद पार कर दी थी…. उसको जब होश आया तो दोनो भाई बेहन ने अपनी अपनी पकड़ ढीली की ऑर मनीषा ने धीरे से पीछे को कर लंड बाहर निकाल लिया ऑर लंड के निकलते ही बाकी का बचा हुआ स्पर्म एक साथ पूरा नीचे गिर जाता है…….
दोनो भाई बेहन की नज़र उस स्पर्म पे पड़ी…. एक सेकेंड के लिए दोनो सोचने लग गये कि ये किसका है…?
मनीषा का या अशोक का…?
फिर मनीषा अपने आप से मन मे कहती है ये ना तो मेरा है ऑर नही अशोक का…. ये तो भाई बेहन का प्यार का है…..
स्पर्म के उस धब्बे ने एक ऑक्वर्ड सिचुयेशन बना दी थी ऑर उन दोनो भाई बेहन की नज़रे उस पे ही थी…..
अशोक ने सोचा अपनी बेहन के कुत्ते वाले सवाल का जवाब देने को पर जवाब नही देता है क्यूँ कि सवाल किए हुए काफ़ी टाइम हो गया था अब जवाब देने का कोई मतलब नही था…
मनीषा बिना अपने भाई को देखे वो नीचे ही मंडी कर के रखती है ऑर वैसे ही घूम जाती है ऑर फिर चल देती है……
अशोक जब अपनी बेहन को जाते हुए देखता है तो वो उसके थाइस पे नज़र डालता है तो उसको पानी की एक लकीर दिखती है जो उसकी चूत से निकल कर उसकी थाइस से बह रही थी….
रात के 11 बज रहे थे… हमेशा की तरह मनीषा अशोक के बनाए हुए शॉर्ट गाउन मे थी ऑर अशोक सिर्फ़ शॉर्ट्स मे…. उसने उपेर कुछ नही पहना था टी-शर्ट भी नही ऑर बनियान भी नही…..
मनीषा हॉल मे खड़ी थी दीवार से लग कर…. अशोक उसके पास जाता है ऑर उसके नज़दीक खड़ा हो जाता है ऑर कहता है चलो दीदी सोने चलते है……
मनीषा उसके शोल्डर पे हाथ रख के उससे कहती है….
मनीषा- रूको ना भैया कुछ देर बाद चलते है……
फिर अशोक नीचे झुकता है ऑर उसकी बेहन के थाइस के इनसाइड से अपने दोनो हाथ डाल कर उसके पैरो को पकड़ के उठा लेता है…… उठाते वक्त उसकी बेहन की टांगे फैल गयी थी ऑर उसका शॉर्ट गाउन उपर चढ़ गया था वो नीचे से पूरी नंगी हो गयी थी.. ऑर मनीषा ने दोनो थाइस को उसके हाथो पे चढ़ा दिया था….. मनीषा ने अपना बॅलेन्स संभालने के लिए अपना दूसरा हाथ भी अशोक के गले मे डाल दिया… ऑर यहाँ अशोक ने अपने बेहन को ठीक से पकड़ने क़ लिए उसने अपने हाथो को सरका के उसकी दीदी के दोनो नंगे कुल्हो पर रख दिए… ऑर उसके पैरो को अपनी कमर के अगल बगल डाल दिया ऑर फिर अपने फोर आर्म’स से उसकी थाइस को ऑर फेला दिया ऑर अपने लंड पे दीदी की चूत को रख कर चिपका दिया…. मनीषा ने भी अपने दोनो पैरो से उसकी कमर पे लॉक लगा दिया…..
ऑर फिर अशोक अपनी बेहन को वेसे ही उठाए हुए उस के रूम मे चला आया ओर अपनी बेहन को दीवार मे चिपका दिया ऑर कहने लगा…
अशोक- दीदी लाइट बुझा दो…..
मनीषा ने लाइट बंद की ऑर ज़ीरो बल्ब नही चालू किया……
कुछ सेकेंड वेट करने के बाद जब बल्ब नही चालू हुआ तो उसे भी लगने लगा कि अंधेरे हमे एकदुसरे की आखो मे देखना नही पड़ेगा ऑर हमे शर्म भी नही आएगी……
अशोक सोच मे डूबा ही था कि मनीषा ने उसके गाल को चूम लिया ऑर अपनी चूत से अपने भैया के लंड को मसल्ते हुए कहने लगी
मनीषा- थॅंक यू सो मच भैया…. ऐसे ही मेरा ख़याल रखना…..
एक बार ऑर अपने भैया को चूम लिया…. इस बार उसने अपने होटो को भैया के होटो के नज़दीक ला चुकी थी साइड साइड से उन दोनो के होंठ टकरा चुके थे….. मनीषा ने इस बार थोड़ी ऑर हिम्मत कर उसने इस बार अपने भैया के होटो को चूम लिया… ऑर फिर कहने लगी….
मनीषा- ऊप्स सॉरी…..
अशोक- इट्स ओक दीदी…. वेसे तुमने कभी किस किया है….?
मनीषा- हाँ किया है….
अशोक- किसे…?
मनीषा- तुम्हे…. अभी किया ना :-)
अशोक- यॅ राइट….. बट सीरियस्ली तुमने कभी किस किया है क्या….?
मनीषा- नही…. ऑर तूने…?
अशोक- नही… पर मुझे किस से ज़्यादा अच्छा तब लगेगा जब मे लड़की की नेक पे किस करूँ….
मनीषा- अच्छा…? उसमे क्या मिलेगा तुझे ऑर उसे….?
अशोक- चलो देख लेते है क्या मिलेगा ऐसा करने से…..
अब अशोक अपनी बेहन के गले को चूमने लगा ऑर मनीषा ने अपनी गर्दन उपर कर दी थी… अशोक गर्दन के नीचे से चूमता हुआ उपेर आ रहा था…. मनीषा ने भी अपना काम करना सुरू कर दिया… उसने अशोक के बगल मे एक हाथ डाल कर पीछे से उसके शोल्डर पर रख दिया…. ऑर दूसरे हाथ को उसके सर पे रख दिया था…. अशोक को अपनी बाहो मे जाकड़ के उसको अपने आप से पूरा चिपका लिया था…. ऑर अपनी गान्ड को उपेर नीचे मूव कर के अपनी नंगी चूत से भैया के लंड को मसल्ने लगी थी…..
अब अशोक ने अपनी जीब की नोक से उसकी बेहन की नेक को लिक्क करता हुआ उपेर आ रहा था…. ऑर फिर गालो पे पहुँचने के बाद वो गालो को चूमता हुआ धीरे धीरे उसके होटो के पास अपने होंठ ला रहा था…….
अब अशोक के होंठ उसकी बेहन के होंठो पे थे…. अशोक ने अपने होटो को वही रख के चूम लिया ऑर फिर दीदी के होटो को अपने होटो मे दबोच के चूसने लगा…….
होटो को चूस्ते चूस्ते दीदी को बेड पे ले जा कर लिटा दिया मनीषा ने भी अपने लेग्स की लॉक खोल दी ऑर अपने लेग्स को फेलाए हुए बेड पे लेट गयी…. अशोक अपनी बेहन के होटो को चूस्ता हुआ अपनी शॉर्ट उतार देता है……..ऑर उसके गाउन को वो उपेर चढ़ा देता है उसे बूब्स के उपेर तक ऑर फिर अशोक अपनी बेहन के उपेर लेट जाता है…. उसका तना हुआ लंड उसकी बेहन की चूत पर दबाव देने लगता है…अब अशोक अपनी बेहन का एक बूब अपने हाथ मे भर लेता है ऑर उसको हल्के हाथो से थामे रहता है…. कुछ पल बाद वो उसकी बेहन के बूब को दबाना सुरू कर देता है दबाते दबाते उसकी उंगलियो को उसके निपल के पास ला कर उसको चुटकी मे भर कर मसल्ने लगता है… ऑर फिर अपने तने हुए लंड को सीधा कर के अपनी बेहन की चूत मे डाल देता है……
ऑर फिर अशोक अपनी बेहन को चोदने लगता है….. मनीषा का बदन तड़पने लग गया था वो अपने भाई को अपनी बाहों मे जकड़ने लगी थी…. अशोक थोड़ा उपेर हुआ तो ऑर ज़ोर ज़ोर से लंड को अपनी बेहन की चूत मे पेलने लगा….. थप थप की मधुर आवाज़ पूरे रूम मे गूँज रही थी….. मनीषा ने अपनी गर्दन उपेर करली थी ऑर उसके पैरो की उंगलिया सिकुड़ने लगी थी…. मनीषा को भैया का लंड ले कर बोहोत ही मज़ा आ रहा था…..
अशोक उसी जोश से अपना लंड दीदी की चूत मे पेले जा रहा था ऑर एक हाथ मे उसके बूब को नीचे से दबा कर उसके बूब के निपल को एकदम तान कर उसको अपनी जीब की नोक से सहलाने लगा…. ऑर अपनी जीब को उसके तने हुए निपल की चारो तरफ घुमाने लगा……
ऑर अब निपल को अपने दाँतों के बीच दबा कर उसे अपने दाँतों से मसल्ने लगा……
अब मनीषा को समझ आ रहा था कि ये सेक्स नाम की चीज़ क्या है…. एक तरफ लंड उसकी चूत की दीवारो को ज़ोर ज़ोर से रगड़ता हुआ अंदर घुसे जा रहा था ऑर दूसरी तरफ उसका निपल दाँतों के बीच मसले जा रहा था…….
मनीषा की सासे बोहोत तेज चल रही थी ऑर उससे भी तेज उसका भाई उसकी चूत मे लंड पेल रहा था……
जेसे जेसे अशोक पूरे जोश से अपना लंड दीदी की चूत मे घुसाता वेसे वेसे उसकी बेहन की साँस उखड़ जाती……
अब मनीषा ने अपने भैया को जाकड़ लिया ऑर पलटी मार कर उसको नीचे कर दिया ऑर खुद उपेर चढ़ गयी…. ऑर अपनी गान्ड को उछाल उछाल कर अपने भैया के लंड पे मारने लगी…. अशोक ने अपनी बेहन की रफ़्तार बढ़ाने के लिए उसकी गान्ड को अपने हाथो मे दबोच लिया ऑर अपने लंड पे मारने लगा….. ऑर नीचे से अशोक खुद पे उछल उछल कर अपनी बेहन की चूत मे लंड घुसाने लगा….
कुछ देर बाद मनीषा ने उसके हाथो को पकड़ के अपने दोनो बूब्स पे रख दिए….. ऑर अपने हाथो से दबवा कर अपने बूब्स मसलवाने लगी…….
मनीषा तो झड चुकी थी अब अशोक झड़ने वाला था…. तो उसने अपनी बेहन को अपने उपेर लिटा दिया ऑर उसके हाथो से बेहन की गान्ड को पीछे से थाम लिया ऑर अपने पैरो को फोल्ड कर के उछलने लगा ऑर लंड को बोहोत तेज़ी से चूत मे पेलने लगा…. ऑर अपने हाथो मे थामी उसकी गान्ड को पूरी ताक़त से लंड पे पुश करने लगा…..
कुछ सेकेंड्स बाद ऐसे ही बेहन को चोदते-2 उसकी चूत मे झड गया….
कुछ देर मनीषा अपने भैया के उपेर लेटी रहती है फिर सरक के साइड मे सो जाती है……
उठने के बाद अशोक मनीषा का रियेक्शन देखना चाहता था….. अपने भैया से चुद कर उसको केसा लगा ये जानना चाहता था….. वो मनीषा के पास गया तो मनीषा नॉर्मली रिएक्ट कर रही थी जेसे कुछ हुआ ही ना हो…….. अबतक जो भी कुछ हुआ था वो एक सपने जेसा लग रहा था अशोक को…. मनीषा को देख के बिल्कुल नही लग रहा था कि कल रात को उछल उछल के अपने भैया का लंड अपनी चूत मे ले कर बैठी है………………….
दा एंड ऑफ साला बहनचोद कही का………….

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