साला बहन्चोद कहीं का – Erotic Incest Story | Update 15

साला बहन्चोद कहीं का - Bhai Behan Ki Kamuk Kahani
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अशोक ये बात सुन कर उसका लंड एकदम तन जाता है….

आ- तो फिर आज भी चुद लो मेरे लंड से…..

म- यू मीन मे अपने भाई के सामने तुझसे चुदु…? बाइ दा वे तेरी जगह पर कोई ऑर होता था तो मे मेसेज का रिप्लाइ ही नही करती…. ऑर इतनी सारी बाते भी शेयर नही करती….. तुझे रिप्लाइ इसलिए किया क्यू कि तेरा लंड ऑर मेरे भाई का लंड एकदम एक जेसा दिखता है…. तेरा लंड जब चूत मे लुगी तो उसे भैया का लंड ही समझ कर लुगी…

आ- तो फिर उसको भी बुला ले ना हम 3 ग्रूप सेक्स करेगे….. नही तो एक काम कर सिर्फ़ मेरे लंड को नही मुझे भी अपना भाई समझ कर चुद जा….. तू बोले तो अभी मे अपना प्रोफाइल का नाम चेंज कर के तेरे भाई का रख देता हूँ……

म- ओह ओके भैया…. पर पहले अपनी दीदी की चूत को लंड दिखा दिखा के इतना ललचाया है उसको तो ठंडा कर दे…… उस दिन तो गेम खेलते वक्त मेरी चूत मे डाला था तो फिर निकाला क्यूँ….? पता है भैया…. उस दिन जब तुम्हारा लंड मेरी चूत की दीवारो को रगड़ते हुए अंदर जा रहा था तो मेरी चूत कह उठी थी कि मनीषा अपने इस भैया के प्यारे लंड को मुझसे जुड़ा मत होने देना….. तुम्हारे भैया के लंड की मोटाई मुझमे पूरी तरह से समाई हुई है… ऑर इसका सर (सुपाडा) मेरे पूरे शरीर को छु कर दीवाना बना रहा है…… ये मेरा पहला प्यार है प्लीज़ इसे मुझसे जुड़ा मत होने देना…..

अशोक के लिए मनीषा अंजान थी उसको लगता था कि वो उसे राज ही समझ रही है पर मनीषा भी रियल सिचुयेशन को लेकर अपने भैया से नेट पे चुदाई करना चाहती थी….. अपने भैया से चुदने की एग्ज़ाइट्मेंट मे वो वही बैठे बैठे फटी हुई सलवार के अंदर अपना हाथ डाल के अपनी चूत मे उंगली करने लगी ऑर उसके सामने बैठा उसका भाई भी अपना लंड हिला रहा था…..

आ- रॉल्प्ले….

म- लौडे साले….. रॉल्प्ले नही रियल सिचुयेशन थी मेरी…. चल अभी जा पूरे मूड की माँ चोद दी तूने…..
मनीषा अपना मोबाइल चार्जिंग पे लगा देती है ऑर उसके भैया ने जो गाउन रिपेर कर के दिया था वो पहन लेती है….. ऐज यूषुयल हमेशा की तरह अंदर कुछ नही पहनती…… अब तो इन दोनो भाई बेहन की आदत बन गयी थी अंदर कुछ ना पहनने की… पता नही कब कहाँ किस हाल मे मोका मिल जाए चुदाई करने का.. या फिर एकदुसरे को अपनी चूत ऑर लंड दिखाने का…..

खेर फिर मनीषा अशोक के पास जाती है ऑर उसको बोलती है….

म- भैया टीवी पे कुछ अच्छा नही आ रहा ऑर मेरे मोबाइल की बॅटरी भी डाउन है… चलो ना हम तुम्हारे रूम मे जाते है ऑर कोई अच्छी ऑनलाइन मूवी देखते है……

ओर फिर दोनो रूम मे चले जाते है…. कुछ देर ब्राउज़ करने के बाद उन दोनो को एक मूवी ठीक लगती है हेडफोन लगा कर एक इयरफोन अशोक खुद लगता है दूसरा अपनी बेहन को देता है ऑर दोनो बेड पे एकदुसरे के आस पास लेट जाते है ऑर मनीषा अशोक के कंधे ( शोल्डर ) पर अपना सिर रख के वो लोग मूवी देखने लगते है…..

मनीषा का एक हाथ अशोक की छाती पर था ऑर वो अपने आप को अड्जस्ट करती हुई अपना एक पैर उसकी थाइस पर रख देती है…. कुछ देर मूवी देखने के बाद मनीषा थोड़ा ऑर करीब आ जाती है ऑर उसके पैर को ऑर उपेर तक चढ़ा देती है….. अशोक को समझ आ रहा था कि अब आगे क्या होने वाला है…… उसने अपनी बेहन को इतनी हिम्मत करते देख उसने भी अपना लंड बाहर निकालने की सोची पर थोड़ा मुस्किल था क्यू कि दीदी उसी डाइरेक्षन मे ही देख रही थी… तो उन दोनो ने चादर ओढ़ ली … अशोक जानता था कि वो जब पूरा उसके उपेर चढ़ जाएगी तो दीदी की नंगी चूत उसके लंड पे आ के टच होगी…..

मनीषा सी सी करती हुई उसकी छाती से हाथ हटा कर चादर के अंदर डाल के अपना पैर अशोक की थाइस से उठा कर अपनी चूत पे 2-3 चूटी काट के खुजाति है…. ऑफ फिर थोड़ा आगे सरक कर वापिस अपना पैर उसके उपेर रखती है तो उसकी नंगी चूत सीधा उसके भाई के नंगे लंड से जा के टकराती है……

कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद फिर वो सी की आवाज़ कर के इरिटेट होती हुई अपना हाथ अंदर डाल देती है… ऑर फिरसे अपना पैर तोड़ा उठाती है ऑर चूत खुजाने लगती है… ऑर फिर अपना हाथ ऑर चूत दोनो को वापिस अपने भैया के लंड पे रख देती है……. कुछ देर बाद वो मूवी को एंजाय करती हुई अपने हाथो से खेलने लगती है…. खेलते खेलते उसको अपने भैया का लंड भी सहलाना था उसको…. तो धीरे धीरे वो सहलाना भी सुरू कर देती है… पहले वो हल्की हल्की उंगलियो से उसके लंड को छुति है फिर लंड के उपेर अपने हाथ का पंजा रख देती है…. ऑर उसके बाद धीरे धीरे अपने भैया के लंड को अपने मुट्ठी मे भर लेती है…… ऑर फिर अचानक से उसके साथ खेलने लगती है जेसे वो कोई खिलोना हो…. ऑर वो इस तराहा से ही दिखा रही थी जेसे उसने लंड नही कोई ऑर चीज़ पकड़ रखी हो…. ऑर लंड को जेसे तेसे अपने हाथो मे पकड़ रही थी….. वो अशोक को यकीन दिलाना चाहती थी कि वो आंजान है उसे नही पता कि उसने अपने भैया का लंड पकड़ रखा है……

लेकिन एक बात तो दोनो जानते थे कि वो लोग अंजान बनने का नाटक कर रहे है…….

कुछ सेकेंड बाद मनीषा ने फिर सी सी की आवाज़ की ऑर कहा

म- ओह फो यार…….

ऑर इस बार मनीषा ने जो अपने भाई का लंड पकड़ रखा था उसको कस के पकड़ के अपनी चूत पे उसके सुपाडे को रगड़ने लगी…. ऑर भैया के लंड से अपनी चूत को खुजाने लगी…. अशोक के लंड का सुपाडा उसकी बेहन की चूत के लिप्स के बीच मे रगड़ रहा था…. ऑर फिर मनीषा ने लंड को अपनी चूत के छेद के यहाँ ला कर छोड़ दिया….. ऑर फिर अपना हाथ बाहर निकाल दिया…… ऑर अब वो अपनी गान्ड को दबा कर अपने भैया का लंड चूत मे लेने लगी…. पूरा लंड अंदर लेने के बाद वो अपनी गान्ड को नीचे उपेर कर के अपने भैया से चुदने लगी … . कुछ देर तक हल्के हल्के शॉट मार कर अपने भैया से चुद रही थी…. अब उससे रहा नही गया वो अपनी चरम सीमा पर पहुँच गयी थी…. उसने अपना एक हाथ अपने भाई की छाती पे रखा ऑर उसको कस के दबोच लिया ऑर अपनी आखे बंद कर ली उसके बाद 3-4 करारे शॉट मार कर झड गयी…. तेज सासे लेती हुई अपने भैया को देखने लगी… उसके भाई के चेहरे को देख कर ऐसा बिल्कुल भी नही लग रहा था कि उसका लंड उसकी बेहन की चूत मे घुसा पड़ा है….

मनीषा को रियलाइज़ हुआ कि उसने कुछ ज़्यादा ही ज़ोर्से धक्के मारे थे…. उसकी हाइ एग्ज़ाइट्मेंट ने सिचुयेशन को थोड़ा ऑक्वर्ड बना दिया था…. हल्के हल्के झटकों मे उसका भाई अंजान बनने का नाटक कर सकता था पर ये तो कुछ ज़्यादा हो गया था….मनीषा ने सिचुयेशन संभालने के लिए वहाँ से कुछ देर के लिए चले जाना बेहतर समझा….. तो फिर उसने चादर हटाई ऑर धीरे धीरे अपना पैर उठाने लगी…. इस वक्त दोनो भाई बेहन की नज़र चूत से निकल रहे काले मोटे लंड पर थी…. अशोक का अभी पानी नही निकला था तो उसका लंड अभी भी तन्नाया हुआ था…. ऑर उसका काला लंड अपनी बेहन की चूत के पानी से भीगा हुआ था…. उसकी बेहन का सफेद गाढ़ा (थिक) पानी उसके लंड के चारो तरफ लगा हुआ था…. लंड के बाहर निकालने के बाद वो वैसे ही तना हुआ खड़ा था ऑर उसकी बेहन की चूत के साइड के हिस्सो मे भी पानी सॉफ झलक रहा था…..

मनीषा बाहर आ जाती है रूम से…. ऑर अशोक अपने तने हुए लंड को देख रहा था ऑर अपने आप से बाते करने लगा

अशोक अपने लंड को देखते हुए…

अशोक- मज़ा आया दीदी की चूत मे जा कर…? बाइ दा वे दीदी की चूत ने क्या हाल बना कर रखा है तेरा….? लगता है दीदी की चूत ने प्यार की बौछार की है तुझ पर……. लेकिन यार तुझे मोका नही दिया बौछार करने का….. :-(

अशोक के साथ-2 मनीषा भी ना खुश थी उसे भी लग रहा था कि उसे भैया के लंड को अपनी चूत मे कुछ देर ऑर डालवाए रखना था… पहली बार भैया से चुदने का मोका मिला था वो भी जल्द बाजी मे चला गया….

मनीषा का कॉन्फिडेन्स उसका आटिट्यूड बेशर्मी… ये सब बढ़ चुकी थी अब पहले के जेसी नही रही थी मनीषा…. अब वो लड़को की तरह बिंदास हो गयी थी भैया का लंड खा कर…….

अब मनीषा एक अलग ही आटिट्यूड ऑर कॉन्फिडेन्स के साथ रूम मे वापिस आती है ऑर भाई के साथ बेड पे लेट जाती है…… कुछ देर बाद दोनो सो जाते है….

सुबह जब मनीषा की आख खुलती है तो उसके भाई का लंड पाजामे मे तना हुआ था ऑर वो सो रहा था…. मनीषा ने उसके लंड को हाथ मे पकड़ा ऑर बिंदास मसल्ने लगी 2-3 बार ज़ोर ज़ोर से मसल्ने के बाद उसने लंड को पाजामे से बाहर निकाला ऑर उसके सुपाडे को मुँह मे भर लिया…. ऑर फिर अपने होंठो से पकड़ लिया…. अब अपने होटो को थोड़ा आगे कर के उसके पूरे सुपाडे को अपने होंठो मे दबोच लिया ऑर फिर अपनी जीब की नोक ( पॉइंट) से उसके लंड के छेद को सहलाने लगी….. ऑर लंड को हाथ मे पकड़ के मूठ मारने लगी…. 5-6 बार अपनी जीब की नोक से उसके लंड के छेद पर उपेर नीचे कर के सहलाने के बाद पक की आवाज़ से लंड को बाहर निकाला ऑर उसके सुपाडे को चूम लिया ऑर लंड को फिर वापिस अंदर डाल दिया ऑर उपेर से अपना हाथ उसके लंड पर रख के लंड को मसल्ते हुए अपने भाई को जगाने लगी……

मनीषा- अरे ओह मेरे प्यारे केले वाले भैया उठो सुबह हो गयी…..

अशोक सोच रहा था कि साला आख खॉलुगा तो मज़ा मिलना बंद हो जाएगा….. पर वो बिचारा करता भी क्या मजबूरी थी काम पे भी तो जाना था…. वो उठ गया ऑर फ्रेश हो कर काम पे चला गया….

रात के 10 बज रहे थे अशोक ने सोचा दीदी को मेसेज कर के क्यू ना महॉल को हॉट बनाया जाए…..

उसने मेसेज किया पर मनीषा ने रिप्लाइ नही दिया…. उसके सामने ही मनीषा ने टोन बजने के बाद मेसेज चेक किया पर रिप्लाइ नही दिया….

अशोक को लगा कि शायद उसकी बेहन शरमा रही है अपने भाई के सामने किसी ऑर से चुदने के लिए….

वो बाल्कनी मे जा के खड़ा हो गया ऑर मेसेज करने लगा….
फिर भी उसको रिप्लाइ नही मिला अपनी दीदी की तरफ से….

अशोक- अरे दीदी नाराज़ हो क्या…? मेरी ग़लती क्या थी यार…? मेने बस इतना पूछा रॉल्प्ले करेगी क्या आप…?

इतना टाइप किया ही था कि पीछे से किसीने उसे थप थपाया….. अशोक पीछे मुड़ा तो मनीषा थी…

मनीषा ने उसका हाथ पकड़ के उसको घुमाया ऑर सीधा कर के उस से चिपक गयी….

मनीषा- क्या हुआ भाई…. यहाँ क्या कर रहे हो….?

ऑर बाते करते वक्त उसने अपनी चूत अशोक के लंड पे दबा दी थी ऑर अपनी चूत से उसके लंड को 2-3 बार मसल भी चुकी थी… वो अपने भाई से ऐसे बिहेव करने लगी थी जेसे वो उसकी बेहन नही बीवी है……पहले से उसके बिहेवियर मे बहुत चेंज आ गया था……..

मनीषा ने भी आव देखा ना ताव उसने धीरे से उसका पाजामा नीचे कर दिया जब लंड बाहर निकाला तो वो वही रुक गयी…. ऑर उसका लंड धीरे धीरे अपने हाथो मे लिया ऑर चूत के छेद पर ला कर रख दिया…..

फिर मनीषा ने अपने दोनो हाथो को अशोक के शोल्डर पे रखा ऑर अपनी गान्ड को दबा के चूत से लंड पे प्रेशर देने लगी……

मनीषा- लगता है मुझे खुद से ही लंड लेना पड़ेगा मेरी चूत मे वरना तुम तो खिलाओगे नही…..

अबतक मनीषा ने अपनी चूत से भैया के लंड पे 3-4 धक्के भी लगा चुकी थी…..
मनीषा अपने पैरो को फेला कर उसके भाई के पैरो के अगल बगल डाल कर खड़ी हो गयी थी थोड़ा ऑर नज़दीक आ कर अपने भैया का पूरा लंड अपनी चूत की जड़ों तक घुसा लिया था…… ऑर हल्के हल्के झटके भी लगा रही थी…..

अब मनीषा ने अपने भाई के दोनो हाथ पकड़े ऑर उसको अपने कमर के पीछे ला कर दोनो हाथो को जोड़ दिया… कुछ देर तक अशोक अपने हाथो को थामे रखा था फिर खोल दिया ऑर धीरे धीरे अपने दोनो हाथो को दीदी के दोनो कुल्हो पर रख दिया… अब अशोक को भी अपने हाथो पे महसूस हो रही थी उसकी बेहन की गान्ड जो चूत मे लंड लेने के कारण कभी अंदर कभी बाहर हो रही थी…..

कुछ देर के बाद मनीषा का शॉर्ट वाला गाउन उपेर हो चुका था ऑर वो पीछे से पूरी गान्ड नंगी हो चुकी थी……

अब अशोक ने भी उसके दोनो कुल्हों को अपने हाथो मे थाम लिया था जेसे उसकी बेहन लंड लेने के लिए अपनी गान्ड को अंदर दबाती अशोक भी अपने हाथो से उसकी गान्ड को पुश कर देता…….

मनीषा अपनी चरम सीमा पर आ गयी थी उसको अब भैया के लंड को जोरो से अपनी चूत मे घुसाना था… अब हालत ऐसे नही थे कि वो अपने भाई को बाहों मे भर ले ऑर ज़ोर ज़ोर से शॉट मार के भैया से चुदे…… तो मनीषा ने अपने भैया से पूछा……

मनीषा- भैया ये कुत्ते कुतिया के उपर चढ़ के ऐसा ऐसे क्यूँ करते है……

इतना बोलने के बाद मनीषा ने ग्रिल को अपने हाथो मे कस के थाम लिया ऑर अपनी चूत को ज़ोर ज़ोर से लंड पे मारने लगी…… अशोक भी समझ गया था कि अब दीदी का पानी निकलने वाला है…. वो भी अपने हिप को आगे पीछे कर के उसकी ताल मे ताल मिला रहा था……

जब मनीषा पीछे होती तो अशोक भी पीछे हो जाता ऑर जब मनीषा पूरे इंपॅक्ट के साथ चूत को लंड पे मारती तब अशोक भी उसी जोश मे अपना लंड दीदी की चूत के अंदर घुसा देता…..

दीदी की चूत ने उसके लंड को इतना कस के जाकड़ रखा था उसकी वजह से अशोक को दुगना मज़ा आ रहा था…..

दोनो की सासे तेज़ हो गयी थी ऑर मनीषा तो कुछ ज़्यादा ही हाफ़ रही थी…. लेकिन उसका चेहरे पे थकान से ज़्यादा वासना दिख रही थी….

सॉफ दिख रहा था कि वो बोहोत थक चुकी है पर लंड लेने की इच्छा की वजह से वो थकान को छोड़ कर ज़ोर ज़ोर से लंड पे झटके दे रही थी…….

मनीषा का पानी छूटने लगा ही था कि कुछ पल बाद मनीषा को अपनी चूत मे गरम गरम महसूस हुआ ऑर फिर मनीषा ऑर अशोक ने मिल कर एक जोरदार शॉट मार के लंड को पूरा घुसा दिया ऑर मनीषा ने भी एक ज़ोर का झटका मार के लंड पूरा चूत मे घुस्वा लिया…… ऑर फिर बाल्कनी की ग्रिल को पकड़ के अपनी चूत को भैया के लंड पे दबाने लगी ऑर अशोक ने उसकी गान्ड को दबोच के अपने लंड को पूरा जड़ तक घुसा दिया…….

कुल्हो को दबोचने की वजह से उसके दोनो कूल्हे खुल गये थे ऑर गान्ड का छेद सॉफ सॉफ दिख रहा था……..

 

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