मनीषा को अपने छेद पे एक गरम गरम ऑर कुछ धसा होने का एहसास हो रहा था…….
अब अशोक ने रोटी बेलने लगा… ऑर उसके लंड को अंदर घुसने लगा…. मनीषा की हालत खराब होने लगी उसने बोहोत ज़ोर लगाया लंड को अपनी गान्ड मे दबा के रखने का पर लंड थोड़ा ऑर अंदर घुस गया ऑर मनीषा उसके मोटे लंड से बचने के लिए अपनी एडिया उपेर उठा के अपने पैरो के पंजो पे खड़ी हो कर मनीषा उसको इशारो मे समझाने लगी कि उसने लंड ग़लत जगह डाल दिया है..
मनीषा- अरे ऐसे नही…. पहले बेलन को सही जगह पे रखो फिर उसको रगड़ना……
अशोक- मेने सही जगह पे ही बेलन रखा है…..
मनीषा- नही ग़लत जगह है….. अगर यहाँ तुम अपना बेलन रागडोगे तो मेरी फट जाएगी…..
अशोक- क्या फट जाएगी दीदी…?
मनीषा- अरे रोटी फट जाएगी अच्छे से नही बनेगी…..
अशोक- फटने दो दीदी बाद मे मुझे ही आसानी होगी……. खाने मे…..
अशोक अपने लंड का दबाव उसके छेद पे कम होने ही नही दे रहा था वो तो ऑर घुसाए जा रहा था….. मनीषा छटपटाते हुए उसके आर्म’स को अपने हाथो मे पकड़ के वो उपेर उठने लगी…..
अशोक उसकी हालत देख कर उसने अपने लंड का दबाव कम किया ऑर नीचे होने लगा ओर साथ साथ मनीषा ने भी चैन की सास लेते हुवे नीचे हो गयी ओर अपनी गान्ड को थोड़ा ढीला छोड़ दिया…….
अशोक ने अपने लंड पे उसकी गान्ड की पकड़ ढीली पड़ती देख उसको मज़ाक सूझा… उसने फिर एक झटका लगा कर वापिस लंड को उसके छेद मे दबा दिया…. मनीषा को तो जेसे झटका लगा उसने फिर झट उसके अपने छेद को बंद कर दिया…..
अशोक खुल के हँसना चाहता था पर उसके मुँह से बस हल्की सी स्माइल निकली ऑर उसने अपना लंड निकाल दिया ऑर वही खड़े खड़े बाते करने लग गया…….
दुपेहर को 3 बजे खाना खाने के बाद दोनो हॉल मे बैठे थे….. मनीषा ने कहा कि मुझे विंडो के कर्टन उतार के धोने है बोहोत गंदे हो गये है…….
ऑर अशोक से कहा कि मेरी मदद करो कर्टन उतारने मे…… अशोक ने स्टूल लिया ऑर उसपे चढ़ के जेसे ही विंडो पे पैर रखा मनीषा ने रोक दिया उसको…… ऑर कहा……
मनीषा- अरे तेरे को नही समझ आएगा… तू सब हुक तोड़ देगा….. उसको आराम से निकालना पड़ेगा… ऑलरेडी मेने 25 हुक मे से मेने 4-5 तो तोड़ दिए है…….
अशोक- तो फिर मे क्या मदद करूँ…..?
मनीषा- तुम बस स्टूल पकड़ के रखो मे उपेर चढ़ती हूँ……
अशोक को भी धीरे धीरे समझ आ रहा था कि ये क्या चाकर है…..
उसने स्टूल पकड़ लिया….
मनीषा- अरे आगे से पकडो…. मेरा एक पैर विंडो पे होगा ऑर एक स्टूल पे अगर मैं गिरी तो तुम्हारे उपर गिरूगी ऑर तुम संभाल भी सकोगे पीछे से केसे बचा पाओगे मुझे….?
अशोक आगे आ कर झुक कर स्टूल को पकड़ लेता है ऑर मनीषा स्टूल पे चढ़ के अपने एक पैर को उसे शोल्डर से उपेर ले जाते हुवे विंडो के यहाँ रखती है…….
मनीषा ने अपने पैर को थोड़ा फेला दिया ताकि अशोक को दिक्कत ना हो…….
लेकिन अशोक की तरफ से कोई हरकत नही हो रही थी… तो मनीषा ने अपनी चूत को अशोक के मुँह के पास लाने लगी….
अशोक का माथा ( हेड ) तो टच हो रहा था उसकी चूत के थोड़ा उपेर पर वो चूत को चाट नही रहा था…..
मनीषा- अपने मन मे ( अब साला इसको क्या हुआ….? इतना तो करीब लेके आई हूँ साला भर ले ना मेरी चूत को अपने मुँह मे……)
कुछ देर बाद मनीषा देखती है नीचे तो उसे एहसास होता है कि उसके झुके होने की वजह से उसकी चूत पीछे हो गयी है…….
तब जा के वो थोड़ा सीधी होती है ऑर उसको अशोक की गरम गरम सासे अपनी चूत पे महसूस होती है…….
ऑर वो फिर से अपने पैर को थोड़ा ऑर चोडा कर देती है ऑर फिर दिखती है कि उसके भाई का सर ठीक से घुसेगा कि नही…… ऑर फिर वो अपने भाई के मुँह से उसकी जीब को निकलते हुए देखती है…. फिर उसका भाई अपनी जीब की नोक ( पॉइंट ) को एकदम नीचे ले जा कर उसके चूत के छेद मे घुसाता है ऑर फिर उसकी आपस मे चिपके हुए चूत के लिप्स को बीच मे रगड़ते हुए उसकी चूत को फैलाते हुए उपेर लाता है….. ऑर उसके चूत के दाने ( क्लिंट ) पर रोक देता है…. ऑर फिर उसकी चूत के दाने को अपनी जीब से बढ़ा कर रगड़ने लगता है…… ऑर फिर अपनी जीब की नोक से उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए उपर लाता है….. उसकी चूत का दाना पूरा उपर तक उठ गया था फिर एक झटके मे नीचे आ जाता है……. अब वो उसके दाने को अपनी जीब से ऐसे ही झटके देता है….. ऑर फिर उसके दाने के चारो तरफ अपनी जीब घुमाता है…..
मनीषा को उलझन होने लगी थी…. उसका दाना आधा स्किन के अंदर ही था वो अपनी दोनो उंगलियो से अपनी चूत को फेला कर ऑर अपने दाने को बाहर निकाल कर अपने भाई की जीब को अपने पूरे दाने के चारो तरफ महसूस करना चाहती थी……
अब अशोक उसके दाने को अपने होंठो मे भर के उसको चूस्ता है ऑर अपनी जीब की नोक से उसके दाने की नोक को सहलाता है…….. ऑर फिर उसके दाने को अपने दातों के बीच दबा कर उसको रगड़ता है….. मनीषा को एक हल्का सा पर मीठा दर्द होने लगता है…. फिर अशोक उसकी बेहन की चूत के होंठो को अपने होंठो मे पकड़ कर चूस्ता है….
ओर फिर अपनी जीब को अपनी बेहन की चूत मे घुसा देता है……..
जीब को चूत के छेद मे घुसाने के बाद अपनी जीब की नोक से उसकी चूत की दीवारो को कुरेदने लगता है…….
मनीषा उसकी जीब को अपनी चूत के अंदर पूरा समाना चाहती थी…. तो उसने अपने भाई से कहा….
मनीषा- भैया मेरा हाथ नही पहुँच रहा… तुम मुझे थाम लो ऑर स्टूल को आगे करो……
अब मनीषा ने अपना एक पैर जो उसके शोल्डर के उपेर था उसे शोल्डर पे रख दिया ऑर अशोक के सर को दोनो हाथो से पकड़ लिया……
अशोक ने मनीषा के स्टूल पे पड़े पैर को अपने आर्म’स मे पकड़ के उसे उपर उठा लिया ऑर फिर मनीषा अपने भाई के उपर चढ़ गयी ऑर अपने दोनो हाथो से उसके सर को चूत पे दबाने लगी….. ( जब एक लड़की किसी लड़के के टॉप पे होती है तो तब अपनी हिप को मूव कर के लंड पे चूत को दबाती है ताकि पूरा लंड अंदर तक घुसवा सके) ठीक वैसे ही मनीषा ने अशोक के सर को दबा कर उसकी जीब को पूरा अंदर तक धँसवा लिया ऑर हल्के हल्के शॉट मारने लगी जेसे कि वो चुद रही हो…… कुछ शॉट लगाने के बाद उसका पानी निकलने लगा…. ऑर इतने मे
अशोक ने स्टूल आगे कर दिया ऑर उसको वहाँ खड़ा कर दिया……
ऑर फिर अशोक ने अपनी बेहन की पूरी चूत को अपने मुँह मे भर लिया था… जेसे जेसे वो अपनी बेहन से अलग हो रहा था वैसे वैसे उसकी बेहन की चूत के लिप्स खिच रहे थे…. ऑर फिर चूस्ते हुए धीरे धीरे अपनी बेहन की चूत के लिप्स को वो ढीला कर के छोड़ रहा था……
ऑर फिर मनीषा का पूरा पानी उसकी चूत से निकल कर थाइस पर रिस रहा था ऑर एक बड़ी बूँद पानी की ( लार्ज ड्रॉप) पानी की उसकी चूत के छेद से धीरे धीरे नीचे गिर रही थी….. अशोक अपनी बेहन की चूत मे से पानी की बूँद को निकालते हुए देख रहा था…… ऑर फिर वो बूँद उसकी चूत पर लटकने लगी……
परदा निकाल लेने के बाद अशोक अपने रूम मे चला जाता है….. मनीषा भी बेड पे लेट जाती है….. ऑर फिर अपना मोबाइल उठाती है तो उसके कुछ फ्रेंड्स के मसेज आए थे वो मेसेज चेक करती है तो उसमे उस लड़के का भी मेसेज था जो कुछ दिन पहले उसने अपनी फेक प्रोफाइल से जिस लड़के के साथ सेक्स चॅट किया था उसी लड़के ने मनीषा की रियल प्रोफाइल पे मेसेज किया…..
राज- हे सेक्सी… लंड लोगि….?
मनीषा ने इससे पहले एक बार अपनी फेक प्रोफाइल से सेक्स चॅट किया था राज के साथ…. ऑर उसको मज़ा भी आया था राज क साथ सेक्स छत कर क…..
मनीषा ने उसकी ( प्रोफाइल ) देखी तो उसपे उसने अपने लंड की पिक्स डाली हुई थी….. उसने पिक्स को क्लिक कर के देखा…..
कुछ देर सोच मे पड़ गयी ओर फिर बॅक दबा के कुछ सोच समझ के उसके मेसेज का रिप्लाइ किया….
मनीषा- पहले घर मे जो लंड पड़ा है उसको तो अच्छे से खा लूँ फिर तेरे लंड के बारे मे सोचुगी…..
मसेज सेंड करने के कुछ सेकेंड्स बाद राज ऑनलाइन आया ऑर रिप्लाइ किया……
राज- क्यू तेरे पति का उठता नही है क्या….?
मनीषा- उठता भी है ऑर तेरे जेसा तगड़ा भी है….. अभी अभी मेने उससे अपनी चूत चटवाई थी……
राज- तो फिर क्या दिक्कत है….? चुद क्यूँ नही लेती उससे……????
मनीषा उसका मेसेज देखती है ऑर रिप्लाइ नही करती ऑर सो जाती है….
फिर शाम को जब वो उठती है तो राज के 3-4 मेसेज आए थे….
मनीषा उसके मेसेज नही चेक करती ऑर सीधा अशोक के रूम मे जाती है कि कुछ करने लिए…. वहाँ जाती है तो अशोक सो रहा था ऑर उसका मोबाइल साइड मे पड़ा था.. वो उसे उठाती है ऑर गॅलरी मे जाती है…..
कुछ देखने के बाद मन ही मन मुस्कुराती है…..
देखने के बाद एक अजीब सी फीलिंग उठ रही थी उसके मन मे…..
वो किसीसे शेयर करना चाहती थी उसके मन मे जो चल रहा था… पर वो नही कर सकती थी…. क्यू कि कुछ कुछ बाते ऐसी होती है जो इंसान अपने अलावा किसी ऑर के साथ नही शेयर करता…. ना अपनी गर्लफ्रेंड/बाय्फ्रेंड को पति / पत्नी को… किसिको भी नही….. ऐसी सिचुयेशन मे इंसान अपने आप से ही बाते करता है…..
मनीषा- अपने मन मे… साला क्या इतफाक है….? कुछ दिन पहले रात को मैं अपनी फेक प्रोफाइल से जिससे चुद रही थी वो मेरा भाई था…. इतना कह कर मंद ही मंद मुस्कुराने लगी…. सेक्स चॅट करते वक्त उसकी चूत इतनी नही ललचाई थी जितनी अब ललचा रही है…. क्यूँ कि तब उसको पता नही था कि राज आक्च्युयली मे अशोक है उसका भाई…..
( दिस वन ईज़ फॉर दोज़ हू लव टू फक देयर ब्रो/सिस…. अगर आपने कल रात को सेक्स चॅट किया ऑर फिर बाद मे आपको पता चले कि मे जिसे चोद रहा था वो कोई ऑर नही मेरी ही बेहन थी जो मेरा लंड चूस कर मुझसे चुदवा रही थी… तो केसा झटका लगेगा तुम्हारे लंड पे….?
ऑर अगर तुम्हे पता चले जो लड़का मेरी चूत के अंदर अपनी जीब डाल के सहला रहा था… ऑर जिसका लौडा मेने अपने हाथ मे पकड़ कर अपनी चूत मे डाला वो कोई ऑर नही मेरे भाई का ही लंड था तो तुम्हे केसा लगेगा….? )

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