साला बहन्चोद कहीं का – Erotic Incest Story | Update 3

साला बहन्चोद कहीं का - Bhai Behan Ki Kamuk Kahani
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कुछ देर भाई बेहन बाल्कनी मे खड़े हो कर बाहर का नज़ारा देख रहे थे फिर कुछ देर बाद मनीषा पानी पीने के लिए किचन मे गयी तो मम्मी को बाथरूम से निकलते हुए देखा तो उसने सोचा चलो मैं भी नहा लेती हूँ ऑर वो अपनी ब्रा पेंटी ऑर कपड़े लेकर बाथरूम मे घुस गयी फिर उसे याद आया कि वो हेर रिमूवल क्रीम लेना तो भूल गयी फिर वो वापिस आती है लेने के लिए तबतक अशोक ने अपनी बेहन को रोक दिया ऑर कहा मुझे ऑफीस के लिए देर हो रही है पहले मे नहा लेता हूँ बाद मे तू नहाना… ऑर वो बाथरूम मे चला जाता है वहाँ उसे दीदी के कपड़े ऑर ब्रा पेंटी नज़र आती है…. उसकी हवस बढ़ जाती है ऑर उसको कमीनपन करने पे मजबूर कर देती है…. फिर वो मूठ मार कर अपना पानी गिरा देता है ऑर फटाफट नहा के नाश्ता वास्ता कर के ऑफीस के लिए निकल जाता है……

तबतक मनीषा भी अपने हाथ पैर ऑर चूत के बाल साफ कर के नहा चुकी होती है… जब वो कपड़े उठती है तो वो गीले थे वो ज़्यादा केर नही करती ऑर पहन लेती है फिर बाहर निकल के किचन मे जाती है अपना नाश्ता ऑर चाइ लेने के लिए पहले उसको कुछ अजीब सा महसूस होता है फिर वो ज़्यादा सोचती नही है क्यू कि उसे बोहुत जोरो की भूक लगी थी वो फटाफट नाश्ता ले कर खाने बैठ जाती है….

खाना हो जाने के बाद वो उठ कर अपनी प्लेट किचन मे रखने जाती है तो उसकी चूत के यहाँ चिप चिपा ( स्टिकी ) सा महसूस होता है फिर वो अपने मन मे कहती है अब समझ आया साला इतने देर से मुझे अजीब क्यूँ फील हो रहा है साले बेहन्चोद अशोक ने मेरी चूत को इमॅजिन कर के मूठ मार कर अपने लंड का पूरा पानी मेरी पैंटी पे ही डाल दिया तभी सोचु कि साला मेरे सब कपड़े सूखे थे पर पैंटी ही सिर्फ़ गीली थी वो भी चूत की ही जगह पे ऑर कही गीला नही था ऑर मेने जहाँ कपड़े रखे थे वहाँ तक पानी का पहुँचना एक तरह से इंपॉसिबल है….. साला मुझे चोद नही सकता तो इसलिए इनडाइरेक्ट्ली मेरी पेंटी पे अपने लंड का पानी डाल कर अपने आपको तसल्ली दे रहा है…..

खेर साले के इस कामीनेपन ने मेरी चूत को भी ललचा दिया… चलो भैया का लंड ना सही उसके लंड का पानी तो मिला मेरी चूत को….

ऑर ये सोचते सोचते वो किचन मे अपनी चूत को दबोच रही थी कपड़ों के उपेर से…

अशोक के इस कामीनेपन से मनीषा के मन मे भी कमीनपन जाग जाता है वो अपनी अलमारी खोलती है ऑर कुछ पुराने कपड़े निकालती है ऑर उसे वो मिल जाता है जो वो ढूँढ रही थी…. ऑर वो खुश हो कर अपने मन मे कहती है….
मनीषा- बेटा आज तो तूने मेरी चूत को ललचा दिया अब देख मे तेरे लंड को केसे मचलने पे मजबूर करती हू… तेरा लंड तड़पने लगेगा मेरी चूत मे घुसने के लिए पर तू कुछ नही कर पाएगा बस बैठे बैठे अपने लंड को तड़पते हुवे देखेगा……

शाम को जब अशोक वापिस आता है तो दीदी को सुबह वाले कपड़ों मे देख कर वो मन मे सोचता है कि आज तो मेरे लंड के पानी ने उसकी चूत को पूरा भीगा दिया होगा काश मे सचमुच मे दीदी को चोद कर अपने लंड का पानी उसकी चूत की पॅल्को के उपेर डाल पाता….

अशोक- अपने मन मे…. ना ऐसे मज़ा नही आएगा दीदी को चोद चोद कर अपना लंड पूरा जड़ तक घुसा कर फिर पानी अंदर छोड़ देने का ऑर फिर दीदी को खड़ा कर के उसके पैरो को थोड़ा फेला कर फिर अपनी उंगलियो से उसकी चूत के लिप्स को खोल कर उसके छेद से अपने लंड का पानी टपकते हुवे देखने मे मज़ा आ जाएगा

ये सब बाते सोच सोच क उसका लंड तन्नाए जा रहा था ऑर वो बैठे बैठे अपने ख़यालो मे अपने लंड को मसल रहा था…. इतने मे मनीषा भी हॉल मे 2-3 बार आ के जा चुकी थी ऑर अपने भाई को अपना लौडा मसल्ते हुए देख चुकी थी..

वो भी समझ चुकी थी कि उसका भाई कितना बड़ा बेहन्चोद है…

अशोक ने घर मे ऐसा मोहोल बना दिया था कि घर मे दोनो भाई बेहन बस हवस के ही दीवाने बन चुके थे उन दोनो को लंड ऑर चूत की भूख ऑर प्यास ने रिश्ते ऑर शरम सब भुला दिया था… वो दोनो बेतुकी हरकतों पे उतर गये थे…. आपके ऑर मेरे लिए ये सब बाते थोड़ी अजीब ऑर बेतुकी लगती होगी लेकिन उन दोनो भाई बेहन को एकदुसरे को ललचाने मे या अपने मन की इच्छा पूरी करने मे मज़ा आ रहा था…..

अशोक सोफे पे बैठा बैठा टीवी देख रहा था ऑर मनीषा किचन मे माँ के साथ खाना बना रही थी… मंजू रोटी बना रही थी ऑर मनीषा सब्जी… मनीषा ने तड़का लगा दिया था मसाले का ऑर वो कटी हुई सब्जी लेने हॉल मे आने के लिए किचन से निकलती है ऑर आते आते पीछे से अपनी कमीज़ को थोड़ा तिरछा कर के अपनी सलवार के उपेर इलास्टिक मे फसा देती है यानी कि उसकी गान्ड का आधा हिस्सा वाइट कलर की सलवार मे से दिख रहा था ऑर उसकी पैंटी भी नज़र आ रही थी… वो उसके पास जा कर झुक जाती है ऑर अशोक जब उसकी बेहन की उभरी हुई गान्ड देखता है तो उसका कमीनपन जाग जाता है वो अपनी जीब ( टंग ) निकाल कर अपनी बीच की उंगली को गीली कर के उसकी गान्ड से थोड़ा दूर घुसाने की आक्टिंग करता है ऑर चेहरे पे मज़े आने वाले एक्सप्रेशन लाता है….

मनीषा लेफ्ट मे पड़े शोकेस की तरफ देखती है तो उसे अपने भाई को उसकी गान्ड मे उंगली करने की आक्टिंग करते हुए देख लेती है… फिर वो भी अपने भाई की हरकत का सपोर्ट करती है मतलब वो भी अपने भाई के मज़ाक को थोड़ा रियलिस्टिक बनाते हुवे अपने पैरो को साइड बाइ साइड कर के अपनी गान्ड को थोड़ा फेला देती है…. अशोक के शरीर से ल़हेर उठ कर उसके लंड तक दौड़ जाती है जब वो देखता है कि उसकी बेहन ने अपनी गान्ड को फेला दिया….

उसे महसूस होता है कि जेसे उसकी दीदी को पता था कि मे उसकी गान्ड मे उंगली करने का नाटक कर रहा हूँ ऑर वो भी अपनी गान्ड चौड़ी कर के उंगली गान्ड मे लेने का नाटक कर रही है…..

जब उसने उसके पैरो के अगल बगल देखा तो उसकी बेहन का फेस नही दिखा ऑर जब उसके पैरो के बीच मे देखा तो उसकी आगे की कमीज़ की वजह से वो अपने भाई को नही देख सकती थी… तो अशोक के मन हुआ कि शायद इतफाक था उसकी बेहन ने उसी वक्त अपनी गान्ड फेला दी होगी जब वो उसकी गान्ड मे उंगली डालने का मज़ाक कर रहा था

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