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#41

“ये तस्वीर यहाँ पर क्या कर रही है , इसे तो हवेली में होना चाहिए था ” मैने खुद से कहा .

कामिनी के ये तस्वीर जिसमे वो किसी बाग़ में हैंडपंप के पास खड़ी थी और तस्वीरको ध्यान से देखने पर मैंने उसमे मंगल सिंह को देखा . कामिनी का भला क्या लेना देना मंगल सिंह से इस बात ने मेरे दिमाग के घोड़ो को दौड़ने पर मजबूर कर दिया . मैंने वो तस्वीर भी जेब में डाल ली और मैंने चांदनी के घर से एक फ़ोन किया और हवेली में आ गया .

कामिनी के कमरे में उसका तमाम सामान छान मारा पर कुछ नहीं मिला और फिर मुझे सीढियों के निचे वाले कमरे का ध्यान आया मैंने एक बार फिर से तलाशी शुरू की सब कुछ देख चूका था , पर भला हो इस घर के उस इन्सान का जिसे तस्वीरों का शौक था मुझे एक तस्वीर और मिली जिसमे कामिनी भूषण के साथ खड़ी थी बस इस बार जगह कुवे पर बने कमरे की थी और इस बात ने मुझे चंदा के पति की कही बातो पर ध्यान देने को मजबूर कर दिया.

वापिस ऊपर आकर मैंने एक के बाद एक कड़ीयो को जोड़ना शुरू किया कुलदीप के कमरे से मिली ब्रा , कामिनी की ब्रा दोनों में अंतर था . सरिता देवी का अपहरण होना ठाकुर की दुश्मनी मंगल से होनी तस्वीर में कामिनी का भूषण और मंगल सिंह के साथ होना . ओह तेरी की , नजर कामिनी के सीने पर थी और मेरे होंठो पर मुस्कान आ गयी तो ये माजरा था . दरअसल वो तस्वीरे जिन्हें मैं कामिनी की समझ रहा था वो कामिनी की नहीं उसकी माँ सरिता देवी की थी , दोनों माँ बेटी की शकल लगभग हमशक्ल ही थी इसलिए मैं समझ नहीं पाया था. चंदा के पति ने कमरे में चुदते हुए कामिनी नहीं सरिता को देखा होगा. सरिता देवी के अवैध सम्बन्ध भूषण से रहे होंगे और मंगल भूषण का दोस्त था तो जाहिर है की उसने भी ले ली होगी. ये बात कुलदीप को मालूम हो गयी होगी चूँकि सारे भाइयो में सबसे घटिया कुलदीप ही था हवस में अँधा होकर उसने जरुर अपनी माँ पर ही हाथ साफ किया होगा ब्लेकमेल करके पर यहाँ एक बात और थी मेरा शक इंद्र सिंह पर भी था क्या मालूम वो भी सरिता देवी के साथ हो . या फिर वो सच में कामिनी से मोहब्बत करता था . पुरुषोत्तम और उसके बीच हुए झगडे की वजह कहीं सरिता देवी तो नहीं थी . ठाकुर को ये बात मालूम हुई इसलिए ही उसने सरिता को रस्ते से हटाने की साजिश रची हो

भूषण लगभग हर समय हवेली में रहता था सरिता देवी के साथ उसके सम्बन्ध बनना मुमकिन था क्योंकि ठाकुर ज्यादातर खुद अपनी रंगरेलियो में व्यस्त रहता था , चूँकि चंदा के पति को सरिता देवी के संबंधो की जानकारी थी इसलिए मौका मिलने पर पुरुषोत्तम ने उसे अपने रस्ते से हटा दिया.

मैंने इस थ्योरी पर चलने का सोचा पर अभी भी कुछ सवाल बाकि थी की सारे भाइयो को किसने मारा और लाल मंदिर में क्या करना चाहता था ठाकुर. शाम को मैं घर जा रहा था तो पुलिए के पास मुझे चांदनी की गाड़ी खड़ी दिखी पर वो नहीं थी . मैं इधर उधर देखने लगा तो जंगल में कुछ दुरी पर पेड़ो के साए में मैंने जो देखा मुझे यकीं नहीं हुआ चांदनी घुटनों के बल झुकी हुई थी और उसके पीछे अजित सिंह था जो उसे चोद रहा था . दिल को धक्का सा लगा बेशक मैं जानता था की वो मुझे प्यार नहीं करती बल्कि मैं उसे प्यार नहीं करता था मेरा दिल पद्मिनी के लिए धडकता था पर बुरा बहुत लगा .

चुदाई के बाद अजित ने उसके होंठो को चूमा और बोला- “चांदनी,अभी तक तू अर्जुन को रिझा नहीं पाई है तू जानती है न वो ही एक है जो हमे हमारी मंजिल तक लेकर जायेगा ”

चांदनी- कोशिश कर तो रही हूँ पर उसे हुस्न के जाल में फंसाना मुश्किल है वो औरो से अलग है मैने रुपाली के साइन करके उसके पास नकली वसीयत भी पहुंचा दी है पर उसे फर्क नहीं पड़ा. चंदा अर्जुन के करीब कुछ ज्यादा ही है वो उस पर भरोसा करने लगा है कहीं वो …….

अजित- फ़िक्र मत कर चंदा खुद हवेली को बर्बाद देखना चाहती है वो अर्जुन का साथ नहीं देगी वैसे भी हवेली की अब किसी को परवाह नहीं है बस हमें वो चीज मिल जाये तो फिर देखना हम क्या से क्या हो जायेंगे

चांदनी- और रुपाली उसका क्या

अजित- वो बीता हुआ कल है और कल बस कल होता है .एक बार हमारा काम हो जाये फिर उस साले अर्जुन को तो मैं ऐसी मौत मारूंगा की किसी की हिम्मत नहीं होगी मेरे सामने सर उठाने की .

तो ये सब साजिश शुरू से ही थी चांदनी का मेरे पास यूँ आना प्लान था पर मैं इन मादरचोद लोगो का उस्ताद था किस्मत से मैंने इनकी सच्चाई जान ली थी चाहता तो अभी इनको सजा दे सकता था पर फिर आगे की राह मुश्किल हो जाती ये मुझे मोहरा बनाने चले थे अब बारी मेरी थी . मैं वहां से चंदा को मिलने पहुंचा और जैसे ही झोपडी के अन्दर गया मैने देखा ………………

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