परिवार हो तो ऐसा – Update 57 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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शमा के दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था… इन सब बातों को छोड़ कर उसने फिर से अपना सारा ध्यान रूम हो रही कार्यवाही को सुनने मे लगा दिया… देव के हाथ नेहा के पूरे सरीर के उप्पेर फिर रहे थे कभी उप्पेर कभी नीचे कभी देव नेहा के चूतदों को सहलाने लगते कभी उसकी कमर को …. देव ने अपनी दोनो बाहों से नेहा के शरीर को भींच लिया था जिससे नेहा की चूचियाँ देव की छाती में गढ़ी जा रही थी नेहा ने देव के लंड को छोड़ दिया और उत्तेजनावास अपने दोनो हाथों से देव के सर को पकड़ लिया और एक पॅशनेट किस करने लगी… इस अचानक हुए हमले से देव भी एकाएक चोंक गये और फिर नेहा का पूरा साथ देने लगे.. देव ने नेहा को थोड़ा सा अड्जस्ट किया जिससे देव का लंड नेहा की चूत पर दस्तक देने लगा..

देव और नेहा मस्ती मे चूर होकेर एक दूसरे को चूम और सहला रहे थे… देव को अभी तक इसका अहसास नही हुआ था कि जिसके साथ वो रॉमेस कर रहा है वो उसकी पत्नी नही बल्कि उसके छोटे भाई की बीवी नेहा है… और नेहा भी देव को बताना नही चाहती थी कि देव के साथ कॉन है.. पर दोनो ही मस्ती मे चूर थे देव का लंड बार बार नेहा की चूत पर दस्तक दे रहा था नेहा के हिलने डुलने से देव के लंड का सूपड़ा नेहा की चूत की क्लिट को रगड़ रहा था जिसका असर नेहा के शरीर पर हो रहा था और उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी… उधर शमा का भी बुरा हाल हो चुक्का था वो दोनो की सासो को अब सॉफ सॉफ सुन सकती थी दोनो बुरी तरह से हाँफ रहे थे शमा अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी और उसका दूसरा हाथ उसकी चूचियों का मर्दन कर रहा था… वह उत्तेजित हो रही थी.. नेहा ने भी उत्तेजित होकेर देव के चेहरे और छाती पर चुंबनों की बोछार कर दी देव के हाथ भी नेहा के शरीर पर तेज़ी से चल रहे थे… ऊओह जानू आज तुम्हे क्या हो गया है तुमने मेरे शरीर मे एक आग सी लगा दी है ऊओह जानू ऐसे ही करती रहो ह्ह्हाआअन्न्न्न आईसीईए हहिईीईई ऊऊऊओ हह हूऊऊऊओ नेहा अब तेज़ी से अपनी चूत को देव के लंड पर रगड़ रही थी… इसी रगड़ा रागड़ाई में देव का लंड कब नेहा की चूत के छेद पर सेट हो गया दोनो को ही पता नही चला और इसका अहसास तब हुआ जब नेहा थोड़ा नीचे को हुई और देव के लंड का सूपड़ा नेहा की चूत मे घुस गया… नेहा की साँस जैसे अटक गयी … उसे अपनी चूत में देव का लंड बुरी तरह फसा हुआ महसूस हो रहा था … देव भी नेहा की चूत की टाइटनेस को महसूस कर रहा था उसने नेहा से पूछा वाशु डार्लिंग आज तो तुम्हारी चूत कुछ ज़्यादा ही टाइट लग रही है ऐसा कैसे हो गया… म्‍म्म्ममममममम नेहा बाद इतना ही कह पाई और थोड़ा और नीचे को होकेर देव के लंड को अपनी चूत में और अंदर तक घुसा लिया.. नेहा की चूत गीली होने के बावजूद देव का लंड उसकी टाइट चूत में कसा कसा जा रहा था देव को भी अब लगने लगा था कि उसके साथ वाशु नही कोई और है पर वा कन्फर्म कर लेना चाहता था…. देव सोच रहा था कि इतनी टाइट चूत किसकी हो सकती है वह तो वाशु का इंतज़ार कर रहा था अगर उसके साथ वाशु है तो उसकी चूत इतनी कसी हुई कैसे हो सकती वह तो उसे रोज़ चोद्ता है… और अगर उसके साथ वाशु नही है तो कॉन है… देव को अजीब सा महसूस हो रहा था उसे समझ नही आ रहा था आख़िर क्या हो रहा है… इसी कशमकस में जब देव ने अपने लंड को नेहा की चूत से थोड़ा निकलता महसूस किया तो देव ने अपने दोनो हाथों से नेहा के शरीर को जाकड़ लिया और नेहा की चूत में नीचे से प्रहार करते हुए अपने लंड को आधे से ज़्यादा नेहा की चूत में घुसा दिया… देव का लंड नेहा की चूत की दीवारों को चीरता हुआ रगड़ता हुआ अंदर घुसा था जिससे नेहा को थोड़ा दर्द भी हुआ और वह हल्का सा चीख उठी जिससे देव को यकीन हो गया कि ये वाशु नही कोई और है…. नेहा की ये चीख शमा ने भी सुनी थी वह सोच रही थी कि क्या देव अंकल का लंड इतना बड़ा है कि उसकी मम्मी चीख पड़ी… ऊओह कितना कसा कसा जा रहा होगा ये सोचकेर ही शमा की चूत पानी छोड़ने लगी… देव ने भी दो चार तेज तेज धक्के लगाए और अपने पूरे लंड को नेहा की चूत में डाल दिया … नेहा का दर्द से बुरा हाल था ऐसा तो उसे राज से चुदने पर भी नही हुआ था नेहा अपनी सोच में देव और राज दोनो के लंड को कंपेर करने लगी…. देव ने अपने हाथों से नेहा के सर को पकड़ कर अपने पास किया और उसके होठों पर अपने होंठ रख कर चूसना सुरू कर दिया नेहा भी अब देव का साथ दे रही थी… देव ने अब धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना सुरू कर दिया … नेहा की चूत ने अब देव के लंड को अपने अंदर पूरा लील लिया था उसकी चूत पानी छोड़ रही थी जिससे देव के लंड कोअंदर बाहर होने मे आसानी हो रही थी नेहा को भी अब मज़ा आना सुरू हो गया था उसका शरीर भी अपने आप उप्पेर नीचे हो रहा था… नेहा ने अब खुद देव के मुँह पर चुंबनो की बोछार सिस कर दी जिससे देव समझ गये कि वो पूरी तरह से चुदने को तय्यार है… और देव ने करवट बदली और बिना अपना लंड चूत से बाहर किए नेहा को अपने नीचे कर लिया ऐसा करने से देव का लंड आधे से ज़्यादा नेहा की चूत से बाहर आ गया था… जब देव ने महसूस किया कि उसका लंड बाहर निकलने को है तो देव ने एक जोरदार प्रहार करते हुए अपने लंड को पूरा का पूरा फिर से नेहा की चूत में उतार दिया…. ढ्ह्हीईरीईईईईई ऊऊओह बस यही शब्द नेहा मुँह से निकले जिसे सुनकर देव एक बार चॉक गया…. और अपने हाथ को बढ़कर बेड के पास रखे टेबल लॅंप को जला दिया …. नाइट बल्ब की हल्की रोशनी पूरे कमरे में फैल गयी जिससे नेहा का पूरा नंगा जिस्म देव की आँखो के सामने चमक उठा नेहा ने जब देखा देव उसके शरीर को देख रहे हैं उसने देव से कहा प्लीज़ लाइट बंद करदो … देव का लंड अभी भी नेहा की चूत में जकड़ा हुआ था कमरे में रोशनी होने से शमा को भी अब साफ साफ दिखाई दे रहा था… उसने देखा बेड पर उसकी माँ नंगी लेटी है और देव अंकल उसकी टाँगों के बीच अपने लंड को उसकी चूत में घुसाए उसकी मम्मी के नंगे जिस्म को निहार रहे हैं… देव को ऐसे देख कर शमा को भी थोड़ी शरम महसूस हुई और उसका एग्ज़ाइट्मेंट भी बढ़ गया… भाई सहाब प्लीज़ लाइट बंद कर दो देव को ऐसे अपनी ओर देखते हुए नेहा ने एक बार फिर से देव को आग्रह किया…. पर देव तो जैसे सबकुछ भूल गया …

नेहा तुम यहाँ और वाशु कहाँ है… देव ने जैसे होश में आते हुए नेहा से पूछा… बताती हूँ सब बताती हूँ पहले आप लाइट बंद कर दो … नेहा ने देव से कहा… नही पहले तुम्हे मुझे सब सच सच बताना होगा और ऐसे ही बताना होगा… देव ने थोड़ा नाराज़ होते हुए कहा… प्लीज़ भाई सहाब समझने की कोसिस करो मुझे शरम आ रही है आप लाइट बंद करदो में सब बता रही हूँ… नेहा एक बार फिर से आग्रह करते हुए कहा… बाहर शमा दोनो की बातें बड़े ध्यान से सुनते हुए दोनो को देख रही थी… और वह चाहती थी की लाइट बंद ना हो … शमा यह देखता चाहती थी कि उसकी मम्मी देव अंकल से कैसे चुदवाती है… नेहा बार बार देव को रिक्वेस्ट कर रही थी जिसका देव पर कोई असर नही हो रहा था नेहा ने अपनी आँखे बंद की हुई थी देव धीरे धीरे नेहा के नंगे शरीर को अपनी आँखों के सामने देख कर एक बार फिर से उत्तेजित होने लगा देव का लंड अभी अभी नेहा की चूत में फँसा हुआ था जिसे निकालने की कोसिस ना तो नेहा ने की और ना ही देव ने… देव का लंड एक बार फिर से झटके खाने लगा जिसका अहसास नेहा को भी अपनी चूत मे होने लगा था… खिड़की पर खड़ी शमा भी ये जानना चाह रही थी कि क्या उसकी मम्मी वाशु आंटी की मर्ज़ी से देव अंकल के कमरे में आई या फिर वाशु आंटी को इस बारे में कुछ पता ही नही है… ये सब सोचते सोचते उसका जोश भी थोड़ी देर के लिए ठंडा पड़ गया था… अब शमा ये जानने को उत्सुक थी कि उसकी अपनी मम्मी देव अंकल को क्या बताती है… नेहा अब जल्दी से बताओ आख़िर ये सब माजरा है क्या और तुम यहाँ वाशु की जगह पर क्या कर रही हो…. देव ने नेहा से पूछा… मैं सब बता रही हूँ पहले आप लाइट बंद करदो आप जो कहेंगे जो पूछेंगे मैं सब बताती हूँ पर पहले आप लाइट बंद करदो… नेहा ने फिर से देव से रिक्वेस्ट की… तुम बिल्कुल नंगी मेरे सामने हो और मेरा लंड तुम्हारी चूत में घुसा हुआ है और तुम कह रही हो शरम आ रही है … देव ने नेहा से कहा. नेहा देव की ऐसी बाते सुनकर पानी पानी हो गयी और नेहा ने फिर से रिक्वेस्ट की लाइट बंद करने की … शमा भी देव के मुँह से ऐसी बातें सुनकर शर्मा गयी और उसकी चूत पानी चूसने लगी ..जब देव ने देखा कि वाकई नेहा शर्मा रही है तो देव ने नेहा की बात मानते हुए लाइट बंद कर दी… और पूरे रूम में फिर से अंधेरा हो गया … खिड़की से अंदर देख रही शमा को थोड़ी निराशा हुई कि वो अब आगे नही देख सकती पर उसने अपने कान फिर से खिसकी के बिल्कुल पास सटा कर लगा दिए और देव और नेहा की बाते सुनने लगी… हां तो अब बोलो और सब सच सच बता दो.. देव ने नेहा से बोलने को कहा… नेहा ने बोलना सुरू किया कैसे उसने कल रात दोनो को चुदाई करते देखा और उसके वाशु बताया और कैसे वो देव के लंड की ओर आकेर्षित हुई फिर वाशु ने प्लान बनाया दोस्तो जो भी बाते नेहा और वसुंधरा के बीच हुई नेहा ने वो सब देव को बता दिया… जिसे सुनकर देव चोन्के बिना ना रह सका और बिल्कुल ऐसी ही हालत शमा की भी थी… जब तुम्हे मुझसे चुदवाना ही था तो फिर छुपाने की क्या ज़रूरत थी … देव ने नेहा से पूछा … मैं ये सब चोरी छुपे बिना आपको पता लगे करना चाहती थी… नेहा ने बताया. और ऐसा करने के लिए वाशु ने ही कहा था… नेहा ने आगे कहा… तो अब आगे क्या करना है … सब कुछ जानने के बाद देव ने नेहा से पूछा… करना क्या है जिस काम के लिए मैं आई थी उसे पूरा करना है… नेहा ने थोड़ा सर्माते हुए कहा… नेहा के मुँह से सुनकर देव अंदर ही अंदर खुश हुए और ये ख़ुसी नेहा को उसकी चूत में घुसे हुए लंड के झटका लेने से पता चली… शमा भी ये सुनकेर खुश हुई पर जब उसने देखा कि वह केवल सुन सकती है देख नही सकती तो वह थोड़ा निराश हो गयी… शमा अब ये देखा चाहती थी देव अंकल उसकी मम्मी की कैसे चुदाई करते है और मम्मी देव अंकल का साथ कैसे देती है…. नेहा ने जब देखा देव कुछ कर नही रहे हैं तो नेहा ने देव के सिर को अपने दोनो हाथों से पकड़ कर अपने पास कर दिया और अपने होंठ देव के होंटो पर रख कर देव को किस करना सुरू कर दिया… देव ने नेहा का नही साथ दिया और नही उसे ऐसा करने से रोका,…. नेहा देव के होंठों को चूस रही थी…. और अपने हाथों को देव की नंगी पीठ पर फिरा रही थी…. कुछ देर बाद देव ने अपने होठों को नेहा के होंठों से अलग किया और नेहा से कहा… नेहा अब मैं जैसा कहूँ तुम्हे वैसा ही करना होगा… और ये किसी को भी पता नही चलना चाहिए….. देव ने कहा… क्या…..????? नेहा ने बस इतना ही कहा…

क्या करना होगा मुझे जल्दी बताइए… नेहा ने देव से कहा. बताता हूँ पहले वादा करो इस बात का किसी को भी पता नही चलना चाहिए… वाशु को भी नही… देव ने नेहा से कहा. पहले बताओ तो सही आख़िर आप कहना क्या चाहते हो.. नेहा ने कहा. नेहा सोच में पड़ गयी आख़िर देव उससे क्या कहना चाहता है… शमा भी ये सब सुन रही थी वह भी समझ नही पा रही थी आख़िर देव अंकल उसकी मम्मी से क्या कहना चाह रहे हैं. शमा ये जानने को उत्सुक थी कि देव अंकल उसकी मम्मी से कॉन सी बात बताने जा रहे हैं.. जिसे वो सबसे छुपाना चाहते हैं.. वाशु आंटी से भी… अब जो मैं तुमसे कहने जा रहा हूँ वो बात तुम्हे अपने तक ही सीमित रखनी है समझी.. देव ने नेहा से कहा. हां ठीक जैसा आप कहो वैसा ही होगा बताओ अब.. नेहा ने कहा. जो प्लान वाशु और तुमने बनाया था जिसमे मुझ से ये सब छुपाया जा रहा था वही प्लान अब वाशु पर अपनाना है…. देव ने कहा… मैं कुछ समझी नही… साफ साफ़ बताओ… नेहा ने देव से पूछा. प्लान ये है कि वाशु को अब ये पता नही चलना चाहिए कि मुझे तुम दोनो के चुदाई के प्लान के बारे में पता चल गया है… अब तुम और मैं मिलकर बिना वाशु को पता चले खूब मज़े लेकेर चुदाई करेंगे और जिंदगी के मज़े लूटेंगे वो भी बिना किसी को पता चले… देव ने कहा. नेहा अब कुछ कुछ समझ रही थी देव क्या चाहता है.


उधर शमा अंदर ही अंदर खुश हो रही थी कि किसी को पता चले ना चले उसने तो सब सुन और देख लिया है… देव ने अपनी बात कहने के बाद नाइट लॅंप फिर से जला दिया …. रूम में रोशनी फैलते ही नेहा का नंगा शरीर एक बार फिर से चमक उठा.. अब इसे क्यों जला दिया मैं सब करने को तय्यार हूँ जैसा आप कहें … नेहा ने देव से कहा. जब चुदाई करनी ही है तो क्यूँ ना खुलकर मज़े लिए जाए और वैसे भी मुझे अंधेरे में चुदाई करने में मज़ा नही आता… देव ने कहा… लेकिन मुझे ऐसे शरम आ रही है… नेहा ने अपनी आँखे बंद करते हुए कहा. रूम में रोशनी फैलने से अब शमा सब साफ साफ देख सकती थी… लाइट जलने से उसे ख़ुसी हो रही थी लेकिन उसे डर था कहीं उसकी मम्मी की बातों में आकर देव अंकल फिर से लाइट बंद ना कर दें… शमा मन ही मन दुआ माँग रही थी कि देव अंकल उसकी मम्मी की एक ना सुने और लाइट बंद ना हो…. अब जो भी होगा ऐसे ही होगा लाइट बंद नही होगी.. देव ने नेहा से कहा… देव की ये बात सुनकर शमा ने राहत की साँस ली और उत्सुकतावास अंदर देखने लगी… रूम में रोशनी ज़्यादा नही थी पर नाइट बल्ब जलने से इतना प्रकाश तो अवस्य हो रहा था जिससे शमा सॉफ सॉफ देख सकती थी… नेहा ने कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोलना चाहा इससे पहले वो कुछ कहती देव ने अपने सर को नीचे झुकते हुए अपने होंठ नेहा के तपते होठों पर रख दिए और पहली बार उजाले में नेहा को किस करना सुरू कर दिया… नेहा ने थोड़ा सा आनाकानी की पर बाद में वो देव का साथ देने लगी… कुछ ही पलों में दोनो एक दूसरे में खो गये… देव का लंड जो थोड़ा सिकुड कर नेहा की चूत से बाहर आ गया था फिर से अपने रौद्र रूप में आने लगा… नेहा की चूत भी पानी छोड़ने लगी थी … देव के हाथ अब नेहा की चूचियों तक पहुँच गये… देव ने नेहा की चूचियों को दबाना सहलाना सुरू कर दिया…. हल्की रोशनी में भी नेहा का गदराया हुआ शरीर किसी नौजवान लड़की से कम नही लग रहा था… एक गदराए यौवन की मल्लिका को अपने सामने यूँ नंगी देख कर देव को भी जोश आ गया… देव ने थोड़ा नीचे होते हुए नेहा की चूची को मुँह मे ले चूसना सुरू कर दिया और दूसरी चूची को अपने हाथ से भी सहलाते भी जा रहे थे…. नेहा ने भी अब सारी शरम लिहाज़ को छोड़ते हुए देव का पूरा साथ देना सुरू कर दिया… नेहा ने देव के सिर को अपने हाथों से पकड़ लिया और उसे अपनी चूची पर दबाने लगी… देव भी पूरे जोश से अब नेहा की चूची को चूस रहे थे… कमरे का महॉल फिर से गरम होने लगा दोनो की सिसकारियाँ अब पूरे कमरे में सुनीं जा सकती थी… शमा भी दोनो के जोश को देखते हुए गरम होने लगी… और अपने हाथ की उंगलियों को फिर से अपनी चूत पर फिराना सुरू कर दिया…. दूसरे हाथ से अपनी चूचियो को बारी बारी से दबा भी रही थी…. देव भी कभी एक चूची को चूस्ता कभी दूसरी चूची को… पूरा महॉल गरम हो चुक्का था कमरे के अंदर भी और कमरे के बाहर भी जहाँ शमा खड़ी थी….

देव अपने हाथों से नेहा की गदराई हुई चूचियों को दबा और मसल रहे थे साथ ही बारी बारी से चूचियों को चूस भी रहे थे… देव का लंड फिर से नेहा की चूत पर दस्तक दे ने लगा था… देव के हिलने डुलने से लंड बार बार नेहा की चूत की क्लिट को रगड़ रहा था जिससे नेहा के जिस्म में उतीज़ना बढ़ रही थी… कुछ देर बाद देव ने नेहा के उप्पेर से उठते हुए उसकी साइड में बेड पर लेट गये… और नेहा को अपने उप्पेर खींच लिया… इस बार नेहा ने पानी आँखे खोली और वह देव के उप्पेर आ गयी और अपनी चूत को देव के लंड पर रगड़ना चालू किया… नेहा की चूत पहले से ही गीली थी लंड पर रगड़ने से वह और भी पानी छोड़ने लगी… देव ने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को नेहा की चूत पर सेट किया चूत के छेद पर लंड सेट होते ही नेहा नीचे की ओर बैठ गयी और देव का लंड उसकी गीली चूत में फिसलता हुआ उसके अंदर समा गया… देव अपने हाथों को नेहा के चूतदो पर रखकर उन्हे सहलाने लगे और अपना दबाव बनाते हुए अपने लंड को नेहा की चूत में और अंदर तक घुसाने लगे… नेहा ने अब धीरे धीरे उप्पेर नीचे होना सुरू किया… और हल्के हल्के धक्के लगाने सुरू हो गये… नेहा देव के उप्पेर झुकी हुए थी जिससे उसकी चूचियाँ हिलते हुए देव के मुँह को च्छू रही थी देव ने अपनी जीभ निकाल कर उनके निपल के उपेर फिराने लगे… शमा खिड़की से ये सब देख रही थी… उसके हाथ अब तेज़ी से उसकी चूत पर चल रहे थे वह बुरी तरह से अपनी क्लिट को मसल रही थी किसी भी पल उसका पानी छूट सकता था… अपनी मम्मी को यूँ बेसार्मों की तरह उनके जेठ से चुद्ते हुए देख कर उसका भी जोश बढ़ रहा था उसकी चूत लगातार पानी बहा रही थी… नेहा अपनी स्पीड बढ़ाते हुए तेज़ी से उप्पेर नीचे हो रही थी… करीब दस मिनट ऐसे ही चुदाई करते रहने के बाद नेहा थक कर चूर हो गयी उसकी चूत ने पानी छोड़ा दिया था और नेहा देव के उप्पेर ढेर हो गयी … नेहा ने नेहा के होंठों पर अपने होंठ रख कर किस करना सुरू कर दिया… नेहा की साँसें तेज़ी से चल रही थी देव का उसे किस करने से उसे साँस लेने में थोड़ी परेसानी हो रही थी नेहा ने अपना मुँह को देव से अलग हटा लिया… नेहा थोड़ी थॅकी हुई लग रही थी… देव ने करवट बदली और फिर से नेहा के उप्पेर आ गये… देव ने फिर से अपनी पोज़िशन ली और अपने लंड को नेहा की चूत के छेद पर सेट किया और धक्का लगाया जिससे उसका लंड नेहा की गीली चूत में आधे से ज़्यादा घुस गया …. देव ने एक दो धक्के और लगाए और अपना पूरा लंड नेहा के अंदर उतार दिया …. शमा देव को नेहा की चुदाई करते हुए सॉफ सॉफ देख रही थी…. उसके कानो में नेहा की आअहह ऊऊहह जैसी आवाज़े सॉफ सुनाई दे रही थी… जिससे शमा और भी उत्तेजित होते हुए अपनी चूत में उंगली करते हुए अपनी चूचियों को दबा रही थी… देव अब लगातार अपने धक्को की स्पीड बढ़ाते जा रहे थे… और तेज तेज धक्कों से नेहा की चुदाई कर रहे थे…. हर धक्के से साथ नेहा की सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थी… नेहा फिर से उत्तेजित होने लगी और अपने चूतड़ो को उठा उठा कर देव के धक्को का साथ देने लगी…. नेहा को ऐसे करते देख देव और भी जोश में आ गये और तेज़ी से नेहा को चोदने लगे…… नेहा की आहें अब पूरे रूम में गूँज रही थी…. देव ने अपने हाथ अब नेहा की चूचियों पर रख दिए और उन्हे दबाते हुए धक्के लगाने लगे….. थोड़ी ही देर में नेहा का शरीर फिर से अकड़ने लगा उसकी उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गयी और दो चार धक्कों के बाद ही नेहा फिर से झाड़ गयी… और बिना हीले डुले शांत पड़ कर अपनी सासो को संभालने की कोसिस करने लगी… नेहा के झड़ने के बाद देव ने धक्के लगाने बंद कर दिए थे देव नेहा रिलॅक्स होने के लिए थोड़ा टाइम देना चाहते थे… शमा का हाथ तेज़ी से अपनी चूत पर चल रहा था वह पूरे तरह उत्तेजित हो गयी उसका सरीर अकड़ने लगा था और वह किसी भी पल झाड़ सकती थी… और कुछ ही देर में शमा की चूत ने भी पानी छोड़ दिया… शमा ने बड़ी मुस्किल से अपनी आन्हो और सिसकारियो को रोके रखा वह डर रही थी कहीं उसकी सीकरियाँ अंदर देव और नेहा ना सुन लें…. शमा अब अपनी साँसों को दुरुस्त करने में लगी थी… उसने अंदर देखा देव अभी ऐसे उसकी मम्मी उप्पेर लेटे हुए उसकी चूचियों को चूस रहे थे… आप अभी तक झाडे नही मैं तो कयी बार झाड़ चूकि हूँ… लगता है बहुत जोश बाकी है आप में अभी भी… नेहा ने कहा.. जब इतने मस्त शरीर की मालकिन किसी के नीचे नंगी पड़ी हो तो कोई मूरख ही होगा जो जल्दी झड़ने के बारे में सोचेगा… देव ने अपना मुँह नेहा की चूची से हटाते हुए कहा… मैं इतनी पसंद आ गयी आपको… या वाशु के साथ भी ऐसे ही करते हो आख़िर वाशु भी कुछ कम नही है… नेहा ने पूछा… वाशु अपनी जगह सही है और तुम्हारा भी जवाब नही… वैसे दोनो को कंपेर करना मुस्किल है… तुम दोनो ही बहुत हॉट और सेक्सी हो… देव ने कहा… मैं तो पूरी तरह से थक गयी हूँ मुझमे अब और जोश नही बचा है आप जल्दी से निपट जाओ और वैसे भी बहुत देर हो गयी है कहीं वाशु उठ ना जाए… नेहा ने कहा.. देव ने बिना कुछ कहे फिर से धक्के लगाने सुरू कर दिए देव अपने धक्को की स्पीड करते हुए नेहा को चोद रहे थे… नेहा फिर से उत्तेजित होने लगी…. अगली.. बार मैं … तुम्हारी… गंद … मारूँगा… ऊऊहह देव ने हन्फ्ते हुए नेहा से कहा और और धक्के की स्पीड लगातार बढ़ते ही जा रहे थे…. गांद … मुँह… चूत… जो .. चाहे मार.. लेना … मैं अब.. आपको कभी मना नही करूँगी… नेहा ने भी टूटी फूटी आवाज़ में कहा… नेहा अब फिर से झड़ने वाली थी और देव भी अब झड़ने के करीब पहुँच गयी..थे… देव अब पूरे जोश से नेहा को चोद रहे थे… कुछ ही धक्कों के बाद ऊओह देववववववववव मैईईईईईईईईईन्न्नणणन् झाद्दद्ड़ंंननणणनीईईईईई वालिइीईईईईईईईईईईईईई हूऊंन्‍ननननननननननननणणन् और तीएजज़्ज़्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज हाआआआआअन्न्‍नननननननननणणन् ओउुुुुुुुुउउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर त्ट्टीईईईजज़्ज़्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज आईसीईईईईईईई हीईीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई और इसी के साथ नेहा एक बार फिर से झाड़ गयी… देव भी अब झड़ने के करीब थे और तेज़ी धक्के लगाते हुए… ओओओऊऊऊऊझ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यययययययययाआआआआआआआआआअ तूमम्म्मममममममममम कितनी हूऊऊथततटटटटटटटटटटटटटतत्त हूऊऊऊऊऊऊऊऊओ नेहा…… ऊऊऊहह मैंन्ननननननणणन् झदन्नीईईईई वलाआआआआआआआअ होंंननननननननणणन् ओह बहुतत्त्टटटटटटटटटटतत्त टाइट टत्त्टटटटटटटतत्त चूवततत्टटटटटटटटटटटटटटटतत्त हाईईईईईईईईईईईईईई तुम्हरीईईईईईईईईईईईईईईई ऊऊहह….. और ये कहते हुए नेहा की चूत में झाड़ गये… नेहा और देव बुरी तरह हन्फ्ते हुए अपनी साँसों को संभालने लगे…. शमा भी वहाँ से हटकेर दबे पाँव सीढ़ियों से होते हुए अपने रूम में चली गयी… थोड़ी देर बाद नेहा भी अपने कपड़े पहेन कर अपने रूम में चली गयी..

अगली सुबह सभी (देव, वसुंधरा, नेहा और शमा) डाइनिंग टेबल पर बैठे नाश्ता करते हुए बातें रहे है… सब कुछ नॉर्मल है पहले जैसा जैसे कुछ हुआ ही ना हो…


शमा कभी देव को देखती तो कभी अपनी मम्मी नेहा को… नेहा आज कुछ ज़्यादा ही खुस लग रही है… जिसे नेहा छुपाने का सफल प्रयास कर रही है… पर वह शमा की नज़रों से बच ना सकी… क्या बात है मम्मी आज कुछ ज़्यादा ही खुश लग रही हो… शमा ने नेहा से पूछा… नही तो ऐसी तो कोई बात नही और वैसे भी मैं तो हमेशा ही ऐसे ही खुश रहती हूँ… तुमने शायद आज ध्यान दिया है… नेहा ने कहा… शमा की ये बात सुनकर देव अंदर ही अंदर डर गये कहीं शमा को उन दोनो के बारे में पता तो नही चल गया है… फिर देव खुद ही सोचने लगे शमा को पता कैसे चलेगा वो तो वैसे भी उप्पेर के रूम में सोई थी… नही नही उसे कुछ नही पता है वो तो ऐसे ही अपनी मम्मी से नॉर्मली बात कर रही है… देव ने अपने मन को समझाया… नही मम्मी मुझे लगा कि आप कल से ज़्यादा खुश लग रही हैं इसलिए पूछ लिया… क्यों आंटी आप को क्या लगता है… शमा ने वाशु से पूछा. शमा मुझे तो ऐसा नही लगता नेहा तो ऐसे ही रहती है हमेशा तुम ही पता नही कहाँ खोई रहती हो आज कल …. वाशु ने नेहा का साथ देते हुए कहा… हां शायद मैं ज़्यादातर अपने में ही खोई रहती ना इसलिए ऐसा लगा मुझे …

शमा ने बात को आगे ना बढ़ाते हुए वाशु की हां में हां मिला दिया… तब तक देव नाश्ता कर चुके थे.. और ऑफीस जाने के लिए निकल गये… वाशु देव को छोड़ने बाहर तक गयी और फिर डोर लॉक करके वापस नेहा और शमा के पास बैठ गयी…. और तीनो फिर से बातें करने लगी… थोड़ी देर में तीनो ने नाश्ता किया और शमा उठकर अपने रूम में चली गयी.. नेहा और वाशु रसोई और घर की साफ सफाई में लग गयी.. शमा अपने रूम में जाकर फिर से सो गयी रात के घटनाकर्म को देख कर उसकी नींद उड़ गयी थी जिसके कारण वो ठीक से सो नही पाई थी… दोपहेर तक नेहा और वाशु घर काम करती रही और खाना बनाती रही इस बीच दोनो में रात की बात को लेकेर कोई बात नही हुई… सब काम निपटाने के बाद दोनो अपने अपने रूम मे नहाने के लिए चली गयी… कुछ ही देर में दोपहेर के खाने का वक्त हो चला है… वाशु नेहा को खाने के कहने उसके रूम में जाती है… नेहा अपने रूम में शीशे के सामने खड़ी तैय्यार हो रही है… वाशु उसके रूम में आती है… नेहा मैं खाना लगा रही हूँ तुम शमा को लेकेर आ जाओ… कमरे में आते ही वाशु ने नेहा से कहा और ये कहकर वो रसोई में चली गयी…… नेहा तय्यार होने के बाद शमा को उठाने उसके रूम में जाती है… रूम में पहुच कर नेहा देखती है शमा फिर सो रही है… नेहा शमा को उठाती है शाम उठ जाती है और कहती है क्या हुआ मम्मी. खाने के लिए बुलाने आई थी मैं तो .. नेहा कहा. मेरा मन नही है अब्भी खाने का….. शमा ने कहा. आज कल मैं देख रही हूँ तुम्हारा मन किसी भी चीज़ में नही है… नेहा ने कहा. ऐसी कोई बात नही है मम्मी सब ठीक है… शमा ने कहा. तो फिर चलो खाना खाने .. नेहा ने शमा के बालों में उंगलियाँ फिराते हुए कहा. शाम उठ जाती है और फ्रेश होने के लिए वॉशरूम में घुस जाती है… नेहा वहीं बैठी हुई शमा का वेट करती है… शमा फ्रेश होकेर बाहर आती है और फिर दोनो मा बेटी नीचे आ जाती है. वाशु ने डाइनिंग पर खाना लगा दिया है… तीनो खाना खाते हैं…

खाना खाने के बाद तीनो बातें करने लगी… तीनो अभी बातें कर ही रही थी कि फोन की घंटी बजी… ट्रिंग ट्रिंग…….ट्रिंग… वाशु ने जाकर फोन उठाया तो पता चला ये नेहा के लिए फोन था… नेहा ने जाकर वाशु से रिसीवर लिया और बात करने लगी… शमा और वाशु दोनो नेहा एक एकतरफ़ा बातें सुन रही है.. पूरी बात करने के बाद नेहा दोनो को बताती है कि ये उसकी बहेन का फोन थॉ वो कब से उनके घर पर फोन ट्राइ कर रहे थे… जब बात नही हुई तो यहाँ फोन किया… ये तो हमे भी पता है मम्मी पर पूरी बात बताओ के आख़िर फोन किसलिए किया है… एक गुड न्यूज़ है आज शाम को श्री यहाँ दो तीन दिन के लिए आ रहा है… (श्रीकांत नेहा की बहेन का बेटा है जो किसी एंट्रेन्स एग्ज़ॅम के लिए उनके यहाँ आ रहा है.. जिसे प्यार से सब श्री कहकर बुलाते हैं…) और मैने उसे यहीं रहने के लिए बुला लिया है क्योंकि हम तो पहले से ही यहाँ रह रहे है… मोहन और स्वीटी के लॅंडन जाने के बाद से और श्री ने भी यहाँ रहने के लिए हां कर दी है… श्री भैया आ रहे हैं ये तो बड़ी खुशी की बात है कम से कम मुझे तो बोरियत नही होगी… शमा ने कहा. ये तुमने बहुत अच्छा किया नेहा जो तुमने श्री को यहाँ बुला लिया वरना तो हम फिर यहाँ अकेले रह जाते.. वाशु ने खुश होते हुए कहा.. कितने बजे की ट्रेन से आ रहा है श्री… शमा ने पूछा… यही कोई 5 बजे की ट्रेन है उसकी और वो यहाँ 5.30 तक पहुँचेगा… नेहा ने कहा. ओके तब तक थोड़ा आराम कर लेते है… और सभी अपने कमरों मे आराम करने चली गयी….

शाम के समय शमा श्री को लेने के लिए अपनी स्कूटी लेकेर स्टेशन पहुँची और श्री की ट्रेन का इंतज़ार करने लगी… शमा ठीक टाइम पर पहुँच गयी … ट्रेन को आने में बस कुछ ही पल बचे थे….. थोड़ी ही देर में ट्रेन आ गयी यात्री उतरने लगे… शमा खड़ी हुई एक एक कोच से उतरते हुए यात्रियों को देख रही है कि उसे जल्दी से श्री दिख जाए जिसके लिए वो यहा आई है.. पर उसे श्री उसे दिखाई नही दे रहा है… शमा बड़े गौर से सब को देख रही है कहीं तो श्री दिखेगा है… और फिर एक कोच से एक हॅंडसम नौजवान उतरता है… शमा उसे देखती है और दौड़ कर उसके पास जाती है…. दोनो एक दूसरे को देखते ही पहचान लेते है…. हाई भैया कैसे हो… शमा श्री के पास जाते ही उसे विश करती है… मैं ठीक हूँ दीदी… आप बताइए और सब कैसे हैं… श्री आगे बढ़कर शमा के गले लगते हुए उसे विश करता है… दोनो के बीच फॉर्मल बातें होती है और फिर दोनो घर के लिए निकलते हैं… दीदी आपका तो मन नही लग रहा होगा स्वीटी के बिना और राज और प्रीति भी यहाँ नही है.. श्री ने पूछा… पहले नही लगा पर अब तुम आ गये तो मन लग जाएगा .. शमा ने ज्वाब दिया… दोनो पार्किंग में आ गये और शमा अपनी स्कूटी को स्टार्ट करती है श्री उसके पीछे बैठ जाता है और दोनो ऐसे ही बातें करते हुए घर आ जाते हैं…

दोनो घर पहुँचते हैं और नेहा दरवाजा खोलती है श्री आगे बढ़ते हुए नेहा के पैर छूता है और विश करता है नेहा भी उसे असिर्वाद देती है और अंदर आने को कहती है… वाशु ड्रॉयिंग रूम में बैठी है श्री वाशु के भी पैर छूकर असिर्वाद लेता है… शमा रसोई से पानी लेकेर आती है और श्री को देती… श्री पानी पीता है… नेहा श्री को कहती हैबेटा हाथ मुँह धोकेर फ्रेश हो जाओ मैं कुछ खाने को लाती हूँ… कहकेर नेहा रसोई में चली जाती है… वाशु शमा को कहती है बेटा श्री को राज का रूम दिखा दो और समान उसमे रखवा दो.. श्री के पास सिर्फ़ एक बॅग था जिसे उठाकर वो शमा के पीछे पीछे उपेर आ जाता है… शमा राज के रूम में आ जाती है श्री भी पीछे पीछे रूम में आता है… भैया ये है आपका रूम आप यहाँ रहेंगे और बराबर वाले रूम में मैं ठहरी हू… आप फ्रेश होकेर नीचे आ जाओ… कहकेर शमा नीचे आ जाती है… और वाशु के पास बैठ जाती है… नेहा ने चाय नाश्ता रेडी किया और ड्रॉयिंग रूम में ही लेकेर आ गयी और तीनो बैठ कर श्री का वेट करने लगे… कुछ ही देर में श्री भी नीचे आता है और फिर चाय पीते हैं और बातें करते है… घर में सब कैसे है तुम्हारे मम्मी पापा और रूचि कैसी है.. सब ठीक हैं मौसी जी सब मज़े में हैं.. रूचि भी ठीक है बी.कॉम 1स्ट्रीट में है… श्री जवाब देता है… तुम्हारी पढ़ाई कैसे चल रही है… नेहा ने पूछा.. अच्छी चल रही बस ये एंट्रेन्स हो जाए फिर अड्मिशन का देखते है… श्री ने जवाब दिया.. रूचि की भी छुट्टियाँ होंगी उसे भी ले आते… शमा ने कहा… मैने तो कहा था पर उसने मना कर दिया वो कह रही थी कि जब सभी यहाँ होंगे तभी आउन्गि… श्री ने जवाब दिया … और ऐसे ही सब बातें करते रहे… चाय ख़त्म होने के बाद नेहा ने श्री से कहा बेटा जाओ आराम कर लो… बहुत थक गये होगे सफ़र कर के…. श्री उठकर उपेर रूम में चला जाता है… शमा भी अपने रूम में चली जाती है…

वाशु और नेहा झूठे बर्तनो को सॉफ करने के लिए रसोई में चली जाती है… सब काम निपटा लेने के बाद… वाशु में आज श्री की पसंद का खाना बना लूँ… नेहा वाशु से पूछती है… मारूँगी एक अगर आगे से किसी चीज़ के लिए पूछा तो ये तुम्हारा ही घर है जो चाहे करो खाओ पीयो.. श्री भी मेरे बेटे जैसा है उसके लिए कुछ भी बनाओ… ये कोई पूछने की बात है.. वाशु ने थोड़ा गुस्सा करते हुए कहा… वाशु को गुस्सा करते देख नेहा वाशु के पास आती है और अपने दोनो हाथो से अपने कान पकड़ कर सॉरी बोलती है… नेहा को ऐसे देख कर वाशु का गुस्सा फुर्र हो जाता है… और वह नेहा को गले लगा लेती है… दोनो की चूचियाँ एक दूसरे से टकराती है और दोनो की आह निकल जाती हैं फिर दोनो हस्ने लगती है… नेहा अभी खाना बनने में थोड़ा वक्त है क्यूँ ना दोनो बैठ कर बाते करें और वैसे भी मुझे तुमसे रात के बारे मे पूछना है.. हां ये ठीक रहेगा… और दोनो रसोई से निकल कर वाशु के रूम में जाने लगती है… उधर शमा किसी काम से फिर से नीचे आती है… सीढ़ियों से उतरते हुए वह वाशु और नेहा के खिलखिलाते हुए चेहरों को देखती है… दोनो वाशु के रूम में चली जाती है… शमा को रात की बात याद आ जाती है और वो उत्सुकतावास उनकी बातें सुनने के लिए उसी खिड़की के पास आ जाती है… और दोनो की बातें सुनने के लिए खिड़की से अपने कान लगा देती है…

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