परिवार हो तो ऐसा – Update 53 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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मोहन ने प्रीति को सहारा देकर सीधा किया और अपने उपर खींच लिया प्रीति ने भी अपने आप को सीधा किया और मोहन के लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट किया और बैठती चली गयी प्रीति की चूत की गर्मी अपने लंड पर महसूस कर मोहन ने भी एक आहह भरी और नीचे से अपने चूतदों को उचका कर एक धक्का दिया और अपना पूरा लंड एक ही वार में प्रीति की चूत मे घुसा दिया… ओह अंकल ढीईए रे ए ए ए ए… आअहह ओह प्रीति थोड़ा कसमासाई और लंड को अपनी छूट की गहराइयों मे लेने के बाद धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी… मोहन ने अपने हाथों को प्रीति के चुतदो पर रखा और प्रीति को धक्के लगाने में साथ देने लगा. प्रीति अब थोड़ा तेज़ी से धक्के लगा रही थी… प्रीति को ऐसे चोदना मोहन को बड़ा ही अच्छा लग रहा था मोहन को प्रीति दुनिया की सबदे हसीन लड़की दिखाई देती थी. प्रीति को चोदना मोहन को स्वीटी से भी ज़्यादा अच्छा लगता था.. हालाँकि मोहन के मंन में दोनो को एक साथ चोदने की इच्छा प्रबल हो रही थी कॉन जानता है वो पल कब आएगा… पर मोहन को लगता था के अगर वो प्रीति से ये बात करेगा तो प्रीति उसे ये मौका जल्दी ही दिलवा देगी पर मोहनने फिलहाल ये बात करना ठीक नही समझा और सब हालात पर छोड़ दिया… मोहन को चोद्ते चोद्ते प्रीति पूरी तरह थक चुकी थी… वह मोहन के उपर हट गयी और बेड पर लेट गयी और अपनी टाँगे चौड़ी कर ली.. मोहन भी झट से उठा और प्रीति की टाँगो के बीच आ कर अपने लंड के सूपदे को प्रीति की चूत पर सेट करते हुए बिना कोई पल गवायें एक ज़ोर दार शॉट के साथ पूरा लंड फिर से प्रीति की चूत में घुसा दिया… और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने सुरू कर दिए … प्रीति भी मोहन का पूरा साथ दे रही थी वह भी अपनी गांद को उचका उचका कर मोहन के हर धक्के का पूरा साथ दे रही थी..

पूरे रूम मे मानो एक तूफान सा आ गया हो…“ह्म्म्म्म म ऑश हाां ऑश ह्म्म्म्मरम ओह हां आशीए ही चोदो ओ हां और ज़ोर ज़ोर से ऑश ऑश हाँ अंकल अब चोदो मुझे अपने इस भारी लंड से… आज फाड़ दो मेरी चूत को और जम को चोदो इसे.. बहुत प्यासी है ये आपके लंड के लिए…हां हां ऐसे ही चोदते रहो” प्रीति सिसकने लगी. प्रीति की की उत्तेजना अपने चरम पर पहुच गयी और वह एक बार फिर से झर गयी… मोहन भी अब झड़ने के करीब था मोहन ने अपने धक्को की स्पीड और तेज कर दी “ओह प्रीति तुम कितनी अच्छी हो मेरे लंड का तुम कितना ख़याल करती हो ओह आइ लव यू प्रीति ओह मैं झड़ने वाला हूँ प्रीति ओह’’ मोहन ने प्रीति से कहा … अंदर ही डाल दो भर दो मेरी चूत अपने रस से ओह हां भर दो अंकल आइ लव यू टू.प्रीति ने ज़ोर से साँसे लेते हुए कहा. कुछ ही धक्को में मोहन ने अपना रस प्रीति की चूत में भर दिया.. और निढाल सा होकर प्रीति के उपर लेट गया… दोनो की साँसें किसी रेल के एंजिन की तरह चल रही थी दोनो अपनी साँसों को दुरुस्त करने लगे.. एक दूसरे की बाँहों मे लेते हुए.

लगभग एक घंटे बाद प्रीति की आँख खुलती है वह उठ जाती और बाथरूम में जकेर फ्रेश होती है फिर मोहन को भी उठा देती है और कहती है अंकल बहुत भूक लगी है कुछ नाश्ते का ऑर्डर करो ना… मुझे भी बहुत भूक लगी है मैं अभी ऑर्डर करता हूँ….. मोहन कहता है. ठीक है मैं जाकर राज और स्वीटी को उठाती हूँ आप तब तक फ्रेश हो लीजीएफिर सभी एक साथ नाश्ता करेंगे… प्रीति ने मोहन से कहा. ओके कहकर मोहन अपने रूम की और बढ़ जाता है और रूम में पहुँच कर नाश्ते का ऑर्डर देता है.. नाश्ता ऑर्डर करने के बाद मोहन फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस जाता है…

उधर प्रीति अपने रूम से निकल कर राज के रूम पर जाकर दस्तक देती है दो तीन बार दस्तक देनेके बाद राज की आँख खुल जाती है राज उठकर अपने शरीर पर एक टवल लपेटता है और फिर स्वीटी के उपर चादर डाल कर डोर ओपन करता है… प्रीति तेज़ी से अंदर आती है और स्वीटी को बेसूध सोया देखकर उसकी चादर खींच देती है स्वीटी नंगा शरीर प्रीति की आँखो के सामने आ जाता है वह आगे बढ़ कर स्वीटी के चूतदों पर एक चपत लगा देती… स्वीटी हड़बड़ा कर उठ जाती है जिसे देख कर प्रीति हस्ने लगती है दरवाजा बंद करके राज वापस आता है और स्वीटी की हालत देख कर वह भी हँसने लगता है…. राज को हस्ता हुआ देखकर प्रीति राज के पास जाती है और उसके होंठों पर अपने होंठ रख देती इससे पहले कि राज कुछ समझ पाता प्रीति राज के टवल को पकड़कर उसके शरीर से अलग कर देती है जिसे देखकर स्वीटी भी हँसने लगती है प्रीति और स्वीटी को हंसता हुआ देख कर राज भी मुस्कुराने लगता है…

तुम दोनो जल्दी से फ्रेश हो जाओ फिर हम सब एक साथ नाश्ता करेंगे… प्रीति ने राज और स्वीटी से कहा.. प्रीति पापा आ गये क्या… स्वीटी ने प्रीति से पूछा… हां आ गये और नाश्ते का ऑर्डर भी दे दिया अब जल्दी से रेडी हो जाओ जल्दी करो मुझे बहुत भूक लगी … प्रीति ने जवाब दिया.. राज तुम रेडी होकेर पपाजी के रूम में आ जाओ हम सभी वहीं पर नाश्ता करेंगे.. मैं अपने रूम में जाकर फ्रेश हो लेती हूँ… स्वीटी ने कहा.. हां राज स्वीटी सही कह रही है.. प्रीति ने कहा… और दोनो राज के रूम से निकल कर अपने रूम में आ गयी…
कुछ ही देर बाद चारो मोहन के रूम में बैठे हुए नाश्ता कर रहे थे… आज का क्या प्रोग्राम है अंकल —राज ने मोहन से पूछा . आज हम सब शॉपिंग करेंगे बाहर खाना खाएँगे और ढेर सारी मस्ती करेंगे मोहन ने जवाब दिया. ये तो बहुत ही बढ़िया है बहुत मज़ा आएगा ढेर सारी मस्ती मूवी म्यूजिक …… प्रीति और स्वीटी दोनो एक साथ बोल पड़ी और चहकने लगी. कब चलना है अंकल…. राज ने मोहन से पूछा. हम लगभग दो घंटे बाद चल्लेंगे तब तक मैं थोड़ा आराम करना चाहता हू…. मोहन ने कहा. तो ठीक है हम भी थोड़ा रेस्ट कर लेते हैं फिर ढेर सारी मस्ती होगी क्यूँ स्वीटी… प्रीति ने राज की ओर देखते हुए स्वीटी से कहा.. हाँ हाँ क्यू नही स्वीटी ने भी प्रीति के सुर मे सुर मिलाया… तब तक सभी नाश्ता भी कर चुके थे.. ओके तो मैं तो चलता हूँ कहकर राज उठकर अपने कमरे चला गया. हम चलते हैं स्वीटी प्रीति ने स्वीटी से कहा और वो दोनो भी अपने रूम में चली गयी.

दोस्तो अभी इस द्रस्य को यहीं छोड़ते हुए स्टोरी थोड़ा फ्लॅशबॅक में जा रही है राज, मोहन, स्वीटी और प्रीति के लंडन आने के बाद वहाँ क्या क्या हुआ ये समझने के लिए आइ होप आप को ये पसंद आएगा……..

राज, मोहन, स्वीटी और प्रीति के लंडन जाने के बाद राज के घर पर सिर्फ़ दो लोग बचे थे राज के पापा देव और राज मम्मी वाशु(वाशुँढरा) और राज के अंकल के घर भी सिर्फ़ दो राज की चाची नेहा और राज की कज़िन शमा. राज, मोहन, स्वीटी और प्रीति के लंडन जाने के बाद वाशु ने नेहा और शमा कोअपने घर पर ही बुला लिया था रहने के लिए जिससे उन्हे अकेलापन फील ना हो और उनको भी कंपनी मिल जाए. अब घर पर सिर्फ़ एक मर्द देव और तीन औरते वाशु, नेहा और शमा ही थे. उसी शाम नेहा और शमा अपना समान लेकेर कुछ दिनो के लिए वाशु के घर रहने के लिए आ गयी. वाशु ने नेहा को गेस्ट रूम दे दिया रहने के लिए और शमा प्रीति के रूम मे शिफ्ट हो गयी.

देव, वाशु, नेहा और शमा रात को एक साथ डिन्नर करते हुए बातें कर रहे थे आज कितने सालों बाद नेहा वाशु के साथ रहने आए थे. परिवार और बच्चों की देखभाल के कारण नेहा और वाशु को साथ में रहने और रात गुजारने का बहुत कम वक्त मिलता था. दोनो को एक दूसरे के साथ बहुत अच्छा लगता था अभी कुछ टाइम पहले ही दोनो ने एक दूसरे के साथ मस्ती की थी और अब तो दोनो को कई रात साथ में गुजरने का मौका मिला था… बच्चो के बिना घर कितना सूना सूना लग रहा है ना …. वाशु ने नेहा की ओर देखते हुए कहा. आप सही कह रहीं है आंटी… मेरा तो मंन ही नही लग रहा है स्वीटी के बिना मुझे अब लगता है कि मुझे भी उनके साथ चले जाना चाहिए था….. शमा ने वाशु से कहा. उदास क्यूँ होती हो शमा हम सब हैं ना तुम्हारे साथ और कुछ दिनो की ही तो बात है तुम फिर साथ में होंगी.. देव ने शमा को दिलाषा देते हुए कहा.

आप सही कह रहें है भाई जी वैसे भी शमा ने खुद ही मना किया था जाने से राज प्रीति और स्वीटी ने बहुत कोसिस की थी के शमा भी उनके साथ जाए पर अब हो भी क्या सकता है… नेहा ने थोड़ा उदास होते हुए कहा. खैर जो होना था वो हो गया इससे ये तो अच्छा ही हुआ के हमे साथ मे कुछ वक्त गुजारने का मौका तो मिला… देव ने नेहा को उदास देखते हुए कहा. ये आपने बिल्कुल सही कहा देव वैसे भी हमे साथ में रहने को मिलता ही कहाँ है. वाशु ने नेहा की ओर देखते हुए कहा. नेहा भी वाशु का इशारा समझ रही थी पर वह बोली कुछ नही और इसी तरह से सबने खाना फिनिश किया और देव और शमा उठकर अपने अपने रूम में चले गये. वाशु झूठे बर्तनों को उठा कर रसोई में रखने लगी जिसमे नेहा उसका पूरा साथ दे रही थी दोनो ने जल्दी किचन की सफाई की और अपने अपने रूम में जाने लगीं कि तभी नेहा ने वाशु से कहा वाशु क्यूँ न तुम आज मेरे साथ मे ही सो जाओ.. ठीक है तुम चलो मैं चेंज करके और देव को बोलकेर आती हूँ … वाशु ने नेहा से कहा और अपने रूम की ओर बढ़ गयी. नेहा भी अपने रूम में चली गयी. नेहा ने भी रूम में आकेर अपनी नाइट ड्रेस चेंज कर ली.

नेहा से बात करने के बाद वाशु अपने रूम में चली जाती है जहाँ देव पहले से ही मोजूद था जो पहले से ही अपने सारे कपड़े उतार कर अपने लंड को हाथ से सहला रहा था दरवाजे पर आहट सुनकर जल्दी से अपने उपर चादर ढक लेता है देव को लगा कहीं वाशु के साथ नेहा ना अंदर आ जाए उसको इस हालत में देख कर नेहा क्या सोचेगी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए था सबके सोने का और वाशु के अंदर आने का इंतज़ार करना चाहिए था. देव ये सोच ही रहा था वाशु रूम में एंटर हुई..

वाशु को अकेली देखकर देव ने राहत की साँस ली…. नेहा अपने रूम में चली गयी… वाशु के अंदर आते ही देव ने पूछा…. हां और आज मैं ही नेहा के साथ ही सोउंगी बहुत दिनो के बाद ऐसा मौका मिला है. हमे साथ में रात एक साथ बिताने का… वाशु ने देव से कहा… तो इसका मतलब मुझे आज अकेले ही सोना पड़ेगा तुम्हारे बिना मुझे नींद कैसे आएगी.. देव ने थोड़ा उदास होते हुए कहा…. फिकर क्यों करते हो जानू कुछ ही दिनो की तो बात है हम फिर से एक साथ होंगे… वाशु ने देव के उदासी भरे चेहरे को देखते हुए कहा… और अपनी नाइटी ढूँढने लगी… देव अपने उपर पड़ी चादर को हटा कर खड़ा हो जाता है और वाशु के पास आकेर उसके पीछे खड़े होकेर अपने हाथों को वाशु की चूचियों पर रख देता है जो कबाड़ के सामने खड़ी अपने लिए नाइटी खोज रही थी…

अपने शरीर पर देव का स्पर्श पाकेर वाशु के शरीर में एक शन्सनि सी फैल जाती है उसकी चूत में चींटियाँ सी रेंगने लगती है आज सुबह से ही उसे अपनी चूत के साथ खेलने का मौका नही मिला था…. आहह ओह्ह .. क्या करते हो देव मुझे जाना होगा नेहा मेरा वेट कर रही होगी… वाशु ने मस्ती भरे स्वर में देव को आगाह किया… तो मैने कब मना किया है जाने को थोड़ी सी मस्ती करने के बाद चली जाना वैसे भी उसे पता है एक पति पत्नी क्या रहे होंगे… देव ने वाशु की चूचियों को मसल्ते हुए कहा. पर मैं नेहा को बोल कर आई हूँ कि मैं अभी आती हूँ वो वेट कर रही होगिइिईई इससे आगे कि वाशु कुछ बोलती देव ने वाशु को पलट कर उसके लबों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा… वशु भी तब तक पूरी गरम हो चुकी थी सब कुछ भूल कर वो भी देव का साथ देने लगी…

कुछ देर दोनो एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.. देव वाशु को सहलाते हुए बेड तक ले आया और खुद बेड के किनारे बैठ गया और वाशु के चेहरे को पकड़ कर झुकते हुए अपने लंड की ओर लेजाने लगा वाशु देव का इशारा समझ कर अपने घुटनो के बल बैठ गयी और अपने पति के लंबे मोटे लंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी… देव का लंड अकड़कर अपनी फुल फॉर्म में आ गया जिसे वाशु को अपने मुँह में लेने के लिए बहुत मसक्कत करनी पड़ रही थी.. देव ने अपने हाथ बढ़ाकर वाशु की चूचियों पर रख दिया और उन्हे सहलाने मसल्ने लगा… वाशु के शरीर में भी करेंट दौड़ने लगा उसके शरीर की आग बढ़ती ही जा रही थी वह पूरे जोश में देव का लंड चूस रही थी देव को अपना लंड चूसवाने मे बड़ा मज़ा आता था..

थोड़ी देर बाद देव ने वाशु को उठने को कहा और उसके कपड़े उतारने लगा कुछ ही पलो में वाशु देव के सामने बिल्कुल नगी खड़ी थी उसका शरीर चमक रहा था जिसे देख कर देव का लंड झटके खाने लगा देव के लिए अब बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था… देव ने वाशु का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर लेटा दिया जो पहले से उत्तेजना में जल रही थी और उसकी चूत बुरी तरह रिस रही थी.. वाशु के बेड पर लेटते ही देव उसकी टाँगो के बीच आ गया और और अपने लंड के सुपरे को वाशु की चूत के दाने पर रखकर सहलाने लगा.. देव के लंड को अपनी रिस्ति चूत पर महसूस कर वाशु का शरीर अकड़ गया और उसकी चूत से ढेर सारा पानी बहने लगा… देव अपने लंड कोवाशु की चूत पर रगड़ता ही जा रहा था देव का लंड वाशु के चूत रस से पूरी तरह गीला हो गया और कब वाशु की चूत में घुस गया दोनो में से किसी को पता ही नही चला…

वाशु ने अपने चूतड़ उपर उठा कर देव के लंड को पूरा अपनी चूत में समा लिया… देव ने अब धक्के लगाने सुरू कर दिए नीचे से वाशु भी देव का पूरा साथ दे रही थी… धक्के लगाते हुए देव ने अपने होंठों को वाशु के होठों पर रख कर चूसना सुरू किया जिसने वाशु भी अपना साथ दे रही.. दोनो चुदाई और चूसाई का पूरा मज़ा ले रहे थे… और उनकी ये चुदाई बाहर नेहा भी देख रही थी जब काफ़ी देर तक वाशु कमरे में नही आई तो वह वाशु को बुलाने के लिए उसके कमरे में जाने की सोची पर रूम के अंदर आती हुई आवाज़ को सुनकेर वह बाहर ही रुक गयी और साइड से देखने लगी कि अंदर हो क्या रहा है हालाँकि अंदर से आती हुई सिसकारियों और आन्हो को सुनकर वह जान गयी थी कि अंदर क्या चल रहा है..

नेहा उत्सुकतावास अंदर देख रही थी कि उसके जेठ जेठानी कैसे चुदाई करते हैं और जेठ का लंड कितना लंबा है. नेहा के दिल की धड़कने बढ़ गयी थी वह ये सोच सोच कर उत्तेजित हो रही थी कि उसे आज एक लाइव शो देखने को मिलेगा हालाँकि वह अपनी जेठानी वाशु को कई बार नंगी देख चुकी थी और उसके साथ कई बार लेसबो सेक्स कर चुकी शादी के बाद और शादी के पहले भी पर अपने जेठ यानी देव को नंगा देखने का उसका ये पहला अवसर था. अंदर का नज़ारा देख देख कर नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया उसने देखा वाशु बेड पर सीधी लेटी है और देव उसके उपर चढ़ा हुआ उसे चोद रहा है देव का लंड किसी पिस्टन की तरह वाशु की चूत में अंदर बाहर हो रहा है. देव के लंड की मोटाई को देख कर उसे ये अंदाज़ा हो गया था कि देव का लंड मोहन और राज से भी मोटा और लंबा है.

ये देखकर ही नेहा की चूत पानी छोड़ने लगी उसका हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर चला गया और कपड़ों के उपर से ही वह अपनी चूत को मसल्ने लगी. देव काफ़ी देर से वाशु को इस पोज़िशन में चोद रहा था और इस दोरान वाशु की चूत कई बार पानी छोड़ चुकी थी एकाएक देव रुक जाता है और वाशु को उठा कर उल्टा घुटनो के बल डॉगी स्टाइल में कर देता है और बिना कोई टाइम गवाए अपनी पोज़िशन ले वाशु की छूत में अपना पूरा लंड एक ही बार में उतार देता है… ओह डार्लिंग धीरी से अया ऑश वाशु कसमाशा जाती है.. देव फिर से अपनी फुल स्पीड में वाशु को चोदने लगता है….

उधर विंडो से अंदर झान्कति नेहा का बुरा हाल हो चुक्का था उसका एक हाथ उसकी चूत को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी चूचियों को मसल रहा था उसकी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी… साथ ही नेहा सोच रही थी के देव का लंड वाशु को कितना सुखद अहसास करा रहा होगा… कैसा लगता है जब इतना मोटा लंड चूत की दीवारो को चीरता हुआ अंदर घुसता है… और वह अपनी और राज की चुदाई के बारे में सोचने लगती है राज का लंड भी तो लंबा और मोटा है उसे कितना मज़ा आया था राज से चुदवाने में वो पल वो अब तक नही भूली है…. ये सोचते सोचते वो अपने आप को वाशु की जगह इमगीन करने लगी जसीए देव वाशु को नही बल्कि उसे ही चोद रहा है.. और देव का लंड उसे अपनी छूट में महसूस हो रहा था …. और इसी सोच में वा बहुत उत्तेजित हो गयी थी… और अपनी उंगली छूट में दल कर उसे अंदर बाहर करने लगी ….

उधर देव भी ये सोचकर की दूसरे रूम में उसके छोटे भाई की बीवी नेहा वाशु का इंतजार कर रही होगी और वाशु की जाने मे इतनी देर हो जाने पर वा क्या सोच रही होगी वाशु चुदाई के डॉरॅन इतनी तेज तेज आवाज़ें कर रही है कन्हि ये सब नेहा ने सुन तो नही ली यही सोच सोच कर वा और उत्तेजित हो रहा था देव अब पूरी ताक़त के साथ वाशु को छोड़ रहा था वाशु की छूट ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया देव भी अब झड़ने के करीब था और तेज तेज धक्को के साथ वाशु के चूतदों को अपने हाथों से मसल भी रहा था.. नेहा ने अब अपनी दो उंगली अपनी चूत में डाल कर आगे पीछे करना सुरू कर दिया था नेहा को अपनी उत्तेजना अब बर्दास्त नही हो रही थी वह जल्दी से जल्दी अपना पानी छुड़ा देना चाहती थी…

“ऊवू देव और ज़ोर से हाआँ ऐसे ही अया ऑश फाड़ दो आज में चूत को ओ ओ ओ ऐसी ही ईईईईईईईईई ऑश हाां ऊऊर ज़ोर से ए ई आआहह ऊओह मैं गयी आहह हह“ वाशु ने ज़ोर से चिल्लाते हुए अपना पानी एक बार फिर से छोड़ दिया… मैं भी झड़ने वाला हूँ आअहह ऊऊओ ययययययाआअ ये लो आआहह ऑश मैं भी आआया … ओर ये कहते हुए देव ने भी अपने रस से वाशु की चूत को भर दिया और दोनो निढाल होकेर बेड पर लेट गये और अपनी साँसों को दुरुस्त करने लगे…

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