नेहा ने एक गहरी सांस ली और अपनी बेटी स्वीटी को शुरू से लेकर
आख़िर तक सब बताने लगी कि किस तरह उसने उसे शमा के कमरे से
निकलते देखा और फिर कैसे उसके ख़यालों मे सब बातों आती चली
गयी… बस उसने उसे ये नही बताया कि वो उसकी ताई यानी की
वसुंधरा के साथ सेक्स का खेल कई सालों से खेलती आ रही है..
“और आप ये कहना चाहती है कि इस ख़याल ने की आपकी दोनो बेटियाँ
आपस मे सेक्स करती है आपको गुस्सा नही आया” स्वीटी ने अपनी मा की
बातों को सुन चौंकते हुए कहा.
“शायद नही आया” नेहा ने स्वीकार किया….
स्वीटी की आँखे अब अपनी मम्मी की नंगी चूत पर टीकी हुई थी.. जो
की उसी की चूत की तरह एक दम साफा चट यानी की बिना बालों की थी.
“मम्मी क्या तुमने कभी किसी दूसरी लड़की या औरत के साथ सेक्स किया
है?” स्वीटी ने पूछा.
“अब तुमसे झूठ नही बोलूँगी…. हां किया है” शायद सच कहना
ही उसे ज़्यादा मुनासिब लगा.
“स्वीटी ने देखा कि उसकी मा की साँसे गहरा गयी थी और उसकी भारी
चुचियाँ उपर नीचे हो रही थी… उसने देख की उसकी मा अपनी
होठों पर अपनी ज़ुबान फिरा रही थी.. तभी उसकी इच्छा जागी कि क्यों
ना मम्मी की इस प्यारी गुलाबी जीब को अपनी चूत मे महसूस किया
जाए… इस ख़याल ने ही उसकी चूत को गीला कर दिया.. एक उत्तेजना की
लहर बदन मे दौड़ गयी… तभी एक अंजाना शक़ उसके दिमाग़ मे
आया….
वो अपनी मा के नज़दीक आकर उसके पास पलंग पर बैठ गयी और
ज़मीन पर पड़े खिलोने को उसने अपने हाथों मे ले लिया और फिर नेहा
की जाँघ पर अपना हाथ रख पूछा… “मम्मी सच सच बताना क्या
आपने ताइजी के साथ सेक्स किया है?”
नेहा के तो जैसे होश उड़ गये.. उसे उम्मीद नही थी कि उसकी बेटी उससे
ये सवाल कर बैठेगी… उसकी समझ मे नही आ रहा था कि क्या
जवाब दे…
“हां बेटी” नेहा ने बहुत धीरे से कहा…
स्वीटी को अपने लिए अब रास्ता सॉफ होता नज़र आया…. और उसने
भी धीरे से कहा, “मम्मी मैने भी किया है”
उसने देखा कि उसकी मम्मी उसकी बात सुन ख़यालों मे खो गयी थी..
उसने उस नकली लंड याने की डिल्डो को अपनी चूत पर घिसते हुए सब
बात शुरू से बताने लगी….
नेहा ने महसूस किया कि स्वीटी की बातें सुन उसकी चूत और गीली
होने लगी थी.. और उसका पूरा बदन काम उत्तेजना मे काँपने लगा
था… जब स्वीटी सभी बातें बारीकी से बताने लगी तो उसकी चूत मे
अंगार लग गयी.. हज़ारों चींतियाँ दौड़ने लगी… प्रीति के साथ हुए
हादसे को सुन तो उससे सहन नही हो रहा था…
“मैं भी तुम्हारे साथ मज़ा लेना चाहती हूँ मम्मी…. ” स्वीटी ने
उस दो मुँहे डिल्डो को दीखा कहा.. “मैं इसे तुम्हारी चूत मे घुसा
चोदना चाहती हूँ”
नेहा को विश्वास नही हो रहा था कि उसकी सग़ी बेटी उससे ये बात कह
रही थी.. लेकिन अब बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी और वो कुछ कर
भी नही सकती थी.इसलिए उसने अपने आप को हालत पर छोड़ सिर्फ़ अपनी
गर्दन हिला दी…
स्वीटी ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ को उपर की ओर बढ़ाया और अपनी
मा की बिना बालों की चूत को हल्के सहलाया… फिर उसने अपने होठों
को मा के होठों पर रख दिया… नेहा ने हक़ीकत को स्वीकारते हुए
अपने होंठो को उसके होठों से मिलाया और तभी स्वीटी ने अपनी जीब
को अपनी मा के मुँह मे डाल दी..जिसे नेहा अपनी जीब से मिला चूसने
लगी…. दोनो एक दूसरे के कपड़ों खोल अलग करने लगी…
थोड़ी ही देर मे दोनो नंगी हो गयी और एक दूसरे की चूत से खेलने
लगी.. कि तभी स्वीटी ने अपनी मा को पलंग पर थोडा उपर बिठा
दिया.. उसकी टाँगो को फैला दिया और खुद उसके सामने अपने टाँगो को
फैला बैठ गयी…
फिर स्वीटी ने उस डिल्डो के एक सिरे को अपनी मा की चूत मे घुसा दिया
और अपनी चूत को आगे कर दूसरे सिर को अपनी चूत से लगा दिया…
“मम्मी अब धक्का लगाऊ और इसे मेरी चूत मे घुसा दो..”
नेहा ने अपनी कमर को आगे खिसकाया तो स्वीटी की चूत मे डिल्डो
घुसता चला गया और साथ ही उसकी चूत मे भी घुस गया दोनो अपनी
तरफ से धक्का लगाने लगे और आख़िर पूरा लंड दोनो सिरों से दोनो
की चूत मे घुस गया.. दोनो की चूत आपस मे मिल गयी.. दोनो अपनी
चूत को एक दूसरे की चूत पर रगड़ने लगे.. और धक्का लगा उस
डिल्डो से मज़ा लेने लगे…
नेहा ने अपनी बेटी के निपल को पकड़ अपनी तरफ खींचा और स्वीटी
अपने हाथों से अपनी मा की चूत को मसल्ने लगी..
दोनो एक दूसरे को मज़ा दे रही थी और आख़िर नेहा की चूत ने उबाल
खाया और लावा फुट पड़ा…
“मम्मी अब मेरी चूत को चूस मेरा भी पानी छुड़ा दो.. ओह बहुत
तडपा रही है ये” स्वीटी ने अपनी चूत मे से उस डिल्डो को निकालते हुए कहा..
नेहा ने भी अपनी चूत से डिल्डो को निकाला और बेटी की टाँगो के बीच
आ गयी फिर झुक कर पहले तो उसने उसे चूमा फिर उसकी फांको को
फैला अपनी जीब अंदर घुसा दी.. कुछ देर तो वो उसकी चूत को चाटती
रही फिर अपने मुँह मे भर उसे चूसने लगी…
“ऑश मुंम्मी हाां चूवसो ऐसे ही चूवसो ऑश हाआँ बहुत अच्छा
लग रहा है.. हाां अपनी जीब को अंदर घुस्स्सा के चूवसूओ”
स्वीटी सिसक पड़ी.
नेहा और तेज़ी से अपनी जीब को अंदर बाहर कर अपनी बेटी की चूत को
चूसने लगी. और थोड़ी ही देर मे स्वीटी की चूत ने भी पानी छोड़
दिया…
वसुंधरा के घर सभी एक बैठे डिन्नर का आनंद ले रहे थे तभी और आपस में बातें भी कर रहे थे……
“लंडन में बिज़्नेस एग्ज़िक्युटिव का एक बहुत बड़ा सम्मेलन होने वाला है जिसमे अनेक देशो के हाइ प्रोफाइल बिज़्नेस एग्ज़िक्युटिव इकट्ठा हो रहे है”.. देव ने कहा.
राज मैं चाहता हूँ के तुम इसमे भाग लो और बिज़्नेस की बारीक़ियाँ सीखो आख़िर ये तुम्हारे फ्यूचर का स्वाल है…देव ने आगे कहा.
ये तो बहुत ही बढ़िया है.. प्रीति ने चहकते हुए कहा….
मॉम मैं भी भाय्या के साथ लंडन जाना चाहती हूँ. काफ़ी दिनो से कहीं घूमने भी नही गये….प्रीति ने अपनी मोम की देखते हुए कहा.
राज तुम क्या कहते हो वाशु ने राज से पूछा.
आइ थिंक पापा सही कह रहे हैं और इसी बहाने हमारा घूमना भी हो जाएगा…. राज ने जवाब दिया.
तुम दोनो के बिना ये घर सुना सुना हो जाएगा वाशु ने राज की नज़रो में देखते हुए कहा….
राज समझ गया कि मों क्या कहना चाहती है.
तो ठीक है मैं मोहन से बात करके तुम्हे शेड्यूल के बारे में बताता हूँ क्योंकि मोहन भी ये प्रोग्राम अटेंड करने को लेकेर बहुत उत्सुक है…….देव ने कहा.
ये तो और भी अच्छी बात है चाच्चा जी के रहने से हमे कंपनी मिल जाएगी क्यों राज तुम क्या कहते हो..प्रीति ने राज की ओर देखते हुए कहा.
बहुत ही अच्छा है ओर मैं तो कहता हूँ क्यों ना हम स्वीटी को भी साथ लेले आख़िर घूमने फिरने में और शॉपिंग करने में तुम्हारी मदद भी हो जाएगी…..राज ने प्रीति की ओर देखते हू कहा.
राज की ये बात सुनकर प्रीति बहुत खुस हुई और बोली ये बहुत ही अच्छा आइडिया है. हम दोनो मिलकर बहुत एंजाय कर सकती हैं प्रीति ने राज की ओर आँख मारते हुए कहा.
देव आप मोहन से स्वीटी के बारे में भी बात कर लेना वाशु ने अपने पति से कहा.
खाना कहने के बात देव अपने कमरे में जाके मोहन से बात करते हैं.
तुम दोनो चले जाओगे मेरा तो मन ही नही लगेगा यहाँ पर. वाशु ने राज और प्रीति से कहा.
इस बात पर प्रीति उठते हुए अपनी मम्मी के पास आई और पास पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए मम्मी आप भी हमारे साथ क्यो नही चलती बड़ा मज़ा आएगा.
वाशु ने जवाब दिया …. मैं आ तो सकती थी पर तुम्हारे पापा को अकेला भी तो नही छोड़ सकती उनकी देखभाल और उन्हे कंपनी देने के लिए भी तो कोई चाहिए कि नही.
ये तो आप बिल्कुल सही कह रही हो….राज ने अपनी मम्मी से कहा.
पर हम आपको बहुत मिस करेंगे क्यों प्रीति…..राज ने प्रीति की ओर आँख मारते हुए कहा.
प्रीति ये देख कर मुस्कुरा उठी और अपनी मम्मी की एक चुचि को साडी से दबा दिया.
वाशु इस अचानक हरकत से एक दम चोंक गयी और सिर्फ़ मुस्कुरा कर रह गई क्योंकि अब तीनो के बीच कुछ छिपा नही था.
तभी राज अपनी जगह से उठा ओर वाशु और प्रीति की ओर आते हुए उनके बिल्कुल पास खड़ा हो गया ओर वाशु को उठा कर खड़ा किया ओर अपनी बाहों मे भर लिया.
ये देख कर वाशु भी ज़ोर से राज से लिपट गयी तभी राज ने अपना सर पीछे करते हुए अपने होंठ वाशु के होंठो पर रखते हुए बहुत जोरो की किस करने लगा.
वाशु भी अपने बेटे का पूरा साथ दे रही थी .
ये देख कर प्रीति से भी रहा नही गया वो भी उन दोनो का साथ देने के लिए अपनी जगह से खड़ी हो गयी ओर दोनो को पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया.
राज ने किस को ब्रेक करते हुए थोड़ी जगह बनाई ओर प्रीति को अपने साथ शामिल कर लिया तीनो एक साथ एकदुसरे को किस करने लगे.
थोड़ी देर बाद वाशु पीछे हटते हुए दोनो से बोली तुम्हारे पापा अंदर हैं मेरी राह देख रहे होंगे ओर दोनो को एक एक किस देकर गुड नाइट कह कर अपने कमरे में चली गयी.
राज ओर प्रीति भी अपने अपने कमरे में चले गये.
देव से बात करने के बाद मोहन ने स्वीटी, शमा और अपनी पत्नी नेहा से बिज़्नेस टूर की बात की और राज ओर प्रीति के बारे में बताया.
ये तो बहुत अच्छी बात है स्वीटी ने चहकते हुए कहा टूर का टूर ओर एंजाय का एंजाय मस्ती ही मस्ती बड़ा मज़ा आएगा.
तुम्हे भी शॉपिंग मे प्रीति की कंपनी मिल जाएगी…नेहा ने कहा.
शमा तुम भी हमारे साथ क्यूँ नही चलती…स्वीटी ने शमा की ओर देखते हुए कहा.
नही मैं नही आ सकती तुम तो जानती हो कि मैं सब प्लान के हिसाब से चलती हूँ ओर मुझे यूँ अचानक कहीं जाना अच्छा नही लगता मैं इतनी जल्दी कोई फ़ैसला नही करती तुम सब जाओ मेरी गुड विशस तुम्हारे साथ है… शमा ने कहा.
वैसे दी अगर तुम साथ मे चलती तो और भी मज़ा आता स्वीटी ने शमा की आँखो मे देखते हुए कुछ इशारे से कहा.
शमा समझ रही थी कि स्वीटी क्या कहना चाहती है. वो तो है स्वीटी पर मैं नही आ पाउन्गि शमा ने कहा.
इसी बीच मोहन ने स्वीटी से कहा दो दिन बाद की फ्लाइट है तुम जल्दी से अपनी पॅकिंग सुरू कर दो.

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