“अब मेरी बारी है इसे चोदने की” प्रीति ने अपनी कमर मे उस डिल्डो की
बेल्ट को लगाकर कहा..
स्वीटी ने घूम कर देखा तो चौंक पड़ी.. उसने इतना मोटा और लंबा
डिल्डो पहले कभी नही देखा था… “अरे कहाँ से ले आई तुम इसे?”
उसने पूछा.
“मम्मी की अलमारी से” प्रीति ने जवाब दिया, “और अब मैं इससे तुम्हे
ठीक वैसे ही चोदुन्गि जैसे की राज तुम्हे चोद्ता है” कहकर वो
स्वीटी के पीछे आ गयी और एक ज़ोर के धक्का मार उस डिल्डो को अपनी
चचेरी बेहन की चूत मे घुसा दिया.. फिर ठीक मर्दों की तरह
उसके फूले हुए चूतदो को पकड़ वो उस डिल्डो को उसकी चूत के अंदर
बाहर करने लगी.
“ऑश प्रीति सही मे क्या धक्के मार रही हो ऑश हाआँ ऐसे लगाओ”
स्वीटी सिसक पड़ी…
“हां स्वीटी बहुत मज़ा आ रहा है इस तरह तुम्हारी चूत मारने मे
काश मेरे पास भी अगर असली लंड होता तो आज में तेरी चूत को
फाड़ कर रख देती” प्रीति उछल उछल कर धक्के लगाती बोली.
राज पास ही खड़ा दोनो लड़कियों की चुचि को मसल रहा था और
भींच रहा था और फिर वो प्रीति के पीछे आ गया और अपने हाथ
को नीचे से उसकी चूत पर रख मसल्ने लगा…. फिर अपनी दो
उंगलियों को उसने अंदर घुसा अंदर बाहर करने लगा…
प्रीति को भी दोहरा मज़ा मिल रहा था.. एक तो स्वीटी की चूत चोद्ने
का और दूसरा उसकी खुद की चूत मे अपने भाई की उंगलियों का… वो
भी सिसक रही थी… काम उत्तेजना मे जल रही थी.. कि तभी राज ने
अपनी दोसरे हाथ की उंगली को स्वीटी की गंद मे घुसा अंदर बाहर
करने लगा… और थोड़ी ही देर मे दोनो लड़कियों की चूत ने पानी
छोड़ दिया…
तभी राज ने प्रीति को वहाँ से हटाया और अपने लंड को उसकी गंद के
छेद पर रख थोड़ा दबाया.. उसका लंड स्वीटी की गंद की दीवारों को
चीरता हुआ अंदर घुस गया. राज पहले तो धीरे धीरे अंदर बाहर
करता रहा फिर उसके धक्कों ने तेज़ी पकड़ ली…
जब राज का विशाल लंड तीन चौथाई हिस्सा अंदर घुस गया तो स्वीटी
ने उसे रुक जाने को कहा.. और फिर थोड़ा झुक कर उसकी लंबाई को और
मोटाई को अपनी गंद मे अड्जस्ट करने लगी…
“हां राज अब धक्के मार सकते हो..पर ज़ोर ज़ोर से नही थोड़ा धीरे
धीरे मारना”
राज ने फिर अपने लंड को उसकी गंद के अंदर बाहर करना शुरू किया..
और तभी प्रीति राज के पीछे आ गयी और उसकी टाँगो के बीच से
उसने वो लंबी गाजर स्वीटी की चूत मे घुसा दी. और अंदर बाहर
करने लगी… एक अनोखा मज़ा स्वीटी को आने लगा… राज भी उछल
उछल कर धक्के लगा रहा था.. स्वीटी की गंद के छोटे छेद मे जब
उसका लंड चीरता हुआ अंदर घुसता तो उसे बहुत मज़ा आता..
“वाह स्वीटी क्या गंद है तुम्हारी मज़ा आ गया बहुत कसी कसी
है…. ”
तभी राज ने महसूस किया किया कि प्रीति ने उसकी गोलैईयों को पकड़
लिया है और उनसे खेल रही है मसल रही है… और तभी प्रीति
ने अपनी एक उंगली उसके गंद के छेद मे घुसा दी…
राज को इतना मज़ा आया कि वो और ज़ोर ज़ोर से स्वीटी की गंद मे धक्के
मारने लगा… और तभी उसका लंड आकड़ा और उसने लंड को अंदर तक
थेल्ते हुए अपने वीर्य की धार स्वीटी की गंद मे छोड़ दी… और तभी
स्वीटी की चूत एक बार फिर से झाड़ गयी…
“हे भगवान तुम दोनो पक्के हरामी हो… मेरी गंद और चूत को
मसल कर रख दिया.. अब और नही किया जाता” स्वीटी ने अपने आपको
पलंग पर लेटाते हुए कहा…
“अभी कहाँ मेरी जान अभी तो तुम्हे एक काम और करना है” प्रीति ने
उसके बंधानो को खोलते हुए कहा..
“और वो क्या है?” स्वीटी ने पूछा…
“अब तुम इस डिल्डो से मेरी चूत का पानी छुड़ा दो” प्रीति ने जवाब
दिया..
“वो तो में खुशी खुशी कर सकती हूँ” स्वीटी ने कहा तभी राज
बाथरूम मे चला गया.
प्रीति ने अपने हाथों से उस नकली लंड को स्वीटी की कमर पर बाँध
दिया और खुद घोड़ी बन गयी… स्वीटी उसके पीछे आ गयी और उस
नकली लंड को उसकी चूत मे तेल धक्के मार उसे चोद्ने लगी….तभी
राज कमरे मे वापस आया.
“राज यहाँ मेरे पास आओ ना में तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ”
प्रीति ने राज से कहा..
राज फिर से दोनो लड़कियों के पास आ गया.. प्रीति उसके लंड को मुँह
मे ले चूसने लगी. और स्वीटी पीछे से उसकी चूत मे धक्के मारने
लगी.. और आख़िर प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया…
“क्या तुम दोनो मे से कोई मुझे घर छोड़ देगा.. मेरी हिम्मत नही है
अकेले घर जाने की” स्वीटी ने पलंग से उठ अपने कपड़े पहनते हुए
कहा…
राज और प्रीति के साथ बीताए पल अब भी स्वीटी के ख़यालों मे बसे
हुए थे… एक हफ़्ता गुज़र चुका था लेकिन उसे लगता था जैसे की कल
की ही बात हो.. और उस ख़याल से ही उसकी चूत गीली हो गयी थी..
आज भी उसकी कुछ ऐसी ही हालत थी.. चूत मे खुजली जोरों से मच
रही थी.. दिल कर रहा था कि कोई उसकी चूत को जी भर के चूसे
और यही सोच उसने अपनी बेहन शमा के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया
जब अंदर से कोई जवाब नही आया तो उसने धीमे से दरवाज़े को खोला
और अंदर आकर शमा के बिस्तर मे घुस गयी.. अपने हाथों से उसके
बदन को सहलाते हुए उसने उसकी टी-शर्ट के उपर से उसकी चुचियों को
पकड़ लिया और धीरे धीरे मसल्ने लगी.
एक सनसनी सी मच उठी शमा के बदन मे, उसने करवट बदल अपनी
बेहन को देखा.. “क्या बात है?”
“बस नींद नही आ रही है… चूत मे अंगार लग रही है.. आज
मेरी चूत को चूस उसकी गर्मी शांत कर दो प्लीज़” स्वीटी ने अपनी
बेहन के निपल को भींचते हुए कहा.
“सही मे स्वीटी तुम बड़ी छीनाल हो.. तुम्हारी हालत तो एक रंडी जैसी
है” शमा ने कहा तो स्वीटी हँसने लगी और शमा के कपड़े खींच
कर उतारने लगी… फिर उसने अपने होठों को अपनी बेहन के होठों पर
रखा और शमा भी उसका साथ देते हुए उसके होठों को चूसने
लगी… फिर स्वीटी ने अपनी बड़ी बेहन को अपने उप्पर खींच लिया और
और उसे भींचते हुए अपनी चुचियों को उसकी चुचियों से रगड़ने
लगी…
शमा भी उसका साथ देने लगी और वो भी स्वीटी के बदन को सहलाने
लगी.. फिर वो नीचे खिषकते हुए उसके बदन को चूम रही थी अपनी
ज़ुबान को उसके नंगे बदन पर फिरा रही थी..
नीचे खिसकते हुए जब वो स्वीटी की चूत तक पहुँची तो उसने पाया
कि उत्तेजना मे उसकी चूत गीली हो गयी थी और उसकी चूत से हल्के
हल्के रस बह रहा था.. उसने अपने हाथों से उसकी टाँगो को फैलाया
और अपनी ज़ुबान उसकी चूत पर फिराने लगी.. स्वीटी उन्माद मे सिसक
पड़ी और शमा ने उसकी चूत को फैलाते हुए अपनी जीब अंदर घुसा दी.
और जीब को गोल गोल घुमाने लगी फिर अपनी जीब को उसकी चूत के
अंदर बाहर करने लगी..
“ऑश हाां शमा ऑश हाआँ चूवसो मेरी चूत को श आअहह
बहुत अच्छा लग रहा है हाआनन्न”
शमा और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूसने लगी और चाटने लगी..
और थोड़ी ही देर मे स्वीटी का बदन आकड़ा और उसकी चूत से धारा
बहने लगी…..
“ओह शमा थॅंक योउ.. तुम कितनी अची हो” स्वीटी ने उसे चूमते हुए
कहा.
“थॅंक यू की कोई बात नही है.. बस अब तुम मेरी भी गर्मी शांत
कर दो” शमा ने कहा.
स्वीटी खिसक अपनी बड़ी बेहन की टाँगो के बीच आ गयी और अपनी
उंगलियो को उसकी चूत पर फिराने लगी.. फिर झुकते हुए उसने उसकी
चूत को चूम लिया…. फिर उसकी चूत की पंखुड़ियों को अलग कर
उसने अपनी जीब को त्रिकोण का आकर दे अंदर घुसा दी और साथ ही
अपनी दो उंगलियाँ भी अंदर घुसा दी…. अब वो अपनी जीब के साथ अपनी
उंगली भी अंदर बाहर करने लगी…. और शमा भी झाड़ कर शांत हो
गयी….
रात को देर से घर लौटने पर नेहा ने सोचा कि क्यों ना स्वीटी को
कल के कार्यक्रम के बारे मे बता दिया जाए… वो स्वीटी के कमरे मे
पहुचि तो उसे वहाँ नही पाया.. बिस्तर से लग रहा था कि वो वहीं
सोई थी लेकिन उसे वहाँ ना पाकर वो उसके घर के बाकी के कमरे मे
खोजने लगी.
वो शमा के कमरे की तरफ बढ़ने ही वाली थी कि उसने स्वीटी को दबे
पाँव उसके कमरे से बाहर निकलते देखा..उसे लगा कि शायद स्वीटी
अपनी बेहन से कुछ बात करने गयी होगी.
लेकिन दूसरी सुबह कॉफी पीते वक्त उसके जेहन मे ये ख़याल आया कि
क्या उसकी बेटियों मे भी अपनी मा की तरह सेक्स कामना ज़्यादा भरी हुई
है.. क्या उसकी बेटियों भी उसी की तरह आपस मे सेक्स का खेल खेलती
है…
अपनी बेटियों के विषय मे सोचते सोचते उसका ख्यालअपनी जेठानी की
तरह गया कि किस तरह इतने सालों से दोनो एक दूसरे की चूत का
मज़ा लेते आ रहे थे.. क्या उसकी बेटियों को भी आपस मे सेक्स करने
मे उतना ही मज़ा आता है जितना कि उसे वासू की चूत चूसने मे और
अपनी चूत चूसवाने मे आता है.. जितना वो सोचती उतनी ही खुजली
उसकी चूत मे बढ़ती जा रही थी…
दोपहर के खाने के बाद तो उससे रहा नही गया और वो सोफे पर आध
लेट कर अपनी उंगली को अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी.. चूत
मे उंगली करते हुए उसकी आँखो के आगे बार बार अपनी दोनो बेटियों
का आपस मे सेक्स का द्रिस्य आ रहा था…
अपनी चूत की गर्मी को वक्ती तौर पर शांत करने के बाद उसने स्वीटी
के कमरे की तलाशी लेने सोची.. जवान बेटी के कमरे की तलाशी लेना
उचित तो नही था लेकिन वो अपने आप को रोक नही पाई और स्वीटी के
कमरे मे आ गयी. वहाँ उसकी कपबोर्ड मे वो नकली लंड यानी कि डिल्डो
मिला जिसे स्वीटी अपनी ताइजी और प्रीति के साथ खरीद कर लाई थी.
अपनी ही बेटी के कमरे मे खड़ी वो अपनी ही बेटी के उस दो मुँही डिल्डो
को देख रही थी जिसके दोनो सिरे लंड के आकार के थे… एक सरसरी
सी उसकी चूत मे उठ गयी… वो सोचने लगी कि क्या उसकी बेटी अपनी
बेहन के साथ इसे इस्तेमाल करती है या फिर और किसी लड़की या औरत
से उसके संबंध है उसने उस डिल्डो के एक सिरे को मुँह मे लिया और
चूसने लगी जैसे की सही मे किसी लंड को चूस रही हो..
और फिर वो अपने आप को रोक नही पाई. अपनी बेटी के पलंग पर लेट
उसने अपनी पॅंटी उतार दी और उस डिल्डो के एक सिरे को अपनी चूत मे
घुसा अंदर बाहर करने लगी.. उसके जहाँ मे कभी वसुंधरा चूत
आती तो कभी राज का लंड आख़िर उसकी सोच राज के लंड पर आकर
ठहर जाती… वो जोरों से डिल्डो को अपनी चूत के अंदर बाहर करने
लगी और उसकी चूत पानी छोड़ने ही वाली थी कि कमरे का दरवाज़ा
खुला और वो उछल पड़ी….
“मम्मी” चौंकते हुए स्वीटी के मुँह से निकाला.. उसकी निगाहें अपनी
मम्मी की फैली हुई चूत पर टिकी थी जहाँ उसका ही डिल्डो अंदर तक
घुसा हुआ था.
“ओह्ह स्वीटी बेटा….” नेहा ने कुछ कहना चाहा लेकिन उसके मुँह से
कोई बोल ना फूटा और उसने जल्दी से वो खिलोना अपनी चूत से निकाल
नीचे ज़मीन पर फैंक दिया जैसे उसने उसे कभी छुआ ही ना हो.
“हे भगवान… मम्मी आप यहाँ क्या कर रही है और आप मेरे खिलोने
से क्यों खेल रही हही” स्वीटी ने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा.
“ऑश स्वीटी बेटा मुझे माफ़ कर देना… बस वो क्या है कि मैं
तुम्हारे और शमा के बारे मे सोच रही थी और सुबह से ही मैं
इतनी उत्तेजित थी की अपने आप को रोक ना पाई… और…..”
“एक मिनिट रुकिये मम्मी आपका कहने का क्या मतलब है कि आप मेरे
और शमा दीदी के बारे मे सोच रही थी” स्वीटी ने बीच मे अपनी
मम्मी को टोकते हुए कहा.

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