परिवार हो तो ऐसा – Update 43 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
Reading Mode

रवि अपनी बेहन के उछलते बदन के पास आया और झुक कर उसने उसकी

एक चुचि को अपने हाथों मे पकड़ उसके निपल को मुँह मे ले चूसने

लगा… वहीं दूसरी चुचि को प्रीति कस कस के मसल रही थी

जैसे की कोई आम को निचोड़ता है…

“ह्म्‍म्म्म ऑश हाआअँ ऑश ऑश आआआहह ऑश ” सोनिया और जोरों से

उछलने लगी… और तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया… प्रीति ने

अपना मुँह उसकी चुचि से हटाया और उसकी चूत को देखने लगी जहाँ

से रस बह कर टपक रहा था….

सोनिया राज के लंड को अपनी चूत से बाहर निकाल वहीं सोफे पर लुढ़क

गयी… राज का लंड अभी सिर उठाए खड़ा था.. सोनिया के रस से

भीगा लंड कमरे की रोशनी मे चमक रहा था…

चिकने तने लंड को देख प्रीति के मुँह मे पानी आ गया और वो झुक

कर अपने भाई के लंड को चूसने लगी… और अपनी जीब से प्रीति के

रस का स्वाद ले उसे चाटने लगी…

रवि बेचारा लाचार प्रीति को राज का लंड चूस्ते देखते रहा और

अपने लंड को मसलता रहा.. उसे भी यही लगा कि लंड मसल कर ही

उसे अपना पानी छुड़ाना पड़ेगा.

प्रीति थोड़ी देर तो राज के लंड को चूस्ति रही फिर उसने वही जगह

ले ली जो थोड़ी देर पहले सोनिया ने खाली की थी.. राज की गोद मे बैठ

वो उछल उछल कर उसके लंड को अपनी चूत के अंदर तक ले रही

थी….

राज के लंड पर उछलते उछलते उसने रवि को देखा जो अपने लंड को

मसल रहा था..आख़िर उसे उस पर रहम आ ही गया..

“क्या अपने लंड को मसल रहे हो… यहाँ मेरे पास आओ आज में

तुम्हारे लंड को चूस उसे पूरा निचोड़ दूँगी” प्रीति ने रवि से कहा.

रवि अपनी जगह से उछल कर खड़ा हुआ और प्रीति के पास जाकर खड़ा

हो गया.. प्रीति ने पहले तो उसके लंड को पकड़ मसला और फिर उसे

अपने मुँह मे ले चूसने लगी..

प्रीति का लंड मुँह मे लेना था कि रवि तो जैसे पागल हो गया.. वो

अपनी कमर हिला उसके मुँह मे ही धक्के मरने लगा और बड़बड़ाने

लगा..

“ऑश प्रीत हाआँ चूवसो मेरे लंड को ऑश हाँ अपनी जीब से

भींचो.. श हाआँ और अंदर गले तक लेकर चूसो… ऑश ”

रवि का बड़बड़ाया था कि तभी राज ने बताया कि उसका लंड पानी छोड़ने

वाला है.. प्रीति तुरंत उसके लंड से उठ कर खड़ी हो गयी और इसके

पहले कि वो उसे अपने मुँह मे ले चूस्ति कि सोनिया ने पहले ही उसके

लंड को अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगी.. प्रीति सोनिया को लंड

चूस्ते देखती रही और थोड़ी ही देर मे राज के लंड ने पिचकारी पर

पिचकारी वीर्य की सोनिया के मुँह मे छोड़ दी.. राज का वीर्य सोनिया के

मुँह के किनरों से टपकने लगा…

प्रीति ने एक बार फिर रवि के लंड को अपने मुँह मे लिया और चूसने

लगी.. कभी वो उसे अपनी जीब से भींचती तो कभी दाँतों से

खुरदुरे पॅन से उसे खरोचती.. रवि का लंड तो और फड़फड़ने लगा..

वो अपनी कमर की आयेज कर लंड उसके गले तक ठेलने लगा…. और

थोड़ी ही देर मे रवि के लंड ने पानी छोड़ दिया..

सोनिया राज और रवि तीनो झाड़ चुके थे और सिर्फ़ प्रीति थी कि जिसकी

गर्मी शांत नही हुई थी.. उसने ललचाई नज़रों से सोनिया की तरफ

देखा.. सोनिया ने उसकी आँखों के इशारा को पहचान लिया और उसकी

टाँगो के बीच आ गयी… प्रीति ने अपनी टाँगे फैला दी और सोनिया

उसकी चूत को चूसने लगी.

प्रीति की चूत मे गर्मी और बढ़ गयी उसने सोनिया के सिर को अपनी

चूत पर दबा दिया…

“ऑश हाां सोनी चूवसो मेरी चूओत को आज इसका सारा रस पीए

जाओ.. ऑश हाां अपनी जीब इसी तरह अंदर तक घुसा के चूवस

ओह आआआः हाां”

तभी राज ने प्रीति की एक चुचि को अपने मुँहे मे ले चूसने लगा

और रवि उसकी दूसरी चुचि को और थोड़ी ही देर मे प्रीति की चूत

का बाँध टूट गया और उसकी चूत से रस की धारा बहने लगी..

इसी तरह अगले दो तीन दिन चारों ने मिलकर काफ़ी मज़ा लिया.. राज ने

तो कई बार सोनिया की चूत चोदि लेकिन राज को एक अफ़सोस रह गया वो

सोनिया की गंद नही मार पाया और एक अफ़सोस रवि को भी रहा. प्रीति ने

कई बार उसके लंड को चूस उसका पानी छुड़ाया लेकिन उसने रवि को

चोद्ने नही दिया…. आख़िर वो घड़ी आ गयी जब सोनिया और रवि अपने

मा बाप के साथ वापस अपने घर लौट गये….

जब राज और प्रीति के ममरे भाई बेहन उनके मामा मामी के साथ

वापस लौटे एक हफ़्ता बीत चुका था… एक दिन फिर राज अपनी मम्मी

वसुंधरा के साथ घर मे अकेला था…

“मम्मी तुम्हे तो पता है कि में और प्रीति आपस मे चुदाई करते

है” राज ने अपनी मम्मी से कहा.

“हां अंदाज़ा तो है लेकिन आज तक मेरे दोनो बच्चो को आपस मे चुदाई

करते नही देखा.. ” वासू ने जवाब दिया.. और वो उन दोनो की चुदाई

के ख़यालों मे खो गयी..

“मम्मी मेरी इच्छा है कि में तुम्हारी और प्रीति की एक साथ चुदाई

करूँ.. क्या तुम मेरी तमन्ना पूरी कर सकती हो?”

“ये तुम क्या कह रहे हो राज… में ऐसा कैसे कर पाउन्गि…” वासू

ने जवाब दिया…

“अब मम्मी आप भी ना बहाना मत बनाइए.. में जानता हूँ कि आप

प्रीति और स्वीटी तीनो साथ मे सेक्स कर चुकी हैं.. फिर अगर में

साथ मे हूँ तो क्या फरक पड़ता है…” राज ने कहा.

“ठीक है बेटा..अगर तुम दोनो इसी मे खुश हो तो मैं तय्यार हूँ”

वासू ने कहा.

“तो ठीक है ये तय रहा.. अब बस एक दिन पापा के बाहर जाने का

इंतेज़ार करना है बस आप मुझे पहले से बता दीजिएगा… ” राज ने

खुश होते हुए जवाब दिया.

“एक ही शर्त पर कि पहले तुम अपना ये विशाल लंड पॅंट के बाहर

निकालो?”

राज ने अपनी पॅंट नीचे खिस्काई और अपने विशाल लंड को शॉर्ट्स के

बाहर निकाल दिया.. वासू तो जैसे अपने बेटे के लंड की दीवानी हो

चुकी थी.. वो उसके सामने घुटनो के बल बैठ गयी.. और उसके लंड

पर अपनी जीब फिराने लगी.. फिर उसे अपने मुँह मे ले चूसने लगी…

वो कभी लंड को नीचे से उपर तक चाट उसके सूपदे को चूस्ति तो

कभी उपर से नीचे चाटते हुए उसकी एक अंडकोष को मुँह मे ले

चूस्ति फिर यही क्रिया दूसरे के साथ करती. राज का लंड अपनी पूरी

तरह तन गया था…

राज अपने मम्मी को सिर को दबा अपने लंड को अंदर तक घुसने लगा…

लंड वासू के गले को छू रहा था.. उसे भी इस तरह लंड का अंदर

बाहर होना अच्छा लग रहा था..

“ऑश मम्मी चूवसो ऑश हाआँ अंदर तक लेकर चूसो… ओह मम्मी”

वासू और तेज़ी से अपने बेटे के लंड को चूसने लगी… उसकी चूत भी

गीली हो चुकी थी.. और वो राज के लंड के लिए तड़पने लगी.. उसने

उसके लंड को बाहर निकाल दिया..

“राज अब नही सहा जाता जल्दी से अपना लंड मेरी चूत मे घुसा मुझे

चोदो.” वासू ने खड़े होते कहा.

वासू के खड़े होते ही राज अपनी मम्मी के कपड़ों पर टूट पड़ा और

उन्हे उतारने लगा…वासू को पूरी तरह नंगी करने के बाद उसे वहीं

सोफे पर बिठा दिया और उसकी टाँगो के बीच आ उसने अपने लंड को

उसकी चूत से लगा अंदर घुसा दिया..

वासू ने पानी टाँगो को थोड़ा फैला थोड़ा उठा उसके लंड को जगह दी

और राज का लंड पूरा का पूरा अंदर बाहर होने लगा…. वासू को लगा

कि जैसे की कोई मोटी लोहे की सलाख उसकी चूत की दीवारों को छेड़ती

हुई अंदर तक घुस गयी हो.. वो मच्छल उठी…

“ओह बेटा ऑश हाां और अंदर तक घुसा के चोदो… ओह अयाया

तुमने तो मेरी चूत फाड़ ही दिया है.. ऑश हाआना और तेज़ी से अंदर

बाहर करो.. ऑश बहुत अच्छा लग रहा है.. ”

राज ने वासू की दोनो चुचियों को पकड़ मसल और तेज़ी से लंड को

अंदर बाहर करने लगा….उसका लंड किसी गाड़ी के पिस्टन की तरह

अंदर बाहर हो रहा था.

“हाआँ राज हाआँ ऐसे ही तेज़ी से चोदो और मेरी चूओत को अपने

रस से भर दो… ऑश हाआँ और ज़ोर से ऑश ”

राज ने अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी और अपने लंड के साथ

साथ दो उंगलियों भी चूत घुसा अंदर बाहर करने लगा…

वासू राज के निपल को पकड़ मसल्ने लगी.. काटने लगी.. राज उसकी

चुचियों को मसल रहा था.. दोनो उत्तेजना की चरम सीमा पर

पहुँच चुके थे.. वासू ने अपनी कमर उठाई और राज के लंड ने

वीर्य की बौछार उसकी चूत मे कर दी.. वासू तो जैसे निहाल हो गयी

अपनी कमर को उठाते हुए उसकी चूत ने भी मदन रस से अपना रस

मिला दिया.. दो रसों का संगम हो वासू की चूत से टपकने लगा…

तभी दरवाज़ा खुला और देव ने घर मे कदम रखा.. वासू ने अपने

कपड़े उठाए और दौड़ती हुई अपने बेडरूम मे भाग गयी.. राज ने भी

अपने कपड़े उप्पर चढ़ा लिए… तभी देव की नज़र अपने बेटे पर

पड़ी…………….

“हाई राज बेटा … क्या तुम अकेले ही घर पर हो?” देव ने पूछा..

“नही पापा मम्मी भी घर पर ही है.. लेकिन लगता है कि उनकी आँख

लग गयी है” राज ने जवाब दिया.

“तुम्हारी मम्मी भी कमाल करती है इतनी सुहानी शाम को बर्बाद

कर रही है” देव ने कहा… और अपने कमरे की ओर बढ़ गया…

देव अपने कमरे मे पहुँचा तो देखा कि उसकी पत्नी वसुंधरा रज़ाई

मे दुब्कि उनके विशाल पलंग पर लेटी हुई थी… देव चुपके से पलंग

के पास आया और अपनी बीवी के पास लेट गया फिर धीरे से अपनी बीवी का

माथा चूम लिया… देव के होठों के स्पर्श से वासू की आँख खुली..

“हाई कब आए?” वासू ने अपनी आँखों को खोलते हुए पूछा.

“अभी अभी आया लेकिन इतनी सुहानी शाम को तुम बिस्तर मे घुसी क्या

कर रही हो?” देव ने पूछा.

“में तो खुद बोर हो रही थी और पता नही कैसे और कब आँख लग

गयी” वासू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया…

“तो मेरी जान फिर यहाँ बिस्तर पर लेटी क्यों शाम खराब कर रही

हो?” देव ने कहा..

“में खुद कहाँ शाम खराब करना चाहती हूँ” कहकर वासू ने उसका

हाथ पकड़ा और रज़ाई के अंदर अपनी नंगी चुचि पर रख दिया… और

उसके हाथ के दबाव से अपनी चुचि को मसल्ने लगी भींचने लगी…

जब उसने देखा कि देव खुद अब उसकी चुचियों को भींच रहा है तो

उसने अपना हाथ हटा लिया और देव के पॅंट के उपर से उसके लंड को

मसल्ने लगी… फिर उसकी पॅंट के बटन खोल कर उसके खड़े लंड को

बाहर निकाला और उसे अपने पास खींच उसके लंड को अपने मुँह मे ले

चूसने लगी..

“इतनी सुहानी शाम को चुदाई का अपना ही मज़ा है… “कहकर देव ने

वासू पर ढाकी रज़ाई को हटा दिया और उसकी टाँगो को फैलाते हुए खुद

उसपर चढ़ गया…

फिर अपने लंड को उसने उसकी चूत से लगाया और एक ज़ोर का धक्का मार

अंदर घुसा दिया..

वासू ने उतेज्ना मे अपनी कमर उठा अपने पति के लंड को और अंदर तक

ले लिया.. अब दोनो ताल से ताल मिला चुदाई करने लगे.. देव अपनी बीवी

की चुचियों को चूस्ते हुए धक्के लगा रहा था…

उत्तेजना के साथ साथ देव के धक्कों की रफ़्तार भी तेज होती गयी.. वो

अपना पानी अंदर छोड़ने ही वाला था कि वासू ने उसे रोक दिया..

“देव अंदर नही छुड़ाना आज में तुम्हारा लंड चूस तुम्हारा वीर्य

पीना चाहती हूँ” वासू ने कहा..

देव ने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी छाती पर चढ़े हुए ही अपने

लंड को उसके मुँह मे दे दिया.. वासू अपने सिर को उठा उसके लंड को

चूसने लगी… और उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से भींच भीच चूसने

लगी..

लेकिन देव को कहाँ मालूम था कि उसकी बीवी उसके लंड को नही बल्कि

अपने ही बेटे के वीर्य को उसके लंड से चाट रही थी..

दरवाज़े की आवाज़ सुन वासू को बाथरूम जाने का समय नही मिला था

और वो वैसे ही रज़ाई ओढ़ सोने का बहाना बना लिया था. .. राज का

वीर्य तब भी उसकी चूत मे भरा हुआ था…. और अब वो उसी वीर्य को

अपने पति के लंड पर से चाट कर उसका स्वाद ले रही थी…इस ख्याल

ने उसे पागल बना दिया था वो अपने हाथों को नीचे ले जाकर अपनी

चूत को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगी..

“हाआँ अब मुझे चूऊड़ो अब थोडा और सख्त हो गया है.. ज़रा ज़ोर

ज़ोर से चोदना और खूब अंदर तक ठेलना” वासू ने अपने पति से कहा.

Please complete the required fields.




Comments

Leave a Reply