स्वीटी ने देखा कि उसके पिताजी के चेहरे पर डर की परछाई छा
गयी थी.. उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो क्या करे.. उसकी
चूत मे आग लगी हुई थी उसकी निगाह बार बार अपने पिता के लंड
पर ठहर जाती और प्रीति के वो द्रिस्य उसकी आँखों के सामने आ
जाता जब प्रीति उसके बाप के लंड पर चढ़ उछल उछल कर चुदवा
रही थी.. क्या वो भी ऐसा कर पाएगी…?
मोहन तो खुद सोच मे डूबा हुआ था.. कि उसे क्या करना चाहिए…………….
परिस्थितियों के साथ चलना चाहिए या फिर सब कुछ हालत पर छोड़
देना चाहिए…
“पर में अकेला ही तो नही हूँ जिससे प्रीति ने चुदवाया है? मोहन
ने बचाव के लहजे मे अपनी बेटी से कहा.
स्वीटी सोचने लगी… क्या उसके पिता को पता है कि वो प्रीति के साथ
सेक्स करती है..
“मुझे ऐसा ही लगता था” मोहन ने जवाब दिया.. “मेने एक रात
तुम्हारी सिसकियाँ सुनी थी..
“आप छुप कर मेरे कमरे के बाहर खड़े अंदर की आवाज़े सुनते है?”
स्वीटी ने गुस्से मे कहा…
“तुम भी तो वही कर रही थी” मोहन ने अपनी बेटी को इस ओर देखते
हुए कहा..
“पर में कोई बदले की भावना से नही देख रही थी” स्वीटी ने जवाब
दिया. “मुझे पता है कि प्रीति मेरी चचेरी बेहन है लेकिन मेरी
अभी शादी नही हुई लेकिन आप तो शादी शुदा है डॅड”
स्वीटी की बात सुन एक बार डर की रेखा उभर आई मोहन के चेहरे
पर..
“वो स्वीटी…….”
“आप घबराईए नही डॅड में मम्मी से कुछ नही कहूँगी..” स्वीटी ने
कहा तो मोहन ने राहत की सांस ली.. “लेकिन उम्मीद है आप भी किसी
से कुछ नही कहेंगे” स्वीटी ने फिर कहा.
मोहन ने खुशी खुशी गर्दन हिला कर कहा कि वो भी चुप
रहेगा…
“लेकिन मेरी एक बात आपको माननी पड़ेगी” स्वीटी ने कहा..
“जो तुम कहो मेरी प्यारी गुड़िया… मैं तुम्हारी हर बात मानने को
तय्यार हूँ” मोहन ने जवाब दिया…
“में ये जानना चाहती हूँ कि क्या आप मुझे चोदना चाहेंगे.. में
चाहती हूँ कि आप मेरी भी प्रीति की तरह कस कर चुदाई करें”
“स्वीटी मेरी समझ मे नही आ रहा कि तुम्हारी बात का में क्या
जवाब दूं.. मुझे लगता है कि मैं ऐसा नही कर पाउन्गा.. आख़िर
तुम मेरी बेटी हो” मोहन ने जवाब दिया..
“प्रीति भी तो आपकी भतीजी है”
“हां पर भतीजी और बेटी मे फरक होता है” मोहन बड़बड़ाया..
“आपने कुछ कहा डेडी”
“वो स्वीटी मैं कैसे समझाऊ तुम्हे?”
“आप नही जानते डेडी जबसे मैने आपको प्रीति की चुदाई करते देखा
है तबसे मेरी भी इच्छा है कि आप मेरी भी चुदाई करें… आप
मुझे अपना लंड दीखाइए और ये ना कहना कि आप उत्तेजित नही
है.. ” स्वीटी ने कहा.
मोहन अपनी जगह से हिला नही… वो जानता था कि उसका लंड पूरी
तरह तन कर खड़ा है… उसकी सग़ी बेटी उससे चुदवाना चाहती है
इस ख़याल ने ही उसे गरमा दिया था और उसका लंड पूरी तरह तन कर
खड़ा था…वो हिला नही तो स्वीटी खुद अपने पिता के पास आ गयी
और उसने अपनी टी-शर्ट को सिर से उठा कर उतार दिया..
“स्वीटी प्लीज़” वो अपनी बेटी को रोकना चाहता था लेकिन स्वीटी अब
अपनी पॅंटी भी उतार कर नंगी हो गयी.. स्वीटी देख रही थी कि
उसके पिताजी की नज़रे उसके नंगे बदन को देख रही थी और आँखों
मे उत्तेजना भरी थी उसने अपनी निगाह उनकी जांघों के बीच डाली तो
देखा कि मोहन अपने लंड को अपनी उंगलियों से मसल रहा था… वो दो
कदम और आगे बढ़ उसके सामने नीचे घुटनो के बल बैठ गयी और
उसके हाथों को हटा दिया..
“स्वीटी प्लीस रुक जाओ” मोहन ने एक बार फिर अपनी बेटी को रोकना
चाहा.. लेकिन स्वीटी ने उसकी बात पर कोई ध्यान नही दिया..मोहन
जानता था कि उसे स्वीटी को रोकना चाहिए.. लेकिन उसकी खुद की
उत्तेजना ने उसे ऐसा करने नही दिया…
और तभी उसे महसूस हुआ कि
स्वीटी ने उसके लंड को अपने मुँहे मे ले लिया है और अपने मुँह को
आगे पीछे कर वो उसे चूस रही है..
स्वीटी की आँखों के सामने फिर वो द्रिस्य आ गया जब प्रीति उसके पिता
के लंड को चूस रही थी. उसने भी अपने मुँह को पूरा खोला और उसके
लंड को अपनी जीब से भींचते हुए अंदर ले चूसने लगी… अपनी
जीब को अपने ही पिता के लंड पर चलाने लगी.. मोहन सिसक पड़ा..
उत्तेजना की आवाज़ निकलने लगी उसके मुँह से…
स्वीटी अब और जोरो से अपने बाप के लंड को चूसने लगी. वो जानती
थी उनका लंड पानी छोड़ने वाला है.. जब वो कमरे मे आई थी तो
उनका लंड झड़ने की कगार पर था.. उसने लंड को मुँह के बाहर
निकाला और ज़मीन पर चित लेट कर अपनी टाँगे फैला दी…
“अब अपने लंड को मेरी चूत मे घुसा मुझे चोदिये.. अपने लंड से
मेरी चूत को भर दीजिए… दाद” स्वीटी उत्तेजना मे फुस्फुसाइ..
मोहन अपनी बेटी के सुन्दर बदन को देखने लगा… वो अपनी बेटी के
टाँगो के बीच आ गया… पर वो थोड़ा हिचकिचा रहा था….वो अपने
लंड को उसकी चूत मे घुसाना चाहता था लेकिन वो ऐसा कर नही पाया
और उसकी जगह उसने अपने होठों को उसकी चुचियों पर रखा और उसके
निपल को अपने होठों मे दबा चुलबुलाने लगा… उसने महसूस किया
कि स्वीटी ने अपना हाथ नीचे कर उसके लंड को पकड़ लिया था और
मसल रही थी और उसे अपनी चूत की ओर खींच रही थी… उसका
लंड उसकी चूत से सटा तो उसने एक हल्का सा धक्का मारा और उसका
लंड अपनी बेटी की गीली चूत मे घुस गया..
“ऑश पिताजी चोदो मुझे ऑश हाआँ चोदो” स्वीटी धीरे से
अपने बाप के कान मे फुस्फुसाइ..
मोहन ने अपने लंड को बाहर निकाला और एक ज़ोर का धक्का मार उसे फिर
अंदर घुसा दिया… और अब अपनी कमर को हिला और ज़ोर ज़ोर से धक्के
मारने लगा…
“हाआँ पिताजी ऐसे ही चोदो ऑश हाआँ और ज़ोर से और ज़ोर से
ऑश हाआँ अंदर तक घुसा कर चोदो… ”
मोहन और ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगा.. उसे पता था कि वो अब ज़्यादा
देर तक रुक नही पाएगा.. वो अपने लंड को बाहर निकालना चाहता था
लेकिन स्वीटी ने उसके दोनो चूतदों को पकड़ उसे अपनी चूत पर दबा
दिया…
“घबराईए मत डॅड मेने गोली खा रखी है कुछ नही होगा.. भर
दीजिए मेरी चूत को अपने अमृत रस से… ” और मोहन ने ज़ोर से अपने
लंड को अंदर घुसा अपने वीर्य की पिचकारी अपनी बेटी की चूत मे
छोड़ दी.. और उसकी चूत को रस से भर दिया..
जैसे ही मोहन का लंड पूरी तरह झाड़ कर मुरझाया तो उसने अपने
लंड को स्वीटी की चूत से बाहर निकाला और जो कुछ हुआ उस पर
सोचने लगा… वो अपनी बेटी से माफी माँगना चाहता था..
“नही पिताजी कुछ मत कहिएगा.. सच कहूँ तो मुझे बहुत मज़ा
आया में जानती हूँ कि शायद भविष्य मे ऐसा कुछ दोबारा ना हो..
पर में खुश हूँ और आप भी ज़्यादा मत सोचिएगा” स्वीटी ने कहा.
मोहन ने अपने कपड़े उठाया और स्टडी रूम से बाहर निकल गया…
स्वीटी भी वापस अपने कमरे मे आ गयी जहाँ उसने अपनी चूत मे लगे
अपने बाप के वीर्य से अपनी उंगलियों को गीला किया और फिर अपनी चूत
मे उंगली कर अपना पानी छुड़ाया… और फिर अपनी उंगलियों को अपने मुँह
मे ले चूस्ते हुए सो गयी….
राज की आज उत्तेजना के मारे हालत खराब थी.. वो कंप्यूटर पर बैठा
उन सब बातों को याद कर रहा था कि उसे किस तरह अपनी ममेरी बेहन
सोनिया को चोदने का मौका मिला.. उसका लंड पूरी तरह तन कर खड़ा
था और वो अपने लंड का पानी छुड़ाना चाहता था.. वो अपने कमरे मे
से बाहर निकला और देखने लगा कि घर मे और कौन कौन है…
राज किचन मे दाखिल हुआ तो देखा कि उसका मा वसुंधरा पूरी तरह
तय्यार थी और शायद शाम के लिए बाहर जाने की तय्यारी कर रही
थी… उसने एक छोटे काले रंग की स्कर्ट पहन रखी थी और उस पर
गुलाबी रंग का टॉप… जैसे ही वासू नीचे बनी शेल्फ से कुछ
निकालने के लिए झुकी उसकी स्कर्ट उपर उठ गयी उसके चूतड़ की दरार
दीखाई देने लगी.. राज का लंड और पूरी तरह तन कर खड़ा हो
गया…
“हाई मम्मी.. क्या और कोई घर मे है?” राज ने पूछा.
“नही सिर्फ़ मैं हूँ.. प्रीति थोड़ी देर पहले ही वो सोनिया के साथ
बाहर गयी है. रवि तुम्हारे पापा के साथ बाहर गया है और तुम्हारे
अश्विन मामा और नीता मामी दोनो शॉपिंग करने गये है.” वासू नेआपने
बेटे को बताया..
राज अपनी मा को देख रहा था… वासना उस पर बुरी तरह हावी थी..
उत्तेजना के मारे लंड उसकी शॉर्ट्स मे बार बार उछल रहा था… उसकी
मम्मी अब कंप्यूटर तो जाने से रही क्यों कि वो पहले से ही तय्यार थी
बाहर जाने के लिए…
“तुम ऐसे क्यों पूछ रहे हो?’ उसने पूछा… राज ने देखा कि उसकी मा
की निगाहे अब उसके चेहरे से नीचे हो उसकी जांघों के बीच थी
जहाँ से उसके खड़े लंड का उभार सॉफ उसे दीखाई दे रहा होगा..
उसने देखा कि उसकी मा ने उसके खड़े लंड को देख किसी छीनाल औरत
की तरह अपनी जीब को अपने होठों पर फिराई जैसे कि कोई रंडी अपने
किसी ग्राहक को इशारा कर रही हो…
“क्यों कि मुझे अपने इस खड़े लंड की सहायता करनी है गीली चूत”
राज ने अपनी शॉर्ट्स के बटन खोल अपने खड़े लंड को आज़ाद करते हुए
कहा.
“राज ये क्या कर रहे हो तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नही हो गया?” वासू
राज की इस हरकत पर ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली..”और तुमने मुझे अभी
क्या पुकारा?” राज का उसे इस नाम से बुलाने पर वो चौंक पड़ी थी.
“गीली चूत. मम्मी में जानता हूँ कि वो तुम ही हो… हम आपस मे
चुदाई कर चुके है और सही कहूँ तो मुझे आपके साथ चुदाई मे
बहुत मज़ा आता है और इस समय मेरा लंड मुझे बहुत तंग कर रहा
है इसलिए में इसे आपकी चूत मे घुसा इसकी गर्मी को शांत करना
चाहता हूँ” राज ने वासू के सामने अपने लंड को मसल्ते हुए कहा.
“हे भगवान ये मैने क्या कर दिया.. मुझे माफ़ करना राज मुझे ऐसा
नही करना …….. ”
“मेने कहा ना मम्मी मुझे बहुत अच्छा लगा और आपको भी तो मज़ा
आता है मेरा लंड अपनी चूत मे घुस्वाने मे तो फिर आज क्यों आप
परेशान हो रही है और मुझे पता है कि आपको ये भी पता है कि
में प्रीति की भी चुदाई करता हूँ तब भी आपने हमे नही रोका तो
आज क्या परेशानी है?” राज ने कहा..
“हां लेकिन हमेशा मुझे यही लगा कि तुम मेरे बारे मे नही जानते
हो.. लेकिन जब आज तुम हक़ीक़त जान गये तो बात कुछ अलग है….”
“नही कुछ अलग नही है.. सेक्स सिर्फ़ सेक्स होता है फिर चाहे जिसके
साथ किया जाए… या तो पहले आपको बढ़ावा नही देना चाहिए था अब
आप यथार्थ को नही बदल सकती ” राज ने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा.
राज अपनी मा के पास आया और धीरे से उसके हाथ को अपने खड़े लंड
पर रख दिया… और फिर अपने हाथों को उसके टॉप के उपर से उसकी
चुचियों पर रख उन्हे सहलाने लगा… उसने महसूस किया कि उसकी मा
अब उसके लंड मसल्ने लगी थी….
“मम्मी अब इसे मुँह मे लेकर चूसो में जानता हूँ तुम्हे लंड
चूसना बहुत अच्छा लगता है” राज ने कहा..
वासू ने पहले तो उसके खड़े लंड को देखा.. कितन सही कह रहा था
उसका बेटा.. लंड चूसना तो जैसे उसकी फ़ितरत थी.. वो झट से
घुटनो के बल नीचे बैठ गयी और उसके लंड को नीचे से उपर तक
चाटने लगी… राज सिसक पड़ा..वासू ने अपना मुँह खोला और लंड को
अपने मुँह मे ले चूसने लगी…इतना मोटा और लंबा लंड चूसने मे
सही मे बहुत मज़ा आ रहा था…
“ऑश मम्मी कितना अच्छा लंड चुस्ती हो…. ऑश हाआँ ऐसे चूसो
अपने गले तक लेकर ऑश हाँ और अंदर तक ले लो पूरा अंदर” सिसकते
हुए राज ने अपनी मम्मी के बालों को उसके चेहरे से पीछे किया और
अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर होते देखने लगा… उसे इस
तरह गंद और उत्तेजञात्मक बातें करने मे मज़ा आ रहा था..
वसुंधरा महसूस किया कि राज की इस तरह की बातों ने उसकी चूत को
गीला कर दिया था.. रस बह कर उसकी पॅंटी को गीला कर रहा
था…. वो अपनी जीब से उसके लंड को और जोरों से भींचते हुए
चूसने लगी…. बीच मे वो लंड पर अपने दाँत भी गढ़ा देती जिससे
राज कराह उठता…
राज ने एक बार तो सोचा कि अपने लंड का पानी अपनी मा के मुँह मे ही
छोड़ दे लेकिन फिर उसने अपना इरादा बदल लिया, “अब रुक जाओ मम्मी और
खड़ी हो जाओ.. अब में तुम्हे चोदना चाहता हूँ”
वासू ने अपने बेटे की बात मानकर उसके लंड को मुँह से बाहर निकाला
और खड़ी हो गयी और सोचने लगी कि अब क्या बेडरूम मे जाए या फिर
लिविंग रूम मे लेकिन तभी राज ने अपने हाथ उसकी कमर मे डाल उसे
उठा लिया और उसे किचन शेल्फ पर बिठा दिया..
फिर राज ने उसकी स्कर्ट को उपर उठा दिया जिससे उसकी पॅंटी से ढाकी
चूत दीखाई देने लगी.. राज अपने लंड को उसकी टांगो के अन्द्रुनि
हिस्सों पर घिसने लगा… एक सिरहन से दौड़ गयी वासू के बदन मे…
इस तरह की उत्तेजना कभी नही पैदा हुई थी उसके शरीर मे…
राज ने फिर अपने उंगलियों को पॅंटी के एलास्टिक मे फसाया और उसकी
पॅंटी को नीचे खीच उतार दिया.. और फिर अपनी दो उंगलियों को उसकी
चूत मे डाल अंदर बाहर करने लगा…
“ऑश हाां ओह आआआ” वासू सिसक पड़ी…

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