मामू भी मुझे गोद में ले कर दीवान पे बैठ गए अपने बड़े भैया के पास। अब सुशी बुआ और मैं दोनों भाइयों, बुआ अपने जेठजी और मैं अपने छोटे मामू , के महाकाय लंडो को अपनी चूतों में ले कर स्थिर होने लगीं। बड़े मामू और छोटे मामू के हाथों के आनंद के लिए चार चार गुदाज़, उरोज़ों का विकल्प था। सुशी बुआ की चूँचियाँ मेरी चूँचियों से कहीं ज़्यादा विशाल थीं और सुहागन परिपक्व स्त्रीत्व के सौंदर्य से भरी हुईं थीं। मेरी चूँचियों अभी भी कुंवारे – लड़कपन और अल्पव्यस्क अपरिपक्व तरुणा की तरह थीं।
मैंने बड़ी सी सांस भर कर अकबर चाचू के घर में अपने हफ्ते भर की कारनामों की दास्तान शुरू कर दी। छोटे मामू के हाथों ने एक क्षण के लिए भी मेरे उरोजों को अकेला नहीं छोड़ा। जैसे जैसे कहानी के कामुक प्रसंग आते मेरी चूचियों की सहमत आ जाती। छोटे मामू का लंड मेरी तंग नन्ही चूत में मचलने थिरकने लगता। सुशी बुआ का भी हाल मुझसे अच्छा नहीं था। पर सुशी बुआ मुझे रोक कर उन कथांशों का और भी विस्तार भरा विवरण बताने के लिए डाँट देतीं ।
जब तक मैंने शादी की रात का पूरा विवरण दिया तो दोनों पुरुषों के लंड की थरथराहट महसूस करने वाली थी।
जब मैं आखिरी रात पर आयी, जिस दिन और रात शब्बो बुआ , नूसी आपा और शन्नो ने आदिल भैया और अकबर चाचू सिर्फ मुझे चोदने के लिए छोड़ दिया था उसका विवरण सुन कर सुशी बुआ सिसकने लगीं। छोटे मामू ने मेरी छोचियों को और भी बेदर्दी से मसलते हुए मेरे चूचुकों को रेडियो की घुंडियों की तरह मरोड़ने मसलने लगे।
मैं सिसक सिसक कर अच्छी भांजी की तरह कहानी को बिना रुके सुनती रही। आखिर कर मैं आदिल भैया और अकबर चाचू की इकट्ठे मेरी चूत और गांड की चुदाई की प्रसंग पर आ गयी।
अब मैं भी सुशी बुआ की तरह मामू के लंड के ऊपर अपनी चूत मसलने लगी। जैसे ही मेरी कहानी में आदिल भैया और अकबर चाचू के लंडों ने मेरी चूत और गांड में गरम वीर्य की बारिश की तो बुआ और मैं भी भरभरा कर झड़ गयीं।
“अब नहीं रुका जाता , जेठजी अब चोद दीजिये अपनी बहू को। आप भी फाड़ दीजिये अपनी भांजी की चूत। आज रात आप दोनों मिल कर इसकी चूत और गांड की धज्जियाँ दीजियेगा ,”सुशी बुआ ने सिसक कर गुहार मारी।
“छोटे मामू मुझे भी चुदना है अब,” मैं भी मचल कर सिसकी।
छोटे मामू ने मुझे पलट कर पेट के ऊपर दीवान पर लिटा पट्ट दिया। उनका भरी भरकम शरीर मेरे ऊपर विरजमान था। छोटे मामू का लंड उस मुद्रा में मेरी चूत को और भी दर्द कर रहा था।
बड़े मामू ने सुशी बुआ को निहुरा कर घोड़े बना दिया और फिर शुरू हुआ भीषण चुदाई का प्रारम्भ सुशी बुआ के शयनकक्ष में।
मेरी चूत बिलबिला उठी जैसे ही छोटे मामू ने चुदाई की रफ़्तार बड़ाई। मेरे पट लेते हुए शरीर के ऊपर उनके भरी शक्तिशाली बदन का पूरा वज़न मेरे ऊपर था। मेरी नन्ही चूत और भी तंग हो गयी थी। मामू अपने हाथ मेरे सीने के नीचे खिसका कर मेरे पसीने से उरोजों को अपने विशाल हाथों में जकड़ कर मसलने लगे। उनका लंड मेरी चूत में दनादन अंदर बाहर आ जा रहा था। उनके लंड की भयंकर धक्कों से मेरी चूत चरमरा उठी। उधर बड़े मामू शुरुआत से ही सुशी बुआ की चूत की भीषण चुदाई कर रहे थे।
हम दोनों की चूतों महाकाय लौंड़ों की चुदाई की गर्मी से पचक पचक की अश्लील आवाज़ें उबलने लगीं।
सुशी बुआ वैसा के ज़्वर से जल उठीं ,” रवि भैया आ…. आ … आ ….. आ………हाय आप मेरी चूत फाड़ कर ही मानोगे। ”
मेरी हालत भी ख़राब थी। मेरी तरुण चुदाई का अनुभव सुशी बुआ के परिपक्व तज़ुर्बे के सामने बचपन के समान था।
मैं सिर्फ बिलबिलाती सिसकती रही और छोटे मामू ने घंटे भर रौंदी मेरी चूत निर्मम लंड के धक्कों से। मैंना जाने कितनी बार झड़ गयी थी।
मैं छोटे मामू की मर्दानी चुदाई की थकन से शिथिल हो चली थी।
बड़े मामू ने अपना रतिरस से लिसा लंड सुशी बुआ की चूत में से निकाल कर दीवान पर चित्त कर दिया भीषण धक्के से और उनके विशाल गदराये नितम्बों को चौड़ा कर अपने महालँड के सुपाड़ी को बुआ की गांड के ऊपर टिका दिया। फिर जो बड़े ममौ ने किया उसे देख कर मेरी आँखें फट गयीं। बड़े मामू ने अपने पूरे वज़न को ढीला छोड़ दिया और उनका लंड एक भीषण जानलेवा धक्के से सुशी बुआ की कसी गांड में समा गया।
सुशी बुआ की चीख कमरे में गूँज उठी, ” नहींईई ई उननननन मर गयी माँ मैं तो।” बिलबिला उठी दर्द से सुशी बुआ।
बड़ी मामू ने अपनी बहु की हृदय हिला देने वाली गुहार को अनदेखा कर अपने लंड को बाहर निकाला और फिर उसी बेदर्दी से बुआ की गांड में ठूंस दिया। बुआ अपने जेठ के भारी भरकम शरीर के नीचे दबीं सिर्फ बिलबिलाने और चीखने और अपनी गांड को अपने जेठ के हवाले करने के अल्वा कोई और चारा नहीं था।
छोटे मामू ने भी मौका देखा और मेरे कान में फुसफुसाए ,”नेहा बेटी अब तेरी गांड का नंबर है ?”
इस से पहले मैं कुछ बोल पाती छोटे मामू के लंड ने मेरी चूत में एक नया रतिनिष्पत्ति का तूफ़ान फैला दिया। जब तक मैं झड़ने की मीठी पीड़ा से निकल पाती छोटे मामू ने मेरे गोल गोल चूतड़ों को फैला कर मेरी चूत के रस से लिसे लंड को मेरी गांड के ऊपर दबाने लगे। भगवान् की दया से उन्होंने अपने बड़े भैया की तरह मेरी गांड में अपना वृहत लंड नहीं ठूंसा। पर धीरे धीरे इंच इंच करके दबाते रहे। मैं सिसकी और होंठ दबा कर दर्द को पीने लगी। छोटे मामू का लंड जड़ तक तक मेरी गांड में समा गया,तब तक मेरी साँसे अफरा तफरी में थीं। छोटे मामू ने मेरे सीने के नीचे हाथ डाल कर मेरे पसीने से गीले उरोज़ों को अपने फावड़े जैसे हाथों में जकड़ लिया।
मैं अब छोटे मामू के लंड की हर नस को अपनी गांड में महसूस करने लगी थी। छोटे मामू ने धीरे धीरे एक एक इंच करके अपने लंड का मोटा लम्बा तना मेरी गांड से बाहर निकाल लिया सिर्फ उनका बड़े सेब जैसा सुपाड़ा ही रह गया थे मेरी गांड के छल्ले के भीतर। मैं मन ही मन छोटे मामू को धन्यवाद दे रही थी, अपनी भांजी की प्यार और आराम से गांड मरने के लिए। फिर छोटे मामू ने जैसे मेरे विचारों को पढ़ लिया। ठीक अपने बड़े भैया जैसे पूरे वज़न से मेरी गांड लंड ठूंस दिया। मुझे लगा जैसे कोई गरम लौहे का खम्बा घुस गया हो मेरी गांड में। मेरी चीख निकली तो निकली पर मेरी आँखें बहने लगीं। दोनों मामा बेददृ से चोदने लगे सुशी बुआ और मेरी गाँडों को। बड़े मामू अपनी बिलबिलाती बहु की गांड का मंथन निर्मम धक्कों से कर रहे थे। छोटे मामू भी अपने बड़े भैया के पदचिन्हों के ऊपर चलते हुए अपनी छोटी बहन की षोडसी बेटी की गांड का मर्दन उसी बेदर्दी से कर रहे थे।
दस पंद्रह मिनटों में बुआ और मैं चीखने बिलबिलाने की जगह सिसकने लगीं। कमरे में हम दोनों की गांड की मोहक सुगंध फ़ैल गयी। दोनों मामाओं के लंड बुआ और मेरी गांड के मक्खन को मैथ रहे थे। हम दोनों की गांड के मक्खन चिकने हो गए उनके लंड तेज़ी से हम दोनों की गांड मरने सक्षम थे। दोनों बहियों में होड़ सी लग गयी की कौन बुआ और मेरी ऊंची सिसकारियां निकलवा सका था। बुआ और मैं तो लगातार झड़ रहीं थीं। घंटे भर बाद दोनों सी मारी और हम दोनों की गांड भर दी अपने गाड़े गर्म वीर्य से।
नेहा का परिवार – Update 169 | Erotic Family Saga

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.